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June 7, 2026

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‘इंडिया’ गठबंधन की कल अहम बैठक, मोदी सरकार के खिलाफ रणनीति बनाएंगे 23 दल

INDIA Bloc Meeting: हाल के विधानसभा चुनावों के बाद बदले नेतृत्वक माहौल के बीच विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली में अहम बैठक करने जा रहा है. बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना है. इसके अलावा बैठक में ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेदों को दूर करना और आगामी चुनावों के लिए एकजुटता का संदेश देना भी शामिल है. बोले जयराम रमेश- 23 दलों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 23 नेतृत्वक दलों ने नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होने वाली बैठक में भाग लेने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि विचारों और क्षेत्रीय हितों में विविधता के बावजूद ‘इंडिया’ गठबंधन पूरी तरह एकजुट है. हालांकि कुछ दलों ने अपने-अपने कारणों से इस बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. लेकिन, जयराम रमेश ने कहा है कि उनका गठबंधन को पूरा समर्थन रहेगा. 23 political parties have confirmed participation in the INDIA janbandhan meeting at Constitution Club, New Delhi on Monday June 8, 2026, at 12 noon. There are some parties who have expressed their inability to attend this particular meeting for their own reasons – even though… — Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 7, 2026 कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव तथा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है. द्रमुक और आम आदमी पार्टी रह सकती हैं दूर न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और आम आदमी पार्टी (AAP) इस बैठक में शामिल नहीं होंगी. आम आदमी पार्टी पहले ही सार्वजनिक रूप से इंडिया गठबंधन से दूरी बना चुकी है. वहीं द्रमुक ने तमिलनाडु में कांग्रेस और उसके बीच बदले नेतृत्वक समीकरणों के बाद बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है. बैठक में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) को ‘इंडिया’गठबंधन में शामिल करने की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है. 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी पर भी नजर बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए रणनीति पर विचार-विमर्श किया जा सकता है. विपक्षी दल राष्ट्रीय मुद्दों पर बीजेपी और केंद्र प्रशासन का मुकाबला करने के लिए साझा एजेंडा तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस भी बैठक में अपनी बात रख सकती है. पार्टी अपने नेताओं पर कथित हमलों का मुद्दा उठाकर गठबंधन के अन्य दलों का समर्थन मांग सकती है. तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि बैठक साझा उद्देश्य और साफ इरादों के साथ आयोजित की जा रही है और गठबंधन पूरी तरह एकजुट है. कांग्रेस और वाम दलों के बीच मतभेद पर भी हो सकती है चर्चा हाल के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस और वाम दलों के बीच पैदा हुए मतभेद पर भी बैठक में चर्चा हो सकती है. सीपीएम कांग्रेस की ओर से लगाए गए उन आरोपों पर सफाई मांग सकती है, जिनमें केरल विधानसभा चुनाव के दौरान वाम दलों और बीजेपी भाजपा के बीच कथित नेतृत्वक समझ का दावा किया गया था. सूत्रों के मुताबिक, माकपा (CPM) की ओर से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास बैठक में यह मुद्दा उठा सकते हैं. माकपा महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कहा है कि ऐसे आरोप विपक्षी गठबंधन की सहयोगात्मक भावना के खिलाफ हैं. पार्टी चाहती है कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले पर अपना रुख साफ करे. बीजेपी ने उठाये गठबंधन की एकता पर सवाल इधर, इंडिया गठबंधन की बैठक से पहले बीजेपी ने विपक्षी एकता पर सवाल उठाए हैं. पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि गठबंधन के भीतर लगातार आरोप-प्रत्यारोप और मतभेद सामने आ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के पास न तो कोई स्पष्ट दृष्टि है और न ही साझा मिशन, बल्कि यह केवल नेतृत्वक महत्वाकांक्षाओं का मंच बनकर रह गया है. लोकसभा चुनाव के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन की पहली बड़ी बैठक इंडिया गठबंधन की पिछली आधिकारिक बैठक लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले 1 जून 2024 को नई दिल्ली में हुई थी. इसके बाद यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें विपक्षी दल एक बार फिर साझा रणनीति पर चर्चा के लिए एक मंच पर जुट रहे हैं. Also Read: अशोक गहलोत ने 2022 के सियासी संकट पर तोड़ी चुप्पी, कहा- आलाकमान के खिलाफ नहीं था विद्रोह The post ‘इंडिया’ गठबंधन की कल अहम बैठक, मोदी प्रशासन के खिलाफ रणनीति बनाएंगे 23 दल appeared first on Naya Vichar.

