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6 राज्यों के बदले गए गवर्नर: प्रकाश माथुर को केरल, आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को 6 राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति की है. उन्होंने कुछ राज्यपालों का तबादला भी किया है. इस बदलाव के तहत ओम प्रकाश माथुर को केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, ब्रज मोहन राम को ओडिशा, डॉ सुधा यादव को कर्नाटक और डॉ ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. वहीं, दुष्यंत गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल बनाया गया है. इन नियुक्तियों से कई राज्यों में राजभवन की जिम्मेदारियों में बदलाव होगा. 1. ओम प्रकाश माथुर: संगठन में लंबा अनुभव राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर गोवा की नेतृत्व के अनुभवी नेता हैं. वे गोवा विधानसभा के सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष और राज्य प्रशासन में मंत्री रह चुके हैं. विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए गोवा विधानसभा में पेपरलेस व्यवस्था लागू करने की पहल के लिए भी उनकी चर्चा हुई. वे हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल रह चुके हैं. जनवरी 2025 में केरल के राज्यपाल बने अर्लेकर को अब तमिलनाडु की जिम्मेदारी दी गई है. 3. ब्रज मोहन राम: ओडिशा के नए राज्यपाल ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वे झारखंड का वरिष्ठ भाजपा नेता हैं. उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा घोषित 6 राज्यों के राज्यपालों के फेरबदल का हिस्सा है. The post 6 राज्यों के बदले गए गवर्नर: प्रकाश माथुर को केरल, आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी appeared first on Naya Vichar.

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मां चंद्रघंटा के दस हाथों में कौन-कौन से अस्त्र हैं, जानें हर प्रतीक का धार्मिक महत्व

Maa Chandraghanta Puja: कल यानी 13 अक्तूबर 2026 को शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी. माता का यह स्वरूप साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक माना जाता है. उनके मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा सुशोभित है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता का स्वरूप भक्तों को भय से मुक्ति दिलाने और बुरी शक्तियों से रक्षा करने का संदेश देता है. मां चंद्रघंटा के दस हाथों में धारण किए गए अस्त्र-शस्त्र और अन्य प्रतीकों का भी विशेष महत्व है. मां चंद्रघंटा के दस हाथों में कौन-कौन से अस्त्र हैं? धार्मिक चित्रणों में मां चंद्रघंटा को दस भुजाओं वाली देवी के रूप में दिखाया जाता है. उनके हाथों में त्रिशूल, तलवार, गदा, धनुष, बाण, कमल, कमंडल, घंटा और अन्य दिव्य आयुध या प्रतीक दिखाई देते हैं. अलग-अलग परंपराओं और चित्रों में इन वस्तुओं का संयोजन थोड़ा अलग हो सकता है. इसलिए हर चित्र में सभी दस हाथों में एक जैसे अस्त्र होना जरूरी नहीं है. त्रिशूल और तलवार का धार्मिक महत्व मां चंद्रघंटा के हाथों में मौजूद त्रिशूल को शक्ति और बुरी शक्तियों के नाश का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह मनुष्य को भय, अहंकार और नकारात्मकता से लड़ने की प्रेरणा देता है. वहीं, तलवार ज्ञान, विवेक और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक है. इसका संदेश है कि इंसान को कठिन परिस्थितियों में भी सही और गलत के बीच अंतर समझना चाहिए. गदा, धनुष और बाण क्या संदेश देते हैं? गदा शक्ति, साहस और दृढ़ता का प्रतीक मानी जाती है. धनुष और बाण लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने, अनुशासन बनाए रखने और चुनौतियों का सामना करने का संदेश देते हैं. इन प्रतीकों से यह सीख मिलती है कि जीवन में केवल ताकत ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेना भी जरूरी है. कमल, कमंडल और घंटा का महत्व कमल पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है. यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी मन को स्वच्छ और विचारों को सकारात्मक रखा जा सकता है. कमंडल को तप, संयम और साधना से जोड़कर देखा जाता है. वहीं, घंटा देवी की आराधना, जागरूकता और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक माना जाता है. मां के मस्तक पर विराजमान अर्धचंद्र भी शीतलता और मन पर नियंत्रण का भाव दर्शाता है. ये भी पढ़ें: मां चंद्रघंटा के मस्तक पर क्यों सजा है आधा चंद्रमा, जानें इसका रहस्य पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में देवी के अस्त्रों का महत्व मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत वर्णित देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में देवी दुर्गा के प्राकट्य और महिषासुर जैसे असुरों से युद्ध का वर्णन मिलता है. इसमें देवताओं द्वारा देवी को विभिन्न दिव्य अस्त्र प्रदान किए जाने की कथा भी है. इन अस्त्रों के माध्यम से देवी की शक्ति और धर्म की रक्षा का भाव सामने आता है. हालांकि, मां चंद्रघंटा के दसों हाथों में मौजूद वस्तुओं की एक ही, सर्वमान्य सूची सभी ग्रंथों में नहीं मिलती. इस तरह मां चंद्रघंटा का स्वरूप केवल युद्ध और शक्ति तक सीमित नहीं है. उनके अस्त्र-शस्त्र साहस, विवेक, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देते हैं. The post मां चंद्रघंटा के दस हाथों में कौन-कौन से अस्त्र हैं, जानें हर प्रतीक का धार्मिक महत्व appeared first on Naya Vichar.

