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July 18, 2026

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एजुकेशन सिस्टम का सच दिखाती 7 बेमिसाल बॉलीवुड फिल्में

सिनेमा को समाज का आईना कहा जाता है. हिंदुस्तानीय सिनेमा में कई ऐसी फिल्में बनी है, जो शिक्षा व्यवस्था,और चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं. आइये जानते हैं कौन सी हैं, वो फिल्में जो पढ़ाई को अलग तरीके से दिखाती हैं.  3 इडियट्स  (2009) इरफान खान और सबा कमर की हिंदी मीडियम की कहानी इंग्लिश मीडियम स्कूल  में एडमिशन को लेकर है. फिल्म में दिखाया गया है की कैसे राज बत्रा (इरफ़ान) और मीता (सबा) अपने बच्ची को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने के लिए अलग ही स्ट्रगल करते हैं. सुपर 30 (2019) रानी मुखर्जी की हिचकी दर्शको को सरप्राइज करती है, जब उन्हें पता चलता है कि ‘टॉरेंट सिंड्रोम’ जैसे बीमारी होने के बावजूद नैना माथुर (रानी मुखर्जी) हौसला नहीं टूटता और वह बच्चो को साथ लाने और पढ़ाने को लेकर कितनी कॉंफिडेंट है. कहानी स्टूडेंट्स और टीचर्स के बीच के रिलेशन को दिखाती है और कैसे सही टीचर किसी भी स्टूडेंट्स की जिंदगी बदल सकते है. तारे जमीन पर (2007) जूही चावला (ज्योति) और शबाना आजमी (विद्या) की यह फिल्म दो ऐसे टीचर की कहानी है, जो काफी डेडिकेटेड है और चाहती है उनके स्टूडेंट्स अच्छे मार्क्स लाए और आगे बढ़े. फिल्म में मोड़ तब आता है, जब स्कूल की नई प्रिंसिपल (दिव्या दत्ता) की एंट्री होती है और फिर वह उस स्कूल में अनुभवी शिक्षकों को परेशान करना शुरू कर देती है. फिल्म स्कूल मैनेजमेंट और भ्रष्ट एजुकेशन सिस्टम को हाईलाइट करती है. छिछोरे (2019) सुशांत सिंह राजपूत, श्रद्धा कपूर और वरुण शर्मा की छिछोरे बेहतरीन और दिल छूने वाली है. फिल्म मेंटल हेल्थ को मद्दे नजर रख के बनाई गयी है. फिल्म में सुशांत (अनिरुध) और श्रद्धा (माया) का बेटा  कम नंबर आने पर सुसाइड कर लेता है और फिर कहानी उसी को लेकर आगे बढ़ती है. फिल्म दर्शको और स्टूडेंट्स को अच्छा मैसेज देती है की कभी भी हार नहीं मानना चाहिए और नंबर्स लाइफ में इतना भी मैटर नहीं करते की आप को अपनी जान गंवानी पड़े. यह भी पढ़े: Teacher’s Day Special: बॉलीवुड की इन फिल्मों को देख आपको अपने फेवरेट टीचर की आ जाएगी याद The post एजुकेशन सिस्टम का सच दिखाती 7 बेमिसाल बॉलीवुड फिल्में appeared first on Naya Vichar.

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21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं सोनम वांगचुक, जानिए उनकी जिंदगी की पूरी कहानी

