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May 6, 2026

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रवींद्र जयंती पर 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेंगे भाजपा के नये सीएम, मौजूद रहेंगे पीएम मोदी और शाह

BJP Government Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में एक नये युग का सूर्योदय होने जा रहा है. 15 साल के ममता बनर्जी शासन के अंत के बाद अब हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी पहली प्रशासन के गठन के लिए तैयार है. ब्रिगेड मैदान में होगा भव्य समारोह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बुधवार को ऐलान किया कि नयी प्रशासन का भव्य शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत दिल्ली के कई दिग्गज नेता इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनेंगे. खास बात यह है कि इस तारीख का चयन भाजपा ने बेहद सोच-समझकर किया है. रवींद्र जयंती और शपथ ग्रहण भाजपा का बड़ा सांस्कृतिक दांव 9 मई की तारीख बंगाल के लिए बेहद खास है. बांग्ला पंचांग के अनुसार, यह बैसाख का 25वां दिन है. इसे पूरे विश्व में रवींद्र जयंती (कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती) के रूप में मनाया जाता है. टीएमसी अक्सर भाजपा को ‘बाहरी लोगों की पार्टी’ और बंगाली संस्कृति से अलग बताती रही है. रवींद्र जयंती के दिन शपथ ग्रहण कर भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह बंगाल के लोकाचार और बौद्धिक विरासत के साथ गहराई से जुड़ी है. इसे भी पढ़ें : पालटेचे एई बार, एलो बीजेपी प्रशासन…, बंगाल में भाजपा के विजय गान वीडियो में दिखा मोदी का जादू और जीत का जोश कौन होगा बंगाल का मुख्यमंत्री? सस्पेंस बरकरार भले ही शपथ ग्रहण की तारीख तय हो गयी हो, लेकिन ‘कैप्टन’ के नाम पर अभी भी पर्दा गिरा हुआ है. नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक 8 मई की शाम को बुलायी गयी है. इसी बैठक में औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी. पार्टी आलाकमान ने अभी तक किसी एक नाम को आगे नहीं किया है, जिससे नेतृत्वक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें शपथ ग्रहण समारोह में होगा दिग्गजों का जमावड़ा बंगाल के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के अलावा भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की भी उम्मीद है. इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया BJP Government Oath Ceremony: ऐतिहासिक जीत, भव्य शुरुआत भाजपा ने बंगाल में वर्षों के कड़े संघर्ष के बाद प्रचंड जीत हासिल की है. 207 सीटों के साथ बहुमत प्राप्त करने के बाद अब पार्टी राज्य में सुशासन और सोनार बांग्ला के अपने वादे को जमीन पर उतारने के लिए तैयार है. सुबह 10 बजे से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम बंगाल की नेतृत्व में भाजपा के स्थायी उदय को स्थापित करने वाला मील का पत्थर साबित होगा. इसे भी पढ़ें : बंगाल में खिला कमल, बीजेपी ने जनता को कहा- शुक्रिया, शुभेंदु अधिकारी बोले- विकास ने डर को हराया, सुशासन के नये युग की शुरुआत शपथ ग्रहण से पहले कोलकाता को भगवा झंडों से पाटा भाजपा प्रशासन के शपथ ग्रहण से पहले ही पूरी कोलकाता नगरी को भगवा झंडों से पाट दिया गया है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं. अब सबकी निगाहें 8 मई की विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं, जब बंगाल के नये ‘मुख्यमंत्री’ के नाम से पर्दा उठेगा. इसे भी पढ़ें सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन ममता बनर्जी बोलीं- इस्तीफा नहीं दूंगी, दीदी के बयान पर बंगाल के अधिकारी ले रहे मजे- हमें 2-2 सीएम मिलेंगे बंगाल में बीजेपी की जीत मैनेजमेंट नहीं जनादेश है, कोलकाता में ढहा दीदी का मुस्लिम किला, बोले अमित मालवीय बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप, बांग्लादेशी मीडिया ने बताया ‘बड़ा संकट’, सांसद को डराने लगा शरणार्थी संकट The post रवींद्र जयंती पर 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेंगे भाजपा के नये सीएम, मौजूद रहेंगे पीएम मोदी और शाह appeared first on Naya Vichar.

