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May 18, 2026

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झारखंड के 19 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 23 मई तक खराब रहेगा मौसम 

रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट  Jharkhand Weather: झारखंड में भी क्लाइमेट चेंज का प्रभाव साफ दिख रहा है. 1 मार्च से अब तक मौसम का असामान्य पैटर्न देखने को मिल रहा है. जिस मई महीने में तेज गर्मी पड़नी चाहिए थी, उस समय पांच जिलों को छोड़कर 19 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है. इससे तापमान सामान्य से कम बना हुआ है और लोगों को गर्मी का एहसास नहीं हो रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, अप्रैल के शुरुआती दिनों में जबरदस्त गर्मी पड़ी थी और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया था, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव आ गया है. मई के महीने में दो-तीन जिलों को छोड़कर किसी भी जिले का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं रहा. राज्य में औसत तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया है. जिलों में बारिश का हाल  6 जिलों बोकारो, हजारीबाग, लातेहार, रामगढ़, रांची और सिमडेगा जिलों में सामान्य से 100 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई है. वहीं चतरा, गढ़वा, लोहरदगा और साहिबगंज में सामान्य से कम बारिश हुई है.  मई के अंतिम सप्ताह तक बदला रहेगा मौसम मौसम केंद्र ने पूर्वानुमान जारी किया है कि मई महीने के अंतिम सप्ताह तक मौसम बदला रहेगा. 23 मई तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तेज हवा, बारिश और गर्जन के साथ वज्रपात की संभावना बनी रहेगी. 19 और 20 मई को संताल परगना वाले इलाके के साथ-साथ मध्य झारखंड सहित राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है.  मौसम विशेषज्ञ के अनुसार वरीय मौसम वैज्ञानिक (रांची केंद्र) अभिषेक आनंद के अनुसार, झारखंड में बदलता मौसम क्लाइमेट चेंज का असर है, हालांकि इसके पीछे कई अन्य कारण भी हैं. इसी वजह से पूरे राज्य में एक जैसा मौसम नहीं दिख रहा है. पहले बारिश सामान्य होती थी और उसमें खतरा कम रहता था, लेकिन अब तेज हवा, भारी बारिश और वज्रपात जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं. सुबह में तेज धूप और गर्मी रह रही है. अभिषेक आनंद ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होते ही सतर्क रहें, सुरक्षित स्थान पर चले जाएं और वज्रपात के दौरान मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल करने तथा सेल्फी लेने जैसी गतिविधियों से बचें.  यह भी पढ़ें : बाबा दरबार पहुंचीं झरिया विधायक, कहा : राज्य में विकास कार्यों पर लगा ब्रेक यह भी पढ़ें : Deoghar News : मथुरापुर में सात घंटे का रेलवे ट्रैफिक ब्लॉक, आठ ट्रेनें रद्द, कई घंटों विलंब से चलीं The post झारखंड के 19 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 23 मई तक खराब रहेगा मौसम  appeared first on Naya Vichar.

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योगी सरकार के मंत्रिमंडल में विस्तार, भूपेंद्र चौधरी, मनोज पाण्डेय समेत कई नेताओं को मिली नई जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्ट

UP Cabinet Expansion 2026: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ प्रशासन ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा नेतृत्वक कदम उठाते हुए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है. यह मंत्रिमंडल विस्तार 10 मई को किया गया था. इसके बाद से ही विभागों के बंटवारे के कयास लगाए जा रहे थे. अब विस्तार के 8वें दिन- रविवार 17 मई को नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. इसके बाद प्रशासन ने उनके विभागों का भी बंटवारा कर दिया. इस फेरबदल को आगामी चुनावों की रणनीति और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है. राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली प्रशासन ने नई जिम्मेदारियों की घोषणा की. भूपेंद्र चौधरी को MSME, मनोज पाण्डेय को खाद्द विभाग मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे चर्चित नाम पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का रहा. उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं भाजपा नेता मनोज कुमार पाण्डेय को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है. उन्हें खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभाग का प्रभार दिया गया है. स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को भी नई जिम्मेदारियां प्रशासन ने स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया है. अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया. वहीं सोमेंद्र तोमर को नेतृत्वक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल की जिम्मेदारी मिली है. प्रशासन का मानना है कि इन विभागों में नए चेहरों के आने से प्रशासनिक कामकाज को और मजबूती मिलेगी. राज्य मंत्रियों को विकास से जुड़े विभाग कृष्णा पासवान को पशुधन एवं डेयरी विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली. कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग सौंपा गया. सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग में जिम्मेदारी दी गई. हंस राज विश्वकर्मा को MSME मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है, जहां वे भूपेंद्र चौधरी के साथ काम करेंगे. मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल नए राज्य मंत्रियों को भी अलग-अलग अहम विभाग दिए गए हैं. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुल 8 मंत्रियों को शपथ दिलाई है. इसमें दो कैबिनेट मंंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार और 4 राज्य मंत्री हैं. इनमें से 6 मंत्री योगी प्रशासन में बिल्कुल नए चेहरे हैं. ये भी पढ़ें:- केरलम कैबिनेट में दिखेगा कांग्रेस का दबदबा: शपथ ग्रहण से पहले मंत्रियों की लिस्ट फाइनल, देखें सूची कृष्णा पासवान ने जताया आभार शपथ ग्रहण से पहले कृष्णा पासवान ने भाजपा नेतृत्व और राज्य प्रशासन के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाया जाएगा. मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सोमवार 18 मई को योगी प्रशासन की कैबिनेट बैठक होगी. इसमें नए मंत्री भी शामिल होंगे. ये भी पढ़ें:- UP को मिलेगा एक और इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड: गोरखपुर में 30000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम का भूमि पूजन 2027 चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा योगी प्रशासन का यह मंत्रिमंडल विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं. हिंदुस्तानीय जनता पार्टी और एनडीए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटे हैं नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार किया गया है, ताकि संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर संतुलन बनाया जा सके. The post योगी प्रशासन के मंत्रिमंडल में विस्तार, भूपेंद्र चौधरी, मनोज पाण्डेय समेत कई नेताओं को मिली नई जिम्मेदारी, देखें पूरी लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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ऑफिस का स्ट्रेस धीरे-धीरे बिगाड़ रहा है आपकी लाइफ? ये 5 आसान उपाय तुरंत दिलाएंगे आपको राहत