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ऋषभ पंत की जगह टीम इंडिया ‘A’ में जमशेदपुर के लाल कुमार कुशाग्र की एंट्री, मियांदाद का रिकॉर्ड तोड़कर आए थे चर्चा में

जमशेदपुर : झारखंड और लौहनगरी जमशेदपुर के स्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए क्रिकेट के गलियारे से बेहद गौरवशाली समाचार सामने आई है. राज्य के प्रतिभाशाली युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को न्यूजीलैंड दौरे पर जाने वाली हिंदुस्तान ‘ए’ (India A) टीम में शामिल कर लिया गया है. कुशाग्र को टीम के स्टार विकेटकीपर ऋषभ पंत के बैकअप के तौर पर शुरुआती दो मुकाबलों के लिए हिंदुस्तानीय दल में जगह दी गई है. ईरानी कप में चोटिल हुए ऋषभ पंत स्टार क्रिकेटर ऋषभ पंत को ईरानी कप में रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी के दौरान बाएं कंधे (साइड स्ट्रेन) में खिंचाव की समस्या आ गई थी. बीसीसीआई (BCCI) की मेडिकल टीम की निगरानी में उनके रिहैबिलिटेशन और फिटनेस को देखते हुए बोर्ड ने उन्हें शुरुआती दो मैचों से आराम देने का फैसला किया. इसी मौके पर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने घरेलू सर्किट में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और चुस्त विकेटकीपिंग से प्रभावित करने वाले जमशेदपुर के कुमार कुशाग्र पर दांव लगाया. घरेलू क्रिकेट में लगातार धमाकेदार प्रदर्शन और मैच जिताऊ पारियां कुमार कुशाग्र पिछले कुछ समय से घरेलू क्रिकेट में लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं. रणजी ट्रॉफी में झारखंड को क्वार्टर फाइनल तक ले जाने से लेकर ईस्ट जोन को दलीप ट्रॉफी जिताने में उन्होंने मैच विनर की भूमिका निभाई. साथ ही सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी विजेता टीम में भी वे मुख्य स्तंभ रहे. आईपीएल नीलामी में 7.20 करोड़ रुपये की बड़ी बोली हासिल करने वाले कुशाग्र दबाव की परिस्थितियों में लंबी और आक्रामक पारियां स्पोर्ट्सने में माहिर हैं. जब 17 साल की उम्र में तोड़ा था मियांदाद का रिकॉर्ड कुशाग्र साल 2022 में उस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी के प्री-क्वार्टर फाइनल मैच में नगालैंड के खिलाफ 250 रनों की ऐतिहासिक मैराथन पारी स्पोर्ट्सी थी. महज 17 साल 141 दिन की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 250 रन बनाकर उन्होंने पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज जावेद मियांदाद (17 साल 311 दिन) का दशकों पुराना विश्व रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया था. झारखंड के ही ईशान किशन ने 18 साल 111 दिन में यह कारनामा किया था. पिता बोले – 5 साल की उम्र से देखा था यह सपना कुशाग्र के हिंदुस्तानीय ‘ए’ टीम में चुने जाने की समाचार जैसे ही कदमा स्थित उनके आवास पर पहुंची, परिवार में जश्न का माहौल बन गया. वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त पिता शशिकांत ने नया विचार को बताया – वे बेटे को हमेशा से बड़ा क्रिकेटर बनाना चाहते थे. उन्होंने 5 साल की उम्र से ही उसे खुद ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका बेटा जल्द ही सीनियर हिंदुस्तानीय टीम की जर्सी भी पहनेगा. वहीं, मां पुष्पा देवी और दोनों बहनों सारा और कलश ने भी कुशाग्र के चयन पर खुशी जाहिर करते हुए देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद जताई. The post ऋषभ पंत की जगह टीम इंडिया ‘A’ में जमशेदपुर के लाल कुमार कुशाग्र की एंट्री, मियांदाद का रिकॉर्ड तोड़कर आए थे चर्चा में appeared first on Naya Vichar.