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डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ तगड़ा: 61 पैसे की शानदार बढ़त के साथ ₹94.57 के स्तर पर पहुंचा, जानें क्या है वजह

Rupee vs Dollar : हिंदुस्तानीय मुद्रा ‘रुपये’ के लिए आज का दिन काफी राहत भरा रहा. बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61 पैसे की बड़ी मजबूती के साथ 94.57 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ. पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहे रुपये के लिए यह एक बड़ी रिकवरी मानी जा रही है. रुपये की मजबूती के 3 मुख्य कारण कच्चे तेल में भारी गिरावट: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते के संकेत देने के बाद वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) 8% से ज्यादा टूट गया और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. हिंदुस्तान के लिए कच्चा तेल सस्ता होने का सीधा मतलब है कम डॉलर बाहर जाना, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है. ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट : ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत में “बड़ी प्रगति” हुई है. उन्होंने जहाजों को सुरक्षा देने वाला ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ भी रोक दिया है. इस शांति की समाचार से दुनिया भर की मुद्राओं के मुकाबले डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ, जिसका फायदा रुपये को मिला. RBI की ‘अप्रत्यक्ष’ रणनीति: बाजार के जानकारों के मुताबिक, हिंदुस्तानीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को सहारा देने के लिए नई तकनीक अपना रहा है. सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करने के बजाय, प्रशासन बैंकों को ‘विदेशी मुद्रा बॉन्ड’ के जरिए डॉलर जुटाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि बाजार में डॉलर की सप्लाई बनी रहे. आज के कारोबार का उतार-चढ़ाव शुरुआत: रुपया डॉलर के मुकाबले 95.00 पर खुला. दिन का निचला स्तर: कारोबार के दौरान यह 95.18 तक भी गया. अंतिम स्थिति: 61 पैसे की छलांग लगाकर 94.57 पर बंद हुआ. पिछला बंद भाव: मंगलवार को रुपया 95.18 पर था. शेयर बाजार और डॉलर इंडेक्स रुपये के साथ-साथ आज सेंसेक्स में भी 940 अंकों की जोरदार तेजी देखी गई. वहीं, दुनिया की प्रमुख 6 मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ भी 0.66% गिरकर 97.79 पर आ गया, जिसने हिंदुस्तानीय मुद्रा की राह आसान कर दी. आम आदमी पर क्या होगा असर ? रुपये के मजबूत होने से विदेशों से आयात होने वाली चीजें (जैसे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा तेल) सस्ती होने की संभावना बढ़ती है. साथ ही, यह विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाता है. Also Read : अमेरिका-ईरान के बीच ‘शांति’ की समाचार से सेंसेक्स 941 अंक उछला, कच्चा तेल हुआ सस्ता The post डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ तगड़ा: 61 पैसे की शानदार बढ़त के साथ ₹94.57 के स्तर पर पहुंचा, जानें क्या है वजह appeared first on Naya Vichar.

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तमिलनाडु में कांग्रेस ने क्यों दिया डीएमके को गच्चा? जानिए 1971 से अबतक कैसा रहा गठबंधन…

