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July 15, 2026

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धनबाद और देवघर के पासपोर्ट कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

Bomb Threat: झारखंड के धनबाद और देवघर स्थित पासपोर्ट कार्यालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं. बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे रांची स्थित रीजनल पासपोर्ट कार्यालय को एक अज्ञात ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें झारखंड के सभी पासपोर्ट सेवा केंद्रों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई. सूचना मिलते ही रीजनल पासपोर्ट कार्यालय ने संबंधित जिलों के पुलिस प्रशासन को तत्काल इसकी जानकारी दी. इसके बाद धनबाद और देवघर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. धनबाद में खाली कराया गया पोस्ट ऑफिस परिसर धनबाद में धमकी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गए. जिस भवन में पासपोर्ट सेवा केंद्र संचालित होता है, वहां स्थित मुख्य डाकघर को एहतियात के तौर पर खाली करा दिया गया. पुलिस ने पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी. सुरक्षा के मद्देनजर डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर बुलाया गया. वहीं, डाकघर से सटे बीएसएनएल कार्यालय और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के कार्यालय को भी खाली कराया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके. पुलिस पूरे परिसर की बारीकी से जांच कर रही है और ईमेल भेजने वाले की पहचान करने का प्रयास भी शुरू कर दिया गया है. देवघर में एसपी के नेतृत्व में चल रही जांच देवघर के प्रधान डाकघर परिसर स्थित पासपोर्ट कार्यालय को भी इसी ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई. सूचना मिलते ही रीजनल पासपोर्ट कार्यालय ने देवघर एसपी प्रवीण पुष्कर और नगर थाना प्रभारी रवि ठाकुर को इसकी जानकारी दी. एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे पासपोर्ट कार्यालय की गहन तलाशी शुरू कर दी. डॉग स्क्वॉड की टीम को भी जांच में लगाया गया है. पुलिस कार्यालय के हर हिस्से की जांच कर रही है ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाया जा सके. इसे भी पढ़ें: नोएडा में DM कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, ई-मेल मिलते ही मचा हड़कंप, मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ईमेल भेजने वाले की तलाश में जुटी पुलिस फिलहाल धनबाद और देवघर दोनों स्थानों पर किसी भी प्रकार की संदिग्ध या विस्फोटक सामग्री मिलने की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि पुलिस इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरत रही है. साइबर विशेषज्ञों की मदद से धमकी भरा ईमेल भेजने वाले की पहचान और उसकी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक दोनों पासपोर्ट कार्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी. साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है. इसे भी पढ़ें: रांची सिविल कोर्ट को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी, कोर्ट कैंपस में पहुंची बीडीडीएस की टीम, देखें वीडियो The post धनबाद और देवघर के पासपोर्ट कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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18 दिन से जारी है सोनम वांगचुक का अनशन, 16 जुलाई को देश भर में भूख हड़ताल की अपील

