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August 10, 2026

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यूपी में बीजेपी को चुनौती देगी करणी सेना, 50-70 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान, अम्मू बोले- घमंड चूर करेंगे

UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले एक और सियासी मोर्चा खुलता नजर आ रहा है. करणी सेना ने यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है. करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने लखनऊ में आयोजित एक बैठक में कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश की 50 से 70 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है. अम्मू ने आरक्षण, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अखिलेश यादव के PDA को लेकर भी निशाना साधा. अम्मू ने किसी नेतृत्वक दल या नेता का सीधे नाम लिए बिना सत्तारूढ़ बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे कुछ घमंडी लोगों का घमंड चूर किया जाएगा. करणी सेना के इस ऐलान को यूपी की चुनावी नेतृत्व में एक नए समीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. स्नातक MLC चुनाव में डॉ. स्मिता मिश्रा को समर्थन लखनऊ में हुई बैठक के दौरान सूरजपाल सिंह अम्मू ने स्नातक MLC चुनाव को लेकर भी अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि करणी सेना डॉ. स्मिता मिश्रा का समर्थन करेगी. अम्मू ने इस दौरान कई नेतृत्वक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि करणी सेना आने वाले समय में किसानों और अन्य मुद्दों को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाएगी. राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अम्मू का हमला राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर भी करणी सेना प्रमुख ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी तक केवल कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए. अम्मू ने कहा कि राम उनके आराध्य हैं और उनके आराध्य के घर में चोरी होना गंभीर मामला है. उन्होंने इस मामले में कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए. बांकीपुर और दतिया उपचुनाव का भी किया जिक्र मीडिया से बातचीत के दौरान सूरजपाल अम्मू ने बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया में हुए उपचुनावों का भी जिक्र किया. उन्होंने इन सीटों पर बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह जनता के विरोध को दर्शाता है. उन्होंने किसानों के मुद्दे पर भी बड़ा ऐलान किया. अम्मू ने कहा कि किसानों के हित में 21 सितंबर को सहारनपुर से दिल्ली तक पदयात्रा निकाली जाएगी. आरक्षण को लेकर बोले- जरूरतमंद को ही मिले लाभ आरक्षण के मुद्दे पर सूरजपाल सिंह अम्मू ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि गरीब किसी भी जाति का हो सकता है, चाहे वह ब्राह्मण हो या बनिया. उन्होंने कहा कि आरक्षण का आधार जरूरतमंद व्यक्ति होना चाहिए और इसका लाभ उसी को मिलना चाहिए, जिसे वास्तव में इसकी आवश्यकता है. अखिलेश यादव के PDA पर भी साधा निशाना सपा प्रमुख अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर भी अम्मू ने निशाना साधा. उन्होंने PDA की अपनी अलग व्याख्या करते हुए पंडित समाज का जिक्र किया. अम्मू ने सपा प्रशासन के दौर के कथित नारों का हवाला देते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उनकी प्रशासन के दौरान ठाकुर समाज को लेकर भी टिप्पणियां की गईं. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए कहा कि “ठाकुरों की प्रशासन है और योगी जी बगैर मूंछ वाले ठाकुर हैं.” 50-70 सीटों पर उम्मीदवार उतारने से बढ़ेगी सियासी हलचल करणी सेना के 50 से 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद यूपी की सियासत में हलचल बढ़ सकती है. हालांकि, पार्टी किन सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और उसका चुनावी गठजोड़ किसके साथ होगा, इसको लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है. Also Read : पति से हुआ विवाद… स्त्री सिपाही ने खाया सल्फास, इलाज के दौरान मौत The post यूपी में बीजेपी को चुनौती देगी करणी सेना, 50-70 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान, अम्मू बोले- घमंड चूर करेंगे appeared first on Naya Vichar.

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साबुन-बिस्किट खरीदना पड़ेगा महंगा, FMCG कंपनियां सितंबर में फिर बढ़ा सकती हैं दाम

