रांची: झारखंड हाईकोर्ट में 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परिणाम को रद्द करने के मामले में दायर अपील याचिकाओं पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रार्थियों और प्रतिवादी पक्ष की दलीलें सुनीं. इसके बाद खंडपीठ ने प्रार्थियों को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि जब संबंधित मामले में एकल पीठ अपना आदेश सुरक्षित रख चुकी है, तो इस स्तर पर आदेश पारित नहीं किया जा सकता. इस मामले में प्रार्थी अयूब तिर्की एवं अन्य की ओर से अपील याचिका दायर कर एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई है.
एकल पीठ में फैसला सुरक्षित होने का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान सफल अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने खंडपीठ को बताया कि झारखंड प्रशासन की ओर से परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एकल पीठ में सुनवाई पूरी हो चुकी है. एकल पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. ऐसे में जब मूल विवाद पर एकल पीठ का फैसला आना बाकी है, तब इस स्तर पर हस्तक्षेप को लेकर आदेश पारित करने का औचित्य नहीं है. खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रार्थियों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.
राज्य प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती
मामले में अपीलकर्ता की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि राज्य प्रशासन ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द कर दी है. इस फैसले को सफल अभ्यर्थियों ने रिट याचिका दायर कर चुनौती दी है. परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना और उसके कानूनी प्रभाव को लेकर विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है. इसी मामले में एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अयूब तिर्की एवं अन्य की ओर से अपील याचिका दायर की गई है. अपीलकर्ताओं ने मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी.
सफल अभ्यर्थियों और अपीलकर्ताओं की दलीलें सुनी गईं
चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया. सफल अभ्यर्थियों की ओर से बताया गया कि परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एकल पीठ में सुनवाई पूरी हो चुकी है. वहीं, अपीलकर्ता पक्ष ने परीक्षा रद्द किये जाने और उससे संबंधित विवाद की ओर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया. दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी.
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मुख्य विवाद पर एकल पीठ के फैसले का इंतजार
इस सुनवाई में प्रार्थियों को राहत नहीं मिली है, लेकिन इससे परीक्षा रद्द करने के मूल विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हुआ है. राज्य प्रशासन की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एकल पीठ का फैसला अभी महत्वपूर्ण है. एकल पीठ के आदेश के बाद ही मामले की आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी. फिलहाल, 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों की निगाहें हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं.
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