Congress- DMK alliance : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद जो परिणाम सामने आए हैं, वो प्रदेश में बदलाव का संकेत दे रही है. इस बदलाव में जनता ने टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) के नेता विजय के हाथों में प्रदेश की कमान सौंप दी है. इस बदली हुई परिस्थिति में कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके की ओर अपना हाथ बढ़ाया और उसे प्रशासन बनाने में अपना समर्थन देने की बात कही है. चूंकि डीएमके और कांग्रेस का साथ बहुत पुराना है और दोनों ने एक साथ कई चुनाव भी लड़े हैं, यह सवाल लाजिमी है कि आखिर कांग्रेस ने डीएमके से ब्रेकअप क्यों किया और इनके संबंधों का इतिहास क्या है? कांग्रेस-डीएमके गठबंधन का इतिहास इंदिरा गांधी के साथ एम करुणानिधि कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन काफी पुराना है. हालांकि डीएमके का उदय कांग्रेस विरोध से हुआ था, लेकिन 1967 में कांग्रेस का विरोध करने वाली डीएमके 1971 में उनके साथ गठबंधन कर चुकी थी. 1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ, तो इंदिरा गुट ने खुद को मजबूत करने के लिए डीएमके साथ समझौता किया था.उस वक्त दोनों का गठबंधन लोकसभा चुनाव और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए बना था. उस वक्त एम करुणानिधि पार्टी के सर्वेसर्वा थे. 2004 में जब बीजेपी के खिलाफ विपक्ष गोलबंद हुआ, तो यूपीए में डीएमके भी शामिल था. 2004 जब कांग्रेस की प्रशासन केंद्र में बनी तो डीएमके प्रशासन में शामिल था. यह गठबंधन 2014 तक खूब मजबूती से चला, लेकिन फिर श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे को लेकर यह गठबंधन टूटा. उस वक्त डीएमके यह चाहती थी कि केंद्र की यूपीए प्रशासन तमिलों के मुद्दे पर श्रीलंका प्रशासन के साथ सख्ती करे, लेकिन यूपीए की प्रशासन ने स्थिति का सामना नरमी से किया था. 2016 में दोनों फिर साथ आए और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों साथ लड़े और प्रदेश में प्रशासन बनाई. स्टालिन पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने राहुल गांधी का प्रधानमंत्री के तौर पर समर्थन किया था. 10 साल बाद यह गठबंधन एक बार फिर टूट गया है. आखिर कांग्रेस ने डीएमके का साथ क्यों छोड़ा? लगातार 10-10 सालों के गठबंधन के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ा है. (2004 से 2014 और फिर 2016 से 2026). यहां गौर करने वाली बात यह है कि कांग्रेस और डीएमके के बीच दरार अचानक नहीं आई है. इन दोनों पार्टियों के रिश्ते सामान्य नहीं चल रहे थे, तनातनी थी. कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर की पार्टी और उसके अपने हित हैं और वैसे ही नेतृत्व उसको करनी होती है, जबकि डीएमके एक क्षेत्रीय पार्टी है, जो सिर्फ अपने हित के लिए नीतियां बनाती हैं. उसकी नेतृत्व द्रविड़ आइडेंडिटी और हिंदी विरोध पर आधारित है. कई बार कांग्रेस को इस वजह से परेशानी होती है. इतना ही नहीं कांग्रेस यह चाहती है कि उसे तमिलनाडु में ज्यादा सीटें मिले, क्योंकि उसकी पहचान राष्ट्रीय है,लेकिन डीएमके हमेशा कांग्रेस पर हावी रहना चाहती है. अब जबकि प्रदेश में नेतृत्व बदली है, कांग्रेस अपना हित देखते हुए टीवीके साथ जाना चाहती है. कांग्रेस भी मोदी युग में अपनी पहचान के लिए लगातार जूझ रही है, ऐसे में उसे टीवीके आशा की नई किरण के रूप में नजर आई है और उसने पाला बदलते हुए डीएमके को छोड़कर टीवीके का दामन थाम लिया है.तमिलनाडु के इंचार्ज कांग्रेस लीडर गिरीश चोडणकर ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि यह अलायंस – जो दोनों पार्टियों के बीच आपसी सम्मान, सही हिस्सेदारी और मिली-जुली जिम्मेदारी पर बना है, वह न सिर्फ इस प्रशासन को बनाने के लिए है, बल्कि यह भविष्य को देखते हुए बनाया गया है. लोकल बॉडी ऑर्गनाइजेशन, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों में भी यह गठबंधन कायम रहेगा. कई बार पहले भी टूट चुका है कांग्रेस और डीएमके गठबंधन कांग्रेस ने जब टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की तो डीएमके ने इसे पीठ पर छुरा घोंपने की नेतृत्व कहा. गौर करने वाली बात यह है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन कई बार हुआ और टूटा भी है. 1969 में जब कांग्रेस दो गुटों में टूट गई थी उस वक्त एक गुट का नेतृत्व इंदिरा गांधी कर रही थीं और दूसरा तमिलनाडु कांग्रेस के दिग्गज के कामराज के नेतृत्व में था. उस वक्त डीएमके ने 1971 के आम चुनाव के लिए इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले गुट के साथ गठबंधन करने का फैसला किया. लेकिन एक साल बाद एम जी रामचंद्रन (MGR) के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बनने के साथ ही इंदिरा गांधी ने जल्दी ही नई पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया. इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के आम चुनाव में, इस नए गठबंधन ने राज्य में भारी जीत हासिल की, जबकि इंदिरा केंद्र में सत्ता खो बैठीं. यह गठबंधन 1979 में टूट गया, जब एमजी रामचंद्रन ने तंजावुर में संसदीय उपचुनाव के जरिए लोकसभा में वापसी के लिए इंदिरा की कोशिश का समर्थन करने से इनकार कर दिया. 1980 में, कांग्रेस ने आम चुनाव के लिए फिर से डीएमके के साथ गठबंधन किया, लेकिन चार साल बाद फिर एआईएडीएमके के साथ वापस चली गई, जिसके साथ वह 1987 में एमजीआर के निधन तक रही. बाद में भी कांग्रेस कभी डीएमके तो कभी एआईएडीएमके साथ रही. ये भी पढ़ें : प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद बोले संजू सैमसन-मुझे चेट्टा से ज्यादा संजू कहलाना पसंद सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन The post तमिलनाडु में कांग्रेस ने क्यों दिया डीएमके को गच्चा? जानिए 1971 से अबतक कैसा रहा गठबंधन… appeared first on Naya Vichar.

