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March 17, 2026

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अमेरिका में उठी RSS और RAW को बैन करने की मांग, भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिया कड़ा जवाब

USCIRF Report 2026 India Response: हिंदुस्तान ने सोमवार को यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम की ताजा रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया. इसमें अमेरिकी प्रशासन से हिंदुस्तान को ‘विशेष चिंता वाला देश’ (Country of Particular Concern – CPC) घोषित करने और कुछ व्यक्तियों व संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी. हिंदुस्तान प्रशासन ने इसे ‘प्रेरित और पक्षपातपूर्ण बताया. हिंदुस्तानीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बयान में कहा गया कि यह रिपोर्ट हिंदुस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का गलत आकलन करती है. यूएससीआईआरएफ की 2026 की वार्षिक  रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि हिंदुस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति खराब हुई है और अल्पसंख्यकों तथा उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है. रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और हिंदुस्तान की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों को लेकर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है. यूएससीआईआरएफ रिपोर्ट में आरएसएस जैसे हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों और सत्तारूढ़ हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के बीच संबंधों की भी जांच की गई है. इसमें दावा किया गया है कि मौजूदा नेतृत्वक माहौल ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दिया है. इसके अलावा, रिपोर्ट में कई राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों की आलोचना की गई है. इसके साथ ही आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिरासत, निष्कासन और भीड़ द्वारा हमलों जैसी घटनाओं को बढ़ावा दिया है. रिपोर्ट में आगे सुझाव दिया गया है कि अमेरिकी प्रशासन, हिंदुस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता, हथियारों की बिक्री और द्विपक्षीय व्यापार नीतियों को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार के मुद्दों से जोड़े. साथ ही आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा 6 लागू करते हुए हिंदुस्तान को हथियारों की बिक्री रोकने की भी सिफारिश की गई है. इसके अलावा अमेरिकी कांग्रेस से कहा गया है कि वह 2024 के ट्रांसनेशनल रिप्रेशन रिपोर्टिंग एक्ट को फिर से पेश कर पारित करे, ताकि हिंदुस्तान प्रशासन द्वारा अमेरिका में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए किए गए कथित ट्रांसनेशनल रिप्रेशन के मामलों की सालाना रिपोर्टिंग अनिवार्य की जा सके. हिंदुस्तान प्रशासन की प्रतिक्रिया यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदुस्तानीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आयोग ने एक बार फिर हिंदुस्तान की छवि को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. उन्होंने कहा कि तथ्यों के बजाय संदिग्ध स्रोतों तथा वैचारिक कथनों पर भरोसा किया है.  बयान में कहा गया, ‘हमने यूएससीआईआरएफ की ताजा रिपोर्ट पर ध्यान दिया है. हम हिंदुस्तान के बारे में उसके प्रेरित और पक्षपातपूर्ण वर्णन को सिरे से खारिज करते हैं. कई वर्षों से यूएससीआईआरएफ हिंदुस्तान की एक विकृत और चयनात्मक तस्वीर पेश करता रहा है, जो वस्तुनिष्ठ तथ्यों के बजाय संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक कथाओं पर आधारित है. इस तरह की बार-बार की गलत प्रस्तुति आयोग की अपनी विश्वसनीयता को ही कमजोर करती है.’ बयान में आगे कहा गया, ‘हिंदुस्तान की चयनात्मक आलोचना जारी रखने के बजाय यूएससीआईआरएफ को अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हो रही तोड़फोड़ और हमलों की चिंताजनक घटनाओं, हिंदुस्तान को निशाना बनाने की प्रवृत्ति, और अमेरिका में हिंदुस्तानीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता व डराने-धमकाने की घटनाओं पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए.’ अमेरिका में हिंदुस्तानीयों पर हमले: बढ़ती घटनाएं अमेरिका में हिंदुस्तानीयों के खिलाफ हमलों और नफरत से जुड़ी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, एंटी-इंडियन हेट क्राइम के मामलों में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में तेज उछाल आया है. 2023 से 2025 के बीच इसमें 100% से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई. 2024-25 के दौरान करीब 10 से ज्यादा हिंदुस्तानीय छात्रों की मौत हुई. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 2020-25 के बीच 160 हिंदुस्तानीयों की मौत हुई है, इनमें से 100 से ज्यादा छात्र हैं. वहीं अलग-अलग रिपोर्ट्स यह संकेत देती हैं कि पिछले एक साल 2025-26 में भी हिंदुस्तानीयों पर हमलों की संख्या दर्जनों में रही है. हिंदुस्तानीयों के प्रति हिंसा में गोलीबारी, हिंसक हमले और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतें शामिल हैं. हालांकि, सभी मौतों को हेट क्राइम नहीं माना गया है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने हिंदुस्तानीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यही वजह है कि इन मामलों को लेकर हिंदुस्तान प्रशासन और प्रवासी हिंदुस्तानीय संगठनों की सतर्कता भी बढ़ी है. हाल के वर्षों में अमेरिका में हिंदू मंदिरों को भी निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं. इनमें मंदिर पर देर रातगोलियां चलाना, मंदिर को खालिस्तान जनमत संग्रह से जुड़े नारे लिखकर विकृत करना और हिंदुस्तान विरोधी नारे लिखे जाने की घटनाएं हुई हैं. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी हिंदुस्तानीयों के खिलाफ नफरत भरे संदेशों में बढ़ोतरी देखी गई है. इन सभी घटनाओं ने हिंदुस्तान के उस तर्क को मजबूत किया है कि अमेरिका को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने भीतर बढ़ती असहिष्णुता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. क्या है यूएससीआईआरएफ? यूएससीआईआरएफ की स्थापना, साल 1998 में अमेरिकी कांग्रेस के एक अधिनियम के तहत की गई थी. यह दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करता है और अमेरिकी प्रशासन को नीतिगत सिफारिशें देता है. हालांकि आयोग खुद को स्वतंत्र बताता है, लेकिन इसके आयुक्तों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा की जाती है. ये भी पढ़ें:- ईरान युद्ध का अंत अभी नहीं! ईरानी विदेश मंत्री बोले; US से कोई बात नहीं, सारे दावे झूठे ये भी पढ़ें:- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तैनात हुई इंडियन नेवी, वॉरशिप से एस्कॉर्ट कर रही तिरंगा लगे जहाज हिंदुस्तान पहले भी कई बार इस आयोग की आलोचना कर चुका है. इसी साल की शुरुआत में जायसवाल ने कहा था कि यूएससीआईआरएफ को ही ‘चिंता का विषय’ माना जाना चाहिए, क्योंकि नई दिल्ली के मुताबिक यह संस्था लगातार हिंदुस्तान के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और नेतृत्वक एजेंडा चला रही है. 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रुपया कमजोर, डॉलर के मुकाबले 92.42 तक फिसला; कच्चे तेल और विदेशी निकासी का असर

