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बंगाल में ठप पड़ी 17 रेल परियोजनाओं पर शुरू होगा काम, जानें क्यों अटके थे प्रोजेक्ट

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों से अधर में लटकी 17 रेल परियोजनाओं को रेल मंत्रालय की मंजूरी मिल गयी है. संसद के उच्च सदन राज्यसभा में केंद्र प्रशासन ने क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए इन नयी रेल लाइन परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने (दोबारा शुरू करने) का निर्णय लिया है. राज्यसभा में सांसद विश्वजीत सिन्हा (राहुल सिन्हा) द्वारा पूछे गये अतारांकित प्रश्न संख्या 2364 के लिखित उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. क्यों अटकी थीं परियोजनाएं? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि इनमें से कई परियोजनाएं अलग से या पहले से चल रही योजनाओं के हिस्से के रूप में स्वीकृत की गयीं थीं. हालांकि, तत्कालीन राज्य प्रशासन द्वारा भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) में सहयोग नहीं मिलने और कानून-व्यवस्था (Law & Order) की समस्याओं के कारण इन प्रोजेक्ट्स पर काम आगे नहीं बढ़ सका था. इन्हें बीच में ही रोकना पड़ा था. अब आम जनता की आवश्यकताओं और लगातार उठ रही मांगों को देखते हुए रेल मंत्रालय ने इन परियोजनाओं पर फिर से काम शुरू करने का फैसला किया है. ये भी पढ़ें: मोदी प्रशासन ने बंगाल को दी 83433 करोड़ की परियोजनाएं, शमिक भट्टाचार्य को अश्विनी वैष्णव का जवाब दोबारा शुरू होने वाली 17 नयी रेल लाइन परियोजनाओं लिस्ट प्रांतिक – सूरी Prantik – Siuri 34 किमी नयी रेल लाइन बनगांव – पोरामहेशतला Bangaon – Poramahesthala 20 किमी नयी रेल लाइन बनगांव – चांदबाजार Bangaon – Chandbazar 12 किमी नयी रेल लाइन चांदबाजार – बागदा Chandbazar – Bagdah 14 किमी नयी रेल लाइन राणाघाट (आरानघाटा) – दत्तफुलिया Ranaghat (Aranghata)–Duttaphulia 8 किमी नयी रेल लाइन कांथी – एगरा Kanthi – Egra 26 किमी नयी रेल लाइन नंदकुमार – बलाईपांडा Nandakumar – Balaipanda 28 किमी नयी रेल लाइन नंदीग्राम – कांदियामारी (नयाचार) Nandigram–Kandiamari (Nayachar) 7 किमी नयी रेल लाइन बोवाईचंडी – आरामबाग Bowaichandi – Arambagh 31 किमी नयी रेल लाइन बोवाईचंडी – खाना Bowaichandi – Khana 24 किमी नयी रेल लाइन बांकुड़ा (कालाबाटी) – पुरुलिया (हुरा के रास्ते) Bakura (Kalabati)–Purulia via Hura 65 किमी नयी रेल लाइन रायगंज – ईटाहार Raiganj – Itahar 22 किमी नयी रेल लाइन गंगारामपुर/गजोले – ईटाहार Gazole – Itahar 27 किमी नयी रेल लाइन ईटाहार – बुनियादपुर Itahar – Buniadpur 27 किमी नयी रेल लाइन चालसा – नक्सल Chalsa – Naxal 20 किमी नयी रेल लाइन राजाभातखावा – जैंतिया Rajabhatkhawa – Jaintia 15 किमी नयी रेल लाइन रायगंज – दालखोला Raiganj – Dalkhola 43 किमी नयी रेल लाइन ये भी पढ़ें: रेलवे भर्ती परीक्षा : रांची-सबौर के बीच आज से चलेंगी परीक्षा स्पेशल ट्रेन The post बंगाल में ठप पड़ी 17 रेल परियोजनाओं पर शुरू होगा काम, जानें क्यों अटके थे प्रोजेक्ट appeared first on Naya Vichar.

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संसद में बढ़ा सियासी तनाव! शाह-बिड़ला की 1 घंटे की बंद कमरे में मीटिंग , क्या टूटेगा विपक्ष का घेराव?

संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (7 अगस्त) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, करीब एक घंटे तक चली इस बैठक ने नेतृत्वक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिय. उधर, विपक्ष लगातार छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर सदन में चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन अपने रुख पर कायम है. विपक्ष की मांग पर अड़ा सदन विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को संसद मार्च कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दें. इसी के साथ राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित चोरी के आरोपों पर भी विस्तृत चर्चा कराई जाए. इन मांगों को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है. यह पहली बार नहीं है जब संसद में गतिरोध के दौरान सत्ता पक्ष के शीर्ष नेताओं और लोकसभा अध्यक्ष के बीच अहम बैठक हुई हो. इससे पहले 2023 और 2024 के कई संसदीय सत्रों में भी विपक्ष के हंगामे के बीच प्रशासन और स्पीकर के बीच लगातार बैठकें हुई थीं. मणिपुर हिंसा, सुरक्षा चूक, महंगाई और अन्य विवादित मुद्दों पर भी संसद लंबे समय तक नहीं चल सकी थी. ऐसे समय में हुई बैठकों के बाद कई बार गतिरोध खत्म हुआ, जबकि कई बार टकराव और बढ़ गया. क्या निकलेगा गतिरोध का समाधान? अमित शाह और ओम बिरला की इस मुलाकात को संसद की आगे की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि बैठक के बाद किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई. अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन विपक्ष की मांगों पर चर्चा के लिए तैयार होती है या फिर संसद का गतिरोध आने वाले दिनों में और गहरा जाएगा. ये भी पढ़ें: मोरबी के कुएं में उठीं रहस्यमयी लहरें, चमत्कार या विज्ञान? जांच से खुलेगा असली राज The post संसद में बढ़ा सियासी तनाव! शाह-बिड़ला की 1 घंटे की बंद कमरे में मीटिंग , क्या टूटेगा विपक्ष का घेराव? appeared first on Naya Vichar.

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मोरबी के कुएं में उठीं रहस्यमयी लहरें, चमत्कार या विज्ञान? जांच से खुलेगा असली राज

गुजरात के मोरबी जिले के विरपरडा गांव का एक खेत का कुआं इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. कुएं के पानी में बिना किसी बाहरी कारण के लगातार लहरें उठती दिखाई देने लगीं. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद कई लोगों ने इसे चमत्कार या किसी रहस्यमयी घटना से जोड़ना शुरू कर दिया. मामला बढ़ने पर जिला प्रशासन ने तुरंत वैज्ञानिक जांच के आदेश दिए. मोरबी के जिला कलेक्टर स्वप्निल खरे ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर जिला भू-वैज्ञानिकों की टीम मौके पर पहुंची. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि पानी के नीचे फंसी हवा के दबाव और उसके स्थान बदलने से पानी की सतह पर लहरें बन रही हैं. हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए गुजरात ग्राउंडवाटर रिसर्च इंस्टीट्यूट को विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह पहली बार नहीं है जब किसी कुएं या जलस्रोत में ऐसी रहस्यमयी हलचल देखने को मिली हो. इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ इलाकों में भी भूगर्भीय गतिविधियों, भूमिगत गैस, दबाव में बदलाव या पानी के प्राकृतिक प्रवाह के कारण कुओं और तालाबों में लहरें उठने जैसी घटनाएं सामने आई थीं. शुरुआती दौर में इन्हें चमत्कार बताया गया, लेकिन बाद की वैज्ञानिक जांच में इनके पीछे प्राकृतिक कारण पाए गए. रिपोर्ट के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर फिलहाल प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करने की अपील कर रहा है. जांच के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि पानी में उठ रही लहरों के पीछे केवल प्राकृतिक भूगर्भीय कारण हैं या कोई अन्य वैज्ञानिक वजह. गुजरात ग्राउंडवाटर रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी. ये भी पढ़ें: उत्तराखंड में बारिश का कहर! चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही गंगा, ऋषिकेश के घाट खाली कराए गए The post मोरबी के कुएं में उठीं रहस्यमयी लहरें, चमत्कार या विज्ञान? जांच से खुलेगा असली राज appeared first on Naya Vichar.

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Tribalpedia: आदिवासी कला डिजिटल हुई, लेकिन अधिकार किसका हुआ? Part 1

