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Explained : इमरान खान को देश छोड़ने के लिए क्यों कहा गया? प्रवासी भारतीयों के लिए क्या है भारत में नियम

मुंबई में 10 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होना, एक्टर इमरान खान की मुश्किलें बढ़ा गई हैं. भाजपा नेता किरीट सोमैया के शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने उन्हें 28 अक्टूबर तक हिंदुस्तान छोड़ने का आदेश दिया है. उन पर आरोप है कि एक विदेशी नागरिक होने के बावजूद वो, प्रदर्शन में भाग लेकर कानून का उल्लंघन कर रहे थे. हालांकि उनके ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड है, जिसकी मदद से वो हिंदुस्तान में काम करते और रहते हैं.

OCI कार्ड रखने वाले लोगों को हिंदुस्तान में रहते हुए किन नियमों का पालन करना होता है? और नियमों को तोड़ने पर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है? आसान भाषा में समझते हैं OCI कार्ड से जुड़े नियम और इमरान खान से जुड़े हालिया विवाद का पूरा मामला.

OCI क्या होता है और इससे क्या अधिकार मिलते हैं?

OCI ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (Overseas Citizen of India) का मतलब होता है हिंदुस्तान के प्रवासी नागरिक. आसान भाषा में कहें तो यह उन विदेशी नागरिकों के लिए एक खास पहचान है, जिनका हिंदुस्तान से पारिवारिक या पुश्तैनी संबंध रहा है. दरअसल, हिंदुस्तान में दोहरी नागरिकता का नियम नहीं है. इसलिए OCI कार्ड जारी किया है, हालांकि OCI कार्ड होने के बावजूद व्यक्ति हिंदुस्तानीय नागरिक नहीं बनता, वह अपने दूसरे देश का नागरिक ही रहता है.

OCI कार्ड होने से क्या फायदे मिलते हैं?

जिनके पास OCI कार्ड होते हैं उन्हें कूछ फायदे मिलते हैं. जैसे

  • हिंदुस्तान आने के लिए बार-बार वीजा लेने की जरूरत नहीं: OCI कार्डधारक को जीवनभर हिंदुस्तान आने-जाने के लिए मल्टीपल एंट्री वीजा मिलता है.
  • FRRO में रजिस्ट्रेशन से छूट: हिंदुस्तान में कितने भी समय तक रहने पर आम तौर पर विदेशी नागरिकों की तरह FRRO में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होती.
  • कुछ मामलों में हिंदुस्तानीयों जैसे अधिकार: पढ़ाई, कारोबार और कुछ तरह की संपत्ति से जुड़े मामलों में उन्हें हिंदुस्तानीय नागरिकों या NRI जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं. हालांकि, जमीन-जायदाद खरीदने पर कुछ पाबंदियां होती हैं.

OCI कार्डधारकों पर क्या पाबंदियां होती हैं?

मार्च 2021 में जारी विदेश मंत्रालय के अधिसूचना के अनुसार OCI कार्डधारकों को कुछ खास काम करने से पहले प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है. इनमें रिसर्च करना, धार्मिक प्रचार या तबलीग का काम करना, पर्वतारोहण, पत्रकारिता करना और कुछ खास प्रतिबंधित इलाकों में जाना शामिल है. हालांकि इन नियमों में नेतृत्वक विरोध प्रदर्शन या रैली में शामिल होने को ऐसी गतिविधि के रूप में साफ तौर पर नहीं बताया गया है, जिसके लिए हर बार पहले से अनुमति लेना जरूरी हो. OCI कार्डधारक हिंदुस्तानीय नागरिक नहीं होते, इसलिए उन्हें हिंदुस्तानीय नागरिकों जैसे नेतृत्वक अधिकार नहीं हैं. वे हिंदुस्तान में वोट नहीं डाल सकते और चुनाव नहीं लड़ सकते.

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OCI कार्डधारक को हिंदुस्तान छोड़ने के लिए कब कहा जाता है?

इमरान खान मामले में सवाल यह है कि क्या किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर OCI कार्डधारक को हिंदुस्तान छोड़ने के लिए कहा जा सकता है? इसका जवाब यह है कि OCI कार्डधारक द्वारा नियमों को तोड़े जाने पर प्रशासन उन्हें हिंदुस्तान छोड़ने का आदेश दे सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने भर से उसे देश छोड़ने के लिए कहा जा सकता है. इसे ऐसे समझिए….

