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बिहार के स्कूलों में AI, क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्पेशल कमिटी का गठन, पेपर लीक पर गुंडा एक्ट, सम्राट सरकार के 4 फैसले

Samrat Choudhary: पटना में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय चिंतन शिविर में बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिए गए. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि स्कूलों में हर हाल में पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी. परीक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए AI का इस्तेमाल होगा. छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनेगी राज्य स्तरीय समिति पटना के अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का आयोजन किया गया. शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की अध्यक्षता में हुए इस शिविर का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ऐसा विभाग है, जो पूरे समाज को दिशा देता है. प्रशासन का लक्ष्य बिहार के हर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित करना है. इसके लिए राज्य स्तर पर एक विशेष समिति का गठन किया गया है. समिति का काम स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सीखने के स्तर को बेहतर करने के उपाय सुझाना होगा. प्रशासन का लक्ष्य हर स्कूल को उत्कृष्टता का केंद्र बनाना है. परीक्षा व्यवस्था में AI की होगी एंट्री प्रशासन ने परीक्षा प्रणाली में भी बड़े बदलाव की तैयारी की है. परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित की जाएगी. यह समिति बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा स्तर पर होने वाले मूल्यांकन की भी समीक्षा करेगी. छात्रों ने कितना याद किया, सिर्फ इतना ही नहीं देखा जाएगा. उनकी समझ, विश्लेषण क्षमता और विषय पर पकड़ का भी आकलन किया जाएगा. इसके लिए तकनीक और AI का इस्तेमाल करने के सुझाव दिए जाएंगे. छात्रों की समस्याओं के लिए बनेगा अलग पोर्टल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने की घोषणा की है. इस पोर्टल पर विद्यार्थी स्कूल, कॉलेज, परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे. छात्र अपने सुझाव भी सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे. प्रशासन का दावा है कि इसका मकसद छात्रों को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है. खास बात यह होगी कि शिकायत सिर्फ दर्ज करके छोड़ नहीं दी जाएगी. उसके समाधान की निगरानी भी की जाएगी. 30 दिन में समाधान नहीं तो CM स्तर पर लगेगा सहयोग शिविर मुख्यमंत्री ने शिकायतों के समाधान की समयसीमा भी तय करने की बात कही है. अगर किसी छात्र की शिकायत पोर्टल पर दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं होता है, तो उसे मुख्यमंत्री स्तर पर लाया जाएगा. इसके लिए महीने में एक बार अलग सहयोग शिविर आयोजित करने की बात कही गई है. यहां उन मामलों की समीक्षा होगी, जिनका समाधान तय समयसीमा में नहीं हो पाया. इस व्यवस्था से अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोशिश होगी. स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों से बात करेंगे मंत्री और अधिकारी प्रशासन अब शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ दफ्तरों से चलाने के बजाय जमीन पर जाकर समझने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद और संबंधित अधिकारी स्कूल-कॉलेजों में जाएंगे. वहां छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत की जाएगी. युवाओं से मिलने वाले सुझावों और समस्याओं को ऑनलाइन पोर्टल पर भी दर्ज किया जाएगा. इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिलेगी कि स्कूल और कॉलेजों में छात्रों को वास्तव में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. शिक्षा के साथ कौशल और रोजगार पर भी जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के युवाओं को शिक्षा, कौशल और अवसरों से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकता है. प्रशासन का लक्ष्य ऐसी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिससे बिहार के बच्चों को बेहतर पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े. इसके लिए राज्य में 1001 मॉडल स्कूल विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रशासन का कहना है कि इन स्कूलों के जरिए बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की कोशिश की जाएगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पेपर लीक पर प्रशासन का सख्त रुख चिंतन शिविर के दौरान परीक्षा में पेपर लीक का मुद्दा भी उठा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि प्रशासन परीक्षा व्यवस्था को ‘लीकेज प्रूफ’ बनाने पर काम कर रही है. पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई और सजा की व्यवस्था की बात भी कही. मेहनत करने वाले छात्रों के हित में सख्ती मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को होता है. विद्यार्थी महीनों और कई बार वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं. ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठता है और छात्रों का भरोसा टूटता है. प्रशासन अब परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है. चार फैसलों से बदलने की तैयारी प्रशासन के फैसलों को देखें तो शिक्षा व्यवस्था में चार बड़े बदलावों पर फोकस किया गया है. पहला- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य स्तरीय समिति. दूसरा- परीक्षा सुधार के लिए अलग समिति और AI आधारित मूल्यांकन. तीसरा- छात्रों की समस्याओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल और 30 दिन की समयसीमा. चौथा- छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई. Also Read: फुलवरिया की गलियों में साइकिल चलाते दिखे तेज प्रताप, गाय का दूध दुहा और निकाला गन्ने का जूस, पिता लालू को लेकर कही दिल की बात The post बिहार के स्कूलों में AI, क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्पेशल कमिटी का गठन, पेपर लीक पर गुंडा एक्ट, सम्राट प्रशासन के 4 फैसले appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से संयम बरतने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दिए गए आश्वासन पर भरोसा रखने की अपील की है. राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री छात्रों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील हैं और उनके आंदोलन को लेकर चिंतित भी हैं. प्रशासन की ओर से समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है. सबको है मांगों पर आंदोलन करने का अधिकार: राज्यपाल राज्यपाल ने छात्रों से कहा कि उन्हें अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाना अधिक प्रभावी होगा. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को लेकर वह भी गंभीर हैं और जरूरत पड़ने पर छात्र सीधे उनसे मुलाकात कर अपनी बात रख सकते हैं. मुख्यमंत्री के आश्वासन पर भरोसा करें राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आंदोलनरत छात्रों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बातों पर भरोसा रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने छात्रों को न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है. ऐसे में छात्रों को प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन पर विश्वास रखना चाहिए. राज्यपाल के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के मामले को लेकर काफी संवेदनशील हैं. वह पूरे विषय को गंभीरता से देख रहे हैं और समस्या का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार करते हुए संयम बनाए रखें. छात्रों के आंदोलन को लेकर CM चिंतित राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्र आंदोलन को लेकर चिंतित हैं. प्रशासन इस विषय को हल्के में नहीं ले रही है. छात्रों की ओर से उठाई जा रही मांगों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन गंभीरता से विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और आपसी संवाद से निकाला जा सकता है. इसलिए छात्रों को अपनी बात मजबूती से रखने के साथ-साथ बातचीत के रास्ते को भी खुला रखना चाहिए. छात्र उग्र न हों, संयम बनाए रखें राज्यपाल ने आंदोलनरत छात्रों से उग्र नहीं होने की अपील की. उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थिति में ऐसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे समस्या और जटिल हो. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. प्रशासन और प्रशासन उनके मुद्दों को सुन रहे हैं. ऐसे में संयम के साथ आगे बढ़ना ही उचित रास्ता होगा. राज्यपाल के संदेश में संवाद पर विशेष जोर रहा. उन्होंने छात्रों से कहा कि यदि उन्हें लगता है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, तो वे सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर अपनी बात रख सकते हैं. सीधे मुख्यमंत्री से मिलने की सलाह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने छात्रों को सुझाव दिया कि यदि उन्हें प्रशासन की कार्रवाई या बातचीत से संतुष्टि नहीं मिलती है, तो वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात करें. उन्होंने कहा कि अपनी समस्याओं और मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखना समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. राज्यपाल ने कहा कि बातचीत के जरिए कई जटिल समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद बना रहना जरूरी है, ताकि दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात समझ सकें और किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रहें, लेकिन समाधान के लिए बातचीत का रास्ता बंद न करें. ‘मैं छात्रों के साथ हूं’ राज्यपाल ने आंदोलनरत छात्रों को अपने समर्थन और सहयोग का भरोसा भी दिया. उन्होंने कहा कि वह छात्रों की समस्याओं को समझना चाहते हैं और उनके लिए उपलब्ध हैं. छात्र जब चाहें उनसे मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रख सकते हैं. उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी बात सुनी जाएगी. राज्यपाल का यह संदेश आंदोलनरत छात्रों के लिए एक तरह से संवाद का वैकल्पिक रास्ता भी खोलता है. हालांकि, छात्रों की प्रमुख मांगों का समाधान प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर ही निर्भर करेगा. संवाद से समाधान पर राज्यपाल का जोर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के संदेश का मुख्य फोकस छात्रों से संयम बनाए रखने और संवाद के जरिए समस्या का समाधान निकालने पर रहा. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की संवेदनशीलता और छात्रों की समस्याओं के प्रति उनकी चिंता का उल्लेख करते हुए आंदोलनरत युवाओं से भरोसा बनाए रखने को कहा. राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि छात्र अपनी बात रखने के लिए उनके पास भी आ सकते हैं. वहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने का रास्ता भी सुझाया. इसे भी पढ़ें: छात्र आंदोलन पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- हमने चोरों को पकड़ ली है, छात्रों को मिलेगा न्याय राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने छात्रों को दिया न्याय का भरोसा झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों की ओर से छात्रों को न्याय और समाधान का भरोसा दिया गया है. अब छात्रों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी. आश्वासन अपनी जगह है, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए असली सवाल यही रहेगा कि उनकी मांगों पर प्रशासन कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता के साथ ठोस निर्णय लेती है. आखिर लोकतंत्र में संवाद जरूरी है, लेकिन संवाद का अंतिम पड़ाव कार्रवाई ही होता है. इसे भी पढ़ें: World Indigenous Day: जल-जंगल-जमीन के संरक्षण को लेकर छात्रों ने निकाली जागरूकता रैली The post JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये, लगे ‘चोर-चोर’ के नारे, बीजपुर में हंगामा

