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October 15, 2026

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अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस ने सुबह 5 बजे छोड़ा, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम

अंकिता की मां ने कहा कि जब तक सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें धरने पर बैठने की अनुमति नहीं मिलती है, तो वे अपने घरों में भूख हड़ताल करेंगी. वहीं, अंकिता के पिता ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशभर के लोग सड़कों पर उतरेंगे और इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगी. वीडियो में देखें अंकिता के माता-पिता ने क्या कहा- ये भी पढ़ें: सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत, तिहाड़ जेल में रखा गया, अजिंक्य शिंदे बोले- हम डरने वाले नहीं क्या है पूरा मामला? अंकिता भंडारी हत्याकांड: सितंबर 2022 में उत्तराखंड के वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. कथित VIP का विवाद: हत्याकांड के बाद से ही एक कथित VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे. क्योंकि अंकिता भंडारी की हत्या के पीछे मुख्य वजह रिजॉर्ट में ठहरे एक कथित VIP को ‘स्पेशल सर्विस’ देने के दबाव का विरोध करना बताई गई थी 2025 में फिर तेज हुई चर्चा: दिसंबर 2025 में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया. दुष्यंत गौतम का नाम: इन दावों और आरोपों में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम जोड़ा गया. गौतम ने आरोपों को गलत बताया और कानूनी कार्रवाई की. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनसे संबंधित कुछ सामग्री के प्रसार पर अंतरिम रोक लगाई थी. CBI जांच की मांग: कथित VIP की पहचान और भूमिका की जांच के लिए सीबीआई जांच की सिफारिश की गई. विरोध की वजह: अक्टूबर 2026 में दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद अंकिता के माता-पिता ने उनकी नियुक्ति रद्द करने की मांग की. उनका कहना है कि कथित VIP मामले की जांच पूरी होने तक नियुक्ति आगे नहीं बढ़नी चाहिए. इसी मुद्दे पर उन्होंने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया. The post अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस ने सुबह 5 बजे छोड़ा, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम appeared first on Naya Vichar.

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मुस्कान-साहिल को फांसी सुनाकर जज ने कूड़ेदान में फेंका पेन, नीला ड्रम केस में कोर्ट के फैसले की चर्चा

Meerut Blue Drum Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड ने एक बार फिर देश का ध्यान खींचा है. 14 अक्टूबर 2026 को जिला अदालत ने सौरभ की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया. अदालत की कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश की टिप्पणी और पेन को कूड़ेदान में फेंकने का घटनाक्रम भी सुर्खियों में रहा. महाहिंदुस्तान का जिक्र कर जज ने क्या कहा? आजतक और इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाने से पहले महाहिंदुस्तान का उल्लेख किया. उन्होंने अपराध की गंभीरता के अनुरूप दंड देना न्यायिक कर्तव्य बताया. अदालत में बाघ और जंगल का उदाहरण देते हुए कानून, समाज की सुरक्षा और व्यवस्था के बीच संबंध पर भी टिप्पणी की गई. फैसला सुनाने के बाद न्यायाधीश द्वारा इस्तेमाल किया गया पेन कूड़ेदान में फेंकने की घटना चर्चा का विषय बनी. हालांकि, इस घटनाक्रम को न्यायाधीश की व्यक्तिगत प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में ही समझना चाहिए; इसे किसी औपचारिक न्यायिक नियम का हिस्सा नहीं माना जा सकता. मुस्कान बनी कैदी नंबर 396, साहिल को मिला 395 सजा सुनाए जाने के बाद जेल के रिकॉर्ड में साहिल शुक्ला को कैदी नंबर 395 और मुस्कान रस्तोगी को कैदी नंबर 396 आवंटित किए गए. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सजा के बाद दोनों की निगरानी बढ़ाई गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दोनों ने उच्च न्यायालय में अपील करने की प्रक्रिया के बारे में जेल प्रशासन से जानकारी मांगी. क्या था मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड? यह मामला मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मार्च 2025 में सौरभ की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े कर सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिए गए थे. जांच के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया. अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी ठहराया था और 14 अक्टूबर को सजा सुनाई. 126 पेशियां और 22 गवाहों के बाद आया फैसला आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकदमे की सुनवाई के दौरान 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी. अदालत ने दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाते हुए दोनों को मौत की सजा दी. क्या अब फांसी की सजा पर अमल होगा? मृत्युदंड सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि सजा पर तुरंत अमल हो जाएगा. कानून के अनुसार, सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि की जरूरत होती है. इसके बाद उपलब्ध कानूनी उपायों के तहत अपील और अन्य कार्यवाही हो सकती है. इसलिए इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी. यह भी पढ़ें: UP Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का फरमान, 3 महीने में कराएं मतदान, प्रशासन के सामने अब दो रास्ते The post मुस्कान-साहिल को फांसी सुनाकर जज ने कूड़ेदान में फेंका पेन, नीला ड्रम केस में कोर्ट के फैसले की चर्चा appeared first on Naya Vichar.

