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August 6, 2026

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झारखंड छात्र आंदोलन पर खरगे बोले- छात्रों के मुद्दे जहां होंगे, कांग्रेस उनकी आवाज उठाएगी

Jharkhand Student Protest : कांग्रेस के बड़े नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने झारखंड छात्र प्रदर्शन पर पहली बार बयान दिया है. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि छात्रों से संबंधित मुद्दे जहां भी होंगे, कांग्रेस उसकी आवाज उठाती रहेगी. उन्होंने बताया कि उन्होंने आंदोलन को लेकर अपने गठबंधन के सहयोगियों (जेएमएम) से भी बात की है. हालांकि उन्होंने जेएमएम का नाम नहीं लिया. देवेंद्रनाथ महतो 5 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर झारखंड में हजारों की संख्या में छात्र बीते 11 दिनों से रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं छात्रों की मांगों को लेकर छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. सोनम वांगचुक के फोन पर आग्रह के बाद उन्होंने नमक पानी पीना शुरू किया है. इससे पहले उन्होंने अन्न-जल दोनों का त्याग कर दिया था. आज उनकी भूख हड़ताल का पांचवां दिन है. हालांकि उनकी सेहत में गिरावट बताई गई है. वहीं राज्य प्रशासन की एक मेडिकल की टीम प्रदर्शन स्थल पर तैनात कर दी गई है, जो निरंतर अनशन पर बैठे देवेंद्रनाथ महतो सहित अन्य छात्रों की जांच कर रही है. Also read : झारखंड छात्र आंदोलन के समर्थन में उतरे CJP चीफ अभिजीत दीपके, बोले- जरूरत पड़ी तो आऊंगा रांची क्या हैं छात्रों की मांगें? छात्रों की मांगें हैं कि 14वीं जेपीएससी की परीक्षा रद्द की जाए, टीडीपीएल कंपनी को परीक्षा कंडक्ट कराने के लिए टेंडर दिया गया है उसे हटाया जाए. उत्तर प्रदेश और जम्मू-कस्मीर जैसे राज्यों में ये कंपनी पहले ही ब्लैकलिस्ट की जा चुकी है. इसके अलावा छात्रों की मांग है कि परीक्षा में अनियमितताओं की जांच का जिम्मा सीआईडी को दिया गया है, इसे सीबीआई के हाथ सौंपा जाए. 7 अगस्त को विधानसभा मार्च करेंगे छात्र प्रदर्शनकारी छात्रों का अगला महत्वपूर्ण कदम है- विधानसभा मार्च. झारखंड विधानसभा सत्र 6 अगस्त 2026 से शुरू हुआ है, इसके ठीक अगले दिन यानी 7 अगस्त को प्रदर्शनकारी विधानसभा मार्च करने वाले हैं. धीरे-धीरे व्यापक हो रहा आंदोलन अब तक यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण चलता आ रहा है. बीते कुछ दिनों से कुछ बड़े मीडिया संस्थान भी इस प्रदर्शन को कवरेज प्रदान कर रहे हैं. साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से आंदोलन को समर्थन भी मिलता नजर आ रहा है. Also read : Parliament LIVE : राम मंदिर और छात्र मुद्दे पर हंगामे से ठप रही लोकसभा, दिनभर के लिए कार्यवाही स्थगित The post झारखंड छात्र आंदोलन पर खरगे बोले- छात्रों के मुद्दे जहां होंगे, कांग्रेस उनकी आवाज उठाएगी appeared first on Naya Vichar.

