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June 22, 2026

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भरत तिवारी एनकाउंटर में आखिर पुलिस से कहां हुई चूक? एडीजी ने किया खुलासा

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार खुलकर अपनी गलती मान ली है. लॉ एंड ऑर्डर के एडीजी सुधांशु कुमार ने सोमवार को पटना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 16 जून को जब पुलिस टीम आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने गई थी, तब उसे सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया और पुलिस के स्तर पर गंभीर चूक हुई थी. इस बड़ी लापरवाही को देखते हुए विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है. मामले से जुड़े SHO, दो दरोगा, एक एएसआई और एक सिपाही को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है. अब इस पूरे मामले की कमान शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपी गई है. फॉरेंसिक और दूसरी वैज्ञानिक जांच भी तेजी से चल रही है. हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे न्यायिक जांच इस घटना को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. एडीजी ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे. यह आयोग बिना किसी दबाव के पूरी घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगा. चूंकि मामला अब न्यायिक आयोग के पास चला गया है, इसलिए पुलिस मुख्यालय अब इस पर और ज्यादा टिप्पणी करने से बच रहा है. पटना: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर ADG सुधांशु कुमार ने जानकारी देते हुए कहा- इस केस में दो FIR दर्ज की गई है. मामले में लापरवाही सामने आई है और अभियुक्त को 16 तारीख को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया. इसी कारण एक SHO, दो सब-इंस्पेक्टर, एक ASI और एक कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया… pic.twitter.com/SBOyDwBNOM — Naya Vichar (@prabhatkhabar) June 22, 2026 एनकाउंटर कभी पुलिस की कामयाबी नहीं हो सकता प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडीजी सुधांशु कुमार ने एनकाउंटर को लेकर एक बहुत बड़ी बात कही. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी एनकाउंटर को पुलिस की उपलब्धि या कामयाबी नहीं माना जा सकता. उन्होंने समझाया कि कानून पुलिस को सिर्फ आत्मरक्षा में सीमित बल प्रयोग करने का अधिकार देता है, वह भी तब जब पुलिसकर्मियों की जान पर बन आए. उन्होंने यह भी कहा कि हर मुठभेड़ की बारीकी से जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में ही हुई थी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें मामले पर गरमाई सियासत भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की नेतृत्व में भी भारी घमासान मचा हुआ है. विपक्ष लगातार पुलिस की इस कार्रवाई को कटघरे में खड़ा कर रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा है. दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष के भी कुछ नेताओं ने इस घटना पर चिंता जताते हुए साफ-सुथरी जांच की बात कही है. अब नेता हो या जनता, सभी की नजरें न्यायिक आयोग की आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. इसे भी पढ़ें: NEET Re-exam में असली उम्मीदवारों की जगह बैठे सॉल्वर, लखीसराय से 9 गिरफ्तार, यहां के मेडिकल छात्र पकड़े गए 23, 24, 25, 26 जून को बिहार के इन जिलों में रहेगा आंधी- तूफान और बारिश का दौर, मौसम विभाग का डबल अलर्ट The post भरत तिवारी एनकाउंटर में आखिर पुलिस से कहां हुई चूक? एडीजी ने किया खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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Activa-Jupiter की जोड़ी ने मारी बाजी, मई 2026 में इन स्कूटर्स का रहा दबदबा, देखें टॉप 10 लिस्ट