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बंद कमरे का ‘क्लाइमेक्स’: JMM और कांग्रेस के बीच कैसे सुलझा विवाद? पढ़ें पूरी इनसाइ़ड स्टोरी

Jharkhand Rajya Sabha Election, रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही सियासी पारा हाई हो चुका है. नेतृत्वक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या झामुमो-कांग्रेस के बीच सब ठीक है या नहीं. क्योंकि, चुनाव के ऐलान के बाद से ही दोनों दलों के बीच खींचतान चल रहा था. हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है. दोनों दलों में हुई डील के तहत झामुमो और कांग्रेस ने आपस में एक-एक सीट बांट ली है. झामुमो ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कम्युनिकेशन इंचार्ज प्रणव झा को मैदान में उतारा है. हालांकि यह समझौता इतना आसान नहीं था, यह समझौता कराने में बड़ी भूमिका छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने निभाई है. राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा इन्हें विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था. दोनों कद्दावर नेताओं ने रविवार को भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. सीएम आवास में इन तीनों नेताओं के बीच लगभग एक घंटे तक बेहद गोपनीय बातचीत हुई. इसके बाद इंडिया गठबंधन की हुई एक और बैठक में मामला पूरी तरह सुलझ गया. हालांकि बंद कमरे में क्या गोपनीय बात हुई यह बाहर नहीं आ सकी. बैठक के बाद कांग्रेस के नेताओं ने नहीं किया कोई खुलासा शनिवार की शाम को भी भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और ठीक अगले ही दिन रविवार को दोबारा एक घंटे की लंबी बैठक होना इस बात का साफ संकेत है कि गठबंधन के भीतर पर्दे के पीछे जरूर कोई बड़ी रणनीति बनी है. हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद बाहर आए नेताओं ने इस बातचीत का कोई भी खुलासा नहीं किया. नेतृत्वक गलियारों में यह सवाल तैरता रहा है कि आखिर इस एक घंटे की सीक्रेट मीटिंग क्या बातचीत हुई? Also Read: Ranchi: कांके डैम से गाद निकालने के लिए उतारा गया पोकलेन और वीड हार्वेस्टर मशीन JMM का बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ एक तरफ जहां इस सीक्रेट मीटिंग पर सस्पेंस बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्व विधायक और राज्य के बड़े दलित चेहरे बैजनाथ राम को अपना उम्मीदवार घोषित कर एक बड़ा दांव चल दिया है. नेतृत्वक जानकार इसे पलामू प्रमंडल में पार्टी की पैठ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं. क्योंकि, आजतक किसी भी नेतृत्वक दल ने पलामू जोन से किसी भी दलित चेहरे को राज्यसभा में जगह नहीं दी है. जहां तक जीतने के चांसेस की बात है तो इंडिया गठबंधन के विधायक अगर एकजुट रहे तो जीत लगभग तय है. क्योंकि गठबंधन के 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी खुद सोशल मीडिया पर इस फैसले को ‘सामाजिक न्याय’ की आवाज को मजबूत करने वाला कदम बताया है. JMM के इस अचानक लिए गए फैसले और बैजनाथ राम की उम्मीदवारी के बाद कांग्रेस की इस सक्रियता को नेतृत्व के जानकार बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं. आज नामांकन का आखिरी दिन, थमने वाला है इंतजार झारखंड की दो रिक्त राज्यसभा सीटों (दीपक प्रकाश और दिवंगत शिबू सोरेन का कार्यकाल) के लिए सोमवार, 8 जून को नामांकन का अंतिम दिन है. दिलचस्प पहलू यह है कि चुनाव के लिए कुल 6 प्रत्याशियों ने परचा खरीदा है, लेकिन रविवार शाम तक किसी ने भी अपना नामांकन दाखिल नहीं किया था. सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन सभी उम्मीदवार अपने परचे दाखिल करेंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि इस सियासी बिसात पर कौन-कौन से चेहरे आमने-सामने हैं. इसके बाद 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे. Also Read: Lohardaga: लेवी को लेकर मिली धमकी के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच NH 39 पर काम ने पकड़ी रफ्तार The post बंद कमरे का ‘क्लाइमेक्स’: JMM और कांग्रेस के बीच कैसे सुलझा विवाद? पढ़ें पूरी इनसाइ़ड स्टोरी appeared first on Naya Vichar.

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बीरभूम के बाहुबली अनुब्रत मंडल पर कसा शिकंजा, 2021 के चुनावी दंगे और 30 लाख की ईंट लूट मामले में FIR दर्ज