Stress Relieving Tips: आज की इस बिजी लाइफस्टाइल में पर्सनल लाइफ के अलावा ऑफिस का स्ट्रेस होना भी सबसे बड़ी प्रॉब्लम्स में से एक बन गया है. हर समय काम का प्रेशर, समय पर अपने सारे टार्गेट्स अचीव करने की टेंशन और घंटों तक स्क्रीन की तरफ ही देखते रहना आपको मेंटली और फिजिकली दोनों ही तरीके से थका देता है. ऐसे में यह काफी जरूरी हो जाता है कि आप इस स्ट्रेस को जितना जल्दी हो सके कम करने की कोशिश करें. अगर आप समय रहते इसे कम नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर आपके हेल्थ, नींद और रिश्तों पर पड़ता है. आज की इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी आसान आदतों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप काफी आसानी से ऑफिस के स्ट्रेस को कम कर सकते हैं. तो चलिए इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि आपका मेंटल और फिजिकल हेल्थ एक बार फिर से सही ट्रैक पर वापस आ जाए. काम के बीच लें छोटे-छोटे ब्रेक जब आप घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर एक ही तरह का काम करते रहते हैं, तो आपका दिमाग थकना शुरू हो जाता है और स्ट्रेस भी बढ़ने लगता है. अगर आप ऑफिस में बैठकर लगातार काम कर रहे हैं तो हर एक से दो घंटे के बीच एक बार कम से कम 10 मिनट का ब्रेक जरूर लें. इस समय अपनी सीट से उठ जाएं और थोड़ी देर टहलें, पानी पीएं या फिर खिड़की के पास खड़े होकर फ्रेश ऑक्सीजन लें. जब आप ऐसा करते हैं तो आपका दिमाग रिलैक्स हो जाता है और साथ ही दोबारा काम करने में आपका मन लगने लगता है. ये भी पढ़ें: ऑफिस की कुर्सी से चिपके रहने के कारण अकड़ गई है कमर? हर दिन करें ये 5 आसान एक्सरसाइज और पाएं तुरंत आराम अपनी डेली रूटीन को रखें व्यवस्थित अक्सर हमारी यह आदत होती है कि हम एक ही समय में कई काम करने की कोशिश करते हैं. आपकी इस आदत की वजह से भी स्ट्रेस काफी ज्यादा बढ़ सकता है. स्ट्रेस से बचने के लिए सुबह सोकर उठते ही अपने सभी जरूरी कामों की लिस्ट तैयार कर लें और उन्हें प्रायोरिटी के हिसाब से सेट करके पूरा कर लें. जब सारे काम व्यवस्थित तरीके से होने लगते हैं, तो आपके दिमाग पर प्रेशर काफी कम पड़ता है और साथ ही आपकी समय भी बेकार की चीजों में बर्बाद नहीं होता है. हेल्दी डाइट और हाइड्रेशन का रखें ख्याल जब आप स्ट्रेस में होते हैं तो इसका काफी गहरा असर आपके खाने-पीने की आदत पर भी पड़ता है. कई लोग स्ट्रेस में होने की वजह से जंक फूड्स खाना शुरू कर देते हैं. इसकी वजह से आपका शरीर और भी ज्यादा सुस्त महसूस करने लगता है. जब आप ऑफिस में काम कर रहे हों तो हमेशा एक हेल्दी और लाइट डाइट ही लें. इसके अलावा फलों, ड्राई फ्रूट्स और सही मात्रा में पानी पीने की आदत को भी अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं. जब आपका शरीर हाइड्रेटेड रहेगा तो आपका दिमाग काफी ज्यादा बेहतर तरीके से काम करने लग जाएगा. ये भी पढ़ें: क्या आप भी रातभर जागकर पुरानी बातें सोचते रहते हैं? जानें ओवरथिंकिंग के इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने का तरीका स्मार्टफोन और स्क्रीन से बनाएं थोड़ी दूरी अगर आप ऑफिस के कामों को खत्म करने के बाद भी लगातार स्मार्टफोन और लैपटॉप में ही घुसे हुए रहते हैं, तो इसकी वजह से आपके दिमाग को आराम करने का बिलकुल भी समय नहीं मिलता है. कोशिश करें कि जब भी आपका काम खत्म हो जाए, तो कुछ देर के लिए स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसी चीजों से दूर रहें. आपके लिए बेहतर होगा कि आप अपने परिवार के साथ समयबिताएं , इस समय कोई किताब पढ़ें या फिर अपनी पसंद का कोई काम ही कर लें. जब आप ऐसा करते हैं तो आपका मेंटल स्ट्रेस देखते ही देखते खत्म होने लग जाता है. योगा और मेडिटेशन की ले सकते हैं मदद अगर आप वाकई में ऑफिस में होने वाली स्ट्रेस को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो अपनी डेली रूटीन में योगा और मेडिटेशन को जरूर शामिल कर लें. जब आप हर दिन कम से कम 15 मिनट मेडिटेशन करना, गहरी सांसें लेना और एक्सरसाइज करना शुरू कर देंगे तो आपका मन काफी ज्यादा शांत रहने लग जाएगा. इससे आपका स्ट्रेस भी कम होगा और साथ ही गुस्सा भी कंट्रोल में रहने लगेगा. यह छोटा सा उपाय आपके कामों को करने की कैपसिटी को भी बढ़ा देता है. ये भी पढ़ें: 30 की उम्र के बाद आपकी ये पुरानी आदतें पड़ सकती हैं भारी, आज ही अपनाएं नया लाइफस्टाइल The post ऑफिस का स्ट्रेस धीरे-धीरे बिगाड़ रहा है आपकी लाइफ? ये 5 आसान उपाय तुरंत दिलाएंगे आपको राहत appeared first on Naya Vichar.