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जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के लिए बैन, रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए देने होंगे ₹1.21 लाख

Ram Leela Maidan : नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन करना महंगा पड़ सकता है. जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटाए दिया गया है. वहीं इस साल रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए सिर्फ तीन तारीखें (29, 30 और 31 दिसंबर) ही उपलब्ध हैं. कितने होंगे खर्च? 12 एकड़ के इस मैदान में एक दिन की बुकिंग का खर्च 50,000 रुपये है, साथ ही 55,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट भी देनी होती है. इस तरह टैक्स मिलाकर शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये हो जाता है. इसके अलावा 16 हजार प्रशासन को टैक्स भी देने होंगे. इस तरह प्रदर्शन का कुल खर्च 1.21 लाख हो जाता है. क्या जंतर-मंतर पर भी देना पड़ता था खर्च? जंतर-मंतर पर ऐसे किसी पेमेंट की जरूरत नहीं होती थी, लेकिन रामलीला मैदान में जगह इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने पड़ते हैं. वहीं यहां बैठके की कैपेसिटी 50,000 लोगों की है. छोटे सभाओं के लिए नहीं लगेंगे पैसे रामलीला मैदान में 150 लोगों तक की सभाओं के लिए एक छोटा हिस्सा मुफ्त में उपलब्ध रहता है. दिल्ली पुलिस ने पूर्वी दिल्ली में बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को भी विरोध प्रदर्शन और धरने के लिए वैकल्पिक जगहों के तौर पर तय किया है. NOC की पड़ती है जरूरत बुकिंग का काम दिल्ली नगर निगम का हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट देखता है और इसके लिए दिल्ली पुलिस से ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लेना जरूरी है. जंतर-मंतर में नहीं होगा प्रदर्शन? दिल्ली के फेमस जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. नई दिल्ली में INDIA गठबंधन का सोमवार को सुप्रीम कोर्ट मार्च चर्चा में रहा. इसके पूर्व सीजेपी प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन करने को लेकर जंतर-मंतर की ओर बढ़ने का प्रयास किया था. जिसे रोकने के लिए प्रशासन ने पूरे दिल्ली पुलिस को लगा दिया था. इसके साथ ही तीन नए स्थानों को लिस्ट में जगह दी गई है, जहां लोग प्रदर्शन कर सकते हैं. दिल्ली पुलिस ने किया डी-नोटिफाई केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा जारी आदेश के तहत इस ऐतिहासिक विरोध स्थल को डी-नोटिफाई (de-notified) किया गया है. त्योहारी सीजन में रामलीला ग्राउंड की बुकिंग फुल नागरिक निकायों ने ये भी बताया कि आने वाले हफ्तों में दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के मद्देनजर ये मैदान अलग-अलग कार्यक्रमों और उत्सवों के लिए पहले से ही रिजर्व है. ये मैदान एक बिजी कमर्शियल एरिया में है, जिसके आसपास तीन बड़े अस्पताल और नगर निगम के मुख्यालय भी हैं. बड़े आयोजनों के दौरान यहां की सड़कों पर भारी दबाव बढ़ जाता है, जिसका असर ट्रैफिक पर पड़ता है. ये भी पढ़ें: Watch Video : प्रियंका-नेहा के करीब पहुंचा था युवक, राहुल गांधी ने पीछे धकेला; वीडियो वायरल The post जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के लिए बैन, रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए देने होंगे ₹1.21 लाख appeared first on Naya Vichar.

