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गाड़ी बेचने के बाद शराब तस्करी में पकड़ी गयी गाड़ी तो कोर्ट में प्रस्तुत करना होगा विक्रय का साक्ष्य

नया विचार लीगल काउंसलिंग में पाठकों को कानूनी सलाह देने पहुंचे वरीय अधिवक्ता भोला कुमार मंडलसंवाददाता, भागलपुरउत्पाद (मद्य निषेध अधिनियम) के विशेष लोक अभियोजक सह वरीय अधिवक्ता भोला कुमार मंडल ने रविवार को नया विचार कार्यालय में पाठकों को लीगल काउसलिंग के तहत कानूनी सलाह दी. इस दौरान पाठकों ने दूरभाष पर कानूनी सलाह प्राप्त किया और संतुष्ट हुए. उत्पाद अधिनियम के साथ-साथ आपसी विवाद, जमीनी विवाद, बंटवारा, धोखाधड़ी मामले, बिजली तार लगाने को लेकर समस्या आदि पर विशेष प्रकाश डाला.

अजय कुमार, जगदीशपुर

सवाल

: मैंने एक कार करीब 8 साल पूर्व अपने ही एक परिचित को बेच दी थी. जिसका बाकायदा स्टांप पेपर पर विक्रयनामा बनवा कर नोटरी से सर्टिफाइड भी करवाया था. पर चार साल पूर्व उक्त कार भागलपुर में ही शराब तस्करी मामले में पकड़ी गयी. जिस पर कांड के अनुसंधानकर्ता ने उन्हें भी मुद्दालय बना दिया. जबकि आइओ को स्टांप पेपर सहित संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराया गया था. ऐसे में क्या करें?

जवाब

: पहले इस बात का पता करें कि वारंट निर्गत हुआ है या नहीं? इसके बाद सबसे पहले कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करें और अपने पास मौजूद साक्ष्य और गवाहों को भी कोर्ट में प्रस्तुत करें. कोर्ट में अधिवक्ता के माध्यम से अर्जी दिलवाएं कि उन्होंने पकड़े जाने से पूर्व ही अपनी गाड़ी बेच दी है, और इस केस से उनका नाम हटाया जाये. कोर्ट आपकी बातों को सुनेगी. राज कुमार पासवान, बसंतपुर, अकबरनगर

सवाल

: घर के सामने दीवार में पड़ोसी बिजली की अर्थिंग का तार लगा दिया और हटाने को कहते हैं तो नहीं हटाता है और मारपीट करने को तैयार हो जाता है. हमलोग मारपीट नहीं करना चाहते हैं. क्या करें?

जवाब

: बिजली प्रशासनी है. इसके लिए बिजली विभाग के कार्यालय में आवेदन दीजिये. आवेदन देने पर कार्रवाई की जायेगी. इसके बावजूद अगर हल नहीं होता है तो मामले में वाद के जरिये कोर्ट में भी इसका प्रावधान है.

सौरभ कुमार, नवगछिया

सवाल

: धमकी देने के मामले में थाना में आवेदन दिये थे. जिस पर पुलिस ने 107 लगा दिया और एक पक्षीय कार्रवाई के लिए पुलिस ने लिखा पर एसडीओ कार्यालय से दोनों पर 107 की कार्रवाई कर दी गयी. इसके रिविजन के लिए कोर्ट गये. अब दंडात्मक कार्रवाई कैसे होगी?

जवाब

: 107 में पहले जमानत ले लीजिये. दंडात्मक कार्रवाई के लिए पहले यह देखना होगा कि क्या दूसरे पक्ष ने आपके विरुद्ध किसी और तरह की घटना आपके के साथ कारित किया है तो उसका साक्ष्य कोर्ट और एसडीओ कार्यालय में प्रस्तुत करें. इस पर एसडीओ की ओर से विपक्षी के विरुद्ध बांड डाउन की कार्रवाई की जायेगी. नरेश कुमार शर्मा, जमनी, खिरीबांध, जगदीशपुर.

सवाल

: 2019 में दिव्यांग अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था. इसके लिए स्पेशल कोर्ट का गठन भी हुआ. पर पांच साल से कोई सुनवाई नहीं हो रही है. प्रशासनी वकील ने छोड़ दिया, तो मैंने अपनी तरफ से एक अधिवक्ता भी रखा. ऐसे में क्या किया जाये?

जवाब

: अगर प्रशासनी वकील ने छोड़ दिया है तो इसकी शिकायत कोर्ट से करें. अगर सुनवाई नहीं हो रही है तो अधिवक्ता के माध्यम से ऊपरी अदालत के पास भी इस बात काे रखा जा सकता है. निश्चित न्याय मिलेगा.