किसी आदिवासी चित्र को संग्रहालय की दीवार से उठाकर डिजिटल स्क्रीन पर लाना पहली नजर में संरक्षण का काम लगता है. तस्वीर सुरक्षित रहेगी, दुनिया उसे देख सकेगी और शायद कलाकार की परंपरा को नई पहचान भी मिलेगी. लेकिन सवाल यह है कि उस चित्र को डिजिटल बनाने का अधिकार किसके पास है? मान लीजिए किसी गांव की एक पारंपरिक चित्रकला पीढ़ियों से समुदाय के साथ जीवित है. उसे किसी संस्था ने स्कैन किया, ऑनलाइन संग्रह में डाल दिया और कुछ समय बाद वही तस्वीर दुनिया भर की वेबसाइटों, किताबों या व्यावसायिक उत्पादों में दिखाई देने लगी. समुदाय के पास न अनुमति देने का अधिकार था, न कमाई में हिस्सा और न ही यह तय करने की ताकत कि उसकी कला को किस संदर्भ में दिखाया जाए. यहीं से संरक्षण और सांस्कृतिक कब्जे के बीच की रेखा धुंधली होने लगती है. हिंदुस्तान में जादोपाटिया चित्रकला, वारली कला, पारंपरिक नृत्य, अनुष्ठान और मौखिक परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण तेजी से बढ़ा है. इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को बचाना है. लेकिन जब किसी समुदाय की अनुमति और profit-sharing के बिना उसकी कला को डिजिटल संग्रह में रखा जाता है, तो संरक्षण का यह प्रयास digital extraction यानी संस्कृति से डेटा निकालने की प्रक्रिया जैसा दिखाई देने लगता है. Read More: Tribalpedia Brazil: सोने की तलाश में बीमार होती नदी, बिखरती जिंदगी समस्या सिर्फ तस्वीर की नहीं, अधिकार की है आदिवासी कला को लेकर सबसे बड़ी कानूनी दिक्कत यह है कि हिंदुस्तानीय कॉपीराइट कानून मुख्य रूप से एक ऐसे लेखक की कल्पना करता है, जिसकी पहचान की जा सके. लेकिन आदिवासी कला अक्सर किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं होती. वह समुदाय की सामूहिक स्मृति होती है. एक पीढ़ी उसे दूसरी पीढ़ी को देती है. उसके रंग, आकृतियां, प्रतीक और तकनीक किसी एक कलाकार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि लंबे सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव का हिस्सा होते हैं. यही कारण है कि ऐसी कला को कई बार बिना लेखक या सामुदायिक संपत्ति मान लिया जाता है. फिर उसे संग्रहालय, विश्वविद्यालय या निजी संस्थाएं डिजिटल रूप में संग्रहित और इस्तेमाल कर सकती हैं. लेकिन यहां एक बुनियादी सवाल खड़ा होता है- अगर किसी रचना का कोई एक लेखक नहीं है, तो क्या उसका कोई मालिक भी नहीं है? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने Eastern Book Company v. D.B. Modak मामले में मौलिकता को बहुत कठोर अर्थ में देखने के बजाय कम रचनात्मकता की कसौटी को स्वीकार किया था. यानी कानून यह मानता है कि रचनात्मकता हमेशा असाधारण या पूरी तरह नई होने की जरूरत नहीं है. फिर सामुदायिक रचनात्मकता को उसी नजर से देखने में कठिनाई क्यों होनी चाहिए? डिजिटल दुनिया में कला की ‘दूसरी जिंदगी’ डिजिटाइजेशन केवल किसी चित्र की फोटो खींचना नहीं है. हाई-रेजोल्यूशन स्कैन, ऑनलाइन कैटलॉग और डिजिटल संग्रह किसी जीवित सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को ऐसी डिजिटल वस्तु में बदल देते हैं, जिसे आसानी से खोजा, कॉपी किया और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. यहीं शक्ति का संतुलन भी बदल जाता है. जिस कला पर पहले समुदाय का सांस्कृतिक नियंत्रण था, उसके डिजिटल संस्करण पर नियंत्रण किसी संग्रहालय, विश्वविद्यालय या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के पास जा सकता है. वह संस्था तय कर सकती है कि सामग्री कौन देखेगा, किसे लाइसेंस मिलेगा और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल कैसे होगा. इसे एक छोटे से उदाहरण से समझिए. किसी गांव का कुआं अगर गांव के लोगों का है, तो उसकी तस्वीर लेने से कुएं का मालिकाना हक नहीं बदलता. लेकिन अगर उसी तस्वीर के आधार पर पानी के अधिकार, पहुंच और उपयोग पर कोई बाहरी संस्था नियंत्रण करने लगे, तो मामला बदल जाता है. डिजिटल संस्कृति के साथ भी कुछ ऐसा ही हो सकता है. Read More: Tribalpedia Latin-America: Rosewood की लड़ाई ने दुनिया को क्या सिखाया? ‘आइडिया’ नहीं, जीवित अभिव्यक्ति कॉपीराइट कानून विचार और उसकी अभिव्यक्ति में अंतर करता है. R.G. Anand v. Deluxe Films मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी कॉपीराइट की सुरक्षा को विचार के बजाय उसकी ठोस अभिव्यक्ति से जोड़ा. आदिवासी कला के मामले में समस्या तब पैदा होती है, जब किसी पूरी परंपरा को सिर्फ स्टाइल, थीम या सांस्कृतिक विचार मान लिया जाता है. जबकि वास्तविक चित्र, तकनीक, प्रतीक और सामाजिक संदर्भ ठोस अभिव्यक्तियां हो सकते हैं. स्रोत सामग्री का तर्क है कि यदि इन्हें सही कानूनी दृष्टि से देखा जाए, तो आदिवासी कला को संरक्षण की अधिक मजबूत जमीन मिल सकती है. संविधान में संस्कृति, लेकिन डिजिटल सहमति कहां? हिंदुस्तान का संविधान समुदायों की विशिष्ट संस्कृति को बनाए रखने के अधिकार को पहचानता है. अनुच्छेद 29 सांस्कृतिक पहचान की रक्षा से जुड़ा है. वहीं अनुच्छेद 21 की व्यापक न्यायिक व्याख्या में गरिमा और स्वायत्तता जैसे अधिकार शामिल किए गए हैं. Puttaswamy फैसले के बाद निजता (privacy) और अपने डेटा पर नियंत्रण (data protection) का सवाल भी संवैधानिक विमर्श का हिस्सा बना है. यहां से एक नया प्रश्न निकलता है- अगर व्यक्ति को अपने निजी डेटा पर नियंत्रण का अधिकार है, तो क्या समुदाय को अपनी सामूहिक सांस्कृतिक जानकारी पर नियंत्रण का अधिकार नहीं होना चाहिए? आदिवासी कला का डिजिटलीकरण बिना अनुमति के होने पर समुदाय यह तय नहीं कर पाता कि उसकी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति डिजिटल दुनिया में कैसे जाए, किस रूप में प्रस्तुत हो और उसका इस्तेमाल कौन करे. स्रोत सामग्री इसी कमी को हिंदुस्तानीय कानून की बड़ी खामी के रूप में देखती है. जैव विविधता कानून से मिल सकता है रास्ता हिंदुस्तान के जैव विविधता कानून में एक दिलचस्प रास्ता दिखाई देता है. Biological Diversity Act, 2002 जैव संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के इस्तेमाल को समुदायों की सहमति और लाभ-साझेदारी से जोड़ता है. इसका मतलब यह है कि कानून यह मानता है कि आदिवासी और स्थानीय समुदाय केवल ज्ञान के स्रोत नहीं हैं, बल्कि उस ज्ञान के अधिकार रखने वाले संरक्षक भी हैं. यही बात कला पर भी लागू की जा सकती है. अगर किसी समुदाय की पारंपरिक औषधीय जानकारी के इस्तेमाल पर उसकी सहमति जरूरी मानी जाती है, तो उसकी सांस्कृतिक कला के व्यावसायिक और डिजिटल इस्तेमाल पर ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती? Orissa Mining Corporation Ltd. v. Ministry of Environment & Forests मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासी समुदायों को उनके पवित्र स्थलों से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका दी थी. स्रोत सामग्री

