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July 17, 2026

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कल 18 जुलाई का राशिफल: किस राशि को मिलेगा धन लाभ, किसे रिश्तों और खर्चों में बरतनी होगी सावधानी?

Kal 18 July 2026 Ka Rashifal: कल कुछ राशियों को नौकरी और व्यापार में नए अवसर, धन लाभ और सम्मान मिलने के संकेत हैं, जबकि कुछ लोगों को आर्थिक मामलों, रिश्तों और विरोधियों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है. कल 18 जुलाई 2026, शनिवार का राशिफल पढ़ें और जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए करियर, व्यापार, धन, परिवार, प्रेम और स्वास्थ्य के लिहाज से दिन कैसा रहेगा. मेष राशि के जातकों के लिए शनिवार करियर के लिहाज से सकारात्मक रहेगा. नौकरीपेशा लोग नए अवसरों की ओर आकर्षित होंगे, जिनका भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है. वृषभ राशि वाले अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहेंगे, हालांकि बढ़ते खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा. मिथुन राशि के लोग घर की सजावट या बदलाव से सकारात्मक ऊर्जा महसूस करेंगे और प्रेम संबंधों में भी मधुरता बढ़ेगी. कर्क राशि वालों के लिए परिवार से खुशियां मिलने के साथ किसी खास व्यक्ति से मुलाकात के योग बन रहे हैं, जो दिल के बेहद करीब हो सकता है. सिंह राशि वालों को परिवार, खासकर संतान से जुड़ी कोई अच्छी समाचार मिल सकती है, जिससे मन प्रसन्न रहेगा. कन्या राशि के जातकों के जीवन में नए व्यक्ति की एंट्री हो सकती है, लेकिन करीबी लोगों के साथ मतभेद भी उभर सकते हैं, इसलिए धैर्य रखें. तुला राशि वालों के लिए आर्थिक लाभ के मजबूत संकेत हैं. परिवार या रिश्तेदारों की ओर से सहयोग मिलने की संभावना है. वृश्चिक राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और यदि किसी अपने से मनमुटाव चल रहा है तो उसे दूर करने का यह सही समय रहेगा. धनु राशि वालों की सामाजिक और कार्यक्षेत्र में स्थिति मजबूत होगी, हालांकि जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाए रखने की जरूरत होगी. मकर राशि के जातकों को व्यापारिक यात्रा और पुराने बकाया धन से लाभ मिल सकता है, लेकिन आलोचनाओं से घबराने की बजाय उन्हें सीख के रूप में लें. कुंभ राशि वालों के लिए रोजगार और करियर से जुड़े नए अवसर सामने आ सकते हैं तथा दांपत्य जीवन भी सुखद रहेगा. मीन राशि के जातकों को आर्थिक मामलों और जरूरी कार्यों में कुछ रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है. विरोधियों से सतर्क रहें और किसी भी निर्णय में जल्दबाजी से बचें. The post कल 18 जुलाई का राशिफल: किस राशि को मिलेगा धन लाभ, किसे रिश्तों और खर्चों में बरतनी होगी सावधानी? appeared first on Naya Vichar.

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NEET UG में 11 लाख से ज्यादा पास, MBBS की सीटें सिर्फ 1.36 लाख, जानें एडमिशन का पूरा गणित