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आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने भी ममता दीदी से किया किनारा, दे दिया इस्तीफा

Alapan Bandyopadhyay Resigns: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बुरी तरह हारने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले इस्तीफा नहीं देने पर अड़ी हों, लेकिन उनके बेहद करीबी रहे लोगों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया है. 15 साल पुराने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन के अंत के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में इस्तीफों की झड़ी लग गयी है. आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी का इस्तीफा ममता बनर्जी के इस्तीफा नहीं देने के ऐलान के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री के 2 सबसे भरोसेमंद मुख्य सलाहकारों- आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. दोनों ही पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं और ममता के बेहद करीबी माने जाते थे. प्रशासन के आर्थिक सलाहकार और कानूनी सिपहसालारों ने भी नयी प्रशासन के शपथ ग्रहण से पहले अपने पद छोड़ दिये. इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया मैदान छोड़कर ‘भागे’ नबान्न के 2 ‘पावर सेंटर’ राज्य सचिवालय (नबान्न) के सूत्रों के अनुसार, आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने मंगलवार को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया. आलापन बंद्योपाध्याय : 2021 में केंद्र और राज्य के बीच विवाद का मुख्य चेहरा रहे आलापन बंद्योपाध्याय को रिटायरमेंट के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने अपना मुख्य सलाहकार बना लिया था. उनका इस्तीफा नौकरशाही में एक बड़े युग के अंत जैसा है. एचके द्विवेदी : पूर्व मुख्य सचिव रहे एचके द्विवेदी भी सलाहकार के रूप में प्रशासनिक निर्णयों में बड़ी भूमिका निभा रहे थे. सत्ता परिवर्तन की आहट पाते ही उन्होंने पद छोड़ना ही बेहतर समझा. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Alapan Bandyopadhyay Resigns: अर्थशास्त्री अभिरूप प्रशासन और महाधिवक्ता ने भी छोड़ी कुर्सी प्रशासनिक सर्जरी यहीं नहीं रुकी. प्रशासन के कई अन्य प्रमुख स्तंभ भी गिर गये हैं. प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिरूप प्रशासन ने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) और लघु उद्योग विकास निगम (WBSIDC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) किशोर दत्ता ने पहले ही राज्यपाल आरएन रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. इन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया गया है और अब रिक्त पदों को भरने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. इसे भी पढ़ें : बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान सत्ता परिवर्तन का असर, ‘क्लीन स्लेट’ की तैयारी भाजपा की 207 सीटों के साथ हुई प्रचंड जीत ने बंगाल की नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया है. जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी के दौर में नियुक्त किये गये सलाहकार और अधिकारी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार इन अधिकारियों पर ‘नेतृत्वक एजेंट’ के तौर पर काम करने का आरोप लगाया था. इसे भी पढ़ें बंगाल में खिला कमल, बीजेपी ने जनता को कहा- शुक्रिया, शुभेंदु अधिकारी बोले- विकास ने डर को हराया, सुशासन के नये युग की शुरुआत बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप, बांग्लादेशी मीडिया ने बताया ‘बड़ा संकट’, सांसद को डराने लगा शरणार्थी संकट प्रणाम बंगाल! अंगार से निकलेगा उन्नत पश्चिम बंगाल, शुभेंदु अधिकारी ने फेसबुक पर लिखा भावुक पोस्ट ममता बनर्जी की जनादेश के खिलाफ मुख्यमंत्री बने रहने की जिद, संविधान विशेषज्ञों से जानें 7 मई को क्या होगा The post आलापन बंद्योपाध्याय और एचके द्विवेदी ने भी ममता दीदी से किया किनारा, दे दिया इस्तीफा appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में सरकार गठन की उल्टी गिनती शुरू, CEO ने राज्यपाल को सौंपी विधायकों की लिस्ट, क्या करेंगी ममता बनर्जी?