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43 वर्ष का हुआ गुमला जिला: नक्सल खत्म, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक

दुर्जय पासवानGumla: 18 मई को गुमला जिला 43 साल का हो गया. आज ही के दिन 1983 को गुमला को जिला का दर्जा मिला था. गुमला जिले में कुछ अपवाद बातों को छोड़ दें तो निरंतर कुछ नया हो रहा है, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक है. हालांकि, गुमला जिला नक्सल से मुक्त हो गया है. पहले नक्सल के कारण गांवों का विकास रुका हुआ था. अब जब नक्सल खत्म हुआ तो भ्रष्टाचार विकास में बाधक बन गया है. भ्रष्टाचार के अलावा साइबर क्राइम, नशापान व अंधविश्वास जिले के विकास में बाधक बनी हुई है. गुमला के विकास के लिए प्रशासन करोड़ों रुपये दे रही है, लेकिन एक टेबल से दूसरे टेबल होते हुए पब्लिक तक विकास का पैसा पहुंचने में देरी हो रही है. टेबल दर टेबल बढ़ने में विकास का आधा पैसा खत्म हो जा रहा है. ऐसे, गुमला में प्रशासन की कई योजनाओं को धरातल में उतारा गया है. जिसका फल है. गुमला को पीएम अवार्ड मिल चुका है. गुमला में नित्य नये काम हो रहे हैं. गुमला कई उतार चढ़ाव के बाद भी आगे बढ़ा है. जरूर कुछ स्थानों पर गुमला पीछे है. फिर भी वर्तमान में गुमला जिले की जो स्थिति है, वह पहले से बेहतर है. गुमला में धार्मिक, पर्यटक व ऐतिहासिक स्थल भरे पड़े हैं झारखंड राज्य के अंतिम छोर में बसे गुमला जिले का इतिहास गौरवपूर्ण है. भ्रष्टाचार, नशापान, अंधविश्वास से जूझ रहे गुमला में सभी जाति व धर्म के लोग रहते हैं. यह आदिवासी बहुल जिला है. उरांव जनजाति की जनसंख्या अधिक है. इसाईयों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. यह श्रीराम भक्त हनुमान की जन्मस्थली है. गुमला में पग-पग पर धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल हैं. दक्षिणी कोयल व शंख नदी गुमला से होकर बहती है. धार्मिक आस्था के केंद्र टांगीनाथ धाम, देवाकी धाम, महामाया मंदिर, वासुदेव कोना मंदिर है. रमणीय पंपापुर, नागफेनी, बाघमुंडा, हीरादह गुमला जिले की पहचान है. ऐतिहासिक धरोहर डोइसागढ़ है. गुमला धर्मप्रांत में 41 चर्च है. कई चर्च पुराने हैं जो अपने अंदर प्राचीन इतिहास समेटे हुए है. अंग्रेजों को धूल चटाने वाले बख्तर साय, मुंडन सिंह, तेलंगा खड़िया व जतरा टाना भगत जैसे वीर सैनानियों की जन्म भूमि है. परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का जैसे वीर सपूत इसी गुमला के जारी प्रखंड की धरती पर जन्म लिये. गुमला शहीदों की भूमि है. गुमला के प्रमुख धार्मिक, पर्यटक व ऐतिहासिक स्थलों को बढ़ावा मिले तो स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा. स्पोर्ट्स के क्षेत्र में निरंतर बढ़ते गुमला की धरती से कई राज्य व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों का जन्म हुआ है. बस अब बुलंदियों को छूने की आशा है और यह तभी संभव है. जब हम सब मिलकर एक सोच, नये उत्साह, उमंग, जोश से आगे बढ़ेंगे. गुमला जिले का इतिहास गौरवपूर्ण है इतिहास पर गौर करें तो खनिज संपदाओं से परिपूर्ण गुमला 18 मई 1983 को रांची से अलग होकर जिला बना. गुमला जिला 5327 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है. कुल जनसंख्या 1246249 है. जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 625292 व स्त्री जनसंख्या 620957 है. लिंगानुपात 993 प्रति हजार पुरुष है. गुमला जिले में 12 प्रखंड और तीन अनुमंडल गुमला, चैनपुर व बसिया है. पंचायतों की संख्या 159 है. राजस्व गांव 952 है. दो राजस्व गांव बेचिरागी है. गुमला शहरी क्षेत्र में एक नगर परिषद है. जिसकी आबादी 51307 है. जिले में कृषि योग्य भूमि 3.296 लाख व वन क्षेत्र 1.356 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. खनिज के रूप में बॉक्साइड है. परंतु कारखाना नहीं है. जबकि, लंबे समय से गुमला में अल्युमिनियम कारखाना की स्थापना की मांग उठ रही है. दो राज्यों की सीमाएं लगती हैं गुमला गांवों में बसा है. यहां के लोग जीविका के लिए खेतीबारी, घरेलू उद्योग धंधे व मजदूरी करते हैं. गुमला के बगल में लोहरदगा, सिमडेगा, रांची व लातेहार जिला का बॉर्डर सटता है. यह छत्तीसगढ़ व ओड़िशा राज्य का प्रवेश द्वार है. पलायन, गरीबी, अशिक्षा, सिंचाई, बेरोजगारी जैसी कई चुनौतियों का सामना करते हुए गुमला आगे बढ़ रहा है, लेकिन गुमला के कुछ हालात ऐसे हैं. जिसे बदलना है. जरूरत है, हम सभी के अच्छे सोच की. जिससे गुमला झारखंड ही नहीं पूरे देश में मॉडल जिला बन सके. प्लानिंग के तहत काम हो तो गुमला के लोग अच्छे हैं जो हर समय विकास में सहयोग करते हैं. परंतु, कथित तौर पर कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के कारण गुमला का विकास पर असर पड़ते रहा है. यहां कमीशनखोरी है. जिसका सीधा असर विकास के काम पर पड़ रहा है. गुमला की आबादी धर्म के अनुसार हिंदू – 376305मुस्लिम – 62517इसाई – 246097सिख – 269बौद्ध – 645जैन – 28अघोषित – 4290अन्य – 556098कुल – 1246249 गुमला जिला एक नजर में प्रखंड : 12अनुमंडल : 03पंचायत : 159गांव : 952थाना : 18नगर परिषद : 01 ये भी पढ़ें… गुमला में तेंदुआ का आतंक, वन विभाग ट्रेस करने में जुटा विलुप्त होती असुरी भाषा को बचाने की पहल, गुमला में होगा सर्वे  The post 43 वर्ष का हुआ गुमला जिला: नक्सल खत्म, लेकिन भ्रष्टाचार विकास में बाधक appeared first on Naya Vichar.