इंडियन मार्केट में स्कूटरों की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ती जा रही है. कॉलेज जाने वाले यंग जनरेशन से लेकर ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स, स्त्रीओं तक के लोगों के लिए स्कूटर एक बढ़िया ऑप्शन है. इसी बढ़ती मांग का असर मई 2026 की बिक्री के आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है. इस दौरान देशभर में 6.41 लाख से ज्यादा स्कूटर बिके, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले करीब 23% ज्यादा है. आइए जानते हैं मई 2026 में सबसे ज्यादा बिकने वाले 10 स्कूटर कौन-से रहे. Honda Activa और TVS Jupiter की बाजार में बादशाहत बरकरार मई 2026 में भी Honda Activa ने अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली स्कूटर बनी. इस दौरान Activa की 2,28,955 यूनिट्स बिकीं, जो पिछले साल मई 2025 में बिकी 1,90,713 यूनिट्स के मुकाबले करीब 20% ज्यादा हैं. वहीं, TVS Jupiter ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है. मई 2026 में इसकी 1,24,767 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल की 97,606 यूनिट्स के मुकाबले लगभग 28% की शानदार बढ़ोतरी है. दिलचस्प बात यह है कि Activa और Jupiter ने मिलकर टॉप 10 स्कूटरों की कुल बिक्री में 55% से ज्यादा की हिस्सेदारी हासिल की है. टॉप 10 स्कूटर मई 2026 बिक्री (यूनिट) मई 2025 बिक्री (यूनिट) YoY ग्रोथ (%) मई 2026 मार्केट शेयर (%) Honda Activa 2,28,955 1,90,713 20.05% 35.68% TVS Jupiter 1,24,767 97,606 27.83% 19.44% Suzuki Access 75,729 75,778 -0.06% 11.80% TVS iQube 42,192 27,642 52.64% 6.58% Bajaj Chetak 38,376 25,540 50.26% 5.98% TVS Ntorq 34,127 25,205 35.40% 5.32% Hero Destini 125 26,482 15,018 76.34% 4.13% Suzuki Burgman Street 25,835 24,688 4.65% 4.03% Honda Dio 23,814 26,220 -9.18% 3.71% Yamaha RayZR 21,403 13,023 64.35% 3.34% कुल 6,41,680 5,21,433 23.06% 100.00% Access, iQube और Chetak ने बरकरार रखी अपनी मजबूत पकड़ तीसरे स्थान पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए Suzuki Access ने 75,729 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की. हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इसकी बिक्री में मामूली 0.06% की गिरावट देखने को मिली. वहीं, TVS iQube इस महीने सबसे तेजी से बढ़ने वाले स्कूटर्स में शामिल रहा. इस इलेक्ट्रिक स्कूटर ने 42,192 यूनिट्स की बिक्री के साथ शानदार 52.64% की ग्रोथ हासिल की. Bajaj Chetak ने भी दमदार प्रदर्शन किया. स्कूटर की 38,376 यूनिट्स बिकीं और इसकी बिक्री में 50.26% की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. बात करें TVS Ntorq की तो इस स्पोर्टी स्कूटर ने 34,127 यूनिट्स की बिक्री के साथ 35.40% की शानदार ग्रोथ दर्ज की है. यह भी पढ़ें: 153km रेंज, TFT डिस्प्ले और 80kmph की टॉप स्पीड, जानें Bajaj Chetak के इस वेरिएंट में और क्या खास Destini 125 और RayZR ने दर्ज की शानदार बढ़त मई 2026 में Hero Destini 125 की 26,482 यूनिट्स बिकीं, जो पिछले साल की तुलना में 76.34% की जबरदस्त बढ़ोतरी है. वहीं, Suzuki Burgman Street ने भी अच्छा प्रदर्शन किया. इसकी 25,835 यूनिट्स की बिक्री हुई और स्कूटर ने 4.65% की बढ़त दर्ज की. दूसरी तरफ, Honda Dio के लिए मई का महीना थोड़ा मुश्किल भरा रहा. इस स्कूटर की 23,814 यूनिट्स बिकीं, जो पिछले साल के मुकाबले 9.18% कम हैं. टॉप 10 की लिस्ट में Yamaha RayZR ने भी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई. इसकी 21,403 यूनिट्स की बिक्री हुई और स्कूटर ने 64.35% की शानदार ग्रोथ हासिल की. यह भी पढ़ें: 43 लीटर का स्टोरेज स्पेस, 163 km तक की रेंज… जानें क्यों ये स्कूटर कहलाती है ‘स्कूटर का SUV’ The post Activa-Jupiter की जोड़ी ने मारी बाजी, मई 2026 में इन स्कूटर्स का रहा दबदबा, देखें टॉप 10 लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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रोहित शर्मा ने बीच एयरपोर्ट पर बॉडीगार्ड को डांटा, वजह जानकर फैंस कर रहे तारीफ; देखें VIDEO

Rohit Sharma Viral Video: हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा एक बार फिर अपने व्यवहार की वजह से चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह मुंबई एयरपोर्ट पर अपने निजी सुरक्षाकर्मी (बॉडीगार्ड) को डांटते हुए नजर आ रहे हैं. वीडियो में दिख रहा है कि रोहित ने एक बुजुर्ग व्यक्ति का रास्ता रोकने पर तुरंत हस्तक्षेप किया और अपने सुरक्षाकर्मी को पीछे हटने का इशारा किया. एयरपोर्ट पर हुई घटना का वीडियो वायरल रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहित शर्मा दिल्ली में आयोजित नागरिक सम्मान समारोह में पद्म श्री सम्मान प्राप्त करने के लिए मुंबई एयरपोर्ट पहुंचे थे. वह मुंबई से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट पकड़ने वाले थे, तभी एयरपोर्ट पर यह घटना हुई. एयरपोर्ट पर मौजूद फोटोग्राफर्स और फैंस के बीच रोहित कुछ देर के लिए तस्वीरें खिंचवाने रुके. इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे उनके बॉडीगार्ड ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की. View this post on Instagram A post shared by Naya Vichar (@prabhat.khabar) बुजुर्ग का रास्ता रोका तो रोहित ने बॉडीगार्ड को डांटा वीडियो में देखा जा सकता है कि फैंस को दूर रखने की कोशिश में बॉडीगार्ड ने अनजाने में वहां से गुजर रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति का रास्ता रोक दिया. जैसे ही रोहित शर्मा की नजर इस पर पड़ी, उन्होंने तुरंत अपने सुरक्षाकर्मी को पीछे हटने का इशारा किया. इसके बाद बुजुर्ग के लिए रास्ता साफ कराया और बॉडीगार्ड को सावधानी बरतने की सलाह दी. फैंस ने की रोहित की तारीफ वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई फैंस रोहित शर्मा की जमकर तारीफ कर रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि रोहित ने एक बुजुर्ग का सम्मान करते हुए संवेदनशीलता दिखाई. कई लोगों ने इसे उनकी सादगी और जमीन से जुड़े स्वभाव का उदाहरण बताया. कुछ यूजर्स ने उठाए सवाल हालांकि, इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं. कुछ यूजर्स का मानना है कि बॉडीगार्ड सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था और सार्वजनिक रूप से उसे डांटना सही नहीं था. उनका कहना है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर सुरक्षा कर्मियों को तेजी से फैसले लेने पड़ते हैं और उनसे ऐसी चूक हो सकती है. फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है. फैंस और यूजर्स अपने-अपने नजरिए से इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिसके चलते यह क्लिप इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है. यह भी पढ़ें: ‘कोई दबाव नहीं था…’, आलोचकों को बल्ले से जवाब देने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने लूटी महफिल The post रोहित शर्मा ने बीच एयरपोर्ट पर बॉडीगार्ड को डांटा, वजह जानकर फैंस कर रहे तारीफ; देखें VIDEO appeared first on Naya Vichar.