खास बातें नयी प्रशासन बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे राज्यपाल निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी पूरी, अब राजभवन लेगा फैसला अब गेंद राज्यपाल के पाले में ममता बनर्जी की जिद और संवैधानिक संकट संवैधानिक चुनौती बहुमत बनाम अल्पमत का गणित WB CEO Gazette Notification: ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार के बीच पश्चिम बंगाल में बुधवार को एक बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने लोक भवन जाकर राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात की. नयी प्रशासन बनाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे राज्यपाल इस दौरान उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों के नामों वाली आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) राज्यपाल को सौंप दी. यह एक अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है, जो चुनाव नतीजों के बाद नयी विधानसभा के गठन का रास्ता साफ करती है. अब सबकी नजरें राज्यपाल पर टिकी हैं, क्योंकि वे जल्द ही नयी प्रशासन बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी पूरी, अब राजभवन लेगा फैसला लोक भवन से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि फालता विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी राज्य में आयोग की भूमिका अब खत्म हो चुकी है. सीईओ ने बताया कि निर्वाचित विधायकों की सूची सौंपना एक संवैधानिक नियम है, जिसे आज पूरा कर लिया गया. इसे भी पढ़ें : बंगाल में ममता बनर्जी के खास अफसरों पर गिरी गाज, रिटायर नौकरशाहों की दफ्तरों में एंट्री बैन, मुख्य सचिव का सख्त फरमान अब गेंद राज्यपाल के पाले में मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा- अब विधानसभा का गठन करना और प्रशासन बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना लोक भवन का काम है. फालता निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया पूरी करने के अलावा निर्वाचन आयोग का काम अब समाप्त हो गया है. राजपत्र अधिसूचना सौंपने का मतलब है कि अब तकनीकी और कानूनी रूप से नयी विधानसभा अस्तित्व में आने के लिए तैयार है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता बनर्जी की जिद और संवैधानिक संकट लोक भवन में हुई इस हलचल ने बंगाल की नेतृत्व में सस्पेंस बढ़ा दिया है. भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है. राजपत्र अधिसूचना मिलने के बाद अब राज्यपाल बहुमत वाली पार्टी (भाजपा) के नेता को प्रशासन बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं. इसे भी पढ़ें : दलबदलुओं के लिए भाजपा के दरवाजे बंद, देवजीत प्रशासन बोले- दागियों और असामाजिक तत्वों की नो एंट्री WB CEO Gazette Notification: संवैधानिक चुनौती जानकारों का मानना है कि यदि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल इस राजपत्र अधिसूचना के आधार पर नयी विधानसभा गठित कर सकते हैं, जिससे पुरानी कैबिनेट स्वतः भंग मानी जायेगी. इसे भी पढ़ें : सत्ता छिनते ही TMC के अस्तित्व पर संकट, जानें क्यों अब ममता बनर्जी के लिए वापसी की राह है कठिन बहुमत बनाम अल्पमत का गणित इस चुनाव में भाजपा ने 15 साल पुराने तृणमूल शासन को उखाड़ फेंका है. तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गयी है. अधिसूचना सौंपे जाने के बाद अब भाजपा के विधायक दल के नेता की घोषणा और शपथ ग्रहण समारोह की तारीखों को लेकर चर्चाएं तेज हो गयी हैं. बंगाल की जनता अब उस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रही है, जब राज्य में नयी प्रशासन कार्यभार संभालेगी. इसे भी पढ़ें ममता बनर्जी की जिद पर भड़के जेठमलानी, कहा- इस्तीफा न दें, तो धक्के मारकर निकालें, वह अब ऑफिस में घुसपैठिया मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का आदेश- कत्ल और तोड़फोड़ करने वालों को तुरंत गिरफ्तार करें मार्कंडेय काट्जू का दावा- बीजेपी में शामिल हो सकती हैं महुआ मोईत्रा, सागरिका और सायोनी घोष पालटेचे एई बार, एलो बीजेपी प्रशासन…, बंगाल में भाजपा के विजय गान वीडियो में दिखा मोदी का जादू और जीत का जोश The post बंगाल में प्रशासन गठन की उल्टी गिनती शुरू, CEO ने राज्यपाल को सौंपी विधायकों की लिस्ट, क्या करेंगी ममता बनर्जी? appeared first on Naya Vichar.

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ऑस्ट्रेलिया से बैठकर भारत में सर्जरी, 10 हजार किमी दूर से मरीज का ऑपरेशन कर भारतीय डॉक्टर ने रचा इतिहास

मेडिकल टेक्नोलॉजी ने एक और बड़ी छलांग लगाई है. हिंदुस्तान के प्रसिद्ध बैरियाट्रिक सर्जन डॉ मोहित भंडारी ने ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से बैठकर हिंदुस्तान के इंदौर में मौजूद मरीज का सफल ऑपरेशन कर नया इतिहास बना दिया. करीब 10,000 किलोमीटर की दूरी पर की गई यह रोबोटिक सर्जरी दिखाती है कि अब इलाज की सीमाएं तेजी से खत्म हो रही हैं और डॉक्टर कहीं से भी मरीज तक पहुंच सकते हैं. कैसे हुआ 10,000 किमी दूर से ऑपरेशन? यह सर्जरी गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी प्रक्रिया के तहत की गई, जिसमें पेट को छोटी आंत के एक हिस्से से जोड़ा जाता है. डॉक्टर ने पर्थ में बैठे-बैठे एक हाई-टेक कंसोल के जरिए रोबोटिक आर्म्स को कंट्रोल किया, जो इंदौर में मरीज पर काम कर रहे थे. हर मूवमेंट रियल टाइम में ट्रांसफर हुआ और मशीन ने उसे बेहद सटीक तरीके से दोहराया. इस पूरी प्रक्रिया में देरी इतनी कम थी कि यह इंसानी पलक झपकने जितनी तेज मानी जा रही है. कौन सी तकनीक बनी इस चमत्कार की वजह? इस ऐतिहासिक सर्जरी में हिंदुस्तान में विकसित SSI Mantra और MantrAsana सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. ये तकनीक SS Innovations International ने डेवलप की है, जो एडवांस रोबोटिक सर्जरी सॉल्यूशंस के लिए जानी जाती है. इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह 0.1 मिलीमीटर तक की सटीकता के साथ काम कर सकता है, जो इंसानी हाथों से भी ज्यादा प्रिसाइज माना जाता है. हेल्थकेयर में क्या बदलेगा इस तकनीक से? यह उपलब्धि सिर्फ एक सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थकेयर के भविष्य की दिशा तय करती है. अब बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टर दूर-दराज के इलाकों में बैठे मरीजों का इलाज कर सकेंगे, बिना किसी यात्रा के. इससे खासतौर पर ग्रामीण हिंदुस्तान में रहने वाले मरीजों को बड़ा फायदा मिल सकता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी रहती है. क्या यह तकनीक बनेगी गेम चेंजर? टेली-सर्जरी की यह सफलता दिखाती है कि आने वाले समय में अस्पतालों की परिभाषा बदल सकती है. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो देश के किसी भी कोने में बैठे मरीज को वर्ल्ड-क्लास ट्रीटमेंट मिल सकता है. यह कदम न सिर्फ मेडिकल साइंस के लिए बड़ा बदलाव है, बल्कि लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद भी है. यह भी पढ़ें: STAR तकनीक ने बदली तस्वीर: जहां मिलना नामुमकिन था, वहां अब छिपे स्पर्म्स ढूंढ़कर दे रही पितृत्व का मौका The post ऑस्ट्रेलिया से बैठकर हिंदुस्तान में सर्जरी, 10 हजार किमी दूर से मरीज का ऑपरेशन कर हिंदुस्तानीय डॉक्टर ने रचा इतिहास appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिका-ईरान के बीच ‘शांति’ की खबर से सेंसेक्स 941 अंक उछला, कच्चा तेल हुआ सस्ता

