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‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में देव आनंद की बहन बनने से कर दिया था इनकार, जाहिदा हुसैन की वो जिद जिसने जीनत अमान को बनाया सुपरस्टार

लोग मुझसे कहते थे कि देव आनंद जैसे सुपरस्टार का ऑफर ठुकराकर मैंने अपने ही करियर को नुकसान पहुंचाया है. पर मुझे किसी के अहसान या समझौते की बदौलत मिला स्टारडम नहीं चाहिए था. मैं अपनी शर्तों पर जीने वाली औरत हूं और हमेशा रहूंगी.

ये बेबाक, तीखे और खुद्दारी से भरे शब्द किसी और के नहीं, बल्कि 70 के दशक की मशहूर अदाकारा जाहिदा हुसैन के हैं. इस बयान में न तो कोई अफसोस था और न ही कोई लाचारी. इसमें दिखती थी तो बस उस औरत की अटूट अकड़ और हिम्मत, जिसने बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों और बड़े-बड़े बैनरों के आगे घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया था.

9 अक्टूबर 1944 को मुंबई के सबसे मखमली और आलीशान माहौल में जन्मी नरगिस की भतीजी जाहिदा हुसैन का फिल्मी सफर भले ही बहुत लंबा न रहा हो, लेकिन उनकी जिंदगी का हर पन्ना किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म जैसा रहा है. देव आनंद की फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ से लाखों दिलों की धड़कन बनने वाली इस एक्ट्रेस की ऑन-स्क्रीन लाइफ जितनी हसीन दिखी, उनके फैसले उतने ही चौंकाने वाले रहे. सुपरहिट फिल्मों को लात मारना, अजीबो-गरीब वजहों से बड़े-बड़े रोल ठुकरा देना और फिर अचानक सफलता के शिखर से गायब हो जाना.

मरीन ड्राइव के आलीशान बंगले से लेकर पैसों की तंगी, देव आनंद से बगावत से लेकर एक कुत्ते के खौफ में हेमा मालिनी का करियर संवारने तक. आज 9 अक्टूबर 2026 को जाहिदा हुसैन अपना 81वां जन्मदिन मना रही हैं. उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर आइए जानते हैं बॉलीवुड की इस बेबाक ‘ग्लैमर क्वीन’ की जिंदगी के वो 5 वाकये, जिन्होंने कभी पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था.

हीरोइन बनी थी, अब बहन नहीं बनूंगी, जाहिदा का वो एक इनकार और जीनत अमान की रातों-रात चमकी किस्मत

यह किस्सा बॉलीवुड की उन सबसे मजेदार बहसों में गिना जाता है जिसने एक नई हीरोइन की तकदीर बदल दी थी. फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ (1970) में देव आनंद और जाहिदा की रोमांटिक जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया था. इसके बाद जब देव आनंद अपनी नई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ की तैयारी कर रहे थे, तो उनके दिमाग में अपनी बहन ‘जैनिस’ के रोल के लिए सबसे पहला नाम जाहिदा का ही आया.

देव साहब बहुत उम्मीद लेकर जाहिदा के पास पहुंचे थे. लेकिन जाहिदा ने बड़ी बेबाकी से सीधे उनके मुंह पर कह दिया-

“देव जी, जब मैं आपकी पिछली फिल्म में हीरोइन बनकर रोमांस कर चुकी हूं, तो अब अचानक आपकी बहन के रोल में आकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मारूं? दर्शक मुझे आपकी बहन के रूप में कभी कबूल ही नहीं करेंगे.”

देव आनंद ने उन्हें बहुत समझाया कि यह रोल कितना दमदार है, लेकिन जाहिदा अपनी बात से टस से मस नहीं हुईं. इस बात से देव साहब थोड़े नाराज भी हुए और दोनों के बीच दूरियां आ गईं. पर जाहिदा की इसी जिद का फायदा मिला जीनत अमान को. हाथ में चिलम थामकर ‘दम मारो दम’ गाने पर थिरकते ही जीनत अमान रातों-रात पूरे देश की क्रश और बॉलीवुड की नई ग्लैमर क्वीन बन गईं.

मरीन ड्राइव की रईसी और फिर अचानक आया किस्मत का भूचाल

जाहिदा का बचपन मुंबई के मरीन ड्राइव वाले इलाके में एक बड़े और बहुत अमीर परिवार में बीता था. उनके पिता अख्तर हुसैन नामी फिल्म मेकर थे और बुआ नरगिस उस दौर की सबसे बड़ी स्टार थीं. जब तक नरगिस जी की शादी नहीं हुई थी, पूरे परिवार की जिम्मेदारी वही संभालती थीं और घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. जाहिदा का बचपन गाड़ियों और बड़े-बड़े कमरों के बीच बीता.

