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Delhi Pollution: सर्दियों से पहले प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार अलर्ट, 1 नवंबर से निर्माण-तोड़फोड़ पर रोक

Delhi Pollution : दिल्ली प्रशासन ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक लगाने का फैसला किया है. 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल फैलाने वाले तोड़फोड़ और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी. वहीं, 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक निर्माण और तोड़फोड़ के सभी काम पूरी तरह बंद रहेंगे. यह फैसला सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए लिया गया है. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा, ‘’पीयूसी प्रमाणपत्र के बिना दिल्लीवासियों को ईंधन नहीं मिलेगा. ठंड के मौसम में नियम सख्त होंगे. अक्टूबर में जागरूकता अभियान चलाएंगे. सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सर्वाधिक वायु प्रदूषण और यातायात वाले स्थानों का निरीक्षण करेंगी. मंत्री सर्दियों में प्रदूषण के कारकों पर नजर रखेंगे.’’ ये भी पढ़ें: IMD Weather Alert: बिहार-यूपी से दिल्ली और दक्षिण हिंदुस्तान तक बारिश का दौर, कई राज्यों में आंधी-बिजली की चेतावनी दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, सोमवार (28 सितंबर) को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ रही. शहर का औसत एक्यूआई 56 दर्ज किया गया. 51 से 100 के बीच एक्यूआई को संतोषजनक माना जाता है. वहीं, 0 से 50 तक हवा ‘अच्छी’ और 101 से 200 तक ‘मध्यम’ श्रेणी में होती है. मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को दिल्ली में आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं. दिन का अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है. दिल्ली में सोमवार (28 सितंबर) को सुबह मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.3 डिग्री कम है. The post Delhi Pollution: सर्दियों से पहले प्रदूषण को लेकर दिल्ली प्रशासन अलर्ट, 1 नवंबर से निर्माण-तोड़फोड़ पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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LPU की छात्राओं का आरोप- बिना सहमति यूनिवर्सिटी ने पोस्ट किया वीडियो, अब झेल रहे दुर्व्यवहार

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा से दुष्कर्म के कथित दावे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. विश्वविद्यालय की ओर से रविवार को तीन छात्राओं का एक वीडियो जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने परिसर में दुष्कर्म की किसी घटना से इनकार किया था. अब इन तीनों छात्राओं ने आरोप लगाया है कि वीडियो जारी करने से पहले उनकी सहमति नहीं ली गई थी. छात्राओं का कहना है कि वीडियो सामने आने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. छात्राओं ने सोशल मीडिया पर जारी किया नया वीडियो पीटीआई के अनुसार सोमवार को तीनों छात्राओं ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर विश्वविद्यालय की ओर से जारी किए गए वीडियो पर सवाल उठाए. एक छात्रा ने दावा किया कि उनके बयान को काट-छांटकर इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया. छात्रा के मुताबिक, उन्हें इस बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और वीडियो पोस्ट करने के लिए उनकी सहमति भी नहीं ली गई. वहीं, दूसरी छात्रा ने लोगों से उन्हें इस मामले से दूर रखने की अपील करते हुए कहा कि इस पूरे मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए. क्या है पूरा मामला? मामला शनिवार देर रात करीब एक बजे शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है. प्रदर्शन गर्ल्स हॉस्टल-3 के पास शुरू हुआ और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई. प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर तोड़फोड़ करने और परिसर के बाहर दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग के एक हिस्से को जाम करने का आरोप है. यह विरोध उस दावे के बाद शुरू हुआ था जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय परिसर में एक प्लंबर ने तीन दिन पहले एक छात्रा से कथित तौर पर दुष्कर्म किया था. विश्वविद्यालय ने दुष्कर्म के दावे को बताया अफवाह LPU प्रबंधन ने दुष्कर्म के दावों को खारिज करते हुए इन्हें अफवाह बताया है. विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने रविवार को कहा था कि कुछ असामाजिक तत्व विश्वविद्यालय के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं. छात्रों को शांत कराने के प्रयास के तहत विश्वविद्यालय ने एक मिनट से अधिक लंबा वीडियो जारी किया था. इसमें रजिस्ट्रार के बयान के बाद हॉस्टल के कमरा नंबर 504 में रहने वाली तीन छात्राओं के बयान शामिल थे. छात्राओं ने वीडियो में कहा था कि उनके कमरे में ऐसी कोई घटना नहीं हुई और वे पिछले दो महीने से वहां रह रही हैं. ये भी पढ़ें: अभिजीत दिपके ने दी जेल भरो आंदोलन की चेतावनी, मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को नहीं दी अनुमति वीडियो को लेकर अब नया विवाद विश्वविद्यालय की ओर से जारी वीडियो के एक दिन बाद छात्राओं द्वारा नया वीडियो जारी किए जाने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. छात्राओं ने आरोप लगाया है कि उनके वीडियो को एडिट करके सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और इसके बाद उन्हें ऑनलाइन गालियां और दुर्व्यवहार झेलना पड़ रहा है. वहीं, विश्वविद्यालय ने अपने पहले के बयान में कहा था कि झूठी और मनगढ़ंत बातों के जरिए संस्थान की छवि खराब करने की साजिश की जा रही है. फिलहाल मामले में सामने आए अलग-अलग दावों के बीच पुलिस या संबंधित अधिकारियों की ओर से घटना को लेकर विस्तृत आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार है. The post LPU की छात्राओं का आरोप- बिना सहमति यूनिवर्सिटी ने पोस्ट किया वीडियो, अब झेल रहे दुर्व्यवहार appeared first on Naya Vichar.