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Exclusive: कैसेट 18 रुपये की, लोग देते थे 60 रुपये! अल्ताफ राजा ने सुनाए ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ के अनसुने किस्से

अल्ताफ राजा से बात हो और ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ का जिक्र न आए, ऐसा कैसे हो सकता है. आखिर इसी गाने ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. लेकिन इस गाने के पीछे की कहानी क्या है? कैसे एक गायक, जो कभी शादियों और उर्स में गाने के लिए घंटों सफर करता था, लोगों की जुबान पर चढ़ गया? बातचीत में अल्ताफ राजा ने अपने सफर के कई ऐसे किस्से सुनाए, जिनमें संघर्ष भी है, शायरी भी और कुछ दिलचस्प अनुभव भी. आपके घर में तो पहले से संगीत का माहौल था. क्या बचपन से ही तय था कि आपको गायक बनना है? मेरे माता-पिता दोनों कव्वाल थे. मेरी मां रानी रूपलता और पिता इब्राहिम इकबाल. घर में संगीत था, इसलिए बचपन से ही मेरा झुकाव भी उसी तरफ हो गया. मां ने हारमोनियम, ढोलक और गायकी की ट्रेनिंग के लिए प्रोत्साहित किया. संगीत मेरे लिए कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. लेकिन घर में संगीत का माहौल होने का मतलब यह नहीं था कि मेरे लिए रास्ता पहले से बना हुआ था. माता-पिता ने साफ कहा था कि हमारे संपर्क में लोग हैं, हम तुम्हें उनसे मिलवा सकते हैं, लेकिन काम तुम्हें खुद करना होगा. अपनी पहचान अपने दम पर बनानी पड़ेगी. यानी माता-पिता ने संगीत सिखाया, लेकिन काम दिलाने की जिम्मेदारी खुद आप पर छोड़ दी? हां, बिल्कुल. हमारा परिवार मिडिल क्लास था, लेकिन माता-पिता ने हमें कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी. इसलिए मेरे संघर्ष की कहानी को इस तरह नहीं बताना चाहिए कि हमने भूखे रहकर दिन गुजारे. ऐसा नहीं था. हां, काम पाने और अपनी पहचान बनाने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ी. मेरा पहला शो 1989 में हुआ था. जगह छोटी उदेपुर थी, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा के पास. उस समय कार्यक्रमों के लिए बहुत लंबा सफर करना पड़ता था. कभी जनरल क्लास में ट्रेन से जाते थे, कभी प्रशासनी बसों से. 12 से 18 घंटे तक का सफर भी करना पड़ता था. शादियों में गाते थे, उर्स में गाते थे. जहां मौका मिलता था, वहां पहुंच जाते थे. पहले शो के लिए कितने पैसे मिले थे? पहले शो के लिए 3,000 रुपये मिले थे. अब सुनने में यह रकम अच्छी लग सकती है, लेकिन टीम के लोगों, आने-जाने और बाकी खर्चों के बाद मेरे पास करीब 500 रुपये ही बचे. कार्यक्रम मिल जाना अलग बात है और उससे कुछ बचा पाना अलग. धीरे-धीरे यह सब समझ में आया. फिर रिकॉर्डिंग की दुनिया में एंट्री कैसे हुई? 1993 में मेरी मुलाकात वीनस के शकील नियाजी से हुई. उससे पहले भी मैं गा रहा था, लेकिन रिकॉर्डिंग के लिए मौका मिलना जरूरी था. मेरा पहला वॉइस टेस्ट पास नहीं हुआ. आवाज की पिच को लेकर दिक्कत थी. फिर दूसरी बार मैंने थोड़ी ऊंची पिच पर गाया और टेस्ट पास हो गया. इसी दौर में भक्ति संगीत भी गाया. 1993 में ‘सजदा रब को कर ले’ नाम का एक ट्रैक किया. एक पहले से मौजूद ट्रैक के शब्द बदलकर इसे तैयार किया गया था. करीब तीन-चार साल तक मैं इस तरह के गाने गाता रहा. अल्ताफ राजा (AI Generated) और फिर आया ‘तुम तो ठहरे परदेसी’. इस गाने ने आपकी जिंदगी बदल दी. इसकी शुरुआत कैसे हुई? एक टीवी चैनल पर मैंने यह गाना लाइव गाया था. उसकी रिकॉर्डिंग ज्यादा लोगों तक पहुंची और धीरे-धीरे गाने की पहचान बढ़ने लगी. कई बार ऐसा होता है कि आप गाना गा रहे होते हैं, लेकिन आपको खुद अंदाजा नहीं होता कि वह कितने लोगों तक पहुंचने वाला है. जब सोलो एल्बम करने की बात आई, तो क्या शुरू से ही इसका नाम ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ था? नहीं, पहले एल्बम का नाम ‘पंगा ले लिया’ रखा गया था. 1996 में सोलो एल्बम करने का फैसला हुआ था. उस समय गानों का एक कलेक्शन था, जिसमें ‘आवारा हवा का झोंका’, ‘मेरी याद आई’ और ‘दोनों ही मोहब्बत के जज्बात में जलते हैं’ जैसे गाने थे. बाद में डिस्ट्रीब्यूटर ने सुझाव दिया कि एल्बम का नाम ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ रखा जाए. लोगों के बीच यह गाना पहचाना जाने लगा था. उन्हें नाम सुनकर ही पता चल जाता कि एल्बम में कौन-सा गाना है. इसलिए नाम बदल दिया गया. उस समय तो कैसेट का जमाना था. क्या लोग आपके गानों की कैसेट खरीदने के लिए भी उत्साहित रहते थे? हां, कव्वाली में गाने के बाद हमारी टीम के लोग कैसेट बेचते थे. एक कैसेट की कीमत करीब 17-18 रुपये होती थी. कई बार लोग 50 या 60 रुपये भी दे देते थे. वे गाना अपने पास रखना चाहते थे. आज मोबाइल पर एक क्लिक में गाना सुन लेते हैं, लेकिन उस समय कैसेट खरीदने और उसे बार-बार सुनने का अपना अलग एक्सपीरियंस था. आपकी गायकी में गजल का रंग भी दिखाई देता है. क्या आप हमेशा से गजल गाना चाहते थे? मुझे गजलें पसंद थीं. मैं गजल गाना चाहता था, लेकिन माता-पिता समझाते थे कि इस लिमिटेड एक्सपोजर है. जगजीत सिंह, गुलाम अली, पंकज उधास और अनूप जलोटा जैसे बड़े नाम पहले से मौजूद थे. ऐसे में सिर्फ गजल के सहारे आगे बढ़ना आसान नहीं होता. उनकी बात अपनी जगह सही थी, लेकिन गजल का असर मेरी गायकी में हमेशा रहा. ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ की लय और मीटर में भी गजल जैसा एहसास है. इस गाने में शायरी भी इसकी लोकप्रियता की बड़ी वजह रही. इसके शेर कैसे चुने गए? ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ निजाम साहब ने लिखा था. गाने में शेरों का चुनाव भी जरूरी था. कई शेर थे, उनमें से देखना होता था कि कौन-सा शेर गाने के भाव के साथ बैठेगा. मेरे पिता को शायरी की अच्छी समझ थी. उनकी समझ और सलाह से भी मदद मिलती थी. मैं खुद भी शायरी पढ़ता था. स्थानीय शायरों की किताबें तलाशता था और लाइब्रेरी में उर्दू के डाइजेस्ट पढ़ता था. मुझे सिर्फ आसान शब्दों वाली शायरी तक सीमित नहीं रहना था. शेर का भाव समझना और उसे गाते समय आवाज में उतारना जरूरी लगता था. इस गाने के कुछ शेर आज भी लोगों को याद हैं. मसलन, अगस्त और दिसंबर वाला शेर हां, उसमें आता है, ‘माहे अगस्त में बरसात हो