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‘AK-47 चलाने का आदेश किसने दिया?’ DGP विनय कुमार से मिलकर तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल

Tejashwi Yadav: बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचे और डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात की. इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कई बड़े नेता भी उनके साथ मौजूद रहे. मुलाकात में उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध और कई चर्चित मामलों को उठाया. तेजस्वी यादव ने पटना के बंटी यादव हत्याकांड और सिवान में एक छात्र पर AK-47 से फायरिंग के मामले पर डीजीपी से जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित डीएम और एसपी पर कार्रवाई होनी चाहिए. आदेश देने वालों पर कार्रवाई हो तेजस्वी यादव ने कहा कि सिर्फ एक सिपाही को जिम्मेदार ठहराकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता. उन्होंने सवाल किया कि AK-47 चलाने का आदेश किसने दिया. आदेश देने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें बचाया नहीं जाना चाहिए. तेजस्वी यादव ने कहा कि इस मामले पर न तो देश के गृह मंत्री कुछ बोल रहे हैं और न ही बिहार के गृह मंत्री. उन्होंने मुख्यमंत्री से भी जनता के सामने आकर पूरे मामले पर साफ जवाब देने की मांग की. विपक्षी नेताओं से बिहार आने की अपील तेजस्वी यादव ने सभी विपक्षी नेताओं से बिहार आने की अपील की. उन्होंने कहा कि संसद सत्र खत्म होने के बाद सभी विपक्षी नेता बिहार आएं और मुख्यमंत्री से इन मामलों पर जवाब मांगें. तेजस्वी यादव ने कहा कि जब तक पेपर लीक के बड़े माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाएं नहीं रुकेंगी. उन्होंने कहा कि सिर्फ छोटे लोगों पर कार्रवाई करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. भरत तिवारी एनकाउंटर पर उठाए सवाल तेजस्वी यादव ने भरत तिवारी एनकाउंटर का मुद्दा भी डीजीपी के सामने उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को दबाने की कोशिश की गई और इसकी सही जांच नहीं हुई. तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं और राज्य की छवि खराब हो रही है. बिहार को पुलिस स्टेट बनाने की कोशिश हो रही है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें रोहतास जाएंगे तेजस्वी यादव तेजस्वी यादव ने कहा कि वह शनिवार को रोहतास जाएंगे. वहां मजदूरी मांगने पर जिस मजदूर की हत्या हुई है, उसके परिवार से मिलेंगे. तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में अपराधियों का बोलबाला है. इसे भी पढ़ें: Bihar Weather Alert: 9 अगस्त को बिहार के इन जिलों में बारिश, बिजली और तेज हवा की चेतावनी, IMD ने क्या बताया पटना से गया तक चली तबादला एक्सप्रेस, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में 20 अफसरों का ट्रांसफर सम्राट चौधरी का ऐलान- 51600 करोड़ निवेश होगा, बिहार बनेगा देश का नया स्टील हब, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार The post ‘AK-47 चलाने का आदेश किसने दिया?’ DGP विनय कुमार से मिलकर तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल appeared first on Naya Vichar.