खास बातें अनुब्रत के 12 सहयोगियों पर भी प्राथमिकी दर्ज 30 लाख की ईंटें और कीमती सामान लूटने का आरोप विरोध करने पर मिली जान से मारने की धमकी 2021 की खूनी चुनावी हिंसा की यादें हुईं ताजा बंजर हुई बीरभूम के ‘बाघ’ की सियासी जमीन Anubrata Mondal FIR Birbhum: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दिग्गज और बाहुबली नेताओं के पुराने कारनामों की फाइलें एक-एक कर खुलने लगी हैं. इसी कड़ी में बीरभूम जिले के बाहुबली टीएमसी नेता अनुब्रत मंडल उर्फ केष्टो की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. अनुब्रत के 12 सहयोगियों पर भी प्राथमिकी दर्ज वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भड़की भीषण चुनावी हिंसा (Post-Poll Violence) और एक व्यवसायी से करीब 30 लाख रुपए की कीमती ईंटें व निर्माण सामग्री लूटने के संगीन आरोपों में अनुब्रत मंडल और उनके 12 अन्य करीबियों के खिलाफ विस्तृत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी है. 30 लाख की ईंटें और कीमती सामान लूटने का आरोप पूरा मामला बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजों के तुरंत बाद भड़की हिंसा से जुड़ा है. आरोप है कि चुनाव के बाद अनुब्रत मंडल के शह पर टीएमसी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के एक हिंसक गुट ने बीरभूम इलाके में बड़े पैमाने पर तांडव मचाया था. अनुब्रत के इशारे पर उनके 12 नामजद गुर्गों ने स्थानीय व्यवसायी के व्यापारिक प्रतिष्ठान पर हमला बोल दिया. वहां रखे 30 लाख रुपए की ईंटें, भारी मशीनें और अन्य कीमती निर्माण सामग्रियां लूटकर ले गये. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें विरोध करने पर मिली जान से मारने की धमकी पीड़ित व्यवसायी और उसके कर्मचारियों ने जब इस खुली लूट का विरोध करने की कोशिश की, तो उन्हें हथियारों के बल पर डराया-धमकाया गया. इतना ही नहीं, उन्हें इलाका छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया. इसे भी पढ़ें : तृणमूल नेता अनुब्रत मंडल ने थाना प्रभारी के साथ गाली-गलौज के बाद पार्टी के निर्देश पर मांगी माफी Anubrata Mondal FIR Birbhum: 2021 की खूनी चुनावी हिंसा की यादें हुईं ताजा इस मुकदमे ने 2021 में की भीषण हिंसा के जख्मों को हरा कर दिया है. नयी प्राथमिकी में अनुब्रत मंडल को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया गया है. उनके साथ बीरभूम जिले के 12 अन्य रसूखदार टीएमसी नेताओं और स्थानीय सिंडिकेट संचालकों को भी आरोपी बनाया गया है. बंजर हुई बीरभूम के ‘बाघ’ की सियासी जमीन एक समय था, जब बीरभूम जिले में अनुब्रत मंडल की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था. उन्हें जिले का ‘बेताज बादशाह’ या ‘बाघ’ कहा जाता था. गौ तस्करी मामले में लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जब वे बाहर आये, तो उनकी नेतृत्वक ताकत पहले ही काफी कमजोर हो चुकी थी. अब इस नयी प्राथमिकी ने उनकी बची-कुची साख भी खत्म कर दी है. इसे भी पढ़ें ऑक्सीजन लेकर चलने वाले अणुव्रत मंडल, अंतिम फेज की वोटिंग से पहले सुर्खियों में TMC के ‘दबंग’ नेता तिहाड़ से घर लौटने पर बोले अनुब्रत मंडल- मैं हमेशा दीदी के साथ हूं ईडी ने दाखिल की चार्जशीट, कहा- अनुब्रत मंडल और उनका पूरा परिवार गौ तस्करी से ऐसे करता था काली कमाई ईडी की अर्जी के बाद अदालत ने अनुब्रत मंडल को भेजा तिहाड़ जेल, अगली सुनवाई 3 अप्रैल को The post बीरभूम के बाहुबली अनुब्रत मंडल पर कसा शिकंजा, 2021 के चुनावी दंगे और 30 लाख की ईंट लूट मामले में FIR दर्ज appeared first on Naya Vichar.

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घरेलू गैस सिलेंडर के फिर बढ़े दाम, केंद्र पर बरसा विपक्ष, कहा- सरकार को चुकानी होगी ‘कीमत’