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राघोपुर से आंखों देखी: 400 मीटर पैदल चलते तो नहीं होता हादसा, शाॅर्टकट में गयी 13 मासूमों की जान, जानें A टू Z

Vaishali Boat Accident : जब पूरा बिहार नवरात्र की धूम में मस्त था, उसी दौरान वैशाली जिले की एक घटना ने झकझोर कर रख दिया. जहां नाव सवार 20 लोग नदी में डूब गये.इस हादसे में 9 बच्चियों समेत 13 की मौत हो गयी. कुछ लोगों को गंभीर अवस्था में पटना एनएमसीएच में भर्ती कराया गया. यह घटना मंगलवार रात्रि वैशाली के राघोपुर स्थित रामपुर श्यामचंद गांव की है. जानिये…कैसे डूबी नाव, क्यों नहीं बचाया जा सका घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद नया विचार की टीम रामपुर गांव के लिए रवाना हो गयी. करीब 12.30 बजे रात में जब टीम गांव पहुंची तो वहां का मंजर देखकर हैरान रह गये. चारों तरफ लोगों की चीत्कार, चिख-पुकार सुनाई दे रहा था. स्त्रीएं, शिशु, बुजुर्ग, नवजवान सभी दहाड़ मारकर रो रहे थे. मामला सिर्फ तीन ही घर का था. तीन घर से 13 की मौत इनसानियत को झकझोर कर रख दिया. किसी का इकलौता चिराग बुझ गया तो कोई अपने संतान के भरोसे जीवन बीताने के लिए सपने संयोग रहा था, उसका सपना पलभर में मिट गया. चीत्कार से गूंज उठा था पूरा गांव रामपुर गांव में श्राद्धकर्म का भोज चल रहा था.उसी भोज में शामिल होने के लिए ये सभी नाव सवार होकर गये थे. खाना खाकर लौटने के दौरान यह हादसा हुआ.और 13 की जान चली गयी. रात करीब 7.30 के बाद से गांव पूरी तरह गमगीन माहौल में डूब गया. लोगों की आंखे नम हो गयी. ऐसे बच सकती थी मासूमों की जिदंगी जहां, कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था. वहां लोग पुल पार करके जा सकते थे. पुल पार कर जाने के दौरान लोगों को करीब 400 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती, नाव से सीधे यह दूरी आधा से भी कम पड़ रही थी. कार्यक्रम स्थल तक जाने के लिए लोगों को पुल पार करना पड़ता, कुछ देर आगे बढ़ने के बाद घुटने भर पानी पार करके आयोजन स्थल तक आसानी से पहुंच सकते थे. लेकिन नहीं गये. शॉर्टकट के कारण मासूमों की जिदंगी गंगा के पानी में समा गयी. नाव से जाने का क्यों किया फैसला? आयोजन स्थल से पीड़ित परिवारों का घर एकदम आमने-सामने है. बीच में एक सोता है. उसी सोता को पारकर सभी को भोज खाने जाना था, दूरी कम होने के कारण लोगों ने नाव से आयोजनस्थल तक जाने का फैसला किया. नाव प्रशासनी है. वह भी जर्जर हालात में,उसी नाव पर सवार होकर सभी गये थे. वापसी के दौरान नाव अनियंत्रित हो गयी, नाव में छेद होने के कारण पानी भी भरने लगा और अतंत: उसी सोता में नाव डूब गयी. डूबने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया. अधिकांश शिशु-बच्चियां सवार थी. कुछ युवक थे, जो तैरकर निकल गये, बच्चों के लिए तैरना संभव नहीं था. क्षमता से अधिक बैठे जर्जर नाव पर लोगों ने खुद ही पानी में उतकर बचाने की कोशिश की. तबतक देर हो चुकी थी. लोगों ने खुद से ही डूबे शिशु-बच्चियों को निकाला