अगर आप बिस्किट, साबुन, शैंपू, चाय-कॉफी या रोजमर्रा के दूसरे FMCG प्रोडक्ट्स खरीदते हैं, तो आने वाले महीनों में आपकी जेब पर थोड़ा और असर पड़ सकता है. कमोडिटी की बढ़ती लागत और जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच कई बड़ी FMCG कंपनियां सितंबर तिमाही में फिर से कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं. हालांकि, कंपनियों का कहना है कि डिमांड अभी मजबूत बनी हुई है. कंपनियां कीमत क्यों बढ़ा रही हैं? FMCG कंपनियों ने जून तिमाही में औसतन 2-5 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई थीं. अब सितंबर तिमाही में भी इसी तरह की चुनिंदा प्राइसिंग देखने को मिल सकती है. कंपनियां सिर्फ कीमत बढ़ाने के बजाय श्रिंकफ्लेशन (Shrinkflation) का सहारा भी ले रही हैं. यानी प्रोडक्ट की कीमत वही रहती है, लेकिन पैकेट में सामान की मात्रा यानी ग्रामेज कम कर दी जाती है. कंपनियां शुगर, पाम ऑयल, क्रूड ऑयल और दूसरे इनपुट कॉस्ट पर नजर बनाए हुए हैं. इसके साथ ही मानसून और अल नीनो जैसे मौसम से जुड़े जोखिम भी चिंता का कारण हैं. ब्रिटानिया के बिस्किट पैकेट में क्या बदलेगा? ब्रिटानिया को सितंबर तिमाही में करीब 1.5-2 फीसदी और प्राइसिंग एक्शन की उम्मीद है. इसका असर मुख्य रूप से 5 और 10 रुपये वाले बिस्किट पैक्स में श्रिंकफ्लेशन के जरिए दिख सकता है. कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगेव ने कहा कि पहली तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन से आई. उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा तिमाही में भी करीब 1.5-2 फीसदी का और असर देखने को मिल सकता है. हालांकि, कंपनी के मुताबिक डिमांड का माहौल मजबूत है और इनपुट कॉस्ट ज्यादा रहने के बावजूद FY27 में EBITDA मार्जिन को FY26 के स्तर पर बनाए रखने की कोशिश रहेगी. ये भी पढ़ें: मच्छर भगाने से लेकर नहाने तक का बढ़ा खर्च, Godrej के कई प्रोडक्ट्स हुए महंगे साबुन और दूसरे FMCG प्रोडक्ट्स भी होंगे महंगे? गॉडरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने जून तिमाही में करीब 5 फीसदी औसत कीमत बढ़ाई थी. कंपनी सितंबर तिमाही में भी इसी तरह की बढ़ोतरी कर सकती है, लेकिन क्रूड ऑयल की कीमतों को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार है. डाबर इंडिया भी मान रही है कि इनपुट कॉस्ट का दबाव अभी कुछ समय रह सकता है. ऐसे में कंपनी कीमतों में चुनिंदा बढ़ोतरी के साथ कॉस्ट कटिंग और प्रोडक्टिविटी पर फोकस करेगी. कंपनी ने FY27 में डबल डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ का भरोसा जताया है. हिंदुस्तान यूनिलीवर यानी HUL ने भी सितंबर तिमाही में कई कैटेगरी में कीमत बढ़ाने के संकेत दिए हैं. कंपनी को अप्रैल-जून के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2-5 फीसदी की सीक्वेंशियल इन्फ्लेशन की उम्मीद है. टाटा और नेस्ले का क्या कहना है? टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी कीमतों में बदलाव किया जा सकता है, क्योंकि इनपुट कॉस्ट लगातार बदल रही है. कंपनी वेस्ट एशिया की स्थिति पर भी नजर रख रही है. वहीं, नेस्ले इंडिया ने जियोपॉलिटिकल और महंगाई से जुड़े दबाव को चिंता का विषय बताया है. कंपनी के मुताबिक इन परिस्थितियों में शॉर्ट टर्म में ओवरऑल कंजम्पशन कुछ नरम पड़ सकता है. वेस्ट एशिया संघर्ष और अल नीनो का मानसून पर संभावित असर भी आने वाले समय में FMCG ग्रोथ के लिए अहम रहेगा. ये भी पढ़ें: त्योहारी सीजन से पहले कंपनियां बढ़ाएंगी दाम! टूथपेस्ट से लेकर पेंट और टायर तक हो सकते हैं महंगे The post साबुन-बिस्किट खरीदना पड़ेगा महंगा, FMCG कंपनियां सितंबर में फिर बढ़ा सकती हैं दाम appeared first on Naya Vichar.

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शकील नूरानी पर रेप का आरोप, 33 साल की एक्ट्रेस की शिकायत पर गिरफ्तारी, सातारा फार्महाउस से पकड़े गए

Shakeel Noorani Arrested: बॉलीवुड फिल्ममेकर शकील नूरानी पर एक 33 वर्षीय अभिनेत्री ने रेप और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत के बाद मुंबई की मालवणी पुलिस ने 73 वर्षीय फिल्ममेकर को सातारा स्थित उनके फार्महाउस से गिरफ्तार किया है. 2016 में हुई थी अभिनेत्री से मुलाकात पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, अभिनेत्री की मुलाकात शकील नूरानी से साल 2016 में हुई थी. अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि इसके बाद नूरानी ने कथित तौर पर कई बार उसका यौन उत्पीड़न किया. शिकायत में नशीला पदार्थ देने और धमकाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं. सातारा के फार्महाउस से हुई गिरफ्तारी मामले की जांच के दौरान पुलिस को शकील नूरानी के सातारा स्थित फार्महाउस में होने की जानकारी मिली. इसके बाद मालवणी पुलिस ने वहां कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और उनसे जुड़े सबूतों की जांच कर रही है. वकील ने आरोपों से किया इनकार वहीं, शकील नूरानी के वकील ने अभिनेत्री के आरोपों को खारिज किया है. आरोपी पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया है. ऐसे में पुलिस की जांच इस मामले में बेहद अहम हो गई है. फिलहाल मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. कौन हैं शकील नूरानी? शकील नूरानी बॉलीवुड के पुराने फिल्ममेकर हैं. वह ‘बड़े दिलवाला’ और ‘जोरू का गुलाम’ जैसी फिल्मों से जुड़े रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले नूरानी अब गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं. आरोप साबित होना अभी बाकी अभिनेत्री की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है. हालांकि, लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं. अदालत में दोष साबित होने तक शकील नूरानी को आरोपी के तौर पर ही देखा जाएगा. पुलिस इस मामले में शिकायत और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की जांच कर रही है. The post शकील नूरानी पर रेप का आरोप, 33 साल की एक्ट्रेस की शिकायत पर गिरफ्तारी, सातारा फार्महाउस से पकड़े गए appeared first on Naya Vichar.