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी को रविवार को हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा. ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये. उनके खिलाफ लोगों ने ‘चोर-चोर’ के नारे भी लगाये. घटना बीजपुर विधानसभा क्षेत्र के कांचरापाड़ा में हुई. भीड़ ने ममता के काफिले को घेरा ममता बनर्जी एक टीएमसी (TMC) कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं थीं. इसी दौरान उनके काफिले को लोगों ने घेर लिया. प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी पर फटे जूते-चप्पल और कीचड़ फेंका तथा ‘चोर-चोर’ के नारे लगाये. टीएमसी नेता जेनी शर्मा से मिलने पहुंचीं थीं ममता मामला कांचरापाड़ा नगरपालिका के वार्ड नंबर 23 की पूर्व टीएमसी पार्षद जेनी शर्मा केवट के पति बिरजू केवट की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है. रंगदारी समेत कई गंभीर आरोपों में हालीशहर थाने की पुलिस ने बिरजू को गिरफ्तार किया था. कोर्ट ने उसे 5 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा था. शनिवार को लॉकअप में ही उसकी मौत हो गयी. ये भी पढ़ें: सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला, कपड़े फाड़े, जूते-पत्थर और अंडे बरसाये, CID ने भी कसा शिकंजा बिरजू के परिवार को सांत्वना देने गयीं थीं ममता परिजनों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से बिरजू की जान गयी है. इसी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी उसके घर पहुंचीं, तो वहां पहले से मौजूद बीजेपी समर्थकों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. ये भी पढ़ें: ममता बनर्जी ने दिखाये आक्रामक तेवर, कहा- मुझे रोकना है तो मार डालो, गद्दारों के आगे नहीं झुकूंगी बंगाल लंपटों के हाथ में, पुलिस दे रही सुरक्षा : ममता अपनी गाड़ी पर हमले और नारेबाजी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपने गुस्से का इजहार किया. उन्होंने राज्य प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला. ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर पुलिस मंत्री व वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को निशाने पर लिया. सुरक्षा की बात भूल जाइए, पुलिस यहां लंपट और गुंडों को संरक्षण दे रही है. पूरा बंगाल आज गुंडों के हाथों में चला गया है. मेरी गाड़ी पर बड़े-बड़े पत्थर और ईंटें फेंकी गयीं हैं. हम इस पूरे मामले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और केस दर्ज करायेंगे. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी जान-बूझकर इलाके में अशांति फैलाने के लिए गुंडों का इस्तेमाल कर रही है. -ममता बनर्जी, पूर्व मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल ये भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें, अब 1000 करोड़ के जमीन घोटाले का लगा आरोप सांसद कल्याण बनर्जी और डोला सेन को भी झेलना पड़ा विरोध ममता बनर्जी के काफिले में लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और राज्यसभा सांसद डोला सेन भी शामिल थे. बीजेपी कार्यकर्ताओं के उग्र तेवर को देखते हुए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी. पूरे रास्ते पूर्व मुख्यमंत्री की गाड़ी को सुरक्षा घेरे में रखकर बाहर निकालना पड़ा. टीएमसी सांसदों ने भी राज्य प्रशासन की ढिलाई पर भारी नाराजगी जतायी. जनता ने ममता बनर्जी का किया विरोध : भाजपा हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इलाके में तनाव फैलाने और लोगों को उकसाने के लिए गयीं थीं. इसका स्थानीय जनता ने स्वतःस्फूर्त विरोध किया है. The post ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये, लगे ‘चोर-चोर’ के नारे, बीजपुर में हंगामा appeared first on Naya Vichar.

