एजुकेशन सिस्टम का सच दिखाती 7 बेमिसाल बॉलीवुड फिल्में
सिनेमा को समाज का आईना कहा जाता है. हिंदुस्तानीय सिनेमा में कई ऐसी फिल्में बनी है, जो शिक्षा व्यवस्था,और चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं. आइये जानते हैं कौन सी हैं, वो फिल्में जो पढ़ाई को अलग तरीके से दिखाती हैं. 3 इडियट्स (2009) इरफान खान और सबा कमर की हिंदी मीडियम की कहानी इंग्लिश मीडियम स्कूल में एडमिशन को लेकर है. फिल्म में दिखाया गया है की कैसे राज बत्रा (इरफ़ान) और मीता (सबा) अपने बच्ची को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने के लिए अलग ही स्ट्रगल करते हैं. सुपर 30 (2019) रानी मुखर्जी की हिचकी दर्शको को सरप्राइज करती है, जब उन्हें पता चलता है कि ‘टॉरेंट सिंड्रोम’ जैसे बीमारी होने के बावजूद नैना माथुर (रानी मुखर्जी) हौसला नहीं टूटता और वह बच्चो को साथ लाने और पढ़ाने को लेकर कितनी कॉंफिडेंट है. कहानी स्टूडेंट्स और टीचर्स के बीच के रिलेशन को दिखाती है और कैसे सही टीचर किसी भी स्टूडेंट्स की जिंदगी बदल सकते है. तारे जमीन पर (2007) जूही चावला (ज्योति) और शबाना आजमी (विद्या) की यह फिल्म दो ऐसे टीचर की कहानी है, जो काफी डेडिकेटेड है और चाहती है उनके स्टूडेंट्स अच्छे मार्क्स लाए और आगे बढ़े. फिल्म में मोड़ तब आता है, जब स्कूल की नई प्रिंसिपल (दिव्या दत्ता) की एंट्री होती है और फिर वह उस स्कूल में अनुभवी शिक्षकों को परेशान करना शुरू कर देती है. फिल्म स्कूल मैनेजमेंट और भ्रष्ट एजुकेशन सिस्टम को हाईलाइट करती है. छिछोरे (2019) सुशांत सिंह राजपूत, श्रद्धा कपूर और वरुण शर्मा की छिछोरे बेहतरीन और दिल छूने वाली है. फिल्म मेंटल हेल्थ को मद्दे नजर रख के बनाई गयी है. फिल्म में सुशांत (अनिरुध) और श्रद्धा (माया) का बेटा कम नंबर आने पर सुसाइड कर लेता है और फिर कहानी उसी को लेकर आगे बढ़ती है. फिल्म दर्शको और स्टूडेंट्स को अच्छा मैसेज देती है की कभी भी हार नहीं मानना चाहिए और नंबर्स लाइफ में इतना भी मैटर नहीं करते की आप को अपनी जान गंवानी पड़े. यह भी पढ़े: Teacher’s Day Special: बॉलीवुड की इन फिल्मों को देख आपको अपने फेवरेट टीचर की आ जाएगी याद The post एजुकेशन सिस्टम का सच दिखाती 7 बेमिसाल बॉलीवुड फिल्में appeared first on Naya Vichar.