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बाबा बैद्यनाथ धाम: आस्था से आगे रोजगार, पर्यटन और जनसेवा का मजबूत केंद्र बना देवघर

संजीव मिश्रा (संवाददाता, देवघर) Deoghar Tourism: देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि झारखंड की वित्तीय स्थिति, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार का प्रमुख आधार भी बन चुका है. हर वर्ष आने वाले लाखों श्रद्धालु यहां के कारोबार को नई गति देते हैं. देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. लेकिन समय के साथ इसकी भूमिका केवल धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रही. आज यह मंदिर देवघर की वित्तीय स्थिति, पर्यटन और रोजगार का प्रमुख आधार बन चुका है. हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु स्थानीय व्यापार, होटल, धर्मशाला, परिवहन, फूल-प्रसाद, भोजनालय और हस्तशिल्प कारोबार को नई ऊर्जा देते हैं. इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है. बेहतर कनेक्टिविटी से धार्मिक पर्यटन को मिली नई उड़ान हाल के वर्षों में देवघर की कनेक्टिविटी में हुए बड़े सुधार ने धार्मिक पर्यटन को नई गति दी है. देवघर एयरपोर्ट, विस्तारित रेल सेवाएं और बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण अब श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसका सीधा लाभ स्थानीय बाजारों, टैक्सी सेवाओं, होटल उद्योग और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को मिल रहा है. बाबा मंदिर के साथ आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से देवघर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है. पूजा से आगे बढ़कर जनसेवा का निभा रहा दायित्व मंदिर प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियों का दायरा भी व्यापक किया है. श्रावणी मेला जैसे बड़े आयोजनों में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, निःशुल्क लॉकर, क्यू मैनेजमेंट सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, स्वास्थ्य केंद्र, एंबुलेंस और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. कोरोना महामारी के दौरान मंदिर प्रशासन ने ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने और जरूरतमंद परिवारों तक राशन पहुंचाने जैसे सराहनीय कार्य किए. बच्चों और पर्यटकों के लिए पार्क जैसी सुविधाओं का विकास भी किया गया है. आज बाबा बैद्यनाथ धाम केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, पर्यटन और सामाजिक विकास का सशक्त केंद्र बन चुका है. The post बाबा बैद्यनाथ धाम: आस्था से आगे रोजगार, पर्यटन और जनसेवा का मजबूत केंद्र बना देवघर appeared first on Naya Vichar.

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यौन शोषण मामला: तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा, 4 हफ्ते के अंदर करना होगा आत्मसमर्पण

कोर्ट ने तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए पहले दो हफ्ते का समय दिया था, लेकिन बाद में उसके वकील के अनुरोध पर इस समय-सीमा को बढ़ाकर चार हफ्ते कर दिया गया है. तेजपाल ने कहा, हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती हाई कोर्ट की गोवा पीठ के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, “हम निचली अदालत के बरी करने के आदेश को निरस्त करते हैं और प्रतिवादी को दोषी करार देते हैं.” अदालत के इस फैसले के बाद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में 62 वर्षीय तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे. इन धाराओं के तहत ठहराया गया दोषी अदालत ने तेजपाल को हिंदुस्तानीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(एफ) (संरक्षक या विश्वास की स्थिति में दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (स्त्री को निर्वस्त्र करने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग) के तहत दोषी माना है. अदालत में तेजपाल की नरमी की गुहार, सॉलिसिटर जनरल की सख्त रुख की मांग सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद तेजपाल ने खुद को “नेतृत्वक प्रताड़ना का शिकार” बताया और दो बेटियों का पिता व वरिष्ठ नागरिक होने का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग की थी गोवा प्रशासन की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग की थी. उन्होंने कहा कि पीड़िता आरोपी की सहकर्मी होने के साथ-साथ उसकी बेटी की दोस्त भी थी. मेहता ने दलील दी कि ‘नहीं का मतलब नहीं’ होता है और समाज में ऐसा संदेश जाना जरूरी है जो अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो. उन्होंने निचली अदालत की उस धारणा को भी खारिज किया कि यौन उत्पीड़न की शिकार स्त्री का व्यवहार किसी खास ढर्रे पर ही होना चाहिए. क्या था पूरा मामला? यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक 5-स्टार होटल की लिफ्ट में तेजपाल पर अपनी कनिष्ठ सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगा था. 2021 में सत्र अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा प्रशासन ने बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. The post यौन शोषण मामला: तरुण तेजपाल को 10 साल की सजा, 4 हफ्ते के अंदर करना होगा आत्मसमर्पण appeared first on Naya Vichar.

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Pakistan में सोशल मीडिया की क्रांति, लेकिन Gen Z की बगावत क्यों नहीं?