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‘बिना भरोसे के कैसा चुनाव?’ मायावती ने चुनाव आयोग को घेरा, VVPAT और SIR को लेकर उठाए सवाल

Mayawati EVM Statement: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश की चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के भरोसे को लेकर सवाल उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की है. 28 सितंबर 2026 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में दिए गए वोट के सही तरीके से दर्ज और गिने जाने का भरोसा होना जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने SIR की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की मांग की. निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाताओं का भरोसा जरूरी मायावती ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके लिए संसद ने Representation of the People Act और Conduct of Election Rules समेत कई नियम बनाए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव तभी निष्पक्ष माने जाएंगे, जब प्रत्येक व्यक्ति को यह भरोसा हो कि उसका वोट उसी व्यक्ति को मिला है, जिसे उसने दिया है. उनके मुताबिक किसी भी तरह का संदेह लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को प्रभावित कर सकता है. EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव की मांग BSP प्रमुख ने कहा कि देश में जब पहला चुनाव हुआ था, तब करीब पांच दशकों तक वोट देने के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता रहा. बाद में सभी नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद चुनाव आयोग ने बैलेट पेपर की जगह EVM का इस्तेमाल शुरू किया. मायावती ने कहा कि अब EVM को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, इसलिए बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जानी चाहिए. कांग्रेस और BJP का जिक्र कर EVM पर उठाए सवाल मायावती ने कहा कि जब कांग्रेस केंद्र में प्रशासन में थी, तब BJP ने EVM को लेकर सवाल उठाए थे और इसे हैक किए जाने की आशंका जताई थी. उन्होंने कहा कि BJP की प्रशासन बनने के बाद भी EVM का इस्तेमाल जारी रहा. मायावती ने आजाद समाज पार्टी के नगीना लोकसभा सांसद का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि BJP ने EVM में धांधली कर उन्हें चुनाव जिताया. उन्होंने यह भी कहा कि देश में दलितों, कमजोर वर्गों और स्त्रीओं के खिलाफ अपराधों के मामले सामने आते रहे हैं और ऐसे में चुनाव को लेकर लोगों का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है. VVPAT और SIR को लेकर भी मायावती की आपत्ति मायावती ने VVPAT को लेकर कहा कि EVM के साथ VVPAT लगाए जाने के बावजूद उनकी आशंका दूर नहीं हुई है, क्योंकि सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं की जाती. उन्होंने कहा कि यदि किसी इलेक्ट्रॉनिक मशीन को दूर से Remote System के जरिए हैक किया जा सकता है, तो वोट को लेकर संदेह पैदा हो सकता है. SIR के संबंध में मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी की इस मुद्दे पर अपनी राय है. उन्होंने मांग की कि EVM से चुनाव तुरंत बंद कर बैलेट पेपर से मतदान कराया जाए और SIR की प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाए, ताकि देश में लोकतंत्र की सही भावना सुरक्षित रह सके. Must Read- बाइक समेत पानी में गिरा PRD जवान, फर्रुखाबाद में सड़क कटने से हुआ हादसा The post ‘बिना भरोसे के कैसा चुनाव?’ मायावती ने चुनाव आयोग को घेरा, VVPAT और SIR को लेकर उठाए सवाल appeared first on Naya Vichar.