LPG Price Hike: देशभर में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है. केंद्र प्रशासन ने 7 जून से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. इसके बाद दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है. यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी की कीमतों में इजाफा किया गया है. इससे पहले मार्च 2026 में प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इस तरह चार महीनों में घरेलू गैस सिलेंडर 89 रुपये महंगा हो चुका है. कांग्रेस का मोदी प्रशासन पर हमला घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बढ़ती गैस कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मोदी प्रशासन ने पिछले चार महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 89 रुपये बढ़ाए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट संकट के दौरान कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया था, उसका क्या हुआ? अधीर रंजन चौधरी बोले- लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र प्रशासन की आलोचना की. उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी परिस्थितियों के कारण ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, लेकिन प्रशासन को यह भी सोचना चाहिए कि आम लोग बढ़ती महंगाई का सामना कैसे करेंगे. अधीर रंजन चौधरी ने कहा- देश के आम लोगों की आय पहले से ही दबाव में है और ऐसे समय में उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है. #WATCH | Delhi | On the increase in domestic cylinder prices, Congress leader Adhir Ranjan Chowdhury says, “We all agree that there are adverse conditions in the Gulf countries, where the war between the US and Iran continues, and considering the Strait of Hormuz along with all… pic.twitter.com/IOMtB3hOrY — ANI (@ANI) June 7, 2026 शरद पवार ने भी साधा निशाना राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र प्रशासन को घेरा है. उन्होंने कहा कि जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. पवार ने कहा कि यदि प्रशासन इसे महंगाई नियंत्रण मानती है तो इसका अर्थ है कि जनता को किस्तों में झटके दिए जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि महंगाई का नेतृत्वक असर भी देखने को मिलेगा और प्रशासन को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. विजय वडेट्टीवार ने उठाए सवाल वहीं महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने भी एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर बीजेपी की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा महंगाई के मुद्दे पर लगातार आंदोलन करती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी पर उसकी प्रतिक्रिया बदल गई है. उन्होंने कहा कि हाल के सालों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है. Also Read: एलपीजी की कीमत में वृद्धि पर भड़के खरगे, बीजेपी नेताओं से पूछा-अब क्यों सिलेंडर लेकर सड़क पर नहीं बैठ रहे? The post घरेलू गैस सिलेंडर के फिर बढ़े दाम, केंद्र पर बरसा विपक्ष, कहा- प्रशासन को चुकानी होगी ‘कीमत’ appeared first on Naya Vichar.

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NDA को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने खत्म किया सस्पेंस, बोले- थे, हैं और आगे भी रहेंगे साथ

Upendra Kushwaha: रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व किसी एक पद को लेकर समाप्त हो जाये, दुनिया की कोई ताकत यह काम नहीं कर सकती है. हमलोग गठबंधन धर्म निभाने वाले लोग हैं. गठबंधन की बड़ी पार्टियों का सम्मान करने वाले हैं. हमलोग एनडीए में हैं और एनडीए में रहेंगे. परिवार में भी कभी कंफ्यूजन होता है. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्नेह मेरे प्रति कम नहीं हुआ है. इस कारण इससे परेशान नहीं होना है. कभी-कभी लगेगा एक कदम आगे और दो कदम पीछे, ये स्वभाविक प्रक्रिया है. पूरी मजबूती के साथ हमलोग एनडीए के साथ थे, हैं और रहेंगे. सत्ता में हिस्सेदार हैं और रहेंगे. वे रविवार को पटना के रवींद्र भवन में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. जदयू और रालोमो की विचारधारा एक जैसी कुशवाहा ने कहा कि जदयू और रालोमो की विचारधारा एक जैसी है. हम भाजपा के साथ गठबंधन में हैं, लेकिन, विचारधारा मेल नहीं खाती है. जदयू की विचारधारा भी भाजपा से मेल नहीं खाती. अलग-अलग विचारधारा के लोग हैं, इस कारण गठबंधन में हैं. जो लोग जो लोग शुरुआती दौर में नीतीश कुमार के साथ संगठित हुए, कोई विपरीत परिस्थिति भी आ जाये तो, शत प्रतिशत लोग न तो राजद में जायेंगे और न भाजपा में जायेंगे. किसी न किसी रूप में जहां हैं, वहीं रहना चाहिए. निशांत को डिप्टी सीएम बनाना चाहिए था कुशवाहा ने कहा कि जदयू में परेशानी दिखती है, तो मुझे दर्द होता है. समस्तीपुर में हमने कहा था कि निशांत को पार्टी में लाना चाहिए था. जदयू के बड़े नेताओं को ये बात अटपटी लगी थी. निशांत को नेतृत्व में और पहले लाना चाहिए था. जब नेतृत्व में लाया गया तो मंत्री की जगह उपमुख्यमंत्री बनाना चाहिए था. नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी निशांत ही हो सकते हैं. डिप्टी सीएम बनाने पर वह स्वभाविक रूप से आगे बढ़ जाते. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें सत्ता में हिस्सेदार थे और रहेंगे कुशवाहा ने कहा कि मुझ पर आरोप लगाया जाता है कि उपेंद्र कुशवाहा पुत्र मोह में चले गये. उपेंद्र कुशवाहा पार्टी नहीं परिवार चलाता है. पार्टी में नेतृत्व रूप से जितने प्यारे दीपक प्रकाश हैं, उतने ही पार्टी के कार्यकर्ता प्यारे हैं. कहीं से मन में कोई कंफ्यूजन नहीं रखना है. हमलोग सत्ता में हिस्सेदार हैं और सत्ता में हिस्सेदार रहेंगे. कहा कि 2014 के थोड़ा पहले बिहार की धरती पर सबसे पहले मैंने ही कहा था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के लिए सबसे फिट आदमी हैं. तब भाजपा के लोगों को भी यह बात नहीं पच पा रही थी. इसे भी पढ़ें: बिहार में BHU की ब्रांच खोलने की तैयारी, प्रशासन देगी जमीन, TRE 4 आया बड़ा अपडेट बिहार में 14 जून तक खराब रहेगा मौसम का हाल, 60 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बारिश और वज्रपात का भी खतरा The post NDA को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने खत्म किया सस्पेंस, बोले- थे, हैं और आगे भी रहेंगे साथ appeared first on Naya Vichar.

