एक समय था जब हिंदुस्तान की सड़कों पर एक नाम खूब सुनाई देता था- Luna. इसके साथ जुड़ी थी एक बेहद यादगार लाइन- ‘चल मेरी Luna’. यह सिर्फ एक विज्ञापन नहीं था. यह उस दौर की आवाज थी, जब हिंदुस्तान में दोपहिया वाहन आम आदमी की आजादी का जरिया बन रहे थे. आज वही Kinetic नाम इलेक्ट्रिक व्हीकल के दौर में फिर दिखाई दे रहा है, नाम है- E-Luna.
लेकिन इस वापसी की कहानी सिर्फ एक नए इलेक्ट्रिक व्हीकल की कहानी नहीं है. इसके पीछे करीब पांच दशक की एक लंबी यात्रा है. इसमें जबरदस्त सफलता है, Honda जैसा बड़ा साझेदार है, फिर गिरावट है और अंत में खुद को बदलकर वापसी की कहानी है.
फिर आई Luna और बदल गई कहानी
Luna का फॉर्मूला बिल्कुल सीधा था.
- हल्की गाड़ी
- आसान डिजाइन
- कम खर्च
- और हिंदुस्तानीय सड़कों के हिसाब से उपयोगी.
यही वजह थी कि यह जल्दी ही लोगों की पसंद बन गई. Kinetic के मुताबिक 1980 के दशक में उसके अहमदनगर प्लांट में हर दिन 2,000 तक Luna बनाने की क्षमता थी. कंपनी ने इंजन, गियरबॉक्स, चेसिस और कई दूसरे हिस्सों का निर्माण खुद किया. पेंटिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसी सुविधाएं भी प्लांट के अंदर थीं. यानी Kinetic सिर्फ वाहन बेच नहीं रही थी. वह अपनी पूरी मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी खड़ी कर रही थी.
फिर Kinetic पहुंची Honda के पास
Kinetic की कहानी का अगला बड़ा मोड़ था Honda. 1980 के दशक में हिंदुस्तानीय टू-व्हीलर बाजार तेजी से बदल रहा था. Honda के पास तकनीक थी. Kinetic के पास हिंदुस्तान का बाजार और मैन्युफैक्चरिंग अनुभव था. दोनों के बीच साझेदारी हुई और Kinetic Honda Motor Ltd. सामने आई.
Honda के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक 1984 में Kinetic Engineering के साथ पार्टनरशिप हुई थी. Kinetic के अपने रिकॉर्ड में Kinetic Honda joint venture की अवधि 1986 से 1998 बताई गई है. यह साझेदारी हिंदुस्तानीय स्कूटर बाजार के लिए काफी अहम साबित हुई.
लेकिन बाजार बदल रहा था
यहीं से कहानी थोड़ी मुश्किल होने लगी. हिंदुस्तानीय टू-व्हीलर बाजार में मुकाबला बढ़ रहा था. ग्राहकों के पास ज्यादा विकल्प आने लगे. नई कंपनियां आ रही थीं, नई बाइक्स और नए स्कूटर लॉन्च हो रहे थे. Kinetic Honda को भी इस बदलते बाजार का दबाव महसूस हुआ.
1997-98 में Kinetic Honda की बिक्री बढ़ी जरूर, लेकिन प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी थी. उस समय बाजार में Bajaj Auto, TVS Suzuki और LML जैसी कंपनियां भी मजबूत थीं. सिर्फ इतना ही नहीं. Kinetic Honda का स्कूटर पोर्टफोलियो भी दूसरे बड़े खिलाड़ियों के मुकाबले सीमित माना जा रहा था.
Kinetic की सबसे बड़ी मुश्किल क्या थी?
एक समय कंपनी हिंदुस्तानीय दोपहिया बाजार की बड़ी ताकत थी. लेकिन बाजार अब पहले जैसा नहीं था. गियरलेस स्कूटर सेगमेंट में बड़े और मजबूत खिलाड़ी उतर चुके थे. Honda, Suzuki और Hero Honda जैसे नाम तेजी से अपनी पकड़ बना रहे थे.
Kinetic को अब सिर्फ पुरानी लोकप्रियता के भरोसे नहीं चलना था. उसे हर मोर्चे पर नए सिरे से मुकाबला करना था. और यही वह दौर था, जब कंपनी का दोपहिया कारोबार धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा.
लेकिन Kinetic Engineering खत्म नहीं हुई
यहीं इस कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट आता है. Kinetic Engineering ने हार नहीं मानी. कंपनी ने अपना फोकस बदल दिया. दोपहिया वाहन बनाने के बजाय उसने ऑटो कंपोनेंट्स और ट्रांसमिशन सिस्टम पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया.
कंपनी के मौजूदा प्रबंधन के मुताबिक इस बदलाव में कारोबार, तकनीक, लागत और ऑपरेशन का बड़े स्तर पर पुनर्गठन किया गया. इस दौरान कंपनी ने भारी कर्ज भी कम किया और घाटे से निकलकर मुनाफे की तरफ वापसी की. यानी Kinetic ने यह समझ लिया था कि बाजार बदल चुका है. इसलिए कंपनी को भी बदलना होगा.
और फिर लौटी Luna
2024 में Kinetic Green ने ऐसा नाम वापस लाया, जिसे हिंदुस्तान भूल नहीं पाया था- E-Luna. 7 फरवरी 2024 को E-Luna लॉन्च की गई. इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 69,990 रुपये रखी गई थी. यानी वही Luna. लेकिन इस बार पेट्रोल के बजाय बिजली से चलने वाली.
सबसे दिलचस्प बात क्या है?
E-Luna की कहानी सिर्फ Kinetic Green की नहीं है. इसके पीछे Kinetic Engineering भी फिर से जुड़ गई है. Kinetic Engineering के 2023-24 Annual Report के मुताबिक कंपनी ने E-Luna के लिए चेसिस, स्विंग आर्म और दूसरे बॉडी पार्ट्स बनाने की दिशा में काम शुरू किया.
यानी एक समय जिसने Luna को बनाया था. वही Kinetic अब उसके इलेक्ट्रिक अवतार के पीछे भी तकनीकी भूमिका निभा रही है. इसे आप Kinetic की पूरी कहानी का एक तरह से सर्कल पूरा होना कह सकते हैं.
तो Kinetic की असली कहानी क्या है?
Kinetic की कहानी सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है. यह हिंदुस्तानीय ऑटोमोबाइल बाजार के बदलने की कहानी है. एक दौर में Luna ने आम आदमी को सस्ती और आसान मोबिलिटी दी. फिर Honda के साथ साझेदारी ने Kinetic को नई तकनीक से जोड़ा.
इसके बाद बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ाईं. दोपहिया कारोबार लगभग खत्म हुआ. लेकिन Kinetic Engineering ने खुद को ऑटो कंपोनेंट कंपनी के तौर पर फिर खड़ा किया और अब वही विरासत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में लौट रही है.
पहले थी ‘चल मेरी Luna’, आज है E-Luna. ईंधन बदल गया है, टेक्नोलॉजी बदल गई है. लेकिन एक चीज अब भी वही है. आम हिंदुस्तानीय के लिए आसान मोबिलिटी देने की Kinetic की सोच.
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