Qatar : जोहार. आज है 15 जुलाई. बात आज से तीस साल पहले की है…
1996 की एक सुबह. दोहा में एक साधारण-सा स्टूडियो. कुछ कैमरे, सीमित संसाधन, लेकिन असीमित सपने. उस दिन किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इसी छोटे-से स्टूडियो से प्रसारित होने वाला एक समाचार चैनल आने वाले वर्षों में अरब दुनिया की नेतृत्व, वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का चेहरा बदल देगा. उसका नाम था- अल जजीरा.
ठीक उसी समय दुनिया का एक और परिवर्तन भी चुपचाप आकार ले रहा था. फारस की खाड़ी का एक छोटा-सा देश, जिसकी पहचान कभी मोती, मछली पकड़ने और प्राकृतिक गैस तक सीमित थी… स्वयं को एक नए युग के लिए तैयार कर रहा था.
डॉ. महीप के साथ इस खास इंटरव्यू में हम कतर, अल जजीरा और अमीर हमद बिन खलीफा अल थानी की कहानी के बारे में जानेंगे. डॉ. महीप पश्चिम एशिया के मामलों के जानकार और जाने-माने जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट हैं. इस बारे में वे कहते हैं:
‘किसी राष्ट्र की शक्ति केवल उसके भूगोल या सैन्य क्षमता से तय नहीं होती. उसकी असली ताकत इस बात में छिपी होती है कि वह दुनिया को अपनी कहानी किस तरह सुनाता है.’
आधुनिक बदलाव के शाहकार
इन सब बदलाव के केंद्र में थे कतर के अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी. ऐसे नेता जिन्होंने समझ लिया था कि इक्कीसवीं सदी में केवल तेल और गैस किसी राष्ट्र को महान नहीं बनाते. बल्कि विचार, शिक्षा, मीडिया और डिप्लोमेसी भी उतने ही जोरदार हथियार हैं.
आज जब कतर को मध्य-पूर्व यानि की पश्चिम एशिया की सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाली रीजनल-पावर में गिना जाता है, तो उसके पीछे केवल कारोबारी या तिजारती समृद्धि नहीं, बल्कि एक ऐसे सोच की झलक है, जो सालो-साल दूर की सोचता हो.
जब मीडिया बना राष्ट्रीय शक्ति
अल जजीरा की कहानी किसी व्यावसायिक मीडिया संस्थान की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दृष्टि की कहानी है.
1990 के दशक के मध्य में BBC Arabic Television का एक संयुक्त उपक्रम अचानक बंद हो गया. उसके अनेक अनुभवी अरब पत्रकार बेरोजगार हो गए. अधिकांश देशों ने इसे सामान्य घटना माना, लेकिन कतर ने इसमें अवसर देखा.
शेख हमद ने इन पत्रकारों को दोहा आने का निमंत्रण दिया. पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई और 1996 में अल जजीरा का जन्म हुआ.
यह केवल एक समाचार चैनल नहीं था, यह अरब मीडिया संस्कृति में एक क्रांति थी.
तुर्की का TRT, रूस का RT और चीन का ग्लोबल टाइम्स वह हासिल नहीं कर पाए, जो अल जजीरा ने कुछ ही सालों में कर दिखाया.
पहली बार किसी अरब चैनल ने सत्ता से असहज प्रश्न पूछे.
बहस को स्थान दिया.
विरोधी विचारों को भी मंच मिला.
‘दूसरी राय’ को महत्व देने की परंपरा विकसित हुई.
धीरे-धीरे अल जजीरा केवल अरब दुनिया का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का प्रभावशाली समाचार नेटवर्क बन गया.
डॉ. महीप के शब्दों में,
‘बीसवीं सदी में देशों ने सीमाओं की रक्षा के लिए सेनाएं बनाईं. इक्कीसवीं सदी में उन्होंने अपनी पहचान की रक्षा के लिए मीडिया संस्थान बनाए. अल जजीरा इसी परिवर्तन का सबसे प्रभावशाली उदाहरण है.’