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बबुआ 12 बजे तक सोते थे, 5 बजे जिम जाते थे…दिन भर महफिल में रहते थे व्यस्त, जानें CM योगी ने किस पर कसा तंज

UP News : लखनऊ में नेशनल हैंडलूम डे के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बिना किसी का नाम लिए ‘बबुआ’ कहकर विपक्ष पर जोरदार तंज कसा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूरी जिंदगी शिशु ही बने रहते हैं. अपने भाषण में सीएम योगी ने 2017 से पहले की कानून व्यवस्था, बिजली, सड़क और सुरक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में प्रदेश की हालत बिल्कुल अलग थी. ‘बबुआ’ पर तंज, दिनचर्या का किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग जीवनभर शिशु ही बने रहते हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बबुआ 12 बजे तक सोते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे, 5 बजे जिम जाने का समय हो जाता था और 7 बजे महफिल सज जाती थी. इसके बाद उनका देश-दुनिया से कोई संपर्क नहीं रहता था.” ‘तभी होते थे दंगे, महीनों लगता था कर्फ्यू’ मुख्यमंत्री ने कहा कि उसी दौर में प्रदेश में आए दिन दंगे होते थे और कई-कई महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था. उनका कहना था कि जब हर फैसले को सिर्फ वोट बैंक की नेतृत्व से देखा जाता है, तब गरीबों और आम लोगों का भला नहीं हो सकता. 2017 से पहले की व्यवस्था पर उठाए सवाल सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में बिजली की भारी समस्या थी. अच्छी सड़कें नहीं थीं और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था. उन्होंने कहा कि विकास की गति काफी धीमी थी और आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था. कानून व्यवस्था को लेकर भी किया हमला मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पहले प्रदेश की कानून व्यवस्था बेहद खराब थी. उन्होंने कहा कि उस समय न बेटियां सुरक्षित थीं, न व्यापारी और न ही प्रदेश के हस्तशिल्प कारीगर खुद को सुरक्षित महसूस करते थे. नेशनल हैंडलूम डे कार्यक्रम में दिया बयान लखनऊ में आयोजित नेशनल हैंडलूम डे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कानून व्यवस्था, बिजली, सड़क, विकास और गरीबों के कल्याण जैसे मुद्दों का जिक्र किया. साथ ही उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए प्रदेश के पुराने हालात और वर्तमान व्यवस्था की तुलना भी की. Also Read : आगरा में युवती को नशीला ड्रिंक पिलाकर दुष्कर्म, अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर की शादी, आरोपी गिरफ्तार The post बबुआ 12 बजे तक सोते थे, 5 बजे जिम जाते थे…दिन भर महफिल में रहते थे व्यस्त, जानें CM योगी ने किस पर कसा तंज appeared first on Naya Vichar.

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‘जिस बेटी को डॉक्टर बनाया, उसी की शादी में ठग लिए गए’… BJP विधायक ज्ञान तिवारी का छलका दर्द, बोले- ‘मैं भी शिकार हुआ’

लखनऊ: नेतृत्व के मंच पर अक्सर मुखर रहने वाले उत्तर प्रदेश के सीतापुर से भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी शुक्रवार को एक पिता के रूप में टूटे हुए नजर आए. फेसबुक लाइव में उन्होंने कहा कि वह यह बात किसी जनप्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि अपनी बेटी के पिता की हैसियत से कह रहे हैं. लाइव के दौरान कई बार उनका दर्द साफ झलकता रहा. उन्होंने कहा कि जिस बेटी को उन्होंने मेहनत से पढ़ाकर एमबीबीएस डॉक्टर बनाया, उसकी शादी में ही उनके साथ ऐसा धोखा हुआ, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी. 2024 में हुई थी बेटी की शादी विधायक ज्ञान तिवारी ने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी बेटी डॉ. प्रज्ञा तिवारी की शादी प्रखर त्रिवेदी से पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम से की थी. शादी से पहले उन्होंने कई परिचित लोगों से परिवार की जानकारी भी ली थी. उन्हें बताया गया था कि लड़के का परिवार सम्मानित है और रियल एस्टेट का कारोबार करता है, इसी भरोसे पर उन्होंने बेटी का रिश्ता तय किया. विधायक ने लगाए कई गंभीर आरोप फेसबुक लाइव में विधायक ने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें पता चला कि उनके समधी अनुज त्रिवेदी के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. उन्होंने दावा किया कि उन पर अलग-अलग स्त्रीओं के साथ धोखाधड़ी और शादी के नाम पर ठगी के आरोप लगे हैं तथा वह इस समय जेल में हैं. विधायक ने कहा कि अगर उन्हें पहले यह जानकारी होती तो वह कभी अपनी बेटी की शादी उस परिवार में नहीं करते. ‘मैं भी ठगी का शिकार हुआ’ भावुक होते हुए ज्ञान तिवारी ने कहा, “आज मुझे लगता है कि मैं भी ठगा गया हूं. जिस बेटी को पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाया, उसके साथ अन्याय हुआ है” उन्होंने कहा कि यदि उनकी बेटी चाहेगी तो वह भी अनुज त्रिवेदी के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराएंगे. उनका कहना था कि यदि जांच में बेटे की भी भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. बेटी के साथ खड़े रहने का वादा विधायक ने अपनी बेटी का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वह आत्मनिर्भर है और अपने पैरों पर खड़ी है. उन्होंने कहा, “मेरी बेटी डॉक्टर है, वह अपना जीवन सम्मान के साथ जी सकती है. जब तक मैं जीवित हूं, उसे किसी चीज की चिंता करने की जरूरत नहीं है”. उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी बेटी के लिए अलग घर बनवाने तक को तैयार हैं. कड़ी कार्रवाई की मांग बीजेपी विधायक ज्ञान तिवारी ने अपने संबोधन के अंत में मांग की कि स्त्रीओं के साथ धोखाधड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत सबसे कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े. नोट: इस समाचार में लगाए गए सभी आरोप भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी के फेसबुक लाइव में दिए गए सार्वजनिक बयान पर आधारित हैं. संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा. यह भी पढ़ें: एक बेटी प्रेग्नेंट थी, दूसरी ने की लव मैरिज… आगरा में 48 घंटे में दो बेटियों की हत्या The post ‘जिस बेटी को डॉक्टर बनाया, उसी की शादी में ठग लिए गए’… BJP विधायक ज्ञान तिवारी का छलका दर्द, बोले- ‘मैं भी शिकार हुआ’ appeared first on Naya Vichar.

