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‘हम जिसकी चाहें सत्ता पलट देंगे’ से ‘वेलकम टू इंडिया’ तक : एलन मस्क के पोस्ट और राहुल गांधी के रिप्लाई के क्या हैं मायने?

दुनिया के सबसे चर्चित टेक अरबपतियों में शामिल एलन मस्क एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. इस बार मामला हिंदुस्तान में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink की व्यवसायिक शुरुआत  में देरी से जुड़ा है.

मस्क ने आरोप लगाया कि हिंदुस्तान में कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह Starlink को बाजार में उतरने से रोक रहे हैं. इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा, “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” यानी हिंदुस्तान में आपका स्वागत है, एलन. अभी दूसरे शख्स को देखना बाकी है.

मस्क ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए लिखा, “Thank you, Rahul. This is indeed troubling.” यानी धन्यवाद, राहुल. यह वाकई चिंताजनक है. इस बातचीत के बाद मस्क का 2020 का वह पुराना ट्वीट भी चर्चा में आ गया, जिसमें उन्होंने लिखा था, “We will coup whoever we want! Deal with it.”

इसका मोटे तौर पर अर्थ है, “हम जिसकी चाहें सत्ता पलट देंगे, इससे निपट लो.” हालांकि, वह ट्वीट बोलीविया में लिथियम और तत्कालीन नेतृत्वक घटनाक्रम को लेकर हुई बहस के संदर्भ में था, हिंदुस्तान को लेकर नहीं. ऐसे में चलिए इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं.

राहुल गांधी ने क्या लिखा, मस्क ने क्या जवाब दिया?

मस्क की टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने X पर लिखा, “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” राहुल ने अपने पोस्ट में ‘दूसरे शख्स’ का नाम नहीं लिया. हालांकि कई मीडिया रिपोर्टों में इसे उद्योगपति गौतम अडानी की ओर इशारा माना जा रहा है, लेकिन राहुल गांधी की तरफ से पुष्टि नहीं की गई है.

राहुल गांधी-मस्क के ट्वीट

हालांकि, सोशल मीडिया पर हुई इस बातचीत से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राहुल गांधी और मस्क के बीच कोई नेतृत्वक गठजोड़ है. फिलहाल सामने आए पोस्ट से इतना ही स्पष्ट है कि दोनों ने हिंदुस्तान में कारोबारी माहौल और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर टिप्पणी की है.

Starlink की लॉन्चिंग में देरी से कैसे शुरू हुआ विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत हिंदुस्तान में Starlink की सेवाएं शुरू होने में हो रही देरी से हुई. मस्क का कहना है कि उनकी कंपनी 165 से ज्यादा देशों में लाइसेंस के साथ काम कर रही है और हिंदुस्तान में भी प्रशासनी नियमों का पालन करने में पांच साल लगा चुकी है. इसके बावजूद कंपनी को इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं मिली है.

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मस्क ने X पर आरोप लगाया कि Starlink को “certain oligarchs” यानी कुछ बेहद प्रभावशाली कारोबारी रोक रहे हैं, ताकि हिंदुस्तानीय बाजार पर उनकी पकड़ बनी रहे. उन्होंने इसे हिंदुस्तानीय लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे उन लोगों को नुकसान हो रहा है, जिन्हें अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं मिल पाती.

इसके बाद मस्क ने एक और पोस्ट में सवाल किया, “Is Ambani the real boss of India?” यानी क्या अंबानी हिंदुस्तान के असली बॉस हैं? इस टिप्पणी को रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनकी टेलीकॉम कंपनी Jio की ओर इशारे के तौर पर देखा गया. हालांकि, इससे पहले मस्क ने अपने शुरुआती आरोप में किसी कारोबारी समूह का नाम नहीं लिया था.

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हिंदुस्तान प्रशासन ने मस्क के आरोपों पर क्या कहा?

मस्क के आरोपों के बाद हिंदुस्तान प्रशासन ने भेदभाव के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए प्रशासनी नियम निष्पक्ष और भेद-भाव रहित है. प्रशासन के मुताबिक, इस क्षेत्र में काम शुरू करने वाली कंपनियों को सुरक्षा से जुड़ी सभी शर्तें पूरी करनी होती हैं.

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि Starlink, Reliance Jio की सैटेलाइट सेवा और हिंदुस्तानी समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb- तीनों कंपनियों की सुरक्षा से जुड़ी जांच की जा रही है और तीनों कंपनियां नियामकीय प्रक्रिया के लगभग एक ही चरण में हैं. सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया की ओर बढ़ सकती है.