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WTC टेबल में सबसे ऊपर ऑस्ट्रेलिया, भारत को क्वालिफाई करने के लिए जीतने होंगे 9 में से 8 मैच

WTC 2025-2027: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 में मुकाबला अब रोमांचक दौर में पहुंच गया है. ऑस्ट्रेलिया 87.50 प्रतिशत अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका दूसरे स्थान पर है. हिंदुस्तान 48.15 प्रतिशत के साथ पांचवें नंबर पर है और उसे फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए आगामी मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज करनी होगी. 9 टेस्ट मैचों में से कम से कम 7 से 8 मैच जीतने होंगे. यदि हिंदुस्तान 7 मैच जीतता है, तो उसे अन्य टीमों के प्रदर्शन पर निर्भर रहना पड़ सकता है. 13 से शुरू होगा एक्शन वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में अब अगला एक्शन 13 अगस्त से देखने को मिलेगा, जहां बांग्लादेश टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर होगी. यह दो मैचों की टेस्ट सीरीज है. वहीं टीम इंडिया 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ उनके घर में दो टेस्ट मैचों की सीरीज स्पोर्ट्सेगी. दूसरे स्थान पर दक्षिण अफ्रीका ऑस्ट्रेलिया ने आठ में से सात टेस्ट जीतकर शानदार शुरुआत की है. टीम की नजर लगातार तीसरी WTC फाइनल में जगह बनाने पर है. ट्रेविस हेड इस चक्र में 853 रन और मिचेल स्टार्क 46 विकेट ले चुके हैं. डिफेंडिंग चैंपियन दक्षिण अफ्रीका ने चार में तीन टेस्ट जीते हैं और वे दूसरे स्थान पर है. Also Read: वर्ल्ड कप चयन पर बोले भुवनेश्वर कुमार, कहा- मेरा काम सिर्फ स्पोर्ट्सना है, आगे क्या होगा नहीं बता सकता तीसरे स्थान पर पहुंचा न्यूजीलैंड न्यूजीलैंड चार जीत के साथ तीसरे स्थान पर है. टीम ने इंग्लैंड को उसके घर में 2-1 से हराकर अपनी स्थिति मजबूत की है. वहीं 13 टेस्ट में सिर्फ चार जीत के कारण इंग्लैंड सातवें स्थान पर है. न्यूजीलैंड से 1-2 की हार ने उसकी फाइनल की राह और मुश्किल कर दी है. रैंक टीम मैच जीत हार ड्रॉ डिड अंक PCT 1 ऑस्ट्रेलिया 8 7 1 0 0 84 87.50% 2 दक्षिण अफ्रीका 4 3 1 0 0 36 75.00% 3 न्यूजीलैंड 6 4 1 1 0 52 72.22% 4 बांग्लादेश 4 2 1 1 0 28 58.33% 5 हिंदुस्तान 9 4 4 1 0 52 48.15% 6 श्रीलंका 4 1 1 2 0 20 41.67% 7 इंग्लैंड 13 4 8 1 14 38 24.36% 8 पाकिस्तान 6 2 4 0 8 16 22.22% 9 वेस्टइंडीज 12 2 8 2 2 30 20.83% वेस्टइंडीज टीम WTC से बाहर पाकिस्तान छह टेस्ट में दो जीत के साथ आठवें स्थान पर है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज ड्रॉ कराने के बाद टीम ने कुछ राहत जरूर हासिल की है. 12 टेस्ट में दो जीत के साथ वेस्टइंडीज सबसे नीचे है. पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज ड्रॉ रहने के बाद टीम को अब सिर्फ बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज स्पोर्ट्सनी है. ऐसे में वेस्टइंडीज टीम WTC से पूरी तरह बाहर हो गई है. Also Read: बीच मैदान पर आखिर श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने क्यों किया सिराज का बैट चेक, जानें क्या था पूरा मामला The post WTC टेबल में सबसे ऊपर ऑस्ट्रेलिया, हिंदुस्तान को क्वालिफाई करने के लिए जीतने होंगे 9 में से 8 मैच appeared first on Naya Vichar.

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Exclusive: CINTAA में ‘मैडम जी’ कल्चर! पूनम ढिल्लों पर उपासना सिंह के गंभीर आरोप, बोलीं- ‘जो उनकी बात माने, उसे मौका… विरोध किया तो रातोंरात पद बदल दिया’