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अशोक गहलोत ने 2022 के सियासी संकट पर तोड़ी चुप्पी, कहा- आलाकमान के खिलाफ नहीं था विद्रोह

Ashok Gahlot: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 25 सितंबर 2022 को कांग्रेस की राज्य इकाई में हुए नेतृत्वक घटनाक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उस समय जो घटनाएं हुई थीं, उन्हें कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ विद्रोह के रूप में पेश किया गया, जबकि वास्तविकता कुछ और थी. गहलोत के अनुसार, यह विरोध कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नहीं बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर विधायकों की असहमति का परिणाम था. आलाकमान के खिलाफ नहीं था विद्रोह- अशोक गहलोत गहलोत ने साफ किया कि 25 सितंबर 2022 की घटना को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने कहा- यह घटना उस व्यक्ति के खिलाफ थी जिसका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल था. यह आलाकमान के खिलाफ किसी प्रकार का विद्रोह नहीं था. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस विधायकों ने उस समय पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई और प्रशासन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कांग्रेस अध्यक्ष बनने की दौड़ में थे गहलोत पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उनका नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल था. हालांकि परिस्थितियां ऐसी बनीं कि पूरे घटनाक्रम ने विवाद का रूप ले लिया और उनकी छवि को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा कि बैठक में प्रस्ताव पारित नहीं हो पाने को लेकर उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के सामने खेद भी जताया था. #WATCH | Jaipur, Rajasthan: Congress leader Ashok Gehlot says, “…If Sonia Gandhi and the Congress were making me the Congress President, would I have refused? This was a conspiracy. The observers arrived suddenly…” pic.twitter.com/ofKjEzUXjz — ANI (@ANI) June 7, 2026 सचिन पायलट को सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए- अशोक गहलोत अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर कहा कि उन्हें वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए. उन्होंने कहा- सच्चाई का कोई विकल्प नहीं होता. सचिन पायलट को समझना चाहिए कि उस समय क्या परिस्थितियां थीं. उन्होंने कहा कि नेतृत्व में हर व्यक्ति से गलतियां हो सकती हैं और यदि कोई गलती हुई है तो उसे स्वीकार करने में संकोच नहीं होना चाहिए. 25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में: आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं… pic.twitter.com/06nauxjKLx — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 7, 2026 2020 की बगावत का भी किया जिक्र गहलोत ने 2020 में हुए नेतृत्वक संकट की ओर भी इशारा किया, जब सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में ठहरे थे. उस समय राज्य प्रशासन पर संकट के बादल मंडरा रहे थे और पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई थी. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ विद्रोह की धारणा कुछ लोगों द्वारा बनाई गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति अलग थी. बोले अशोक गहलोत- हम उनके दुश्मन नहीं हैं पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका और सचिन पायलट का संबंध पुराना है. उन्होंने कहा- मैं उनके परिवार को बचपन से जानता हूं. हम उनके दुश्मन नहीं हैं. उन्होंने नेतृत्व में लंबा समय बिताया है और अब उन्हें अनुभव भी हो चुका है. गहलोत ने यह भी कहा कि उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) प्रशासन के दौरान सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनने में सहयोग किया था, लेकिन पायलट ने कभी इसका जिक्र नहीं किया. कांग्रेस को एकजुट रहने की जरूरत गहलोत ने मौजूदा नेतृत्वक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस और देश दोनों चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. ऐसे समय में पार्टी नेताओं को मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि चाहे सचिन पायलट हों, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली या अन्य नेता, सभी को संगठन को मजबूत करने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए. राहुल गांधी ने की थी राजस्थान कांग्रेस की सराहना गहलोत ने बताया कि हाल ही में पुष्कर में आयोजित प्रशिक्षण शिविर के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राजस्थान कांग्रेस इकाई के कामकाज की सराहना की थी. उन्होंने विशेष रूप से प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व की प्रशंसा की थी. अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने नेतृत्व में बहुत कुछ हासिल किया है और अब वह किसी पद की दौड़ में नहीं हैं. उन्होंने कहा- तीन बार मुख्यमंत्री बनना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. भविष्य में कौन मुख्यमंत्री बनेगा, यह समय तय करेगा. फिलहाल मेरी प्राथमिकता पार्टी को मजबूत करना है. The post अशोक गहलोत ने 2022 के सियासी संकट पर तोड़ी चुप्पी, कहा- आलाकमान के खिलाफ नहीं था विद्रोह appeared first on Naya Vichar.