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करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक बने अक्षय खन्ना, साउथ मुंबई में ₹33.26 करोड़ का अपार्टमेंट खरीदा

Akshaye Khanna: बॉलीवुड एक्टर अक्षय खन्ना अपने ‘कमबैक एरा’ में चल रहे हैं. ‘धुरंधर’, ‘छावा’, और ‘इक्का’ जैसी फिल्मों में अपनी किलर परफॉरमेंस से उन्होंने साबित कर दिया है कि ‘मेन कैरेक्टर एनर्जी’ किसे कहते हैं. लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक अक्षय ने रियल-एस्टेट में इन्वेस्ट किया है. उन्होंने साउथ मुंबई के सुपर-पॉश मलबार हिल एरिया में 33.26 करोड़ का एक अपार्टमेंट खरीदा है (जिसकी रजिस्ट्री सितंबर 2026 में हुई है. मलबार हिल में अक्षय खन्ना ने खरीदा अपार्टमेंट स्क्वायर यार्ड्स की रिपोर्ट के हिसाब से उनका ये नया घर मलबार हिल रोड के ’30 Little Gibbs’ में है. स्पेस की बात करें तो इसमें 2341.38 sq. ft. का कारपेट एरिया है, साथ में 175.45 sq. ft. की बालकनी है, जो एकदम परफेक्ट एस्थेटिक (aesthetic) वाइब देती है. इस अपार्टमेंट का टोटल बिल्ट-अप एरिया करीब 2,516.84 sq. ft. है. View on Instagram लग्जरी प्रॉपर्टी की इनसाइड डिटेल्स इस लग्जरी प्रॉपर्टी के साथ उन्हें 3 पार्किंग यूनिट्स भी मिली हैं. IGR प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के पेपर्स के मुताबिक, इस डील पर 1.99 करोड़ तो सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी दी गई है. ₹30,000 रजिस्ट्रेशन चार्ज लगा है. जिन्हें नहीं पता मलबार हिल मुंबई के सबसे एलीट और प्रीमियम स्पॉट्स में आता है, जहां हैंगिंग गार्डन्स, कमला नेहरू पार्क, बाणगंगा टैंक और वालकेश्वर मंदिर जैसी आइकॉनिक जगहें बिल्कुल पास हैं. ये भी पढ़ें: ‘पागल हो गया है क्या तू? विलेन क्यों बनूंगा’ रहमान डकैत का रोल मिलते ही भड़क गए थे Akshaye Khanna View on Instagram अक्षय खन्ना के वर्क फ्रंट पर क्या चल रहा है? बैक-टू-बैक हिट्स के बाद अक्षय खन्ना अभी फुल ऑन बिजी मोड में हैं. वो फिलहाल अपनी अपकमिंग तेलुगु फिल्म ‘महाकाली’ की शूटिंग कर रहे हैं, जिसमें वो ‘शुक्राचार्य’ का दमदार रोल प्ले करेंगे. पूजा कोल्लूरू के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म में रोहित सराफ, समुथिरकानी, श्रिया रेड्डी, रजत कपूर और खुशबू सुंदर जैसे स्टार्स भी हैं. रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर’ उनके करियर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिसमें उन्हें रहमान डकैत वाले नेगेटिव रोल में देखा गया था. साथ ही, 2025 में विक्की कौशल की ‘छावा’ में औरंगजेब का डार्क कैरेक्टर प्ले करके उन्होंने लाइमलाइट लूट ली थी. ये भी पढ़ें: सेट तैयार था, 7 दिन पहले अक्षय खन्ना ने छोड़ दी Drishyam 3, डायरेक्टर बोले- ये क्या तरीका हुआ भाई? The post करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक बने अक्षय खन्ना, साउथ मुंबई में ₹33.26 करोड़ का अपार्टमेंट खरीदा appeared first on Naya Vichar.