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छात्र आंदोलन पर CM हेमंत सोरेन का बड़ा संदेश- न्याय मिलेगा, दोषियों को कठोर सजा मिलेगी

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट World Indigenous Day: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा संदेश दिया. उन्होंने आंदोलनरत छात्र-छात्राओं को भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी मांगों और अधिकारों को लेकर गंभीर है. मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलेगा और मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में छात्र-छात्राएं अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रशासन उनकी बातों को खुले तौर पर सुन रही है और पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है. उन्होंने छात्रों से भरोसा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन उनके साथ है और उनके अधिकारों के सवाल पर संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है. छात्रों की मांगों पर प्रशासन गंभीर : हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस के साथ राज्य में कई गतिविधियां भी चल रही हैं. इसी बीच छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन आंदोलन कर रहे छात्रों की बातों को सुन रही है और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास कर रही है. सीएम ने मीडिया के माध्यम से आंदोलनरत छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि राज्य प्रशासन सवा तीन करोड़ जनता के प्रति संवेदनशील है. प्रशासन की चिंता केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़े-लिखे, अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोगों, स्त्रीओं, पुरुषों और बच्चों समेत समाज के सभी वर्गों के हितों को लेकर है. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारों और मांगों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, प्रशासन उन मामलों को गंभीरता से देख रही है. मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रशासन की ओर से मामले में दिखाई गई गंभीरता के कारण ही छात्रों को अपनी बात रखने और आंदोलन करने का अवसर मिला है. ‘हम लोगों ने चोरी पकड़ ली है’ छात्र आंदोलन और परीक्षा से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा, “हम लोगों ने चोरी पकड़ ली है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलनरत छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों को न्याय मिलेगा और दोषियों को कठोर से कठोर सजा दी जाएगी. सीएम ने छात्रों से विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन उनके साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है. मुख्यमंत्री ने अपने भावनात्मक अंदाज में कहा कि वह इसी मिट्टी में जन्मे हैं और इसी मिट्टी में दफन भी होंगे. उनके इस बयान को राज्य और यहां के युवाओं के साथ उनके जुड़ाव के संदेश के तौर पर देखा गया. विपक्ष को नेतृत्वक रंग नहीं देने की चेतावनी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्र आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को नेतृत्वक रंग देने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी नेतृत्वक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास कर सकते हैं. सीएम ने कहा कि छात्रों को किसी नेतृत्वक छत्रछाया या संरक्षण की जरूरत नहीं है. छात्र अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने में सक्षम हैं और उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि छात्र अपने मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और प्रशासन उनकी बात सुन रही है. ऐसे में किसी नेतृत्वक दल या व्यक्ति को छात्रों को अपने नेतृत्वक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ‘देशभर में युवाओं पर नेतृत्वक दलों की नजर’ मुख्यमंत्री ने कहा कि देशभर में युवाओं पर नेतृत्वक दलों की नजर है. उन्होंने आरोप लगाया कि नौजवानों को झूठ-सच बताकर दिग्भ्रमित करने और उन्हें प्रशासन के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आंदोलनरत छात्रों से कहा कि उन्हें किसी के संरक्षण की आवश्यकता नहीं है. वे स्वयं अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकते हैं. प्रशासन उनकी बातों को सुन रही है और उनके अधिकारों तथा न्याय के सवाल पर गंभीरता से काम कर रही है. मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों और कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं. छात्र संगठनों की ओर से पारदर्शिता, जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई समेत कई मांगें उठाई जा रही हैं. आंदोलन को लेकर नेतृत्वक दल भी अपनी-अपनी भूमिका और समर्थन का दावा कर रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री का नेतृत्वक दलों को आंदोलन से दूर रहने का संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है. छात्रों को कार्रवाई का भरोसा मुख्यमंत्री के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन रहा. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि छात्रों को न्याय मिलेगा और दोषियों को कठोर से कठोर सजा दी जाएगी. छात्र आंदोलन के दौरान लगातार यह मांग उठती रही है कि यदि परीक्षाओं में किसी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. मुख्यमंत्री ने अपने बयान में प्रशासन की ओर से मामले को गंभीरता से लिए जाने की बात कही. हालांकि, छात्रों की ओर से उठाई जा रही मांगों के समाधान और आगे की कार्रवाई को लेकर प्रशासन की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा. फिलहाल मुख्यमंत्री के बयान से प्रशासन की ओर से आंदोलनरत छात्रों को नेतृत्वक रूप से शांत करने और भरोसा दिलाने की कोशिश साफ दिखाई देती है. मोरहाबादी में दिखी झारखंड की जनजातीय संस्कृति विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है. 9 और 10 अगस्त को आयोजित इस महोत्सव में झारखंड की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति, परंपराओं और विविधता को प्रदर्शित किया जा रहा है. महोत्सव में राज्य की विभिन्न जनजातीय समुदायों की कला, संगीत, नृत्य, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है. कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति

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9 अगस्त की भारत की वो डील, जिसकी बदौलत अमेरिका को पटका और बदल दिया दुनिया का नक्शा

9 अगस्त 1971 को हिंदुस्तान और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हुई एक ऐतिहासिक संधि का असर केवल हिंदुस्तान-सोवियत रिश्तों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस दौर के दक्षिण एशियाई और वैश्विक रणनीतिक समीकरणों पर पड़ा. अमेरिका, पाकिस्तान और चीन के करीब आने से हिंदुस्तान की चिंता और चुनौती दोनों बढ़ती जा रही थी. दक्षिण एशिया में नेतृत्वक और सैन्य तनाव को अब टाला नहीं जा सकता था. पाकिस्तान के अमेरिका और चीन के साथ संबंध मजबूत हो रहे थे और हिंदुस्तान को आशंका थी कि क्षेत्रीय परिस्थितियां उसके खिलाफ जा सकती हैं. इसी दौरान पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में नेतृत्वक संकट और हिंसा बढ़ रही थी. लाखों लोग हिंदुस्तान की ओर पलायन कर रहे थे. ऐसे समय में हिंदुस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत रणनीतिक साझेदार की जरूरत महसूस हो रही थी. 9 अगस्त 1971 को हुआ ऐतिहासिक समझौता इसी पृष्ठभूमि में तत्कालीन सोवियत विदेश मंत्री आंद्रेई ग्रोमिको हिंदुस्तान पहुंचे. 9 अगस्त 1971 को उन्होंने हिंदुस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह के साथ हिंदुस्तान-सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते ने दोनों देशों के बीच नेतृत्वक और रणनीतिक विश्वास को नई मजबूती दी. हालांकि यह औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं था, लेकिन बदलते वैश्विक हालात में इसने हिंदुस्तान को महत्वपूर्ण कूटनीतिक और रणनीतिक समर्थन दिया. बांग्लादेश युद्ध से पहले बनी रणनीतिक जमीन इस संधि के कुछ ही महीनों बाद दक्षिण एशिया की तस्वीर ही बदल गई. संधि पर हस्ताक्षर के कुछ ही महीनों बाद दिसंबर 1971 में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ. इस युद्ध के परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ. उस समय हिंदुस्तान को सोवियत संघ से मिला नेतृत्वक और रणनीतिक समर्थन बेहद महत्वपूर्ण माना गया. खासकर तब, जब अमेरिका और चीन पाकिस्तान के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे थे. यही वजह है कि 9 अगस्त 1971 की संधि को हिंदुस्तान की विदेश नीति और दक्षिण एशिया के रणनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है. इसी संधि ने दुनिया का नक्शा नए तरीके से बनाने में अपना अहम रोल अदा किया. अमेरिका का पाकिस्तान को समर्थन 1971 के युद्ध के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया. राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर पाकिस्तान के राष्ट्रपति याह्या खान के साथ करीबी संबंध रखते थे. अमेरिका पाकिस्तान के साथ तो खड़ा था ही, किसिंजर ने जुलाई 1971 में गुप्त रूप से चीन की यात्रा भी की थी. निक्सन और किसिंजर ने हिंदुस्तान पर युद्ध रोकने का कूटनीतिक दबाव बनाया. युद्ध के अंतिम चरण में अमेरिका ने यूएसएस एंटरप्राइज के नेतृत्व में अपना नौसैनिक बेड़ा बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा. इसका मकसद हिंदुस्तान को दबाव में लाना और पाकिस्तान को यह संकेत देना था कि अमेरिका उसके साथ खड़ा है. अमेरिका ने प्रचारित किया कि उसका मकसद संघर्ष वाले इलाके से अमेरिकी नागरिकों को बाहर निकालना है, जबकि वह एक दिन पहले ही अपने लोगों को बाहर निकाल चुका था. हालांकि अमेरिकी बेड़े ने हिंदुस्तान के खिलाफ कोई सीधा सैन्य हमला नहीं किया. ये भी पढ़ें: चीन के खिलाफ अमेरिका का नया प्लान, तैयार कर रहा ऐसी 19 खतरनाक मिसाइल पनडुब्बियां सोवियत संघ ने कैसे दिया जवाब? इसी परिप्रेक्ष्य में हिंदुस्तान के साथ 9 अगस्त 1971 की संधि के बाद सोवियत संघ हिंदुस्तान के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक सहारा बन गया. जब अमेरिकी नौसैनिक ताकत बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ी, तब सोवियत नौसेना ने भी हिंद महासागर क्षेत्र में एक विध्वंसक जहाज और माइनस्वीपर के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई. इससे अमेरिका के लिए सीधे हस्तक्षेप का जोखिम बढ़ गया. इसके साथ ही सोवियत संघ ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदुस्तान का समर्थन किया और हिंदुस्तान पर युद्ध रोकने के दबाव का विरोध किया. इस तरह सोवियत संघ ने अमेरिका के कदम का सीधा युद्ध किए बिना कूटनीतिक, रणनीतिक और नौसैनिक संतुलन के जरिए जवाब दिया. अंततः हिंदुस्तानीय सेना ने पूर्वी मोर्चे पर निर्णायक जीत हासिल की और 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया. सोवियत संघ के बाद भी कायम रहा रिश्ता हिंदुस्तान-सोवियत संधि 20 वर्षों के लिए की गई थी. सोवियत संघ के विघटन के बाद भी हिंदुस्तान ने नए रूस के साथ अपने संबंधों को नए आधार पर आगे बढ़ाया. दोनों देशों ने 2000 में स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप की शुरुआत की. इसके बाद रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ता गया. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान में अवैध रास्ते से घुसे बांग्लादेशी तस्कर, BSF ने मारी गोली; एक की मौत 2026 में फिर चर्चा में हिंदुस्तान-रूस सैन्य सहयोग हिंदुस्तान और रूस के रक्षा संबंधों में अब एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है. दोनों देशों के बीच RELOS (रेसीप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिटिक्स सपोर्ट) समझौता जनवरी 2026 से पूरी तरह लागू हो चुका है. इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है. इनमें सैन्य अड्डे, बंदरगाह और एयरफील्ड जैसी सुविधाएं शामिल हैं. हजारों किलोमीटर दूर सेनाओं के लिए लॉजिस्टिक सहयोग RELOS का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हिंदुस्तान और रूस जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं. इससे लंबी दूरी के सैन्य अभियानों के दौरान ईंधन, मरम्मत, रखरखाव और अन्य लॉजिस्टिक जरूरतों को पूरा करना आसान हो सकता है. हिंदुस्तान के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि रूसी नौसेना और वायुसेना की मौजूदगी हिंदुस्तान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों से लेकर आर्कटिक और यूरेशियाई क्षेत्र तक रहती है. इसी तरह रूस को भी हिंदुस्तान की रणनीतिक स्थिति से लाभ मिल सकता है. ये भी पढ़ें: पाकिस्तान में पेट्रोल पर भारी टैक्स के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा, कहा- तुम और IMF भाड़ में जाओ The post 9 अगस्त की हिंदुस्तान की वो डील, जिसकी बदौलत अमेरिका को पटका और बदल दिया दुनिया का नक्शा appeared first on Naya Vichar.