हिंदुस्तान में हाल के वर्षों में युवाओं की नेतृत्व सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक एक नई दिशा लेती दिखाई दी है. कभी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, कभी बेरोजगारी, तो कभी व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी- Gen Z ने अपनी आवाज डिजिटल दुनिया से निकालकर सड़कों तक पहुंचाई. श्रीलंका में राष्ट्रपति भवन पर कब्जा , बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन और नेपाल में social media आधारित जनदबाव ने यह साबित किया कि आज की पीढ़ी केवल वोटर नहीं, बल्कि नेतृत्वक बदलाव की ताकत भी बन चुकी है. ऐसे समय में एक सवाल बार-बार उठता है- क्या पाकिस्तान में भी ऐसा कोई Gen Z आंदोलन देखने को मिलेगा? सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के युवाओं की सक्रियता बढ़ी है. कई मौकों पर उन्होंने हिंदुस्तान के युवा आंदोलनों पर प्रतिक्रिया भी दी है. लेकिन क्या डिजिटल समर्थन कभी वास्तविक जनआंदोलन का रूप ले पाएगा? हाल ही में ARPA फाउंडेशन की रिसर्च फेलो और Afghanistan-Pakistan मामलों की विशेषज्ञ डॉ. अंगना कोटोके ने इसी विषय पर विस्तार से अपनी राय रखी. डिजिटल नेतृत्व है, लेकिन युवा आंदोलन नहीं डॉ. कोटोके के अनुसार, पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में social media ने नेतृत्व की दिशा बदल दी है. विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan और उनकी पार्टी PTI ने YouTube, WhatsApp, TikTok और X जैसे प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. इमरान खान की गिरफ्तारी और PTI पर कार्रवाई ने युवाओं को ऑनलाइन सक्रिय किया. इंटरनेट पर वीडियो, पोस्ट, लाइव स्ट्रीम और डिजिटल कैंपेन के जरिए प्रशासन की आलोचना हुई. लेकिन यह पूरा आंदोलन किसी स्वतंत्र युवा एजेंडे के बजाय इमरान खान के समर्थन के इर्द-गिर्द घूमता रहा. यानी पाकिस्तान में डिजिटल मोबिलाइजेशन तो हुआ, लेकिन Gen Z Uprising नहीं. हिंदुस्तान और पाकिस्तान का सबसे बड़ा अंतर हिंदुस्तान में हाल के वर्षों में कई छात्र और युवा आंदोलन किसी एक नेता के समर्थन में नहीं, बल्कि employment, exam-process, education, corruption और democratic responsibility जैसे मुद्दों पर खड़े हुए. Sri Lanka में आर्थिक संकट जनता को एक मंच पर ले आया. Bangladesh में नौकरी आरक्षण विवाद पूरे देश का मुद्दा बन गया. Nepal में भ्रष्टाचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवालों ने युवाओं को जोड़ा. लेकिन Pakistan में ऐसा कोई साझा राष्ट्रीय मुद्दा अभी तक नहीं बन पाया है जो पूरे देश के युवाओं को एक साथ खड़ा कर सके. शिकायतें बहुत हैं, लेकिन एकजुटता नहीं पाकिस्तान में बेरोजगारी है. महंगाई लगातार बढ़ रही है. आर्थिक संकट गहरा रहा है. नेतृत्वक अस्थिरता बनी हुई है. युवाओं में भविष्य को लेकर निराशा भी है. फिर भी ये सभी असंतोष अलग-अलग क्षेत्रों, जातीय समूहों और नेतृत्वक पहचान में बंटे हुए हैं. बलूचिस्तान की समस्याएं अलग हैं, खैबर पख्तूनख्वा की अलग और पंजाब की अलग. यही विखंडन किसी राष्ट्रीय युवा आंदोलन को जन्म नहीं लेने देता. कई आंदोलन हैं, लेकिन सब बिखरे हुए पाकिस्तान में कई सामाजिक आंदोलन वर्षों से चल रहे हैं. Baloch Yakjehti Committee (BYC) जबरन गुमशुदगी के खिलाफ आवाज उठाती है. Pashtun Tahafuz Movement (PTM) पश्तून समुदाय के अधिकारों की बात करता है. औरत मार्च स्त्रीओं के अधिकारों पर काम करता है. वकीलों का आंदोलन न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चला. लेकिन इन