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LPU Protest: रेप के दावे से शुरू हुआ प्रदर्शन कैसे पहुंचा हिंसा तक? 10 प्वाइंट में समझें पूरा मामला

LPU Protest: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में छात्रों का प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया. यह विवाद एक छात्रा से कथित दुष्कर्म की सोशल मीडिया पर चल रही समाचारों से शुरू हुआ. इसके बाद कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस के साथ झड़प की स्थिति बन गई. प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे भी जाम कर दिया. हालांकि, दुष्कर्म के दावों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. LPU ने इन दावों को झूठा और निराधार बताया है. वहीं, छात्रों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है. कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? पुलिस के अनुसार, छात्राओं के हॉस्टल के पास शनिवार रात से विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ. छात्रों का आरोप था कि गर्ल्स हॉस्टल-3 में रहने वाली एक छात्रा के साथ कुछ दिन पहले एक प्लंबर ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल वार्डन को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. बाद में यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. अफवाहों के बीच अलग-अलग दावे सामने आने लगे. पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है, लेकिन प्राथमिकी में किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाया गया है. तेलंगाना की छात्रा की मौत का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने करीब दो सप्ताह पहले हुई तेलंगाना की एक छात्रा की मौत का मामला भी उठाया. पुलिस के मुताबिक, छात्रा की मौत आत्महत्या के तौर पर सामने आई थी. छात्रों ने इस मौत को लेकर भी सवाल उठाए और किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका जताई. पुलिस ने बताया कि छात्रा के माता-पिता LPU पहुंचे थे और उसका मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. ये भी पढ़ें: LPU में बवाल पर पंजाब DGP बोले- ‘कम से कम बल’ के इस्तेमाल से सुलझाया मामला; हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप मामला बढ़ने के बाद छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे को जाम कर दिया. इससे पंजाब के साथ हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाले यातायात पर भी असर पड़ा. कैंपस में कुछ प्रशासनिक इमारतों और वाहनों में तोड़फोड़ की गई. कुछ वाहनों को आग के हवाले किए जाने की भी जानकारी सामने आई. इसके बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया. जवाब में प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया. कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है. पुलिस ने बनाई SIT जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला के अनुसार, छात्रों की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है. जांच में CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जाएगी. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल किसी व्यक्ति को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है. LPU ने क्या कहा? LPU प्रशासन ने दुष्कर्म के आरोपों को खारिज किया है. यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से झूठी और निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैं. यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि जांच में वह पुलिस का पूरा सहयोग करेगी. प्रशासन की ओर से छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें. 10 दिन के लिए कक्षाएं स्थगित हिंसा के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं. मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं. कई छात्र अपने घर लौटने लगे हैं. सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कैंपस में 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. अधिकारियों के मुताबिक स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है. छात्रों की क्या मांग है? प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हॉस्टल की सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए. छात्रों की मांगों में हॉस्टल स्टाफ में केवल स्त्री कर्मचारियों की तैनाती और मामले की निष्पक्ष जांच जैसी बातें शामिल हैं. छात्रों ने LPU के संस्थापक-कुलपति और राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर उनकी मांगों पर आश्वासन देने की भी मांग की. फिलहाल पुलिस जांच जारी है. दुष्कर्म से जुड़े दावों और तेलंगाना की छात्रा की मौत को लेकर लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. अब हाईवे और कैंपस की स्थिति क्या है? पुलिस के मुताबिक, NH-44 पर यातायात बहाल हो चुका है और स्थिति नियंत्रण में है. सोमवार को स्थिति शांतिपूर्ण रही. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं. मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं. इसके बाद कई छात्र अपने घर लौटते दिखाई दिए. छात्रों की सुरक्षा को लेकर यूनिवर्सिटी ने क्या कहा? LPU ने छात्रों को अपने माता-पिता या अभिभावकों से सलाह लेकर घर जाने की अनुमति दी है. जो छात्र कैंपस में रहेंगे, उन्हें सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल या अपने निवास स्थान पर रहने, अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने और किसी भी प्रदर्शन या हंगामे में शामिल नहीं होने की सलाह दी गई है. रवनीत सिंह बिट्टू ने क्या आरोप लगाए? भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने LPU में हुए प्रदर्शन को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. बिट्टू ने दावा किया कि 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रस्तावित रैली से पहले प्रशासन ने LPU में उपद्रवियों को भेजा और हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की. उन्होंने इसे रैली में व्यवधान डालने की कथित साजिश से जोड़ा. ये भी पढ़ें: LPU Protest: कथित दुष्कर्म के दावे और प्रदर्शन के बीच यूनिवर्सिटी मॉल में लूटपाट? वीडियो वायरल The post LPU Protest: रेप के दावे से शुरू हुआ प्रदर्शन कैसे पहुंचा हिंसा तक? 10 प्वाइंट में समझें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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सुप्रीम कोर्ट ने ECI को दिया निर्देश- टीएमसी के दो गुटों के बीच चुनाव चिह्न के विवाद पर 3 महीने के अंदर फैसला करे आयोग