और करीब दो किमी दूर रामपुर पीएचसी ले गये, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया. पीएचसी की लचर व्यवस्था थी, सवाल पर डॉक्टरों ने कहा अगर जिंदा भी आते तो नहीं बचाया जा सकता था. नाव की क्षमता करीब 6 से 8 लोगों की है, लेकिन एक-एककर करीब 20 लोग सवार हो गये. किसे कहते है सोता, क्या हमेशा रहता है पानी? राघोपुर नदी के कटाव से गांव के पास से ही नदी का एक छोटा रूप निकला है. जिसे लोग सोता कहते हैं. लोगों ने बताया कि सोता में हमेशा पानी नहीं रहता, यह सूख जाता है. जब सोता सूख जाता है तब गांव के ही लोग वहां से मिट्टी काटकर ले जाते है. जिसके कारण और गड्ढा हो गया. हाल ही में आयी बाढ़ के पानी से पूरा सोता भर गया. बाढ़ का पानी तो निकल गया, लेकिन सोता में अभी भी पानी जमा है. राघोपुर पीएचसी में शवों का ढ़ेर लगा था. पीएचसी के बाहर ही टीन के शेड में शवों को रखा गया था. पीएचसी में ग्रामीणों की भारी भीड़ लगी थी. तिरहुत रेंज के वरीय अधिकारियों का जमावाड़ा लगा हुआ था. डीएम वर्षा सिंह भी देर रात तक पीड़ित परिजनों के बीच रहीं. लोगों ने कहा कि अगर मोटर बोट रहता तो नहीं घटती घटना. जानिये…कैसे पहुंचे पीएचसी और वहां क्या हुआ ? रामपुर पीएचसी में मौजूद डॉक्टरों से जब बातचीत की गयी तो उन्होंने बताया कि करीब 8.30 बजे रात ग्रामीण पहली बार पांच बच्चों को खुद से लेकर आये, जो पानी में डूबे थे, जैसे ही इलाज शुरू हुआ तब तक लगातार डूबे बच्चों को परिजन लेकर आते गये. देखते देखते 20 लोगों को 30 मिनट के अंदर अस्पताल लाए. जांच के दौरान 12 शिशु की मौत पीएचसी में ही हो गयी. बाकी को एनएमसीएच पटना रेफर किया गया. वहां भी एक की मौत हो गयी. बाकियों का इलाज किया जा रहा है. अस्पताल की व्यवस्था ठीक नहीं थी, बगल में नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है. सभी को टीन के शेड के नीचे रखा गया. इसी नाव पर सवार होकर गये थे सभी घटना में एक परिवार के पांच, दूसरे के सात और तीसरे परिवार से एक कुल 13 की मौत हुयी है. इन लोगों की जान गयी है. मृतकों की सूची में तीन सगी बहनें भी शामिल हैं. सुनीता कुमारी (13 वर्ष), पिता राज किशोर राय. अमृता कुमारी (16 वर्ष), पिता राज किशोर राय. अंकिता कुमारी (6 वर्ष), पिता राज किशोर राय. मीरा कुमारी (12 वर्ष), पिता रामनरेश राय. निशु कुमारी, पिता सत्येंद्र राय. अनिशा कुमारी (18 वर्ष), पिता सुरेंद्र राय. आर्यन कुमार, पिता गांधी राय. मोहन कुमार (14 वर्ष), पिता अखिलेश राय. पिंकी कुमारी (13 वर्ष), पिता डोगन राय. नमन कुमार (10 वर्ष), पिता मुकेश राय. सिकी कुमारी (16 वर्ष), पिता सुरेश राय. भोनू कुमारी (12 वर्ष), पिता रामप्रवेश राय. सोनम कुमारी, पिता नरेश राय. राष्ट्रपति, पीएम समेत कई नेताओं ने जताया दुख हालांकि घटना के बाद केंद्र प्रशासन से लेकर राज्य प्रशासन तक मुआवजे का ऐलान किया है. राष्ट्रपति, पीएम, सीएम समेत कई नेताओं ने संवेदना व्यक्त किया है. दिनभर स्थानीय नेता का पीड़ित परिवार से मिलने-जुलने का सिलसिला जारी रहा