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SIR पर अंतरिम रोक, वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर पाबंदी; INDIA ब्लॉक ने SC के सामने रखीं ये 8 मांगें

March For Democracy: याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से SIR से संबंधित चुनाव आयोग के फैसलों की न्यायिक जांच कराने, संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है. उन्होंने मामले का निपटारा होने तक चल रहे SIR पर अंतरिम रोक लगाने का भी अनुरोध किया है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की गई? SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग: याचिका में मामले का अंतिम निपटारा होने तक चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है. चुनाव आयोग की पूरी फाइलें सार्वजनिक हों: याचिकाकर्ताओं ने SIR से जुड़े फैसलों की पूरी फाइलें, एजेंडा, बैठकों के मिनट्स, आधिकारिक नोटिंग और दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की है. इसमें 24 जून, 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हैं. चुनाव आयोग के फैसलों की न्यायिक जांच हो: सुप्रीम कोर्ट से यह जांच कराने का अनुरोध किया गया है कि SIR से जुड़े फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित 2023 के कानून तथा टी. एन. शेषन बनाम हिंदुस्तान संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप लिए गए या नहीं. बिना नोटिस किसी वोटर का नाम नहीं कटे: याचिका में मांग की गई है कि किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले. हटाए गए वोटरों की सूची बूथ-वार जारी हो: याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने की मांग की है. इसमें नाम हटाने का कारण और संबंधित जनसांख्यिकीय जानकारी भी शामिल करने का अनुरोध किया गया है. ECINET और ERONET के लॉग्स सार्वजनिक हों: याचिका में इन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मतदाता सूची से संबंधित बदलावों और फैसलों के रिकॉर्ड यानी एक्सेस लॉग्स सार्वजनिक करने की मांग की गई है, ताकि प्रक्रिया की पारदर्शिता की जांच हो सके. स्वतंत्र ऑडिट समिति बनाई जाए: मतदाता सूची के डेटाबेस में नाम हटाने और अन्य बदलावों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है. SIR के हर फैसले का रिकॉर्ड रखा जाए: याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि चुनाव आयोग SIR से जुड़े हर फैसले को 2023 के कानून के अनुसार ले और उसके कारणों तथा कार्यवाही का विधिवत रिकॉर्ड यानी मिनट्स तैयार करे. याचिका दायर करने वाले 11 नेताओं के नाम राहुल गांधी – लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे – कांग्रेस अध्यक्ष सौगत रॉय – तृणमूल कांग्रेस अखिलेश यादव – समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव – राष्ट्रीय जनता दल सुप्रिया सुले – राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) संजय राउत – शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) डी. राजा – हिंदुस्तानीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) महुआ माझी – झारखंड मुक्ति मोर्चा एम. ए. बेबी – मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव ई. टी. मोहम्मद बशीर – इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ये भी पढ़ें: ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के बाद राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के 11 नेता पहुंचे SC, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के खिलाफ दाखिल की याचिका The post SIR पर अंतरिम रोक, वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर पाबंदी; INDIA ब्लॉक ने SC के सामने रखीं ये 8 मांगें appeared first on Naya Vichar.

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Hyundai Bayon से उठा पर्दा, 12.3 इंच की डुअल स्क्रीन और AI असिस्टेंट समेत मिलेंगे एडवांस्ड फीचर्स, 26 अक्टूबर को होगी लॉन्च

