किसी समय दुनिया की ताकत का सीधा मतलब था—कितनी जमीन आपके नियंत्रण में है, कितनी सीमाएं आपके पक्ष में हैं और कितने बंदरगाहों या उपनिवेशों पर आपका कब्जा है.
लेकिन 21वीं सदी की वैश्विक वित्तीय स्थिति ने शक्ति के इस पुराने नक्शे पर एक और परत जोड़ दी है.
यह परत है कनेक्टिविटी की.
आज किसी देश को कमजोर करने के लिए जरूरी नहीं कि उसकी सीमा में सेना भेजी जाए या उसके किसी इलाके पर कब्जा किया जाए. कभी-कभी उसके व्यापार, ऊर्जा या तकनीक के रास्ते को बाधित करना ही पर्याप्त हो सकता है.
यहीं से सामने आता है—चोकपॉइंट्स की भू-नेतृत्व.
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The post कब्जे से कनेक्टिविटी तक: वैश्विक नेतृत्व में चोकपॉइंट्स क्यों बन रहे हैं नई ताकत? appeared first on Naya Vichar.