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बाबर आजम ने इरफान पठान को इंटरव्यू देने से किया था मना? जानें वायरल खबर का सच

Irfan Pathan fake news controversy: पूर्व हिंदुस्तानीय क्रिकेटर इरफान पठान ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी समाचारों और ट्रोलिंग को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि उनके नाम से कई बार झूठी बातें वायरल की गईं, लेकिन वह हर अफवाह का जवाब देने में अपना समय बर्बाद नहीं करते. जियोहॉटस्टार के चर्चित कार्यक्रम ‘चीकी सिंगल्स’ में बातचीत के दौरान इरफान पठान ने एक ऐसी घटना का जिक्र किया, जिसमें पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम को लेकर उनके नाम से एक फर्जी समाचार फैलाई गई थी. इस समाचार में दावा किया गया था कि बाबर आजम ने इरफान को इंटरव्यू देने से इनकार कर दिया था. बाबर आजम के नाम पर रची गई थी फर्जी कहानी इरफान पठान ने बताया कि पाकिस्तान में एक मीडिया रिपोर्ट के जरिए यह झूठ फैलाया गया कि वह बाबर आजम का इंटरव्यू लेने पहुंचे थे, लेकिन बाबर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि इरफान उनके देश को ट्रोल करते हैं. पूर्व हिंदुस्तानीय ऑलराउंडर ने साफ किया कि यह पूरी तरह मनगढ़ंत कहानी थी और इसके लिए उनकी तस्वीर का गलत इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह झूठ था। किसी ने मेरी तस्वीर को किसी और की तस्वीर पर लगाकर वायरल कर दिया. लोगों ने इसे सच मान लिया.” लाखों लोगों तक पहुंची फर्जी तस्वीर इरफान ने बताया कि जिस तस्वीर को उनके नाम से वायरल किया गया, उसमें असल में एक युवा बांग्लादेशी रिपोर्टर था. वह पहली बार मैदान पर गया था और इंटरव्यू लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. बाद में उसकी तस्वीर पर इरफान पठान का चेहरा लगाकर सोशल मीडिया पर फैला दिया गया. उन्होंने बताया कि यह पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंच गई और कई लोगों ने बिना जांच किए इसे सच मान लिया. हर दिन किसी न किसी के नाम से झूठ फैलता है-इरफान इरफान पठान ने कहा कि फर्जी समाचारें और गलत दावे अब आम हो गए हैं. उन्होंने कहा कि अगर हर झूठ और हर ट्रोलिंग का जवाब देने लगेंगे तो इंसान अपने काम और जिंदगी पर ध्यान नहीं दे पाएगा. उन्होंने कहा, “ट्रोलिंग और फर्जी समाचारें हर दिन होती हैं. हर दिन हमारे नाम से या किसी खिलाड़ी के बारे में कुछ न कुछ गलत कहा जाता है. अगर आप हर किसी को जवाब देते रहेंगे तो आप अपनी जिंदगी नहीं जी पाएंगे.” चोटों ने प्रभावित किया इरफान पठान का करियर इरफान पठान हिंदुस्तानीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं. उन्होंने 2003 से 2012 तक हिंदुस्तानीय टीम के लिए क्रिकेट स्पोर्ट्सा. अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने 141 पारियों में 2,821 रन बनाए, जिसमें एक शतक और 11 अर्धशतक शामिल हैं. गेंदबाजी में भी उनका रिकॉर्ड शानदार रहा. उन्होंने 301 विकेट हासिल किए, जिसमें नौ बार पांच विकेट और दो बार एक पारी में दस विकेट लेने का कारनामा शामिल है. हालांकि, बार-बार होने वाली चोटों ने उनके करियर को काफी प्रभावित किया और वह लंबे समय तक टीम में अपनी जगह बनाए नहीं रख सके. आईपीएल में भी दिखाया शानदार प्रदर्शन इरफान पठान ने आईपीएल में पंजाब किंग्स, दिल्ली कैपिटल्स, राइजिंग पुणे सुपरजायंट और गुजरात लायंस जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने आईपीएल करियर में 103 मैचों में 80 विकेट लिए और 1,139 रन बनाए. क्रिकेट से संन्यास के बाद इरफान अब कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषण से जुड़े हुए हैं, जहां वह स्पोर्ट्स से जुड़े मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं. इसे भी पढ़े- The Hundred 2026: बाउंड्री पर विल जैक्स का दिखा सुपरमैन अवतार, देखें वायरल वीडियो The post बाबर आजम ने इरफान पठान को इंटरव्यू देने से किया था मना? जानें वायरल समाचार का सच appeared first on Naya Vichar.

