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पैरेंटिंग टिप्स: रील्स और गेम्स के आदी हो गए हैं बच्चे? स्क्रीन टाइम कम कराने के लिए अपनाएं ये फॉर्मूला

Kids Screen Addiction: गर्मियों की छुट्टियां बच्चों के लिए आराम और मनोरंजन का समय होती हैं, लेकिन इसी दौरान कई शिशु मोबाइल, टैबलेट और वीडियो गेम्स के ज्यादा इस्तेमाल के आदी हो जाते हैं. सुबह उठते ही स्क्रीन और रात तक वीडियो देखने की आदत अब कई घरों में चिंता का कारण बन चुकी है. ऐसे में स्कूल खुलने से पहले बच्चों की दिनचर्या को फिर से संतुलित करना बेहद जरूरी है.

धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का स्क्रीन टाइम अचानक बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम करना ज्यादा प्रभावी होता है. यदि बच्चा रोज कई घंटे मोबाइल इस्तेमाल करता है, तो हर दिन उसका स्क्रीन टाइम थोड़ा-थोड़ा घटाएं. इससे वह बदलाव को आसानी से स्वीकार कर पाएगा और चिड़चिड़ापन भी कम होगा.

सोने से पहले बनाएं नो-स्क्रीन रूल

स्कूल शुरू होने से पहले बच्चों की नींद की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है. सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए. इससे बच्चों की स्लीप क्वालिटी बेहतर होती है और सुबह जल्दी उठने में परेशानी नहीं होती.

घर में तय करें स्क्रीन-फ्री जोन

घर में कुछ जगहों और समय को पूरी तरह स्क्रीन-फ्री बनाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय या बेडरूम में मोबाइल का इस्तेमाल न करने का नियम बनाया जा सकता है. जब पूरा परिवार इन नियमों का पालन करता है, तो शिशु भी उन्हें आसानी से अपनाने लगते हैं.

बोरियत को बनाएं रचनात्मकता का मौका

अक्सर माता-पिता बच्चों की बोरियत दूर करने के लिए उन्हें फोन दे देते हैं, लेकिन यही बोरियत उनकी रचनात्मकता को बढ़ाने का अवसर भी बन सकती है. बच्चों को किताबें पढ़ने, चित्र बनाने, बोर्ड गेम स्पोर्ट्सने, साइकिल चलाने या अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें.

माता-पिता भी बनें अच्छी मिसाल

शिशु केवल सलाह से नहीं, बल्कि उदाहरण से सीखते हैं. यदि माता-पिता खुद हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे, तो बच्चों से स्क्रीन टाइम कम करने की उम्मीद करना मुश्किल होगा. परिवार के साथ समय बिताते हुए मोबाइल से दूरी बनाकर रखें और बच्चों को भी क्वालिटी टाइम दें.

स्कूल शुरू होने से पहले करें नई शुरुआत

स्कूल खुलने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे में अभी से छोटे-छोटे बदलाव शुरू करना फायदेमंद रहेगा. स्क्रीन टाइम कम करने की प्रक्रिया को सजा नहीं, बल्कि एक सकारात्मक बदलाव की तरह अपनाएं. इससे शिशु धीरे-धीरे पढ़ाई, स्पोर्ट्सकूद और रचनात्मक गतिविधियों की ओर वापस लौट सकेंगे.

यह भी पढ़ें: हर जिद पूरी करना नहीं, समझदारी सिखाना है जरूरी, बच्चों को ऐसे बताएं ‘Need’ और ‘Want’ का फर्क 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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