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यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ, PM मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का पल

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबित, दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया. इसके साथ ही सारनाथ हिंदुस्तान का 45वां विश्व धरोहर स्थल बन गया है. यूनेस्को ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे हिंदुस्तान की नई विश्व धरोहर बताया. भगवान बुद्ध के पहले उपदेश की धरती को मिली वैश्विक पहचान सारनाथ बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है. यहीं भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ किया था. यही कारण है कि दुनिया भर से लाखों बौद्ध श्रद्धालु हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं. यूनेस्को की सूची में शामिल होने से इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी. भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ किया था. यही कारण है कि दुनिया भर से लाखों बौद्ध श्रद्धालु हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं. पीएम मोदी बोले- हर हिंदुस्तानीय के लिए गर्व और सम्मान का क्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है, जिनका ज्ञान, करुणा और सद्भाव का संदेश पूरी मानवता को प्रेरित करता है. उन्होंने कहा कि यह सम्मान हिंदुस्तान की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है और इससे दुनिया भर के अधिक लोग सारनाथ आकर बुद्ध के आदर्शों से जुड़ेंगे. लंबे प्रयासों के बाद मिली सफलता केंद्र प्रशासन ने 2025-26 के नामांकन चक्र के तहत सारनाथ का प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा था. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इसकी जानकारी संसद में दी थी. अब यूनेस्को की मुहर लगने के बाद सारनाथ न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि पूरी दुनिया की साझा सांस्कृतिक धरोहर बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन, स्थानीय रोजगार और बौद्ध विरासत के संरक्षण को नई गति मिलेगी. The post यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ, PM मोदी बोले- हर हिंदुस्तानीय के लिए गर्व का पल appeared first on Naya Vichar.

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भागी-भागी पद्मपुकुर पहुंचीं ममता बनर्जी, कहा- पुलिस ने मुझ पर हमला किया, जानें पूरा मामला

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में कोलकाता पुलिस के साथ हुई झड़प के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक स्त्री पुलिसकर्मी को कथित तौर पर धक्का देती नजर आयीं. वीडियो सामने आने के बाद एक नया नेतृत्वक विवाद खड़ा हो गया. नया विचार इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता. दूसरी तरफ, ममता बनर्जी ने दावा किया कि पुलिस ने उन पर हमला किया. उनकी पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया. पद्मपुकुर से मौलाली तक रैली की थी तैयारी कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी गुट की तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) को नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर प्रस्तावित मार्च की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद पुलिस ने पद्मपुकुर में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों को वहां से हटाने की कार्रवाई की और यह घटना हुई. ममता बनर्जी गुट की छात्र परिषद ने पद्मपुकुर से सीआईटी रोड होते हुए मौलाली तक रैली निकालने का प्रस्ताव रखा था. डोरिना क्रॉसिंग पर हुई हिंसा के बाद परमिशन कैंसल पार्टी नेताओं ने दावा किया कि कोलकाता पुलिस ने पहले रैली की अनुमति दे दी थी, लेकिन बाद में इसी मुद्दे पर वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा शुक्रवार को किये गये प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का हवाला देते हुए अनुमति रद्द कर दी. ये भी पढ़ें: नीट पेपर लीक 2026: कलकत्ता हाईकोर्ट में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, दोषी पाये जाने पर 10 साल जेल और 10 करोड़ का जुर्माना प्रियंका अधिकारी को पुलिस ने भेजा ई-मेल तृणमूल कांग्रेस खेमे के अनुसार, छात्र परिषद की नेता प्रियंका अधिकारी को शनिवार को पुलिस की ओर से ई-मेल मिला, जिसमें बताया गया कि पिछले दिन हुई अशांति के मद्देनजर रैली की अनुमति रद्द की जाती है. इसके बाद गुट ने तुरंत कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया. अदालत ने अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की, लेकिन टीएमसीपी को राहत देने से इनकार कर दिया. पद्मपुकुर में पुलिस के साथ हुई टीएमसी नेताओं की धक्का-मुक्की अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने पद्मपुकुर में एकत्र समर्थकों को हटाना शुरू किया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गयी और धक्का-मुक्की हुई. पुलिस, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं- कुणाल घोष, बैश्वानर चटर्जी और कई अन्य नेताओं व समर्थकों को हिरासत में लेकर जेल वैन से वहां से ले गयी. ये भी पढ़ें: धर्मतला हिंसा में 7 FIR दर्ज, शुभेंदु अधिकारी बोले – ऐसी सजा देंगे कि 3 पीढ़ियां नहीं भूलेंगी पुलिस के साथ ममता बनर्जी की हुई नोकझोंक पार्टी के नेताओं को हिरासत में लिये जाने की जानकारी मिलने के तुरंत बाद ममता बनर्जी वरिष्ठ पार्टी नेता डेरेक ओ ब्रायन के साथ पद्मपुकुर पहुंचीं. वह पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करती नजर आयीं. इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी नोकझोंक भी हुई, क्योंकि पुलिस मार्च को आगे बढ़ने से रोक रही थी. ममता का आरोप- पुलिस ने मुझ पर हमला किया ममता बनर्जी ने कहा- उन्होंने (पुलिस ने) मुझ पर भी हमला किया. यह लोकतंत्र नहीं है. हम यहां छात्रों के आंदोलन के समर्थन में आये हैं. हमारे विधायक और कई अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. हमारे साउंड सिस्टम के तार काट दिये गये हैं. मैं यहां एकजुटता जताने आयी हूं. हमारे लोगों ने कोई बाधा पैदा नहीं की, लेकिन इस प्रशासन का दमन सभी सीमाएं पार कर चुका है. ये भी पढ़ें: सेबाश्रय घोटाले पर CM शुभेंदु अधिकारी- चिटिंगबाज भाईपो एक बार जेल गया तो बाहर नहीं निकलेगा, CID-STF जांच के आदेश दिये स्त्री पुलिसकर्मी को धक्का देती दिखीं ममता बनर्जी पुलिस और ममता बनर्जी के बीच इस दौरान हुई नोकझोंक के समय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इस वीडियो में ममता बनर्जी एक स्त्री पुलिसकर्मी को कथित तौर पर धक्का देती नजर आ रही हैं. कुछ देर तक प्रदर्शन स्थल पर रहने के बाद ममता बनर्जी बिना हेलमेट पहने स्कूटर की पिछली सीट पर बैठकर वहां से अपने आवास लौट गयीं. The post भागी-भागी पद्मपुकुर पहुंचीं ममता बनर्जी, कहा- पुलिस ने मुझ पर हमला किया, जानें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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सुबह हो गई मामू…जंतर-मंतर पर गूंजा जीत का नारा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं ने ऐसे मनाया जश्न

