अमेरिका ने बुधवार को (हिंदुस्तानीय समयानुसार गुरुवार तड़के) लगातार 12वीं रात ईरान पर हवाई हमले किए. युद्धविराम (सीजफायर) टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है. इस बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वह क्षेत्र के तेल ठिकानों, एनर्जी प्रोजेक्ट दूसरे महत्वपूर्ण आर्थिक ढांचों (Economic Structures) को निशाना बना सकता है.
इस बढ़ते तनाव से दुनिया के दो सबसे अहम समुद्री रास्तों (होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य) की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. ईरान और उसके सहयोगी ऐसे कदम उठाने की चेतावनी दे रहे हैं, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
CENTCOM ने क्या कहा हमले को लेकर?
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ये ताजा हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर किए गए. इसका मकसद ईरान की उस ताकत को कमजोर करना है, जिससे वह इस इलाके से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहा है. CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि हमारा अभियान आगे भी जारी रहेगा.
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बिजलीघर और पुल पर अमेरिकी सेना करेगी हमला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (22 जुलाई) को ईरान को सख्त चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुल, बिजलीघर और दूसरी अहम जगहों पर हमला करेगा. ट्रंप ने साफ कहा कि जहाजों पर हर हमले का जवाब ईरान के एक पुल या बिजलीघर को निशाना बनाकर दिया जाएगा.
ईरान ने भी अमेरिका को दिया जवाब
ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान ने भी अमेरिका को जवाब दिया. ईरानी सेना ने कहा कि अगर अमेरिका उसके पुल, बिजलीघर या दूसरी अहम जगहों पर हमला करता है, तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर हमारे देश या जरूरी ठिकानों पर हमला हुआ, तो हम भी पूरी ताकत से जवाब देंगे. ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि वह इस इलाके से तेल की सप्लाई रोक सकता है, जिससे दुनिया में तेल का संकट और गहरा सकता है.
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