NEET UG 2026 Counselling: नीट यूजी परीक्षा में इस साल करीब 11.21 लाख उम्मीदवार NEET UG में क्वालिफाई हुए हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेजों में सीटें इनकी तुलना में काफी कम हैं. नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) की तरफ से जारी सीट मैट्रिक्स रिपोर्ट के अनुसार, MBBS कोर्स के लिए कुल 823 कॉलेजों में 1,36,939 सीटें हैं. ऐसे में एडमिशन कैसे होता है, काउंसलिंग में क्या-क्या होता है, इन सभी सवालों का जवाब यहां जानते हैं. 11 लाख छात्रों के लिए कितनी हैं MBBS सीटें? नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के हालिया आंकड़ों के अनुसार देशभर में मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके बावजूद सीटों और उम्मीदवारों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. सीटों की डिटेल्स नीचे टेबल में देख सकते हैं- विवरण आंकड़े कुल मेडिकल कॉलेज 823 कुल MBBS सीटें 1,36,939 प्रशासनी MBBS सीटें 63,296 प्राइवेट MBBS सीटें 73,643 हाल में बढ़ी नई सीटें 9,911 NEET UG 2026 में क्वालिफाई छात्र लगभग 11.21 लाख अगर इन आंकड़ों को आसान भाषा में समझें तो लगभग हर 8 क्वालिफाई छात्रों में से सिर्फ 1 छात्र को MBBS सीट मिल पाती है. वहीं अगर सिर्फ प्रशासनी मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो मुकाबला और भी कठिन हो जाता है. यहां लगभग हर 17 छात्रों में से सिर्फ 1 छात्र को प्रशासनी सीट मिलने की संभावना रहती है. NEET UG Counselling की रेस NEET का रिजल्ट आने के बाद एडमिशन सीधे कॉलेज में नहीं होता. इसके लिए काउंसलिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. आपकी रैंक, कैटेगरी, पसंदीदा कॉलेज और उपलब्ध सीटों के आधार पर सीट अलॉट की जाती है. काउंसलिंग के दौरान छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स भरने होते हैं. इसके बाद मेरिट के आधार पर सीट आवंटित होती है. यदि पहली पसंद नहीं मिलती है तो अगले राउंड में बेहतर कॉलेज मिलने का मौका भी मिलता है. AIQ और State Quota में क्या होता है अंतर? MBBS एडमिशन की काउंसलिंग मुख्य रूप से दो हिस्सों में होती है- AIQ और स्टेट कोटा. इसमें ऑल इंडिया कोटा यानी AIQ में 15% सीटें होती हैं. जबकि स्टेट कोटा में 85 फीसदी सीटें रहती हैं. ऑल इंडिया कोटा (AIQ)- इसकी काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) कराती है. इसमें प्रशासनी मेडिकल कॉलेजों की 15 प्रतिशत सीटें, AIIMS, JIPMER, डीम्ड यूनिवर्सिटी और कई सेंट्रल लेवल के इंस्टीट्यूट की सीटें शामिल होती हैं. देश का कोई भी NEET क्वालिफाई छात्र इसमें आवेदन कर सकता है. स्टेट कोटा- इसकी काउंसलिंग संबंधित राज्य की एजेंसी कराती है. जैसे बिहार में BCECEB और उत्तर प्रदेश में DGME. इसमें राज्य के प्रशासनी मेडिकल कॉलेजों की 85 प्रतिशत सीटें और राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें शामिल रहती हैं. अधिकांश मामलों में आवेदन के लिए उस राज्य का डोमिसाइल जरूरी होता है. NEET UG में रैंक वाइज डिटेल्स 4 राउंड में होगी NEET UG काउंसलिंग MBBS एडमिशन एक ही बार में पूरा नहीं होता. इसके लिए कई राउंड आयोजित किए जाते हैं. बता दें कि हर राउंड में समय पर रजिस्ट्रेशन, चॉइस फिलिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करना बेहद जरूरी होता है राउंड 1– रजिस्ट्रेशन, कॉलेज चॉइस भरना और पहली सीट अलॉटमेंट. इसमें फ्री एग्जिट का विकल्प भी मिलता है. राउंड 2- बची हुई सीटों और अपग्रेडेशन के लिए यह राउंड होता है. मॉप-अप राउंड- जिन सीटों पर अब तक एडमिशन नहीं हुआ, उन्हें भरने के लिए यह चरण आयोजित किया जाता है. स्ट्रे वैकेंसी राउंड- आखिरी बची हुई सीटों पर एडमिशन इसी चरण में होता है. NEET का रिजल्ट सिर्फ पहला पड़ाव है. सही कॉलेज चुनना, समय पर काउंसलिंग में हिस्सा लेना और सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना उतना ही जरूरी है. कई छात्र अच्छी रैंक होने के बावजूद गलत चॉइस फिलिंग या समय पर रिपोर्टिंग नहीं करने के कारण बेहतर सीट से चूक जाते हैं. ये भी पढ़ें: NEET UG में बिहार का जलवा, टॉप 10 में आयुष और रिया, देखें टॉपर्स लिस्ट The post NEET UG में 11 लाख से ज्यादा पास, MBBS की सीटें सिर्फ 1.36 लाख, जानें एडमिशन का पूरा गणित appeared first on Naya Vichar.