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अभिजीत दीपके और मैरी मिलबेन के बीच जुबानी जंग तेज, सिंगर बोलीं- PM मोदी को अमेरिकी मदद की जरूरत नहीं

Mary Millben vs Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और अंतरराष्ट्रीय गायिका मैरी मिलबेन के बीच सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि वह अपने ही देश के नागरिकों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं. इसके जवाब में मैरी मिलबेन ने दीपके को प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर देश के विकास में योगदान देने की सलाह दी. अभिजीत दीपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर उठाए सवाल अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा कि हिंदुस्तान के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया है. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान अपने मुद्दों को खुद सुलझाने में सक्षम है. देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. दीपके की इस टिप्पणी पर मैरी मिलबेन ने जवाब दिया. उन्होंने दीपके से अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल अच्छे कामों में करने की अपील की. साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर हिंदुस्तान की प्रगति में सकारात्मक योगदान देने की सलाह दी. ‘पीएम मोदी को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं’ मैरी मिलबेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के समर्थन की जरूरत नहीं है. उन्हें देश के करोड़ों लोगों का समर्थन हासिल है. उन्होंने मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन, प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल के कार्यकाल और लगातार तीन बार चुनाव जीतने का जिक्र किया. मिलबेन ने दावा किया कि 2029 में भी मोदी को लोगों का समर्थन मिलेगा. उन्होंने दीपके को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन्हें सफलता नहीं मिली, तो अमेरिकी दानदाता उनका साथ छोड़ सकते हैं. मिलबेन ने यह भी कहा कि कानून के खिलाफ जाकर सफलता हासिल नहीं की जा सकती. मैरी मिलबेन ने CJP को मिलने वाली फंडिंग पर लगाए आरोप मैरी मिलबेन ने दावा किया कि अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी को अमेरिका से आर्थिक मदद मिल रही है. उनके मुताबिक, ऐसे लोग इस आंदोलन को पैसा दे रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हैं. मिलबेन ने आरोप लगाया कि कुछ दानदाता दुनिया के अलग-अलग देशों में रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाते हैं. इसके लिए वे उन लोगों का साथ लेते हैं, जिन्होंने संबंधित देशों में अमेरिकी शिक्षा हासिल की है. उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोगों को आंदोलनों के लिए आर्थिक मदद दी जाती है. मिलबेन के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से संबंधित देशों के विकास और शासन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया. हिंदुस्तानीय युवाओं से नए आंदोलन की अपील मैरी मिलबेन ने हिंदुस्तानीय युवाओं से एक नया आंदोलन शुरू करने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश में जन्मे, पले-बढ़े और पढ़े-लिखे लोगों को आगे आकर अपनी आवाज उठानी चाहिए. उन्होंने लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के साथ-साथ विरोधी विचारों का जवाब देने वाले आंदोलन की जरूरत बताई. मिलबेन ने युवाओं से आगे आने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है. ये भी पढ़ें: सिंगर मैरी मिलबेन का दावा- अमेरिकी डोनर्स कर रहे CJP को फंडिंग, पीएम मोदी को ऐसी ताकतों के सामने झुकने की जरूरत नहीं The post अभिजीत दीपके और मैरी मिलबेन के बीच जुबानी जंग तेज, सिंगर बोलीं- PM मोदी को अमेरिकी मदद की जरूरत नहीं appeared first on Naya Vichar.