सभी आंदोलनों की एक सीमा है. इनकी पहचान क्षेत्रीय, जातीय या वैचारिक मानी जाती है. इसलिए ये पूरे देश का साझा आंदोलन नहीं बन पाते. पाकिस्तान पर मेरी किताब पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सोशल मीडिया पर भी राज्य की मजबूत पकड़ हिंदुस्तान में सोशल मीडिया अक्सर प्रशासन और जनता के बीच खुली बहस का मंच बन जाता है. पाकिस्तान में स्थिति अलग है. डॉ. कोटोके बताती हैं कि वहां डिजिटल आतंकवाद जैसी अवधारणाओं के माध्यम से नेतृत्वक आलोचना और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की रेखा कई बार धुंधली कर दी जाती है. राज्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल अपनी उपलब्धियों, सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के नैरेटिव को मजबूत करने के लिए भी करता है. इससे वैकल्पिक नेतृत्वक विमर्श सीमित हो जाता है. छात्र नेतृत्व पर पुरानी बंदिशें पाकिस्तान में स्वतंत्र छात्र नेतृत्व भी लंबे समय से कमजोर है. 1984 में General Zia-ul-Haq ने छात्र संघों पर प्रतिबंध लगाया था. यह प्रतिबंध आज भी प्रभावी है. इसके बाद अदालतों ने भी छात्रों के लिए नेतृत्वक गतिविधियों पर कई शर्तें लागू कीं. जब विश्वविद्यालयों में ही संगठित छात्र नेतृत्व कमजोर हो जाए, तब राष्ट्रीय युवा आंदोलन खड़ा करना और कठिन हो जाता है. क्या भविष्य में तस्वीर बदल सकती है? डॉ. कोटोके मानती हैं कि पाकिस्तान में परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं. देश की बड़ी आबादी युवा है. डिजिटल कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है. सोशल मीडिया अब मुख्यधारा की नेतृत्व का अहम हिस्सा बन चुका है. यदि कभी बेरोजगारी, आर्थिक संकट, लोकतांत्रिक अधिकारों और नेतृत्वक असंतोष जैसे मुद्दे जातीय और प्रांतीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक साझा राष्ट्रीय एजेंडा बन जाते हैं, तब पाकिस्तान का युवा वर्ग स्वतंत्र नेतृत्वक शक्ति के रूप में उभर सकता है. हिंदुस्तान के लिए क्या सीख? हिंदुस्तान और पाकिस्तान की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन डिजिटल नेतृत्व दोनों देशों में तेजी से बदल रही है. हिंदुस्तान का अनुभव बताता है कि जब युवा किसी साझा सार्वजनिक मुद्दे के इर्द-गिर्द संगठित होते हैं, तो उनका प्रभाव केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहता. वहीं पाकिस्तान का अनुभव यह दिखाता है कि यदि डिजिटल ऊर्जा किसी एक नेता या दल तक सीमित रह जाए, तो वह व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप नहीं ले पाती. यही कारण है कि पाकिस्तान आज Digital Mobilization Without a Gen Z Uprising का उदाहरण बनकर सामने आता है- जहां इंटरनेट पर नेतृत्वक सक्रियता तो व्यापक है, लेकिन वह अभी तक स्वतंत्र, राष्ट्रीय और मुद्दा-आधारित युवा आंदोलन में परिवर्तित नहीं हुई है. आने वाले वर्षों में यदि आर्थिक चुनौतियां, युवाओं की आकांक्षाएं और लोकतांत्रिक सवाल एक साझा राष्ट्रीय विमर्श में बदलते हैं, तो पाकिस्तान की डिजिटल पीढ़ी केवल ऑनलाइन दर्शक नहीं, बल्कि नेतृत्वक परिवर्तन की निर्णायक शक्ति भी बन सकती है. तब तक, वहां की नेतृत्व में सोशल मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, लेकिन वह वास्तविक Gen Z जनआंदोलन का विकल्प नहीं बन पाएगी. नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Pacific : चीन के खिलाफ, हिंदुस्तान के लिए क्यों हैं Australia और New Zealand खास नया विचार IR & Geopolitics स्पेशल : Indonesia : पीएम मोदी की यात्राएं टूरिज्म ट्रिप