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मुर्शिदाबाद रेल हादसा: गेटमैन गिरफ्तार, मृतकों के परिजनों को रेलवे देगा 10 लाख रुपये मुआवजा

मुर्शिदाबाद. मुर्शिदाबाद ट्रेन हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है. इस बीच, रेलवे ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और घायलों के परिवारों को 2.5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है. गैटमैन को गिरफ्तार कर लिया गया है. सुपरवाइजर को पहले ही निलंबित कर दिया गया था. रेलवे इस पूरे मामले की जांच कर रही है. रेल सेवाएं बाधित ट्रेन दुर्घटना के कारण दोपहर बाद तक रेल सेवाएं बाधित रहीं. रेलखंड पर लगाए गए अवरोध के कारण अजीमगंज से कटवा जाने वाली ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं. ट्रेनों को कटवा स्टेशन पर रोक दिया गया है. कटवा स्टेशन पर सैकड़ों ट्रेन यात्री इंतजार कर रहे हैं. अब तक चार लोगों की मौत मुर्शिदाबाद के बरहमपुर में 7 तारीख की सुबह चलती ट्रेन के चपेट में आने से एक स्कूल जा रही कार हादसे की शिकार हो गयी. इस हादसे में दो बच्चों समेत तीन लोगों को मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि एक शिशु की मौत इलाज के दौरान हुई है. डीआरएम के नेतृत्व में जांच टीम पहुंची हादसे के बाद एडीआरएम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल घटनास्थल पर पहुंचा है. पूर्वी रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे ऐसे मामलों में ज़ीरो टॉलरेंस नीति का पालन करता है. पूरी घटना की जांच की जाएगी. घायलों के इलाज के लिए एक मेडिकल टीम भेजी गई है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें भाजपा विधायक ने रखी मांग बरहामपुर के विधायक सुब्रता मैत्रा ने कहा कि इतने सारे छात्रों की मौत दुखद और पीड़ादायक है. रेलवे को इस बात की जांच करनी चाहिए कि इतने सारे स्कूली छात्रों की जान क्यों गई. अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था का कोई अभाव है. Also Read: Murshidabad Rail Accident: मुर्शिदाबाद में किसकी लापरवाही, रेलवे ने दो को किया निलंबित The post मुर्शिदाबाद रेल हादसा: गेटमैन गिरफ्तार, मृतकों के परिजनों को रेलवे देगा 10 लाख रुपये मुआवजा appeared first on Naya Vichar.

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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: खुद बनाएगी बिजली, किराया सिर्फ ₹5 से शुरू, जानें और क्या है खास

हिंदुस्तान ने रचा इतिहास! पेश है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जो अपनी बिजली खुद बनाएगी. सबसे खास बात, इसका किराया सिर्फ ₹5 से शुरू होता है. जानिए इस अनूठी ट्रेन के बारे में सब कुछ. The post देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: खुद बनाएगी बिजली, किराया सिर्फ ₹5 से शुरू, जानें और क्या है खास appeared first on Naya Vichar.

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क्या ‘3 इडियट्स’ की कहानी सोनम वांगचुक पर बनी थी? आमिर खान ने दूर की गलतफहमी, बोले- चतुर इस बार गलत