Sonam Wangchuk Hunger Strike : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 18 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं. सीजेपी ने X पर पोस्ट कर देश भर के छात्रों से अपील की है कि 16 जुलाई को एक दिन की भूख हड़ताल करें. जिससे प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बनाया जा सके. उन्होंने कहा कि यह सामूहिक भूख हड़ताल सोनम वांगचुक के प्रति समर्थन का भी प्रतीक होगी. केंद्र की ओर से बातचीत की कोई पहल नहीं : CJP कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत के दौरान भूख हड़ताल से जुड़ी जानकारी दी. बताया कि अब तक केंद्र प्रशासन की ओर से बातचीत को लेकर कोई भी कदम नहीं लिया गया है. वहीं आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के साथ कई विपक्षी नेताओं ने सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है. अभिजीत ने सोशल मीडिया के जरिए बताया, सोनम ने कहा है कि लोगों को उनसे अनशन तोड़ने की अपील करने की बजाय प्रशासन से बातचीत करने को लेकर दबाव बनाना चाहिए. भूख हड़ताल पर बैठने के कारण मेडिकल परीक्षा NEET 2026 में हुए पेपर लीक की घटना के कारण देश भर के अलग-अलग हिस्सों से करीब 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली. हालांकि दोबारा नीट की परीक्षा कराई गई, लेकिन एग्जाम सेंटर अपने पते पर न मिलना जैसी छिटपुट गड़बड़ियां फिर देखी गई. सोनम के आमरण अनशन पर बैठने का NEET परीक्षा में गड़बड़ी एकमात्र कारण नहीं है. इसके अलावा 2024 में यूजीसी नेट की परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे. CBSE बोर्ड परीक्षा, यूपी टेट (2021), यूपी पुलिस कॉन्सटेबल (2024), UKSSSC (2025) की परीक्षा में भी पेपर लीक होने से छात्रों को परेशानी हुई. इंडिया टुडे की रिपोर्ट में छपे आंकड़े बताते हैं कि 2019 से 2024 तक 65 से अधिक पेपर लीक जैसी गड़बड़ियां हुई हैं; और ये परेशानी सिर्फ केंद्र की परीक्षाओं में ही नहीं बल्कि राज्यस्तरीय विभिन्न परीक्षाओं में घोटाले हुए. इसी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और गड़बड़ियों की बवाबदेही की मांग करते हुए सीजेपी का धरना प्रजर्शन 26 दिनों व सोनम की भूख हड़ताल 18 दिनों से जारी है. लद्दाख को छठे शेड्यूल में डालने की मांग सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मुख्य मुद्दा परीक्षाओं में गड़बड़ियों की जवाबदेही लेते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है. लेकिन जिस मुद्दे को लेकर लद्दाख में सोनम ने 22 दिनों की भूख हड़ताल की थी. उसे भी प्रशासन ने अब तक पूरा नहीं किया. हालांकि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से सोनम ने बताया कि प्रशासन ने इस मामले के समाधान के लिए प्रशासनी तंत्र ने बातचीत शुरू की थी. जिसका कोई सकारात्मक असर ग्राउंड लेवल पर अब तक नहीं देखा गया है. लगातार सेहत में आ रही गिरावट अभिजीत दीपके समेत सीजेपी के प्रवक्ताओं ने मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार सोनम की सेहत को लेकर जानकारी दी है. 15 जुलाई की बात करें तो उनका वजन 17 दिन की भूख हड़ताल के बाद 18वें दिन उनका वजन करीब 9 किलोग्राम कम हो गया है. वहीं उनका सुगर लेवल भी 60 से 65 के आसपास देखा जा रहा है. एक वीडियो, जिसे देखने के बाद देश भर से उनको लेकर लोगों की चिताएं सामने आने लगी, इसमें वे वजन चेक कराते वक्त खड़े नहीं रह पाए थे. कमजोरी उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती है. अरविंद केजरीवाल जाएंगे जंतर-मंतर 14 जुलाई को अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर बताया कि 16 जुलाई को धरना स्थल पर जाएंगे. इसके पहले संजय सिंह और आतिशी सहित कई आप नेता प्रदर्शन को अपना समर्थन जता चुके हैं. ये भी पढ़ें : 18 दिन से अनशन पर सोनम वांगचुक को अखिलेश का खुला समर्थन, फोन कर की अनशन तोड़ने की अपील ये भी पढ़ें : बागेश्वर धाम: भाई पर गोलीकांड का आरोप, धीरेंद्र शास्त्री बोले- उससे मेरा कोई संबंध नहीं The post 18 दिन से जारी है सोनम वांगचुक का अनशन, 16 जुलाई को देश भर में भूख हड़ताल की अपील appeared first on Naya Vichar.

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सिर्फ सोनम जी भूखे हैं, बाकी सब भर-भर के खा रहे हैं, जंतर-मंतर से फूड ब्लाॅगर आयुष सपरा के वीडियो ने खड़ा किया विवाद