इसलिए प्रशासन ने Starlink के साथ भेदभाव होने के आरोप को निराधार और गलत बताया. यानी मस्क जहां देरी के पीछे कारोबारी हितों को वजह मान रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि मंजूरी की प्रक्रिया सभी कंपनियों के लिए समान है और सुरक्षा शर्तों का पालन जरूरी है.

मस्क का ‘सत्ता पलट’ वाला ट्वीट क्यों किया जा रहा याद?

Starlink विवाद पर जब राहुल गांधी ने ट्वीट किया तो लोग कयास लगाने लगे कि क्या हिंदुस्तान में भी बोलीविया जैसा कुछ होने वाला है? और इसी बीच एलन मस्क का जुलाई 2020 का एक पुराना ट्वीट भी चर्चा में आ गया.

दरअसल, जुलाई 2020 में सोशल मीडिया पर एक यूजर ने आरोप लगाया था कि अमेरिका ने बोलीविया के तत्कालीन राष्ट्रपति इवो मोरालेस की प्रशासन को हटाने के लिए तख्तापलट कराया, ताकि वहां के लिथियम संसाधनों तक पहुंच बनाई जा सके. इस आरोप के जवाब में मस्क ने लिखा था, “We will coup whoever we want! Deal with it.” इसका मतलब है, “हम जिसकी चाहें सत्ता पलट देंगे, इससे निपट लो.” मस्क का यह बयान उस समय काफी चर्चा में रहा था और बाद में ट्वीट हटा दिया गया था.

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मस्क का यह बयान बोलीविया और वहां के लिथियम संसाधनों को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में था. इस ट्वीट से यह साबित नहीं होता कि मस्क ने खुद किसी देश में सत्ता परिवर्तन कराया था या वह हिंदुस्तान में ऐसा कुछ करना चाहते हैं. लेकिन उनके पुराने बयान और मौजूदा Starlink विवाद की वजह से उनकी कारोबारी ताकत, नेतृत्वक टिप्पणियों और अलग-अलग देशों में उनके प्रभाव को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है.

क्या यह सिर्फ कारोबार की लड़ाई है?

हिंदुस्तान में सैटेलाइट इंटरनेट का बाजार तेजी से अहम होता जा रहा है. Starlink के अलावा Jio और OneWeb जैसे खिलाड़ी भी इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाना चाहते हैं. ऐसे में लाइसेंस, स्पेक्ट्रम, सुरक्षा मंजूरी और बाजार में कॉम्टीशन जैसे मुद्दे कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

हिंदुस्तान में इंटरनेट का कारोबार बहुत बड़ा है. Starlink के अलावा Jio और OneWeb जैसे खिलाड़ी भी इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाना चाहते हैं. हिंदुस्तानीय दूरसंचार नियामक TRAI की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश की टेलीकॉम कंपनियों की कुल कमाई करीब 4.04 लाख करोड़ रुपये रही. यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 8.59% ज्यादा है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरे टेलीकॉम सेक्टर की कमाई है, केवल इंटरनेट सेवाओं से होने वाली कमाई नहीं.

मस्क हिंदुस्तान में कारोबार क्यों करना चाहते हैं?

हिंदुस्तान में इंटरनेट यूजर्स की संख्या भी बहुत बड़ी है. मार्च 2026 तक देश में करीब 109 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर थे. इतनी बड़ी संख्या में यूजर्स होने की वजह से हिंदुस्तान दुनिया की बड़ी टेक और इंटरनेट कंपनियों के लिए अहम बाजार है.

हिंदुस्तान मस्क के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है. इसके अलावा, सैटेलाइट इंटरनेट के बाजार में आगे बढ़ने की भी गुंजाइश है. रिपोर्ट के मुताबिक, Deloitte ने अनुमान लगाया है कि हिंदुस्तान का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार 2030 तक 1.9 अरब डॉलर का हो सकता है. यही वजह है कि हिंदुस्तान में Starlink की एंट्री सिर्फ एक नई इंटरनेट सेवा शुरू करने का मामला नहीं है. यह एक बड़े बाजार में जगह बनाने की कोशिश भी है.

हिंदुस्तान में स्टारलिंक की कीमत क्या होगी?

हिंदुस्तान में Starlink की कीमत अभी घोषित नहीं हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका पूरा सेटअप किट करीब 33,000 रुपये और मंथली प्लान 3,000 से 4,200 रुपये तक हो सकता है. इसके मुकाबले Jio और Airtel के घरेलू ब्रॉडबैंड प्लान 399 से 799 रुपये प्रतिमाह तक मिलते हैं. ऐसे में Starlink उन इलाकों के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या फाइबर इंटरनेट की सुविधा कमजोर है.

नोट: एलन मस्क, राहुल गांधी और Starlink विवाद पर हमारी यह स्टोरी आपको कैसी लगी? इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है? हमें ईमेल komalkumarix29@gmail.com के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जरूर भेजें. आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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