Rupee vs Dollar: मंगलवार को शुरुआती कारोबार में हिंदुस्तानीय रुपया दबाव में नजर आया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे टूटकर 92.42 पर पहुंच गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.35 पर खुला था, लेकिन जल्द ही गिरकर 92.42 तक आ गया. इससे पहले सोमवार को रुपया 92.28 पर बंद हुआ था, जिससे साफ है कि एक दिन में रुपये में कमजोरी बढ़ी है. कच्चे तेल की महंगाई से बढ़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. हिंदुस्तान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये पर पड़ता है. तेल की कीमतें बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज हो जाती है, जिससे रुपया कमजोर होता है. यही वजह है कि मौजूदा हालात में रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी वजह रुपये में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी है. सोमवार को एफआईआई ने 9,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे, जिससे बाजार से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ा. घरेलू शेयर बाजार में भी इसका असर दिखा और सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले. इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सतर्क बना दिया है. कुल मिलाकर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक अनिश्चितता. ये तीनों वजहें फिलहाल रुपये को कमजोर बना रही हैं. आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और केंद्रीय बैंकों के फैसले इसकी दिशा तय करेंगे. Also Read : मिडिल ईस्ट संकट के बीच पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, जानें 17 मार्च को आपके शहर में क्या है रेट The post रुपया कमजोर, डॉलर के मुकाबले 92.42 तक फिसला; कच्चे तेल और विदेशी निकासी का असर appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में पहचान की लड़ाई, भाजपा के ‘घुसपैठिये’ से ममता की ‘बंगाली अस्मिता’ का मुकाबला

