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रांची के सदर अस्पताल में डॉक्टर ने मांडर की महिला का इलाज करने से किया इनकार, कहा – ‘कहीं से भी आए हों, मुझे फर्क नहीं पड़ता’

Ranchi Sadar Hospital : राजधानी रांची के प्रतिष्ठित सदर अस्पताल में एक बार फिर डॉक्टरों के कथित गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और मरीजों के प्रति असंवेदनशीलता का मामला प्रकाश में आया है. रांची के मांडर ब्लॉक अंतर्गत मुरकुनी गांव की रहने वाली 53 वर्षीय मरीज सुनैना पाठक अपने घुटने के गंभीर दर्द का इलाज कराने सदर अस्पताल आई थी. उनके साथ उनके दो बेटे अविनाश पाठक और आशुतोष पाठक भी थे. लगभग 50 किलोमीटर की दूरी तय कर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने नियमानुसार टोकन कटवाया और डॉक्टर के केबिन के बाहर अपनी बारी का इंतजार करने लगे. लेकिन जब उनका नंबर आया, तो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज को देखने से साफ इनकार कर दिया.

​’मेरी मर्जी, कहीं से भी आए हो कोई फर्क नहीं पड़ता’

​परिजनों के अनुसार, ओपीडी (OPD) में ड्यूटी पर मौजूद ऑर्थोपेडिशियन (हड्डी रोग विशेषज्ञ) डॉ. अभिषेक पांडेय बारी-बारी से मरीजों की जांच कर रहे थे. जैसे ही पीड़ित स्त्री का नंबर आया, डॉक्टर ने कह दिया कि वह अब मरीज नहीं देखेंगे. जबकि मरीजों को देखने का समय सदर में 3 बजे तक का है. जब परिजनों ने इसका कारण पूछा, तो डॉक्टर ने कथित तौर पर अहंकार भरे लहजे में कहा, “मेरी मर्जी.” स्त्री के छोटे बेटे ने जब डॉक्टर से मिन्नत करते हुए कहा कि वे बहुत दूर से इलाज कराने आए हैं, तो डॉक्टर का जवाब आया कि आप कहीं से भी आए हों, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, वह अभी मरीज को नहीं देखेंगे. थोड़ी बहस होने के बाद डॉक्टर ने उसी अंदाज में बताया कि वह केवल सुबह दिखाए गए मरीजों की रिपोर्ट चेक कर रहे हैं.

​दूसरे डॉक्टर से कराया इलाज, विभागीय शिकायत पर मिला निराशाजनक जवाब

​डॉ. अभिषेक पांडेय द्वारा इलाज से मना किए जाने के बाद परेशान परिजनों ने सदर अस्पताल में ही मौजूद दूसरे चिकित्सक डॉ. एस. अली से संपर्क किया, जिन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए मरीज की जांच की. इस दुर्व्यवहार के खिलाफ स्त्री के बेटे अविनाश पाठक ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन ‘104’ पर शिकायत दर्ज कराई. हालांकि, वहां से उन्हें यह निराशाजनक जवाब मिला कि चूंकि मरीज ने दूसरे डॉक्टर से जांच करा ली है, इसलिए इस शिकायत का अब कोई खास फायदा नहीं होगा, हालांकि शिकायत दर्ज कर ली गई है.

​डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने भी मामले को हल्के में टाला

​हेल्पलाइन से संतुष्ट न होने पर परिजनों ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक से डॉक्टर की शिकायत की. लेकिन वहां भी अस्पताल प्रबंधन का रवैया ढुलमुल ही नजर आया. उपाधीक्षक कार्यालय से परिजनों को कहा गया कि डॉ. एस. अली ने तो मरीज को देख ही लिया है, रही बात डॉ. अभिषेक पांडेय की, तो उन्हें बोल दिया जाएगा कि वे अपना व्यवहार ठीक रखें और आगे से ऐसी बात न करें. इस पूरे घटनाक्रम ने सदर अस्पताल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पीड़िता के परिजनों ने कहा कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के साथ डॉक्टरों का ऐसा आचरण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं माना जा सकता.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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