Pakistan Blockade on POK: पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में चल रहे प्रशासन विरोधी आंदोलन के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. स्थानीय लोगों और ट्रक चालकों का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन इलाके में खाने-पीने की चीजों, ईंधन और दवाओं की सप्लाई रोककर प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि पाकिस्तान के अधिकारियों ने किसी भी तरह की नाकेबंदी से इनकार किया है. लेकिन बीबीसी उर्दू, डॉन और अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार, इलाके में जरूरी सामान की कमी बढ़ती जा रही है.
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कई शहरों में ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रदर्शन, धरने और व्यापार बंद होने से लोगों को जरूरी चीजें हासिल करने में मुश्किल हो रही है. पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में लोगों को एक सप्ताह से ज्यादा समय से परेशानी झेलनी पड़ रही है. बाजार बंद हैं और खाने-पीने की चीजों की कमी बढ़ रही है. मोबाइल इंटरनेट सेवाओं में भी रुकावट की समाचारें सामने आई हैं. हालांकि, स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का कहना है कि पाकिस्तान प्रशासन ने जानबूझकर खाने, ईंधन और मेडिकल सप्लाई की आवाजाही सीमित कर संकट को और बढ़ा दिया.
पेट्रोल के लिए लोग मजबूर
ईंधन की कमी गंभीर समस्या बन गई है. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुंछ और मुजफ्फराबाद जिलों में पेट्रोल पंप बंद रहे. कई वाहन चालकों ने बताया कि उन्हें गाड़ियों को चलाने के लिए ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर पेट्रोल खरीदना पड़ा.
फिर बढ़ी आटे की किल्लत
बीबीसी उर्दू के अनुसार, पुंछ सेक्टर, रावलाकोट, बाग और दूरदराज के नीलम घाटी इलाके में खाने, ईंधन और दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आई हैं. नीलम जिले के निवासी अलिफ दीन ने बीबीसी उर्दू से कहा, ‘मैं पिछले 15 दिनों से डिपो में पैसे जमा कर रहा हूं, लेकिन अभी तक मुझे आटा नहीं मिला. मैं हर दिन डिपो जाता हूं, लेकिन मुझे आटा नहीं दिया जाता.’ उन्होंने बताया कि बाजार में उपलब्ध आटे की कीमत भी काफी बढ़ गई है.
लोगों का आरोप- जरूरी सामान लेकर लौटने नहीं दिया जा रहा
कमी बढ़ने के बाद कई लोग पाकिस्तान के दूसरे इलाकों में जाकर सामान खरीदने लगे. डॉन के अनुसार, मुजफ्फराबाद के लोग खाने और ईंधन के लिए पड़ोसी राज्य खैबर पख्तूनख्वा जा रहे हैं. वहीं पुंछ, रावलाकोट, बाग और नीलम घाटी के लोग आटा, चावल, चीनी, दाल, दवाएं और पेट्रोल खरीदने के लिए रावलपिंडी और इस्लामाबाद तक जा रहे हैं. लेकिन कई लोगों का दावा है कि उन्हें यह सामान वापस POK लाने से रोका जा रहा है.
London Kashmiris protest Pakistan’s blockade in POK: no food, no medicine. British nationals trapped. British Azad Kashmiri killed in Kotli. pic.twitter.com/bZ6yYxdvo9
— SILENT BRIEF (@SilentBriefHQ) June 22, 2026
पुलिस पर सामान रोकने का आरोप
बीबीसी उर्दू के अनुसार, कई जगहों पर चेकपोस्ट और सड़क अवरोधों के कारण खाने, दवाओं और ईंधन से भरे वाहनों को रोका जा रहा है. नवीद नाम के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि आजाद पट्टन के पास पुलिस ने उसकी गाड़ी रोक दी और कहा कि वह रावलपिंडी से खरीदा गया खाना, दवा और पेट्रोल फेंक दे, तभी उसे आगे जाने दिया जाएगा.
नवीद ने कहा, ‘मैंने पुलिस से बहुत रिक्वेस्ट की कि भगवान के लिए मुझे खाना और पीने का सामान घर ले जाने दें. मेरे घर में अब भूख की स्थिति बन गई है. मेरी पत्नी भी प्रेग्नेंट है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया और कहा कि अगर तुम अपने हाथों से खाना, पीना और दवाएं फेंक देते हो तो जाने दिया जाएगा, नहीं तो वापस जाओ.’
ट्रकों को रोके जाने का दावा
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, आटा, चावल, दाल, सब्जियों और अन्य जरूरी सामान से भरे ट्रकों को आजाद पट्टन और फगवारी के पास रोका गया. कुछ ट्रक चालकों ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के जवान उन्हें POK में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं. इसके कारण कई ट्रक कई दिनों तक रास्ते में खड़े रहे और खराब होने वाला सामान खराब हो गया. सोशल मीडिया पर भी कुछ वीडियो सामने आए हैं जिनमें सड़कों पर ट्रकों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं.
पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिज
पाकिस्तान प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है. POK पुलिस प्रमुख और पुंछ, मुजफ्फराबाद और नीलम घाटी के अधिकारियों ने बीबीसी उर्दू को बताया कि जरूरी सामान लेकर आने वाले किसी भी वाहन को नहीं रोका गया और सप्लाई जारी है. हालांकि, डॉन की एक रिपोर्ट में एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से कहा गया कि इस्लामाबाद ने JAAC आंदोलन को कमजोर करने के लिए कई कदम उठाए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने वाली खाद्य सामग्री और अन्य सप्लाई को प्रभावित करने की रणनीति भी शामिल थी. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये कदम केवल रावलाकोट में बैठे प्रदर्शनकारियों तक सीमित थे या पूरे POK को प्रभावित कर रहे थे.
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विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे विवाद की शुरुआत पाक अधिकृत कश्मीर विधानसभा की 12 सीटों को लेकर हुई. ये सीटें हिंदुस्तान प्रशासित कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं. स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल इस्लामाबाद चुनावों को प्रभावित करने और अपनी पसंद की प्रशासन बनाने के लिए करता है.
इसी मुद्दे को लेकर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आंदोलन शुरू किया. पाकिस्तान प्रशासन ने JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उसके समर्थकों पर कार्रवाई शुरू की. रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान हुई झड़पों में कम से कम 58 लोगों की मौत हुई है.
आंदोलन और तेज होने के संकेत
इस बीच JAAC का आंदोलन लगातार बढ़ रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, POK के कई शहरों और गांवों में प्रदर्शन फैल चुके हैं. रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे धरने में पिछले दो हफ्तों में 70 हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है. JAAC नेताओं ने रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक 1 लाख से ज्यादा लोगों के मार्च की चेतावनी भी दी है.
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