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चतरा में सिस्टम फेल, जज्बा पास: बेटी की शादी बचाने को ग्रामीणों ने खुद बनाई 2 दिन में सड़क

चतरा से दीनबंधू/धर्मेद्र गुप्ता की रिपोर्ट

Chatra News, चतरा : जब प्रशासन और प्रशासन सो जाए, तो जनता को खुद अपनी तकदीर बदलनी पड़ती है.” इस कहावत को हू ब हू सच कर दिखाया है चतरा जिले के अति सुदूर कुंदा प्रखंड अंतर्गत बौधाडीह पंचायत के हारुल गांव के ग्रामीणों ने. गांव तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता न होने के कारण एक गरीब ग्रामीण की बेटी की शादी टूटने की कगार पर पहुंच गई थी. दूल्हे वालों ने साफ कह दिया था कि गांव में सड़क नहीं है, इसलिए वे बारात लेकर नहीं आएंगे. इस मान-सम्मान की लड़ाई में पूरा गांव एकजुट हुआ और प्रशासनिक अनदेखी को तमाचा मारते हुए ग्रामीणों ने महज दो दिनों के भीतर श्रमदान और आपसी सहयोग से आधा किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क का निर्माण कर डाला, ताकि गांव की बेटी की डोली सम्मान के साथ विदा हो सके.

शादी से मुकर रहे थे लड़के वाले

पूरा मामला हारुल गांव के रहने वाले दीनाथ गंझू के परिवार से जुड़ा है. दीनाथ गंझू की पुत्री तिलवंती कुमारी की शादी तय हुई थी. लेकिन जब लड़के वालों (वर पक्ष) को पता चला कि हारुल गांव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क ही नहीं है और वहां तक गाड़ी नहीं जा सकती, तो उन्होंने शादी से इनकार करना शुरू कर दिया. बारात न लाने और रिश्ता तोड़ने की बात से लाचार पिता और परिवार के सामने दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जब यह बात पूरे गांव में फैली, तो ग्रामीणों की प्रतिष्ठा दांव पर लग गई. ग्रामीणों ने तुरंत गांव में एक आपात बैठक बुलाई और संकल्प लिया कि वे अपनी बेटी की शादी किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देंगे. इसके बाद ग्रामीणों ने खुद हाथ में कुदाल, गैंता और बेलचा उठाया और आपसी चंदे से एक जेसीबी (JCB) मशीन की व्यवस्था की. मात्र दो दिनों की दिन-रात की कड़ी मेहनत और सामूहिक श्रमदान से पथरीली पगडंडी को चलने लायक कच्ची सड़क में तब्दील कर दिया गया. जब सड़क बनने का भरोसा दिया गया, तब जाकर घर में शहनाई गूंजी.

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PMGSY योजना में ठेकेदार की मनमानी

ग्रामीणों ने बताया कि ऐसा नहीं है कि गांव के लिए सड़क की योजना नहीं आई थी, बल्कि प्रशासनिक शिथिलता और ठेकेदार की मनमानी के कारण विकास आधा किलोमीटर दूर ही दम तोड़ गया. 5 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खुटेर गांव से सखुआ पहाड़ तक पक्की सड़क का निर्माण स्वीकृत हुआ था. नियम के मुताबिक इसे हारुल गांव के भीतर तक आना था, लेकिन संवेदक ने मनमानी करते हुए मुख्य पक्की सड़क को गांव से आधा किलोमीटर दूर ही खत्म कर दिया.

ग्रामीण नारायण गंझू ने किया चौंकाने वाला खुलासा

ग्रामीण नारायण गंझू ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि जब 5 साल पहले ग्रामीणों ने सड़क को गांव के अंदर तक न लाने का विरोध किया था, तो ठेकेदार ने दबंगई दिखाते हुए सीधे-साधे आदिवासियों को ‘जेल भिजवाने की धमकी’ दे डाली थी. इस डर से सहमे ग्रामीणों ने आवाज उठाना बंद कर दिया और जिला प्रशासन ने भी कभी सुध नहीं ली.

बरसात में बन जाते हैं ‘कैदी’

ग्रामीण रघु गंझू ने बताया कि सड़क न होने से पूरा गांव नरकीय जीवन जीने को विवश है. अब तक पगडंडी के सहारे लोग बड़ी मुश्किल से मोटरसाइकिल गांव तक लाते थे. सबसे बदतर स्थिति बरसात के दिनों में होती है, जब पूरा इलाका कीचड़ में तब्दील हो जाता है. बारिश के दिनों में कोई भी वाहन गांव में नहीं घुस पाता. स्थिति यह होती है कि यदि किसी ग्रामीण के पास बाइक है, तो वह उसे आधा किलोमीटर दूर पक्की सड़क के किनारे ही ताला (Lock) मारकर भगवान भरोसे छोड़ देता है और पैदल गांव आता है. ऐसे में हमेशा गाड़ियों की चोरी होने का डर सताता रहता है. न तो कोई रिश्तेदार गांव आना चाहता है और न ही कोई मेहमान.

प्रशासन से पक्की सड़क की गुहार

अपनी मेहनत से बेटी की शादी तो ग्रामीणों ने संपन्न करा दी, लेकिन यह कच्ची सड़क बारिश के दिनों में दोबारा बह जाएगी. हारुल गांव के स्त्री, पुरुष और युवाओं ने चतरा जिला प्रशासन और उपायुक्त से मांग की है कि लापरवाही बरतने वाले इस ठेकेदारी पर कार्रवाई की जाए. साथ ही पीएमजीएसवाई योजना की जांच कराते हुए इस आधा किलोमीटर के टुकड़े को अविलंब पक्की सड़क से जोड़ा जाए, ताकि गांव को स्थाई रूप से इस अभिशाप से मुक्ति मिल सके.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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