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Exclusive: रवि किशन की Viral Reels तो सिर्फ ट्रेलर हैं, ‘पिक्चर अभी बाकी है’, को-स्टार ने खोला राज

भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी छाए हुए हैं, उनकी वायरल रील्स, मजेदार डायलॉग्स और बेबाक अंदाज ने इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम तक हिला दिया है, इसी बीच फिल्म ‘आर्यभट्ट का जीरो’ में उनके साथ काम कर चुकीं एक्ट्रेस सोनाली सहगल ने नया विचार से एक्सक्लूसिव बातचीत में रवि किशन को लेकर कई दिलचस्प बातें शेयर कीं. उन्होंने बताया कि शूटिंग शुरू होने से पहले उनकी सोच क्या थी, सेट पर रवि किशन कैसे थे और आखिर क्यों वह अब उनकी बहुत बड़ी फैन बन गई हैं. ‘पहले लगा था रवि किशन बहुत सीरियस होंगे…’ जब उनसे पूछा गया कि फिल्म में आपके साथ रवि किशन ने काम किया है और वह इन-दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहे हैं. एक तरह से उन्होंने इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम हैक कर लिया है. इस पर सोनाली सहगल ने कहा, बिल्कुल.. उनके बारे में जितना कहूं, उतना कम है. उनके साथ जब मैंने ‘आर्यभट्ट का जीरो’ शूट किया था, तो पहले मैंने सोचा कि वह बहुत सीरियस किस्म के है या इतने सीनियर एक्टर है, तो थोड़ा घमंड होगा, लेकिन जब काम किया, तो पता चला कि वह काफी स्वीट हैं. उनके साथ सेट पर काम करके बहुत मजा आया. वह काफी मजेदार इंसान है. मैं अब उनकी बहुत बड़ी फैन हो गई हूं. उन्होंने कहा था कि ‘मैं बीबी के पैर दबाता हूं’. यह बात मुझे मुझे बहुत अच्छा लगा कि वह कितना रिस्पेक्ट करते हैं. रवि किशन पर भी और बनेंगी मजेदार रील्स सोनाली सहगल ने रवि किशन के वायरल होने पर कहा, रवि इतना अच्छा और मजेदार बोलते हैं, कि अभी वह अलग ही दर्जे पर चले गए हैं. इंस्टाग्राम पर उनके बैक टू बैक रील्स बन रहे हैं. फिल्म में जो उनका कैरेक्टर है, उससे और वायरल मोमेंट्स निकलकर आएंगे, क्योंकि उनकी एक एक लाइन काफी फनी है. ‘आर्यभट्ट का जीरो’ के एक सीन में उनका डायलॉग है, ‘अपना प्यार अगर किसी और की फॉर्चूनर में चला जाए तो दुख तो होता ही है’, मुझे पूरा भरोसा है कि इस पर भी ढेर सारी रील्स बनने वाली हैं. उनके साथ काम करना मेरे लिए बेहद मजेदार अनुभव रहा. वह वाकई कमाल के कलाकार हैं, टैलेंट उनके अंदर कूट-कूटकर भरा है. ये भी पढ़ें: वायरल मीम्स के बीच चर्चा में Ravi Kishan, जानिए कितनी है संपत्ति और कैसी है लाइफस्टाइल क्या रवि किशन ने सोनाली सहगल को सिखाई भोजपुरी सोनाली सहगल से जब पूछा गया कि क्या रवि किशन ने सेट पर उन्हें भोजपुरी सिखाई या कोई प्रैंक किया? इस पर एक्ट्रेस ने कहा, “नहीं मुझे तो नहीं सिखाया, लेकिन हिमांश कोहली को सिखाया होगा. हम लोग तो काफी फिटनेस और खाने पीने की बात किया करते थे. मुझे देखकर उन्हें लगता था कि सोनाली तो कुछ खाती पीती नहीं होगी.” बता दें कि रवि किशन और सोनाली सहगल स्टारर फिल्म ‘आर्यभट्ट का जीरो’ 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. ये भी पढ़ें: Exclusive : अमिताभ-शाहरुख के साथ 40 साल तक किया डांस, आज लोकल ट्रेन में काम ढूंढती हैं रुबीना खान… The post Exclusive: रवि किशन की Viral Reels तो सिर्फ ट्रेलर हैं, ‘पिक्चर अभी बाकी है’, को-स्टार ने खोला राज appeared first on Naya Vichar.

