जमुई की घटना पर बिहार की एक ऑर्केस्ट्रा डांसर ने अपनी भावनाएं नया विचार के साथ साझा की. आप भी पढ़ें और सोचे.
जमुई का वायरल वीडियो देखकर बहुत लोगों को गुस्सा आया होगा. मुझे भी बुरा लगा… पर मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है. क्योंकि रोटी के लिए मैं स्टेज पर होती हूं और वहां हमारे साथ ये रोज होता है. फर्क बस इतना है कि जमुई में उस दिन किसी ने वीडियो बना लिया और दुनिया ने देख लिया. पर हमारी जिंदगी की ऐसी अनगिनत घटनाएं बिना रिकॉर्ड हुए खत्म हो जाती हैं.
मैं 24 साल की हूं और बिहार के सासाराम की रहने वाली हूं. पेशे से ऑर्केस्ट्रा डांसर हूं. सोशल मीडिया पर मेरी प्रोफाइल है, जहां मैंने अपने काम के बारे में साफ-साफ लिखा है, क्योंकि मैं ये काम छिपकर नहीं करती.
बचपन में डांस पसंद था, आज यही रोजी-रोटी है
मुझे बचपन से ही डांस का शौक था. पढ़ाई में मन नहीं लगता था. घर की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि बहुत कुछ कर सकूं. इसलिए किसी के घर लगन (शादी-ब्याह) हो, मोहल्ले में पूजा हो या कोई अन्य कार्यक्रम, मैं डांस करने जरूर जाती थी.
फिर सोचा कि जिस काम को मैं इतनी अच्छी तरह से कर सकती हूं, तो फिर उसे ही रोजी-रोटी का जरिया क्यों ना बनाऊं. स्टेज पर डांस करने के पैसे मिलते थे. मैंने शुरुआत की तो घरवालों ने बहुत डांटा. बहुत कुछ सुनाया. लेकिन मैं नहीं मानी, डांस करना नहीं छोड़ा.
मेरी शादी हो गयी, बच्चा भी है
आज इस पेशे में करीब सात साल हो चुके हैं. मेरी शादी हो गयी है. मेरा बच्चा भी है, लेकिन मेरा काम आज भी यही है. इसकी कमाई से मेरा घर चलता है.
मैं डांसर हूं. इसका मतलब यह तो नहीं कि कोई भी मुझे छूए
जमुई का वीडियो मेरे लिए नया नहीं है
जब जमुई वाला वीडियो देखा, तो मेरे मन में सबसे पहले यही ख्याल आया कि इसमें नया क्या है.
हमारे ऑर्केस्ट्रा के स्टेज पर तो रोज ऐसा होता है.
लोग स्टेज के पास आते हैं. हाथ लगाने की कोशिश करते हैं. कई बार दबोच लेते हैं. कई बार गोद में उठा लेते हैं. हम रोकते हैं, तो बहस शुरू हो जाती है.
और बात सिर्फ आम लोगों के कार्यक्रमों की नहीं है. कई बार बड़े लोगों के घर, प्रभावशाली लोगों की पार्टियों और शादी-ब्याह में भी यही सब होता है.
शिशु भी गलत तरीके से छूने की कोशिश करते हैं
कई बार तो स्थिति इतनी शर्मनाक होती है कि बताने में भी शर्म आती है.
रोकने पर कहते हैं : पैसा दे देंगे, काहे रोकती हो
दर्द यह है कि शिशु, 12 साल के लड़के अश्लील बातें करते हैं.
कई बार कोई लड़का हमें गोद में उठा लेता है. जब हम उसे रोकते हैं, तो जवाब मिलता है कि पैसा दे देंगे, काहे रोक रही हो.
उस समय हम क्या करें.
हमारा टेंट वाला या साथ का कोई आदमी रोकने की कोशिश करता है, तो मामला हाथापाई तक पहुंच जाता है. कई बार गोली चलने की बात तक सामने आ जाती है. ऐसे में हमें स्टेज छोड़कर भागना पड़ता है.