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JPSC Scam Live Updates: छात्रों को मनाने उतरी हेमंत सरकार, थोड़ी देर में होगी वार्ता

राज्य प्रशासन ने जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग कर रहे आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत के लिए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह पहल छात्रों को मनाने के प्रयास का हिस्सा है. The post JPSC Scam Live Updates: छात्रों को मनाने उतरी हेमंत प्रशासन, थोड़ी देर में होगी वार्ता appeared first on Naya Vichar.

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WTC 2025-27 Points Table: भारत से आगे निकला बांग्लादेश, जानिए टॉप-5 टीमों का हाल

पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने आखिरकार विदेशी धरती पर टेस्ट क्रिकेट में लगातार हार के लंबे सिलसिले को खत्म कर दिया है. पोर्ट ऑफ स्पेन में स्पोर्ट्से गए दूसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराकर न सिर्फ दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर कराई, बल्कि वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 की अंक तालिका में भी अपनी स्थिति सुधार ली. इस जीत से पहले पाकिस्तान की टीम विदेशी जमीन पर लगातार 8 टेस्ट मैच हार चुकी थी. लंबे समय से चली आ रही इस निराशाजनक स्ट्रीक का अंत बाबर आजम की कप्तानी वाली टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के साथ किया. पाकिस्तान के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि टीम पिछले कुछ समय से विदेशी परिस्थितियों में संघर्ष करती नजर आ रही थी. WTC पॉइंट्स टेबल में पाकिस्तान को मिला फायदा वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत का सीधा फायदा पाकिस्तान को वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की अंक तालिका में मिला। मैच से पहले पाकिस्तान सबसे नीचे मौजूद था, लेकिन पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट जीतने के बाद उसने वेस्टइंडीज को पीछे छोड़ते हुए आठवां स्थान हासिल कर लिया. पाकिस्तान का पॉइंट्स परसेंटेज (PCT) अब बढ़कर 22.22 हो गया है, जबकि वेस्टइंडीज 20.83 प्रतिशत अंकों के साथ नौवें स्थान पर पहुंच गया है. हालांकि पाकिस्तान अभी भी टॉप टीमों से काफी पीछे है, लेकिन यह जीत उसके WTC अभियान को पटरी पर लाने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है. इसे भी पढ़े- जसप्रीत बुमराह को सिर्फ टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान देना चाहिए, जानिए पूर्व क्रिकेटर ने क्यों दी ऐसी सलाह पाकिस्तान की पहली विदेशी टेस्ट जीत पाकिस्तान को विदेशी धरती पर पिछली टेस्ट जीत जुलाई 2023 में मिली थी. इसके बाद टीम को लगातार 8 टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली इस जीत ने टीम को लंबे इंतजार के बाद राहत दी है. दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान के गेंदबाजों और बल्लेबाजों ने संतुलित प्रदर्शन किया. टीम ने मैच के अहम मौकों पर दबाव बनाए रखा और मेजबान वेस्टइंडीज को वापसी का मौका नहीं दिया. ऑस्ट्रेलिया WTC टेबल में शीर्ष पर वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 की मौजूदा अंक तालिका में ऑस्ट्रेलिया सबसे ऊपर है. ऑस्ट्रेलिया का पॉइंट्स परसेंटेज 87.50 है और वह मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका 75.00 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है. चौंकाने वाली बात यह है कि बांग्लादेश ने शानदार शुरुआत करते हुए 58.33 प्रतिशत अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया है. वहीं हिंदुस्तानीय टीम, जिसकी कप्तानी शुभमन गिल कर रहे हैं, 48.15 प्रतिशत अंकों के साथ पांचवें नंबर पर है. हिंदुस्तान, श्रीलंका और इंग्लैंड की स्थिति WTC अंक तालिका में श्रीलंका 41.67 प्रतिशत अंकों के साथ छठे स्थान पर है, जबकि इंग्लैंड 24.36 प्रतिशत अंकों के साथ सातवें पायदान पर मौजूद है. पाकिस्तान अब आठवें स्थान पर पहुंच चुका है और वेस्टइंडीज नौवें नंबर पर है. पाकिस्तान के लिए यह जीत केवल एक टेस्ट मैच की जीत नहीं है, बल्कि WTC अभियान को दोबारा मजबूत करने का मौका भी है. आने वाले मुकाबलों में टीम अगर लगातार अच्छा प्रदर्शन करती है तो वह अंक तालिका में और ऊपर पहुंच सकती है. इसे भी पढ़े- ब्रोंको टेस्ट से होगी खिलाड़ियों की परीक्षा, BCCI ने घटाया टाइम लिमिट The post WTC 2025-27 Points Table: हिंदुस्तान से आगे निकला बांग्लादेश, जानिए टॉप-5 टीमों का हाल appeared first on Naya Vichar.