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‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ को आमिर खान ने बताया ‘शोले’ जैसी, बोले- दोनों का फॉर्मूला एक था

आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ की असफलता को लेकर पहली बार खुलकर बात की है. मुंबई में आयोजित एक मास्टरक्लास के दौरान आमिर खान ने बताया कि फिल्म की ओरिजिनल स्क्रिप्ट को कास्टिंग की वजह से कई बार बदला गया, जिससे पूरी कहानी का असर कमजोर पड़ गया. साल 2018 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. ‘मैं हमेशा कहानी देखकर फिल्म चुनता हूं’ व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में आयोजित स्क्रीन अकादमी मास्टरक्लास में आमिर खान ने कहा, “मेरे लिए मैं कौन सा किरदार निभा रहा हूं, यह दूसरी बात होती है. सबसे पहले मैं कहानी और स्क्रिप्ट देखता हूं.” आमिर ने अपनी सुपरहिट फिल्म ‘दंगल’ का उदाहरण देते हुए कहा, “जब मैंने ‘दंगल’ के लिए हां कहा था, तो उसकी वजह शानदार स्क्रिप्ट थी. फिल्म की कहानी बहुत मजबूत थी और हर किरदार के पास कुछ अच्छा करने के लिए था. उसके बाद मैंने महावीर सिंह फोगाट के किरदार पर ध्यान दिया. मैंने सिर्फ इसलिए फिल्म नहीं की कि महावीर का किरदार बहुत दमदार था.” ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ को लेकर क्या बोले आमिर? आमिर खान ने स्वीकार किया कि ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ के मामले में उन्होंने अपनी ही सोच के खिलाफ फैसला लिया था. उन्होंने कहा, “‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ की कहानी बहुत सामान्य थी. यह काफी हद तक ‘शोले’ जैसी थी.” आमिर ने आगे समझाया, “‘शोले’ में ठाकुर अपने परिवार की मौत का बदला लेना चाहता है और जय-वीरू उसकी मदद करते हैं. उसी तरह ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ में जफीरा के परिवार को खत्म कर दिया जाता है और फिरंगी उसकी मदद करता है. यानी फिल्म की असली कहानी जफीरा की थी, फिरंगी की नहीं.” “कास्टिंग की वजह से स्क्रिप्ट बदल दी गई” आमिर खान ने खुलासा किया कि फिल्म की स्क्रिप्ट को लगातार बदला गया क्योंकि टीम को मनचाही कास्टिंग नहीं मिल पा रही थी. उन्होंने कहा, “हमसे एक बुनियादी गलती हो गई. कास्टिंग की वजह से हम बार-बार स्क्रिप्ट बदलते रहे. हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था. अगर हमें पसंद की कास्टिंग नहीं मिल रही थी, तब भी स्क्रिप्ट नहीं बदलनी चाहिए थी.” यह भी पढ़ें- 34 साल बाद बेटे ने खोला अमजद खान की मौत का राज, आखिरी पलों में क्या हुआ था ‘गब्बर’ के साथ? The post ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ को आमिर खान ने बताया ‘शोले’ जैसी, बोले- दोनों का फॉर्मूला एक था appeared first on Naya Vichar.

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IPL में विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, 9वीं बार 500 रन पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी

Virat Kohli: आईपीएल 2026 का 61वां मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को 23 रनों से हराया. इस जीत के साथ आरसीबी की टीम प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर गई है. वहीं इस मुकाबले में आरसीबी के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया. विराट कोहली आईपीएल के इतिहास में पहले ऐसे क्रिकेटर बन गए जिन्होंने किसी एक टूर्नामेंट में नौवीं बार 500 रनों का आंकड़ा पार किया. सबसे खास बात यह है कि इस रिकॉर्ड पर पहले से भी विराट कोहली का ही कब्जा था. इससे पहले उन्होंने आठ बार आईपीएल के एक सीजन में 500 या उससे अधिक रन बनाए थे. अब उन्होंने नौवीं बार यह मुकाम को हासिल कर अपने रिकॉर्ड को और मजबूत बना लिया है. डेविड वॉर्नर और केएल राहुल को छोड़ा पीछे इस सूची में दूसरे स्थान पर डेविड वॉर्नर और केएल राहुल हैं. दोनों बल्लेबाजों ने सात-सात बार आईपीएल सीजन में 500 रन का आंकड़ा पार किया है, लेकिन विराट अब उनसे काफी आगे निकल चुके हैं. विराट कोहली ने पंजाब किंग्स के खिलाफ 58 रनों की पारी स्पोर्ट्सी. लगातार चौथी बार 500 रनों का आंकड़ा पार किया वहीं कोहली ने इसके साथ ही लगातार चौथी बार 500 रनों का आंकड़ा पार किया. इससे पहले कोहली ने 2011, 2013, 2015, 2016 और 2018 में 500 रनों का आंकड़ा पार किया था. कोहली ने इस पूरे सीजन में 13 मैचों में 542 रन बनाए हो. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 164.74 का रहा है. मुकाबले का हाल पंजाब किंग्स ने टॉस जीतकर पहले गेंजबाजी करने का फैसला किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 4 विकेट के नुकसान पर 222 रन बनाए. बेंगलुरु के लिए वेंकटेश अय्यर ने नाबाद 73, विराट कोहली ने 58, देवदत्त पडिक्कल ने 45 और टिम डेविड ने 28 रन बनाए. पंजाब के लिए हरप्रीत बरार ने 2 विकेट चटकाए. जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स की टीम 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 199 रन बनाए. पंजाब के लिए शशांक सिंह ने 56, मार्कस स्टोइनिस ने 37, सूर्यंश शेडगे ने 35 और कूपर कोनोली ने 37 रन बनाए. आरसीबी के लिए भुवनेश्वर कुमार ने 2, रसिख सलाम डार ने 3 विकेट चटकाए. आरसीबी ने इस मुकाबले को 23 रनों से जीत लिया. इस जीत के साथ आरसीबी प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर ली है. यह भी पढ़ें: कोहली का विराट रिकॉर्ड, T20 क्रिकेट में ऐसा करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने The post IPL में विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, 9वीं बार 500 रन पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी appeared first on Naya Vichar.