आमिर खान ने आखिरकार उस पुराने दावे पर चुप्पी तोड़ी, जिसमें कहा जाता था कि ‘3 इडियट्स’ का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित था. लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के दौरान, जहां सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर चर्चा हो रही थी, वहीं आमिर ने साफ कहा कि जब राजकुमार हिरानी की 2009 की सुपरहिट फिल्म बनाई जा रही थी, तब न तो उन्हें और न ही फिल्म के राइटर्स को सोनम वांगचुक के बारे में कोई जानकारी थी, यानी फिल्म का उनके जीवन से कोई सीधा संबंध नहीं था. Aamir Khan Said ‘Chatur is wrong this time’: आमिर खान बोले ‘चतुर इस बार गलत’ ओमी वैद्य के हालिया वीडियो का जिक्र करते हुए, आमिर खान ने मजाकिया अंदाज में कहा, “लगता है चतुर इस बार गलत साबित हो गया.” दरअसल फिल्म फेस्टिवल के दौरान ऑडियंस में मौजूद एक शख्स ने कहा, “हमारी पीढ़ी पर ‘3 इडियट्स’ का काफी असर रहा है और हमें हमेशा बताया गया कि यह फिल्म सोनम वांगचुक से प्रेरित थी.” Is 3 Idiots Inspired By Sonam Wangchuk: क्या सोनम वांगचुक से प्रेरित है 3 इडियट्स इस पर आमिर खान ने साफ करते हुए कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है. यह सिर्फ एक गलतफहमी है. जब हम ‘3 इडियट्स’ बना रहे थे, तब मैं और हमारी टीम सोनम वांगचुक के बारे में जानते ही नहीं थे.” आमिर ने आगे कहा, “जब ‘3 इडियट्स’ लिखी जा रही थी, तब न तो फिल्म के दोनों राइटर्स राजू हिरानी और अभिजात जोशी, और न ही मुझे सोनम वांगचुक के बारे में जानकारी थी, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि हम उनके काम की इज्जत नहीं करते, सम्मान देने के लिए यह जरूरी नहीं कि ‘3 इडियट्स’ का किरदार उन्हीं पर आधारित हो. खुद सोनम वांगचुक भी कई बार साफ कर चुके हैं कि फिल्म का वह किरदार उनसे प्रेरित नहीं था.” Sonam Wangchuk Had Said This: सोनम वांगचुक कह चुके हैं यह बात सोनम वांगचुक भी साफ कर चुके हैं कि उनका ‘3 इडियट्स’ से कोई संबंध नहीं है. उनका कहना था कि फिल्म बनाने से पहले न तो मेकर्स ने उनसे कभी संपर्क किया और न ही किसी तरह की अनुमति ली, जबकि लोग अक्सर उनकी तुलना फिल्म के ‘फुंसुख वांगडू’ किरदार से करते रहे. Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनका कहना है कि NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रशासन जवाब दे. उनके इस आंदोलन को बॉलीवुड सितारों, फिल्ममेकर्स, डिजिटल क्रिएटर्स और अन्य चर्चित हस्तियों का समर्थन मिल रहा है. ये भी पढ़ें: ‘हम सभी उनकी सेहत और जिंदगी को लेकर चिंतित हैं’, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर आमिर खान का रिएक्शन ये भी पढ़ें: आमिर खान-गौरी स्प्रैट की शादी में क्यों नहीं पहुंचीं रीना दत्ता और किरण राव, करीबी दोस्त ने बताई वजह The post क्या ‘3 इडियट्स’ की कहानी सोनम वांगचुक पर बनी थी? आमिर खान ने दूर की गलतफहमी, बोले- चतुर इस बार गलत appeared first on Naya Vichar.

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FIFA World Cup 2026 Final: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने क्यों बनाई दूरी? जानिए कारण