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) को निर्देश दिया है कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के दो गुटों के बीच पार्टी चुनाव चिह्न विवाद पर विरोधी गुट के जवाब दाखिल करने के तीन महीने के अंदर फैसला करे. ममता बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और AITC नेता ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है, जिसमें उन्होंने आने वाले उपचुनावों के लिए पार्टी के सिंबल को फ्रीज करने के ECI के आदेश को चुनौती दी थी. कमीशन ने विवाद पर अपना आखिरी फैसला आने तक अंतरिम उपाय के तौर पर सिंबल को फ्रीज कर दिया था. सुनवाई के दौरान, ECI ने एक चार्ट सौंपा जिसमें दिखाया गया था कि पहले भी इसी तरह के पार्टी सिंबल विवादों पर फैसला करने में उसे कितना समय लगा था. कमीशन ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब वह इस तरह के विवाद से निपट रहा है और संकेत दिया कि मौजूदा मामले पर भी इसी समय-सीमा में फैसला किया जा सकता है. विरोधी गुट को जवाब दाखिल करने के लिए दिया गया 4 सप्ताह का समय कोर्ट ने कहा कि ममता बनर्जी की तरफ से जवाब पहले ही दाखिल कर दिया गया था, जबकि विरोधी गुट के जवाब का अभी भी इंतजार है. उसने विरोधी गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया और ECI को उसके बाद तीन महीने के अंदर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया है. ये भी पढ़ें: सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर विचार करेगा SC, नोटिस जारी किया The post सुप्रीम कोर्ट ने ECI को दिया निर्देश- टीएमसी के दो गुटों के बीच चुनाव चिह्न के विवाद पर 3 महीने के अंदर फैसला करे आयोग appeared first on Naya Vichar.