नई दिल्ली से संदीप सावर्ण की रिपोर्ट सुबह हो गई मामू…मंच से जैसे ही यह आवाज गूंजी, जंतर-मंतर पर मौजूद हजारों युवाओं का जोश चरम पर पहुंच गया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की समाचार के बाद आंदोलन का माहौल विरोध से जश्न में बदल गया. कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के इस एक वाक्य ने पूरे धरनास्थल को नारों, तालियों और उत्साह से भर दिया. कोई एक-दूसरे को मेलोडी चॉकलेट खिलाता नजर आया तो कोई राष्ट्रध्वज लहराते हुए यह देश के युवाओं की जीत है के नारे लगा रहा था. दिनभर गुस्से की जगह उम्मीद और जीत के एहसास ने ले ली, हालांकि आंदोलनकारी लगातार यह भी कहते रहे कि उनकी अन्य मांगों पर फैसला होने तक संघर्ष जारी रहेगा. अभिजीत के एक वाक्य ने बदल दिया माहौल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुष्टि होते ही अभिजीत दीपके मंच पर पहुंचे. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “सुबह हो गई मामू.” बस फिर क्या था. पूरा जंतर-मंतर “छात्र एकता जिंदाबाद”, “युवा शक्ति जिंदाबाद” और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से गूंज उठा. कई छात्र इसे आंदोलन का सबसे यादगार पल बताते नजर आए. स्पाइडर मैन मास्क के साथ युवा (फोटो- नया विचार) हेलमेट पहनकर पहुंचे युवा, लगाए अलग अंदाज में नारे कुछ युवा हेलमेट पहनकर प्रदर्शन में पहुंचे. उनका कहना था कि जंतर-मंतर की आवाज सत्ता तक पहुंची है. इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने स्पोर्ट्स जगत से जुड़े मुद्दों पर भी प्रतीकात्मक नारे लगाए और जवाबदेही की मांग की. चंडीगढ़ से पहुंचे विराट कोहली के फैंस ने लगे हाथ इंडियन क्रिकेट को बचाने के लिए गौतम गंभीर के इस्तीफे की भी मांग कर दी. चाय की केतली लेकर हुई मिमिक्री कुछ युवाओं ने हाथों में चाय की केतली लेकर प्रधानमंत्री की शैली की मिमिक्री की. आसपास मौजूद लोगों ने इसे कैमरों में कैद किया. पूरे समय पुलिस यह सुनिश्चित करती रही कि माहौल शांतिपूर्ण बना रहे. मेलोडी चॉकलेट बांटकर मनाई खुशी इस्तीफे की समाचार मिलते ही युवाओं ने एक-दूसरे को मेलोडी चॉकलेट और मिठाइयां खिलाईं. कई छात्र इसे “मेहनत और एकजुटता की मिठास” बताते नजर आए. उत्साह के बीच पुलिस की अपील भी जारी रही संभावित भीड़ को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की भी बड़ी तैनाती रही. पुलिस लगातार माइक से लोगों से शांति बनाए रखने और कार्यक्रम समाप्त होने पर घर लौटने की अपील करती रही. हालांकि देर शाम तक बड़ी संख्या में युवा जंतर-मंतर पर मौजूद रहे. जंतर-मंतर पर युवाओं की शक्ति (फोटो- सोशल मीडिया) उत्सव के बीच जिम्मेदारी की मिसाल जश्न के बाद कई छात्र हाथों में झाड़ू लेकर पूरे धरनास्थल की सफाई करते नजर आए. उन्होंने प्लास्टिक की बोतलें, पोस्टर और अन्य कचरा इकट्ठा कर डस्टबिन में डाला. छात्रों का कहना था कि आंदोलन केवल व्यवस्था बदलने का नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक होने का भी संदेश है. शाम 6 बजे तक के प्रमुख अपडेट धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल. “सुबह हो गई मामू…” पूरे दिन का सबसे चर्चित नारा बना. मेलोडी चॉकलेट बांटकर युवाओं ने खुशी जताई. स्पाइडरमैन की वेशभूषा और चाय की केतली के साथ प्रतीकात्मक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहे. विभिन्न राज्यों से आए छात्र, अभिभावक और युवा पेशेवर बड़ी संख्या में मौजूद रहे. पुलिस और अर्धसैनिक बल पूरे दिन सुरक्षा व्यवस्था संभालते रहे. कुछ युवाओं द्वारा बैरिकेडिंग पर चढ़ने की घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरती. कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने स्वयं सफाई अभियान चलाकर सकारात्मक संदेश दिया. ये भी पढ़ें: CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की, प्रशासन ने मान ली छात्रों की सभी मांगें The post सुबह हो गई मामू…जंतर-मंतर पर गूंजा जीत का नारा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं ने ऐसे मनाया जश्न appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Band: सुबह शांत, दोपहर हिंसा, शाम इस्तीफा, बिहार बंद में दिनभर क्या-क्या हुआ