Argentina president Javier Milei World Cup superstition: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वह फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल मुकाबले में शामिल नहीं होंगे. यह मुकाबला अर्जेंटीना और स्पेन के बीच अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित मेटलाइफ स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाना है. दुनिया भर के शीर्ष नेताओं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो समेत कई विशिष्ट अतिथियों के वीआईपी बॉक्स में मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन मिलेई ने साफ कर दिया कि वह अर्जेंटीना में अपने आधिकारिक आवास ओलिवोस से ही मैच देखेंगे. अंधविश्वास के आगे झुके राष्ट्रपति मिलेई ब्यूनस आयर्स के स्थानीय रेडियो स्टेशन एल ऑब्जर्वाडोर से बातचीत में राष्ट्रपति मिलेई ने अमेरिका जाने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “No way” (बिल्कुल नहीं). उन्होंने बताया कि विश्व कप में अर्जेंटीना के अब तक स्पोर्ट्से गए सभी सात मुकाबले उन्होंने अपने ओलिवोस स्थित प्रशासनी आवास के एक ही स्थान पर बैठकर देखे हैं. टीम ने सभी मैच जीते हैं, जिनमें इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 की रोमांचक सेमीफाइनल जीत भी शामिल है. ऐसे में वह अपनी इस “काबाला” (शुभ मान्यता या स्पोर्ट्स से जुड़ा अंधविश्वास) को किसी भी कीमत पर तोड़ना नहीं चाहते. YPF की जैकेट बनी ‘लकी चार्म’ राष्ट्रपति मिलेई का यह अंधविश्वास सिर्फ एक जगह बैठकर मैच देखने तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि हर मैच के दौरान वह अपने आवास की हीटिंग बंद रखते हैं और अर्जेंटीना की प्रशासनी तेल कंपनी YPF की ब्रांडेड मोटी जैकेट पहनकर मैच देखते हैं. उनके मुताबिक इस जैकेट की “ताकत” उन्हें स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में महसूस हुई. राष्ट्रपति मिलेई का अजीबोगरीब ‘लकी चार्म’ “स्विट्जरलैंड वाले मैच में मुझे बहुत गर्मी लग रही थी. मैंने जैकेट उतार दी और उसी दौरान हमारी टीम ने गोल खा लिया. मैंने तुरंत जैकेट दोबारा पहन ली और उसके बाद से उसे कभी नहीं उतारा.” उनका मानना है कि उसी पल से यह जैकेट टीम के लिए शुभ साबित हुई और तब से यह उनके मैच देखने की रस्म का स्थायी हिस्सा बन गई है. फुटबॉल में ‘काबाला’ का खास महत्व अर्जेंटीना में फुटबॉल केवल स्पोर्ट्स नहीं बल्कि भावनाओं और परंपराओं का हिस्सा है. यहां खिलाड़ी, कोच, प्रशंसक और कई बार राजनेता भी अपनी-अपनी “काबाला” यानी शुभ रस्मों का पालन करते हैं. माना जाता है कि यदि जीत दिलाने वाली दिनचर्या में बदलाव किया जाए तो टीम का भाग्य बदल सकता है. इसी सांस्कृतिक सोच के चलते राष्ट्रपति मिलेई भी अपनी जीत वाली दिनचर्या को बदलने के पक्ष में नहीं हैं. 30 साल पुरानी घटना बनी वजह मिलेई की सावधानी के पीछे अर्जेंटीना की नेतृत्वक और फुटबॉल संस्कृति से जुड़ी एक पुरानी घटना भी बताई जाती है. 1990 के फीफा विश्व कप के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनेम ने टीम से मुलाकात की थी. इसके तुरंत बाद अर्जेंटीना अपने पहले मुकाबले में अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली कैमरून की टीम से 1-0 से हार गया था. उस हार के बाद बड़ी संख्या में प्रशंसकों ने मेनेम को “मुफा” यानी अपशकुनी या बदकिस्मती लाने वाला व्यक्ति कहना शुरू कर दिया. तब से अर्जेंटीना में यह धारणा मजबूत हो गई कि मौजूदा राष्ट्रपति को विश्व कप के बड़े मुकाबलों में स्टेडियम जाकर टीम का समर्थन नहीं करना चाहिए. परंपरा निभा रहे हैं मिलेई राष्ट्रपति मिलेई का मानना है कि यदि उनकी अनुपस्थिति से टीम का मनोबल और किस्मत दोनों बरकरार रहती हैं, तो यही बेहतर है. इसलिए उन्होंने हजारों किलोमीटर दूर न्यू जर्सी जाने के बजाय अपने ओलिवोस स्थित आवास में उसी कुर्सी, उसी कमरे और उसी जैकेट के साथ फाइनल देखने का फैसला किया है. दुनिया की नजर फाइनल पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल का रोमांच अपने चरम पर है, जहां अर्जेंटीना लगातार दूसरा खिताब जीतकर इतिहास रचने की कोशिश में है, वहीं स्पेन की टीम विश्व चैंपियन बनने के पक्के इरादे के साथ मैदान में उतर रही है. इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में जहां खिलाड़ियों की रणनीतियां और कौशल चर्चा का केंद्र हैं, वहीं अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई का एक खास ‘लकी रूटीन’ भी खूब सुर्खियों में है. उनके इस अनूठे अंधविश्वास ने फुटबॉल जगत में एक दिलचस्प बहस छेड़ दी है कि क्या स्पोर्ट्स में ये निजी मान्यताएं और टोटके खिलाड़ियों या प्रशंसकों के लिए केवल एक अंधविश्वास हैं, या फिर ये उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने का एक जरिया बन जाते हैं. इसे भी पढ़े- जश्न के बीच मेसी ने खोला इंग्लैंड का पेनल्टी प्लान, तस्वीर हुई वायरल The post FIFA World Cup 2026 Final: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने क्यों बनाई दूरी? जानिए कारण appeared first on Naya Vichar.