Hyundai ने आज हिंदुस्तान में अपनी नई Bayon से पर्दा उठा दिया है. कंपनी ने इसके फीचर्स, इंजन और इंटीरियर से जुड़ी कुछ डिटेल्स भी शेयर की हैं. इस नई क्रॉसओवर SUV को 26 अक्टूबर को लॉन्च किया जाएगा. हिंदुस्तानीय बाजार में इसकी जगह Venue और Creta के बीच होगी. हालांकि, Creta को भी अगले साल की शुरुआत में नया जनरेशन अपडेट मिलने वाला है. अपडेट के बाद यह SUV पहले से ज्यादा बड़ी हो सकती है. आइए जानते हैं कि इस नई SUV में क्या कुछ खास मिलने वाला है और कंपनी ने अब तक कौन-कौन सी डिटेल्स सामने रखी हैं. Hyundai Bayon: एक्सटीरियर डिजाइन की बात करें, तो Hyundai Bayon अपने सेगमेंट की दूसरी कारों के मुकाबले काफी मॉडर्न और हटकर लुक के साथ आती है. इसके फ्रंट में सिल्वर स्किड प्लेट और बंपर पर मोटी क्लैडिंग दी गई है. वहीं, इसके रेक्टेंगुलर LED हेडलैंप और ऊपर की तरफ मिलने वाली पतली LED DRLs फ्रंट लुक को और स्टाइलिश बनाती हैं. इन DRLs को ग्लॉस ब्लैक स्ट्रिप के जरिए आपस में जोड़ा गया है. साइड प्रोफाइल पर नजर डालें, तो यहां मोटी क्लैडिंग इसकी रोड प्रेजेंस को बेहतर बनाती है. इसके अलावा, अलग डिजाइन वाले 17-इंच के अलॉय व्हील्स कार के लुक में एक नया अंदाज जोड़ते हैं. बॉडी पैनल पर कई कट्स और क्रीज भी देखने को मिलते हैं. पीछे की तरफ उभरा हुआ मस्कुलर फेंडर, C-पिलर पर खास अंदाज में मुड़ती विंडो लाइन और लंबे रूफ रेल्स इसके डिजाइन को और दमदार बनाते हैं. कार के पिछले हिस्से में कंपनी ने ट्रेंड से थोड़ा हटकर डिजाइन अपनाया है. यहां आजकल की कई कारों की तरह कनेक्टेड टेललैंप्स नहीं मिलते, बल्कि पतली LED टेललाइट्स दी गई हैं, जिनके बीच ग्लॉस ब्लैक स्ट्रिप मिलती है. इसके अलावा, रियर स्पॉयलर और शार्क फिन एंटीना इसे प्रीमियम लुक देते हैं. वहीं, पीछे के बंपर पर भी मोटी क्लैडिंग दी गई है. Hyundai Bayon: इंटीरियर कार के डैशबोर्ड पर कर्व्ड डुअल-स्क्रीन सेटअप दिया गया है. वहीं, नीचे की तरफ पतले और वर्टिकल AC वेंट्स लगाए गए हैं, जिनके बीच में क्लाइमेट कंट्रोल के बटन मिलते हैं. इसके अलावा, कार में चार-स्पोक स्टीयरिंग व्हील दिया गया है, जिस पर Hyundai का Morse Code वाला लोगो मिलता है. केबिन को स्टाइलिश बनाने के लिए इसमें ब्लैक और व्हाइट कलर का डुअल-टोन थीम दिया गया है. इसके अलावा, दरवाजों पर मिलने वाले गोल आकार के डोर हैंडल और स्पीकर्स भी केबिन को बाकी कारों से थोड़ा अलग बनाते हैं. Hyundai Bayon: फीचर्स टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम और डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए 12.3 इंच की दो स्क्रीन वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और एप्पल कारप्ले Perplexity AI पर आधारित जेनरेटिव AI असिस्टेंट ऑटो-डिमिंग IRVM (इंटीरियर रियर-व्यू मिरर) ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल अडेप्टिव क्रूज कंट्रोल आगे की सीटों पर वेंटिलेशन की सुविधा OTA (ओवर-द-एयर) अपडेट के साथ कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी अपनी पसंद के मुताबिक ड्राइव मोड चुनने की सुविधा बोस का प्रीमियम साउंड सिस्टम वायरलेस फोन चार्जर आगे की तरफ 2 USB टाइप-C चार्जिंग पोर्ट रियर एसी वेंट्स ऑटो हेडलैम्प्स रेन-सेंसिंग वाइपर्स रियर सनशेड्स Hyundai Bayon: सेफ्टी सेफ्टी के मामले में भी Hyundai Bayon काफी दमदार साबित हो सकती है. सामने आई तस्वीरों में इस कार के साथ फ्रंट और रियर पार्किंग सेंसर, 360-डिग्री कैमरा और लेवल-2 ADAS जैसे फीचर्स देखने को मिले हैं. इसके अलावा, इसमें इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक (EPB) के साथ ऑटो-होल्ड फीचर भी मिलेगा. इन फीचर्स के अलावा, Hyundai Bayon में 6 एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), हिल होल्ड असिस्ट (HHA) और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) जैसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स भी मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इन सभी फीचर्स की ऑफिशियल कन्फर्मेशन होना अभी बाकी है. Hyundai Bayon: पावरट्रेन फीचर्स डिटेल्स इंजन 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल पावर 115 PS टॉर्क 144 Nm ट्रांसमिशन 6-स्पीड मैनुअल (MT) / CVT ऑटोमैटिक ड्राइवट्रेन फ्रंट-व्हील ड्राइव (FWD) ये भी पढ़ें: 625 km की रेंज, मसाज वाली सीटें और 9 एयरबैग… हिंदुस्तान में लॉन्च हुई Volvo की यह लग्जरी इलेक्ट्रिक SUV, जानें कीमत? The post Hyundai Bayon से उठा पर्दा, 12.3 इंच की डुअल स्क्रीन और AI असिस्टेंट समेत मिलेंगे एडवांस्ड फीचर्स, 26 अक्टूबर को होगी लॉन्च appeared first on Naya Vichar.