Stock Market : 6 मई 2026 को हिंदुस्तानीय शेयर बाजार के लिए एक शानदार दिन रहा. वैश्विक स्तर पर भू-नेतृत्वक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों में जोश भर दिया. इसी का नतीजा रहा कि बीएसई (BSE) सेंसेक्स और निफ्टी ने जबरदस्त रिकवरी दिखाई. बाजार का हाल सेंसेक्स (Sensex): 940.73 अंक (1.22%) की बढ़त के साथ 77,958.52 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान इसने 78,000 का स्तर भी पार कर लिया था. निफ्टी (Nifty): 298.15 अंक (1.24%) उछलकर 24,330.95 के स्तर पर पहुंच गया. तेजी के 3 बड़े कारण ट्रंप का ‘शांति’ वाला दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत में बड़ी प्रगति हुई है. उन्होंने जहाजों को सुरक्षा देने वाले ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को भी स्थगित कर दिया है, जिससे युद्ध की आशंका कम हो गई है. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट: शांति की समाचारों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 8% टूटकर 101.1 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हिंदुस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल सस्ता होना हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति और बाजार के लिए संजीवनी जैसा है. ग्लोबल मार्केट का साथ: सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों (जैसे दक्षिण कोरिया का कॉस्पी जो 6% चढ़ा) और यूरोपीय बाजारों में भी तेजी रही, जिसका फायदा स्थानीय निवेशकों को मिला. किन कंपनियों को हुआ फायदा और किसे नुकसान? टॉप गेनर्स (मुनाफे वाले) टॉप लूजर्स (घाटे वाले) इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) रिलायंस इंडस्ट्रीज ट्रेंट (Trent) लार्सन एंड टुब्रो (L&T) एशियन पेंट्स पावर ग्रिड हिंदुस्तानीय स्टेट बैंक (SBI) एनटीपीसी (NTPC) एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) – Also Read : कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशसमाचारी: अब हर साल होगा मुफ्त फुल बॉडी चेकअप, नए लेबर कोड के तहत कल से शुरुआत The post अमेरिका-ईरान के बीच ‘शांति’ की समाचार से सेंसेक्स 941 अंक उछला, कच्चा तेल हुआ सस्ता appeared first on Naya Vichar.

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दिहाड़ी मजदूर की बेटी छोटी कुमारी बनी स्टेट टॉपर, आईएएस बन देश की सेवा करने का सपना