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सैलरी बढ़ेगी या फिर करना होगा इंतजार? 8th Pay Commission की बैठक में इन मांगों पर जोर

8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें इस समय दिल्ली की बैठकों पर टिकी हैं. आयोग ने 7 अगस्त से नई दिल्ली में कर्मचारी संगठनों और दूसरे हितधारकों के साथ बातचीत शुरू की है. यह सिलसिला 10 अगस्त तक चलेगा. यानी आज 9 अगस्त को बैठकें जारी हैं और कल दिल्ली चरण का अगला अहम दिन होगा. इन बैठकों में कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन अपनी मांगें और सुझाव आयोग के सामने रख रहे हैं. खास तौर पर बेसिक पे, महंगाई से जुड़ी राहत, फिटमेंट फैक्टर, HRA और रिटायरमेंट बेनिफिट्स जैसे मुद्दों पर प्रतिनिधियों की नजर है. दिल्ली में अभी क्या हो रहा है? 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं. आयोग में प्रो. पुलक घोष पार्ट-टाइम सदस्य और पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं. दिल्ली की मौजूदा बैठकों के लिए आयोग ने कोई अलग से विस्तृत एजेंडा जारी नहीं किया है. ऐसे में कर्मचारी संगठनों की ओर से जमा किए गए मेमोरेंडम और प्रतिनिधित्व में उठाए गए मुद्दे चर्चा का आधार बन रहे हैं. सीधे शब्दों में समझें तो कर्मचारी संगठन यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि नई वेतन व्यवस्था में उनकी सैलरी, भत्तों और रिटायरमेंट से जुड़े लाभों में किस तरह बदलाव होना चाहिए. किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा नजर है? कर्मचारियों की मांगों में कई वित्तीय मुद्दे शामिल हैं. इनमें प्रमुख तौर पर ये बातें सामने आ रही हैं: बेसिक सैलरी में संशोधन. Fitment Factor में बदलाव की मांग. महंगाई को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना में बदलाव. HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस में संशोधन. ग्रेच्युटी की सीमा में बदलाव. पेंशन और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट्स की समीक्षा. हालांकि, इन मांगों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. आयोग अलग-अलग संगठनों से मिले सुझावों और मेमोरेंडम की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. दिल्ली के बाद कहां-कहां होगी बैठक? 8th Pay Commission की कवायद सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है. आयोग ने आगे कई शहरों में क्षेत्रीय बातचीत का कार्यक्रम रखा है. जगह प्रस्तावित तारीख जयपुर 31 अगस्त-1 सितंबर चेन्नई 7-8 सितंबर पुडुचेरी 9 सितंबर चंडीगढ़ 16-18 सितंबर जयपुर की बैठक के लिए राजस्थान में रजिस्टर्ड केंद्रीय प्रशासन और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी संगठन 18 अगस्त तक बैठक के लिए अनुरोध कर सकते हैं, बशर्ते उन्होंने पहले से अपना मेमोरेंडम जमा किया हो और आयोग से पहले मुलाकात न की हो. चेन्नई और पुडुचेरी की बैठकों के लिए भी 18 अगस्त तक अनुरोध की समयसीमा बताई गई है. आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर इन दोनों दौरों की जानकारी जारी की गई है. रिपोर्ट कब तक आने की उम्मीद है? 8th Pay Commission का गठन नवंबर 2025 में किया गया था और इसे अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास आने की उम्मीद है. इसका मतलब यह है कि फिलहाल कर्मचारी जो मांगें उठा रहे हैं, उन पर तुरंत वेतन बढ़ने का फैसला नहीं होगा. अभी आयोग का फोकस अलग-अलग कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और दूसरे हितधारकों की बात सुनकर उनकी मांगों को समझने और सिफारिश तैयार करने पर है. कर्मचारियों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि दिल्ली की बातचीत जारी है और 10 अगस्त के बाद आयोग का क्षेत्रीय कंसल्टेशन आगे बढ़ेगा. अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और उस पर प्रशासन के निर्णय के बाद ही होगा. ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अहम मौका, 31 अगस्त और 1 सितंबर को जयपुर में होगी बैठक The post सैलरी बढ़ेगी या फिर करना होगा इंतजार? 8th Pay Commission की बैठक में इन मांगों पर जोर appeared first on Naya Vichar.