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Khatron Ke Khiladi 15: पहले कभी नहीं देखे होंगे ऐसे स्टंट… रोहित शेट्टी ने नए सीजन को लेकर किया बड़ा दावा

Khatron Ke Khiladi 15: ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. शो के होस्ट रोहित शेट्टी ने साउथ अफ्रीका के केपटाउन में चल रही शूटिंग पूरी कर ली है. उन्होंने अपनी एक फोटो शेयर कर इसकी जानकारी दी और बताया कि अब वह मुंबई लौट रहे हैं. रोहित शेट्टी का कहना है कि इस बार दर्शकों को शो का ऐसा सीजन देखने को मिलेगा, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया. यहां देखें पोस्ट- View this post on Instagram A post shared by Rohit Shetty (@itsrohitshetty) Khatron Ke Khiladi 15 Shoot Wrap: रोहित शेट्टी ने बताया कैसा रहा पूरा सफर रोहित शेट्टी ने अपनी पोस्ट में बताया कि केपटाउन का शूटिंग शेड्यूल बिल्कुल भी आसान नहीं था. उन्होंने कहा कि यह सफर काफी व्यस्त, थकाने वाला और शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. हालांकि, इन सभी मुश्किलों के बावजूद पूरा शूटिंग शेड्यूल शानदार रहा. रोहित ने पूरी टीम की मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि सभी ने पूरी लगन और मेहनत से शूटिंग पूरी की. Rohit Shetty Statement: ‘ऐसा सीजन पहले कभी नहीं देखा होगा’ रोहित शेट्टी ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का यह सीजन दर्शकों के लिए बिल्कुल नया अनुभव लेकर आएगा. उनके मुताबिक, इस बार शो में ऐसे स्टंट और चैलेंज देखने को मिलेंगे, जो पहले किसी भी सीजन में नहीं दिखाए गए. यह भी पढ़ें: Haunted 3D Box Office Success: ‘हॉन्टेड 3D’ की सफलता पर विक्रम भट्ट ने तोड़ी चुप्पी, बोले- सब भगवान पर छोड़ दिया था, दर्शकों ने कमाल कर दिया Khatron Ke Khiladi 15 Theme: ‘डर का नया दौर’ में होंगे खतरनाक स्टंट इस बार शो की थीम ‘डर का नया दौर’ रखी गई है. बताया जा रहा है कि इस सीजन में पहले से ज्यादा कठिन, खतरनाक और नए स्टंट देखने को मिलेंगे. मेकर्स इस बार दर्शकों को कुछ अलग दिखाने की तैयारी में हैं. Khatron Ke Khiladi 15 Contestants: नए और पुराने कंटेस्टेंट्स में होगी टक्कर इस सीजन में नए कंटेस्टेंट्स के साथ पुराने खिलाड़ी भी नजर आएंगे. गौरव खन्ना, फरहाना भट्ट और अविनाश मिश्रा पहली बार शो में हिस्सा ले रहे हैं. वहीं, रुबीना दिलैक, करण वाही और जैस्मिन भसीन जैसे पुराने कंटेस्टेंट्स भी ट्रॉफी जीतने के लिए मैदान में उतरे हैं. Khatron Ke Khiladi 15 Finale: ट्रॉफी की रेस में इन 3 कंटेस्टेंट्स का नाम सबसे आगे शूटिंग खत्म होने के बाद अब शो के फाइनलिस्ट को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. India Forums की रिपोर्ट्स के मुताबिक, करण वाही, अविनाश मिश्रा और फरहाना भट्ट के बीच ट्रॉफी की कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. हालांकि, मेकर्स की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. यह भी पढ़ें: Khatron Ke Khiladi 15 Elimination: रोहित शेट्टी के शो से एलिमिनेट हुईं जैस्मीन भसीन? रोते हुए फोटो शेयर कर बोलीं- एक और सफर खत्म हो गया The post Khatron Ke Khiladi 15: पहले कभी नहीं देखे होंगे ऐसे स्टंट… रोहित शेट्टी ने नए सीजन को लेकर किया बड़ा दावा appeared first on Naya Vichar.