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16 साल की लड़की के साथ रेप, चेहरे को कुचला और प्राइवेट पार्ट में डाला रॉड ; 5 की हुई गिरफ्तारी

असम के हैलाकांडी जिले में एक 16 साल की लड़की के साथ उसके घर के रेप किया गया और उसके शरीर के साथ हैवानियत की गई. उसके चेहरे को बुरी तरह कुचल दिया गया था और उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड डाला गया था. पुलिस का कहना है कि यह केस लव ट्रायंगल का जिसकी वजह से लड़की की इस तरह हत्या की गई है. 1 अगस्त को हुई हत्या शनिवार रात को कतलीचेरा पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले अलोइचेरा इलाके में लड़की अपने घर पर मरी हुई मिली. उसकी मां के अनुसार उनका पूरा परिवार पास में एक दावत में गया था. उस पार्टी से पीड़िता जल्दी लौट आई थी, क्योंकि उसकी बहस एक रिश्तेदार से हो गई थी. बाद में जब वे लोग लगभग एक घंटे बाद घर लौटे तो बेटी की हालत देखकर सदमे में आए. उसका सिर, फटा हुआ था. चेहरे को कुचल दिया गया था और प्राइवेट पार्ट मेंरॉड डाला गया था. मां ने मांगी दोषियों के लिए मौत की सजा पीड़िता की मां ने आरोपियों के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए कहा है कि बेटी को इस तरह देखना भयानक था. एक छोटी बच्ची के साथ इतनी बेरहमी कोई कैसे कर सकता है. पीड़ित की बहन ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने हमले के बाद शरीर को बुरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया. उसने बताया कि उसका चेहरा कुचल दिया गया था, उसके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया था और उसके प्राइवेट पार्ट्स में कोई रॉड जैसी चीज डाली गई थी. अबतक 5 लोगों की हुई गिरफ्तारी हिंदुस्तान टाइम्स में छपी समाचार के अनुसार पुलिस ने बताया कि पोस्टमॉर्टम जांच से यह कंफर्म हुआ है कि उसकी हत्या से पहले उसके साथ रेप किया गया था. इस मामले में अबतक 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें से एक नाबालिग है. दो लोगों की पहचान मनोज दास उर्फ ​​राजदीप दास (23) और सिराज दास (18) के तौर पर हुई.सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) अमिताब सिन्हा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सोमवार को एक 17 साल के लड़के समेत तीन टीनएजर्स को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें छह दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है. SSP के मुताबिक, जांच करने वालों का मानना ​​है कि पीड़िता के कथित तौर पर दो आरोपियों के साथ रोमांटिक रिश्ते थे और शायद यही मर्डर का कारण हो सकता है. विरोध प्रदर्शन शुरू 16 साल की लड़की के साथ हुई इस दुर्घटना के बाद असम की बराक घाटी में लोगों में गुस्सा है और वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इस रेपकांड के प्रति लोगों का गुस्सा फूटा है और वे ऐसे लोगों को सख्त सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं और उस सोच को भी कोस रहे हैं, जिसकी वजह से इस तरह की घटनाएं होती हैं. ये भी पढ़ें : तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार, हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा The post 16 साल की लड़की के साथ रेप, चेहरे को कुचला और प्राइवेट पार्ट में डाला रॉड ; 5 की हुई गिरफ्तारी appeared first on Naya Vichar.