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मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन को डेट करने पर बोले Vikram Bhatt, कहा- मेरे पास फूटी कौड़ी नहीं थी

बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर विक्रम भट्ट ने अपने पुराने दिनों के बारे में एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि उनके करियर की शुरुआत में एक ऐसा समय भी था, जब उनके पास बिल्कुल पैसे नहीं थे, यानी वह पूरी तरह कंगाल हो चुके थे. मजेदार बात यह है कि उस समय वह बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार्स के साथ काम कर रहे थे और उनका नाम बहुत बड़े लोगों के साथ जुड़ रहा था, फिर भी उनकी जेब खाली थी. सुष्मिता सेन को डेट करने पर क्या बोले विक्रम? सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक इंटरव्यू में विक्रम भट्ट ने अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड और पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन के बारे में बात की. दोनों की मुलाकात 1996 में फिल्म ‘दस्तक’ के दौरान हुई थी. विक्रम ने बताया, “मैं एक संघर्ष करने वाला डायरेक्टर था. मेरे पास तो जहर खाने के भी पैसे नहीं थे. मैं एक तरफ आमिर खान को डायरेक्ट कर रहा था और दूसरी तरफ मिस यूनिवर्स (सुष्मिता सेन) को डेट कर रहा था, लेकिन हकीकत में मेरे पास फूटी कौड़ी नहीं थी. मैं फकीरों जैसी जिंदगी जी रहा था.” उन्होंने यह भी याद किया कि एक बार तो उनके पास गाने की एक सीडी खरीदने तक के पैसे नहीं थे. अमीषा पटेल को भी किया था डेट सुष्मिता सेन से रिश्ता टूटने के बाद, विक्रम भट्ट का नाम बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल के साथ भी जुड़ा. विक्रम और अमीषा ने फिल्म ‘आप मुझे अच्छे लगने लगे’ में साथ काम किया था और इसके बाद साल 2002 से 2007 तक दोनों एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में रहे थे. विक्रम ने कहा कि भले ही उनके रिश्ते लंबे नहीं चले, लेकिन उनकी बनाई फिल्मों को लोग आज भी याद रखते हैं. कानूनी मुसीबत में फंसे थे विक्रम विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी सोनी हाल ही में एक बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गए थे. एक फिल्म प्रोजेक्ट में धोखाधड़ी के आरोप में पिछले साल दिसंबर में दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद जनवरी में राजस्थान हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत देने से मना कर दिया था. लेकिन फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया और फरवरी के महीने में दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया. यह भी पढ़ें: क्या रणवीर सिंह को ‘Shaktimaan’ के रोल के लिए रिजेक्ट करना था पब्लिसिटी स्टंट? को-स्टार ने तोड़ी चुप्पी The post मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन को डेट करने पर बोले Vikram Bhatt, कहा- मेरे पास फूटी कौड़ी नहीं थी appeared first on Naya Vichar.

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आपका स्मार्टफोन हर वक्त बता रहा है लोकेशन? 2 मिनट में बंद करें ऐप्स की सीक्रेट ट्रैकिंग, बढ़ेगी प्राइवेसी और बैटरी लाइफ