Who is sonam wangchuk : इन दिनों दिल्ली का जंतर मंतर एक और विरोध प्रदर्शन का साक्षी बन रहा है. यहां पेपर लीक मामले की जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा प्रदर्शन चर्चा में है. लेकिन बीते तीन सप्ताह में एक और चेहरा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. ये चेहरा है शिक्षाविद्, और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक… सोनम वांगचुक पिछले 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. हालांकि शनिवार सुबह आंदोलन ने नया मोड़ तब लिया, जब दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई. बताया जा रहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें केंद्र और दिल्ली प्रशासन को निर्देश दिया गया था कि वांगचुक का प्रतिदिन मेडिकल परीक्षण कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उपचार उपलब्ध कराया जाए. उनकी बिगड़ती सेहत और भूख हड़ताल की वजहों के साथ-साथ लोग जानना चाह रहे कि वे कब तक अनशन पर रहेंगे.सवाल ये भी पूछा जा रहा कि सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं..? लेकिन बात सिर्फ भूख हड़ताल तक सीमित नहीं है,बल्कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है यह जानना कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए काम करने वाला एक इंजीनियर और इनोवेटर, इस प्रकार के जन आंदोलन का प्रमुख चेहरा कैसे बन गया? क्या था वो मुद्दा जिसने लद्दाख के एक शिक्षाविद को सड़कों पर उतरने और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूर किया? जानना ये भी जरूरी है कि पिछले 21 दिन से भूखे रहकर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, कथित परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को उठा रहे वांगचुक असल जिंदगी में कौन हैं? जंतर मंतर पर भूख हड़ताल करने वाले..कौन हैं सोनम वांगचुक सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के अल्ची गांव में हुआ था, उनके पिता सोनम वांगयाल प्रशासनी सेवा में श्रीनगर में कार्यरत थे और बाद में नेतृत्व में आए और मंत्री भी बने. नौकरी के दौरान उनके साथ उनका परिवार भी रहता था.  बचपन और शिक्षा  लद्दाख के सुदूर गांव (अलची/उलेटोकपो) में स्कूल न होने के कारण 9 वर्ष की आयु तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ था. तो वांगचुक की शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई, जहां उनकी मां उन्हें उनकी मातृभाषा लद्दाखी (जिसे भोटी या बोधी भी कहा जाता है) में पढ़ाती थीं. करीब नौ वर्ष की उम्र में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए श्रीनगर भेजा गया, जहां एक स्कूल में उनका दाखिला कराया गया. हालांकि, वहां पढ़ाई का माध्यम उर्दू और अंग्रेजी था, जिसे वे नहीं समझते थे. भाषा की इस बाधा के कारण शुरुआती वर्षों में उन्हें पढ़ाई में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. बाद में उनकी पढ़ाई दिल्ली के सेंट्रल स्कूल (केंद्रीय विद्यालय) में हुई. इसके बाद उन्होंने वर्ष 1987 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), श्रीनगर ( उस समय उसे रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज कहा जाता था) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की. उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने फ्रांस के ग्रेनोबल स्थित CRAterre School of Architecture में लगभग दो वर्षों तक मिट्टी से बने पर्यावरण-अनुकूल भवनों (Earthen Architecture) का अध्ययन भी किया. शिक्षा में योगदान  उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 1988 में सोनम वांगचुक लद्दाख लौट आए. अपने स्कूली दिनों में भाषा संबंधी समस्याओं का सामना कर चुके वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा में काम करने का फैसला किया. उनका मानना था कि भाषा या भौगोलिक परिस्थितियां किसी भी शिशु की शिक्षा और उसके भविष्य में बाधा नहीं बननी चाहिए. वांगचुक ने अपने भाई और पांच साथियों के साथ स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की. जिसका उद्देश्य लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना, ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और स्थानीय संसाधनों व सौर ऊर्जा पर आधारित पर्यावरण-अनुकूल शिक्षा परिसर विकसित करना था. वांगचुक ने SECMOL को एक वैकल्पिक शिक्षा मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए लगातार काम किया. 19 वर्ष की उम्र में वांगचुक अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए ट्यूशन पढ़ाते थे. इसके साथ-साथ उन छात्रों की भी मदद करते जो राष्ट्रीय स्तर की कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में पीछे थे.बाद में जब उन्होंने SECMOL की स्थापना की तो छात्रों को एजुकेशन में व्यावहारिक व स्थानीय जरूरतों के अनुरूप की जा सकने वाली प्रयास के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया. उनके शिक्षा सुधार संबंधी योगदान को देखते हुए… वर्ष 2005 में हिंदुस्तान प्रशासन के तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सोनम वांगचुक को नेशनल गवर्निंग काउंसिल फॉर एलिमेंट्री एजुकेशन का सदस्य नियुक्त किया. पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी योगदान  लद्दाख में पानी की कमी और जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रही चुनौतियों को देखते हुए सोनम वांगचुक ने आइस स्तूप (Ice Stupa) तकनीक विकसित की. आइस स्तूप एक कृत्रिम ग्लेशियर है, जिसका उद्देश्य सर्दियों में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को बर्फ के रूप में संरक्षित करना और गर्मियों में उसके पिघलने से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है. इससे स्थानीय किसानों को खेती के मौसम में पानी की कमी से राहत मिलती है. आइस स्तूप जल संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है.आइस स्तूप आज लद्दाख आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है. समाज सेवा  आइस स्तूप और SECMOL के अलावा सोनम वांगचुक ने फार्म स्टेज लद्दाख (Farm Stays Ladakh) परियोजना की भी शुरुआत की. वर्ष 2016 में शुरू हुई फार्म स्टेज लद्दाख परियोजना का उद्देश्य समुदाय-आधारित और सतत पर्यटन को बढ़ावा देना था. इसके तहत पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के घरों में ठहरने का अवसर मिलता है, जिससे स्थानीय लोगों, विशेषकर स्त्रीओं को अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं. शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सोनम वांगचुक को वर्ष 2018 में एशिया के प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया. आइस स्तूप (Ice Stupa) कृत्रिम हिमनद तकनीक और सौर ऊर्जा से गर्म होने वाले सैन्य टेंट (Solar-Heated Military Tents) जैसे तकनीक को सोनम वांगचुक ने विकसित किया है. हालांकि उन्होंने कभी इसका पेटेंट नहीं कराया. पर्यावरण संरक्षण की आवाज उठाने वाले वांगचुक प्रदर्शनकारी कैसे बने… साल

