Hot News

Exclusive: चाय बागान से लेकर होटल तक में निवेश: बिहार के इन भ्रष्ट अधिकारियों की काली कमाई जान उड़ जाएंगे होश

Exclusive: पटना. बिहार में भ्रष्टाचार के आरोपित लोकसेवकों की काली कमाई खपाने के तरीके में बदलाव सामने आया है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो और आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) की हालिया जांच और छापेमारी में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अधिकारियों की संपत्ति पटना और बिहार के दूसरे शहरों के अलावा पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तर प्रदेश तक फैली होने की जानकारी मिली है. खास बात ये भी है कि जमीन उन शहरों में ली गईं जो पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. जांच एजेंसियों का मानना है कि काली कमाई खपाने वाले अधिकारियों ने भविष्य की योजना ध्यान में रखकर निवेश तो किया लेकिन इसका खुलासा हो गया.

मुख्य बातें

  • बंगाल बना बिहार के भ्रष्ट अफसरों के काले धन का नया ठिकाना
  • सिलीगुड़ी से गंगटोक तक फैला है इनका काला कारोबार

यहां-यहां मिली संपत्ति

जांच के दौरान जमीन, फ्लैट, होटल और चाय बागानों में निवेश के दस्तावेज मिलने के साथ म्यूचुअल फंड, भविष्य निधि और बैंक की सावधि जमा (एफडी) में रकम लगाने के मामले भी सामने आए हैं. जांच एजेंसियों की कार्रवाई में पटना, दानापुर, सगुना मोड़, फुलवारीशरीफ और रूपसपुर जैसे इलाकों में संपत्ति खरीदने के अलावा सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और गंगटोक में निवेश के प्रमाण मिले हैं. कुछ मामलों में संपत्ति अधिकारियों की पत्नी या परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है.

पांच मामलों में करोड़ों के निवेश का खुलासा

  1. चंद्रशेखर सिंह : ग्रामीण कार्य विभाग, छपरा में कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह ने पत्नी के नाम सिलीगुड़ी में 9.2 डिसमिल जमीन खरीदी. जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये आंकी गई है. चंद्रशेखर सिंह के चार ठिकानों पर गुरुवार को विजिलेंस ने छापेमारी की थी.
  2. गौतम कुमार : किशनगंज के निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार के बारे में गंगटोक में होटल और सिलीगुड़ी के मिरिक में चाय बागान व बंगला खरीदने की जानकारी सामने आई है. इनकी 80 करोड़ की संपत्ति का खुलासा जांच में हुआ था.
  3. अमरेंद्र कुमार : सुपौल के जिला अवर निबंधक के ठिकानों पर छह मई को हुई छापेमारी में पटना के दीघा-आशियाना रोड और सिलीगुड़ी में करीब 10 करोड़ रुपये की जमीन-जायदाद व फ्लैट से जुड़े दस्तावेज मिले. उनकी पत्नी नीता कुमारी के नाम पर सिलीगुड़ी में वर्ष 2025 और 2026 में खरीदी गयी 25 कट्ठा जमीन की बाजार कीमत करीब चार करोड़ रुपये बतायी गयी. पटना स्थित फ्लैट की कीमत 65 लाख रुपये बतायी गयी, जबकि उसके इंटीरियर पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी सामने आई.
  4. अभिषेक रंजन : किशनगंज नगर थाना में इंस्पेक्टर अभिषेक रंजन के ठिकानों पर इओयू ने 14 अप्रैल को छापेमारी की थी. अभिषेक रंजन के ठिकानों से लगभग 55 करोड़ रुपये की आय से अधिक और बेनामी संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए थे. जांच में पता चला था कि अभिषेक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सिलीगुड़ी, दार्जीलिंग, दिल्ली, मुजफ्फरपुर, पटना और छपरा में अपने, अपने साले-साली और ससुराल पक्ष के अन्य रिश्तेदारों के नाम पर कीमती भूखंड और प्रॉपर्टी खरीदी है. दिल्ली में उसके 6 से 7 फ्लैट और कई ट्रकों के मालिकाना हक की जानकारी भी सामने आई थी.
  5. राजेश्वरी पांडे : गोपालगंज जिले में अपर जिला दंडाधिकारी के पद पर तैनात राजेश्वरी पांडे की करोड़ों की संपत्ति का पता चला था. आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने के बाद स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने 10 अक्तूबर को छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान बिहार के अलावा वाराणसी में जमीन होने के दस्तावेज मिले थे. उनकी पत्नी और बेटे के नाम पर पटना, वाराणसी व रोहतास में भी 12 प्लाट होने की जानकारी सामने आई थी. जिसकी शुरुआती अनुमानित कीमत 1.32 करोड़ रुपए आंकी गई थी.

इनकी संपत्ति का भी हो चुका खुलासा

  • आनंद कुमार विभूति : दरभंगा के बहादुरपुर के बीडीओ आनंद कुमार विभूति के मामले में उनकी पत्नी रितु आनंद के नाम पर दानापुर के आशोपुर में करीब 30 लाख रुपये के फ्लैट के दस्तावेज मिले. उनके नाम पर म्यूचुअल फंड में लगभग 70 लाख रुपये के निवेश की जानकारी भी सामने आई.
  • अरविंद कुमार चौधरी : लघु सिंचाई विभाग के रोहतास प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता के ठिकानों पर 30 जुलाई को हुई छापेमारी में दानापुर के दो महंगे फ्लैट के कागजात मिले. इनकी बाजार कीमत करीब एक करोड़ रुपये बतायी गयी. तलाशी में 637 ग्राम सोना, 21 बैंक पासबुक और म्यूचुअल फंड व बीमा पॉलिसियों से जुड़े 17 दस्तावेज भी मिले. इसके अलावा 14 छोटी एफडी में 8.45 लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली.
  • द्विजेंद्र कुमार मिश्र : तीन सितंबर को बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम के कार्यपालक अभियंता को 1.04 लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था. उनके रूपसपुर स्थित ठिकाने पर तलाशी में आसपास के इलाकों में करीब एक करोड़ रुपये की जमीन-जायदाद में निवेश के दस्तावेज मिले.

बिहार की ताजा समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

वित्तीय निवेश के जरिये भी रकम जमा

अन्य मामलों में उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड के पीपीएफ और म्यूचुअल फंड में 47.50 लाख रुपये और अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के परिवार के चार पीपीएफ खातों और दो एफडी में 29.48 लाख रुपये के निवेश की जानकारी मिली है. इन मामलों से स्पष्ट है कि जांच का दायरा अब केवल जमीन और मकानों तक सीमित नहीं है. एजेंसियों के लिए संपत्ति के वास्तविक मालिक, निवेश के स्रोत, घोषित आय और संपत्ति अर्जित करने के समय का मिलान करना भी महत्वपूर्ण है.

Also Read: बिहार के सीमांचल में डेमोग्राफी चेंज जारी, किशनगंज-अररिया समेत इन जिलों में निगरानी तेज, खुफिया एजेंसियां अलर्ट…

The post Exclusive: चाय बागान से लेकर होटल तक में निवेश: बिहार के इन भ्रष्ट अधिकारियों की काली कमाई जान उड़ जाएंगे होश appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top