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Corona Alert: क्या फिर लौट रहा है कोरोना? इस राज्य में मिले 12 नए केस, 4 की मौत

Corona Alert: आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त जी. वीरपांडियन ने बताया कि 26 जून से 16 जुलाई के बीच राज्य में कोविड-19 के 12 नए मामले सामने आए. इनमें से चार मरीजों की मौत हो गई. अधिकारियों के अनुसार, इन सभी लोगों को पहले से दूसरी गंभीर बीमारियां (को-मॉर्बिडिटी) भी थीं. स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि जिन चार मरीजों की मौत हुई, वे पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. इन्हीं पुरानी बीमारियों की वजह से उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई. आंध्र प्रदेश में कोविड-19 का पहला मामला 26 जून को आया वीरपांडियन ने बताया कि कोविड-19 से हुई चार मौतों में से तीन मरीज कडप्पा जिले के थे, जबकि एक मरीज की मौत काकीनाडा जिले में हुई. स्वास्थ्य आयुक्त के मुताबिक, साल 2026 में आंध्र प्रदेश में कोविड-19 का पहला मामला 26 जून को कडप्पा जिले में मिला था. इसके बाद 1 जुलाई से 16 जुलाई के बीच राज्य में 11 और नए संक्रमित मरीज सामने आए. किस जिले में कितने कोरोना के मामले आए? स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, दो लोग संक्रमित व्यक्तियों के करीब संपर्क में आने के बाद कोविड-19 की चपेट में आए. इससे संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति तक फैलने की पुष्टि हुई. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सबसे ज्यादा 8 कोविड-19 मामले कडप्पा जिले में सामने आए. इसके बाद गुंटूर में 2 मामले दर्ज हुए, जबकि विशाखापट्टनम और काकीनाडा में 1-1 संक्रमित मरीज मिला. ये भी पढ़ें: बलिया में कोरोना की वापसी, सहतवार की स्त्री मिली संक्रमित, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की निगरानी स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि 26 जून से 15 जुलाई के बीच आंध्र प्रदेश में 67 लोगों की कोविड-19 जांच की गई. इनमें 11 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि 12वां संक्रमित मरीज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) में जांच के दौरान मिला. संक्रमित लोगों में से तीन मरीज घर पर ही आइसोलेशन में हैं. दो मरीज अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, जबकि तीन लोग पूरी तरह ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं. किस राज्य में कितने मिले कोरोना पॉजिटिव? स्वास्थ्य आयुक्त ने बताया कि 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच देशभर में कोविड-19 के 339 नए मामले दर्ज किए गए हैं. सबसे ज्यादा 115 मामले केरल में मिले. इसके बाद कर्नाटक में 64, महाराष्ट्र में 43, तमिलनाडु में 39, अंडमान-निकोबार और दिल्ली में 18-18, राजस्थान में 12 मामले सामने आए. इसके अलावा अन्य राज्यों में भी कुछ नए संक्रमित मरीज मिले हैं. The post Corona Alert: क्या फिर लौट रहा है कोरोना? इस राज्य में मिले 12 नए केस, 4 की मौत appeared first on Naya Vichar.