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सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर विचार करेगा SC, नोटिस जारी किया

सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर हिंदुस्तान के चर्चित पुलिस एनकाउंटर में से एक है. मामला 2005 में सोहराबुद्दीन शेख की मौत, उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या और 2006 में उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़ा है. इसे अभियोजन पक्ष ने फर्जी एनकाउंटर और कथित आपराधिक साजिश का मामला बताया था. हालांकि, मुकदमे में आरोप साबित नहीं हो सके और सभी 22 आरोपी बरी हो गए. मई 2026 में बंबई हाईकोर्ट ने भी इन्हें बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा. क्या था सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर ? 23 नवंबर 2005 के आसपास सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रहे थे.पीड़ितों का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक लग्जरी बस से उतारकर हिरासत में लिया और गुजरात ले गए. बाद में पुलिस ने यह जानकारी दी कि सोहराबुद्दीन अहमदाबाद के पास एनकाउंटर में मारा गया. अभियोजन का आरोप था कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं यह फर्जी एनकाउंटर था. पीड़ित पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि इसके बाद कौसर बी की भी हत्या कर दी गई और उनके शव को जला दिया गया. बाद में तुलसीराम प्रजापति की मौत दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा के पास पुलिस एनकाउंटर में हुई. हालांकि अभियोजन ने इसे भी साजिश का हिस्सा बताया था. इसी वजह से मामले की सीबीआई जांच हुई थी. सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर की जांच CBI ने की सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर पर अभियोजन के आरोपों के बाद इसकी जांच गुजरात सीआईडी कर रही थी. बाद में सुप्रीम कोर्टने जांच CBI को सौंपने और मुकदमे को गुजरात से मुंबई ट्रांसफर करने का निर्देश दिया. 2013 में सोहराबुद्दीन और तुलसीराम से जुड़े मामलों को भी एक साथ जोड़ दिया गया. CBI ने कुल 38 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. बाद में 22 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई, हालांकि 2018 में सभी आरोपी बरी हो गए. इसकी वजह यह थी कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित नहीं कर सका. बंबई हाईकोर्ट ने क्या कहा? 7 मई 2026 को बंबई हाईकोर्ट ने विशेष CBI अदालत के 2018 के फैसले को बरकरार रखते हुए 22 आरोपियों की बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्यतः परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और उसमें कई कड़ियां टूटी हुई थीं. अदालत ने यह भी कहा कि सोहराबुद्दीन और कौसर बी के कथित अपहरण और अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं थे. हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई नायबुद्दीन शेख ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ये भी पढ़ें: 2,000 रुपये से अधिक UPI भुगतान पर MDR: SC ने पूछा- चार्ज से किसे होगा फायदा? केंद्र-RBI से मांगा जवाब The post सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर : 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर विचार करेगा SC, नोटिस जारी किया appeared first on Naya Vichar.

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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरी कांग्रेस, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की

नवीन शर्मा की रिपोर्ट CEC Resignation Demand: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर झारखंड कांग्रेस ने सोमवार को राजधानी रांची में प्रदर्शन किया. कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं ने पुराना विधानसभा मैदान से झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला. प्रदर्शन में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं और विभिन्न प्रकोष्ठों के कार्यकर्ताओं के अलावा पार्टी के विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए. कांग्रेस ने पहले ही 28 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन और रांची में CEO कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था. CEO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, गेट पर हुई धक्का-मुक्की पैदल मार्च के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यालय के गेट को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गेट से पीछे हटाया. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता गेट के पास ही धरने पर बैठ गए. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया. 26 सितंबर को तीनों चुनाव आयुक्तों की हुई बैठक इसी विवाद के बीच 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक भी हुई. रिपोर्टों में बताया गया है कि यह बैठक उन मुद्दों के बीच हुई, जिन पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले महीनों में आपत्तियां दर्ज की थी. ये भी पढ़ें- झारखंड सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में देश में तीसरे स्थान पर, आंकड़ों ने बढ़ायी चिंता SIR को लेकर पहले भी चुनाव आयोग को ज्ञापन दे चुकी है कांग्रेस झारखंड में कांग्रेस पहले भी SIR को लेकर चुनाव आयोग के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुकी है. 22 सितंबर को पार्टी ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई थी. अब CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर रांची में हुए प्रदर्शन से झारखंड में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही नेतृत्वक बहस और तेज हो गई है. The post CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतरी कांग्रेस, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की appeared first on Naya Vichar.