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कैमूर की सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग, कैंडल मार्च निकाल कर किया प्रदर्शन

कैमूर (रामपुर) से राजू कुमार की रिपोर्टBharat Tiwari Encounter : बिहार में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर अब प्रदेश भर में विरोध का स्वर तेज होता जा रहा है. अलग-अलग जिलों में कैंडल मार्च का दौर शुरू हो गया है और भरत तिवारी को न्याय दिलाने के लिए लोग अब सड़कों पर उतरने लगे हैं. पटना, सीतामढ़ी, औरंगाबाद और बेगूसराय के बाद अब इसका असर कैमूर में भी साफ तौर पर देखने को मिला है. कैंडल मार्च की तस्वीर रविवार को देर शाम कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड अंतर्गत अकोढ़ी गांव में भी कैंडल मार्च निकाला गया, जो अब इस आंदोलन का नया केंद्र बनता दिख रहा है. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर भरत तिवारी को श्रद्धांजलि दी. साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. लोगों का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उनकी हत्या कर दी गई, जो गंभीर जांच का विषय है. चार सूत्री मांग रखी गई प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं. इनमें दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को प्रशासनी नौकरी देने की मांग शामिल है. बेगूसराय में प्रदर्शन करते युवाओं की तस्वीर नारेबाजी से गूंजा इलाका कैंडल मार्च के दौरान “भरत तिवारी अमर रहे” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और प्रशासन के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की. बड़ी संख्या में युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और प्रभावी बना दिया. सीतामढ़ी में प्रदर्शन करते लोगों की तस्वीर हर दिन निकल रहा कैंडल मार्च शनिवार को औरंगाबाद और बेगूसराय में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, जहां सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर कैंडल मार्च निकाला और “भरत तिवारी अमर रहे” के नारे लगाए. इससे पहले रविवार को पटना में जन सुराज की ओर से कैंडल मार्च निकालकर एसपी और डीएसपी को निलंबित करने और उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए. वहीं सोमवार को सीतामढ़ी में भी लोगों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग उठाई. Also Read: ‘भरत तिवारी को SDM ने दी थी जान से मारने की धमकी, इसीलिए खरीदी पिस्टल’, ग्रामीणों ने किए कई खुलासे औरंगाबाद में प्रदर्शन करते लोगों की तस्वीर नेताओं ने दी चेतावनी युवा नेता नितेश उर्फ लक्ष्मण दुबे ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि भरत तिवारी क्षेत्र के विकास और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे और प्रशासन को उनके अधूरे कार्यों पर भी ध्यान देना चाहिए. वहीं भाजपा नेता तिलेश्वर दुबे ने भी कहा कि वे पार्टी से जुड़े होने के बावजूद इस मामले में निष्पक्ष जांच के पक्षधर हैं. उन्होंने कहा कि अगर यह फर्जी एनकाउंटर है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. कार्यक्रम के अंत में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द न्याय सुनिश्चित करने की मांग की. कैंडल मार्च शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. इस मौके पर दिव्यांशु सिंह चंदेल, पीयूष सिंह, धवन कुमार दुबे, प्रीतम दुबे, पवन दुबे, मृत्युंजय कुमार समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे. Also Read : भरत तिवारी एनकाउंटर में आया नया मोड़, 24 जून को महापंचायत, 10 हजार से ज्यादा लोग बिहार-यूपी से जुटेंगे The post भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कैमूर की सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग, कैंडल मार्च निकाल कर किया प्रदर्शन appeared first on Naya Vichar.

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गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत कब और क्यों हुई थी, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