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सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं… चोटिल खिलाड़ियों पर उठे सवालों पर बोले वीवीएस लक्ष्मण

VVS Laxman: हिंदुस्तानीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की लगातार चोटों के बीच BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने चोटों के प्रबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है. लक्ष्मण ने साफ किया कि बेंगलुरु स्थित CoE की भूमिका सिर्फ चोटिल खिलाड़ियों को फिट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और चोटों की रोकथाम के लिए बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करना भी इसकी अहम जिम्मेदारी है. चोट लगना स्पोर्ट्स का हिस्सा बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लक्ष्मण ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के करियर में चोट लगना स्पोर्ट्स का हिस्सा है. ऐसे में चोट लगने पर किसी व्यक्ति या विभाग को जिम्मेदार ठहराने के बजाय निगरानी और प्रबंधन की प्रक्रिया को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. लक्ष्मण ने कहा, ‘सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं है. BCCI ने इसे इससे कहीं बड़ी जिम्मेदारी और भूमिका दी है. चोटें किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा हैं, इसलिए मॉनिटरिंग सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण है.’ इंजरी मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा सीओई के चोट प्रबंधन कार्यक्रम को लेकर उठ रहे सवालों के बीच BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने संडे को लक्ष्मण से मुलाकात कर रिहैब और इंजरी मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा की. बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. 5 उम्मीदवारों को किया गया था शॉर्टलिस्ट लक्ष्मण ने सीओई में हेड ऑफ स्पोटर्स साइंस एंड मेडिसिन (SSM) का पद खाली होने पर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि BCCI ने इस पद के लिए पांच उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया था, लेकिन कई उम्मीदवारों के पीछे हटने के कारण नियुक्ति नहीं हो सकी. Also Read: हैमस्ट्रिंग चोट के कारण द हंड्रेड लीग से बाहर हुईं जेमिमा रोड्रिग्स, एशिया कप से पहले बढ़ी टीम इंडिया की टेंशन कार्यशैली को समझना जरूरी उनके मुताबिक इस पद के लिए सिर्फ अनुभव और प्रतिष्ठा ही काफी नहीं है, बल्कि हिंदुस्तानीय क्रिकेटरों की जरूरतों और उनकी कार्यशैली को समझना भी जरूरी है. फिलहाल Head of SSM की अनुपस्थिति में सीओई के अलग-अलग वर्टिकल के प्रमुख अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं. रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे कई प्लेयर्स चोटो के कारण फील्ड से बाहर रहने वाले क्रिकेटर्स की बात करें तो जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी सीओई में रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे हैं और श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से बाहर हो चुके हैं. वहीं हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती और प्रिंस यादव जैसे व्हाइट-बॉल विशेषज्ञों की फिटनेस पर भी सीओई काम कर रहा है. Also Read: बसंत मेघवाल ने हाई जंप में जीता सिल्वर, U20 चैंपियनशिप में देश को मिला दूसरा पदक The post सीओई सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं… चोटिल खिलाड़ियों पर उठे सवालों पर बोले वीवीएस लक्ष्मण appeared first on Naya Vichar.

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बुलडोजर एक्शन के खिलाफ पटना सिटी में सड़क पर उतरे लोग, 290 मकानों को नोटिस जारी होने पर बोले-जिसको हमलोग जिताते हैं आज वही गर्दन काट दिया