CINTAA Controversy: सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) में अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आता दिख रहा है। एग्जीक्यूटिव कमेटी के कई सदस्यों के इस्तीफे के बीच अभिनेत्री और CINTAA की पूर्व जनरल सेक्रेटरी उपासना सिंह ने नया विचार से एक्सक्लूसिव बातचीत में संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान और कामकाज के तरीके को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उपासना सिंह का आरोप है कि CINTAA में लंबे समय से चुपचाप बैठकें होती थीं, फैसले लिए जाते थे और सभी सदस्यों को इसकी जानकारी तक नहीं होती थी। उन्होंने मौजूदा नेतृत्व पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग ‘मैडम जी’ की बात के मुताबिक काम करते थे, उनके लिए सब ठीक रहता था, लेकिन जो किसी मुद्दे पर विरोध करते, उन्हें परेशान किया जाता था। ‘चुपचाप मीटिंग होती थी’ उपासना सिंह ने बातचीत में आरोप लगाया कि कमेटी की बैठकों और फैसलों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जाती थी। उनके मुताबिक, कुछ मीटिंग्स चुपचाप हो जाती थीं और बाद में सदस्यों को उनके फैसलों की जानकारी मिलती थी। उन्होंने कहा कि कमेटी के भीतर सभी की राय लेने के बजाय कुछ लोगों के हिसाब से फैसले किए जाने लगे थे, जिससे धीरे-धीरे असंतोष बढ़ता गया। ‘मैडम जी कहकर उनके हिसाब से चलो तो ठीक…’ उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों के बारे में बात करते हुए कहा कि जो लोग उन्हें ‘मैडम जी’ कहकर उनके अनुसार काम करते थे, उनके साथ कथित तौर पर सब ठीक रहता था। लेकिन अगर कोई उनके फैसले या किसी मुद्दे पर विरोध करता था, तो उसके लिए परिस्थितियां मुश्किल हो जाती थीं। उनका दावा है कि विरोध करने वाले लोगों को परेशान किया जाता था और कभी-कभी रातोंरात उनकी पोजिशन तक बदल दी जाती थी। ‘अपने लोगों को मौके दिए जाते थे’ उपासना सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि CINTAA में कुछ खास लोगों को प्राथमिकता और मौके दिए जाते थे। वहीं, कई दूसरे सदस्यों के साथ कथित तौर पर अलग व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों के CINTAA कार्ड तक कैंसिल कर दिए गए, जिससे सदस्यों के बीच असंतोष और बढ़ा। CINTAA के पैसों के इस्तेमाल पर भी सवाल एक्सक्लूसिव बातचीत में उपासना सिंह ने CINTAA को मिले पैसों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन को मिले पैसों का गलत इस्तेमाल (misuse) हुआ है। हालांकि, इन वित्तीय आरोपों को लेकर उन्होंने जिन विशेष लेनदेन या रकम का उल्लेख किया है, उन्हें प्रकाशित करने से पहले दस्तावेजी पुष्टि जरूरी होगी। ‘सिर्फ एक-दो लोग नहीं, 11 सदस्य परेशान थे’ उपासना सिंह के मुताबिक, यह किसी एक व्यक्ति या दो लोगों की नाराजगी नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि कमेटी के सभी 11 सदस्य किसी न किसी स्तर पर परेशान थे और इसी वजह से सामूहिक रूप से यह कदम उठाने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने मिलकर फैसला किया कि मौजूदा व्यवस्था को खत्म कर एक निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से नई कमेटी का गठन होना चाहिए. अब क्या चाहते हैं सदस्य? उपासना सिंह के मुताबिक, उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं बल्कि CINTAA में निष्पक्ष व्यवस्था और सही तरीके से चुनाव सुनिश्चित करना है. वह चाहती हैं कि अब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो, सभी सदस्यों को समान अवसर मिले और नई कमेटी नए तरीके से गठित की जाए, ताकि संगठन दोबारा अपने मूल उद्देश्य के साथ काम कर सके. The post Exclusive: CINTAA में ‘मैडम जी’ कल्चर! पूनम ढिल्लों पर उपासना सिंह के गंभीर आरोप, बोलीं- ‘जो उनकी बात माने, उसे मौका… विरोध किया तो रातोंरात पद बदल दिया’ appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC विवाद: छात्रों का विधानसभा घेराव आज, सरकार के आश्वासन के बावजूद CBI जांच और CGL रद्द कराने पर अड़े