ऊर्जा से बनी आर्थिक क्रांति
मीडिया के साथ-साथ शेख हमद ने वित्तीय स्थिति को भी नए सिरे से गढ़ा.
कतर के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार पहले से मौजूद थे, लेकिन उन्हें वैश्विक रणनीतिक संपत्ति में बदलना आसान नहीं था. तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के क्षेत्र में बड़े निवेश, आधुनिक बंदरगाहों का निर्माण और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों ने कतर को विश्व के अग्रणी LNG निर्यातकों में स्थापित कर दिया.
ऊर्जा से प्राप्त आय को तत्काल उपभोग में खर्च करने के बजाय भविष्य की पूंजी में बदला गया.
इसी सोच से Qatar Investment Authority की स्थापना हुई. दुनिया के प्रमुख वित्तीय केंद्रों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, बुनियादी ढाँचे, होटलों और रियल एस्टेट में निवेश कर कतर ने अपनी आर्थिक उपस्थिति वैश्विक बना दी.
यह केवल धन कमाने की रणनीति नहीं थी, यह भविष्य की सुरक्षा का मॉडल था.
रेगिस्तान में ज्ञान का शहर
दोहा के बाहरी हिस्से में विकसित Education City आधुनिक कतर की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है.
दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को एक ही परिसर में आमंत्रित करना केवल शैक्षणिक परियोजना नहीं थी. इसका उद्देश्य था कि कतर भविष्य में ज्ञान आधारित वित्तीय स्थिति का नेतृत्व कर सके.
डॉ. महीप और बताते हैं,
‘तेल समाप्त हो सकता है, गैस के दाम गिर सकते हैं, लेकिन शिक्षित समाज की क्षमता कभी समाप्त नहीं होती. यही कारण है कि शेख हमद ने विश्वविद्यालयों में निवेश को तेल के कुओं जितना ही महत्वपूर्ण माना.’
सॉफ्ट पावर की नई परिभाषा
बीसवीं सदी में शक्ति का अर्थ था- सेना, हथियार और भूभाग.
इक्कीसवीं सदी में शक्ति का अर्थ बदल गया.
अब एयरलाइंस भी शक्ति हैं. स्पोर्ट्स आयोजन भी शक्ति हैं. मीडिया भी शक्ति है. विश्वविद्यालय भी शक्ति हैं. निवेश भी शक्ति है.
कतर ने इस परिवर्तन को सबसे पहले समझा.
Qatar Airways ने दुनिया को जोड़ा.
अल-जज़ीरा ने विचारों को जोड़ा.
Education City ने ज्ञान को जोड़ा.
और FIFA World Cup 2022 ने पूरी दुनिया को दोहा पहुंचा दिया.
विश्व कप केवल फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं था. यह उस राष्ट्र का परिचय था जिसने दुनिया को दिखाया कि छोटा भूभाग वैश्विक महत्वाकांक्षा में बाधा नहीं बनता.
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अरब स्प्रिंग और अल जजीरा
2011 में जब ट्यूनीशिया से शुरू हुई जनआंदोलन की लहर मिस्र, लीबिया, यमन और अन्य देशों तक पहुंची, तब अल जजीरा केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं कर रहा था. वह अरब समाज की धड़कनों को दुनिया तक पहुंचा रहा था.
उसकी लाइव कवरेज ने वैश्विक दर्शकों को पहली बार अरब जनता की आकांक्षाओं से सीधे जोड़ा.
यही वह समय था जब यह स्पष्ट हुआ कि मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व का सक्रिय सहभागी भी बन चुका है.
यही कारण है कि अल जजीरा की प्रशंसा भी हुई और आलोचना भी. लेकिन एक बात निर्विवाद रही- उसने वैश्विक मीडिया की दिशा बदल दी.
जब पड़ोसियों ने घेरा
2017 में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने कतर पर राजनयिक तथा आर्थिक प्रतिबंध लगाए.
स्थल सीमा बंद कर दी गई… हवाई मार्ग बाधित हुए… आर्थिक दबाव बढ़ा… दुनिया को लगा कि छोटा-सा कतर झुक जाएगा…
लेकिन हुआ इसके विपरीत!