Patna Bulldozer Action : पटना सिटी के खाजेकला घाट और कंगन घाट के पास बसे करीब 290 मकानों और दुकानों पर अब बुलडोजर चलने का खतरा मंडरा रहा है. अंचल अधिकारियों की ओर से इन घरों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, जिसके बाद इलाके में माहौल गरमा गया है. प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं और जमकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं, ऐसे में अचानक नोटिस देकर उन्हें बेघर करने की तैयारी की जा रही है. Patna News : प्रशासन की तैयारी, नोटिस के बाद बढ़ी हलचल प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि इन मकानों और दुकानों को हटाया जाएगा. करीब 290 निर्माणों को चिह्नित किया गया है, जिन पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है. नोटिस मिलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है. लोग अपने कागजात जुटाने में लगे हैं, जबकि कई परिवार डर और अनिश्चितता के बीच जी रहे हैं. पहले भी चला था अतिक्रमण हटाने का अभियान दरअसल, यह मामला नया नहीं है. गंगा किनारे भद्रघाट से लेकर कंगन घाट तक की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की योजना पहले से चल रही है. जिला प्रशासन ने इससे पहले भी इस इलाके में कार्रवाई की थी, जिसमें कई कच्चे और कुछ पक्के निर्माण हटाए गए थे. उस समय पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह अभियान तेज हुआ था. यह भी पढ़े—रोहतास चंदेश्वर हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव, तस्वीरों में देखिए पूरी कहानी हालांकि, कुछ लोगों ने इस कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद तोड़फोड़ की प्रक्रिया पर रोक लग गई थी. लेकिन अब एक बार फिर यह मामला तेजी से आगे बढ़ा है. 5 अगस्त को सुनवाई, दस्तावेज दिखाने का मौका जानकारी के अनुसार प्रशासन ने सभी प्रभावित लोगों को सुनवाई का मौका दिया था. अंचलाधिकारी की ओर से 5 अगस्त को सुबह 11 बजे से सुनवाई तय की गई. जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें अपने जमीन से जुड़े सभी कागजात पेश करने होंगे. सुनवाई के बाद ही आगे की कार्रवाई तय करने की बात कही गई थी. 54 बाउंड्रीवाल पर भी प्रशासन की नजर प्रशासन के अनुसार इस इलाके में 54 बाउंड्रीवाल भी बनाई गई हैं. हालांकि, इन्हें बनाने वालों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है. ऐसे लोगों के लिए आम सूचना जारी की गई. उनसे भी सुनवाई के दिन उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई प्रक्रिया जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद प्रशासन ने इस दिशा में फिर से कदम बढ़ाया है. बिहार सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अधिनियम 1956 के तहत कार्रवाई की जा रही है. सुनवाई पूरी होने के बाद जिन निर्माणों को अवैध पाया जाएगा, उन पर बुलडोजर चलाया जा सकता है. फिलहाल पटना सिटी का यह इलाका तनावपूर्ण स्थिति में है. एक तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई की तैयारी में है, तो दूसरी ओर लोग अपने आशियाने को बचाने के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं. आने वाले दिनों में यह मामला और भी गर्माने की संभावना है. Also Read:पटना: MLA बनने के बाद इस आवास में रहेंगे प्रशांत किशोर, जानिए किसके बने पड़ोसी The post बुलडोजर एक्शन के खिलाफ पटना सिटी में सड़क पर उतरे लोग, 290 मकानों को नोटिस जारी होने पर बोले-जिसको हमलोग जिताते हैं आज वही गर्दन काट दिया appeared first on Naya Vichar.

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पुणे के बारामती एयरफिल्ड पर ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश: प्रशिक्षण के दौरान रनवे से फिसला, 8 महीने में तीसरा हादसा

Baramati trainee aircraft crash: महाराष्ट्र के बारामती एयरफील्ड पर प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान एक विमान रनवे से आगे निकलकर निर्धारित सतह से बाहर चला गया. पुणे ग्रामीण के एसपी संदीप सिंह गिल ने बताया कि घटना में विमान VT-SEX शामिल था. विमान में कैप्टन चिराग शशिकांत दोइफोडे और कैडेट अभिजीत जुंद्रे सवार थे. दोनों सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. दो बार किया गया रिजेक्टेड टेक-ऑफ पुलिस के मुताबिक, विमान ने पहले लिंक ब्रावो के जरिए रनवे में प्रवेश किया और रनवे-29 के थ्रेशहोल्ड पर टेक-ऑफ के लिए लाइन-अप किया. इसके बाद रिजेक्टेड टेक-ऑफ यानी टेक-ऑफ प्रक्रिया को रोकने का अभ्यास किया गया. इसके बाद विमान को रनवे-11 के थ्रेशहोल्ड पर ले जाकर एक और रिजेक्टेड टेक-ऑफ कराया गया. इसी अभ्यास के दौरान विमान रनवे पर पूरी तरह रुक नहीं सका और रनवे-29 के थ्रेशहोल्ड से आगे निकल गया. रनवे की पक्की सतह से बाहर निकला विमान पुलिस के अनुसार, रनवे-29 के थ्रेशहोल्ड से आगे बढ़ने के बाद विमान विस्तारित पक्की सतह से दाईं ओर निकल गया. घटना के बाद मौके पर संबंधित अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया. फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. 8 महीने में तीसरी बार बारामती में विमान हादसा बारामती में करीब आठ महीने के भीतर यह तीसरा विमान हादसा है. इसी साल जनवरी में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समेत पांच लोगों की बारामती हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी. इसके बाद 13 मई को एक निजी कंपनी का प्रशिक्षण विमान भी बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. हालांकि, उस हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं आई थी. Also read : हिंदुस्तान में अवैध रास्ते से घुसे बांग्लादेशी तस्कर, BSF ने मारी गोली; एक की मौत The post पुणे के बारामती एयरफिल्ड पर ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश: प्रशिक्षण के दौरान रनवे से फिसला, 8 महीने में तीसरा हादसा appeared first on Naya Vichar.