आज स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके साथ एक ऐसी समस्या भी जुड़ी है जिसके बारे में कई लोग जानते तक नहीं हैं. कई मोबाइल ऐप्स आपकी लोकेशन सिर्फ तब नहीं देखते जब आप उन्हें इस्तेमाल कर रहे होते हैं, बल्कि बैकग्राउंड में भी लगातार आपकी एक्टिविटीज पर नजर रख सकते हैं. इससे न सिर्फ आपकी निजी जानकारी कंपनियों तक पहुंचती है, बल्कि बैटरी और मोबाइल डेटा की खपत भी बढ़ सकती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर आप इस ट्रैकिंग को कुछ ही मिनटों में कंट्रोल कर सकते हैं. आखिर ऐप्स को आपकी लोकेशन की जरूरत क्यों पड़ती है? कुछ ऐप्स के लिए लोकेशन ऐक्सेस जरूरी होता है. उदाहरण के लिए मैप्स ऐप्स को रास्ता दिखाने, कैब बुकिंग ऐप्स को पिकअप लोकेशन जानने और मौसम संबंधी ऐप्स को स्थानीय जानकारी देने के लिए लोकेशन चाहिए होती है. हालांकि कई सोशल मीडिया, शॉपिंग और विज्ञापन आधारित ऐप्स भी लोकेशन डेटा इकट्ठा करते हैं. इसके जरिए कंपनियां आपकी यात्रा की आदतों, पसंदीदा जगहों और खरीदारी के व्यवहार का विश्लेषण कर सकती हैं. बाद में इसी जानकारी का इस्तेमाल टारगेटेड विज्ञापन दिखाने में किया जाता है. एंड्रॉयड फोन में ऐसे रोकें लोकेशन ट्रैकिंग अगर आप एंड्रॉयड स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो सबसे पहले सेटिंग्स में जाकर लोकेशन सेक्शन खोलें. यहां ऐप लोकेशन परमिशन का विकल्प मिलेगा, जहां आप देख सकते हैं कि कौन-कौन से ऐप्स आपकी लोकेशन ऐक्सेस कर रहे हैं. जिन ऐप्स को लगातार लोकेशन की जरूरत नहीं है, उनकी परमिशन “ऑनली वाइल यूजिंग द ऐप” पर सेट कर दें या पूरी तरह बंद कर दें. इसके अलावा प्राइवेसी डैशबोर्ड में जाकर यह भी देखा जा सकता है कि हाल के दिनों में किन ऐप्स ने आपकी लोकेशन ऐक्सेस की है. iPhone यूजर्स इन सेटिंग्स को जरूर चेक करें आईफोन यूजर्स को सेटिंग्स में जाकर प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी सेक्शन खोलना चाहिए. यहां लोकेशन सर्विसेज के अंदर सभी ऐप्स की सूची दिखाई देती है. अगर किसी ऐप के सामने “Always” सेट है तो उसे “While Using the App” या “Never” में बदला जा सकता है. इसके अलावा ऐपल एक और विकल्प देता है जिसे Precise Location कहा जाता है. इसे बंद करने पर ऐप्स को आपकी सटीक लोकेशन के बजाय सिर्फ अनुमानित क्षेत्र की जानकारी मिलती है. हर कुछ महीनों में करें परमिशन की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई ऐप इंस्टॉल करने या सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद लोकेशन परमिशन को रिव्यू जरूर करना चाहिए. अगर कोई टॉर्च ऐप, साधारण गेम या शॉपिंग ऐप बार-बार लोकेशन मांग रहा है तो यह सवाल उठाना जरूरी है कि उसे इसकी आवश्यकता क्यों है. कई बार यूजर्स जल्दबाजी में सभी परमिशन मंजूर कर देते हैं और बाद में भूल जाते हैं. यही वजह है कि समय-समय पर सेटिंग्स की जांच करना डिजिटल सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है. सिर्फ प्राइवेसी ही नहीं, बैटरी भी बचेगी लोकेशन ट्रैकिंग को सीमित करने का फायदा सिर्फ प्राइवेसी तक सीमित नहीं है. बैकग्राउंड में लगातार चलने वाली लोकेशन सर्विसेज बैटरी की खपत बढ़ाती हैं और कुछ मामलों में मोबाइल डेटा का उपयोग भी बढ़ा सकती हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपका स्मार्टफोन कम डेटा खर्च करे, बैटरी ज्यादा चले और आपकी निजी जानकारी पर आपका नियंत्रण बना रहे, तो आज ही लोकेशन सेटिंग्स की जांच करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है. यह भी पढ़ें: 99% स्मार्टफोन यूजर्स नहीं जानते फोन को रखने का सही तरीका, कहीं आप भी तो नहीं? The post आपका स्मार्टफोन हर वक्त बता रहा है लोकेशन? 2 मिनट में बंद करें ऐप्स की सीक्रेट ट्रैकिंग, बढ़ेगी प्राइवेसी और बैटरी लाइफ appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के सरकारी अफसरों को मिला ‘पिकनिक’ का सरकारी टास्क, हर 3 महीने में परिवार संग घूमना अनिवार्य