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H-1B वीजा पर ट्रंप की सख्ती, न्यूयॉर्क अस्पताल के 82 में 80 डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

न्यूयॉर्क के रोचेस्टर जनरल हॉस्पिटल पर H-1B और J-1 वीजा से जुड़े कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की नजर है. सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे के मुताबिक, अस्पताल में नियुक्त 82 रेजिडेंट डॉक्टरों में से 80 विदेशी कर्मचारी थे, जिन्हें H-1B या J-1 वीजा के तहत नियुक्त किया गया. सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुई हलचल मामला तब सामने आया, जब ‘Expose H1B Fraud’ नाम के सोशल मीडिया अकाउंट ने दावा किया कि रोचेस्टर जनरल हॉस्पिटल ने 82 रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति की, जिनमें 80 विदेशी नागरिक थे. पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि अमेरिकी उम्मीदवारों को रेजिडेंसी के लिए कितना अवसर मिला. इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी एस्पोसिटो ने पूछा- आंकड़े दिखाइए अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने 28 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दावे का उल्लेख किया. उन्होंने लिखा, “हमें आंकड़े दिखाइए. कितने रेजिडेंसी स्लॉट एच-1बी और जे-1 वीजा धारकों को मिले? कितने अमेरिकी आवेदकों को उचित मौका मिला?” ट्रंप के कार्यकारी आदेश का भी किया जिक्र डी एस्पोसिटो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश के बाद वीजा से जुड़े कथित दुरुपयोग पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. उन्होंने संकेत दिया कि यदि व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया गया है, तो उनका कार्यालय उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की व्हाइट हाउस फ्रॉड टास्क फोर्स के साथ मिलकर काम कर सकता है. टेक सेक्टर से आगे हेल्थकेयर में भी H-1B की जांच यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा कार्यक्रम की जांच को पारंपरिक टेक्नोलॉजी सेक्टर से आगे बढ़ा रहा है. अब विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े दूसरे क्षेत्रों पर भी प्रशासन की नजर है. 2027 तक बढ़ाई गईं कुछ H-1B पाबंदियां 18 सितंबर को ट्रंप प्रशासन ने कुछ एच-1बी कर्मचारियों से जुड़ी पाबंदियों को एक और साल के लिए बढ़ा दिया. ये प्रतिबंध 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेंगे. नियम के तहत अमेरिका से बाहर मौजूद कुछ एच-1बी कर्मचारियों के प्रवेश के लिए उनकी याचिका के साथ 1 लाख अमेरिकी डॉलर के भुगतान की आवश्यकता है, हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी निर्धारित किए गए हैं. डी एस्पोसिटो बोले- एक साल में बदल सकते है H-1B के रूल एच-1बी वीजा कार्यक्रम को लेकर डी’एस्पोसिटो ने अमेरिकी कमेंटेटर और यूट्यूबर बेनी जॉनसन के साथ एक इंटरव्यू में भी सख्त रुख का संकेत दिया. उन्होंने कहा कि एक साल बाद एच-1बी वीजा कार्यक्रम का स्वरूप “बहुत अलग” हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन कथित विदेशी श्रम धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई के लिए मामला तैयार कर रहा है. डी एस्पोसिटो ने कहा-हम मामला तैयार कर रहे हैं डी एस्पोसिटो ने कहा कि व्हाइट हाउस और प्रशासन का मौजूदा फोकस अमेरिकी जनता के सामने पूरी तस्वीर रखने की दिशा में है. उन्होंने कथित तौर पर कहा, “हम मामला तैयार कर रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई के लिए तैयारी की जा रही है. H-1B नियम तोड़ने पर कार्रवाई के संकेत इंस्पेक्टर जनरल ने कथित विदेशी श्रम धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई के संकेत देते हुए कहा कि प्रशासन के पास कार्रवाई के लिए जरूरी कदम उठाने की तैयारी है. हालांकि, रोचेस्टर जनरल हॉस्पिटल के मामले में 82 में 80 विदेशी डॉक्टरों वाला आंकड़ा फिलहाल सोशल मीडिया पर किए गए दावे के रूप में सामने आया है. क्या है H-1B वीजा? एच-1बी वीजा अमेरिकी कंपनियों और संस्थानों को विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है. हर वित्तीय वर्ष में नए एच-1बी वीजा की सामान्य वार्षिक सीमा 65,000 है. इसके अलावा अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थान से मास्टर डिग्री या उससे अधिक योग्यता रखने वाले लोगों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा की छूट उपलब्ध है. ये भी पढ़ें: होर्मुज खोलने के बदले ईरान ने मांगे अरबों डॉलर के फ्रीज फंड? अमेरिका ने ठुकराया प्रस्ताव, ट्रंप बोले- जल्द जीतेंगे जंग The post H-1B वीजा पर ट्रंप की सख्ती, न्यूयॉर्क अस्पताल के 82 में 80 डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई appeared first on Naya Vichar.