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पटना में शुरू हुई हेलीकॉप्टर जॉय राइड, 1200 फीट की ऊंचाई से देखें शहर का शानदार नजारा, जानें कैसे करें बुकिंग

Bihar Heli Tourism: पटना के लोग अब 1200 फीट की ऊंचाई से शहर का शानदार नजारा देख सकेंगे. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को ‘मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026’ की शुरुआत की. इस योजना के तहत लोग अब हेलीकॉप्टर से पटना और बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों का हवाई सफर कर सकेंगे. पहले दिन दिखा लोगों में उत्साह योजना शुरू होते ही लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिला. अब तक करीब 80 लोगों ने एयर राइड के लिए बुकिंग कराई है. हालांकि पहले दिन केवल 20 पर्यटक ही जॉय राइड का हिस्सा बने. पहली उड़ान दोपहर 3:40 बजे छह यात्रियों के साथ रवाना हुई. मुख्यमंत्री ने खुद पर्यटकों को टिकट सौंपे और हेलीकॉप्टर के पायलट को बैज पहनाकर रवाना किया. उत्साहित नजर आए पर्यटक 2100 रुपये में 10 मिनट की हवाई सैर पटना जॉय राइड के लिए प्रति व्यक्ति 2100 रुपये किराया तय किया गया है. यह यात्रा करीब 10 मिनट की होगी. इस दौरान पर्यटक करीब 1200 फीट की ऊंचाई से शहर का खूबसूरत नजारा देख सकेंगे. हवाई सफर के दौरान गंगा नदी, जेपी गंगा पथ, तख्त श्री हरिमंदिर साहिब और पटना के कई प्रमुख स्थान ऊपर से दिखाई देंगे. हर 30 मिनट पर मिलेगी राइड पर्यटन विभाग के अनुसार, हर 30 मिनट के अंतराल पर हेलीकॉप्टर उड़ान भरेगा. एक दिन में चार जॉय राइड संचालित की जाएंगी. फिलहाल यह सुविधा हर शनिवार और रविवार को उपलब्ध रहेगी. राजगीर, कैमूर और वाल्मीकिनगर भी जा सकेंगे इस योजना के तहत पटना से तीन बड़े पर्यटन स्थलों को भी जोड़ा गया है. इनमें शामिल हैं राजगीर वाल्मीकिनगर कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर इन स्थानों के लिए हेलीकॉप्टर और छोटे विमान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. अलग-अलग रूट का किराया पर्यटन विभाग ने अलग-अलग गंतव्यों के लिए किराया भी तय किया है. पटना जॉय राइड- 2100 रुपये प्रति व्यक्ति राजगीर- 4000 रुपये प्रति व्यक्ति वाल्मीकिनगर- 5000 रुपये प्रति व्यक्ति (एक तरफ) कैमूर (मां मुंडेश्वरी)- 6000 रुपये प्रति व्यक्ति कब मिलेगी यह सुविधा? हेली टूरिज्म सेवा फिलहाल सिर्फ शनिवार और रविवार को उपलब्ध रहेगी. पटना-वाल्मीकिनगर के लिए हर दिन दो उड़ानें होंगी. पटना-राजगीर के लिए सुबह हेलीकॉप्टर सेवा चलेगी. पटना-कैमूर के लिए भी निर्धारित समय पर उड़ान उपलब्ध रहेगी. हर फेरी में सीमित सीटें रहेंगी. इसलिए पहले से बुकिंग कराना जरूरी होगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें मुफ्त मिलेगी टूरिस्ट गाइड की सुविधा पर्यटकों को हवाई यात्रा के साथ फ्री टूरिस्ट गाइड की सुविधा भी मिलेगी. हालांकि होटल, भोजन और स्थानीय यात्रा का खर्च पर्यटकों को खुद उठाना होगा. टिकट की बुकिंग बिहार पर्यटन और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए की जा सकेगी. योजना का क्या है उद्देश्य? प्रशासन का कहना है कि इस योजना का मकसद बिहार में धार्मिक और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देना है. इससे देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी. प्रशासन का मानना है कि इस पहल से राजगीर, वाल्मीकिनगर और कैमूर जैसे पर्यटन स्थलों पर रोजगार बढ़ेगा. साथ ही बिहार को हेली टूरिज्म और एयर टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी. Also Read:बेतिया राज की 22,813 एकड़ जमीन होगी प्रशासनी, बिहार प्रशासन ने इन छह जिलों के लिए जारी की अधिसूचना The post पटना में शुरू हुई हेलीकॉप्टर जॉय राइड, 1200 फीट की ऊंचाई से देखें शहर का शानदार नजारा, जानें कैसे करें बुकिंग appeared first on Naya Vichar.