Bihar Band: नीट पेपर लीक, छात्रों पर लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को छात्र संगठनों और वामपंथी दलों द्वारा बुलाया गया बिहार बंद दिन भर भारी हंगामे, हिंसा और सियासी हलचल का केंद्र बना रहा. सुबह के भारी पुलिस पहरे से शुरू हुआ यह आंदोलन दोपहर होते-होते राज्य के कई हिस्सों में उग्र हो गया, वहीं शाम ढलते-ढलते नेतृत्वक घटनाक्रम के साथ एक अलग मोड़ पर खत्म हुआ. सुबह 6:00 से 10:00 बजे: राज्यभर में हाई अलर्ट, 70 हजार जवान तैनात और शांतिपूर्ण शुरुआत सुबह तड़के से ही पूरे बिहार में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई थी. पटना, औरंगाबाद और बेगूसराय समेत कई जिलों में एहतियातन स्कूल-कॉलेज बंद रखे गए थे. पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर राज्यभर में लगभग 70 हजार पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों (CISF, BSF, SSB, CRPF) को तैनात किया गया. पटना के डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर और गांधी मैदान जैसे संवेदनशील इलाकों में खुद एसएसपी फ्लैग मार्च करते नजर आए. शुरुआती घंटों में जनजीवन सामान्य रहा और सड़कों पर यातायात सुचारू रूप से चलता दिखा. सुबह 10:00 से दोपहर 1:00 बजे: सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, आरा में रोकी गई ट्रेन दोपहर होते-होते छात्र संगठनों और वामपंथी कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. राजधानी पटना के डाकबंगला चौराहे पर हजारों छात्र इकट्ठा हो गए और प्रशासन विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी. भोजपुर के आरा रेलवे स्टेशन पर बंद समर्थकों ने प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर पहुंचकर पटना-बक्सर पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया और ट्रैक पर प्रदर्शन किया. आरा में ही आरपीएफ अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं हुईं, तो शिवहर और मधेपुरा में भी प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़कों को जाम कर दिया. दोपहर 1:00 से शाम 4:00 बजे: कई जिलों में भड़की हिंसा, पथराव में दो एसपी समेत कई अफसर घायल दोपहर बाद कई जिलों में प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप लेने लगा. सीवान में उग्र भीड़ ने पुलिस पर जमकर पथराव किया, जिसमें सीवान एसपी पूरन कुमार झा घायल हो गए. हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और करीब 10 राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी. सीतामढ़ी के शंकर चौक पर हुए पथराव में एसपी अमित रंजन के पैर में चोट आई और एक एसआई समेत 13 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए. छपरा में प्रदर्शनकारियों के पथराव से सदर बीडीओ दृष्टि पांडेय घायल हो गईं और एक पुलिस वाहन को आग के हवाले कर दिया गया. बेतिया और भागलपुर में भी पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ के बाद लाठीचार्ज कर उपद्रवियों को खदेड़ा गया. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, डाकबंगला पर जश्न दोपहर 2:18 मिनट पर समाचार आई की केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस समाचार के सामने आते ही पटना के डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने ‘जीत गए’ के नारे लगाते हुए जश्न मनाया. हालांकि, कई जगहों पर इसके बावजूद छिटपुट विरोध जारी रहा. पुलिस प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात रखकर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लिया. एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट की स्पीड धीमी कर दी गई और उपद्रवियों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है. इसे भी पढ़ें: Bihar Band: पटना, भागलपुर, छपरा, सीतामढ़ी समेत बिहार के इन जिलों में हिंसक हुआ प्रदर्शन, एसपी को भी लगी चोट The post Bihar Band: सुबह शांत, दोपहर हिंसा, शाम इस्तीफा, बिहार बंद में दिनभर क्या-क्या हुआ appeared first on Naya Vichar.

