Vaishali Boat Accident : जब पूरा बिहार नवरात्र की धूम में मस्त था, उसी दौरान वैशाली जिले की एक घटना ने झकझोर कर रख दिया. जहां नाव सवार 20 लोग नदी में डूब गये.इस हादसे में 9 बच्चियों समेत 13 की मौत हो गयी. कुछ लोगों को गंभीर अवस्था में पटना एनएमसीएच में भर्ती कराया गया. यह घटना मंगलवार रात्रि वैशाली के राघोपुर स्थित रामपुर श्यामचंद गांव की है. जानिये…कैसे डूबी नाव, क्यों नहीं बचाया जा सका घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद नया विचार की टीम रामपुर गांव के लिए रवाना हो गयी. करीब 12.30 बजे रात में जब टीम गांव पहुंची तो वहां का मंजर देखकर हैरान रह गये. चारों तरफ लोगों की चीत्कार, चिख-पुकार सुनाई दे रहा था. स्त्रीएं, शिशु, बुजुर्ग, नवजवान सभी दहाड़ मारकर रो रहे थे. मामला सिर्फ तीन ही घर का था. तीन घर से 13 की मौत इनसानियत को झकझोर कर रख दिया. किसी का इकलौता चिराग बुझ गया तो कोई अपने संतान के भरोसे जीवन बीताने के लिए सपने संयोग रहा था, उसका सपना पलभर में मिट गया. चीत्कार से गूंज उठा था पूरा गांव रामपुर गांव में श्राद्धकर्म का भोज चल रहा था.उसी भोज में शामिल होने के लिए ये सभी नाव सवार होकर गये थे. खाना खाकर लौटने के दौरान यह हादसा हुआ.और 13 की जान चली गयी. रात करीब 7.30 के बाद से गांव पूरी तरह गमगीन माहौल में डूब गया. लोगों की आंखे नम हो गयी. ऐसे बच सकती थी मासूमों की जिदंगी जहां, कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था. वहां लोग पुल पार करके जा सकते थे. पुल पार कर जाने के दौरान लोगों को करीब 400 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती, नाव से सीधे यह दूरी आधा से भी कम पड़ रही थी. कार्यक्रम स्थल तक जाने के लिए लोगों को पुल पार करना पड़ता, कुछ देर आगे बढ़ने के बाद घुटने भर पानी पार करके आयोजन स्थल तक आसानी से पहुंच सकते थे. लेकिन नहीं गये. शॉर्टकट के कारण मासूमों की जिदंगी गंगा के पानी में समा गयी. नाव से जाने का क्यों किया फैसला? आयोजन स्थल से पीड़ित परिवारों का घर एकदम आमने-सामने है. बीच में एक सोता है. उसी सोता को पारकर सभी को भोज खाने जाना था, दूरी कम होने के कारण लोगों ने नाव से आयोजनस्थल तक जाने का फैसला किया. नाव प्रशासनी है. वह भी जर्जर हालात में,उसी नाव पर सवार होकर सभी गये थे. वापसी के दौरान नाव अनियंत्रित हो गयी, नाव में छेद होने के कारण पानी भी भरने लगा और अतंत: उसी सोता में नाव डूब गयी. डूबने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया. अधिकांश शिशु-बच्चियां सवार थी. कुछ युवक थे, जो तैरकर निकल गये, बच्चों के लिए तैरना संभव नहीं था. क्षमता से अधिक बैठे जर्जर नाव पर लोगों ने खुद ही पानी में उतकर बचाने की कोशिश की. तबतक देर हो चुकी थी. लोगों ने खुद से ही डूबे शिशु-बच्चियों को निकाला और करीब दो किमी दूर रामपुर पीएचसी ले गये, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया. पीएचसी