कतर ने नए समुद्री मार्ग विकसित किए.
घरेलू कृषि उत्पादन बढ़ाया.
तुर्किये, ईरान और अन्य साझेदारों के साथ व्यापार मजबूत किया.
डिजिटल वित्तीय स्थिति, खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर तेजी से काम हुआ.
डॉ. महीप बताते हैं,
‘नाकेबंदी ने कतर को कमजोर नहीं किया, उसने उसे अपनी कमजोरियां पहचानने और उन्हें ताकत में बदलने का अवसर दिया. संकट कभी-कभी राष्ट्रों के लिए सबसे बड़ा शिक्षक बन जाता है.’
मध्यस्थ कूटनीति की प्रयोगशाला
कतर की एक और विशेषता रही, उसने स्वयं को संघर्ष का पक्षकार कम और संवाद का मंच अधिक बनाया.
चाहे अफग़ानिस्तान में वार्ता हो, पश्चिम एशिया के अनेक विवाद हों या मानवीय सहायता के प्रयास- दोहा धीरे-धीरे वैश्विक संवाद का केंद्र बनता गया.
यह छोटे देशों की नई कूटनीति थी.
सैन्य शक्ति सीमित होने पर भी कूटनीतिक प्रभाव असीमित बनाया जा सकता है.
शेख हमद: एक राष्ट्र-निर्माता
इतिहास में कुछ नेता विकास करते हैं और कुछ राष्ट्र का चरित्र बदल देते हैं.
शेख हमद बिन खलीफा अल थानी दूसरे प्रकार के नेता थे.
उन्होंने कतर को केवल अमीर नहीं बनाया, आत्मविश्वासी बनाया.
उन्होंने केवल गगनचुंबी इमारतें नहीं बनाईं, वैश्विक संस्थान बनाए.
उन्होंने केवल प्राकृतिक गैस नहीं बेची, उन्होंने विचारों, शिक्षा, निवेश और संवाद का ऐसा तंत्र विकसित किया जिसने कतर को मध्य-पूर्व की नेतृत्व में अपरिहार्य बना दिया.
आज कतर की पहचान केवल ऊर्जा उत्पादक देश की नहीं, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की है जो अपनी सीमित भौगोलिक क्षमता के बावजूद वैश्विक विमर्श को प्रभावित कर सकता है.
युवाओं के लिए सबसे बड़ा सबक
कतर की कहानी केवल एक देश की कहानी नहीं है.
यह उस पीढ़ी की कहानी है जिसने यह समझ लिया कि भविष्य उन लोगों का होगा जो ज्ञान, नवाचार और संचार की शक्ति को समझेंगे.
डॉ. महीप अंत में बताते हैं,
‘इक्कीसवीं सदी में क्षेत्रीय शक्ति बनने के लिए केवल मजबूत सेना पर्याप्त नहीं है. आपको मजबूत विश्वविद्यालय, विश्वसनीय मीडिया, वैश्विक निवेश, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और दूरदर्शी नेतृत्व भी चाहिए. कतर ने इन सभी तत्वों को जोड़कर अपनी नई पहचान गढ़ी.’
और शायद यही अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी की सबसे बड़ी विरासत है.
उन्होंने दुनिया को सिखाया कि किसी राष्ट्र का आकार नहीं, उसकी दृष्टि इतिहास लिखती है. रेगिस्तान की रेत पर भी सभ्यताओं के नए अध्याय लिखे जा सकते हैं- यदि नेतृत्व में भविष्य देखने का साहस हो और समाज में उसे साकार करने का धैर्य.
आज जब युवा विश्व नेतृत्व को समझने का प्रयास करते हैं, तो कतर उन्हें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है-
प्राकृतिक संसाधन आपको समृद्ध बना सकते हैं, लेकिन विचार, शिक्षा, मीडिया और नेतृत्व ही आपको प्रभावशाली बनाते हैं.
यही आधुनिक कतर की असली कहानी है, और यही शेख हमद बिन खलीफा अल थानी को सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि भी.
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