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मौत से मेरा पुराना हिसाब है… 19 साल बाद लौटा शिवम पंडित, आवारापन 2 के ट्रेलर ने बढ़ाई एक्साइटमेंट

Awaarapan 2 Trailer: करीब 19 साल बाद शिवम पंडित एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी कर चुका है. इस बार वह पहले से ज्यादा टूटा हुआ, ज्यादा गुस्से में और अपने अधूरे हिसाब चुकता करने के इरादे के साथ लौटा है. विशेष फिल्म्स ने ‘आवारापन 2’ का दमदार ट्रेलर रिलीज कर दिया है. वीडियो में शबाना आजमी का दमदार डायलॉग सुनने को मिलता है, जिसमें वह कहती हैं, इतनी हसीन शक्ल है.. मौत से मिलने का शौक है तुम्हें. फिर इमरान हाशमी कहते हैं, मौत… उससे मेरा पुराना रिश्ता है, एक कर्ज है, जो मुझे चुकाना है. आवारापन 2 में शिवम की दिखेगी अंधेरी दुनिया, चुकाएंगे पुराना हिसाब आवारापन 2 के ट्रेलर में एक्शन, इमोशन्स और सस्पेंस का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो सीधे शिवम की अंधेरी दुनिया में ले जाता है. बदला, मुक्ति और मुश्किल फैसलों से भरी यह कहानी शुरू से आखिर तक बांधे रखती है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और म्यूजिक भी पुराने ‘आवारापन’ की याद ताजा कर देता है. दिशा पाटनी, जारा के रोल में फिल्म की कहानी में नया इमोशनल एंगल जोड़ती नजर आती हैं. शबाना आजमी भी नफीसा के किरदार में विलेन बनी हुई है. ट्रेलर में कई नए किरदारों की झलक भी देखने को मिलती है, जिनमें पूरन गब्बी (ज़ोरावर), अनिरुद्ध रावल (सिकंदर), सुरेंद्र विक्की (जयदीप), विजयंत कोहली (महमूद) और अतुल कुमार (समर्थ) शामिल हैं. आवारापन 2 के सॉन्ग्स मचा रहे हैं धमाल ट्रेलर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है ‘तेरा मेरा रिश्ता’, जिसे मिथून ने कंपोज किया है और साज भट्ट और सुबोध शर्मा ने अपनी आवाज दी है. आवारापन 2 का म्यूजिक भी काफी दमदार माना जा रहा है. मिथून, जीत गांगुली, अमाल मलिक, अखिल सचदेवा और वासिफ अहमद ने एल्बम को संगीत दिया है, जबकि गीत सईद कादरी, रश्मि विराग, अखिल सचदेवा और सचिन सिंह चंदेल ने लिरिक्स लिखे हैं, फिल्म के गाने ‘वे जुनून’, ‘ये आवारापन’ और ‘तो फिर आओ’ पहले ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा रहा है. आवारापन 2 कब होगी रिलीज मुकेश भट्ट और विशेष फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण विशेष भट्ट ने किया है. फिल्म का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है, जबकि इसकी कहानी बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है. ‘आवारापन 2’ 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी. ये भी पढ़ें: सनी देओल Vs इमरान हाशमी की होगी बॉक्स ऑफिस भिड़ंत, नहीं टलेगी ‘आवारापन 2’ की रिलीज, इस दिन आएगा ट्रेलर The post मौत से मेरा पुराना हिसाब है… 19 साल बाद लौटा शिवम पंडित, आवारापन 2 के ट्रेलर ने बढ़ाई एक्साइटमेंट appeared first on Naya Vichar.