मुख्य बातें हिंदी को लेकर तृणमूल ने भाजपा को घेरा बांग्ला भाषी पर हमले को बनाया मुद्दा विपक्षी दलों के पास टीएमसी के खिलाफ दो मुद्दे प्रमुख भाजपा बनायेगी घुसपैठ को चुनावी मुद्दा Bengal Election : कोलकाता. बंगाल की चुनावी चर्चा धीरे-धीरे तृणमूल और भाजपा के बीच तीखे वैचारिक टकराव की ओर बढ़ रहा है. बंगाल, जहां ऐतिहासिक रूप से चुनावी चर्चा खुले तौर पर सांप्रदायिक नेतृत्व से अपेक्षाकृत अछूती रही है, धीरे-धीरे तृणमूल और भाजपा के बीच तीखे वैचारिक टकराव की ओर बढ़ रहा है. भाजपा जहां हिंदूत्व का नारा एक बार फिर जोरशोर से उठा रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस बंगाल अस्मिता को लेकर मुखर हो गयी है. हिंदी को लेकर तृणमूल ने भाजपा को घेरा तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ लड़ाई में हमेशा ‘बंगाली-गैर-बंगाली’ का नारा इस्तेमाल किया है. इस विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ ‘बंगाल का वंचन-बंगाली का वंचन’ का नारा लेकर मैदान में उतरी है. यह नारा चुनाव प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भाजपा इस बार अपने उम्मीदवारों की सूची हिंदी में प्रकाशित की है. लोगों का मानना ​​है कि सूची हिंदी में प्रकाशित करके भाजपा ने पहले से आक्रामक तृणमूल कांग्रेस को एक और नेतृत्वक ‘हथियार’ सौंप दिया है. बांग्ला भाषी पर हमले को बनाया मुद्दा बंगाल में एसआईआर कराने का मुद्दा सियासी खींचतान के केंद्र में है ही, भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों पर हो रहे हमलों के खिलाफ भी तृणमूल नेता सड़कों पर हैं. संसद में आक्रामक रूप से अभियान चला रखे हैं. भाजपा के खिलाफ ‘बोहिरागोटो’(बाहरी) का मुद्दा तृणमूल के लिए पिछले कुछ चुनावों में कारगर साबित हुआ है. प्रवासी उत्पीड़न के संदर्भ में बंगाली उप-राष्ट्रवाद का मुद्दा इसबार उसका ही विस्तार है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर ‘बंगाली पहचान पर हमले’ का आरोप लगाया है. विपक्षी दलों के पास टीएमसी के खिलाफ दो मुद्दे प्रमुख भ्रष्टाचार और बेरोजगारी दो ऐसे मुद्दे हैं जो तृणमूल के खिलाफ विपक्षी दलों का धारदार हथियार हो सकता है. वैसे प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि भाजपा अपने चुनाव अभियान में ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे को प्रमुखता से रखेगी. भाजपा ने ‘उद्योगों के पलायन’ का आरोप लगाते हुए राज्य को ‘उद्योगों का कब्रिस्तान’ करार दिया. पार्टी नेताओं का दावा है कि पिछले 14 वर्षों में 6,000 से अधिक कंपनियां बंगाल से बाहर चली गई हैं और उनकी दलील है कि राज्य व्यापार शिखर सम्मेलन से प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से केवल लगभग तीन प्रतिशत ही जमीन पर उतर पाए हैं, जिससे राज्य ‘मजदूर निर्यात वित्तीय स्थिति’बन गया है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें भाजपा बनायेगी घुसपैठ को चुनावी मुद्दा भाजपा घुसपैठ को ममता के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा मान रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुस्लिम बहुल सीमावर्ती जिले मालदा में एक रैली के दौरान तृणमूल प्रशासन पर घुसपैठ के मुद्दे को लेकर निशाना भी साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ से जनसांख्यिकी बदल गई है और दंगों को बढ़ावा मिला है. प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि तृणमूल के ‘संरक्षण और सिंडिकेट राज’ के कारण यह फल-फूल रहा है. इसी के साथ उन्होंने स्पष्ट संदेश दे दिया कि भाजपा अपने चुनाव अभियान में ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे को प्रमुखता से रखेगी. Also Read: चुनाव आयोग पर भड़की ममता बनर्जी, नौरकशाहों के तबादले पर ज्ञानेश कुमार को लिखा पत्र The post बंगाल में पहचान की लड़ाई, भाजपा के ‘घुसपैठिये’ से ममता की ‘बंगाली अस्मिता’ का मुकाबला appeared first on Naya Vichar.

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DU में सीटों का हिसाब-किताब, CUET से UG कोर्स में 70000 से ज्यादा एडमिशन

DU Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक एडमिशन हो या भर्ती, हर प्रक्रिया तय गाइडलाइंस के अनुसार होती है. सभी कैटेगरी के छात्रों और उम्मीदवारों को बराबर मौका दिया जाता है. किसी तरह के भेदभाव की बात को प्रशासन ने गलत बताया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि यहां हर काम तय नियमों और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है. DU Admission by CUET: सीयूईटी स्कोर से एडमिशन डीयू ने बताया कि अब ज्यादातर कोर्सेज में एडमिशन CUET के स्कोर (DU Admission by CUET Score) के आधार पर होता है. खासकर UG और कई PG कोर्स में इंटरव्यू नहीं लिया जाता. इससे एडमिशन पूरी तरह मेरिट बेस्ड रहता है और गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाती है. यूनिवर्सिटी ने हाल के एडमिशन डेटा भी शेयर किए हैं, जिससे साफ होता है कि अलग-अलग कैटेगरी में छात्रों को मौके मिले हैं- DU UG Admission 2025-26 Details कैटेगरी एडमिशन (संख्या) प्रतिशत UR 32,777 46.56% OBC 17,971 25.52% SC 10,517 14.93% ST 3,251 4.62% EWS 5,879 8.35% कुल 70,395 — DU PG Admission 2025-26 कैटेगरी एडमिशन (संख्या) प्रतिशत UR 4,022 38.59% OBC 3,115 29.88% SC 1,488 14.27% ST 614 5.89% EWS 1,203 11.54% कुल 10,422 — DU ने दी जानकारी The University of Delhi implements all its statutory mandates in the true spirit of the Constitution of India, as clearly reflected in our transparent admission and recruitment processes. We urge the Leader of Opposition to refrain from making unsubstantiated statements. Such… https://t.co/AKltMbtj4W pic.twitter.com/OW3YPue6CM — University of Delhi (@UnivofDelhi) March 15, 2026 टीचर भर्ती की डिटेल्स दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2021 से 15 मार्च 2026 के बीच कुल 5,056 शिक्षकों की भर्तियां की गई हैं. इनमें सबसे ज्यादा 2,123 भर्तियां जनरल कैटेगरी में हुईं, जो कुल का 41.99% है. इसके अलावा OBC कैटेगरी में 1,282 (25.35%) और SC कैटेगरी में 717 (14.18%) नियुक्तियां की गईं. वहीं ST कैटेगरी में 349 (6.90%), EWS में 422 (8.35%) और PwD कैटेगरी में 163 (3.22%) शिक्षकों की भर्ती हुई. डीयू ने कहा है कि इन आंकड़ों से साफ होता है कि अलग-अलग कैटेगरी में नियुक्तियां की गई हैं. यह भी पढ़ें: DU का बेस्ट कॉलेज! जानें कैसे मिलता है UG और PG कोर्स में एडमिशन  The post DU में सीटों का हिसाब-किताब, CUET से UG कोर्स में 70000 से ज्यादा एडमिशन appeared first on Naya Vichar.