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वायरल मीम्स के बीच चर्चा में Ravi Kishan, जानिए कितनी है संपत्ति और कैसी है लाइफस्टाइल

गोरखपुर से सांसद और अभिनेता से नेता बने रवि किशन इन दिनों सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं. उनके मीम्स सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी चर्चा का विषय बने हुए हैं. यूरोप के फुटबॉल क्लब युवेंटस और बोरूसिया डॉर्टमुंड ने भी इंस्टाग्राम पर रवि किशन से जुड़े ट्रेंड में हिस्सा लिया. इसके बाद एक बार फिर उनकी निजी जिंदगी, कमाई और संपत्ति को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है. रवि किशन अपनी पत्नी प्रीति शुक्ला के साथ (Photo: Social Media) रवि किशन के पास कितनी प्रॉपर्टी है? रवि किशन के पास कुल 11 कमर्शियल और रेजिडेंशियल यूनिट्स हैं. उनकी प्रॉपर्टी मुंबई, गोरखपुर और उनके पैतृक शहर जौनपुर में है. चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी अचल संपत्ति में शामिल हैं: जोगेश्वरी में एक लग्जरी बंगला. गोरेगांव वेस्ट में कई फ्लैट्स. अंधेरी वेस्ट और ओशिवारा में प्रॉपर्टी. पुणे के विमान नगर में कमर्शियल ऑफिस स्पेस. गोरखपुर में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी. जौनपुर में पैतृक संपत्ति. यानी उनकी प्रॉपर्टी सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है. मुंबई जैसे बड़े शहर में रिहायशी और कमर्शियल प्रॉपर्टी के साथ गोरखपुर और जौनपुर में भी उनकी संपत्ति है. रवि किशन के पास कौन-कौन सी गाड़ियां हैं? रवि किशन के पास कुल छह गाड़ियां हैं. चुनावी हलफनामे में इनकी संयुक्त घोषित कीमत 60 लाख रुपये से ज्यादा बताई गई है. उनके पास टोयोटा इनोवा, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू एक्स, जगुआर एफ-पेस और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां हैं. इसके अलावा उनके पास हार्ले-डेविडसन स्ट्रीट बॉब बाइक भी है. रवि किशन की कमाई कहां-कहां से होती है? रवि किशन की कमाई सिर्फ सांसद की सैलरी से नहीं होती. 2024 के चुनावी हलफनामे में उनकी कमाई के कई जरिये बताए गए हैं. इनमें सांसद की सैलरी, बिजनेस से होने वाली कमाई, घर के किराये से मिलने वाली रकम, बैंक का ब्याज और एक्टिंग फीस शामिल हैं. यानी नेतृत्व में सक्रिय रहने के बावजूद उनका एक्टिंग और एंटरटेनमेंट से जुड़ाव अब भी बना हुआ है. परिवार में कौन-कौन है और नेतृत्व में कब आए? रवि किशन अपने परिवार के साथ (Photo: Social Media) रवि किशन की शादी प्रीति शुक्ला से 1993 में हुई थी. दोनों के चार शिशु हैं. उनकी बड़ी बेटी रीवा किशन ने भी एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने 2020 में फिल्म सब कुशल मंगल से अपना एक्टिंग डेब्यू किया. नेतृत्व में आने से पहले रवि किशन हिंदी के साथ भोजपुरी, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल फिल्मों में काम कर चुके हैं. उन्होंने 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर नेतृत्व में एंट्री की थी. इसके बाद उन्होंने गोरखपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की. गोरखपुर सीट 1998 से 2018 तक योगी आदित्यनाथ के पास रही थी. रवि किशन अब इस सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं. उनके 2024 के चुनावी हलफनामे में शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास दर्ज है. यह भी पढ़ें: KBC के सेट पर अमिताभ बच्चन ने सुनाया एक किस्सा: बताया 25 सालों से क्यों पहन रहे हैं टिंटेड चश्मा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान The post वायरल मीम्स के बीच चर्चा में Ravi Kishan, जानिए कितनी है संपत्ति और कैसी है लाइफस्टाइल appeared first on Naya Vichar.

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