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UP Scholarship 2026: 15 अक्टूबर तक करा लें रिन्यूअल, नए आवेदन के लिए इस दिन तक मौका

UP Scholarship 2026: उत्तर प्रदेश में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स के लिए UP Scholarship 2026-27 से जुड़ा जरूरी अपडेट है. ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, ITI और डिप्लोमा जैसे कोर्स करने वाले पात्र स्टूडेंट स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं. जो स्टूडेंट पहले भी स्कॉलरशिप ले चुके हैं, उन्हें रिन्यूअल के लिए फॉर्म भरना होगा. वहीं, पहली बार आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स को फ्रेश फॉर्म भरना होगा. दोनों के लिए आखिरी तारीख अलग-अलग है. रिन्यूअल और नए आवेदन की लास्ट डेट UP Scholarship के तहत पहले से स्कॉलरशिप ले रहे स्टूडेंट्स को रिन्यूअल के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक आवेदन करना होगा. वहीं, पहली बार आवेदन करने वाले पात्र स्टूडेंट 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. रिन्यूअल वाले स्टूडेंट्स को 15 अक्टूबर तक फॉर्म की कॉपी अपने कॉलेज में भी जमा करनी है. नए आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स के लिए हार्ड कॉपी जमा करने की आखिरी तारीख 4 नवंबर 2026 बताई गई है. फॉर्म भरने से पहले अपने कोर्स और श्रेणी के लिए गाइडलाइन जरूर देख लें. कौन कर सकता है आवेदन? इस स्कॉलरशिप के लिए ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, ITI, डिप्लोमा और अन्य पात्र कोर्स करने वाले स्टूडेंट आवेदन कर सकते हैं. सामान्य वर्ग, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए उनकी योजना के नियमों के अनुसार आवेदन का मौका है. पात्रता के लिए पारिवारिक आय, कोर्स, कॉलेज और अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं. इसलिए सभी स्टूडेंट्स को एक जैसी पात्रता मानकर फॉर्म नहीं भरना चाहिए. आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल पर अपनी श्रेणी के नियम जांच लें. UP Scholarship के लिए आवेदन कैसे करें? ऑनलाइन आवेदन करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट scholarship.up.gov.in पर जाएं. Student सेक्शन में जाकर अपने कोर्स और श्रेणी के अनुसार स्कॉलरशिप का विकल्प चुनें. पहली बार आवेदन करने वाले स्टूडेंट Fresh Registration चुनें. पहले आवेदन कर चुके पात्र स्टूडेंट Renewal का विकल्प चुनें. मांगी गई व्यक्तिगत, शैक्षणिक और बैंक से जुड़ी जानकारी भरें. जरूरी दस्तावेजों और दर्ज की गई जानकारी को ध्यान से जांचें. फॉर्म सबमिट करके उसका प्रिंटआउट निकाल लें. निर्धारित तारीख के भीतर फॉर्म की कॉपी और जरूरी दस्तावेज अपने कॉलेज में जमा करें. फॉर्म भरने के बाद क्या करें? फॉर्म जमा करने के बाद आवेदन की स्थिति पर नजर रखें. कॉलेज और संबंधित विभाग आवेदन की जांच करते हैं. किसी जानकारी या दस्तावेज में गलती होने पर आवेदन अटक सकता है. इसलिए फॉर्म में नाम, बैंक विवरण और शैक्षणिक जानकारी सही भरें. कॉलेज में कॉपी जमा करने की प्रक्रिया भी समय पर पूरी करें. कहां मिलेगी पूरी जानकारी? UP Scholarship 2026-27 की आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और ताजा निर्देशों के लिए आधिकारिक वेबसाइट scholarship.up.gov.in पर जाएं. फ्रेश और रिन्यूअल आवेदन की तारीखों के साथ अपने कॉलेज में फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख भी जरूर चेक कर लें. ये भी पढ़ें: MCC Counselling क्या है? NEET UG और NEET PG में क्या अंतर, जानें रजिस्ट्रेशन से सीट अलॉटमेंट तक की प्रक्रिया The post UP Scholarship 2026: 15 अक्टूबर तक करा लें रिन्यूअल, नए आवेदन के लिए इस दिन तक मौका appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से क्यों हटाया? 3 पॉइंट्स में समझिए वजह