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देश की अजेय आस्था का संकल्प सोमनाथ, पढ़ें केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी का आलेख

Somnath: भगवान श्रीकृष्ण के ये कालजयी वचन, ‘नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः’ (आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है) केवल मनुष्य की देह पर ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की उस सांस्कृतिक परंपरा पर भी खरे उतरते हैं, जिसका हृदय सोमनाथ है. हिंदुस्तान की चेतना इतिहास के धूल-धूसरित पन्नों में दबी हुई कोई याद नहीं है, बल्कि यह हमारे तीर्थों की पवित्रता और जन-जन की सांसों में धड़कता हुआ जीवंत सत्य है. सोमनाथ मंदिर इसी सत्य का वह सूर्य है, जिसने सदियों के घोर अंधकार, बर्बर आघातों और इतिहास के झंझावातों को सहा है, लेकिन अपनी आभा को इसने कभी धूमिल नहीं होने दिया. यह मंदिर इसका साक्षी है कि पंथ और मत बदल सकते हैं, सत्ताएं आ और जा सकती हैं, परंतु हिंदुस्तान की सनातन चेतना का प्रवाह कभी नहीं रुकता. सोमनाथ मात्र एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह हिंदुस्तान के स्वाभिमान का वह हिमालय है, जो झुकना नहीं जानता. इसके पुनरोद्धार की 75वीं वर्षगांठ उस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि है, जिसकी नींव लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने रखी थी. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सोमनाथ को हिंदुस्तान की ‘अपराजेय आत्मा’ कहा, तब उन्होंने वास्तव में उस ‘नव-हिंदुस्तान’ का ही आह्वान किया, जो अपनी विरासत के बल पर आधुनिकता के अनंत आकाश को छूने का सामर्थ्य रखता है. यह पुनर्जागरण आत्म-ग्लानि को त्याग कर आत्म-गौरव को अपनाने की यात्रा है, उस ‘अमृत काल’ की घोषणा है, जिसमें स्वतंत्र हिंदुस्तान ने अपनी विस्मृत जड़ों की ओर गौरव के साथ लौटने का संकल्प लिया है. जैसा कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कहा था, ‘सोमनाथ इस बात का प्रतीक है कि अद्वितीय श्रद्धा और विश्वास को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता.’ झारखंड की इस पावन धरा का प्रतिनिधित्व करते हुए, जहां की माटी के कण-कण में ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा का त्याग और जनजातीय अस्मिता का गौरव रचा-बसा है, मैं सोमनाथ की इस चेतना को अपने परिवेश से गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करती हूं. जिस प्रकार सोमनाथ ने बाहरी आक्रांताओं के सामने अपना मस्तक नीचा नहीं होने दिया, उसी प्रकार हमारे झारखंड के वीरों और फूलो-झानो जैसी वीरांगनाओं ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ हिंदुस्तानीय जीवन-मूल्यों की रक्षा के लिए ‘उलगुलान’ किया. सोमनाथ की लहरों की गर्जना और झारखंड के जंगलों में गूंजते स्वाभिमान का स्वर एक ही है. यह हमें सिखाता है कि जब तक हमारी जड़ें और प्रकृति के प्रति हमारा सम्मान सुरक्षित है, तब तक राष्ट्र का वृक्ष सदैव पल्लवित होता रहेगा. सोमनाथ का पत्थर-पत्थर संघर्ष की गाथा कहता है, तो झारखंड का पर्वत-पर्वत अदम्य साहस की कहानी सुनाता है. आज जब हम ‘भव्य काशी, दिव्य अयोध्या और वैभवशाली सोमनाथ’ के साक्षी बन रहे हैं, तब यह स्पष्ट है कि हिंदुस्तान का वास्तविक उत्थान उसकी जड़ों को सींचने से ही संभव है. प्रधानमंत्री का विजन ‘विरासत भी, विकास भी’ केवल एक नीतिगत वक्तव्य नहीं है, बल्कि एक युग-परिवर्तनकारी सांस्कृतिक दर्शन है. जिस प्रकार सोमनाथ का पुनर्निर्माण हिंदुस्तान के खोए हुए सांस्कृतिक आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना थी, ठीक उसी प्रकार आज ‘विकसित हिंदुस्तान @2047’ का संकल्प हमारे आर्थिक, सामाजिक और नैतिक पुनरोद्धार का वह सांस्कृतिक महायज्ञ है, जिसमें हर नागरिक अपनी कर्मठता से योगदान देने को तत्पर है. प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप-यह आधुनिक कनेक्टिविटी और सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय वित्तीय स्थिति, आजीविका और ‘एक हिंदुस्तान, श्रेष्ठ हिंदुस्तान’ की भावना को सशक्त करने की एक राष्ट्र-साधना है. एक स्त्री और जनसेवक के रूप में मैं सोमनाथ की स्थिरता और हिंदुस्तानीय नारी के मौन धैर्य में एक अद्भुत साम्य देखती हूं. समय साक्षी है कि हिंदुस्तान की सांस्कृतिक निरंतरता को अक्षुण्ण रखने में हमारी मातृशक्ति का योगदान अतुलनीय रहा है. जब सोमनाथ पर संकट के बादल छाये थे और मंदिर उपेक्षित था, तब पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर ने ही साहस दिखाया और मुख्य मंदिर के समीप शिव अर्चना के लिए एक नवीन मंदिर का निर्माण करवाया, ताकि भक्ति की अखंड ज्योति कभी बुझने न पाये. उन्होंने सोमनाथ के गौरव को पुनर्स्थापित करने का जो संकल्प लिया था, वही हमारी नारी शक्ति की असली पहचान है. सोमनाथ को कितनी ही बार खंडित करने का प्रयास किया गया, परंतु वह हर बार पहले से अधिक भव्य और दिव्य होकर खड़ा हुआ. ठीक वैसे ही, हिंदुस्तान की मातृशक्ति ने-चाहे वह झारखंड के सुदूर वनांचलों की श्रमशील बहनें हों या महानगरों के कॉरपोरेट जगत में नेतृत्व करती बेटियां- सदियों के संघर्षपूर्ण कालखंड में भी हमारे संस्कारों की लौ को अपनी आस्था के आंचल में सुरक्षित रखा है. नारी ही इस राष्ट्र की ‘सांस्कृतिक रीढ़’ है. हमारी संस्कृति में ‘शक्ति’ की उपासना के बिना शिव का स्वरूप भी पूर्ण नहीं माना जाता. आज ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ से लेकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे युगांतरकारी निर्णय इसी सत्य की पुष्टि करते हैं कि जब मां स्वस्थ और बेटी शिक्षित तथा सशक्त होगी, तभी राष्ट्र की नींव वज्र के समान सुदृढ़ होगी. हम केवल स्त्रीओं का विकास ही नहीं कर रहे, बल्कि स्त्रीओं के नेतृत्व में राष्ट्र का विकास भी सुनिश्चित कर रहे हैं. सोमनाथ जैसे तीर्थ उपासना के साथ-साथ स्वावलंबन और आत्म-गौरव की जीवंत पाठशालाएं हैं. आज जब हम ‘विकसित हिंदुस्तान’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं, तब हमारी सफलता का मूलमंत्र यह है कि हम एक हाथ में उपनिषदों का शाश्वत ज्ञान रखें और दूसरे हाथ में आधुनिक तकनीक का अजेय सामर्थ्य. हमारी सफलता की उड़ान की शक्ति हमारी जड़ों से ही आती है. सोमनाथ का वैभव हमें यह शाश्वत संदेश देता है कि हिंदुस्तान की आत्मा अमर है, सनातन है. यह वही राष्ट्र है, जिसने हर संघर्ष से उत्कर्ष तक की यात्रा अपनी आस्था के बल पर तय की है. सोमनाथ के विशाल समुद्र तट से सम्मेद शिखर (पारसनाथ पहाड़ी) की शांत ऊंचाइयों तक और कच्छ के रण से लेकर कोडरमा के अभ्रक अंचलों तक-हिंदुस्तान की चेतना एक है, अखंड है. सोमनाथ की यह पावन धरा आने वाली पीढ़ियों को सदैव यह मंत्र देती रहेगी कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके पत्थरों या भौगोलिक सीमाओं में ही नहीं, बल्कि उसके चरित्र, उसकी अजेय नारीशक्ति और उसके सामूहिक प्राण-तत्व में निहित है. यही हमारी पहचान है, यही हमारी साझा विरासत है और यही ‘विकसित हिंदुस्तान’ का