Bihar Government New Tourism Rules(कंचन कुमार): बिहार के प्रशासनिक महकमे से इस वक्त की एक बेहद अनोखी और बड़ी समाचार सामने आ रही है. राज्य की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक पटल पर चमकाने और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बिहार प्रशासन ने एक ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लिया है. प्रशासन के नए निर्देश के मुताबिक, अब सूबे के सभी प्रशासनी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार अपने गृह जिले को छोड़कर राज्य के किसी अन्य जिले के पर्यटन, ईको-पर्यटन या ग्रामीण पर्यटन स्थलों का दो दिन और दो रात का ‘सपरिवार’ (परिवार के साथ) भ्रमण करना अनिवार्य होगा. पर्यटन स्थलों पर जाकर सिर्फ घूमना होगा, काम की बात करने पर सख्त पाबंदी प्रशासन ने इस अनोखी पहल को लेकर गाइडलाइंस पूरी तरह स्पष्ट कर दी हैं ताकि अधिकारी इसे किसी प्रशासनिक दौरे में तब्दील न कर सकें. पर्यटन प्रवास के दौरान कोई भी बड़ा या छोटा अधिकारी किसी भी प्रकार की समीक्षा बैठक, औचक निरीक्षण या अन्य कोई विभागीय प्रशासनिक कार्य नहीं करेगा. अधिकारियों को अपने प्रवास के दौरान आस-पास के कम से कम तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा करना होगा. वहां घूमकर वे स्थानीय सुविधाओं, पर्यटन की संभावनाओं और वहां आने वाली मुख्य चुनौतियों को बारीकी से समझेंगे. प्रमंडलीय आयुक्त से लेकर एसपी तक सब निकलेंगे सपरिवार, लौटकर देनी होगी ‘फोटोग्राफ’ वाली रिपोर्ट इस महा-अभियान में प्रमंडल स्तर से लेकर जिला स्तर तक के सभी आला अधिकारियों को शामिल किया गया है. प्रमंडलीय आयुक्त (Commissioner), आईजी (IG), जिला पदाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) और वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) समेत सभी प्रमंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने पदस्थापन वाले जिले की सीमा से बाहर निकलकर दो दिन का पर्यटन प्रवास करना होगा. इससे विभिन्न क्षेत्रों के पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष और जमीनी मूल्यांकन संभव हो सकेगा. भ्रमण का आनंद उठाने के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी. लौटकर सभी अधिकारियों को उस पर्यटन स्थल के सुंदर फोटोग्राफ, वहां की स्थानीय जानकारी, अपना व्यक्तिगत अनुभव और उस जगह के पर्यटन विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझावों के साथ एक विस्तृत प्रतिवेदन (Detailed Report) विभाग में जमा करना होगा. इस रिपोर्ट का संकलन करने के लिए प्रत्येक जिला, प्रमंडल और विभाग में एक विशेष नोडल पदाधिकारी नामित किया जाएगा, जो समेकित रिपोर्ट को पर्यटन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कला एवं संस्कृति विभाग को सौंपेगा. अफसरों का घूमना माना जाएगा ‘प्रशासनी ड्यूटी’, होम-स्टे व्यवस्था को मिलेगा तगड़ा बूस्ट प्रशासन ने अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए इस पर्यटन प्रवास की पूरी अवधि को ‘कर्तव्य निर्वहन की अवधि’ (On-Duty) घोषित किया है. यानी घूमने के दौरान अधिकारियों की सैलरी या छुट्टी में कोई कटौती नहीं होगी. इसके लिए जिला प्रशासन को प्रशासनी गेस्ट हाउस, निजी होटलों और अन्य आवासीय सुविधाओं की समीक्षा कर बेहतर ठहरने और खान-पान की व्यवस्था सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है. प्रशासन का मुख्य फोकस पर्यटन और ईको-पर्यटन क्षेत्रों में ‘होम-स्टे’ व्यवस्था को तेजी से विकसित करना है. इसके तहत अधिकारी और आम पर्यटक स्थानीय लोगों के घरों में भुगतान के आधार पर ठहर सकेंगे. इससे जहां एक तरफ पर्यटकों को बिहार की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति, खान-पान और लोक कलाओं का सीधा जीवंत अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों के स्थानीय लोगों की आय (Income) में भी बंपर बढ़ोतरी होगी. प्रशासन की इस पहल से बिहार का पर्यटन विभाग अब एक नए युग में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा है. ये भी पढ़ें: रोहतास में NHAI और प्रशासन के दावों की खुली पोल: हल्की बारिश में ही जलजमाव; एक साल बाद भी अधूरा है नाला! The post बिहार के प्रशासनी अफसरों को मिला ‘पिकनिक’ का प्रशासनी टास्क, हर 3 महीने में परिवार संग घूमना अनिवार्य appeared first on Naya Vichar.

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औरंगाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा: कार-ट्रैक्टर की टक्कर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

Aurangabad Accident News (गोह से मणिकांत पांडेय की रिपोर्ट ) :गोह थाना क्षेत्र के दधपी गांव के समीप रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा उस समय हुआ जब अरवल जिले के प्रसिद्ध मधुसरवा मेला से पूजा-अर्चना कर लौट रही कार सामने चल रहे बालू लदे ट्रैक्टर से टकरा गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया. हादसे में मां-बेटी सहित तीन की मौत, डड़वा गांव के रहने वाले थे मृतक इस हादसे में जान गंवाने वाले तीनों मृतक उपहारा थाना क्षेत्र के डड़वा गांव के निवासी थे. मृतकों की पहचान ममता देवी (45 वर्ष), उनकी पुत्री चुलबुल कुमारी (14 वर्ष) और खुशी कुमारी (18 वर्ष) के रूप में की गई है. एक ही परिवार के तीन सदस्यों की इस अचानक और खौफनाक मौत की समाचार से मृतक के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है तथा पूरे गांव में शोक का माहौल है. तीन लोग गंभीर रूप से घायल, दो की हालत चिंताजनक होने पर गया रेफर इस भीषण टक्कर में कार सवार तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों की पहचान मुस्कान कुमारी, समर कुमार एवं संगीता देवी के रूप में हुई है. अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद मुस्कान कुमारी और समर कुमार की हालत को अत्यधिक चिंताजनक देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए गया रेफर कर दिया है, जहां वे उपचाराधीन हैं. गोह थाना पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा घटना की सूचना मिलते ही गोह थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य में जुट गई. पुलिस ने तीनों शवों को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. Also Read: रोहिणी नक्षत्र में धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे किसान, औरंगाबाद में 1.72 लाख हेक्टेयर खेती का लक्ष्य The post औरंगाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा: कार-ट्रैक्टर की टक्कर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत appeared first on Naya Vichar.

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