बोकारो के कसमार से दीपक सवाल की रिपोर्ट JAC Result: बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के खैराचातर गांव की बेटी छोटी कुमारी ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट आर्ट्स परीक्षा 2026 में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है. छोटी ने 487 अंक प्राप्त कर स्टेट टॉपर बनने का गौरव हासिल किया है उनकी इस उपलब्धि से गांव, विद्यालय और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. हरनाद हाई स्कूल की छात्रा है छोटी छोटी कुमारी, खैराचातर निवासी भवानी शंकर नायक और माला देवी की पुत्री हैं. वह पीएमश्री क्षेत्रनाथ प्लस टू उच्च विद्यालय हरनाद की छात्रा हैं. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है. उनके पिता एक साधारण दिहाड़ी मजदूर हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी बेटी की पढ़ाई जारी रखी. आईएएस बन देश सेवा करना चाहती है छोटी अपनी सफलता पर छोटी कुमारी ने कहा कि उनका सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का है. उन्होंने कहा कि यदि परिवार, समाज और प्रशासन का सहयोग मिला तो वह आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी करेंगी. उन्हें विश्वास है कि अवसर मिलने पर वह अपना सपना अवश्य पूरा करेंगी. नियमित पढ़ाई को बताया सफलता का मंत्र छोटी ने बताया कि उन्होंने परीक्षा के दौरान अचानक अधिक पढ़ाई करने के बजाय नियमित अध्ययन पर ध्यान दिया. वह प्रतिदिन चार से पांच घंटे तक लगातार पढ़ाई करती थीं. उनके अनुसार अनुशासन और निरंतर मेहनत ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है. उन्होंने कहा कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई के दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. कई बार बिजली कटने से भी दिक्कत होती थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. पिता ने मजदूरी कर किसी तरह उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया. इसे भी पढ़ें: सिमरिया की बेटी ने किया कमाल, इंटर साइंस में बनी चतरा जिले में टॉपर शिक्षकों के सहयोग से मिली सफलता छोटी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया. उन्होंने विशेष रूप से इतिहास के शिक्षक इरशाद अख्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर मार्गदर्शन दिया. छोटी की इस उपलब्धि से खैराचातर गांव सहित पूरे कसमार क्षेत्र में गर्व और उत्साह का वातावरण है. लोग इसे मेहनत, संघर्ष और संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल मान रहे हैं. इसे भी पढ़ें: बिजली-पानी की किल्लत पर गढ़वा में बवाल, भाजपा का ‘घड़ा फोड़’ प्रदर्शन, प्रशासन पर बोला हमला The post दिहाड़ी मजदूर की बेटी छोटी कुमारी बनी स्टेट टॉपर, आईएएस बन देश की सेवा करने का सपना appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Cabinet Expansion : सत्ता, संदेश और शक्ति प्रदर्शन! 7 मई को समारोह में शामिल होंगे नितिन, मोदी और शाह

Bihar Cabinet Expansion : एक तारीख 15 अप्रैल 2026 थी. जो इतिहास के पन्‍ने में दर्ज हो गई है. इस दिन बिहार बीजेपी ने आजादी के बाद पहली बार और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी की स्‍थापना के 46 साल बाद सम्राट चौधरी के रूप में अपना पहला मुख्‍यमंत्री बनाया. अब कल 7 मई है, जिसे बीजेपी ऐतिहासिक बनाना चाहती है. ये वो तारीख होगी जब बीजेपी शासित प्रशासन की कैबिनेट का विस्‍तार होगा. बीजेपी इस तारीख को न केवल जश्‍न के रूप में मनाने की तैयारी में है. बल्कि एक भव्‍य आयोजन के जरिए पूरे प्रदेश को बड़ा संदेश देने की तैयारी है. शक्ति प्रदर्शन का गवाह बनेगा गांधी मैदान पटना का गांधी मैदान एक बार फिर बड़े शक्ति प्रदर्शन का गवाह बनने जा रहा है. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में कैबिनेट का विस्‍तार होगा. नए मंत्रियों को गांधी मैदान में शपथ दिलाई जाएगी. इसी के साथ बिहार बीजेपी के इतिहास में ये दिन बेहद खास हो जाएगा. केवल प्रक्रिया नहीं, इवेंट बनेगा समारोह ये आयोजन सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होगी बल्कि राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्वक इवेंट के रूप में नजर आएगा. देश भर की मीडिया बिहार के कैबिनेट विस्‍तार को कवर करेगी. पटना के गांधी मैदान में आयोजित यह कार्यक्रम ‘डबल अचीवमेंट’ के रूप में पेश होगा. बंगाल में ऐतिहासिक जीत और बिहार में प्रशासन बनाने और कैबिनेट विस्‍तार का यह जश्न साफ संकेत है कि बीजेपी अब पूर्वी हिंदुस्तान में अपने विस्तार को खुलकर प्रदर्शित करने के मूड में है. ‘पेंडिंग पॉलिटिकल मोमेंट’ किया जा रहा पूरा नया विचार डॉट कॉम ने 14 अप्रैल को ही इस बात की जानकारी दी थी कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के शामिल होने का प्‍लान है. मगर, तब बंगाल चुनाव में व्‍यस्‍तता के कारण ऐसा नहीं हो सका था. इसलिए 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के साथ दोनों डिप्‍टी सीएम को शपथ दिलाकर औपचारिकता पूरी की गई थी. मगर अब मौका भी है और दस्‍तूर भी. मौका बिहार के कैबिनेट विस्‍तार का है और दस्‍तूर असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी, बंगाल में पहली बार प्रचंड जीत का. बीजेपी वही ‘पेंडिंग पॉलिटिकल मोमेंट’ पूरा कर रही है. शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी से पार्टी एक मजबूत नेतृत्वक संदेश देने की कोशिश करेगी. पूर्वी हिंदुस्तान में नेतृत्वक विस्‍तार बिहार में पहली बार प्रशासन बनाने, पश्चिम बंगाल में पहली प्रचंड जीत और असम, पुडुचेरी में वापसी ने पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ाया है. इसका असर बिहार और बंगाल की सीमा से सटे राज्‍य झारखंड में भी देखने को मिलेगा. पार्टी इस इवेंट को ‘पूर्वी हिंदुस्तान में नेतृत्वक विस्तार’ के तौर पर को पेश करती नजर आने वाली है. जिसका खाका तैयार हो गया है. यानी कल पटना के गांधी मैदान में जीत के जश्‍न का भव्‍य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. जहां से जनता और विरोधियों दोनों को संदेश देने की कोशिश होगी. आज नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित ‘विजय उत्सव’ में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सम्मिलित होकर समर्पित कार्यकर्ताओं और जनता का अभिनंदन किया। पाँचों राज्यों में मिला यह प्रचंड जनसमर्थन प्रधानमंत्री जी के यशस्वी नेतृत्व,… pic.twitter.com/rtvylKkDzI — Nitin Nabin (@NitinNabin) May 4, 2026 Also Read : निशांत कुमार शपथ लेंगे या नहीं? जदयू एमएलसी ने बताई पार्टी के नेताओं की इच्छा, कल खुलेगा राज The post Bihar Cabinet Expansion : सत्ता, संदेश और शक्ति प्रदर्शन! 7 मई को समारोह में शामिल होंगे नितिन, मोदी और शाह appeared first on Naya Vichar.