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T20I में भारत ने रचा इतिहास, एक साल में 9वीं बार बनाया 200+ स्कोर

हिंदुस्तान ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में 5 विकेट पर 219 रन बनाते ही टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक और कीर्तिमान अपने नाम कर लिया. टीम इंडिया ने 2026 में नौवीं बार 200 या उससे अधिक का स्कोर बनाया और इस मामले में अपने ही रिकॉर्ड की बराबरी कर ली. इससे पहले हिंदुस्तान ने 2024 में भी एक कैलेंडर ईयर में 9 बार 200+ का स्कोर बनाया था. कोई भी दूसरी टीम अभी तक इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी है. 52वीं बार बनाया 200+ स्कोर इतना ही नहीं, हिंदुस्तान ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 52वीं बार 200 या उससे अधिक का स्कोर बनाया है. इस मामले में टीम इंडिया दुनिया की सबसे सफल टीम है. दूसरे स्थान पर मौजूद दक्षिण अफ्रीका ने अब तक 29 बार 200+ का स्कोर बनाया है, यानी हिंदुस्तान उससे 23 बार आगे निकल चुका है. एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर (T20I) टीम साल 200+ स्कोर हिंदुस्तान 2024 9 हिंदुस्तान 2026 9 हिंदुस्तान 2023 7 जापान 2024 7 ऑस्ट्रिया 2025 7 इंग्लैंड 2022 6 दक्षिण अफ्रीका 2022 6 वेस्टइंडीज 2024 6 ईशान और तिलक ने स्पोर्ट्सी शानदार पारियां दूसरे मैच में हिंदुस्तान की शुरुआत अच्छी नहीं रही. अभिषेक शर्मा 8 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि वैभव सूर्यवंशी 20 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. शुरुआती दो झटकों के बाद ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर ने पारी को संभाला और तेजी से रन बटोरे. दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई. श्रेयस अय्यर 25 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन ईशान किशन ने आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखते हुए 81 रन की शानदार पारी स्पोर्ट्सी. उनके बाद तिलक वर्मा ने भी नाबाद 60 रन बनाकर हिंदुस्तान का स्कोर 219/5 तक पहुंचाया. रिंकू सिंह ने 12 रन का योगदान दिया. जिम्बाब्वे के लिए ब्लेसिंग मुजारबानी ने 1, रिचर्ड अंगारावा ने 1, ब्रैड एवंस ने 1 न्यमैन न्यामहुरी ने 1 और ब्रायन बेनेट ने 1 विकेट चटकाए. ये भी पढ़ें: श्रीलंका दौरे के लिए 28 जुलाई को होगा हिंदुस्तानीय टीम का ऐलान, क्या जसप्रीत बुमराह की होगी वापसी? The post T20I में हिंदुस्तान ने रचा इतिहास, एक साल में 9वीं बार बनाया 200+ स्कोर appeared first on Naya Vichar.