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15 अक्टूबर सुबह की टॉप 20 खबरें : नीला ड्रम हत्याकांड के दोषी मुस्कान-साहिल को सजा-ए-मौत, 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में CJP का प्रदर्शन

1. मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, सौरभ की हत्या के डेढ़ साल बाद आया फैसला मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई गई है. पति की हत्या के आरोप में अदालत का बड़ा फैसला आया है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 2. दुष्यंत कुमार को राज्यपाल बनाए जाने का विरोध : इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले राहुल-प्रियंका दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने का विरोध हो रहा है. इस भाजपा नेता का नाम अंकिता भंडारी केस में कथित ‘VIP’ के रूप में लिया जाता है. राहुल और प्रियंका गांधी अंकिता के माता-पिता को समर्थन देने इंडिया गेट पहुंचे हुए हैं. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 3. यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज; राम-सीता पर आपत्तिजनक दावे करने का आरोप YouTuber Dhruv Rathee: यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ दिल्ली की साकेत कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है. याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) अमिता सचदेवा ने आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी के एक वीडियो में भगवान राम और माता सीता को लेकर आपत्तिजनक दावे किए गए थे. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 4. VIDEO: होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराकर डूबा मालवाहक जहाज, 2500 कंटेनर समुद्र में समाए ईरान ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराने के बाद एक मालवाहक जहाज डूब गया. ईरान के अनुसार, युद्ध के दौरान बारूदी सुरंग की चपेट में आने से किसी जहाज के डूबने की यह पहली घटना है. हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 5. जर्मनी में रिहायशी इमारत में आग लगने से तीन हिंदुस्तानीयों की मौत, हत्या के संदेह में एक गिरफ्तार जर्मनी के बोखुम शहर में एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में आग लगने से तीन हिंदुस्तानीय नागरिकों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल हो गए. स्थानीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी. पुलिस ने इस मामले में हत्या के संदेह में रोमानिया के 41 वर्षीय एक नागरिक को गिरफ्तार किया है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 6. दिल्ली के सेंट्रल पार्क में 16 अक्टूबर को फिर जुटेंगे प्रदर्शनकारी? दीपके की अपील- ‘लहरा दो तिरंगा’ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के बाद CJP ने 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क में लोगों से जुटने की अपील की है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 7. आसाराम की दिल का दौरा पड़ने की दलील खारिज, नहीं मिली जमानत; सुप्रीम कोर्ट ने रखी सरेंडर की शर्त आसाराम की सुप्रीम कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज. कोर्ट ने कहा, पहले पैरोल अवधि खत्म करें और फिर आत्मसमर्पण करें. आसाराम की अपील पर सुनवाई 17 नवंबर को होनी है. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 8. हवाई यात्रा में अब नहीं ले जा सकेंगे यह पावर बैंक, आग लगने की घटना के बाद DGCA ने लगाया बैन नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने उड़ानों में पावर बैंक के एक विशेष मॉडल को ले जाने और इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. डीजीसीए ने 29 सितंबर को जारी सूचना में ‘मोबिकिन्स एमके-पीबी-04’ (Mobikins MK-PB-04) पावर बैंक में आग लगने की हालिया घटना का हवाला देते हुए यह फैसला लिया. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 9. Railway Employee Bonus: रेलवे के इन कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिन के बोनस का लाभ, खाते में आएंगे अधिकतम 17,951 रुपये Railway Employee Bonus: रेलवे के 11.40 लाख कर्मचारियों को 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस मिलेगा. ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, स्टेशन मास्टर समेत किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ, जानें पूरी डिटेल. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 10. Railway Bonus: रेलवे कर्मचारियों को केंद्र प्रशासन ने दिया दिवाली गिफ्ट, 78 दिन के बोनस पर कैबिनेट की मुहर त्योहार के सीजन में केंद्र प्रशासन ने रेलवे कर्मचारियों को बोनस देने का ऐलान किया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस बोनस पर कुल करीब 2,009 करोड़ रुपये खर्च होंगे. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 11. सौरव दास-आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेजने पर केजरीवाल-प्रकाश राज नाराज, पूछा- क्या तिरंगा लहराना अपराध है? Ashutosh Ranka-Saurav Das Tihar jail : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर नेतृत्वक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और अभिनेता प्रकाश राज ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. दोनों ने तिरंगा लहराने के लिए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 12. लालू फैमिली इनसाइड स्टोरी: रोहिणी बनेंगी RJD की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष? राबड़ी के प्रस्ताव पर तेजस्वी की सहमति का इंतजार Lalu Family Inside Story लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की सक्रिय नेतृत्व में वापसी की चर्चा के बीच आरजेडी के भीतर हलचल तेज हो गयी है. सूत्रों के मुताबिक, रोहिणी को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देने के लिए उनकी मां राबड़ी देवी ने अपना पद छोड़ने की पेशकश की है. इसके बाद सबकी नजरें तेजस्वी यादव के फैसले पर टिकी हैं. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 13. राघोपुर नाव हादसा: 24 घंटे बाद पीड़ित परिवारों से मिले तेजस्वी यादव, बोले- उनकी मांगों को विधानसभा में उठाएंगे Vaishali boat accident: वैशाली नाव हादसे के बाद तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी मांगों को विधानसभा में उठाया जाएगा और उचित मुआवजा दिलाया जाएगा. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 14. वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी-20 मैच में अभिषेक ने किया कमाल, एक साल में सबसे ज्यादा छक्के जड़ने वाले हिंदुस्तानीय बने Abhishek Sharma Record: अभिषेक शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ा. जानें कैसे उन्होंने सूर्या के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा. पूरी समाचार पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 15. Noida Metro: नोएडा से दिल्ली