आज सड़क पर चलने वाली हर कार, बाइक, बस या ट्रक की अपनी एक अलग पहचान होती है, जिसे हम नंबर प्लेट के रूप में जानते हैं. किसी गाड़ी की पहचान से लेकर उसके मालिक तक की जानकारी जुटाने में नंबर प्लेट की अहम भूमिका होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत आखिर कब और क्यों हुई थी? खास बात यह है कि यह नंबर प्लेट का चलन आज से नहीं, बल्कि 130 साल से भी ज्यादा पुराना है. आइयए जानते हैं इसके पीछे की कहानी. आखिर क्यों पड़ी नंबर प्लेट की जरूरत? जब 19वीं सदी के आखिर में सड़कों पर मोटर गाड़ियां बढ़ने लगीं, तो प्रशासनों के सामने उन्हें पहचानने की समस्या खड़ी हो गई. पहले घोड़ा-गाड़ी कम संख्या में होती थीं और उन्हें पहचानना आसान था, लेकिन मोटर गाड़ियों की संख्या और रफ्तार दोनों तेजी से बढ़ रही थीं. ऐसे में दुर्घटना, ट्रैफिक नियम तोड़ने या किसी अपराध की स्थिति में गाड़ी और उसके मालिक का पता लगाना मुश्किल हो जाता था. इस समस्या को हल करने के लिए हर गाड़ी को एक अलग पहचान संख्या देने की व्यवस्था शुरू की गई, जिसे आज हम नंबर प्लेट के नाम से जानते हैं. नंबर प्लेट का मकसद गाड़ी की पहचान आसान बनाना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर वाहन मालिक तक आसानी से पहुंचना था. दुनिया में सबसे पहले कहां शुरू हुई नंबर प्लेट व्यवस्था? दुनिया में गाड़ियों के लिए नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत सबसे पहले फ्रांस में हुई थी. 14 अगस्त 1893 को पेरिस प्रशासन ने शहर में चलने वाले सभी मोटर गाड़ियों पर पहचान नंबर दिखाना जरूरी कर दिया था. उस समय नंबर प्लेट पर वाहन मालिक का नाम, पता और अन्य पहचान संबंधी जानकारी लिखी जाती थी. इससे पुलिस और प्रशासन को किसी दुर्घटना या कानूनी मामले में वाहन और उसके मालिक की पहचान करने में आसानी होती थी. यही व्यवस्था आगे चलकर मॉडर्न वाहन नंबर प्लेट सिस्टम की नींव बनी, जिसे आज दुनिया के लगभग सभी देशों में इस्तेमाल किया जाता है. दूसरे देशों ने कैसे अपनाया यह सिस्टम? फ्रांस में नंबर प्लेट व्यवस्था शुरू होने के बाद दूसरे देशों ने भी इसकी अहमियत को समझा और धीरे-धीरे इसे अपनाना शुरू कर दिया. जर्मनी ने 1896 में राष्ट्रीय स्तर पर नंबर प्लेट सिस्टम लागू किया, जिससे गाड़ियों की पहचान और रिकॉर्ड रखना आसान हो गया. इसके बाद नीदरलैंड ने 1898 में वाहन पंजीकरण व्यवस्था शुरू की. यह उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने गाड़ियों की पहचान और लाइसेंसिंग प्रोसेस को व्यवस्थित रूप दिया. वहीं, अमेरिका में भी जल्द ही वाहन पहचान की जरूरत महसूस की गई. 1901 में न्यूयॉर्क ने ऐसा कानून बनाया, जिसके तहत वाहनों की पहचान अनिवार्य हो गई. शुरुआत में वाहन मालिक खुद लकड़ी, धातु या चमड़े की प्लेट बनाकर अपनी गाड़ियों पर लगाते थे. बाद में 1903 में मैसाचुसेट्स आधिकारिक नंबर प्लेट जारी करने वाला अमेरिका का पहला राज्य बना. इस तरह फ्रांस से शुरू हुआ नंबर प्लेट सिस्टम धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया और आज यह हर गाड़ी की पहचान का सबसे अहम जरिया बन चुका है. हिंदुस्तान में कब शुरू हुई नंबर प्लेट व्यवस्था? हिंदुस्तान में नंबर प्लेट और वाहन पंजीकरण की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी. शुरुआत में पूरे देश के लिए कोई एक जैसा नियम नहीं था, इसलिए अलग-अलग प्रांत अपने स्तर पर वाहन पंजीकरण के नियम बनाते थे. सबसे पहले बॉम्बे प्रेसीडेंसी (मुंबई क्षेत्र) ने 1901 में वाहन पंजीकरण के नियम लागू किए. इसके बाद बंगाल ने 1903 में और मद्रास ने 1907 में ऐसी ही व्यवस्था शुरू की. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नियम होने के कारण व्यवस्था एक समान नहीं थे. ऐसे में इसे व्यवस्थित करने के लिए 1914 में हिंदुस्तानीय मोटर वाहन अधिनियम (Indian Motor Vehicles Act) लागू किया गया. इस कानून ने पूरे ब्रिटिश हिंदुस्तान में वाहनों के पंजीकरण और पहचान के लिए एक समान फ्रेमवर्क तैयार किया. यही व्यवस्था आगे चलकर हिंदुस्तान की मॉडर्न नंबर प्लेट और वाहन पंजीकरण प्रणाली (Vehicle Registration System) की नींव बनी, जिसका इस्तेमाल आज भी विकसित रूप में किया जाता है. आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है नंबर प्लेट समय के साथ नंबर प्लेट का पैटर्न जरूर बदल गया है, लेकिन इसकी जरूरत आज भी पहले जैसी ही है. मॉडर्न हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP), डिजिटल डेटाबेस और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) जैसी तकनीकों ने गाड़ी पहचान को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है. यही वजह है कि नंबर प्लेट आज सिर्फ एक धातु की प्लेट नहीं, बल्कि हर गाड़ी की ऑफिशियल पहचान बन चुकी है. यह भी पढ़ें: BS4 और BS6 में क्या है फर्क? ज्यादातर लोग नहीं जानते दोनों के बीच ये बड़े अंतर The post गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत कब और क्यों हुई थी, जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी appeared first on Naya Vichar.

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राम मंदिर में 200 करोड़ की कथित चोरी पर हाई कोर्ट पहुंचा मामला, न्यायिक आयोग की मांग से मचा सियासी बवाल