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सोनम वांगचुक का ताजा हेल्थ अपडेट: भूख हड़ताल से बढ़ी कमजोरी, पल्स-बीपी सामान्य पर इलाज लेने से किया इनकार

Sonam Wangchuk Health Update: अस्पताल की ओर से जारी ताजा हेल्थ अपडेट में बताया गया- भर्ती किए जाने के समय वांगचुक की नाड़ी (पल्स), रक्तचाप (बीपी) और ऑक्सीजन का स्तर पूरी तरह सामान्य और स्थिर पाया गया. उनके ब्लड गैस एनालिसिस में ‘कंपनसेटेड एसिडोसिस’ (शरीर में एसिड का असंतुलन) और सीरम पोटैशियम की कमी पाई गई है. दोबारा जांच में भी सीरम पोटैशियम का स्तर कम ही पाया गया. ब्लड शुगर लेवल 78 मिलीग्राम/डीएल दर्ज किया गया सुबह अस्पताल में भर्ती के समय वांगचुक के यूरिन में कीटोन की मात्रा 1+ थी, जो दोपहर 1:00 बजे तक बढ़कर 3+ हो गई है. इलाज लेने से किया इनकार सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड (ड्रिप) चढ़ाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की ड्रिप, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन फ्लूइड) या कोई अन्य दवा लेने से साफ इनकार कर दिया है. फिलहाल, अस्पताल के डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है. अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर उनके बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए उन्हें इलाज स्वीकार करने के लिए लगातार समझाने (काउंसलिंग करने) का प्रयास कर रहे हैं. पुलिस ने वांगचुक को जंतर मंतर से उठकर ले गई और अस्पताल में कराया भर्ती पुलिस ने वांगचुक को शनिवार सुबह प्रदर्शन स्थल से उठाकर ले गई और सात बजकर 40 मिनट पर अस्पताल में भर्ती कराया. वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं और इस विवाद से जुड़े विद्यार्थियों की मौतों के मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी विरोध प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. डॉक्टरों ने बताया- भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम घट गया है. ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर पर स्त्री ने अभिजीत दीपके पर फेंकी स्याही, Video वायरल ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक का अस्पताल में भी अनशन जारी, पत्नी गीतांजलि बोलीं- 20 जुलाई को होकर रहेगा संसद मार्च The post सोनम वांगचुक का ताजा हेल्थ अपडेट: भूख हड़ताल से बढ़ी कमजोरी, पल्स-बीपी सामान्य पर इलाज लेने से किया इनकार appeared first on Naya Vichar.

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जंतर-मंतर पर महिला ने अभिजीत दीपके पर फेंकी स्याही, Video वायरल

Abhijeet Dipke: स्याही फेंके जाने के बाद CJP समर्थक आक्रोशित होकर मंच की तरफ दौड़ पड़े, जिससे कुछ देर के लिए कार्यक्रम बाधित रहा. पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी स्त्री को तुरंत हिरासत में ले लिया. फिलहाल पुलिस स्त्री से पूछताछ कर रही है. यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने इस घटना को क्यों अंजाम दिया. अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक, तबीयत बिगड़ी घटना से पहले अनशन के 21वें दिन अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें प्रदर्शन स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई. नीट (NEET) परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और इसके चलते कुछ छात्रों की मौत के विरोध में वांगचुक बीते 28 जून से CJP के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. पुलिस का कहना है कि चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दीपके ने पुलिस पर मारपीट का लगाया आरोप CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया. दीपके का दावा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने उनके साथ न सिर्फ मारपीट की, बल्कि उन्हें हिरासत में भी ले लिया. फिलहाल मामले में पुलिस जांच जारी है और विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है. ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक के अनशन आंदोलन को कौन-कौन दे रहे समर्थन? झारखंड का ये विधायक भी पहुंचा जंतर-मंतर ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक का अस्पताल में भी अनशन जारी, पत्नी गीतांजलि बोलीं- 20 जुलाई को होकर रहेगा संसद मार्च The post जंतर-मंतर पर स्त्री ने अभिजीत दीपके पर फेंकी स्याही, Video वायरल appeared first on Naya Vichar.

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Hero, Honda या TVS…जून 2026 में किसने मारी बाजी? जानिए सबसे ज्यादा बिकने वाले 7 टू-व्हीलर ब्रांड

