Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन्स के कारण इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार तीसरे दिन भी तेजी से बढ़ी हैं. अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही शांति समझौता होने की उम्मीदें धुंधली पड़ गई हैं, जिससे ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की सप्लाई रुकने की चिंता गहरी हो गई है. इस हफ्ते के शुरुआती दो दिनों में ही तेल की कीमतें 7% से ज्यादा बढ़ चुकी थीं. अब बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है.
तेल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ रही हैं?
बाजार में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह पर्शियन गल्फ और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होने वाले एनर्जी एक्सपोर्ट को लेकर बढ़ी अनिश्चितता है. पहले ट्रेडर्स को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई अंतरिम (interim) समझौता हो जाएगा, जिससे सप्लाई रूट जल्दी खुल जाएंगे और ग्लोबल इन्वेंट्री (स्टॉक) पर दबाव कम होगा. लेकिन अब बातचीत रुकने की समाचारों से यह उम्मीद टूटती दिख रही है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब भी समझौते को लेकर उम्मीद जताई है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए बाजार में आशंका बढ़ गई है.
मिडिल ईस्ट में इस वक्त क्या चल रहा है?
क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और हमले तेज होने से हालात और बिगड़ गए हैं:
- इजराइल की कार्रवाई: इजराइल ने लेबनान में अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं. हालांकि दोनों देशों के बीच बुधवार को एक और दौर की बातचीत होनी है, लेकिन टिकाऊ सीजफायर को लेकर बाजार अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है.
- ईरान के मिसाइल हमले: समाचारों के मुताबिक, ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं.
- अमेरिका का एक्शन: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप (Qeshm Island) पर जवाबी हवाई हमले किए हैं.
क्या सप्लाई में भी कोई कमी आ रही है?
हां, केवल युद्ध के हालात ही नहीं, बल्कि बाजार के बुनियादी आंकड़े भी कीमतों को ऊपर ले जा रहे हैं. इंडस्ट्री के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार (inventories) में 6.8 मिलियन बैरल की भारी गिरावट आई है. अगर प्रशासनी आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर देते हैं, तो यह लगातार छठा हफ्ता होगा जब अमेरिका में कच्चे तेल के स्टॉक में कमी दर्ज की जाएगी. यह साफ दिखाता है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल बाजार में इस वक्त सप्लाई काफी कम यानी टाइट है.
तेल व्यापारियों पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
बाजार में बढ़ते जोखिम और भारी उतार-चढ़ाव (volatility) को देखते हुए व्यापारियों ने अब रिस्क लेना कम कर दिया है. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट (सक्रिय कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या) घटकर पिछले साल अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया है. इसका मतलब है कि राजनायिक बातचीत के भविष्य और तेल की सप्लाई को लेकर बनी असमंजस की स्थिति के कारण ट्रेडर्स अब बाजार से अपने हाथ पीछे खींच रहे हैं.
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