रांचीः जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अनियमितता के खिलाफ जारी आंदोलन के 16वें दिन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता विफल रही. स्टेट गेस्ट हाउस में 5 घंटे की मैराथन वार्ता के बाद भी अंतिम सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद आंदोलनकारी छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव करने के अपने पूर्व के निर्णय को जारी रखा. वार्ता में शामिल प्रशासन के मंत्रियों ने कहा कि प्रशासन ने आंदोलनकारियों की 98 फीसदी मांगें मान ली हैं. कुछ मांगों लेकर जिच है. आंदोलनकारी छात्रों के विधानसभा घेराव कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राज्यभर से युवा राजधानी पहुंचने लगे हैं. आंदोलनकारी छात्रों ने दावा किया है कि सोमवार को एक लाख से अधिक युवा सड़कों पर उतरेंगे. JPSC के 3 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, तीनों से पूछताछ करेगी CID इन सबके बीच जेपीएससी के तीन सदस्यों डॉ अजीता भट्टाचार्या, डॉ अनिमा हांसदा और डॉ जमाल अहमद ने रविवार को अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है. सीआईडी ने अपनी जांच में तीनों सदस्यों को पूछताछ के लिए समन भेजा था. इससे पहले ही तीनों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इससे पूर्व आयोग के अध्यक्ष एल खियांग्ते ने सीआईडी छापेमारी के दिन ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. आज जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजिता भट्टाचार्या से पूछताछ सीआईडी सोमवार को जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजिता भट्टाचार्या से पूछताछ करेगी. जेपीएससी में गड़बड़ी के आरोप में इनको सम्मन किया गया है. सीआईडी मंगलवार को पूर्व सदस्य डॉ अनिमा हांसदा और बुधवार को डॉ जमाल अहमद से पूछताछ करेगी. इस मामले में पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते से कई दौर की बातचीत हो चुकी है. ये भी पढ़ें- JPSC Student Protest: छात्रों और प्रशासन की बैठक में जांच एजेंसी को लेकर गतिरोध, CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र पूरे मामले में सीबीआई जांच चाहते हैं विद्यार्थी मंत्री समूह से हुई वार्ता के बाद विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी कई मांगों पर प्रशासन ने सहमति जताई है. राज्य प्रशासन 14वीं जेपीएससी का पीटी और 2023 और 2025 के जेपीएससी का बैकलॉग रद्द करने की मांग पर सहमत है. इस परीक्षा में हुए पैसों के लेन-देने की ईडी से जांच कराने का प्रस्ताव प्रशासन ने दिया है. आने वाली परीक्षा में उम्र सीमा में छूट पर सहमति नहीं बन पाई है. सीजीएल परीक्षा रद्द करने पर भी प्रशासन सहमत नहीं है. विद्यार्थी पूरे मामले की सीबीआई जांच चाहते हैं. प्रशासन ने कहा इस मामले की सीआईडी जांच हो रही है, जिसे 90 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा. मामले की फास्टट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल कराई जाएगी. रिटायर जज की अध्यक्षता वाली कमेटी से जांच भी कराई जाएगी. दोपहर 12.30 बजे से शाम 5.45 बजे तक हुई वार्ता छात्र इस पर सहमत नहीं हुए, वे सीबीआई जांच चाहते हैं. छात्र टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. तीसरे दिन रविवार को प्रशासन के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय यादव और चमरा लिंडा के साथ आंदोलनरत तीनों मंच के प्रतिनिधियों की वार्ता हुई. वार्ता दोपहर के 12.30 बजे से शाम 5.45 बजे तक हुई. इस दौरान कई बार वार्ता बीच में ही रुकने की नौबत आई. वार्ता में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के पीयूष कुमार, रविंद्र, कार्तिक, आनंद, शिवांग, पंकज, राजेश, रविंद्र कुमार रवि और अंकित शामिल थे. जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के चंदन कुमार, दीनबंधु मंडल, इकबाल हुसैन, रवि शंकर, प्रेम कुमार और रामा अवतार महतो शामिल हुए. वहीं आइसा की ओर से विभा पुष्प दीप, त्रिलोकी नाथ, विजय कुमार, शशिकांत वर्मा और शहीद हुसैन शामिल हुए. सीजीएल रद्द करना संभव नहीं- मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू वार्ता के बाद पत्रकारों से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि प्रशासन का मानना है कि इस मामले में पैसे का लेन-देन हुआ है, इस कारण प्रशासन ईडी से जांच का अनुरोध करेगी. प्रशासन फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर मामले की तेजी से सुनवाई करेगी. आने वाली परीक्षाओं को दुरुस्त और पारदर्शी बनाने की के लिए आइआईटी, आईएसएम, आइआईएम रांची और एक्सआईएसएस के विशेषज्ञों के सहयोग से एसओपी तैयार किया जाएगा. सोनू ने कहा कि सीजीएल परीक्षा हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश में हुई है, इस कारण यह परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती है. प्रशासन रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच के लिए कमेटी बनाने को तैयार है. प्रशासन आंदोलनकारियों की 98% मांगों पर सहमत है. सीजीएल रद्द करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके कई अभ्यार्थी नौकरी भी कर रहे हैं. प्रशासन विद्यार्थियों की मांगों को लेकर संवेदनशील है. देवेंद्रनाथ महतो से मंत्री दीपिका ने किया अनशन तोड़ने का आग्रह मंत्री दीपिका ने देवेंद्र महतो से वीडियो कॉल पर बात की वार्ता के बीच ही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो से बात की और उनसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया. महतो वार्ता के लिए नहीं गये थे. महतो ने मंत्रियों को वार्ता का इंतजार करने का आग्रह किया. ये भी पढ़ें- JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा प्रशासन से मिले ये आश्वासन फिलहाल तीन परीक्षाएं- जेपीएससी बैकलॉग 2023, जेपीएससी बैकलॉग 2025 और 14वीं जेपीएससी पीटी रद्द की जाएंगी. टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की सीआईडी जांच कराई जाएगी। एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच सीआईडी और आर्थिक पहलुओं की जांच ईडी से कराई जाएगी. जेसीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार के लिए प्रशासन आईआईएम रांची, आईआईटी आईएसएम और एक्सआईएसएस जैसे संस्थानों की मदद लेगी. सीजीएल मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा. मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा. सभी आर्थिक एवं न्यायिक जांच की रिपोर्ट 90 दिनों के अंदर प्रशासन को सौंपने का प्रावधान किया जाएगा. लगातार तीसरे दिन छात्र प्रतिनिधियों के साथ मंत्री समूह ने की मैराथन वार्ता प्रशासन अधिकतर मांगों पर सहमत हो गई है, लेकिन छात्र सीबीआई जांच कराने और सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रशासन सीजीएल मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराना चाहती है,

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Ind vs Sl: इंडियन प्लेयर्स के निशाने पर होंगे पांच रिकॉर्ड, गिल के पास WTC में सबसे ज्यादा शतक लगाने का मौका