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CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की, सरकार ने मान ली छात्रों की सभी मांगें

प्रशासन के साथ बातचीत के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, “हमारी सभी मांगें मान ली गई हैं, इसलिए हम प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे तुरंत हट जाएं और शांतिपूर्वक घर लौट जाएं. हम आपको अपनी भविष्य की रणनीति या किसी अन्य मुद्दे के बारे में जानकारी देंगे. लेकिन हम प्रदर्शनकारियों से तुरंत हटने का अनुरोध करते हैं.” तय की गई शर्तों को तय समय-सीमा के भीतर लागू किया जाएगा : सौरव दास केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के सौरव दास ने कहा, “CJP यह घोषणा करता है कि हम अच्छे विश्वास और इस समझ के साथ अपना आंदोलन वापस ले रहे हैं कि तय की गई शर्तों को तय समय-सीमा के भीतर लागू किया जाएगा.” नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP डेलिगेशन से मिलाया हाथ कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा अपना आंदोलन वापस लेने के बाद, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका से हाथ मिलाया. नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा : जेपी नड्डा CJP डेलिगेशन के साथ बातचीत के बारे में जेपी नड्डा ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, सौरभ दास और रांका जी के साथ उनकी तीसरे दौर की विस्तृत चर्चा हुई. उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर चार प्रमुख बिंदुओं का एक लिखित मसौदा लेकर आया था. जिसे प्रशासन ने मान लिया है. मुआवजे के संबंध में नड्डा ने कहा, “प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमारी भी सहानुभूति है. हम सभी ने कहा है कि नियमों और विनियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा; जो भी अधिकतम संभव होगा, वह उन्हें दिया जाएगा.” सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की मांगें आंदोलन के मामलों पर 4-सूत्रीय लिखित ड्राफ्ट सौंपा गया. बदले या प्रतिशोध की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए. पीड़ितों को मुआवजा मिले और 5-सूत्रीय मांग पत्र पर विचार हो. प्रशासन का फैसला आंदोलनकारियों पर कोई नई कार्रवाई या FIR दर्ज नहीं की जाएगी. दिल्ली या बीजेपी शासित राज्यों में दर्ज हो चुकी पुरानी FIRs की प्रतियां प्रतिनिधिमंडल को सौंपी जाएंगी. ये भी पढ़ें: सीजेपी प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा,कहा- राष्ट्रविरोधी ताकतों को रोकने के लिए उठाया ये कदम ये भी पढ़ें: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक बोले- यह लोकतंत्र की जीत, अब जवाबदेही से आगे सुधारों का समय ये भी पढ़ें: “कॉकरोच से पंगा न लें”: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी नहीं माने अभिजीत दीपके, अब रख दी ये शर्त ये भी पढ़ें: NEET पेपर लीक से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक: कब-कब, क्या-क्या हुआ? जानिए पूरी टाइमलाइन The post CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की, प्रशासन ने मान ली छात्रों की सभी मांगें appeared first on Naya Vichar.