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तमिल सत्ता राजनीति में हिंदी के पक्ष में उठी आवाज, पढ़ें उमेश चतुर्वेदी का आलेख

Hindi in Tamil Politics: भाषाएं संचार का साधन तो होती हैं, इस प्रक्रिया में वे दिलों को भी जोड़ती हैं. लेकिन जब भाषाओं को नेतृत्वक औजार बनाया जाता है, तब संचार का जरिया होने के बावजूद वे दिलों में दरार पैदा करने का माध्यम भी बन जाती है. तमिलनाडु में हिंदी की यही स्थिति रही है. आजादी से पहले महात्मा गांधी ने हिंदी में देश को जोड़ने की क्षमता देखी थी. चक्रवर्ती राजगोपालाचारी यानी राजा जी ने तीस वर्षों तक दक्षिण हिंदुस्तान हिंदी प्रचार सभा का कामकाज संभाला. तमिल माटी का वह सपूत तमिल लोगों की जुबान पर हिंदी को बसाना चाहता था, ताकि आजाद हिंदुस्तान में उत्तर और दक्षिण के दिलों को सीधे जोड़ा जा सके. तमिलनाडु की नवेली सत्ता की युवा मंत्री एस कीर्तना को राजा जी की ही कड़ी में रखा जा सकता है. तमिल नेतृत्व में वह राजा जी के बाद दूसरा चेहरा हैं, जो न सिर्फ फर्राटेदार हिंदी बोलती हैं, बल्कि हिंदी के जरिये देश से जुड़ने की बात करती हैं. दस मई को विजय मंत्रिमंडल की सबसे युवा मंत्री बनने के बाद एस कीर्तना ट्रोलरों के निशाने पर रहीं. उनका हिंदी बोलना तमिल नेतृत्व के लिए हैरत और गुस्से की वजह बन गया. चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने हिंदी में बात की थी. तमिल नेतृत्व का परंपरावादी धड़ा यह कैसे बर्दाश्त करता कि उनकी मंत्री हिंदी बोले. लेकिन उसका भी उन्होंने जवाब दिया. एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘मैं हिंदी में बात कर रही हूं. मैं चाहती हूं कि मेरी पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरे हिंदुस्तान में और दूसरे देशों तक पहुंचे. इसलिए मैं हिंदी में बोल रही हूं. हर किसी को मेरे नेता के बारे में पता होना चाहिए. हर किसी को मेरी पार्टी के बारे में जानकारी होनी चाहिए.’ तमिलनाडु की नेतृत्व के लिए भाषा का मुद्दा 1938 में ही संवेदनशील बन गया था, जब तत्कालीन मद्रास प्रांत की प्रशासन के मुखिया के नाते राजा जी ने प्राथमिक शिक्षा में हिंदी पढ़ाने की शुरुआत की. तब डीएमके के संस्थापक सीए अन्नादुरै ने हिंदी विरोध में मोर्चा खोला, जिससे राजा जी को हिंदी पढ़ाने के कदम से पीछे हटना पड़ा. इसके बावजूद 1968 तक वह हिंदी के कट्टर समर्थक बने रहे. डीएमके का गठन भले 1949 में हुआ, पर जिन मुद्दों को लेकर 1944 में उसकी पूर्ववर्ती जस्टिस पार्टी बनी थी, उसमें एक मुद्दा तमिल अस्मिता से भी जुड़ा था. तमिल अस्मिता की जब भी बात होती है, वह घूमकर हिंदी विरोध पर चली जाती है. द्रविड़ दलों के नेतृत्वक उभार के पीछे का एक मुद्दा यह भी रहा है. संवैधानिक प्रावधानों के तहत जब 26 जनवरी, 1965 को हिंदी को पूरे देश की राजभाषा के रूप में स्थापित होना था, तब तीखा विरोध तमिलनाडु में ही शुरू हुआ था, जो कुछ साल बाद हिंसक भी हो गया. तभी से तमिल नेतृत्व में हिंदी विरोध की घोषित परंपरा जारी है.यह अलग बात है कि सूचना और संचार क्रांति की वजह से एक ऐसी नयी पीढ़ी तैयार हुई है, जिसे हिंदी विरोध के सियासी हथियार में कोई दिलचस्पी नहीं है. तमिलनाडु में विजय प्रशासन की सबसे युवा मंत्री एस कीर्तना इसी पीढ़ी की प्रतिनिधि हैं. पटाखा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध शिवकाशी से विधायक कीर्तना की उम्र तीस साल भी नहीं है. वह बदले दौर की नेता हैं, जिन्हें भाषा नेतृत्व का औजार नहीं, संचार का साधन नजर आती है. नेतृत्व की एक रवायत है. वह लीक पर चलने में ज्यादा विश्वास करती है. ऐसे में कीर्तना का हिंदी बोलना एक तरह से लीक को तोड़ना है. अगर लीक तोड़ने के लिए उनकी ट्रोलिंग नहीं होती, तो हैरत होती. हिंदी के लिए उन्हें खूब ट्रोल किया गया. तमिल नेतृत्व में सी राजगोपालाचारी के बाद कीर्तना संभवत: दूसरी राजनेता हैं, जो न सिर्फ धाराप्रवाह हिंदी बोलती हैं, बल्कि हिंदी के समर्थन में तर्क भी देती हैं. विजय की नेतृत्वक सलाहकार के रूप में कार्य कर चुकीं कीर्तना जानती हैं कि हिंदी के बिना अपनी बात दूर-दूर तक नहीं पहुंचाई जा सकती. कीर्तना हिंदी को ‘राष्ट्रीय जुड़ाव’ का माध्यम मानती हैं और कहती हैं, कि तमिल सीमाओं से बाहर पार्टी और विजय के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हिंदी जरूरी है. तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन में शामिल होकर हिंदी से दूर रही पीढ़ी अब बुजुर्ग हो गयी है. उसमें कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें हिंदी न सीखने का मलाल है. धीरे-धीरे ही सही, तमिलनाडु की नयी पीढ़ी हिंदी के प्रति सहज हो रही है. खुद कीर्तना की पार्टी तमिल गौरव को बनाये रखते हुए राष्ट्रीय पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है. कीर्तना की यह सोच तमिलनाडु की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है, जो हिंदी के जरिये गैर तमिल क्षेत्रों के लोगों से अपने विचार साझा करना चाहती है. अब तक भाषा का मुद्दा तमिलनाडु में तमिल अस्मिता और गौरव से जुड़ा रहा है. इस वजह से राष्ट्रीय मुद्दों पर तमिल नेतृत्व की सोच से देश वंचित रह जाता है. कीर्तना की सोच इसी सोच को चुनौती है. चूंकि वह परिचित और परीक्षित नेतृत्वक लीक से अलग है, इसलिए इसका विरोध स्वाभाविक है. लेकिन यह तमिल नेतृत्व की नयी पीढ़ी की बदलती सोच का भी प्रतीक है. भाषा के मुद्दे पर बदलाव रातोंरात नहीं आता, वह धीरे-धीरे आता है. कीर्तना की सोच इसी धीमी बदलाव का जरिया है. भाषाओं के जरिये देश के दिलों को जोड़ने वालों को इसका स्वागत करना ही चाहिए. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post तमिल सत्ता नेतृत्व में हिंदी के पक्ष में उठी आवाज, पढ़ें उमेश चतुर्वेदी का आलेख appeared first on Naya Vichar.

