सरायकेला-खरसावां, (शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट): कोल्हन प्रमंडल के सरायकेला-खरसावां जिले में बढ़ती गर्मी और चढ़ते पारे के बीच पेयजल समस्या ने विकराल रूप ले लिया है. क्षेत्र की महत्वपूर्ण ‘गोंडामारा-सामुरसाई’ जलापूर्ति योजना में आई तकनीकी खराबी के कारण पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है. इस योजना के बंद होने से जोरडीहा और तेलायडीह पंचायत के अंतर्गत आने वाले लगभग 1274 घरों में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है. सुबह और शाम के समय नल से पानी आने की उम्मीद में बैठे ग्रामीणों को अब दूर-दराज के चापाकलों और अन्य निजी स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है.
लो-वोल्टेज और खराब ट्रांसफॉर्मर बना मुख्य बाधा
मिली जानकारी के अनुसार, जलापूर्ति बाधित होने का मुख्य कारण क्षेत्र में व्याप्त ‘लो-वोल्टेज’ की समस्या है. इस वजह से पंप हाउस में लगे शक्तिशाली मोटर सही गति से नहीं चल पा रहे हैं, जिसके चलते संजय नदी से आने वाला पानी जलमीनार तक नहीं पहुंच रहा है. बताया गया कि योजना की क्षमता लगभग 4.20 लाख लीटर है, लेकिन वोल्टेज की कमी के कारण जलमीनार में पर्याप्त जल भंडारण नहीं हो पा रहा है. इसके अतिरिक्त, योजना के संचालन के लिए लगे दो ट्रांसफॉर्मर में से एक में तकनीकी खराबी आ गई है. जलापूर्ति का जिम्मा संभाल रही कंपनी ‘एसकेएस प्राइवेट लिमिटेड’ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएचइडी (PHED) विभाग को लिखित रूप से सूचित कर दिया है.

इन 10 गांवों की आबादी पर टूटा संकट
इस जलापूर्ति योजना के ठप होने से खरसावां की दो प्रमुख पंचायतों जोरडीहा और तेलायडीह के करीब दस गांव सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में सामुरसाही, गोंडामारा, छोटाबांबो, तेलांगजुडी, पिताकलांग, महादेवबुट्टा, छोटा सरगाडीह, बालियाटांड, फूचुडूंगरी, बेगनाडीह, जोरडीहा और गितीलता गांव के विभिन्न टोले शामिल हैं. इन इलाकों में रहने वाले 1274 परिवारों को पिछले 72 घंटों से एक बूंद पानी भी नल के जरिए नसीब नहीं हुआ है.
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चापाकलों पर लंबी कतारें, व्यवस्था पर सवाल
जलापूर्ति ठप होने के बाद ग्रामीण अब पारंपरिक जलस्रोतों जैसे चापाकल, कुआं और सोलर संचालित जल मीनारों पर निर्भर हो गए हैं. भीषण गर्मी में पानी भरने के लिए खासकर स्त्रीओं और बच्चों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. सुबह होते ही चापाकलों पर बर्तनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई चापाकल पहले से ही खराब पड़े हैं, जिससे समस्या और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है. लोगों ने मांग की है कि जलापूर्ति बहाल होने तक खराब चापाकलों की तत्काल मरम्मत कराई जाए.

7 करोड़ का भारी-भरकम निवेश, फिर भी प्यासे ग्रामीण
उल्लेखनीय है कि इस महत्वकांक्षी योजना का निर्माण करीब सात करोड़ रुपये की लागत से किया गया था. वर्ष 2024 की शुरुआत से ही इस योजना के जरिये संजय नदी का शुद्ध पानी ग्रामीणों के घरों तक पहुंचाने का दावा किया गया था. लेकिन बार-बार आती तकनीकी खामियों ने इस योजना की सफलता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. वहीं, बड़ा सरगीडीह गांव के निवासी पिछले एक वर्ष से पाइपलाइन बिछने के बावजूद पानी का इंतजार कर रहे हैं, जहां अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है.

अधिकारी का आश्वासन: जल्द बहाल होगी सप्लाई
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएचइडी (PHED) के कार्यपालक अभियंता ललित इंदूवार ने स्वीकार किया कि बिजली से संबंधित तकनीकी समस्या के कारण जलापूर्ति बाधित हुई है. उन्होंने कहा कि विभाग और संबंधित कंपनी ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत और वोल्टेज सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं. अभियंता ने आश्वासन दिया है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर समस्या का समाधान कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है.
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