  • OCI कार्ड होने के बावजूद व्यक्ति हिंदुस्तान का नागरिक नहीं बन जाता. वह अपने दूसरे देश का नागरिक रहता है. इसलिए हिंदुस्तान प्रशासन परदेशी नागरिकों से जुड़े कानूनों के तहत उसके हिंदुस्तान में रहने पर कुछ पाबंदियां लगा सकती है. सितंबर 2025 में लागू हुए नए आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत प्रशासन को विदेशी नागरिकों के हिंदुस्तान में रहने और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने के अधिकार मिले हैं.
  1. धारा 7: प्रशासन किसी विदेशी नागरिक को हिंदुस्तान में रहने या किसी खास इलाके में जाने से रोकने का आदेश दे सकती है।
  2. धारा 29: कुछ परिस्थितियों में, जैसे कानून या प्रशासनी आदेश का उल्लंघन होने पर या सुरक्षा से जुड़ी प्रतिकूल रिपोर्ट मिलने पर, विदेशी नागरिक को हिंदुस्तान से बाहर भेजने का आदेश दिया जा सकता है.

इसलिए सिर्फ किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि OCI कार्डधारक ने कानून तोड़ा है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान उसने क्या किया, कोई प्रशासनी आदेश तोड़ा या नहीं और सुरक्षा से जुड़ी कोई दूसरी बात है या नहीं, इन सबका महत्व हो सकता है. इमरान खान से पहले भी ऐसा मामला सामने आ चुका है

साल 2020 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पोलैंड के एक छात्र, कामिल सीडजिंस्की को हिंदुस्तान छोड़ने के लिए दिए गए नोटिस को रद्द कर दिया था. छात्र कोलकाता में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में आयोजित रैली में शामिल हुआ था. उस समय अदालत ने माना था कि सिर्फ नेतृत्वक रैली में शामिल होना, छात्र को हिंदुस्तान छोड़ने का आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था.

OCI कार्ड कब रद्द किया जा सकता है?

OCI कार्ड होने का मतलब यह नहीं है कि प्रशासन उसे कभी रद्द नहीं कर सकती. कुछ खास परिस्थितियों में हिंदुस्तान प्रशासन किसी व्यक्ति का OCI कार्ड रद्द कर सकती है. हालांकि, कानून के अनुसार OCI कार्ड रद्द करने से पहले संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने और सफाई देने का उचित मौका दिया जाता है.

यहां यह समझना भी जरूरी है कि OCI कार्ड रद्द करना और किसी व्यक्ति को हिंदुस्तान छोड़ने का आदेश देना, दोनों अलग-अलग कानूनी कार्रवाइयां हैं. किसी व्यक्ति को हिंदुस्तान छोड़ने का आदेश मिलने का यह मतलब नहीं है कि उसका OCI कार्ड भी रद्द हो गया है. इसी तरह, OCI कार्ड रद्द करने के लिए कानून में दिए गए आधार और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है.

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हिंदुस्तान छोड़ने की नोटिस मिलने के बाद क्या करेंगे इमरान खान?

इमरान खान, अभिनेता आमिर खान की बहन नुजहत खान के बेटे हैं. उनका जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन में हुआ था. जन्म से ही उनके पास अमेरिकी नागरिकता और अमेरिकी पासपोर्ट है. इमरान OCI कार्ड के जरिए हिंदुस्तान में रहते हैं और काम करते हैं. इमरान के खिलाफ कार्रवाई करने की वजह यह है कि उन्होंने हिंदुस्तान से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया. अधिकारियों का कहना है कि नए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत इमरान ने नियमों का उल्लंघन किया है, और उन्हें 28 अक्टूबर तक हिंदुस्तान छोड़ने का निर्देश दिया गया है. खान के पास इस नोटिस के खिलाफ कदम उठाने के कुछ कानूनी रास्ते हैं

  • खान FRRO या केंद्र प्रशासन के सामने आवेदन देकर कह सकते हैं कि उन्हें हिंदुस्तान छोड़ने का जो नोटिस दिया गया है, उसे वापस लिया जाए या उस पर दोबारा विचार किया जाए.
  • खान के पास दूसरा रास्ता हाई कोर्ट जाने का है. हिंदुस्तानीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत वे अदालत में याचिका दाखिल करके चुनौती दे सकते हैं कि उन्हें हिंदुस्तान छोड़ने का आदेश देना कानूनी रूप से सही है या नहीं.

जानकारी के लिए बता दें कि इमरान के वकील ने कहा है कि वो इस मामले में बंबई हाई कोर्ट जाएंगे. इस दौरान वो अदालत से यह मांग कर सकते हैं कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें हिंदुस्तान छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए. हालांकि, जब तक FRRO नोटिस वापस नहीं लेता या उसमें बदलाव नहीं करता, अथवा अदालत इस पर रोक नहीं लगाती या कोई दूसरी राहत नहीं देती, तब तक नोटिस लागू रहेगा.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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