की लचर व्यवस्था थी, सवाल पर डॉक्टरों ने कहा अगर जिंदा भी आते तो नहीं बचाया जा सकता था. नाव की क्षमता करीब 6 से 8 लोगों की है, लेकिन एक-एककर करीब 20 लोग सवार हो गये. किसे कहते है सोता, क्या हमेशा रहता है पानी? राघोपुर नदी के कटाव से गांव के पास से ही नदी का एक छोटा रूप निकला है. जिसे लोग सोता कहते हैं. लोगों ने बताया कि सोता में हमेशा पानी नहीं रहता, यह सूख जाता है. जब सोता सूख जाता है तब गांव के ही लोग वहां से मिट्टी काटकर ले जाते है. जिसके कारण और गड्ढा हो गया. हाल ही में आयी बाढ़ के पानी से पूरा सोता भर गया. बाढ़ का पानी तो निकल गया, लेकिन सोता में अभी भी पानी जमा है. राघोपुर पीएचसी में शवों का ढ़ेर लगा था. पीएचसी के बाहर ही टीन के शेड में शवों को रखा गया था. पीएचसी में ग्रामीणों की भारी भीड़ लगी थी. तिरहुत रेंज के वरीय अधिकारियों का जमावाड़ा लगा हुआ था. डीएम वर्षा सिंह भी देर रात तक पीड़ित परिजनों के बीच रहीं. लोगों ने कहा कि अगर मोटर बोट रहता तो नहीं घटती घटना. जानिये…कैसे पहुंचे पीएचसी और वहां क्या हुआ ? रामपुर पीएचसी में मौजूद डॉक्टरों से जब बातचीत की गयी तो उन्होंने बताया कि करीब 8.30 बजे रात ग्रामीण पहली बार पांच बच्चों को खुद से लेकर आये, जो पानी में डूबे थे, जैसे ही इलाज शुरू हुआ तब तक लगातार डूबे बच्चों को परिजन लेकर आते गये. देखते देखते 20 लोगों को 30 मिनट के अंदर अस्पताल लाए. जांच के दौरान 12 शिशु की मौत पीएचसी में ही हो गयी. बाकी को एनएमसीएच पटना रेफर किया गया. वहां भी एक की मौत हो गयी. बाकियों का इलाज किया जा रहा है. अस्पताल की व्यवस्था ठीक नहीं थी, बगल में नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है. सभी को टीन के शेड के नीचे रखा गया. इसी नाव पर सवार होकर गये थे सभी घटना में एक परिवार के पांच, दूसरे के सात और तीसरे परिवार से एक कुल 13 की मौत हुयी है. इन लोगों की जान गयी है. मृतकों की सूची में तीन सगी बहनें भी शामिल हैं. सुनीता कुमारी (13 वर्ष), पिता राज किशोर राय. अमृता कुमारी (16 वर्ष), पिता राज किशोर राय. अंकिता कुमारी (6 वर्ष), पिता राज किशोर राय. मीरा कुमारी (12 वर्ष), पिता रामनरेश राय. निशु कुमारी, पिता सत्येंद्र राय. अनिशा कुमारी (18 वर्ष), पिता सुरेंद्र राय. आर्यन कुमार, पिता गांधी राय. मोहन कुमार (14 वर्ष), पिता अखिलेश राय. पिंकी कुमारी (13 वर्ष), पिता डोगन राय. नमन कुमार (10 वर्ष), पिता मुकेश राय. सिकी कुमारी (16 वर्ष), पिता सुरेश राय. भोनू कुमारी (12 वर्ष), पिता रामप्रवेश राय. सोनम कुमारी, पिता नरेश राय. राष्ट्रपति, पीएम समेत कई नेताओं ने जताया दुख हालांकि घटना के बाद केंद्र प्रशासन से लेकर राज्य प्रशासन तक मुआवजे का ऐलान किया है. राष्ट्रपति, पीएम, सीएम समेत कई नेताओं ने संवेदना व्यक्त किया है. दिनभर स्थानीय नेता का पीड़ित परिवार से मिलने-जुलने का सिलसिला जारी रहा