Sonam Wangchuk hunger strike : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का बुधवार को 18वां दिन है. उनसे अनशन समाप्त करने के लिए अपील की जा रही है. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है. इसी बीच एक फूड ब्लाॅगर का वीडियो काफी चर्चा में है, जो काॅकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन स्थल से बनाया गया है. फूड ब्लाॅगर अपने ब्लाॅग में यह कहता नजर आ रहा है कि सिर्फ सोनम जी भूखे हैं, बाकी सब भर-भर कर खा रहे हैं. जंतर-मंतर पर खाने की डिमांड बहुत ज्यादा है फूड ब्लाॅगर आयुष सपरा ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें वह कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन स्थल पर जाकर फूड ब्लाॅगिंग कर रहा है. वह अपने वीडियो में छोले खाता है, समोसे खाता है और कहता है कि स्वाद बहुत बढ़िया है. वह कहता है कि मुझे सिर्फ छोले मिले हैं, क्योंकि फूड की डिमांड बहुत ज्यादा है. अगर पूरियां मिलती तो मैं 10-15 के नीचे नहीं रूकता. वह अपने वीडियो में यह भी कहता है कि सिर्फ सोनम जी भूखे हैं, बाकी सब भर-भर कर खा रहे हैं. वह काॅकरोच जनता पार्टी के नाम वाली मिनरल वाटर की पानी भी वहां से लेता है और पीता है. वह समोसे के साथ लाल चटनी खाता है. ब्लाॅग पर शुरू हुआ विवाद आयुष सपरा के ब्लाॅग पर इंटरनेट की दुनिया में विवाद शुरू हो गया है. कोई उसे बेशर्म बताकर उसकी निंदा कर रहा है तो उसके समर्थन में खड़ा है. कई लोगों का कहना है कि आयुष को फूड ब्लाॅगिंग के लिए कोई और जगह नहीं मिली थी क्या? वह एक प्रदर्शन के दौरान अनशन पर बैठे लोगों का मजाक बना रहा है. विरोध प्रदर्शन के दौरान वॉलंटियर्स और सपोर्टर्स को खाना परोसा जाना कोई अजीब बात नहीं है, लेकिन आयुष सपरा के वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया है. ये भी पढ़ें : क्या टूटने वाली है शरद पवार की एनसीपी? बोले संजय राउत- फैलाई जा रही है अफवाह The post सिर्फ सोनम जी भूखे हैं, बाकी सब भर-भर के खा रहे हैं, जंतर-मंतर से फूड ब्लाॅगर आयुष सपरा के वीडियो ने खड़ा किया विवाद appeared first on Naya Vichar.

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भारत-यूके ट्रेड डील लागू : पीएम मोदी बोले- किसानों, MSME और प्रोफेशनल्स को मिलेगा लाभ

India-UK Trade Deal : हिंदुस्तान और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच साइन हुए फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट को 15 जुलाई (बुधवार) से लागू कर दिया गया है. CETA (कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक और ट्रेड एग्रीमेंट) एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता है, जिसे साल 24 जुलाई 2025 को साइन किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रेड डील को दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक कदम बताया. इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवाओं और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है. इस समझौते के तहत कई हिंदुस्तानीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में कम या शून्य आयात शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा, जिससे हिंदुस्तानीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. CETA में वस्तुओं के व्यापार के अलावा डिजिटल व्यापार, निवेश, बौद्धिक संपदा, कस्टम्स प्रक्रियाएं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSME) का सहयोग और पेशेवरों की आवाजाही जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं. इसे हिंदुस्तान के सबसे बड़े और रणनीतिक व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है. पीएम मोदी ने बताया ऐतिहासिक कदम हिंदुस्तान-यूके CETA लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों की साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि CETA के लागू होने से हिंदुस्तान और ब्रिटेन के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे. प्रधानमंत्री के अनुसार, यह समझौता किसानों, उद्यमियों और एमएसएमई को नए अवसर देगा, जबकि हिंदुस्तानीय उत्पादों और सेवाओं की ब्रिटिश बाजार तक पहुंच बढ़ेगी. उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक, नवाचार, पेशेवर सेवाओं और कुशल हिंदुस्तानीय प्रतिभाओं की आवाजाही को इससे नई गति मिलेगी. साथ ही, सोशल सिक्योरिटी समझौते से ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने वाले हिंदुस्तानीय पेशेवरों और हिंदुस्तानीय कंपनियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा. पीएम मोदी ने इसे दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच विश्वास और साझा समृद्धि की दिशा में एक मजबूत कदम बताया. हिंदुस्तान को क्या होगा फायदा? CETA लागू होने से हिंदुस्तान के टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, कृषि और समुद्री उत्पादों जैसे कई क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. ब्रिटेन में हिंदुस्तानीय उत्पादों पर आयात शुल्क घटने या समाप्त होने से निर्यात बढ़ेगा, जिससे उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. किसानों, एमएसएमई और छोटे निर्यातकों को भी ब्रिटिश बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी. इसके अलावा, दोनों देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते के कारण ब्रिटेन में काम करने वाले पात्र हिंदुस्तानीय पेशेवरों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान से राहत मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता हिंदुस्तान में निवेश बढ़ाने, वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत करने और दीर्घकाल में आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा. ये भी पढ़ें : पोलैंड के मंत्री का दावा : पीएम मोदी ने यूक्रेन में परमाणु हमले को रोका, पुतिन ने मानी हिंदुस्तान की बात The post हिंदुस्तान-यूके ट्रेड डील लागू : पीएम मोदी बोले- किसानों, MSME और प्रोफेशनल्स को मिलेगा लाभ appeared first on Naya Vichar.