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10वीं बार बैकफुट पर मोदी सरकार, 12 साल के कार्यकाल की वो बड़ी घटनाएं, जब आंदोलन जीता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की प्रशासन को अपने कार्यकाल के 12 वर्षों में कम से कम 9 बार बैकफुट पर आना पड़ा. नीट पेपर लीक 2026 मामले में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 10वां मामला है, जब मोदी प्रशासन को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे आंदोलनकारियों की मांग माननी पड़ी है. वर्ष 2014 से लेकर अब तक जिन राष्ट्रीय नीतियों, विधेयकों और अध्यादेशों पर मोदी प्रशासन को भारी विरोध या नेतृत्वक-सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा और अपने फैसले में बदलाव, संशोधन या पूर्ण वापसी करनी पड़ी है, उसकी पूरी लिस्ट यहां देखें. 1. तीन कृषि कानून (Farm Laws Repeal – 2021) मुद्दा : प्रशासन ने कृषि क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से 2020 में तीन नये कृषि कानून लागू किये थे. बैकफुट पर आने का कारण : पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत देशभर के किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से अधिक समय तक ऐतिहासिक आंदोलन किया. नतीजा : नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की. 2. भूमि अधिग्रहण अध्यादेश (Land Acquisition Ordinance – 2015) मुद्दा : मोदी प्रशासन अपने पहले कार्यकाल (वर्ष 2014-15) में वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश लेकर आयी थी, ताकि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण आसान हो सके. बैकफुट पर आने का कारण : विपक्ष और किसान संगठनों ने इसे ‘किसान विरोधी’ और ‘उद्योगपति समर्थक’ बताकर देशभर में जोरदार विरोध किया. नतीजा : प्रशासन को इस अध्यादेश को बार-बार जारी करने के बाद अंततः वापस लेना पड़ा और पुराने कानून को ही लागू रहने दिया गया. ये भी पढ़ें: धर्मतला हिंसा में 7 FIR दर्ज, शुभेंदु अधिकारी बोले – ऐसी सजा देंगे कि 3 पीढ़ियां नहीं भूलेंगी 3. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) लेटरल एंट्री (Lateral Entry Rollback – 2024) मुद्दा : अगस्त 2024 में UPSC ने बिना आरक्षण लागू किये ब्यूरोक्रेसी में सीधे संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के 45 पदों पर भर्ती का विज्ञापन निकाला था. बैकफुट पर आने का कारण : विपक्षी दलों के साथ-साथ NDA के सहयोगी दलों (जैसे जदयू और लोजपा) ने SC, ST और OBC के लिए आरक्षण न होने पर सख्त ऐतराज जताया. नतीजा : प्रशासन ने तुरंत कदम पीछे खींचते हुए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के जरिये UPSC को इस विज्ञापन को रद्द करने का निर्देश दिया. 4. वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill – 2024) मुद्दा : प्रशासन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियमों में बदलाव के लिए संसद में वक्फ संशोधन विधेयक लेकर आयी. बैकफुट पर आने का कारण : मुस्लिम संगठनों, विपक्षी दलों और सहयोगी दलों के भारी दबाव के कारण प्रशासन संसद में इसे सीधे पास कराने की स्थिति में नहीं रही. नतीजा : प्रशासन ने विधेयक को पारित कराने की बजाय विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लिया. ये भी पढ़ें: सीजेपी प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा,कहा- राष्ट्रविरोधी ताकतों को रोकने के लिए उठाया ये कदम 5. ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज बिल ड्राफ्ट (Broadcasting Services Bill – 2024) मुद्दा : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने के लिए एक मसौदा (ड्राफ्ट) विधेयक तैयार किया था. बैकफुट पर आने का कारण : स्वतंत्र पत्रकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल राइट्स ग्रुप्स ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी और निजता पर हमला करार दिया. नतीजा : विवाद बढ़ता देख मंत्रालय ने मसौदे को पूरी तरह से वापस ले लिया और नये सिरे से परामर्श करने की बात कही. 6. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) पर सफाई (2019-2020) मुद्दा : नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित होने के बाद देशभर में राष्ट्रव्यापी NRC लागू करने को लेकर चर्चाएं तेज हो गयीं थीं. बैकफुट पर आने का कारण : दिल्ली चुनाव के बीच शाहीन बाग में इसके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू हुआ. शाहीन बाग के साथ-साथ असम और पूर्वोत्तर में भी विरोध और सामाजिक तनाव का माहौल बन गया. नतीजा : गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री ने संसद व सार्वजनिक मंचों से स्पष्टीकरण दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर NRC लागू करने की फिलहाल कोई योजना या खाका नहीं है. 7. पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS – 2024) मुद्दा : न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को लेकर केंद्र और राज्य प्रशासन के कर्मचारियों का लंबे समय से विरोध चल रहा था. कई राज्यों में यह चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गया था. बैकफुट पर आने का कारण : प्रशासनी कर्मचारियों का लगातार दबाव और चुनावी नुकसान का डर. नतीजा : प्रशासन ने NPS में सुधार करते हुए एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को मंजूरी दी, जिसमें अंतिम आहरित वेतन के 50 प्रतिशत की गारंटीकृत पेंशन का प्रावधान किया गया. 8. अग्निपथ योजना में रियायतें (Agnipath Scheme Adjustments – 2022) मुद्दा : सेना में 4 साल की शॉर्ट टर्म कमिशनिंग यानी अल्पकालिक भर्ती के लिए ‘अग्निपथ योजना’ शुरू की गयी थी. बैकफुट पर आने का कारण : बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना समेत देश के कई राज्यों में युवाओं ने हिंसक प्रदर्शन किये. रेल-सड़क यातायात ठप कर दिया. नतीजा : प्रशासन ने योजना रद्द तो नहीं की, लेकिन पहले बैच के लिए आयु सीमा 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष कर दी. CAPF और असम राइफल्स में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण व छूट का ऐलान किया. 9. शिक्षा और विश्वविद्यालय संबंधी नीतियां (Education Sector Rollbacks) मुद्दा : दिल्ली विश्वविद्यालय फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP – 2014). बैकफुट पर आने का कारण : मोदी प्रशासन के सत्ता में आते ही छात्र संगठन ABVP और अध्यापकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP – 2014) के विरोध में जबर्दस्त प्रदर्शन किया. नतीजा : उच्च शिक्षण संस्थानों के नये नियमों UGC इक्विटी रूल्स / दिशा-निर्देश पर विभिन्न वर्गों और छात्रों के विरोध के बाद प्रशासन को पुनर्विचार या समीक्षा का रुख अपनाना पड़ा. 4 वर्षीय पाठ्यक्रम को रद्द कर 3 वर्षीय मॉडल लागू किया गया. 10. नीट पेपर लीक 2026 (NEET UG Paper Leak 2026) मुद्दा : मेडिकल में एडमिशन के लिए होने वाले एंट्रेंस टेस्ट NEET UG 2026 के पेपर