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ईरान युद्ध रोकने में किसी की दिलचस्पी नहीं, पढ़ें प्रभु चावला का लेख

Iran war : पश्चिम एशिया की उथल-पुथल भरी भट्ठी में संघर्ष युद्धभूमि तक शायद ही सीमित रहते हैं. उनके कंपन वैश्विक व्यापार की नसों, तेल पाइपलाइनों, शेयर बाजार के संकेतकों और रोजमर्रा के घरेलू हिसाब-किताब तक पहुंच जाते हैं. ईरान को अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ खड़ा करने वाला वर्तमान उथल-पुथल भरा संघर्ष इस निर्मम रसायन का स्पष्ट उदाहरण है. इसने भू-नेतृत्वक तनाव को एक ऐसे आर्थिक संकट में बदल दिया है, जिसने दुनिया के किसी भी कोने को अछूता नहीं छोड़ा. जो युद्ध शुरुआत में ईरान की परमाणु क्षमता और बैलिस्टिक मिसाइल अवसंरचना को निष्क्रिय करने के लिए एक सर्जिकल अभियान के रूप में शुरू हुआ था, वह अब क्षेत्रीय दावानल में बदल चुका है. विडंबना यह है कि इस निरर्थक युद्ध में लालची लाभार्थी तो बहुत कम हैं, परंतु युद्ध में शामिल न होने वाले एक दर्जन से अधिक देशों के नागरिक सबसे बड़े पराजित बन गये हैं. तेहरान की जवाबी कार्रवाई उग्र, पर असममित रही है. मानवीय क्षति के मुकाबले आर्थिक क्षति कहीं अधिक भयावह है. इस युद्ध की दैनिक लागत लगभग 1.8 अरब डॉलर है. दो सप्ताह में ही प्रत्यक्ष सैन्य खर्च 23 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और कोई भी युद्ध रोकने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा. किसी भी गंभीर मध्यस्थता प्रयास से दो एशियाई महाशक्तियां-चीन और हिंदुस्तान-स्पष्ट रूप से अनुपस्थित हैं. बीजिंग ईरान का सबसे बड़ा तेल ग्राहक है और चाबहार तथा ग्वादर के माध्यम से बेल्ट एंड रोड कॉरिडोर में एक बड़ा निवेशक भी है, इसलिए वह तेहरान के पतन का जोखिम नहीं उठा सकता. पर वह वॉशिंगटन से टकराव का जोखिम भी नहीं ले सकता, क्योंकि इससे अमेरिका के साथ उसका 600 अरब डॉलर का वार्षिक व्यापार प्रभावित हो सकता है और खाड़ी से मिलने वाली ऊर्जा आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है. हिंदुस्तान की दूरी और भी विरोधाभासी और पीड़ादायक है. हिंदुस्तान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और प्रतिबंध कड़े होने से पहले ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी था. साथ ही हिंदुस्तान इस्राइल के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी भी बनाये हुए है. इसके बावजूद हमारी प्रशासन ने ‘तनाव कम करने’ और ‘संवाद’ की सामान्य अपीलों से आगे कुछ नहीं कहा है. दरअसल, प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव निकट हैं और महंगाई पहले ही संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है. कुछ हिंदुस्तानीय रणनीतिक विश्लेषक निजी तौर पर यह भी मानते हैं कि यदि ईरान लंबे समय तक कमजोर रहता है, तो पाकिस्तान का पश्चिमी पड़ोसी व्यस्त रहेगा और खाड़ी क्षेत्र में चीन का प्रभाव भी कम होगा. इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के पास तेहरान, रियाद और वॉशिंगटन के बीच लगातार मध्यस्थता करने की संस्थागत क्षमता और संसाधन भी सीमित हैं. हालांकि, हिंदुस्तानीय राजनयिकों ने चुपचाप अमेरिकी और इस्राइली समकक्षों को अपनी चिंताएं बतायी हैं, पर 1991 के खाड़ी युद्ध या 2003 के इराक संकट जैसी कोई सार्वजनिक शांति पहल सामने नहीं आयी. ऐसे युद्ध का पहला झटका हमेशा हिंदुस्तान जैसे ऊर्जा बाजारों में महसूस होता