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Qatar : जब रेगिस्तान से निकला पेट्रोल और गैस से भी बड़ा खजाना… कहानी Qatar, Al-Jazeera और Sheikh Hamad की

Qatar : जोहार. आज है 15 जुलाई. बात आज से तीस साल पहले की है… 1996 की एक सुबह. दोहा में एक साधारण-सा स्टूडियो. कुछ कैमरे, सीमित संसाधन, लेकिन असीमित सपने. उस दिन किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इसी छोटे-से स्टूडियो से प्रसारित होने वाला एक समाचार चैनल आने वाले वर्षों में अरब दुनिया की नेतृत्व, वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का चेहरा बदल देगा. उसका नाम था- अल जजीरा. ठीक उसी समय दुनिया का एक और परिवर्तन भी चुपचाप आकार ले रहा था. फारस की खाड़ी का एक छोटा-सा देश, जिसकी पहचान कभी मोती, मछली पकड़ने और प्राकृतिक गैस तक सीमित थी… स्वयं को एक नए युग के लिए तैयार कर रहा था. डॉ. महीप के साथ इस खास इंटरव्यू में हम कतर, अल जजीरा और अमीर हमद बिन खलीफा अल थानी की कहानी के बारे में जानेंगे. डॉ. महीप पश्चिम एशिया के मामलों के जानकार और जाने-माने जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट हैं. इस बारे में वे कहते हैं: ‘किसी राष्ट्र की शक्ति केवल उसके भूगोल या सैन्य क्षमता से तय नहीं होती. उसकी असली ताकत इस बात में छिपी होती है कि वह दुनिया को अपनी कहानी किस तरह सुनाता है.’ आधुनिक बदलाव के शाहकार इन सब बदलाव के केंद्र में थे कतर के अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी. ऐसे नेता जिन्होंने समझ लिया था कि इक्कीसवीं सदी में केवल तेल और गैस किसी राष्ट्र को महान नहीं बनाते. बल्कि विचार, शिक्षा, मीडिया और डिप्लोमेसी भी उतने ही जोरदार हथियार हैं. आज जब कतर को मध्य-पूर्व यानि की पश्चिम एशिया की सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाली रीजनल-पावर में गिना जाता है, तो उसके पीछे केवल कारोबारी या तिजारती समृद्धि नहीं, बल्कि एक ऐसे सोच की झलक है, जो सालो-साल दूर की सोचता हो. जब मीडिया बना राष्ट्रीय शक्ति अल जजीरा की कहानी किसी व्यावसायिक मीडिया संस्थान की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दृष्टि की कहानी है. 1990 के दशक के मध्य में BBC Arabic Television का एक संयुक्त उपक्रम अचानक बंद हो गया. उसके अनेक अनुभवी अरब पत्रकार बेरोजगार हो गए. अधिकांश देशों ने इसे सामान्य घटना माना, लेकिन कतर ने इसमें अवसर देखा. शेख हमद ने इन पत्रकारों को दोहा आने का निमंत्रण दिया. पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई और 1996 में अल जजीरा का जन्म हुआ. यह केवल एक समाचार चैनल नहीं था, यह अरब मीडिया संस्कृति में एक क्रांति थी. तुर्की का TRT, रूस का RT और चीन का ग्लोबल टाइम्स वह हासिल नहीं कर पाए, जो अल जजीरा ने कुछ ही सालों में कर दिखाया. पहली बार किसी अरब चैनल ने सत्ता से असहज प्रश्न पूछे. बहस को स्थान दिया. विरोधी विचारों को भी मंच मिला. ‘दूसरी राय’ को महत्व देने की परंपरा विकसित हुई. धीरे-धीरे अल जजीरा केवल अरब दुनिया का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का प्रभावशाली समाचार नेटवर्क बन गया. डॉ. महीप के शब्दों में, ‘बीसवीं सदी में देशों ने सीमाओं की रक्षा के लिए सेनाएं बनाईं. इक्कीसवीं सदी में उन्होंने अपनी पहचान की रक्षा के लिए मीडिया संस्थान बनाए. अल जजीरा इसी परिवर्तन का सबसे प्रभावशाली उदाहरण है.’ ऊर्जा से बनी आर्थिक क्रांति मीडिया के साथ-साथ शेख हमद ने वित्तीय स्थिति को भी नए सिरे से गढ़ा. कतर के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार पहले से मौजूद थे, लेकिन उन्हें वैश्विक रणनीतिक संपत्ति में बदलना आसान नहीं था. तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के क्षेत्र में बड़े निवेश, आधुनिक बंदरगाहों का निर्माण और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों ने कतर को विश्व के अग्रणी LNG निर्यातकों में स्थापित कर दिया. ऊर्जा से प्राप्त आय को तत्काल उपभोग में खर्च करने के बजाय भविष्य की पूंजी में बदला गया. इसी सोच से Qatar Investment Authority की स्थापना हुई. दुनिया के प्रमुख वित्तीय केंद्रों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, बुनियादी ढाँचे, होटलों और रियल एस्टेट में निवेश कर कतर ने अपनी आर्थिक उपस्थिति वैश्विक बना दी. यह केवल धन कमाने की रणनीति नहीं थी, यह भविष्य की सुरक्षा का मॉडल था. रेगिस्तान में ज्ञान का शहर दोहा के बाहरी हिस्से में विकसित Education City आधुनिक कतर की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है. दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को एक ही परिसर में आमंत्रित करना केवल शैक्षणिक परियोजना नहीं थी. इसका उद्देश्य था कि कतर भविष्य में ज्ञान आधारित वित्तीय स्थिति का नेतृत्व कर सके. डॉ. महीप और बताते हैं, ‘तेल समाप्त हो सकता है, गैस के दाम गिर सकते हैं, लेकिन शिक्षित समाज की क्षमता कभी समाप्त नहीं होती. यही कारण है कि शेख हमद ने विश्वविद्यालयों में निवेश को तेल के कुओं जितना ही महत्वपूर्ण माना.’ सॉफ्ट पावर की नई परिभाषा बीसवीं सदी में शक्ति का अर्थ था- सेना, हथियार और भूभाग. इक्कीसवीं सदी में शक्ति का अर्थ बदल गया. अब एयरलाइंस भी शक्ति हैं. स्पोर्ट्स आयोजन भी शक्ति हैं. मीडिया भी शक्ति है. विश्वविद्यालय भी शक्ति हैं. निवेश भी शक्ति है. कतर ने इस परिवर्तन को सबसे पहले समझा. Qatar Airways ने दुनिया को जोड़ा. अल-जज़ीरा ने विचारों को जोड़ा. Education City ने ज्ञान को जोड़ा. और FIFA World Cup 2022 ने पूरी दुनिया को दोहा पहुंचा दिया. विश्व कप केवल फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं था. यह उस राष्ट्र का परिचय था जिसने दुनिया को दिखाया कि छोटा भूभाग वैश्विक महत्वाकांक्षा में बाधा नहीं बनता. नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Pacific : चीन के खिलाफ, हिंदुस्तान के लिए क्यों हैं Australia और New Zealand खास नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप नहीं, चीन के लिए जाल ‌बिछा रहे हैं नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : क्या कर रहे हो पाकिस्तान : पहले बसंत मनाए, फिर ‘बाबरी मस्जिद चौक’ का नाम ‘जैन मंदिर चौक’ कर दिए… नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : अमेरिका-ईरान में फिर बमबारी… दूसरा ‘रूस-यूक्रेन’ बनाने पर आमादा क्यों है अमेरिका? अरब स्प्रिंग और अल जजीरा 2011 में जब ट्यूनीशिया से शुरू हुई जनआंदोलन की लहर मिस्र, लीबिया, यमन और अन्य देशों तक पहुंची, तब अल जजीरा केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं कर रहा था. वह अरब समाज की धड़कनों को दुनिया तक पहुंचा रहा था. उसकी लाइव कवरेज ने वैश्विक दर्शकों को पहली बार अरब जनता की आकांक्षाओं से सीधे जोड़ा. यही वह समय था जब यह स्पष्ट हुआ कि मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं,

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क्या टूटने वाली है शरद पवार की एनसीपी? बोले संजय राउत- फैलाई जा रही है अफवाह