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SIR पर राहुल गांधी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई संभव, चुनाव आयोग को चुनौती

SIR Row: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं की याचिका पर आज, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के 12 नेताओं ने चुनाव आयोग (ECI) की ओर से SIR की प्रक्रिया के तहत लिए गए फैसलों को चुनौती दी है. याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिना नोटिस किसी मतदाता का नाम नहीं हटाने की मांग की गई है. यह याचिका 12 अक्टूबर को दाखिल की गई थी. शुरुआती प्रक्रियागत खामियों को दूर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर को इसे पंजीकृत किया. याचिका का नंबर W.P.(C) No. 001351/2026 है. याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल याचिका में चुनाव आयोग से SIR से संबंधित सभी फाइलें, एजेंडा, बैठक के मिनट्स, आधिकारिक टिप्पणियां और आपत्तियों का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग की गई है. इसमें 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े दस्तावेजों के साथ ECINET और ERONET सिस्टम के एक्सेस लॉग भी मांगे गए हैं. विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह जांच करने का अनुरोध किया है कि SIR से जुड़े फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग से संबंधित 2023 के कानून और टी.एन. शेषन बनाम हिंदुस्तान संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप लिए गए हैं या नहीं. बिना नोटिस नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग याचिका में मांग की गई है कि किसी भी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले. इसके अलावा, हटाए गए मतदाताओं की बूथवार सूची प्रकाशित करने की मांग की गई है. इस सूची में नाम हटाने की वजह और संबंधित मतदाताओं का जनसांख्यिकीय विवरण देने का अनुरोध भी किया गया है. विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के डेटाबेस में नाम हटाने और संशोधन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है. समिति को ECINET और ERONET सहित संबंधित डेटाबेस का ऑडिट करने का प्रस्ताव दिया गया है. याचिका में अंतिम फैसले तक चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी शामिल है. खरगे, अखिलेश और तेजस्वी समेत कई नेता याचिकाकर्ता याचिका दाखिल करने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, NCP (SP) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत समेत INDIA ब्लॉक के अन्य नेता शामिल हैं. याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को भी पक्षकार बनाया गया है. चुनाव आयोग भी इस मामले में पक्षकार है. इससे पहले राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मध्य दिल्ली से सुप्रीम कोर्ट की ओर ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ निकाला था. इस मार्च में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल हुई थीं. विपक्षी नेताओं ने इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे. ये भी पढ़ें: दुष्यंत कुमार को राज्यपाल बनाए जाने का विरोध : इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले राहुल-प्रियंका The post SIR पर राहुल गांधी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई संभव, चुनाव आयोग को चुनौती appeared first on Naya Vichar.

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अभिषेक बनर्जी से 5 घंटे तक पूछताछ, शेक्सपीयर सरणी थाने से बाहर निकलते ही सरकार पर भड़के

मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दफ्तर से होर्डिंग हटाने को लेकर हुए विवाद में नेतृत्वक घमासान तेज हो गया है. कोलकाता पुलिस ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से बुधवार को कैमक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय से जुड़े प्रकरण पर 5 घंटे से अधिक समय तक कड़ी पूछताछ की. पूछताछ के बाद शेक्सपीयर सरणी थाने से बाहर निकलते ही डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने पुलिस और सत्ताधारी भाजपा प्रशासन पर नेतृत्वक प्रतिशोध और बदले की कार्रवाई का सीधा आरोप मढ़ दिया. क्या है 27 अगस्त का पूरा विवाद मामला 27 अगस्त का है, जब कोलकाता नगर निगम (KMC) और पुलिस की टीम कैमक स्ट्रीट स्थित इमारत से तृणमूल कांग्रेस और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ वाले होर्डिंग हटाने पहुंची थी. कोलकाता नगर निगम (KMC) का आरोप है कि होर्डिंग हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों और निगम कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, बदसलूकी और मारपीट की गयी. इस हंगामे के सिलसिले में शेक्सपीयर सरणी थाने में 3 अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी थी. इसके अलावा अग्निशमन विभाग (Fire Department) ने भी अलग से नोटिस जारी किया था. ये भी पढ़ें: सेवाश्रय कैंप में इलाज के बाद काटना पड़ा मालती विश्वास का पैर, अभिषेक बनर्जी पर दर्ज हुई प्राथमिकी अभिषेक बनर्जी को जारी किये गये 2-2 समन मामले की जांच कर रही पुलिस ने पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी के आवास पर 2 नोटिस भेजे थे. इसके बाद वे सुबह करीब 11:30 बजे शेक्सपीयर सरणी थाने पहुंचे थे. सिर्फ TMC को बनाया जा रहा निशाना : अभिषेक पूछताछ खत्म होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी ने पुलिस और प्रशासन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि पुलिस अपने अधिकारियों और बदले की भावना से काम करने वाली इस प्रशासन के इशारे पर काम कर रही है. चाहे ईडी हो या सीबीआई, जब भी समन मिला, मैं हमेशा हाजिर हुआ हूं. लेकिन सारधा और नारदा घोटाले में शामिल व्यक्ति (शुभेंदु अधिकारी) पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि कैमक स्ट्रीट पर कई नेतृत्वक दलों के बोर्ड और होर्डिंग लगे थे, लेकिन केवल तृणमूल कांग्रेस के होर्डिंग को ही चुन-चुनकर निशाना बनाया गया. पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज किया गया. ये भी पढ़ें: होर्डिंग विवाद मामले में अभिषेक बनर्जी से 6 घंटे तक चली पूछताछ, सांसद ने कहा- ये ‘नेतृत्व बदले की कार्रवाई’ चुनाव आयोग और CEC पर भी पूछे सवाल टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र प्रशासन की भी जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र की प्रशासनें अवैध चुनावी तरीकों से बनी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूची से लाखों वैध नागरिकों के नाम हटाये गये हैं. इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. The post अभिषेक बनर्जी से 5 घंटे तक पूछताछ, शेक्सपीयर सरणी थाने से बाहर निकलते ही प्रशासन पर भड़के appeared first on Naya Vichar.