Lucknow High Court: अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है.इस मामले में लखनऊ हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका ( Public Interest Litigation) दायर की गई है. याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोती लाल का आरोप है कि मंदिर चंदे में लगभग 200 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से चोरी का खुलासा हुआ है.उन्होंने कोर्ट से इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. न्यायिक आयोग गठन की मांग मोती लाल ने अपनी याचिका में मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग गठित किया जाए.उनका कहना है कि केवल स्वतंत्र न्यायिक जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है.साथ ही उन्होंने अयोध्या के जिला जज को राम मंदिर ट्रस्ट का रिसीवर नियुक्त करने की भी मांग की है ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ सके. #WATCH | Lucknow, Uttar Pradesh: On a PIL filed in Lucknow High Court seeking a judicial commission to probe the alleged Ram Mandir donation embezzlement case, Petitioner, Advocate Moti Lal, says, “There’s been a huge scam in the Ram Temple donations. The theft of approximately… pic.twitter.com/X8aoGs2401 — ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 22, 2026 ट्रस्ट के खाते फ्रीज़ करने की अपील याचिका में यह भी मांग की गई है कि विशेष जांच दल (SIT) की जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की शक्तियों और बैंक खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज़ किया जाए. मोती लाल का आरोप है कि मामले के मुख्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को बचाने और छोटे कर्मचारियों को फंसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे वास्तविक दोषियों तक जांच नहीं पहुंच पा रही है. ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों को बचाने और छोटे कर्मचारियों को फंसाने की साजिश याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोती लाल ने प्रशासन पर ट्रस्ट के बड़े कर्मचारियों को बचाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि SIT जांच के नाम पर योगी प्रशासन ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों को बचाना चाहती है और मंदिर के छोटे कर्मचारियों को फंसाने की साजिश रची जा रही है. अधिवक्ता मोती लाल कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है और प्रशासन ऐसे संगीन मामले को लिपा- पोती ( दबाने ) करने में लगी है. उन्होंने हाई कोर्ट से अपील किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए, ताकि दोषियों को सजा और निर्दोषों को न्याय मिल सके. The post राम मंदिर में 200 करोड़ की कथित चोरी पर हाई कोर्ट पहुंचा मामला, न्यायिक आयोग की मांग से मचा सियासी बवाल appeared first on Naya Vichar.

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NEET फर्जीवाड़े का बिहार कनेक्शन गहराया, 2024 में CBI की जांच झेल चुका अर्पित राज फिर गिरफ्त में, कई मेडिकल कॉलेजों में रेड

पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्टNEET UG 2026 Re-Exam: नीट-यूजी परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने का मामला अब राज्यव्यापी गिरोह और मेडिकल कॉलेज नेटवर्क का रूप लेता नजर आ रहा है. लखीसराय में नौ फर्जी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस उन मेडिकल छात्रों और उनके सहयोगियों पर है, जिनके तार बिहार समेत देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से जुड़े बताए जा रहे हैं. बीएचयू, एम्स रायबरेली समेत कई संस्थानों के छात्र गिरफ्तार जिला प्रशासन के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी फर्जी परीक्षार्थी मेडिकल के छात्र हैं. इनमें बीएचयू, एम्स रायबरेली और अन्य मेडिकल कॉलेजों के छात्र शामिल बताए जा रहे हैं. गिरफ्तार आरोपियों में अर्पित राज, पूनम कुमारी, सौरभ झा, मयंक कश्यप, अमन अग्रवाल सहित अन्य नाम शामिल हैं. इस मामले में सबसे चर्चित नाम अर्पित राज का है. बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में भी उसे परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठाने के आरोप में हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार अधिकांश आरोपी मेडिकल छात्र हैं और इनमें बीएचयू, एम्स रायबरेली, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज, गया समेत अन्य संस्थानों के छात्र शामिल हैं. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आशंका है कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में एक्टिव एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. 20 और 21 जून को मेडिकल कॉलेजों से ली गई छुट्टियां जांच के घेरे में जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि कई मेडिकल कॉलेजों के छात्र 20 और 21 जून को बीमारी या अन्य कारणों का हवाला देकर छुट्टी पर थे. जबकि सभी मेडिकल कॉलेजों के स्टूडेंट्स को पहले ही 20 और 21 जून को कॉलेज में रहने के लिए कहा गया था. स्टूडेंट्स की सभी छुट्टियां रद्द कर दीं गईं थीं. इसके बावजूद कई एमबीबीएस छात्र बीमारी का हवाला देकर गायब रहे. अब पुलिस उन छुट्टियों के रिकॉर्ड, रजिस्टर और मोबाइल लोकेशन का मिलान कर रही है. आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं दिनों गैंग के सदस्य अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक गए होंगे मोबाइल कॉल डिटेल्स से खुल रहे नेटवर्क के तार जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सोशल मीडिया संपर्कों को खंगाल रही है. इसी के आधार पर गया, पटना, नालंदा समेत कई जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सकेगा. 40 से अधिक हिरासत में, बढ़ सकती है संख्या लखीसराय से शुरू हुई कार्रवाई अब राज्य स्तर पर फैल चुकी है. अब तक नौ फर्जी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है, जबकि 40 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. इनमें बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया से कुछ कर्मियों के भी जांच के दायरे में होने की चर्चा है. अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है. इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस बनाने वाले निजी एजेंसी से भी पुलिस पूछताछ कर रही है. सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल परीक्षा को लेकर इस बार बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और निगरानी के दावे किए गए थे. इसके बावजूद फर्जी परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना और परीक्षा में शामिल होना, सुरक्षा व्यवस्था की विफलता माना जा रहा है. सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना किसी आंतरिक सहयोग के इतनी सख्त जांच प्रक्रिया को पार करना कैसे संभव हो गया. डीएम-एसपी की संयुक्त निगरानी में जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार की निगरानी में जांच जारी है. पुलिस का दावा है कि पूरे नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर जांच की जा रही है. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा और बढ़ेगा और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. परीक्षा में सामने आया यह फर्जीवाड़ा अब केवल लखीसराय तक सीमित नहीं रह गया. मोबाइल नेटवर्क, मेडिकल कॉलेजों से छात्रों की भूमिका और अलग-अलग जिलों में चल रही छापेमारी ने इसे बिहार के हालिया वर्षों के सबसे ज्यादा परीक्षा घोटालों में शामिल कर दिया है. PMCH के मयंक कश्यप ने ली थी छुट्टी पकड़े गए 9 लोगों में एक मयंक कश्यप भी है. वह पीएमसीएच में एमबीबीएस का थर्ड ईयर का छात्र है. उसने स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी ली थी. रविवार को वह कॉलेज के सेमिनार में नहीं पहुंचा. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि बीमारी का बहाना बनाकर उसने कहीं गैंग की गतिविधियों में भाग तो नहीं लिया था. 30 से 40 लाख रुपये में सौदा एसडीपीओ के अनुसार, अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि हर एक अभ्यर्थी के लिए 30 से 40 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था, जिसमें पांच लाख रुपये पहले ही मिल गए थे. जबकि बाकी के पैसे मेडिकल कॉलेज मिलने के बाद देने की बात तय की गई थी. Also Read: NEET Re-Exam में फर्जीवाड़ा: मगध मेडिकल कॉलेज के छात्र से 15 दिन पहले ही CBI ने की थी पूछताछ, जानिए चौंकाने वाला खुलासा The post NEET फर्जीवाड़े का बिहार कनेक्शन गहराया, 2024 में CBI की जांच झेल चुका अर्पित राज फिर गिरफ्त में, कई मेडिकल कॉलेजों में रेड appeared first on Naya Vichar.