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18 मई की टॉप 20 खबरें: केरलम में आज शपथ ग्रहण, IPL 2026 की प्लेऑफ में कोहली की टीम

1. केरलम कैबिनेट में दिखेगा कांग्रेस का दबदबा: शपथ ग्रहण से पहले मंत्रियों की लिस्ट फाइनल VD Satheesan Oath: वीडी सतीशन सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं. नई प्रशासन की पारी शुरू होने से पहले ही नामित मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्रियों की पूरी सूची तैयार कर ली. उन्होंने सूची राज्यपाल को भी सौंप दिया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 2. दुनिया में गूंजा हिंदुस्तान का डंका! स्वीडन ने पीएम मोदी को दिया अपना सर्वोच्च सम्मान PM Modi Sweden Honour: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है. पीएम मोदी दो दिवसीय दौरे पर रविवार को स्वीडन पहुंचे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 3. बंटवारा नहीं होने पर भी जारी रहेगा सर्वे, एक्शन मोड में प्रशासन, 2027 तक काम पूरा करने का लक्ष्य Bihar Land Survey: बिहार प्रशासन ने दिसंबर 2027 तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है. पारिवारिक बंटवारा नहीं होने पर भी प्रक्रिया नहीं रुकेगी. अतिरिक्त कर्मचारी लगाए जाएंगे, AI से प्रशासनी जमीन चिन्हित होगी और जमीन के डॉक्यूमेंट अब सिर्फ ऑनलाइन मिलेंगे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 4. Arrah News: 20 मई को देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे दवा दुकानदार,आरा में भी असर रहेगी आरा: 20 मई को देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे दवा दुकानदार, ई-फार्मेसी और प्रीडेटरी प्राइसिंग का विरोध, जानिए पूरी समाचार. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 5. कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में हंगामा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प Bengal News: कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में कोलकाता पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद पत्थरबाजी की घटना घटी. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 6. नंदीग्राम: घर में बैठने से नहीं होगा, लोगों के बीच जाना होगा, भाजपा नेताओं को शुभेंदु का निर्देश Suvendu Adhikari : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह विधायक नहीं रहने पर भी नंदीग्राम के लोगों की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 7. तृणमूल शासित बोर्ड में 2000 करोड़ का घोटाला, तीन हजार से अधिक हुए अवैध निर्माण का दावा Bengal News: व्हिसल ब्लोअर्स नामक एनजीओ ने दावा किया है कि म्युनिसिपल एक्ट को ताख पर रखकर अवैध निर्माण को वैध किया गया. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 8. महाराष्ट्र में ‘आदिवासी धर्मकोड’ की मांग को लेकर आदिवासियों ने भरी हुंकार, अब दिल्ली में होगा अगला महासंग्राम Adivasi Dharam Code: महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी धर्म महासम्मेलन में झारखंड सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में 2027 की जनगणना में अलग आदिवासी धर्मकोड लागू करने, डिलिस्टिंग का विरोध करने और नई दिल्ली में अगला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की रणनीति तैयार की गई. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 9. Latehar: हक के लिए अफसरों से आर-पार की लड़ाई लड़ेगा वन श्रमिक यूनियन, 19 मई से आंदोलन तेज Latehar: लातेहार में वन श्रमिक यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर 19 मई से आंदोलन तेज करने की घोषणा की है. यूनियन ने अधिकारियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 10. चाईबासा प्रशासन के कार्यशैली पर भड़के पूर्व CM अर्जुन मुंडा, कहा- यह प्रशासनिक अकड़ है या शिष्टाचार की कमी? Arjun Munda: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने चाईबासा जिला प्रशासन पर प्रोटोकॉल और शिष्टाचार की अनदेखी का आरोप लगाया है. उन्होंने फेसबुक पोस्ट लिखकर इसे प्रशासनिक अकड़ और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उदासीनता बताया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 11. ड्रोन हमले से दहला UAE, बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर निशाना, लगी आग UAE Drone Attack: संयुक्त अरब अमिरात के अबू धाबी के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र परिसर के बाहर ड्रोन से हमला हुआ है. हमले के कारण एक विद्युत जनरेटर में आग लग गई. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 12. पंजाब किंग्स की लगातार छठी हार, प्लेऑफ में क्वालीफाई करने वाली पहली टीम बनी RCB रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को 23 रनों से हराया. इस जीत के साथ आईपीएल 2026 के प्लेऑफ में क्वालीफाई करने वाली पहली टीम बनी है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 13. दिल्ली ने राजस्थान को 5 विकेट से हराया, प्लेऑफ की रेस में RR को हुआ नुकसान दिल्ली कैपिटल्स ने राजस्थान रॉयल्स को 5 विकेट से हराया. इसके साथ दिल्ली की टीम प्लेऑफ की रेस में बनी हुई है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 14. कोर्टरूम से UPSC तक, भागलपुर की श्रेया ने हासिल की 357वीं रैंक Shreya Jha Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिने जाने वाले UPSC Civil Services Exam 2025 में इस बार 27 लॉ ग्रेजुएट्स ने सफलता हासिल की है. बिहार के भागलपुर की रहने वाली श्रेया झा ने ऑल इंडिया रैंक 357 लाकर देश की सबसे कठिन परीक्षा को क्रैक किया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 15. कोविड के बाद पहली बार इतनी बड़ी गिरावट, CBSE 12वीं का पास प्रतिशत घटा CBSE Board 12th Result 2026: पिछले साल यानी 2025 में कुल 88.39 प्रतिशत छात्र परीक्षा में पास हुए थे, लेकिन इस बार पास प्रतिशत घटकर 85.20 प्रतिशत रह गया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 16. OnePlus ने अचानक रोका OxygenOS अपडेट, फोन में आ रही थीं ये बड़ी दिक्कतें OnePlus ने OxygenOS 16 अपडेट का रोलआउट अचानक रोक दिया है. कई यूजर्स ने फोन रीस्टार्ट और बूट फेल होने की शिकायत की थी. जानिए कंपनी ने क्या कहा और अभी अपडेट करना कितना सुरक्षित है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 17. RX100 से लेकर Chetak तक, इन 7 टू-व्हीलर्स का सड़कों पर था राज, आज भी नाम सुनते ही ताजा हो जाती हैं यादें RX100, CBZ, Shogun और Pulsar 220F जैसी बाइकें कभी हिंदुस्तानीय सड़कों की शान थीं. जानिए आखिर क्यों बंद हो गईं ये आइकॉनिक बाइकें और आज भी क्यों बना हुआ है इनका जबरदस्त क्रेज. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 18. सोने से हटेगा पैसा, तो कहां बरसेगी ‘लक्ष्मी’? पीएम मोदी की अपील के बाद रियल एस्टेट और शेयर बाजार में तेजी के संकेत Real Estate : पीएम मोदी की अपील पर अगर देश ने एक साल सोना नहीं खरीदा, तो वह पैसा कहां लगेगा ? एक्सपर्ट्स का दावा, रियल एस्टेट और शेयर बाजार में आएगा निवेश का सैलाब, घर खरीदारों की चमकेगी किस्मत. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 19. तुषार कपूर ने पूरी की Golmaal 5 की