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने जून 2026 के घरेलू बिक्री के आंकड़े जारी कर दिए हैं. इस बार टू-व्हीलर बाजार ने शानदार परफॉर्म किया है. जून 2026 में देशभर में कुल 18,51,400 टू-व्हीलर्स बिके. वहीं जून 2025 में यह आंकड़ा 15,61,283 यूनिट था. यानी एक साल में बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. हीरो मोटोकॉर्प ने सबसे ज्यादा टू-व्हीलर्स बेचकर नंबर-1 की कुर्सी बरकरार रखी. वहीं होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (HMSI) दूसरे और टीवीएस मोटर कंपनी तीसरे स्थान पर रही. आइए अब जानते हैं जून 2026 में घरेलू बिक्री के बेस्ड पर देश के 7 सबसे ज्यादा बिकने वाले टू-व्हीलर ब्रांड कौन-से रहे. Hero MotoCorp रही नंबर-1 जून 2026 में भी हिंदुस्तानीय टू-व्हीलर बाजार में Hero MotoCorp का दबदबा बरकरार रहा. कंपनी ने इस महीने 5,02,890 यूनिट्स की बिक्री की. हालांकि जून 2025 के मुकाबले बिक्री में हल्की गिरावट दर्ज हुई, जब कंपनी ने 5,25,136 यूनिट्स बेची थीं. इसके बावजूद Hero MotoCorp अपने कॉम्पिटिटर से काफी आगे रही और देश की सबसे ज्यादा टू-व्हीलर्स बेचने वाली कंपनी बनी रही. Honda ने दूसरे स्थान पर बनाई मजबूत पकड़ Honda Motorcycle & Scooter India ने भी शानदार परफॉर्म करते हुए जून 2026 में 4,68,956 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की. यह आंकड़ा जून 2025 में बेची गई 3,88,812 यूनिट्स से काफी बेहतर है. कंपनी की इस बढ़त के पीछे उसके स्कूटर और कम्यूटर बाइक्स की मजबूत मांग है, जिसकी बदौलत Honda ने हिंदुस्तानीय बाजार में अपना दूसरा स्थान बरकरार रखा. TVS मोटर ने 4 लाख से ज्यादा टू-व्हीलर्स बेचे TVS Motor Company ने जून 2026 में 4,11,014 गाड़ियों की बिक्री दर्ज की. पिछले साल जून 2025 में कंपनी ने 2,81,012 यूनिट्स बेची थीं. यानी इस बार TVS ने जबरदस्त बढ़त हासिल की है. कंपनी की इस मजबूत बिक्री के पीछे उसके कम्यूटर मोटरसाइकिल, स्कूटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पोर्टफोलियो की बढ़ती मांग है. ये भी पढ़ें: मार्केट में छा गया यह इलेक्ट्रिक स्कूटर, जून 2026 में पहली बार बिकीं 4,436 यूनिट्स, जानें इसकी खासियत Bajaj ऑटो चौथे स्थान पर बरकरार बजाज ऑटो ने भी अपनी चौथी पोजिशन बरकरार रखी. जून 2026 में कंपनी ने घरेलू बाजार में 1,66,956 गाड़ियों की बिक्री की. वहीं जून 2025 में यह आंकड़ा 1,49,317 यूनिट्स था. बजाज की बिक्री बढ़ने की सबसे बड़ी वजह उसकी Pulsar बाइक और Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर की बढ़ती मांग रही. Royal Enfield ने पार किया 1 लाख यूनिट्स का आंकड़ा जून 2026 में Royal Enfield ने घरेलू बाजार में 1,02,930 मोटरसाइकिलें बेचीं. पिछले साल जून 2025 में कंपनी की बिक्री 76,957 यूनिट्स रही थी. इसी दमदार बढ़त के साथ Royal Enfield बिक्री के मामले में पांचवें स्थान पर रही. कंपनी की इस सफलता के पीछे उसकी 350cc और 450cc मोटरसाइकिलों की लगातार बनी हुई मजबूत डिमांड सबसे बड़ा कारण रही. Suzuki की बिक्री में भी दिखी शानदार तेजी Suzuki Motorcycle India ने भी जून 2026 में बेहतरीन परफॉर्म किया. कंपनी ने घरेलू बाजार में 91,264 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 73,934 यूनिट्स था. मजबूत बिक्री के दम पर Suzuki छठे स्थान पर बनी रही. कंपनी की पॉपुलर Access 125 स्कूटर और कम्यूटर मोटरसाइकिलों की अच्छी मांग ने इस ग्रोथ में बड़ा रोल प्ले किया. यामाहा ने सातवां स्थान हासिल किया जून 2026 में हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा टू-व्हीलर्स बेचने वाली कंपनियों की लिस्ट में इंडिया यामाहा मोटर ने सातवां स्थान हासिल किया. कंपनी ने इस दौरान घरेलू बाजार में 66,573 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल जून में बिके 44,417 यूनिट्स के मुकाबले शानदार बढ़ोतरी है. इस ग्रोथ के पीछे यामाहा के स्कूटर्स और प्रीमियम मोटरसाइकिलों की बढ़ती मांग बड़ी वजह रही. ये भी पढ़ें: Honda Dio 125 के सबसे सस्ते STD वेरिएंट में क्या है खास? जानें कीमत से लेकर फीचर्स तक The post Hero, Honda या TVS…जून 2026 में किसने मारी बाजी? जानिए सबसे ज्यादा बिकने वाले 7 टू-व्हीलर ब्रांड appeared first on Naya Vichar.