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बलिया के ‘तवायफ’ गांव की कहानी: आज भी लड़कियों की शादी नहीं होती

UP News: बलिया. वक्त बदला, हुकूमतें बदलीं और आजादी के बाद देश की तस्वीर भी बदल गई, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का एक गांव आज भी इतिहास की एक ऐसी बेड़ी में जकड़ा है, जो उसकी नई पीढ़ी का भविष्य निगल रही है. सिकंदरपुर तहसील के पंदह ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली खड़सरा ग्राम पंचायत का ‘रुपवार तवायफ’ गांव आज अपने नाम के कारण सामाजिक दंश झेलने को मजबूर है. गांव के नाम के साथ जुड़े एक अपमानजनक शब्द के कारण यहां की बेटियों और बेटों के हाथ पीले होना एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. गांव का नाम बदलने की मांग ​स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें समाज में या गांव से बाहर कहीं भी अपने गांव का नाम बताने में बेहद शर्मिंदगी और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है. इस नाम की वजह से बाहरी लोग पूरे गांव को हीन भावना से देखते हैं, जिसका सीधा असर यहां के युवाओं के विवाह और सामाजिक रिश्तों पर पड़ रहा है. ग्रामीण लंबे समय से इस नाम को बदलकर ‘देवपुर’ करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगा है. ​उत्तर प्रदेश में जहां फैजाबाद का नाम अयोध्या और इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करके बड़े बदलाव किए गए, वहीं बलिया के इस छोटे से गांव के निवासियों की सम्मान से जीने की आस आज भी अधूरी है. देवपुर’ नाम के लिए लामबंद हुए ग्रामीण, लंबे समय से उठ रही मांग ​बलिया जनपद का संभवतः इकलौता ऐसा गांव है, जहां के लोग अपने पते और पहचान पर बात करने से भी कतराते हैं. ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान नाम में शामिल ‘तवायफ’ शब्द उनके लिए किसी सामाजिक अभिशाप से कम नहीं है. इस नाम से उपजी मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति पाने के लिए पूरे गांव ने एक सुर में इसे ‘देवपुर’ नाम देने की मांग तेज कर दी है ताकि आने वाली पीढ़ी को इस सामाजिक अपमान का सामना न करना पड़े. महामहिम से लेकर जिला प्रशासन तक लगाई गुहार, पर सुनवाई का इंतजार ​गांव के लोग अपनी अस्मिता की इस लड़ाई को लेकर देश के शीर्ष नेतृत्व का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं. ग्रामीणों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल से लेकर स्थानीय कमिश्नर और जिला प्रशासन तक को कई बार प्रार्थना पत्र भेजे जा चुके हैं. ​8 मार्च 2025: ग्रामवासियों ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अपनी पीड़ा बयां की थी. ​2023 और 2024: इससे पहले 25 मई 2023, 30 नवंबर 2023 और 3 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री और राज्यपाल को भी आवेदन सौंपे गए थे. ​वर्ष 2026: हाल ही में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी बलिया और उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर को भी दोबारा ज्ञापन सौंपकर इस नाम को जल्द से जल्द बदलने की भावुक अपील की है. ​नोट- अब देखना यह है कि प्रशासन कब फाइलों से बाहर निकलकर इस गांव की सुध लेता है और कब रुपवार तवायफ को ‘देवपुर’ के रूप में एक नया और सम्मानित नाम मिलता है. यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर महंत धर्मदास का बड़ा हमला, ट्रस्ट मॉडल बदलने की मांग The post बलिया के ‘तवायफ’ गांव की कहानी: आज भी लड़कियों की शादी नहीं होती appeared first on Naya Vichar.