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Video : पिता के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, वीडियो कॉल पर हुईं शामिल, भेजे 5,100 रुपये

हरियाणा के सोनीपत में एक ऐसे पिता की दर्दभरी कहानी सामने आई है, जिन्होंने पूरी जिंदगी अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और उनका सहारा बने रहे. लेकिन उनकी मौत के बाद कोई भी बेटी अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सकी. नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई में मौजूद तीनों बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता को अंतिम विदाई दी. मुंबई के रहने वाले और कपड़ा कारोबारी रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता पिछले करीब दो साल से हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. वह अपनी पत्नी मीना के साथ वहां आए थे, लेकिन कुछ समय पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था. इसके बाद वह अकेले ही वृद्धाश्रम में रह रहे थे. वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तुरंत तीनों बेटियों को निधन की सूचना दी लंबी बीमारी के बाद मंगलवार (4 अगस्त) तड़के करीब साढ़े तीन बजे शिवचरण रामरतन गुप्ता का निधन हो गया. उनकी मौत के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तुरंत उनकी तीनों बेटियों को इसकी सूचना दी और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए संपर्क किया. हालांकि बेटियां नहीं पहुंचीं. अंतिम संस्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर शिवचरण रामरतन गुप्ता का अंतिम संस्कार कराया. वृद्धाश्रम संचालक ने कहा- 20 दिन पहले बताया था पिता की तबीयत खराब है इंडिया टुडे से बात करते हुए वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि शिवचरण गुप्ता के पास अपना फोन था, जिससे वह अपनी बेटियों से अक्सर बात करते थे. लेकिन जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो बेटियों के फोन आने भी कम हो गए. आनंद कुमार के मुताबिक, गुप्ता की बिगड़ती हालत की जानकारी करीब 20 दिन पहले ही उनकी बेटियों को दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वे उनसे मिलने नहीं आईं. The post Video : पिता के अंतिम संस्कार में नहीं आईं बेटियां, वीडियो कॉल पर हुईं शामिल, भेजे 5,100 रुपये appeared first on Naya Vichar.

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जिस साड़ी को कभी रानियां पहनती थीं, उसकी दीवानगी आज भी बरकरार है, जानिए चंदेरी सिल्क की सदियों पुरानी विरासत

Chanderi Saree History: मध्य प्रदेश के छोटे-से ऐतिहासिक शहर चंदेरी का नाम लेते ही सबसे पहले जिस चीज का ख्याल आता है, वह है यहां की खूबसूरत चंदेरी सिल्क साड़ी. हल्की बुनावट, महीन कपड़ा और जरी की बारीक कारीगरी इसे दूसरी साड़ियों से अलग पहचान दिलाती है. कभी यह साड़ी राजघरानों और रानियों की शान मानी जाती थी, लेकिन आज इसकी खूबसूरती और शालीनता ने इसे देश ही नहीं, दुनिया भर की स्त्रीओं की पसंद बना दिया है. फिल्म ‘स्त्री’ की वजह से चंदेरी शहर एक बार फिर चर्चा में आया. हालांकि, इस फिल्म का चंदेरी सिल्क साड़ी के इतिहास से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इसने लोगों की दिलचस्पी इस ऐतिहासिक शहर और इसकी समृद्ध हथकरघा परंपरा की ओर जरूर बढ़ाई. आइए जानते हैं कि आखिर चंदेरी सिल्क साड़ी की शुरुआत कैसे हुई और सदियों बाद भी इसकी लोकप्रियता क्यों बरकरार है. चंदेरी सिल्क साड़ी का इतिहास PC: AI Image फैशन के बदलते दौर में भी चंदेरी सिल्क साड़ी का आकर्षण कम नहीं हुआ है. शादी, त्योहार और खास मौकों पर यह आज भी स्त्रीओं की पहली पसंद बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह हल्की होने के बावजूद बेहद रॉयल और एलिगेंट लुक देती है. The post जिस साड़ी को कभी रानियां पहनती थीं, उसकी दीवानगी आज भी बरकरार है, जानिए चंदेरी सिल्क की सदियों पुरानी विरासत appeared first on Naya Vichar.

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