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CHC में खुले आसमान के नीचे गर्भवती का प्रसव, वाराणसी में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, VIDEO वायरल

UP News: वाराणसी से प्रशासनी स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. बड़ागांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक बनवासी स्त्री का प्रसव खुले आसमान के नीचे जमीन पर कराया गया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. वहीं, प्रसव के पांचवें दिन नवजात की मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. अब सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. वाराणसी में CHC परिसर में खुले में कराया गया प्रसव वाराणसी के बड़ागांव विकासखंड स्थित विरांव कोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां सियरहा बनवासी बस्ती की रहने वाली 38 वर्षीय सविता पत्नी जोगिंदर का खुले आसमान के नीचे प्रसव कराया गया. परिजनों के मुताबिक, सविता को सुबह से ही तेज पेट दर्द हो रहा था. इसके बाद उन्हें दोपहर करीब 2 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया. स्त्री की हालत बिगड़ने पर भी उसे लेबर रूम में भर्ती कराने के बजाय परिसर में ही प्रसव हो गया. नर्स ने जमीन पर कराया प्रसव, वीडियो हुआ वायरल आशा कार्यकर्ता राधिका के अनुसार, स्त्री तेज दर्द से परेशान थी और बार-बार लेबर रूम से बाहर आ रही थी. स्वजन और अस्पताल स्टाफ ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अस्पताल परिसर में जमीन पर बैठ गई. इसी दौरान शाम करीब 4 बजे स्त्री को तेज प्रसव पीड़ा हुई. ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स प्रीति ने खुले आसमान के नीचे बिना किसी प्राइवेसी के प्रसव कराया. इस दौरान किसी तरह की व्यवस्था नहीं दिखाई दी. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया. प्रसव के पांचवें दिन नवजात की मौत प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए गए थे, लेकिन पांचवें दिन शाम को नवजात की मौत हो गई. परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है. स्टाफ नर्स प्रीति ने बताया कि उस समय चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कालिका यादव छुट्टी पर थीं. उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी अधीक्षक और फार्मासिस्ट को है. वहीं, एएनएम मुक्ता तिवारी ने बताया कि उस दिन उनकी ड्यूटी नहीं थी, इसलिए वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकतीं. सीएमओ ने दिए जांच के आदेश मामला सामने आने के बाद वाराणसी के सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार ने जांच के लिए टीम गठित करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. नौवां प्रसव होने के कारण हाई रिस्क में थी स्त्री जानकारी के मुताबिक, सविता का यह नौवां प्रसव था. स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार नौवां प्रसव हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में प्रसव लेवल-3 अस्पताल में कराया जाना चाहिए. बताया गया कि स्त्री का वजन करीब एक क्विंटल था और सातवें महीने में ही गर्भ का पता चला था. इसके बावजूद स्त्री का प्रसव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया. प्रसव के कुछ घंटे बाद ही कर दिया गया डिस्चार्ज प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार प्रसव के बाद स्त्री को 24 से 48 घंटे तक अस्पताल में निगरानी में रखना जरूरी होता है. लेकिन परिजनों के मुताबिक, सविता दोपहर 2 बजे अस्पताल पहुंची, शाम 4 बजे प्रसव हुआ और रात करीब 8 बजे उसे डिस्चार्ज कर दिया गया. परिजनों का आरोप है कि स्त्री को न तो उचित देखभाल मिली और न ही प्रसव के दौरान गोपनीयता का ध्यान रखा गया. इसके बाद नवजात की मौत हो गई. विशेषज्ञों ने जताई चिंता स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में बेहतर निगरानी, समय पर इलाज और प्रसव के बाद देखभाल बेहद जरूरी होती है. इसकी कमी से नवजात मृत्यु दर का खतरा बढ़ जाता है. खासकर बनवासी बस्तियों में समय पर एंटी नेटल केयर (ANC) नहीं पहुंच पाना भी एक बड़ी समस्या है. यह घटना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. खुले आसमान के नीचे बिना किसी व्यवस्था के प्रसव कराए जाने की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है. Also Read: BJP वाले कफन लेकर आए हैं ‘सोनम वांगचुक के समर्थन में डिंपल यादव का तीखा वार’ The post CHC में खुले आसमान के नीचे गर्भवती का प्रसव, वाराणसी में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, VIDEO वायरल appeared first on Naya Vichar.

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सिलीगुड़ी के पास BSF चौकी पहुंचे अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा और ‘चिकन नेक’ पर किया महामंथन