है. जबकि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों जैसे तेल उत्पादक राष्ट्र हर कीमत वृद्धि के साथ अपने खजाने भरते हुए इस अवसर का आनंद लेते हैं. पर आयात पर निर्भर देशों के लिए इसका असर तुरंत और गहरा होता है. अपने कच्चे तेल का 80 प्रतिशत से अधिक विदेशों से आयात करने वाला हिंदुस्तान मामूली कीमत वृद्धि से भी हिल जाता है. प्रति बैरल केवल 10 डॉलर की वृद्धि हिंदुस्तान के वार्षिक आयात बिल में 15-20 अरब डॉलर जोड़ देती है. यदि कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाये, तो एक ही वित्तीय वर्ष में यह घाटा 25 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा, चालू खाते का घाटा बढ़ेगा और महंगाई बढ़ेगी, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा और 2013 के बाद मुश्किल से पुनर्निर्मित विदेशी मुद्रा भंडार कमजोर पड़ सकते हैं. वित्तीय बाजारों में भी तूफान जल्दी आ गया. शुरुआती घबराहट भरी बिकवाली में हिंदुस्तान के शेयर बाजार की कुल पूंजी लगभग 16 लाख करोड़ रुपये घट गयी. इसका असर वैश्विक स्तर पर भी दिखा, क्योंकि निवेशक सोना और ऊर्जा शेयरों जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर भागने लगे. इस तबाही के बीच युद्ध वित्तीय स्थिति की एक भयावह विडंबना सामने आती है. जहां उद्योगों का बड़ा हिस्सा नुकसान झेल रहा है, वहीं कुछ साम्राज्य इस विनाश से फल-फूल रहे हैं. रक्षा उद्योग के विशाल निगम इस त्रासदी के सबसे बड़े विजेता हैं. उनकी सटीक हथियार प्रणालियां, स्टील्थ फाइटर और ड्रोन युद्ध में तेजी से इस्तेमाल हो रहे हैं, और जैसे-जैसे अमेरिका और इस्राइल के हमले जारी हैं, ये कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं. पिछले एक वर्ष में लॉकहीड मार्टिन के शेयर 470 डॉलर से बढ़कर लगभग 650 डॉलर हो गये, जिससे कंपनी का मूल्यांकन 40 अरब डॉलर बढ़ गया. आरटीएक्स के शेयर भी बढ़े, जिससे उसका मूल्य छह-सात अरब डॉलर बढ़ गया. इन रक्षा कंपनियों ने लगभग 50-60 अरब डॉलर का अतिरिक्त बाजार मूल्य हासिल किया है. हर दिन का युद्ध उनकी संयुक्त बाजार पूंजी में लगभग 300-400 मिलियन डॉलर जोड़ रहा है. ऊर्जा कंपनियां भी इस लाभ में शामिल हैं. लेकिन इन लाभों की कीमत वैश्विक वित्तीय स्थिति चुका रही है. हवाई यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. पर्यटन अस्थिरता की छाया में कमजोर हो रहा है और निवेशक जोखिम भरे क्षेत्रों से दूर भाग रहे हैं. सबसे अधिक मार आम नागरिकों पर पड़ती है- तेल महंगा होने से परिवहन, बिजली और रसोई गैस सब महंगे हो जाते हैं. नरेंद्र मोदी प्रशासन को सब्सिडी के दबाव से जूझना पड़ रहा है, जबकि परिवारों के खर्च तेजी से बढ़ रहे हैं. हिंदुस्तान के लिए यह स्थिति एक भयावह आर्थिक संकट में बदल सकती है- चालू खाते का बड़ा घाटा, गिरता हुआ रुपया और गैस, परिवहन तथा भोजन की बढ़ती कीमतों से दबे हुए परिवार. इस युद्ध के विजेता पहले ही स्पष्ट हैं- यानी अमेरिका-इस्राइल की रणनीतिक धुरी, जिसने सैन्य बढ़त हासिल कर ली है, रक्षा उद्योग जिसने अरबों डॉलर का मूल्य बढ़ा लिया है, और तेल निर्यातक राजशाहियां, जिनकी आय बढ़ गयी है. यदि यह युद्ध एक और महीने तक बिना रोक-टोक चलता रहा, तो इसका हिंदुस्तान पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा-एक ऐसा देश,

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बाल झड़ने से हैं परेशान? ट्राई करें हिमांशी का बताया हेयर फॉल कंट्रोल ऑयल 