Ind vs Sl Test Series: हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 15 अगस्त से होने जा रहा है. टेस्ट सीरीज में कप्तान शुभमन गिल समेत कई हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों के पास कई रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा. गिल जहां बल्ले से नया रिकॉर्ड बना सकते हैं, वहीं रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव भी खास उपलब्धियों के करीब हैं. सबसे ज्यादा शतक लगाने का मौका शुभमन गिल के पास वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के मौजूदा चक्र में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाला बल्लेबाज बनने का मौका है. गिल के नाम अब तक पांच शतक हैं. श्रीलंका के खिलाफ एक शतक लगाते ही वह जो रूट को पीछे छोड़कर इस मामले में शीर्ष पर पहुंच जाएंगे. इसके अलावा गिल सीरीज में दो शतक लगाने में सफल रहे तो बतौर हिंदुस्तानीय टेस्ट कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ देंगे. गिल ने कप्तान के रूप में अब तक छह शतक लगाए हैं, जबकि सचिन के नाम सात शतक हैं. 350 टेस्ट विकेट के करीब जडेजा रविंद्र जडेजा के पास भी बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका है. सीरीज में दो विकेट लेते ही उनके टेस्ट विकेटों की संख्या 350 हो जाएगी. वह ऐसा करने वाले पांचवें हिंदुस्तानीय गेंदबाज बनेंगे. उनसे पहले अनिल कुंबले, रविचंद्रन अश्विन, कपिल देव और हरभजन सिंह यह कारनामा कर चुके हैं. वहींं हिंदुस्तान-श्रीलंका टेस्ट मुकाबलों में जडेजा के नाम 33 विकेट हैं. चार विकेट लेते ही वह ईशांत शर्मा के 36 विकेट के आंकड़े को पीछे छोड़कर इस सूची में हिंदुस्तानीय गेंदबाजों के टॉप-5 में शामिल हो जाएंगे. Also Read: वैभव सूर्यवंंशी की उम्र को लेकर क्या बोल गए ब्रेट ली, जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान 250 एशियाई इंटरनेशनल विकेट के करीब कुलदीप कुलदीप यादव एशियाई परिस्थितियों में 250 इंटरनेशनल विकेट पूरे करने से सिर्फ एक विकेट दूर हैं. उन्होंने अब तक एशिया में 141 पारियों में 249 विकेट लिए हैं. श्रीलंका के खिलाफ एक विकेट लेते ही वह इस खास क्लब में शामिल हो जाएंगे. कप्तानी में बेदी से आगे निकल सकते हैं गिल गिल की कप्तानी में हिंदुस्तान अगर श्रीलंका को 2-0 से हराता है, तो वह टेस्ट कप्तान के रूप में छह जीत के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे और बिशन सिंह बेदी की छह जीत की बराबरी करेंगे. गिल ने अब तक नौ टेस्ट में कप्तानी करते हुए पांच जीत दर्ज की हैं. Also Read: वार्म-अप मैच के आखिरी ओवर में 3 छक्के जड़कर सिराज ने दिलाई हिंदुस्तान को जीत, श्रीलंका XI को 6 विकेट से हराया The post Ind vs Sl: इंडियन प्लेयर्स के निशाने पर होंगे पांच रिकॉर्ड, गिल के पास WTC में सबसे ज्यादा शतक लगाने का मौका appeared first on Naya Vichar.

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हर साल क्यों डूबता है बिहार? 50 वर्षों की बाढ़ की पूरी कहानी, सैकड़ों करोड़ खर्च के बाद भी नहीं थमा तबाही का सिलसिला