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन के लिए पहले से निर्धारित जगहों में से जंतर-मंतर को हटा दिया है. पुलिस के इस आदेश के बाद अब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन नहीं होंगे. पुलिस ने दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए तीन जगहों का चुनाव किया है. इनमें नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और शाहदरा का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं. यहां अहम सवाल यह है कि पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से क्यों हटाया और रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड को विरोध प्रदर्शन के लिए क्यों चुना? 1. सेंट्रल दिल्ली से दूर होगा विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर सेंट्रल दिल्ली में है, जिसके चलते यहां होने वाले विरोध प्रदर्शन पर दुनिया भर की नजर रहती है. इसके साथ-साथ दिल्ली के इसी इलाके में प्रशासनी और प्रशासनिक कार्यालय भी है. यहां होने वाले प्रदर्शन से ये जगह प्रभावित होते हैं. इसका एक कारण यह भी है कि देश में कानून बनाने वाली सबसे बड़ी संस्था संसद, जंतर-मंतर से करीब 2 किलोमीटर दूर है. जबकि रामलीला मैदान सड़क के रास्ते संसद से 6 किलोमीटर दूर है. बुराड़ी का मैदान संसद से करीब 23 किलोमीटर और शाहदरा का सीबीडी ग्राउंड करीब 14 किलोमीटर दूर है. 2. जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से सेंट्रल दिल्ली होता है प्रभावित दिल्ली पुलिस का कहना है कि सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन होने से राजधानी का सबसे अहम इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. जुलाई में हुए प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में भी ऐसा देखने को मिला. सेंट्रल दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का असर कनॉट प्लेस जैसे दिल्ली के दूसरे अहम इलाकों में भी देखने को मिल जाता है. लेकिन जंतर-मंतर के मुकाबले, शाहदरा या बुराड़ी में होने वाले विरोध प्रदर्शन का असर सेंट्रल दिल्ली तक पहुंचने की संभावना कम रहेगी. इसलिए विरोध प्रदर्शनों के लिए जिन तीन जगहों का चुनाव किया गया है उनमें से दो जगहें सेंट्रल दिल्ली से काफी दूर हैं. 3. प्रदर्शनकारियों की भीड़ जंतर-मंतर का इलाका तुलनात्मक रूप से छोटा है. इसके चलते यहां कम संख्या में भी लोगों का जमावड़ा भीड़ के रूप में दिखाई देता है और छोटा प्रदर्शन भी देखने में बड़ा प्रतीत होता है.छोटी जगह होने के चलते यहां जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करना भी थोड़ा मुश्किल होता है. उदाहरण के लिए, जंतर-मंतर पर करीब 3,000 लोग इकट्ठा हो सकते हैं, जबकि रामलीला मैदान में करीब 50,000, सीबीडी ग्राउंड में करीब 15,000 और बुराड़ी के मैदान में करीब 80,000 लोग आ सकते हैं. इसका मतलब है कि इन जगहों पर किसी प्रदर्शन को बड़ा दिखाने के लिए काफी बड़ी संख्या में लोगों को जुटाना पड़ेगा. ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर प्रदर्शन : गृह मंत्रालय को SC ने भेजा कारण बताओ नोटिस, 5 प्वाइंट्स में समझिए कोर्ट में क्या हुआ? जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से क्यों हटाया गया जानकारों की मानें तो नई जगहों को चुनने के पीछे दिल्ली पुलिस की मुख्य योजना यही है कि किसी भी विरोध प्रदर्शन को इतना बड़ा होने से पहले ही रोक दिया जाए कि वह सुर्खियों में आ जाए और देशभर का ध्यान खींचने लगे. इसके अलावा बुराड़ी और सीबीडी ग्राउंड में किसी प्रदर्शन को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल होगा, क्योंकि सेंट्रल दिल्ली के मुकाबले इन जगहों पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना कम है. The post दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से क्यों हटाया? 3 पॉइंट्स में समझिए वजह appeared first on Naya Vichar.