Hair Fall Control Oil: अगर आपके भी तकिये या कंघी में झड़े हुए बाल दिखते हैं तो ये आर्टिकल आपके काम का है. आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गई है, जिसकी वजह से कई लोग इसका घरेलू उपाय ढूंढते हैं. ऐसे में आप कंटेंट क्रिएटर हिमांशी के इंस्टाग्राम अकाउंट @ohfoodiefinds पर बताए गए हेयर फॉल कंट्रोल ऑयल को ट्राई कर सकते हैं. इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. हेयर ऑयल बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए? आंवला – 1 किलो  करी पत्ता – 10–20 ब्राह्मी पत्ते – एक मुट्ठी रोजमेरी पत्ते – एक चौथाई कप नारियल तेल – 500 ग्राम (जरूरत हो तो और डाल सकते हैं) तिल का तेल – 150 ग्राम  काले तिल – 3 चम्मच  मेथी दाना – 2 चम्मच  लौंग – 8–10 विटामिन E कैप्सूल – 3–4 अरंडी का तेल (Castor oil) – 2 चम्मच ऑप्शनल  हेयर ऑयल बनाने का तरीका क्या है? सबसे पहले आप एक कड़ाही में कद्दूकस किया आंवला, करी पत्ता ,ब्राह्मी के पत्ते और रोजमेरी के पत्ते डालकर अच्छे से मिक्स करें. मिक्स करने के बाद आप इसमें नारियल और तिल का तेल डालकर कुक करें.   जब इसका हल्का रंग बदलने लगे, तब इसमें काले तिल, मेथी दाना और लौंग डालें. इसे 30–45 मिनट तक पकाएं, जब तक यह डार्क न हो जाए.  अब तेल को छान लें. आप चाहें तो इसे आप रातभर भी रखकर छान सकते हैं. फिर इसमें विटामिन E कैप्सूल और थोड़ा सा अरंडी का तेल मिलाएं. इसे स्टोर करके एयर टाइट जार में रखें. ये तेल लगभग 1 साल तक खराब नहीं होता है.  हेयर ऑयल कैसे इस्तेमाल करें? हफ्ते में 2–3 बार इस तेल से स्कैल्प की अच्छे से मालिश करें. इसे 1–2 घंटे या रातभर के लिए लगा रहने दें. इसके बाद शैम्पू से बाल धो लें.  View this post on Instagram A post shared by Hey Foodies! Food Content Creator (@ohfoodiefinds) यह भी पढ़ें: Summer Hair Care: गर्मियों में बाल ऐसे चमकेंगे जैसे लगेगा कि पार्लर से आए हैं, ट्राई करें ये बेस्ट टिप्स यह भी पढ़ें: Hair Care Tips: बालों का झड़ना रोकने के लिए अपनाएं ये कारगर उपाय, मिलेंगे फायदे  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. यह किसी भी तरह से चिकित्सा सलाह (Medical Advice) का विकल्प नहीं है. बालों या त्वचा से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह अवश्य लें. किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले अपनी सुविधा और एलर्जी की स्थिति को ध्यान में रखें. The post बाल झड़ने से हैं परेशान? ट्राई करें हिमांशी का बताया हेयर फॉल कंट्रोल ऑयल  appeared first on Naya Vichar.

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Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: अभीरा-अरमान की खुशी पर लगा ग्रहण, मायरा की हालत बिगड़ी

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के लेटेस्ट एपिसोड की शुरुआत में मनीषा, अभीरा और अरमान को बताती है उसके लिए उसने डिजाइनर से आउटफिट तैयार करवाए हैं. अभीरा को अरमान के साथ मैचिंग कपड़े पहनना पसंद नहीं आता. इस बात पर दोनों के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक हो जाती है. मनीषा उन्हें समझाती है कि मेहमान आ चुके हैं, इसलिए पहले तैयार हो जाएं और बाद में बहस करें. दामयंती ने पूछा अभीरा से ये सवाल सगाई की रस्म शुरू होने वाली होती है, लेकिन तभी दामयंती एक सवाल उठा देती है. वह पूछती है कि अभीरा ने सिंदूर और मंगलसूत्र क्यों नहीं पहना है. अभीरा बात को संभालने की कोशिश करती है और कहती है कि उसे सिंदूर से एलर्जी है और उसका मंगलसूत्र खो गया है. यह सुनकर सब थोड़ा हैरान हो जाते हैं. माहौल को संभालने के लिए अभीरा तान्या को रस्म करने के लिए कहती है, लेकिन दामयंती मना कर देती है. मायरा की हुई एंट्री एक गेम रखा जाता है, जिसमें अरमान को अभीरा को पकड़ना होता है. अगर वह जीत जाता है, तो वह उसे अंगूठी पहना सकता है. स्पोर्ट्स के दौरान दोनों अपने पुराने पलों को याद करते हैं. आखिरकार अरमान जीत जाता है और अभीरा को अंगूठी पहना देता है, जिससे सगाई की रस्म पूरी हो जाती है. इस बीच मायरा फंक्शन में पहुंचती है और अभीरा और अरमान को साथ देखकर चौंक जाती है. उसके पुराने जख्म फिर से ताजा हो जाते हैं और वह घबरा जाती है. ये रिश्ता क्या कहलाता है में दिखाया जाएगा कि मायरा की हालत बिगड़ जाती है और वह वहां से भाग जाती है. अभीरा और अरमान उसके पीछे दौड़ते हैं, जबकि दामयंती सगाई रोकने का फैसला लेती है. यह भी पढ़ें– ये रिश्ता क्या कहलाता है: आर्यन ने रखी अजीब शर्त, क्या अभीरा और अरमान बनेंगे नकली पति-पत्नी? The post Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: अभीरा-अरमान की खुशी पर लगा ग्रहण, मायरा की हालत बिगड़ी appeared first on Naya Vichar.