मुंबई में एनसीपी (शरद गुट) के नेता जयंत पाटिल ने पार्टी में किसी तरह की टूट की अटकलों को खारिज किया. न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी पूरी तरह एकजुट है. हम सभी शरद पवार के नेतृत्व में काम कर रहे हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं. इस बयान से पहले एक समाचार 15 जुलाई की सुबह आई. समाचार के अनुसार, 14 जुलाई को जयंत पाटिल पहले शरद पवार से मिलने उनके ‘सिल्वर ओक’ आवास पहुंचे. कुछ देर बाद उन्होंने देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की. दूसरी ओर, अजित पवार गुट के सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी अलग से फडणवीस के साथ बैठक की. शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने मुलाकात पर क्या कहा? शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात को लेकर चल रही अटकलों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल एनसीपी (शरद पवार गुट) और महाविकास आघाड़ी के अहम नेता हैं. राउत का आरोप है कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को लेकर जानबूझकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी और शिंदे गुट के पास बताने के लिए कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, इसलिए ऐसी समाचारें उड़ाई जा रही हैं. राउत ने बताया कि उनकी सुप्रिया सुले से भी बात हुई है. सुले भी इन समाचारों से हैरान हैं और आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी स्थिति साफ करेंगी. ये भी पढ़ें: शरद पवार का अगला कदम क्या होगा? सीएम फडणवीस संग देर रात हुई NCP नेताओं की बैठक क्या चाहते हैं शरद गुट के विधायक? ये सारी हलचल ऐसे समय हो रही है, जब शरद पवार की एनसीपी (एसपी) अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है. जुलाई 2023 में अजित पवार पार्टी से अलग होकर बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे. अब पार्टी के अंदर भी नए नेतृत्वक समीकरणों पर चर्चा तेज है. सूत्रों का कहना है कि 10 में से करीब आधे विधायक एनडीए के साथ जाने के पक्ष में हैं. उनका तर्क है कि विपक्ष में रहने से अपने विधानसभा क्षेत्रों के लिए विकास योजनाओं की मंजूरी और फंड लाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. The post क्या टूटने वाली है शरद पवार की एनसीपी? बोले संजय राउत- फैलाई जा रही है अफवाह appeared first on Naya Vichar.

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‘छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं’, पटना HC के इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जानिए पूरा मामला

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी स्त्री की छाती दबाना और उसकी सलवार हटाने का प्रयास करना हर मामले में दुष्कर्म के प्रयास के अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा. इस यौन अपराध से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई करते समय न्यायाधीशों को प्रासंगिक फैसलों और दिशा-निर्देशों का अध्ययन करना चाहिए. कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) की तैयार हैंडबुक और समिति की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट तथा सभी हाई कोर्ट की वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया है. साथ ही राज्यों से कहा गया है कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने और चार्जशीट दाखिल करने के दौरान इन दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करे. इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ था मामला यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च 2025 के एक विवादित आदेश के बाद स्वत: संज्ञान के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. उस आदेश में कहा गया था कि किसी लड़की के पजामे का नाड़ा खींचना और उसके स्तनों को पकड़ना अपने आप में रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. इस टिप्पणी के बाद व्यापक विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया. सुनवाई के दौरान पटना हाई कोर्ट के फैसले का भी हुआ जिक्र सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इसी तरह की टिप्पणियां समय-समय पर विभिन्न अदालतों से आती रही हैं. उन्होंने 9 जुलाई को पटना हाई कोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि किसी स्त्री की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. यह भी पढ़ें – पटना हाईकोर्ट ने कहा- स्त्री की छाती दबाना और सलवार हटाने की कोशिश दुष्कर्म का प्रयास नहीं, बल्कि लज्जा भंग का अपराध सीजेआई ने कहा, जजों को भी करनी चाहिए रिसर्च इस पर जस्टिस वी. मोहना ने पूछा कि क्या पटना हाई कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और न्यायिक संवेदनशीलता संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया था. वहीं हिंदुस्तान के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायाधीशों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों में प्रासंगिक निर्णयों का अध्ययन करें. उन्होंने टिप्पणी की, “जजों को भी रिसर्च करनी चाहिए. स्टाफ कुछ नहीं कर रहा है.” क्या था पटना हाई कोर्ट का फैसला पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में कहा था कि यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री की सलवार उतारता है और उसकी छाती दबाता है, तो यह कृत्य स्त्री की मर्यादा भंग करने के अपराध की श्रेणी में आएगा. हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता. जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने रेप की कोशिश के आरोप में दोषी ठहराए गए आरोपी की सजा को आंशिक रूप से रद्द करते हुए यह टिप्पणी की थी. 2008 की घटना में ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा यह मामला वर्ष 2008 का है. शिकायत के अनुसार, पीड़िता अपने पिता के साथ एक फोटोग्राफी स्टूडियो गई थी, जहां आरोपी ने उसे फोटो दिखाने के बहाने अंदर रोक लिया. आरोप है कि उसने कमरे का दरवाजा बंद कर जबरदस्ती करने की कोशिश की. पीड़िता के शोर मचाने पर उसके पिता पहुंच गए, जिसके बाद आरोपी फरार हो गया. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप की कोशिश और गलत तरीके से बंधक बनाने का दोषी ठहराया था. साक्ष्यों के अभाव में बदला गया फैसला हाई कोर्ट ने अपील की सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं था, जिससे रेप की कोशिश का आरोप संदेह से परे साबित हो सके. अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने स्त्री को कमरे में बंद किया, उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाई, जिससे उसकी मर्यादा भंग हुई. इसलिए आरोपी का कृत्य आईपीसी की धारा 354 के तहत दंडनीय माना गया, जबकि रेप की कोशिश के आरोप में राहत दी गई. पटना में ड्रैगन होटल में पुलिस की रेड, 3 नाबालिगों का रेस्क्यू, होटल संचालक समेत 18 गिरफ्तार The post ‘छाती दबाना रेप की कोशिश नहीं’, पटना HC के इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जानिए पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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शरद पवार का अगला कदम क्या होगा? सीएम फडणवीस संग देर रात हुई NCP नेताओं की बैठक