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‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के बाद राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के 11 नेता पहुंचे SC, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के खिलाफ दाखिल की याचिका

INDIA Bloc Protest : यह याचिका INDIA ब्लॉक के नेताओं और समर्थकों के सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने के बाद दायर की गई. विपक्षी दलों ने इस मार्च को ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया था. नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच होनी चाहिए. खरगे ने याचिका दायर करने की दी जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने याचिका दायर करने की जानकारी मीडिया को दी. उन्होंने कहा, हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. अपनी याचिका में, विपक्षी गठबंधन ने ECI के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी – को भी पक्षकार बनाया है. याचिका दायर करने वालों में कौन-कौन शामिल सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत 11 विपक्षी नेताओं के नाम हैं. इनमें तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव शामिल हैं. इसके अलावा शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं. याचिका में हिंदुस्तानीय निर्वाचन आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में किन-किन निर्देशों की मांग की गई है, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है. ये भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सारी याचिकाएं मंजूर, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के बाद दायर हुई याचिका याचिका दायर करने से पहले राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के लिए निकले थे. नेता और समर्थक पहले संविधान क्लब में जुटे. इसके बाद वे बसों से बाराखंभा रोड चौराहे तक पहुंचे और वहां से पैदल आगे बढ़े. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. इसके बाद कुछ नेता, जिनमें राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी शामिल थे, एक वाहन पर चढ़ गए. विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है. The post ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ के बाद राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के 11 नेता पहुंचे SC, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के खिलाफ दाखिल की याचिका appeared first on Naya Vichar.

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जीईसी समस्तीपुर के डॉ. दीपक कुमार मंडल लगातार तीन साल दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल

लगातार तीन साल दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल हुए जीईसी के डॉ. दीपक कुमार मंडल वर्ष 2024 से 2026 तक सूची में बनाई जगह, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शोध योगदान को मिली पहचान नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर। सरायरंजन प्रखंड के नरघोघी गांव स्थित प्रशासनी इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी), समस्तीपुर के प्रभारी प्राचार्य एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक कुमार मंडल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान का मान बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2024 से 2026 तक लगातार तीन वर्षों के लिए दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। उनकी इस उपलब्धि को शोध कार्यों, वैज्ञानिक योगदान और शैक्षणिक उत्कृष्टता की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है। डॉ. मंडल का नाम इंजीनियरिंग क्षेत्र में शोध करने वाले वैज्ञानिकों की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। उनके प्रमुख शोध क्षेत्र यांत्रिक अभियांत्रिकी हैं। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रोफाइल के अनुसार, उनकी वैश्विक रैंक 1,68,598 और संबंधित उपक्षेत्र में रैंक 1,608 है। वहीं, उनका एच-इंडेक्स 14 तथा एचएम-इंडेक्स 6 दर्ज है। ये सूचकांक शोध प्रकाशनों और उनके उद्धरणों के आधार पर वैज्ञानिकों के शोध प्रभाव का आकलन करने में उपयोग किए जाते हैं। शोध और वैज्ञानिक योगदान को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची एल्सेवियर के आंकड़ों और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के वैज्ञानिक प्रभाव संबंधी विश्लेषण पर आधारित है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर उनके अकादमिक योगदान का मूल्यांकन किया जाता है। डॉ. मंडल को लगातार तीन वर्षों तक इस सूची में स्थान मिलने से प्रशासनी इंजीनियरिंग कॉलेज, समस्तीपुर की शैक्षणिक उपलब्धियों को भी पहचान मिली है। यह उपलब्धि संस्थान में शोध, नवाचार और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विद्यार्थियों को मिलेगी प्रेरणा डॉ. मंडल की इस सफलता से संस्थान के विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को उच्चस्तरीय शोध कार्यों के लिए प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करने और संस्थान की अकादमिक पहचान मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

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