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NEET Re-Exam में फर्जीवाड़ा: मगध मेडिकल कॉलेज के छात्र से 15 दिन पहले ही CBI ने की थी पूछताछ, जानिए चौंकाने वाला खुलासा

गया जी से जितेंद्र मिश्र की रिपोर्टNEET 2026 Re-Exam: देशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सात स्तरीय निगरानी के बीच रविवार को आयोजित नीट यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान लखीसराय जिले में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है. इस फर्जीवाड़े में गया जी के मगध मेडिकल कॉलेज के छात्र का भी नाम सामने आया है. गिरफ्तार छात्र को अब कॉलेज प्रशासन निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है. जानकारी अनुसार पुलिस ने करीब 30 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया है. आरोपी अंकित राज को निष्कासित करने की तैयारी जानकारी अनुसार नीट परीक्षा में कथित तौर पर फर्जी छात्र के रूप में परीक्षा देने के आरोप में गिरफ्तार मगध मेडिकल कॉलेज के चौथे वर्ष के छात्र अंकित राज के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है. कॉलेज प्रशासन ने उसे संस्थान से निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वहीं मामले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के स्तर पर चल रही थी. 15 दिन पहले भी सीबीआई ने आरोपी अंकित से की थी पूछताछ मगध मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने बताया कि अंकित राज लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था. करीब 15 दिन पहले ही सीबीआई की टीम कॉलेज पहुंचकर छात्र से संबंधित सभी दस्तावेज अपने साथ ले गई थी. इसके अलावा सीबीआई की टीम पहले भी कॉलेज पहुंचकर छात्र से पूछताछ कर चुकी थी. देर शाम आरोपी छात्र के कमरे की हुई तलाशी उन्होंने बताया कि लखीसराय में गिरफ्तारी के बाद रविवार देर शाम पुलिस ने छात्र के हॉस्टल के कमरे की तलाशी ली. इस दौरान एक टैब, आधार कार्ड, वोटर आईडी समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं. कॉलेज प्रशासन के अनुसार छात्र पिछले कुछ दिनों से कॉलेज परिसर से भी बाहर था. प्राचार्या का बड़ा बयान प्राचार्या ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि छात्र गंभीर अनियमितताओं और गलत गतिविधियों में शामिल था. ऐसी स्थिति में उसे मेडिकल कोर्स पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, इसलिए कॉलेज प्रशासन द्वारा निष्कासन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. साथ ही अन्य स्तरों पर भी मामले की जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में किसी भी प्रकार की धांधली स्वीकार नहीं की जा सकती. योग्य और मेहनती छात्रों का हक मारकर यदि कोई व्यक्ति डॉक्टर बनने की कोशिश करता है तो यह पूरे समाज और चिकित्सा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है. क्या है पूरा मामला दरअसल, कल देशभर में नीट का री-एग्जाम हुआ.इस दौरान प्रशासन ने लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी कर नौ फर्जी परीक्षार्थियों (स्कॉलर/सॉल्वर) को गिरफ्तार किया है, जबकि बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़ी निजी एजेंसी के सात कर्मियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की. प्रारंभिक जांच में ये संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार लोग असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे और इसके लिए मोटी रकम का सौदा किया गया था. 7 फर्जी परीक्षार्थियों को किया गया था गिरफ्तार नौ मुन्ना भाइयों की गिरफ्तारी के बाद जांच की परतें खुल रही हैं और पुलिस सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है. जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर कुल 720 अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होना था, जिनमें 673 उपस्थित और 47 अनुपस्थित रहे. केआरके हाईस्कूल केंद्र से एक, राजकीय हसनपुर हाईस्कूल से एक और केंद्रीय विद्यालय केंद्र से सात फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया. वहीं डायट लखीसराय केंद्र से किसी भी फर्जी परीक्षार्थी की गिरफ्तारी नहीं हुई. गया जी की समाचारें पढ़ने के लिए क्लिक करें…. दो दर्जन से अधिक लोग हिरासत में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अब तक नौ फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं दो दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. बताया जा रहा है कि इनमें एक दर्जन से अधिक लोग बायोमीट्रिक प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं. पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है. मास्टरमाइंड की तलाश मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार ने संयुक्त रूप से गहन जांच के निर्देश दिए हैं. गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे सॉल्वर गैंग और इसके सरगना तक पहुंचा जा सके. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. Also Read: नीट यूजी फर्जीवाड़े में दो लड़की के साथ 30 लोगों की गिरफ़्तारी,सभी पर FIR दर्ज NEET Re-exam में असली उम्मीदवारों की जगह बैठे सॉल्वर, लखीसराय से 9 गिरफ्तार, यहां के मेडिकल छात्र पकड़े गए The post NEET Re-Exam में फर्जीवाड़ा: मगध मेडिकल कॉलेज के छात्र से 15 दिन पहले ही CBI ने की थी पूछताछ, जानिए चौंकाने वाला खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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