लेकिन वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता. पिता की बनाई कुछ फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप हो गईं. घाटा इतना बढ़ा कि परिवार को अपना फिल्म स्टूडियो और गाड़ियां तक बेचनी पड़ीं. हालांकि, घर में दिन-रात फिल्मों की ही बातें होती थीं, इसलिए जाहिदा का खिंचाव भी धीरे-धीरे कैमरे और एक्टिंग की तरफ होता चला गया.

राज कपूर ब्लैंक चेक लेकर पहुंचे थे, लेकिन बुआ नरगिस ने बीच में अड़ा दी टांग

जाहिदा दिखने में इतनी प्यारी और हसीन थीं कि उस जमाने के बड़े-बड़े डायरेक्टर उनके साथ काम करना चाहते थे. बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर तो उन्हें अपने आरके बैनर से बहुत बड़े लेवल पर लॉन्च करने का मन बना चुके थे. कहा तो यह भी जाता है कि राज कपूर ने जाहिदा के पिता के सामने खाली चेक रख दिया था कि जो रकम चाहिए भर लीजिए, बस जाहिदा को हमारी फिल्म से लॉन्च होने दीजिए.

जाहिदा खुद इस मौके को लेकर बहुत खुश थीं, लेकिन तभी बीच में आ गईं उनकी बुआ नरगिस. नरगिस ने घर के कुछ नियमों और अपनी सोच की वजह से इस ऑफर के लिए साफ मना कर दिया. और इस तरह बुआ के एक फैसले ने राज कपूर जैसे बड़े बैनर के साथ जाहिदा की शुरुआत होने से रोक दिया.

एक कुत्ते के डर से छोड़ दी ‘लाल पत्थर’, बिल्ली की वजह से हाथ से निकल गई दूसरी फिल्म

जाहिदा के फैसले कई बार इतने अजीब होते थे कि सुनकर कोई भी हैरान रह जाए. उन्होंने सुपरहिट फिल्म ‘लाल पत्थर’ में काम करने से मना कर दिया था, जो बाद में हेमा मालिनी को मिली और उनके करियर के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई. जाहिदा ने यह फिल्म किसी पैसे या रोल की खराबी की वजह से नहीं छोड़ी थी, बल्कि एक कुत्ते के डर से छोड़ी थी.

सीन यह था कि एक खूंखार अल्सेशियन कुत्ता उन पर झपटेगा और वे डरकर हीरो राज कुमार की बाहों में गिरेंगी. जाहिदा को कुत्तों और बिल्लियों से इतना डर लगता था कि वे इस सीन के बारे में सुनकर ही घबरा गईं और फिल्म छोड़ दी. हद तो तब हो गई जब उन्होंने एक और फिल्म सिर्फ इसलिए ठुकरा दी क्योंकि उसमें गोद में बिल्ली को उठाकर ‘म्याऊं’ कहना था.

देव आनंद के लिए बुना था स्वेटर, जो ‘ज्वेल थीफ’ के गाने में स्क्रीन पर दिखा

‘हरे रामा हरे कृष्णा’ वाली नाराजगी के बावजूद देव आनंद और जाहिदा के बीच का रिश्ता हमेशा बहुत प्यारा और अपनापन भरा रहा. दोनों के बीच की ट्यूनिंग का एक किस्सा यह भी है कि एक बार शूटिंग के दौरान देव साहब ने बातों-बातों में जाहिदा से अपने लिए एक स्वेटर बुनने को कह दिया. जाहिदा ने बड़े प्यार से स्वेटर बुना और देव आनंद को सरप्राइज में दे दिया.

देव साहब को वह स्वेटर इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी मशहूर फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ के सुपरहिट गाने “ये दिल न होता बेचारा” में वही स्वेटर पहनकर शूटिंग की थी. इतना ही नहीं, देव आनंद हर साल 9 अक्टूबर को जाहिदा के जन्मदिन पर उन्हें कुछ न कुछ खास तोहफा जरूर देते थे, जिसमें एक बार उन्होंने सोने का बहुत सुंदर ब्रेसलेट दिया था.

जब अपने ही फैसले से चमक-धमक की दुनिया से दूर हो गईं

1970 के दशक की शुरुआत में ‘अनोखी रात’, ‘प्रेम पुजारी’ और ‘गैम्बलर’ जैसी अच्छी फिल्में करने के बाद, जब जाहिदा का करियर काफी अच्छा चल रहा था, उन्होंने अचानक बिजनेसमैन केसरी नंदन सहाय से शादी कर ली. शादी के बाद उन्होंने बहुत सादगी से अपने परिवार को चुना और ग्लैमर की इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

आज उनके दो बेटे ब्रजेश और निलेश हैं. जब सालों बाद किसी इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इतने बड़े-बड़े रोल और एक्टिंग छोड़ने का कभी अफसोस हुआ? तो उन्होंने बहुत सुकून से हंसते हुए कहा था- “मुझे अपनी मर्जी से जिंदगी जीने का कोई पछतावा नहीं है, मैं अपनी फैमिली के साथ बहुत खुश हूं.”

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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