Rajasthan Nikay Chunav: राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है. जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में से 146 के नतीजे घोषित हो चुके हैं और भाजपा ने 78 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. वहीं भरतपुर, जोधपुर, अजमेर, अलवर और पाली जैसे नगर निगमों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से निर्दलीय उम्मीदवार प्रशासन गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
जयपुर में BJP ने पार किया बहुमत का आंकड़ा
जयपुर नगर निगम में अब तक घोषित 146 वार्डों के परिणामों में भाजपा ने 78 सीटें जीत ली हैं. कांग्रेस के खाते में 53 वार्ड गए हैं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की है. 150 सदस्यीय जयपुर नगर निगम बोर्ड में बहुमत के लिए 76 सीटों की जरूरत है. भाजपा 78 वार्ड जीतकर इस आंकड़े को पार कर चुकी है. ऐसे में बाकी चार वार्डों के नतीजे आने से पहले ही भाजपा ने बोर्ड बनाने के लिए जरूरी बहुमत हासिल कर लिया है.
चार वार्डों के नतीजे अभी बाकी
जयपुर के चार वार्डों की अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हुई है. इसकी वजह पांच मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में आई तकनीकी खराबी है. जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक के मुताबिक वार्ड संख्या 9 के बूथ 111, वार्ड 18 के बूथ 235, वार्ड 25 के बूथ 343 और वार्ड 34 के बूथ 477 तथा 484 से ईवीएम का डेटा प्राप्त नहीं किया जा सका. इंजीनियरों की कोशिश के बावजूद परिणाम नहीं निकलने के बाद मामला राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया है.
16 सितंबर को हो सकता है पुनर्मतदान
जिला कलेक्टर ने बताया कि ईवीएम की तकनीकी रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी. आयोग के निर्देश मिलने के बाद आगे का फैसला होगा. मंजूरी मिलने की स्थिति में इन मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को दोबारा मतदान कराया जा सकता है. संदेश नायक के मुताबिक जिन बूथों की ईवीएम से परिणाम नहीं मिल सके हैं, उनकी स्थिति पर अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.
इन चार शहरों में BJP प्रशासन बनाने की स्थिति में
राजस्थान के 10 नगर निगमों में से आठ में मतगणना पूरी हो चुकी है. उपलब्ध नतीजों के मुताबिक जयपुर के अलावा कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में भी भाजपा नगर निगम की सत्ता हासिल करने की स्थिति में है. दूसरी ओर बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है.
5 नगर निगमों में निर्दलीयों के हाथ सत्ता की चाबी
राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे दिलचस्प मुकाबला भरतपुर, जोधपुर, अजमेर, अलवर और पाली में देखने को मिल रहा है. इन नगर निगमों में किसी एक दल की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक साबित हो सकते हैं. पाली और अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, लेकिन बोर्ड गठन के लिए उसे अन्य सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है. भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन खास रहा है. यहां प्रशासन गठन के समीकरण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.
जोधपुर में BJP-कांग्रेस बराबरी पर
जोधपुर नगर निगम में मुकाबला सबसे रोचक है. यहां भाजपा और कांग्रेस को बराबर सीटें मिली हैं. ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवार जिस खेमे का समर्थन करेंगे, नगर निगम की सत्ता उसी ओर जा सकती है. इस कारण जोधपुर में चुनाव नतीजों के बाद भी नेतृत्वक मुकाबला खत्म नहीं हुआ है और अब नजरें निर्दलीय पार्षदों पर टिक गई हैं.
नगर परिषदों में भी BJP आगे
राजस्थान की 252 नगर परिषदों के रुझानों और परिणामों में भाजपा 149 निकायों में आगे है. कांग्रेस 95 नगर परिषदों में आगे चल रही है, जबकि आठ निकायों में निर्दलीय उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं. इससे राज्य के शहरी निकाय चुनावों में भाजपा की बढ़त साफ दिखाई दे रही है.
नगर समितियों में क्या है स्थिति?
47 नगर समितियों में भी मतगणना जारी है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा 21 नगर समितियों में आगे है, जबकि कांग्रेस 17 जगह बढ़त बनाए हुए है. नौ नगर समितियों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवार आगे चल रहे हैं.
वार्डों की कुल संख्या में BJP सबसे आगे
वार्डवार घोषित परिणामों के अनुसार भाजपा ने राजस्थान में अब तक 3,646 वार्डों में जीत हासिल की है. कांग्रेस ने 3,110 वार्ड जीते हैं, जबकि निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों के खाते में 2,164 वार्ड गए हैं. इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा पूरे राज्य में सबसे ज्यादा वार्ड जीतने वाली पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि कई नगर निकायों में पूर्ण बहुमत नहीं होने के कारण प्रशासन बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है.
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