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Video: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर शुरू हुआ जश्न

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अभिजीत दिपके ने कहा, “यह इस्तीफा इस बात का सबूत है कि अगर आप लोग डरते नहीं हैं, अगर आप लोग इस प्रशासन के सामने झुकते नहीं हैं, तो हम किसी का भी इस्तीफा ले सकते हैं.” जंतर-मंतर पर छात्र मना रहे जश्न धर्मेंद्र प्रधान के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद जंतर-मंतर पर छात्र जश्न मनाने लगे हैं. CJP के अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने अपने समर्थक छात्रों को प्रधान के इस्तीफे की जानकारी दी. जैसे ही दीपके ने बताया कि शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है, इस बात को सुनते ही छात्र जश्न मनाने लगे. छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से प्रदर्शन कर रहा है और प्रधान का इस्तीफा उसकी प्रमुख मांगों में शामिल था. युवाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष बेकार नहीं जाएगा : सीजेपी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से लिखा, “मैंने पहले ही कहा था कि युवाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष बेकार नहीं जाएगा.” छात्रों के प्रदर्शन का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, इसलिए दिया इस्तीफा : प्रधान धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र में लिखा, ‘‘पिछले 10 दिन का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है.’’ ‘‘जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, हिंदुस्तान के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे शिशु अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है.’’ – धर्मेंद्र प्रधान The post Video: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की समाचार मिलते ही जंतर-मंतर पर शुरू हुआ जश्न appeared first on Naya Vichar.

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सीजेपी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा,कहा- राष्ट्रविरोधी ताकतों को रोकने के लिए उठाया ये कदम

छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ी समाचार है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा, “यह सुनिश्चित करने के लिए कि जंतर-मंतर और देश भर के हालात का फायदा देश-विरोधी तत्व न उठा सकें, देश एकजुट रहे, और हिंदुस्तान के छात्र कानूनी पेचीदगियों में न फंसें बल्कि अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें, मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है.” युवाओं का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे : प्रधान अपने इस्तीफे के पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे सदैव देश की प्रजातांत्रिक शक्ति और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते आए हैं. पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे व्यथित थे. “देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है. जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्रविरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और हिंदुस्तान के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.” प्रधान ने NEET-UG परीक्षा पर दी सफाई इस्तीफे पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने संपन्न हुई NEET-UG परीक्षा के पूरे घटनाक्रम का ब्योरा भी साझा किया. 3 मई 2026 की परीक्षा में गड़बड़ी: 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितता सामने आने पर प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी, परीक्षा रद्द की और पुन: परीक्षा आयोजित की. इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-Based Test) मोड में कराने का फैसला लिया गया. 21 जून को दोबारा परीक्षा: केंद्र, राज्य प्रशासनों और जिला प्रशासन के सहयोग से 21 जून 2026 को 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की गई. 16 जुलाई के परिणाम: 16 जुलाई को घोषित नतीजों में गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कई मेधावी छात्रों को सफलता मिली. कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की : धर्मेंद्र प्रधान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पहले ही दिन से उन्होंने इस पूरी परिस्थिति की जिम्मेदारी ली थी और संकल्प लिया था कि किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान परीक्षा माफिया के कारण नहीं होने देंगे. हालांकि, उन्होंने अफसोस जताया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधा डालने की कोशिश की, जिससे उनका मन व्यथित हुआ. प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा सुधारों और छात्रों के हित में अपने समर्पण का जिक्र किया. उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की. इसके अलावा, उन्होंने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी आभार माना. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी और भगवान श्री जगन्नाथ जी के आशीर्वाद से वे भविष्य में भी हिंदुस्तान माता, ओडिशा की जनता तथा युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहेंगे. The post सीजेपी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा,कहा- राष्ट्रविरोधी ताकतों को रोकने के लिए उठाया ये कदम appeared first on Naya Vichar.