मंगलवार (14 जुलाई) देर रात एनसीपी के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग बैठक की. इसके बाद शरद पवार के अगले सियासी कदम को लेकर अटकलें फिर तेज हो गईं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर उनसे मुलाकात की. इसके बाद शाम को उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की. वहीं, सत्तारूढ़ एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी अलग से मुख्यमंत्री से बैठक की. बैठक में क्या चर्चा हुई, इस पर न तो नेताओं ने कुछ कहा और न ही मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई जानकारी दी गई. सत्तारूढ़ एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के सूत्रों का भी कहना है कि उन्हें बैठक का एजेंडा क्या था, इसकी जानकारी नहीं है. शरद गुट के विधायक शामिल होना चाहते हैं एनडीए में ये बैठकें ऐसे समय हुई हैं, जब शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) जुलाई 2023 में अजित पवार की बगावत के बाद सबसे बड़े नेतृत्वक फैसले के दौर से गुजर रही है. अजित पवार पार्टी तोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे. अब पार्टी के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (एसपी) के 10 में से कम से कम आधे विधायक एनडीए में शामिल होने के पक्ष में हैं. उनका मानना है कि विपक्ष में रहने से अपने क्षेत्रों के लिए विकास कार्यों का पैसा और प्रशासनी मंजूरी दिलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है. ये भी पढ़ें: फडणवीस ने 2,430 दिनों तक सीएम पद पर रहने का बनाया रिकॉर्ड, शरद पवार को छोड़ा पीछे हाल ही में जयंत पाटिल ने भी पार्टी विधायकों से कहा था कि बड़ी संख्या में विधायक एनडीए के साथ जाने के पक्ष में हैं. हालांकि, शरद पवार ने अब तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है. उन्होंने चुप्पी साध रखी है और पार्टी आगे क्या फैसला करेगी, इसका भी कोई संकेत नहीं दिया है. कितने विधायक और सांसद हैं शदर पवार की पार्टी में? महाराष्ट्र की छह प्रमुख पार्टियों में शरद पवार की एनसीपी (एसपी) सबसे छोटी पार्टी है. उसके पास विधानसभा में 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद हैं. इसके बावजूद उसकी अहमियत बढ़ गई है. वजह यह है कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए आने वाले समय में परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक जैसे अहम कानूनों के लिए संसद में अपनी संख्या मजबूत करना चाहता है. ऐसे में पार्टी नेताओं का मानना है कि एनडीए, एनसीपी (एसपी) जैसी छोटी पार्टियों का समर्थन लेने के लिए तैयार हो सकता है. The post शरद पवार का अगला कदम क्या होगा? सीएम फडणवीस संग देर रात हुई NCP नेताओं की बैठक appeared first on Naya Vichar.