अफजल हुसैन, नारायणपुर, नवगछिया.

सवाल

: भागलपुर में एक साली रहती है, जिसके साथ उसका पति आये दिन मारपीट करता है. केस किया था जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर साली को उसके पति के साथ भेज दिया गया. इसके बाद साली का मोबाइल छीन लिया और परिवार से न ही बात करने देता है और न ही मिलने देता है. क्या करें?

जवाब

: कोर्ट के माध्यम से विदा किया गया है, जिसमें कोर्ट ने कुछ शर्त भी रखा होगा. अगर उसका उल्लंघन होता है तो उसी कोर्ट में इसकी शिकायत अधिवक्ता के माध्यम से फिर से करें. आकाश कुमार, सुल्तानगंज.

सवाल

: मेरे दोस्त ने 2014 में मेरे एटीएम का नंबर और सीवीवी नंबर का इस्तेमाल कर लाखों रुपये की ठगी की थी. इसको लेकर केस दर्ज कराया. जिस पर कोर्ट में गवाही भी दर्ज हो चुकी थी. पर लॉकडाउन के दौरान सुनवाई नहीं हुई. अब तीन माह पूर्व फिर से केस खुला है और अधिवक्ता ने फिर से सभी गवाहों को गुजरवाने की बात कही. ऐसा क्यों हो रहा है?

जवाब

: अगर एटीएम से ऑनलाइन शॉपिंग किया गया है उससे किस व्यक्ति के लिए सामानों की खरीद की गयी उसका पता करें. अगर रेलवे टिकट काटा गया है तो आइआरसीटीसी काे केस की कॉपी लगाकर पत्र लिख कर किनका टिकट कटा है उनका डिटेल भी निकालिये. और कोर्ट के समक्ष उक्त सभी साक्ष्य को रखें. मामले का हल निकलेगा.

मो कामरान, हबीबपुर.

सवाल

: हम लोग चार भाई हैं, हम चाहते हैं अपने हिस्से की जमीन का म्यूटेशन करा लें. पर तीन भाई यह नहीं चाहता है. इसको लेकर कोर्ट में केस किये हैं. तो क्या मैं म्यूटेशन करा सकता हूं?

जवाब

: जमीन को लेकर कोई भी मामला सीओ के पास जाता है. सीओ के पास आवेदन दें. जिसमें अपने हिस्से की जमीन का म्यूटेशन कराने की अर्जी दें. इसके अलावा थाना में भी हर शनिवार को जमीन विवादों का निबटारा किया जाता है. वहां भी अपने मामले को लेकर आवेदन दीजिये. सभी भाई को थाना बुलाया जायेगा. जहां मामले के निबटाने का प्रयास किया जायेगा. दिनेश कुमार साह, मुंदीचक.

सवाल

: मुंदीचक में पुस्तैनी मकान है, जिसका कागजी तौर पर पिताजी के स्तर पर ही बंटवारा हो चुका है. पर वर्तमान में बंटवारे में जो हिस्सा मुझे मिला उसके आधे हिस्से में ही मेरे पास पोजेशन है. इसको लेकर सीओ को नापी के लिए भी आवेदन दिया गया. अमीन जब नापी के लिए आता है ताे उसे कुछ न कुछ बहाना कर लौटा दिया जाता है. क्या किया जाये?

जवाब

: मामले में सीओ की ओर से नापी को लेकर दिये गये निर्देश की कॉपी थाना में जमा कराएं. साथ ही वर्तमान में जो मकान के हिस्सेदार हैं उनका भी वर्तमान पता का उल्लेख करें. अगर फिर भी वे लोग नहीं आते हैं तो समाज के कुछ गवाहों की मौजूदगी में सीओ को नापी कराने की शक्ति है.

सुजीत कुमार, बाल्टी कारखाना, अलीगंज.

सवाल

: नीलाम पत्र पदाधिकारी के पास छह माह केस लंबित है. वह नोटिस पर नोटिस भेजा जा रहा है, पर बॉडी वारंट नहीं निकल रहा है.बॉडी वारंट का प्रावधान है या नहीं?

जवाब

: उसमें नीलाम पत्र पदाधिकारी को लिखकर आवेदन दीजिये. जिसमें उल्लेख करें कि तीन बार नोटिस भेजी जा चुकी है, पर दूसरे पक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं दे रहा है और इसपर बॉडी वारंट निर्गत करें. अगर दिये गये आवेदन का जवाब नहीं आता है तो वरीय पदाधिकारी के पास आवेदन करें.

डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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