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झारखंड में ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मिलेगी रफ्तार, ग्रामीण कार्य विभाग ने जारी की राशि

Jharkhand Road Construction, रांची (मनोज लाल की रिपोर्ट): झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे और सड़कों के जाल को मजबूत करने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है. विभाग ने राज्य में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्य में जुटे ठेकेदारों के लंबे समय से लंबित बकाए के भुगतान के लिए राशि का आवंटन कर दिया है. मापी पुस्तिका (Measurement Book) के आधार पर राज्य के सभी प्रमंडलों (Divisions) को फंड जारी कर दिया गया है. इस आवंटन से पिछले छह महीनों से फंड की कमी के कारण सुस्त पड़ी या बंद हो चुकी ग्रामीण सड़क योजनाओं को दोबारा गति मिल सकेगी. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क और सुदृढ़ीकरण योजना के तहत होगा भुगतान जानकारी के अनुसार, झारखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना’ और ‘मुख्यमंत्री सड़क सुदृढ़ीकरण योजना’ के तहत बड़े पैमाने पर सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य कराया गया था. इन योजनाओं को पूरा करने वाले ठेकेदारों की एक बड़ी राशि लंबे समय से विभाग के पास फंसी हुई थी. हालांकि, बीच-बीच में अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) के माध्यम से आंशिक भुगतान जरूर किया गया था, लेकिन मुख्य बकाया राशि का एक बड़ा हिस्सा अटक जाने के कारण ठेकेदारों के सामने कार्यशील पूंजी (Working Capital) का संकट खड़ा हो गया था. Also Read: पाकुड़ में दरिंदगी: 13 साल की मासूम से दुष्कर्म, पुलिस ने 4 घंटे के अंदर 7 आरोपियों को दबोचा फंड की कमी से कई जगह ठप हो गया था काम बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण राज्य के कई हिस्सों में ठेकेदारों ने आहत होकर काम पूरी तरह से बंद कर दिया था, जिससे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सड़कों के निर्माण की रफ्तार बेहद धीमी हो गई थी. इस गतिरोध को दूर करने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग भी नए वित्तीय बजट का इंतजार कर रहा था. अब बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान होने और फंड स्वीकृत होने के बाद विभाग ने बिना वक्त गंवाए इसे प्रमंडलों को हस्तांतरित कर दिया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन ठेकेदारों ने धरातल पर जितना काम (भौतिक प्रगति) किया है, मापी पुस्तिका के मूल्यांकन के अनुसार उन्हें उतनी राशि का भुगतान पारदर्शी तरीके से कर दिया जाएगा. एक सप्ताह के भीतर खाते में आएगी राशि विभागीय इंजीनियरों और तकनीकी पदाधिकारियों ने बताया कि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और आगामी एक सप्ताह के भीतर सभी संबंधित ठेकेदारों के वैध बकाए का शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित कर दिया जाएगा. इस बजटीय राहत से न केवल प्रमंडलों के स्तर पर प्रशासनिक और वित्तीय गतिरोध दूर होगा, बल्कि ठप पड़ी योजनाओं की प्रगति में भी तेजी लाई जा सकेगी. अधिकारियों ने माना कि पिछले लगभग छह महीनों से वित्तीय संसाधनों के अभाव में ग्रामीण संपर्क (Rural Connectivity) से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं बुरी तरह प्रभावित थीं, जो अब दोबारा पटरी पर लौट आएंगी. Also Read: नशे के नेटवर्क पर देवघर पुलिस का बड़ा प्रहार, 20 लाख की ब्राउन शुगर के साथ 4 गिरफ्तार The post झारखंड में ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मिलेगी रफ्तार, ग्रामीण कार्य विभाग ने जारी की राशि appeared first on Naya Vichar.

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