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NEET पेपर लीक से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक: कब-कब, क्या-क्या हुआ? जानिए पूरी टाइमलाइन

Dharmendra Pradhan : NEET-UG 2026 पेपर लीक ने सिर्फ एक परीक्षा पर सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि देश की पूरी परीक्षा व्यवस्था को बहस के केंद्र में ला दिया. लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले ने देखते ही देखते राष्ट्रीय छात्र आंदोलन का रूप ले लिया. पेपर लीक की समाचारों और परीक्षा रद्द होने के बाद 20 से ज्यादा छात्रों के आत्महत्या करने की समाचारें भी सामने आईं, जिससे पूरे देश में गुस्सा और बढ़ गया. 20 जून को शुरू हुआ CJP का आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का अभियान बन गया. इस दौरान भूख हड़ताल, संसद मार्च, पुलिस कार्रवाई, विपक्ष का समर्थन और प्रशासन के साथ बातचीत हुई. आखिरकार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. जानिए इस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन. ये भी पढ़ें : सीजेपी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा 3 मई: NEET-UG 2026 का पेपर लीक 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा का पेपर बड़े पैमाने पर लीक होने का दावा सामने आया. जांच में पता चला कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर एक डिजिटल गेस पेपर वायरल हुआ था, जिसके 140 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे. इस खुलासे के बाद देशभर में छात्रों ने परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी. 12 मई: NTA ने परीक्षा रद्द की लगातार बढ़ते विवाद और जांच के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. बाद में 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई. इसी दौरान कई राज्यों में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. ये भी पढ़ें : CJP Protest Live : धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल, CJP लगातार कर रही थी पद छोड़ने की मांग 20 जून: जंतर-मंतर से शुरू हुआ CJP का आंदोलन 20 जून को Cockroach Janata Party (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू किया. इस आंदोलन का नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे थे. संगठन की मुख्य मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, परीक्षा व्यवस्था में सुधार हो और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो. 28 जून: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन के समर्थन में आए और 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठ गए. उनके जुड़ने के बाद आंदोलन को देशभर में और ज्यादा समर्थन मिलने लगा. बाद में AISA के कई छात्र नेता भी भूख हड़ताल में शामिल हुए. 18 जुलाई: पुलिस ने वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया 18 जुलाई को पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया. उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया. इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा और प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती गई. 20 जुलाई: संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन CJP ने ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया. देशभर से हजारों छात्र दिल्ली पहुंचे. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की, आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया. कई वीडियो सामने आए, जिनमें छात्रों पर बल प्रयोग होता दिखाई दिया. इस कार्रवाई के बाद देशभर में बहस तेज हो गई. इसी दौरान संसद का मानसून सत्र भी विपक्ष के हंगामे के कारण बार-बार बाधित होता रहा. आंदोलन को मिला कई बड़ी हस्तियों का समर्थन पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन को कई नेतृत्वक दलों के साथ-साथ फिल्म जगत की हस्तियों का भी समर्थन मिला. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी ने छात्रों का पक्ष रखा. वहीं सलमान खान, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, प्रकाश राज समेत कई चर्चित हस्तियों ने भी आंदोलन के समर्थन में बयान दिए. इससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया. View on Instagram 20 जुलाई: संसद का मानसून सत्र शुरू, विपक्ष ने किया प्रशासन पर हमला धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी रहा. इससे सीजेपी के प्रदर्शन को और मजबूती मिली. इसके ठीक बाद राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अखिलेश यादव सहित कई सांसद पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए थे. जहां से पुलिस ने कार्रवाई की और सभी सांसदों को हिरासत में ले लिया गया. 23 जुलाई: सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल केंद्र प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 23 जुलाई को सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी. हालांकि CJP ने साफ कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं. RSS प्रमुख ने कहा- बच्चों से बातचीत जरूरी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने 25 जुलाई को एक बयान दिया. जिसमें उन्होंने कहा कि छात्रों को आदेश देने के बजाय प्रशासन को उनसे बातचीक करनी चाहिए. View on Instagram 25 जुलाई: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लगातार 36 दिनों तक चले आंदोलन, विपक्ष के दबाव और देशभर में बढ़ते विरोध के बीच 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इसे CJP की पहली और सबसे बड़ी मांग पूरी होने के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि संगठन ने कहा है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. अब उनकी मांग है कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार किए जाएं, पेपर लीक के दोषियों को सख्त सजा मिले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो. हालांकि जंतर-मंतर सहित देश भर में छात्र और सीजेपी समर्थक जश्न मनाते नजर आ रहे हैं. The post NEET पेपर लीक से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक: कब-कब, क्या-क्या हुआ? जानिए पूरी टाइमलाइन appeared first on Naya Vichar.

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