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माइग्रेन से आराम पाने के लिए फॉलो करें न्यूट्रिशनिस्ट रमिता कौर के टिप्स

Migraine Relief Tips: काम करते टाइम माइग्रेन शुरू हो जाए तो पूरा फोकस बिगड़ जाता है और काम करना मुश्किल हो जाता है. माइग्रेन में अक्सर सिर के एक तरफ तेज जैसा दर्द महसूस होता है. इसके साथ-साथ मतली जैसा लगता है. अगर आप माइग्रेन से परेशान हैं तो न्यूट्रिशनिस्ट रमिता कौर के बताए गए टिप्स को अपना सकते हैं. इन टिप्स को उन्होनें इंस्टाग्राम अकाउंट @dt.ramitakaur पर शेयर किया है.  इन टिप्स को करें फॉलो  अगर आपको माइग्रेन की समस्या है तो अपनी डाइट में आप हरी पत्तेदार सब्जी और पालक को शामिल करें. इनमें मैग्नेशियम पाया जाता है जो शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है. खासकर माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे लोगों के शरीर में अक्सर मैग्नीशियम की कमी पाई जाती है सुबह-सुबह आप केला खाएं. केला में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसमें पोटैसियम और मैग्नेशियम पाया जाता है जो नर्वस सिस्टम को शांत रखने में मदद करते हैं. अगर आपको माइग्रेन की समस्या हो रही तो राहत पाने के लिए तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय पीना काफी फायदेमंद माना जाता है. इन तीनों चीजों में औषधीय गुण पाए जाते हैं जो दर्द को कम करने में मदद करते हैं.  माइग्रेन की प्रॉब्लम से राहत पाने के लिए आप अपने खाने में फ्लैक्स सीड्स यानी अलसी के बीज और चिया सीड्स को शामिल करें. ये बीज ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो दिमाग में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करते हैं.  माइग्रेन से बचने के लिए आप सुबह का नाश्ता करना बिल्कुल भी नहीं भूलें. जब आप सुबह नाश्ता नहीं करते हैं तो ब्लड शुगर में उतार चढ़ाव हो सकता है. ब्लड शुगर का उतार-चढ़ाव माइग्रेन ट्रिगर करने का काम करता है.  पर्याप्त मात्रा में पानी भी जरूर पिएं. डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी, कई बार माइग्रेन का एक छुपा हुआ कारण होता है. सुबह और शाम हल्के-फुल्के नेक स्ट्रेचेस करना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सिरदर्द की समस्या कम हो सकती है. View this post on Instagram A post shared by dt.ramitakaur | Maternal And Child Nutritionist | (@dt.ramitakaur) यह भी पढ़ें: वजन कम करना है तो ट्राई करें कॉफी और नींबू का यह ड्रिंक यह भी पढ़ें: Morning Habits for Weight Loss: दोपहर में आती है सुस्ती? दिनभर खुद को सुपर-एक्टिव रखने के लिए बदलें ये 5 आदतें The post माइग्रेन से आराम पाने के लिए फॉलो करें न्यूट्रिशनिस्ट रमिता कौर के टिप्स appeared first on Naya Vichar.

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मैथिली साहित्य को बड़ा सम्मान, ‘धात्री पात सन गाम’ के लिए डॉ. महेंद्र झा को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