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बिहार पंचायत चुनाव 2026: समय पर ही होंगे चुनाव, परिसीमन की वजह से टलने की खबरों पर मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या कहा

Deepak Prakash On Bihar Panchayat Chunav: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. कहा जा रहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण चुनाव अगले साल तक टल सकते हैं. लेकिन नया विचार से विशेष बातचीत में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इन अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि प्रशासन चुनाव समय पर कराने की दिशा में काम कर रही है और फिलहाल चुनाव टालने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है. परिसीमन क्यों करा रही है प्रशासन? दरअसल, प्रशासन ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाओं का नए सिरे से परिसीमन करने का फैसला लिया है. यह प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर होगी. राज्य में पिछले 36 वर्षों से पंचायतों का परिसीमन नहीं हुआ है. इस दौरान कई इलाकों की आबादी में बड़ा बदलाव आया है. ऐसे में प्रशासन चाहती है कि नई आबादी के अनुसार पंचायतों की सीमाएं तय हों, ताकि सभी क्षेत्रों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके. चुनाव टालने की समाचारों पर मंत्री ने क्या कहा? कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अगस्त 2026 से परिसीमन शुरू होगा, अप्रैल 2027 तक चलेगा और इसके बाद आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी होने पर ही चुनाव होंगे. इस पर मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की पूरी कोशिश है कि पंचायत चुनाव इसी साल के अंत तक संपन्न करा दिए जाएं. उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव टालने की समाचारें सही नहीं हैं और अभी तक प्रशासन ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है. नए परिसीमन से क्या होगा फायदा? प्रशासन का मानना है कि नए परिसीमन के बाद पंचायतों की सीमाएं वर्तमान आबादी के अनुरूप तय होंगी. इससे सभी क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा. साथ ही पंचायतों में भौगोलिक और सामाजिक संतुलन भी मजबूत होगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें 2021 में कोरोना की वजह से टले थे चुनाव बिहार में इससे पहले 2021 में कोरोना महामारी के कारण पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो पाए थे. उस समय विशेष परिस्थितियों में चुनाव आगे बढ़ाए गए थे और पंचायतों के कामकाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी. हालांकि इस बार स्थिति अलग है. प्रशासन का कहना है कि चुनाव टालने का कोई फैसला नहीं हुआ है और कोशिश यही है कि समय पर ही चुनाव कराया जाए. फिलहाल प्रशासन की ओर से यही स्पष्ट किया गया है कि पंचायत चुनाव समय पर कराने की तैयारी चल रही है. परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन चुनाव अगले साल टलेंगे, ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में फिलहाल बिहार में पंचायत चुनाव 2026 तय समय पर होने की ही संभावना बनी हुई है. Also Read: सम्मान नहीं मिला या कुछ और? जानिए क्यों RJD से इस्तीफा देने पर मजबूर हुए मृत्युंजय तिवारी, अंदर की पूरी कहानी The post बिहार पंचायत चुनाव 2026: समय पर ही होंगे चुनाव, परिसीमन की वजह से टलने की समाचारों पर मंत्री दीपक प्रकाश ने क्या कहा appeared first on Naya Vichar.

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मुजफ्फरपुर के रोहुआ में गैस पाइप लाइन फटी, 5 छात्राएं बेहोश, अस्पताल में भर्ती, स्कूल की छुट्टी

Muzaffarpur Gas Pipeline Blast: मुशहरी थाना क्षेत्र में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया. बुडको द्वारा नाला निर्माण के दौरान पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे तेज गैस रिसाव शुरू हो गया. गैस की चपेट में आने से वहां से गुजर रही पांच स्कूली छात्राएं दम घुटने के कारण बेहोश हो गईं. घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे परिजन इन छात्राओं की बिगड़ी तबीयत अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, बेहोश होने वाली छात्राओं में दसवीं कक्षा की दिव्या, नाहिद, अमृता और राखी के साथ-साथ ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा विशाखा शामिल हैं. गैस रिसाव के कारण सभी को सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद वे बेहोश हो गईं. बुडको के नाला निर्माण के दौरान हुआ हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, बुडको की ओर से नाला निर्माण कार्य चल रहा था. इसी दौरान खुदाई में पीएनजी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और गैस का रिसाव शुरू हो गया. कुछ ही देर में आसपास गैस फैल गई, जिससे वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई. इसी स्कूल की छात्राएं हुईं बेहोश मौके पर पहुंची प्रशासन और तकनीकी टीम घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और गैस पाइपलाइन ऑपरेटर की तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई. तकनीकी टीम ने तत्काल गैस आपूर्ति बंद कर फटी पाइपलाइन की मरम्मत शुरू कर दी. साथ ही आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई. हादसे की जांच शुरू पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाया जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और पाइपलाइन कैसे क्षतिग्रस्त हुई. प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. View on Instagram The post मुजफ्फरपुर के रोहुआ में गैस पाइप लाइन फटी, 5 छात्राएं बेहोश, अस्पताल में भर्ती, स्कूल की छुट्टी appeared first on Naya Vichar.

