Supreme Court on SIR: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार (15 अक्टूबर) को कई अहम मामलों पर सुनवाई हुई. इस दौरान प्रधान न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के मुद्दे पर कहा कि न्यायपालिका को कोई डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता.
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी नेताओं के अदालत तक मार्च करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की. इस मामले में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं से जवाब मांगा गया है.
सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने विपक्षी नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का मुद्दा उठाया. इस पर प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को धमकाकर या दबाव बनाकर प्रभावित नहीं किया जा सकता. अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्षी दल SIR को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
राहुल गांधी समेत 13 नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी से जवाब मांगा है. 12 अक्टूबर को दाखिल इस याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं.
याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (SP) की सुप्रिया सुले और शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत समेत अन्य शामिल हैं.
एक याचिकाकर्ता के आचरण पर CJI ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में संबंधित याचिकाकर्ता से उसके व्यवहार को लेकर सवाल किया जाएगा.
मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्या है मांग?
विपक्षी नेताओं ने याचिका में मांग की है कि किसी मतदाता का नाम बिना सूचना और सुनवाई का उचित अवसर दिए मतदाता सूची से न हटाया जाए. साथ ही हटाए गए नामों की सूची, हटाने के कारण और संबंधित विवरण बूथवार सार्वजनिक किए जाएं. याचिका में यह जांचने की भी मांग की गई है कि SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, साल 2023 के संबंधित कानून और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के अनुरूप हैं या नहीं.
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