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नौ शक्ति नौ उड़ान: बाढ़ पीड़ितों के लिए रातभर डटी रहीं DM मैडम, खटिया पर बैठकर कराई बांध की मरम्मत, जानें काैन हैं वर्षा सिंह

Vaishali DM Success Story: हाल ही में IAS वर्षा सिंह ने रात भर खटिया पर बैठकर रिंग बांध की मरम्मत का काम होते हुए देखा है. बता दें कि ये इलाका बाढ़ प्रभावित है और बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के उद्देश से उठाया गया ये कदम अब चर्चा का विषय बन रहा है. कुछ IAS होते हैं जो कागजों पर साइन करने और ऑर्डर देने के लिए जाने जाते हैं. हालांकि, इन्हीं के बीच से कुछ ऐसे अधिकारी भी निकलते हैं, जो ऑर्डर्स देने में नहीं बल्कि खुद की निगरनी में काम करवाने में विश्वास रखते हैं. आइए IAS वर्षा सिंह की The post नौ शक्ति नौ उड़ान: बाढ़ पीड़ितों के लिए रातभर डटी रहीं DM मैडम, खटिया पर बैठकर कराई बांध की मरम्मत, जानें काैन हैं वर्षा सिंह appeared first on Naya Vichar.

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एल्युमिनियम फॉयल में रोटी लपेटना कितना सही? इस्तेमाल से पहले जान लें ये बातें

Is It Safe to Wrap Roti in Aluminium Foil: जब मैं बचपन में स्कूल जाती थी, तो मेरी मम्मी भी मेरे टिफिन में गरमागरम रोटियां एल्युमिनियम फॉयल में लपेटकर देती थी, ताकि लंच के समय तक वे नरम रहें. उस वक्त तो बस टिफिन खोलकर नरम रोटी खाने की खुशी होती थी, लेकिन अब सवाल आता है कि क्या रोजाना रोटी को फॉयल में लपेटना सही है? ऑफिस के टिफिन से लेकर बच्चों के लंच बॉक्स तक, इसका इस्तेमाल आम है. लेकिन सुविधा के लिए उपयोग होने वाली यह फॉयल खाने के लिए कितनी सुरक्षित (Is It Safe to Wrap Roti in Aluminium Foil) है और इसे इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं. बहुत गर्म रोटी को तुरंत फॉयल में लपेटने से बचें तवे से उतरी रोटी को हम अक्सर गरमागरम ही फॉयल में लपेट देते हैं, ताकि टिफिन खोलने तक वह नरम बनी रहे. लेकिन ऐसा करने पर रोटी की भाप अंदर ही फंस सकती है, जिससे उसमें नमी जमा हो जाती है और वह चिपचिपी पड़ सकती है. इसलिए रोटी को कुछ देर भाप निकलने दें और फिर फॉयल में लपेटें. PC: AI माइक्रोवेव में फॉयल वाली रोटी न रखें अगर आप टिफिन से रोटी निकालकर माइक्रोवेव में गर्म करना चाहते हैं, तो पहले फॉयल पूरी तरह हटा दें. अमेरिकी खाद्य सुरक्षा एवं निरीक्षण सेवा (USDA-FSIS) के अनुसार, एल्युमिनियम फॉयल में पूरी तरह लिपटे खाने को माइक्रोवेव में रखना सुरक्षित नहीं है, क्योंकि धातु से चिंगारी निकल सकती है और उपकरण को नुकसान पहुंच सकता है.  यह भी पढ़ें: सुबह चाय-बिस्किट छोड़ खाएं मुट्ठीभर भुनी मूंगफली, मिलेंगे ये फायदे The post एल्युमिनियम फॉयल में रोटी लपेटना कितना सही? इस्तेमाल से पहले जान लें ये बातें appeared first on Naya Vichar.

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