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आज होगी बिहार कैबिनेट की बैठक, युवाओं के लिए नौकरी, नई योजनाओं समेत लिए जा सकते हैं ये फैसले

Bihar Cabinet: बिहार कैबिनेट की बैठक आज शाम मुख्य सचिवालय स्थित मंत्रिमंडल कक्ष में होगी. इस बैठक में सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी समेत कई विभागों के मंत्री और अधिकारी शामिल होंगे. इस बैठक में कई विभागों से जुड़े मुख्य एजेंडों पर मुहर लग सकती है. बैठक के बाद शाम 6 बजे कैबिनेट ब्रीफिंग होगी. इन मुद्दों पर लिया जा सकता है फैसला आज की बैठक में बिहार के युवाओं के लिए नई नौकरी को लेकर फैसला लिया जा सकता है. कई विभागों में उनके लिए नई बहाली निकाली जा सकती है. प्रशासन की तरफ से साल 2030 तक 1 करोड़ युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य तय किया गया है. ऐसे में आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में उनसे जुड़ा फैसला लिया जा सकता है. इनके लिए भी योजनाओं पर हो सकती है चर्चा इसके अलावा नई योजनाओं को मंजूरी मिल सकती है. कई विभागों से जुड़ी स्त्रीओं, विधवा, बुजुर्गों और बिहार के लोगों के हित में नई योजनाओं पर मुहर लग सकती है. साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ा फैसला भी लिया जा सकता है. इस बैठक में राज्य में सड़क, फोरलेन, पुल समेत नए निर्माणों को भी मंजूरी मिल सकती है. बिहार में रोड के साथ-साथ रेल और हवाई कनेक्टिविटी पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है. 8 जुलाई को हुई बैठक में क्या हुआ था? इससे पहले 8 जुलाई को कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें 22 एजेंडों पर मुहर लगी थी. इसमें ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और शहरी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल थे. खासकर बिहार में तेज और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में कदम उठाया गया था. पटना से चार प्रमुख शहरों के बीच रैपिड रेल चलाने की मंजूरी दी गई थी. जानकारी के मुताबिक, पटना से मुजफ्फरपुर (हाजीपुर और सोनपुर होते हुए), पटना से बेगूसराय, पटना से आरा और पटना से गया जी के बीच रैपिड रेल चलाई जाएगी. सम्राट कैबिनेट में इन रूटों के लिए DPR तैयार करने की मंजूरी दे दी थी. राज्य में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के तहत चार कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. Also Read: आज की तस्वीरें: अभिषेक बंटी ने BJP कैंडिडेट नीरज सिन्हा को लगाया गले, शिक्षा मंत्री ने किया स्कूल का निरीक्षण, देखिए 5 खास तस्वीरें The post आज होगी बिहार कैबिनेट की बैठक, युवाओं के लिए नौकरी, नई योजनाओं समेत लिए जा सकते हैं ये फैसले appeared first on Naya Vichar.

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अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले के दो आरोपियों को जेल से बाहर ले गयी पुलिस, 14 घंटे तक करेगी पूछताछ

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft : अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है. बुधवार की सुबह पुलिस टीम जिला जेल पहुंची और आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद मामले के दो आरोपियों-सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और रामाशंकर मिश्रा को अपने साथ लेकर रवाना हुई. कोर्ट से 14 घंटे की पुलिस रिमांड मिलने के बाद अब दोनों से गहन पूछताछ की जाएगी. जांच एजेंसियां दोनों आरोपियों से पूछताछ कर कथित गबन के नेटवर्क, धन के लेन-देन और मामले में अन्य संभावित संलिप्त लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं. रिमांड के दौरान होगी गहन पूछताछ जांच अधिकारियों के अनुसार, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी की गणना और निगरानी से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाते थे. ऐसे में उनसे धन की गिनती, रिकॉर्ड के रखरखाव और कथित अनियमितताओं को लेकर विस्तार से पूछताछ की जाएगी. वहीं रामाशंकर मिश्रा से भी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी. पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. SIT की जांच पर टिकी निगाहें राम मंदिर चढ़ावा गबन के कथित मामले ने प्रदेश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) की निगरानी में आगे बढ़ रही है. अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं. रिमांड के दौरान मिली जानकारी के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है. यह भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर CEO पोस्ट के लिए होड़: 24 घंटे में 1000+ एप्लिकेशन, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने भी किया अप्लाई The post अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले के दो आरोपियों को जेल से बाहर ले गयी पुलिस, 14 घंटे तक करेगी पूछताछ appeared first on Naya Vichar.

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