Amit Shah Siliguri BSF Post Visit: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (18 जुलाई 2026) को उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी शहर के बाहरी इलाके में स्थित सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 18वीं बटालियन की चौकी का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और सीमा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा की. गृह मंत्री शुक्रवार रात को ही पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे थे. वह कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे. इसके साथ ही वे बीएसएफ से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे. अमित शाह के 3 प्रमुख कार्यक्रम ‘प्रहरी सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे. बीएसएफ कर्मियों से सीधा संवाद करेंगे. पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेंगे. ‘चिकन नेक’ गलियारे की सुरक्षा पर महामंथन बीएसएफ परिसर में गृह मंत्री अमित शाह एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं. बैठक में राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल, गृह सचिव संघमित्रा घोष, बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार, एनआईए (NIA) के महानिदेशक राकेश अग्रवाल, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता, उत्तर बंगाल के आईजी सुकेश जैन और खुफिया ब्यूरो (IB) के संयुक्त निदेशक शामिल हो सकते हैं. ये भी पढ़ें: अमित शाह के दौरे से पहले कोलकाता में बवाल, डॉ श्यामा प्रसाद की प्रतिमा के चबूतरे पर तोड़फोड़, तनाव 8 राज्यों और 3 देशों से जुड़ा है ‘चिकन नेक’ बैठक का मुख्य एजेंडा ‘चिकन नेक’ के नाम से प्रसिद्ध सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारे (Siliguri Corridor) की सुरक्षा व्यवस्था है. 17 से 22 किलोमीटर लंबा यह संकरा क्षेत्र हिंदुस्तान के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह पूर्वोत्तर के 8 राज्यों को शेष हिंदुस्तान से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी मार्ग है. यह गलियारा 3 अंतरराष्ट्रीय सीमाओं- उत्तर में नेपाल, दक्षिण में बांग्लादेश और उत्तर-पूर्व में भूटान के बीच स्थित है. ये भी पढ़ें: अमित शाह आज पश्चिम बंगाल में, नदिया पुलिस हाई अलर्ट सीमा पर बाड़ लगाने के लिए शुभेंदु प्रशासन ने ट्रांसफर की जमीन सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में पश्चिम बंगाल की राज्य प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य प्रशासन ने इस संवेदनशील क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 120 एकड़ भूमि बीएसएफ को हस्तांतरित की है. इसके अलावा, सुरक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी के मद्देनजर इस इलाके के 7 महत्वपूर्ण राजमार्गों का प्रबंधन भी केंद्र प्रशासन को सौंप दिया गया है. यह प्रबंधन पहले राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रकोष्ठ के अधीन था. ये भी पढ़ें: अमित शाह शुक्रवार को आयेंगे बंगाल, तीन दिवसीय दौरे में केंद्रीय गृह मंत्री करेंगे सीमा सुरक्षा की समीक्षा ‘उत्तर कन्या’ में प्रशासनिक बैठकें, शाम को पहुंचेंगे कोलकाता गृह मंत्री अमित शाह का उत्तर बंगाल स्थित राज्य सचिवालय की शाखा ‘उत्तर कन्या’ में भी कई बैठकों की अध्यक्षता करने का कार्यक्रम है. इन बैठकों में सीमा प्रबंधन के अलावा राज्य में नये आपराधिक कानूनों (New Criminal Laws) के क्रियान्वयन तथा जन्म और मृत्यु पंजीकरण से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों की समीक्षा की जायेगी. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल आ रहे हैं अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा करेंगे गृह मंत्री 19 जुलाई को कोलकाता में शाह के कई कार्यक्रम शनिवार शाम को अमित शाह कोलकाता पहुंचेंगे. रविवार को कोलकाता में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अलावा, वे राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक और उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. The post सिलीगुड़ी के पास BSF चौकी पहुंचे अमित शाह, सीमा सुरक्षा की समीक्षा और ‘चिकन नेक’ पर किया महामंथन appeared first on Naya Vichar.

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सोनम वांगचुक का अस्पताल में भी अनशन जारी, पत्नी गीतांजलि बोलीं- 20 जुलाई को होकर रहेगा संसद मार्च