Sahitya Akademi Award: मैथिली साहित्य के आकाश में एक नया सितारा पूरी चमक के साथ उभरा है. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेंद्र झा को उनकी कालजयी कृति “धात्री पात सन गाम” के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. सोमवार को हुई इस घोषणा ने न केवल मिथिलांचल बल्कि पूरे साहित्यिक जगत को हर्षित कर दिया है. भावुक कर देने वाली बात यह है कि डॉ. झा ने इस सर्वोच्च सम्मान को अपनी दिवंगत पत्नी की स्मृति को समर्पित किया है. यह पुरस्कार मात्र एक उपलब्धि नहीं, बल्कि मैथिली भाषा की उस समृद्ध विरासत की जीत है जिसे डॉ. झा ने दशकों तक अपने शब्दों से सींचा है. संस्मरण नहीं, जीवन का सच्चा दस्तावेज है यह कृति डॉ. महेंद्र झा की पुरस्कृत कृति ‘धात्री पात सन गाम’ को मैथिली साहित्य में मानवीय संवेदनाओं का एक जीवंत चित्र माना जा रहा है. डॉ. झा के अनुसार, यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं बल्कि उनके जीवन की सच्ची घटनाओं और अनुभवों का निचोड़ है. इसमें गांव की मिट्टी की सोंधी महक, समाज का ताना-बाना और मिथिला की संस्कृति को इतने सजीव ढंग से पिरोया गया है कि पाठक खुद को उन गलियों का हिस्सा महसूस करने लगता है. उनकी अन्य रचनाओं जैसे ‘दिक्पाल’ और ‘पाठान्तर’ ने पहले ही साहित्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी, लेकिन इस कृति ने उन्हें राष्ट्रीय फलक पर स्थापित कर दिया है. शिक्षा और साहित्य का सफर 6 जनवरी 1947 को जन्मे डॉ. महेंद्र झा का शैक्षिक सफर बेहद प्रेरणादायी रहा है. उन्होंने मैथिली में एम.ए. करने के बाद पटना विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. उनका अधिकांश समय सहरसा कॉलेज में छात्रों को साहित्य की बारीकियां समझाने में बीता. 1971 से 2004 तक वे सहरसा कॉलेज में मैथिली के प्राध्यापक रहे और बाद में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पीजी सेंटर में एचओडी और ह्यूमैनिटीज विभाग में डीन के महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया. 2009 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनकी लेखनी थमी नहीं, बल्कि और अधिक धारदार होकर सामने आई. 31 मार्च को मिलेगा सम्मान साहित्य अकादमी के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. महेंद्र झा को आगामी 31 मार्च को आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा. उन्हें पुरस्कार स्वरूप उत्कीर्ण तांबे की पट्टिका (ताम्र पत्र) शॉल और ₹1 लाख की राशि प्रदान की जाएगी. मिथिला के लोकजीवन, गीत, ग़ज़ल और कविताओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को आवाज देने वाले डॉ. झा को मिल रहा यह सम्मान मैथिली भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊर्जा देगा. Also Read: सुधा डेयरी की तर्ज पर बिहार में खुलेंगे ‘तरकारी’ आउटलेट, किसानों की सब्जियां सीधे पहुंचेगी बाजार The post मैथिली साहित्य को बड़ा सम्मान, ‘धात्री पात सन गाम’ के लिए डॉ. महेंद्र झा को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार appeared first on Naya Vichar.

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राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस MLA सुरेंद्र प्रसाद ने क्यों नहीं किया वोट? खुद ही बताई वजह

Bihar Politics: सोमवार को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक ने वोट नहीं किया. आज कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने वोट नहीं करने की खुद ही वजह बताई. विधायक सुरेंद्र प्रसाद के मुताबिक वे महागठबंधन के उम्मीदवार से संतुष्ट नहीं थे. इसलिए उन्होंने किसी के भी पक्ष में वोट नहीं करने का फैसला लिया. फेसबुक पर पोस्ट शेयर कर क्या लिखा? विधायक सुरेंद्र प्रसाद ने फेसबुक पर पोस्ट शेयर कर लिखा, ‘एक सीट का मौका था महागठबंधन के पास तो दीपक यादव जी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था, वह भी नहीं तो मुकेश सहनी जी को ही, लेकिन उन्हें मौका ना देकर ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है. मैं NDA का साथ दे नहीं सकता हूं और राजद ने उम्मीदवार गलत चुना तो मैंने वोट नहीं देना ही बेहतर समझा.’ आगे उन्होंने यह भी लिखा, ‘रही बात मुझपर आरोप लगाने की, तो मुख्यमंत्री के सबसे चहेते सीट पर हमनें पूरे प्रशासनी तंत्र को हराकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल किया था और जनता के आशीर्वाद का कर्ज पूरे बिहार में सबसे तेज गति से विकास कार्यों के द्वारा चुकता कर रहा हूं तो विरोधी जब बराबरी नहीं कर पाएगा तो बदनाम ही करेगा. आशा है जनता दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए मेरे इस त्याग और समर्पण की भावना को समझेगी और विरोधियों के झांसे में नहीं आएगी.’ कौन हैं कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद? कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से पहली बार विधायक बने हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह पहले एनडीए के साथ भी चुनाव लड़ चुके हैं. 2015 में उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP से एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन तब हार गए थे. 2025 विधानसभा चुनाव में उन्होंने जदयू के उम्मीदवार धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को 1675 वोटों से हराया. इन चार विधायकों ने नहीं किया था वोट सोमवार को महागठबंधन के चार विधायकों की गैरहाजिरी से राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की राह मुश्किल हो गई. इसका नतीजा यह हुआ कि पांचों सीट पर एनडीए की जीत हो गई. कांग्रेस के तीन विधायकों में सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के अलावा मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह ने वोट नहीं किया. जबकि आरजेडी से फैसल रहमान मतदान करने नहीं पहुंचे. Also Read: नए लुक में जल्द दिखेगा गया जंक्शन, वर्ल्ड क्लास मिलेगी फैसिलिटी, कहां तक हुआ काम? The post राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस MLA सुरेंद्र प्रसाद ने क्यों नहीं किया वोट? खुद ही बताई वजह appeared first on Naya Vichar.

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