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अखंड सौभाग्य के लिए मई 2026 में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? यहां जानें पूजा विधि और महत्व

Vat Savitri Vrat 2026: साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 दिन शनिवार को रखा जाएगा. महावीर पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर सुहागिन स्त्रीएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं. इस दिन स्त्रीएं व्रत रखकर वट वृक्ष (बरगद) की विधि-विधान से पूजा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं. धार्मिक मान्यता है कि वट सावित्री व्रत पति को संकटों से रक्षा प्रदान करता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है. वट सावित्री व्रत तिथि? वट सावित्री व्रत की तिथि: 16 मई 2026 दिन शनिवारअमावस्या तिथि प्रारंभ: 15 मई 2026 को सुबह 03 बजकर 51 मिनट परअमावस्या तिथि समाप्त: 16 मई 2026 की रात 01 बजकर 37 मिनट तक 16 मई के दिन का शुभ समय (मुहूर्त) ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03 बजकर 39 मिनट से 04 बजकर 21 मिनट तकअभिजित मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 19 मिनट से 12 बजकर 13 मिनट तकविजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजे से 02 बजकर 54 मिनट तक 16 मई के दिन का अशुभ समय राहुकाल: सुबह 08 बजकर 25 मिनट से 10 बजकर 05 मिनट तकयमगण्ड: दोपहर 01 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 07 मिनट तकगुलिक काल: सुबह 05 बजकर 04 मिनट से 06 बजकर 44 मिनट तक अखंड सौभाग्य और लंबी आयु सुहागिन स्त्रीएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और सुख समृद्धि के लिए यह व्रत निर्जला या फलाहार रहकर करती हैं. महावीर पंचांग में दी गयी जानकारी के अनुसार इस साल 16 मई दिन शनिवार को स्नान दान श्राद्ध की अमावस्या तथा प्रदोष अमावस्या में वटसावित्री व्रत का समापन होगा. वटसावित्री व्रत को वरगदाई भी कहते हैं. इस दिन स्त्रीएं सौभाग्य के लिए वटवृक्ष की 108 बार या यथाशक्ति कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं. आज शनिवार युक्त श्रीशनिदेव की जयंती भी मनायी जाएगी. पौराणिक महत्व माता सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे, इसलिए यह व्रत पति की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है. वट (बरगद) वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख और स्थिरता आती है. इस दिन स्त्रीएं सज-धजकर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और धागा लपेटकर अपने सुहाग की रक्षा की प्रार्थना करती हैं. यह व्रत स्त्रीओं की पति के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण को दर्शाता है. इस व्रत के पालन से परिवार में खुशहाली बनी रहती है. यह भी पढ़ें: गंगा दशहरा पर कब करें स्नान-दान 25 या 26 मई? जानिए सही तिथि, शुभ योग और राशि अनुसार दान The post अखंड सौभाग्य के लिए मई 2026 में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत? यहां जानें पूजा विधि और महत्व appeared first on Naya Vichar.

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