History Of Bihar Flood: बिहार में बाढ़ कोई नई आफत नहीं है. करीब 50 वर्षों से हर साल मानसून आते ही उत्तर बिहार के लाखों लोगों की चिंता बढ़ जाती है. नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तटबंधों पर दबाव बनता है और देखते ही देखते गांव, खेत, सड़कें और घर पानी में डूबने लगते हैं. कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ता है. आंकड़े बताते हैं कि बिहार देश का सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित राज्यों में से एक है. राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर में से करीब 68,800 वर्ग किलोमीटर यानी 73 फीसदी हिस्सा बाढ़ से प्रभावित माना जाता है. उत्तर बिहार की करीब 76 फीसदी आबादी बाढ़ के खतरे वाले इलाके में रहती है. लेकिन सवाल वही है- आखिर बिहार हर साल डूबता क्यों है? और बाढ़ से बचाव के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सिलसिला क्यों नहीं रुक रहा? 1980 के दशक से शुरू नहीं, उससे भी पुरानी है बाढ़ की कहानी बिहार की बाढ़ का इतिहास काफी पुराना है. खासकर उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान, बूढ़ी गंडक, अधवारा और महानंदा जैसी नदियां हर साल अपना असर दिखाती हैं. इन नदियों की एक खास बात यह है कि इनमें से कई का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में है. यानी बिहार में बारिश कम भी हो, लेकिन नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश हुई तो उसका असर बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है. इसी वजह से बिहार की बाढ़ को सिर्फ बिहार में होने वाली बारिश से समझना सही नहीं होगा. नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और कुछ हद तक मध्य प्रदेश में होने वाली बारिश और वहां की नदियों में बढ़ने वाला पानी भी बिहार की मुश्किल बढ़ाता है. 1987: ऐसी बाढ़ जिसे बिहार आज भी याद करता है बिहार में आई सबसे भयावह बाढ़ों में 1987 की बाढ़ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. इस दौरान राज्य के 30 जिले और 24,518 गांव प्रभावित हुए थे. करीब 1,399 लोगों की मौत हुई और 5,000 से ज्यादा जानवर मारे गए. फसलों को करीब 678 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह वह दौर था जब बिहार ने देखा कि बाढ़ सिर्फ पानी का बढ़ना नहीं है. इसके साथ बीमारी, विस्थापन, फसल बर्बादी और रोजगार का संकट भी आता है. इसके बाद भी बाढ़ का सिलसिला नहीं रुका. 2004: जब बाढ़ ने 1987 को भी पीछे छोड़ दिया 2004 में उत्तर बिहार की नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जुलाई के पहले सप्ताह में ही जबरदस्त बारिश शुरू हो गई. बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, भूतही बलान और अधवारा नदी समूह में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई. बागमती नदी में दुब्बाधार के पास जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर से करीब 1.18 मीटर ऊपर पहुंच गया. बूढ़ी गंडक और कमला बलान में भी रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया गया. कुल 53 तटबंध टूटे. करीब 9,346 गांव प्रभावित हुए और 2 करोड़ से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ा. 885 लोगों की मौत हुई और 3,272 जानवर मारे गए. फसलों को करीब 522 करोड़ रुपये और सार्वजनिक संपत्ति को 1,030 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. दिलचस्प बात यह थी कि इस दौरान मुख्य गंगा नदी में स्थिति उतनी गंभीर नहीं थी. यानी उत्तर बिहार में बाढ़ की असली ताकत स्थानीय और नेपाल से आने वाली नदियों में दिखाई दे रही थी. 2007: बिहार की सबसे बड़ी बाढ़ों में एक 2005 और 2006 अपेक्षाकृत सामान्य रहे, लेकिन 2007 में उत्तर बिहार ने फिर भयानक बाढ़ देखी. लगभग सभी प्रमुख नदी बेसिनों में भारी बारिश हुई. बूढ़ी गंडक और बागमती बेसिन में जुलाई-अगस्त के दौरान लगातार बारिश से जलस्तर बढ़ता गया. तटबंधों में 28 जगह दरारें पड़ीं. इस बाढ़ में 22 जिले प्रभावित हुए. करीब 2.4 करोड़ लोग बाढ़ की चपेट में आए और 1,287 लोगों की मौत हुई. 2400 से ज्यादा जानवर भी मारे गए. खेती की करीब एक करोड़ हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई. इसे बिहार के इतिहास की सबसे खराब बाढ़ों में गिना गया. आखिर बिहार में बाढ़ आती कहां से है? सबसे बड़ा सवाल यही है. बिहार में बाढ़ सिर्फ बिहार की बारिश से नहीं आती. नेपाल सबसे बड़ा फैक्टर है. कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी नदियां नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से होकर बिहार में आती हैं. नेपाल में तेज बारिश हुई तो इन नदियों का पानी तेजी से बिहार की ओर आता है. कोसी का सबसे ज्यादा असर सुपौल और सहरसा में देखने को मिलता है. महानंदा और कनकई से अररिया और किशनगंज प्रभावित होते हैं. पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा पर भी कोसी और महानंदा का असर पड़ता है. पश्चिम चंपारण में गंडक, पूर्वी चंपारण में बूढ़ी गंडक, सीतामढ़ी में बागमती और मधुबनी में कमला बलान बड़ी भूमिका निभाती हैं. उत्तर प्रदेश से आने वाली नदियों का असर सारण, बक्सर, भोजपुर, गोपालगंज, सीवान और पश्चिमी चंपारण तक दिखाई देता है. वहीं झारखंड में भारी बारिश होने पर सोन और पुनपुन जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ता है, जिसका असर पटना, भोजपुर और आसपास के इलाकों में पड़ सकता है. यानी बिहार के लिए बाढ़ का पानी कई दिशाओं से आता है. फिर बाढ़ इतनी खतरनाक क्यों हो जाती है? इसका एक बड़ा कारण है गाद यानी सिल्ट. हिमालय से आने वाली नदियां अपने साथ मिट्टी, बालू और दूसरे पदार्थ लेकर आती हैं. बिहार में आते-आते नदी की रफ्तार और ढलान कम हो जाती है. ऐसे में यह गाद नदी के तल में जमा होने लगती है. धीरे-धीरे नदी का तल ऊपर उठता है और पानी रखने की उसकी क्षमता कम होती जाती है. फिर तेज बारिश या ऊपर से ज्यादा पानी आने पर नदी जल्दी उफनने लगती है. इसके साथ बिहार की भौगोलिक स्थिति भी बड़ी वजह है. उत्तर बिहार का बड़ा हिस्सा बेहद समतल है. पानी को निकलने में समय लगता है और एक बार फैलने के बाद वह बहुत बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लेता है. तटबंध: सुरक्षा कवच या नई परेशानी? बाढ़ से बचाने के लिए दशकों से तटबंध बनाए और ऊंचे किए जाते रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों के बीच इस मॉडल को

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बिहार के इस चीनी मिल की अजीब किस्मत, बंद होने पर हंगामा, अब शुरू करने पर विरोध