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यूपी के विदेशी कारोबार पर ईरान-अमेरिका तनाव की मार, यूरोप ने 6 हजार करोड़ के ऑर्डर रोके

UP News: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार पर भी दिखने लगा है. समुद्री परिवहन में बढ़ी अनिश्चितता के कारण यूरोप के कई आयातकों ने प्रदेश से भेजे जाने वाले माल की खेप फिलहाल रोक दी है. इसका असर करीब 6 हजार करोड़ के निर्यात ऑर्डरों पर पड़ा है, जिससे कई प्रमुख उद्योगों के कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. यूरोप के खरीदारों ने फिलहाल रोकी शिपमेंट निर्यातकों के मुताबिक जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सहित कई यूरोपीय देशों के आयातकों ने अगली सूचना तक नई खेप स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अगस्त और सितंबर में भेजे जाने वाले बड़े पैमाने के ऑर्डर फिलहाल गोदामों में ही रखे हुए हैं. कारोबारियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो तय समय पर आपूर्ति प्रभावित होगी, जिससे कई ऑर्डर रद्द होने का खतरा भी बढ़ सकता है. प्रदेश के कई उद्योगों पर सीधा असर उत्तर प्रदेश से हर महीने लगभग तीन हजार से 3,200 करोड़ का सामान यूरोप भेजा जाता है. कानपुर का लेदर और इंजीनियरिंग उद्योग, आगरा का फुटवियर कारोबार, नोएडा का गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर, मुरादाबाद का ब्रास हैंडीक्राफ्ट और वाराणसी के कालीन व हस्तशिल्प उत्पाद यूरोपीय बाजार में बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं. मौजूदा स्थिति में इन सभी उद्योगों की तैयार खेप गोदामों में रुकी हुई है. देरी से डिलीवरी पड़ सकती है भारी काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (CLE) के पूर्व रीजनल चेयरमैन असद इराकी का कहना है कि यूरोपीय बाजार में समय पर माल पहुंचाना सबसे अहम माना जाता है. यदि तय समय सीमा के भीतर शिपमेंट नहीं पहुंचती है तो आर्थिक जुर्माना लग सकता है. साथ ही वर्षों से बने कारोबारी संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है. उनका कहना है कि यदि तनाव लंबा चला तो समुद्री मालभाड़ा, बीमा प्रीमियम और कंटेनरों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी बढ़ेंगी. त्योहारी सीजन के कारोबार पर भी असर संभव हिंदुस्तानीय निर्यात परिषद के प्रमुख आलोक श्रीवास्तव के अनुसार अगस्त और सितंबर के लिए तय लगभग 6 हजार करोड़ के ऑर्डर फिलहाल रुके हुए हैं. यदि शिपमेंट समय पर रवाना नहीं हो सकी तो त्योहारी सीजन के लिए मिलने वाले नए ऑर्डर भी प्रभावित हो सकते हैं. इससे वैश्विक बाजार में हिंदुस्तानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ने की आशंका है. लंबा खिंचा तनाव तो बढ़ सकती हैं ये मुश्किलें समय पर माल नहीं पहुंचने पर ऑर्डर रद्द होने की आशंका. तैयार माल गोदामों में रुके रहने से कंपनियों की पूंजी फंस सकती है. समुद्री मालभाड़ा और बीमा खर्च बढ़ने से निर्यात लागत में इजाफा होगा. विदेशी खरीदारों से भुगतान मिलने में देरी हो सकती है. Also Read:बहराइच जिले से दिल दहला देने वाली घटना, मगरमच्छ ने 12 साल के शिशु को जिंदा निगला The post यूपी के विदेशी कारोबार पर ईरान-अमेरिका तनाव की मार, यूरोप ने 6 हजार करोड़ के ऑर्डर रोके appeared first on Naya Vichar.

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