Sonam Wangchuk Hunger Strike: अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गीतांजलि आंगमो ने प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “20 जुलाई का हमारा कार्यक्रम पूरी तरह तय है. शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना कार्यपालिका और नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है. हमारा काम सिर्फ उन्हें यह आईना दिखाना है कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है.” आंदोलन अब सिर्फ ‘पेपर लीक’ तक सीमित नहीं गीतांजलि ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल नीट परीक्षा के पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की पूरी शिक्षा प्रणाली में अमूल-चूल सुधारों के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान बन चुका है. न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ कुछ प्रश्नपत्रों के लीक होने के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की अंतरात्मा को जगाने के लिए है, और देश की जनता अब काफी हद तक जागृत हो चुकी है.” इलेक्ट्रोलाइट पाउडर लेने से इनकार, सिर्फ नमक-पानी पर उपवास अस्पताल प्रशासन द्वारा वांगचुक को इलेक्ट्रोलाइट पाउडर देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इसे लेने से साफ मना कर दिया. पत्नी ने बताया कि वांगचुक चीनी का बिल्कुल भी सेवन नहीं कर रहे हैं, वे केवल नमक युक्त पानी पीकर अपना अनशन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा, “सोनम पिछले 20 दिनों से उपवास पर हैं. वे शारीरिक रूप से कमजोर जरूर हुए हैं और उनकी मांसपेशियां शिथिल हो रही हैं, लेकिन मानसिक रूप से वे बेहद मजबूत और सचेत हैं.” जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या कोई वरिष्ठ नेता इस गतिरोध को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप कर सकते हैं, तो उन्होंने निराशा जताते हुए कहा, “वह दौर अलग था, यह दौर अलग है. मुझे इसकी कोई संभावना नजर नहीं आती.” हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल, जांच रिपोर्ट पर शक सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए गीतांजलि ने कहा कि दिल्ली हई कोर्ट ने केवल नियमित स्वास्थ्य निगरानी का निर्देश दिया था, अस्पताल में जबरन भर्ती करने का कोई आदेश नहीं था. इसलिए पुलिस की यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं है. वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर भी जताया संदेह वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर भी संदेह जताया. उन्होंने कहा: “अस्पताल प्रशासन हमें मेडिकल रिपोर्ट नहीं सौंप रहा है. उनके पोटेशियम लेवल को लेकर जो आंकड़े दिए जा रहे हैं, वे संदिग्ध हैं. कल उनका पोटेशियम 4.3 था और आज अचानक 2.9 बताया जा रहा है, जो मुमकिन नहीं लगता. हम कोई भी दवा या उपचार लेने से पहले किसी बाहरी (इंडिपेंडेंट) लैब से इन टेस्ट रिपोर्टों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करवाएंगे.” हालत स्थिर, पर कमजोरी : अस्पताल प्रशासन सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ चारू बंबा ने बताया कि सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे अस्पताल लाया गया था. लंबे समय तक उपवास के कारण वे थोड़े कमजोर हैं और उनमें हल्का डिहाइड्रेशन है. हालांकि, उनके सभी प्रमुख स्वास्थ्य पैरामीटर स्थिर हैं और डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है. वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कोर्ट के निर्देश और वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए डॉक्टरों की सलाह पर की गई है, जिसमें पूरे संयम का परिचय दिया गया. ये भी पढ़ें: सोनम वांगचुक के अनशन आंदोलन को कौन-कौन दे रहे समर्थन? झारखंड का ये विधायक भी पहुंचा जंतर-मंतर The post सोनम वांगचुक का अस्पताल में भी अनशन जारी, पत्नी गीतांजलि बोलीं- 20 जुलाई को होकर रहेगा संसद मार्च appeared first on Naya Vichar.

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तीन स्टेज वाला रॉकेट, 350 किलो पेलोड कैपेसिटी : जानिए भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की 5 खूबियां

Vikram Rocket Launch : हिंदुस्तान के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है. हैदराबाद स्थित निजी कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने देश का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष सेंटर से लॉन्च किया. ‘मिशन आगमन’ के तहत हुए इस लॉन्च ने हिंदुस्तान के निजी स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि हासिल की है. इस मिशन के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस हिंदुस्तान की पहली निजी कंपनी बन गई है, जिसने ऑर्बिटल क्लास रॉकेट लॉन्च किया. ये भी पढ़ें : Video : हिंदुस्तान का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 लॉन्च तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और लिक्विड मॉड्यूल से लैस विक्रम-1 को आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है. इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज लगाए गए हैं, जो रॉकेट को शुरुआती उड़ान के दौरान आवश्यक ताकत देते हैं. इसके अलावा इसमें लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल भी लगाया गया है, जो अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद रॉकेट की दिशा और कक्षा को सटीक तरीके से नियंत्रित करता है. इसी तकनीक की मदद से यह अलग-अलग उपग्रहों को उनकी तय कक्षाओं में स्थापित कर सकता है. विक्रम-1 रॉकेट 350 किलो तक का पेलोड ले जाने में सक्षम विक्रम-1 को छोटे और मध्यम आकार के उपग्रहों के लॉन्च को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यह 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने की क्षमता रखता है. रॉकेट को 60 डिग्री इंक्लिनेशन वाली कक्षा के लिए तैयार किया गया है, जिससे पृथ्वी अवलोकन, संचार और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े कई मिशनों को लॉन्च किया जा सकता है. कार्बन फाइबर और 3D-प्रिंटेड इंजन इसकी सबसे बड़ी ताकत विक्रम-1 पूरी तरह कार्बन-कंपोजिट यानी कार्बन फाइबर से बना है. यह स्टील की तुलना में कई गुना हल्का होने के साथ काफी मजबूत भी होता है. कम वजन होने से रॉकेट ज्यादा पेलोड ले जा सकता है. इसके अलावा इसमें लगे कई इंजन और ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल 3D प्रिंटिंग तकनीक से तैयार किए गए हैं. इससे निर्माण लागत कम होती है और रॉकेट को तेजी से तैयार किया जा सकता है. ये भी पढ़ें : पत्नी, शिशु और माता-पिता, जानिए सोनम वांगचुक की फैमिली में कौन-कौन हैं? डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया नाम इस रॉकेट सीरीज का नाम हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है. स्काईरूट एयरोस्पेस का मानना है कि विक्रम-1 भविष्य में छोटे उपग्रहों के व्यावसायिक लॉन्च के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बन सकता है. इसके जरिए हिंदुस्तान वैश्विक स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ निजी स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकता है. The post तीन स्टेज वाला रॉकेट, 350 किलो पेलोड कैपेसिटी : जानिए हिंदुस्तान के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट की 5 खूबियां appeared first on Naya Vichar.

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