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Toxic Trailer Review: कहानी कम, सनसनी ज्यादा! यश की फिल्म ने ट्रेलर में ही छेड़ दी ‘टॉक्सिक’ बहस

अगर आप यश के फैन हैं तो मेरा यह रिव्यू शायद आपको गुस्सा दिला सकता है. ‘टॉक्सिक’ का ट्रेलर देखते हुए मुझे यश का स्टारडम, स्वैग और एक्शन तो जबरदस्त लगा, लेकिन करीब चार मिनट बाद एक सवाल लगातार मन में रहा—क्या कहानी से ज्यादा यहां हिंसा, सेक्सुअल इमेजरी और शॉक वैल्यू बेचने की कोशिश हो रही है? और कहीं-कहीं इसे देखते हुए मुझे रणबीर कपूर की ‘Animal’ को लेकर हुई बहस भी याद आई. यश का स्टारडम जबरदस्त, लेकिन कहानी कहां है? ‘केजीएफ’ के बाद यश सिर्फ अभिनेता नहीं, एक ब्रांड बन चुके हैं. ‘टॉक्सिक’ के ट्रेलर में भी उनका हर लुक, हर एक्शन और हर एटीट्यूड उसी स्टारडम को भुनाता नजर आता है. स्क्रीन पर यश आते हैं तो नजरें टिक जाती हैं. मुझे उनका यह अंदाज पसंद आया, लेकिन ट्रेलर खत्म होने के बाद मेरे दिमाग में सबसे बड़ा सवाल यही था—आखिर कहानी क्या है? करीब चार मिनट के ट्रेलर में अपराध, हिंसा, ग्लैमर, रिश्ते और रहस्यमयी किरदारों की भरमार है. विजुअल्स बड़े हैं और एक्शन भी दमदार है, लेकिन इन सबको जोड़ने वाली कहानी की झलक बहुत कम मिलती है. ट्रेलर उत्सुकता जरूर पैदा करता है, लेकिन मेरे लिए एक्साइटमेंट के साथ कन्फ्यूजन भी छोड़ जाता है. क्या ‘टॉक्सिक’ जानबूझकर भड़का रही है? यहीं से बात ‘रेजबेट’ मार्केटिंग तक पहुंचती है. रेजबेट यानी ऐसा कंटेंट जो दर्शकों को जानबूझकर चौंकाए, नाराज करे या असहज करे, ताकि लोग उसके बारे में सोशल मीडिया पर बात करें. ‘टॉक्सिक’ के प्रमोशनल विजुअल्स को देखते हुए मुझे लगता है कि मेकर्स विवाद से बचने की कोशिश नहीं कर रहे. हिंसा, सेक्सुअल इमेजरी और शॉकिंग विजुअल्स ट्रेलर में खूब हैं. इसका फायदा यह है कि फिल्म पर चर्चा होगी. लोग तारीफ करेंगे तो भी चर्चा, आलोचना करेंगे तो भी चर्चा. लेकिन सवाल यह है कि क्या विवाद टिकट बेच सकता है? शुरुआत जरूर दिला सकता है, लेकिन फिल्म को टिकाने के लिए कहानी चाहिए. ‘Animal’ की याद क्यों आई? यहां रणबीर कपूर की ‘Animal’ का जिक्र जरूरी है. दोनों फिल्मों की कहानी या किरदार एक जैसे नहीं हैं, लेकिन दोनों को देखते हुए एक समान बहस सामने आती है—क्या आक्रामक और हिंसक पुरुष किरदार को ‘कूल’ दिखाना आज के सिनेमा में एक मार्केटिंग टूल बन चुका है? ‘Animal’ ने अपनी हिंसा, जहरीली मर्दानगी और स्त्रीओं के चित्रण को लेकर जबरदस्त बहस छेड़ी थी. फिल्म के पक्ष और विपक्ष में जितनी चर्चा हुई, उतनी ही उसकी पॉपुलैरिटी बढ़ी. ‘टॉक्सिक’ भी कुछ ऐसे ही विवाद की जमीन तैयार करती दिख रही है. फर्क इतना है कि यहां कहानी को छिपाकर विजुअल्स और शॉक वैल्यू को ज्यादा आगे रखा गया है. स्त्री किरदारों पर भी सवाल ट्रेलर में कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, रुक्मिणी वसंत और तारा सुतारिया नजर आती हैं. कियारा का किरदार ग्लैमरस और बोल्ड है, जबकि नयनतारा कहानी में अहम भूमिका में दिखती हैं. लेकिन ट्रेलर देखकर मेरे मन में सवाल आया—क्या ये स्त्री किरदार अपनी स्वतंत्र पहचान रखते हैं या फिर यश की दुनिया को और आकर्षक बनाने का जरिया हैं? इसका जवाब फिल्म देखने के बाद ही मिलेगा. हालांकि, ‘Animal’ के बाद दर्शक इस तरह के चित्रण को लेकर पहले से ज्यादा सवाल पूछते हैं. यश की सबसे बड़ी ताकत, सबसे बड़ा रिस्क यश की स्क्रीन प्रेजेंस ‘टॉक्सिक’ की सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन यही सबसे बड़ा रिस्क भी है. ‘केजीएफ’ के बाद दर्शक उनसे सिर्फ स्वैग और एक्शन नहीं, एक नई कहानी की उम्मीद करते हैं. ट्रेलर में यश को देखकर रॉकी भाई की याद आना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार उन्हें उस छवि से आगे निकलना होगा. सच कहूं तो ट्रेलर ने मुझे फिल्म के लिए उत्साहित किया है, लेकिन पूरी तरह आश्वस्त नहीं. यश शानदार हैं, विजुअल्स बड़े हैं, एक्शन दमदार है और विवाद के लिए मसाला भी मौजूद है. लेकिन कहानी अभी भी पर्दे के पीछे है. मेरे लिए ‘टॉक्सिक’ का सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ यश के स्टारडम, हिंसा और शॉक वैल्यू पर टिकी फिल्म है या इन सबके पीछे एक ऐसी कहानी भी है, जो सिनेमाघर से बाहर निकलने के बाद याद रहेगी? The post Toxic Trailer Review: कहानी कम, सनसनी ज्यादा! यश की फिल्म ने ट्रेलर में ही छेड़ दी ‘टॉक्सिक’ बहस appeared first on Naya Vichar.

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