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2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR का मामला: SC ने केंद्र और RBI से मांगा जवाब, रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित यूपीआई व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) लेनदेन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र, हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य पक्षों से जवाब मांगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. हालांकि, अदालत ने MDR लागू करने के केंद्र के फैसले पर फिलहाल किसी तरह की अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया. केंद्र ने कहा- 96 फीसदी UPI यूजर्स दायरे से बाहर केंद्र प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने पीठ को बताया कि UPI पर MDR की नई व्यवस्था से करीब 96 प्रतिशत यूजर्स के लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे. प्रशासन ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित MDR सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा. 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाना है. प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान से जुड़े लेनदेन में मर्चेंट की ओर से भुगतान सेवा से जुड़े पक्षों को दिया जाता है. इस व्यवस्था को लेकर यह सवाल भी उठाया गया है कि इसका असर व्यापारियों और डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर किस तरह पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन और अन्य पक्षों के जवाब के आधार पर अदालत आगे की कार्यवाही पर विचार करेगी. 15 अक्टूबर से लागू हुआ MDR प्रशासन ने करीब छह साल तक पूरी तरह नि:शुल्क रही यूपीआई भुगतान व्यवस्था में बदलाव करते हुए 15 अक्टूबर से व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के कुछ यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया है. हालांकि, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान और छोटे मूल्य के लेनदेन को शुल्क से बाहर रखा गया है. 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. इन क्षेत्रों में तय शुल्क रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदानों जैसे आवश्यक तथा कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का तय MDR लिया जाएगा. वहीं, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर ब्रोकर या डीलर के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा. इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी. P2P भुगतान पर शुल्क नहीं व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई हस्तांतरण पर लेनदेन की राशि चाहे जितनी हो, कोई शुल्क नहीं लगेगा. ऐसे लेनदेन यूपीआई की कुल मात्रा का करीब 37 प्रतिशत और कुल मूल्य का लगभग 70 प्रतिशत हैं. ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा MDR केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले कहा था कि MDR का बोझ UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. उन्होंने कहा था कि यह शुल्क भुगतान सेवा से जुड़े ऑपरेटरों के बीच रहेगा. सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया था कि MDR कोई टैक्स या सेस नहीं है और इससे मिलने वाली राशि हिंदुस्तान की संचित निधि में जमा नहीं होगी. उनके मुताबिक, यह भुगतान प्रणाली को बेहतर बनाने और सेवा उपलब्ध कराने के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच लगाया जाने वाला शुल्क है. The post 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR का मामला: SC ने केंद्र और RBI से मांगा जवाब, रोक से इनकार appeared first on Naya Vichar.

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