शादी में 4 से 6 हजार, बड़े लोगों के यहां 10 हजार तक फीस
लगन वाले घर में एक दिन का करीब 4 से 6 हजार रुपया मिलता है. बड़े और प्रभावशाली लोगों के यहां कार्यक्रम हो, तो फीस 10 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. लेकिन पैसे बढ़ने से हमारी परेशानी कम नहीं होती. शादी में आई स्त्रीओं और परिवार के लोगों से दूर हमारा अलग स्टेज बनाया जाता है.
लेकिन वहां बच्चा से लेकर बुजुर्ग तक पहुंच जाते हैं.
कई शराब के नशे में भी पहुंचते हैं और उनके बेटे और भतीजे सामने खड़े होते हैं, फिर भी वे हमें छूने की कोशिश करते हैं. जैसे हमारा डांसर होना ही उनके लिए हमारे शरीर पर हक जताने का अधिकार बना जाता है.
और सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब यह सब किसी बड़े आदमी के सामने हो रहा होता है और रोकने के बजाय हंसी में टाल दिया जाता है.
जवान खून है, मजा लेने दो
मैंने ऐसे मौके भी देखे हैं, जब सामने मौजूद बड़े-बुजुर्ग ने अश्लील हरकत कर रहे लड़कों को रोकने के बजाय कहा कि जवान खून है, मजा लेने दो.
हम विरोध करें, तो उल्टा हमें ही समझाया जाता है.
इतना ही सती सावित्री हो तो यहां क्या कर रही हो.
और फिर कपड़ों पर सवाल आता है.
ऐसे कपड़े पहनोगी, तो लोग छुएंगे ही.
मेरा सवाल है : किसने दिया तुम्हें हक
….लेकिन मेरा सवाल है कि मैं स्टेज पर डांस कर रही हूं, इसका मतलब यह कब से हो गया कि कोई भी मुझे छू सकता है.
मेरे कपड़े किसी को मेरी मर्जी के खिलाफ हाथ लगाने का अधिकार नहीं देते.
काश, जमुई के वीडियो की तरह हमारी भी जिंदगी कोई दिखाये
जमुई में जो हुआ, उसका वीडियो सामने आ गया. लोगों ने देखा कि एक लड़की को घेरकर उसके साथ क्या किया जा रहा था.
लेकिन बिहार के अलग-अलग इलाकों में ऑर्केस्ट्रा और स्टेज पर काम करने वाली हम जैसी कितनी ही लड़कियां रोज ऐसी स्थिति से गुजरती हैं, इसका कोई वीडियो नहीं बनाता.
हममें से बहुत सी लड़कियां मजबूरी में चुप रहती हैं, क्योंकि हमें रोटी के लिए अगले दिन फिर उसी स्टेज पर जाना है. फिर वही लोग सामने मिल सकते हैं. फिर वही सवाल उठ सकते हैं कि जब इतना बुरा लगता है, तो ये काम क्यों करती हो.
मैं भी यही काम करके अपना घर चलाती हूं. अपने शिशु के लिए कमाती हूं.
पर आप याद रखें मुझे नाचने की कीमत मिलती है, अपना शरीर छुआने की नहीं.
जमुई का वीडियो देखकर लोग कह रहे हैं कि ये गलत हुआ.
मैं बस इतना कहूंगी कि यह सिर्फ जमुई की कहानी नहीं. यह उन तमाम स्टेज की कहानी है, जहां किसी लड़की के डांस को, उसकी कलाकार आत्मा को ना देख कर उसके देह से स्पोर्ट्सने की आजादी की उस कलाकार की ओर से मौन सहमति समझ लिया जाता है.
बस इंतजार है उस दिन का जब हमारे इस दर्द को भी कोई साझा करेगा और उसे देखकर लोग हमारे समर्थन में आगे आयेंगे.
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