Marhaura Sugar Mill: सारण की मढ़ौरा चीनी मिल करीब तीन दशक से बंद है. कभी इस इलाके की वित्तीय स्थिति और रोजगार का बड़ा आधार रही यह मिल अब एक बार फिर चर्चा में है. फर्क इतना है कि पहले इसे बंद होने से बचाने और दोबारा शुरू कराने की मांग होती थी, अब इसे मढ़ौरा से बाहर ले जाकर नई जगह मिल स्थापित करने की चर्चा ने स्थानीय लोगों को नाराज कर दिया है. रविवार को मिल परिसर में हुई बैठक में लोगों ने साफ कहा कि मिल शुरू करनी है तो मढ़ौरा में ही की जाए. अभी का हंगामा क्या है मढ़ौरा की बंद चीनी मिल को लेकर एक बार फिर स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गयी है. रविवार को बंद मिल परिसर में युवाओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों की बैठक हुई. बैठक में तरैया के रामकोला फार्म हाउस में चीनी मिल स्थापित करने की कथित प्रशासनी पहल को लेकर आपत्ति जतायी गयी. आयोजित बैठक को संबोधित करते युवा समाजसेवी नीरज कुमार व अन्य | Naya Vichar Network कौन और क्यों कर रहे विरोध मढ़ौरा में हुई बैठक में स्थानीय युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और नेतृत्वक नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक का संचालन राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के नेता विष्णु गुप्ता ने किया. कांग्रेस नेता लालबाबू गिरी, नीरज कुमार सिंह, आदित्य कुमार, अतुल प्रताप सिंह, मनोज गुप्ता, युवराज भास्कर, उप मुखिया अजीत कुमार सिंह, बीडीसी मोहन साह समेत कई लोग मौजूद रहे. विरोध करने वालों की मुख्य दलील यह है कि मढ़ौरा में पहले से मौजूद औद्योगिक परिसर को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में नई चीनी मिल लगाना स्थानीय हित में नहीं होगा. उनका कहना है कि मिल दोबारा चलने पर आसपास के किसानों के लिए गन्ना एक बार फिर नकदी फसल बन सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मिल के भविष्य को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले मढ़ौरा के लोगों की राय और यहां उपलब्ध जमीन व पुराने ढांचे को ध्यान में रखा जाए. बैठक में यह भी चेतावनी दी गयी कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो स्थानीय लोग चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे. View on Instagram ऐसा पहली बार नहीं है जब मढ़ौरा मिल पर नेतृत्व गरमायी हो मढ़ौरा चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की मांग कई वर्षों से नेतृत्वक मुद्दा रही है. चुनावी दौर में मिल को लेकर वादे और आश्वासन भी सामने आते रहे हैं. नवंबर 2025 में बिहार प्रशासन ने बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और राज्य में चीनी उद्योग के विस्तार की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी. उस समय मढ़ौरा समेत बंद मिलों के पुनर्जीवन की उम्मीद फिर जगी थी. यही वजह है कि अब तरैया में नयी मिल की चर्चा ने स्थानीय स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब मढ़ौरा की पुरानी मिल को फिर से शुरू करने की उम्मीद बनी थी, तो नयी जगह पर मिल लगाने की जरूरत क्यों महसूस हुई. चीनी मिल का पूरा इतिहास जानिए मढ़ौरा की औद्योगिक कहानी केवल एक चीनी मिल की कहानी नहीं है. कभी यहां चीनी मिल के साथ मॉर्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और डिस्टिलरी जैसी औद्योगिक इकाइयां भी थीं. इन संस्थानों ने मढ़ौरा को सारण के प्रमुख औद्योगिक इलाकों में शामिल किया था. मढ़ौरा की चीनी मिल लंबे समय तक आसपास के किसानों और मजदूरों के लिए रोजगार और आय का प्रमुख माध्यम रही. मिल के आसपास गन्ने की खेती का बड़ा नेटवर्क था. इसलिए मिल की गतिविधियों का असर केवल फैक्ट्री परिसर तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के गांवों की वित्तीय स्थिति तक पहुंचता था. कब शुरू हुई थी मढ़ौरा चीनी मिल मढ़ौरा चीनी मिल की स्थापना 1904 में कानपुर शुगर वर्क्स द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसे बिहार की शुरुआती और महत्वपूर्ण चीनी मिलों में गिना जाता है. बाद के वर्षों में मिल का प्रबंधन ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन के हाथों में भी रहा. आजादी के बाद भी लंबे समय तक यह इकाई उत्पादन और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी रही. मिल का इतिहास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मढ़ौरा का औद्योगिक विकास एक ही कारखाने के इर्द-गिर्द नहीं हुआ था. यहां अलग-अलग उद्योगों के कारण रोजगार और व्यापार का पूरा तंत्र विकसित हुआ था. तीन दशक से बंद मढ़ौरा चीनी मिल अब खंडहर में तब्दील बंद होने के बाद क्या हुआ मिल के बंद होने का असर केवल फैक्ट्री की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा. इसके साथ जुड़े रोजगार, गन्ने की खेती और स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा. समय बीतने के साथ मिल परिसर की मशीनरी और इमारतों की स्थिति खराब होती गयी. कभी जहां औद्योगिक गतिविधियां होती थीं, वहां धीरे-धीरे वीरानी छा गयी. मढ़ौरा की औद्योगिक पहचान को झटका केवल चीनी मिल बंद होने से नहीं लगा. मॉर्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और डिस्टिलरी जैसी अन्य औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से भी इस क्षेत्र की पुरानी औद्योगिक व्यवस्था कमजोर होती गयी. मढ़ौरा की औद्योगिक विरासत के खत्म होने पर प्रकाशित रिपोर्टों में इन इकाइयों का एक साथ उल्लेख मिलता है. बंद होने के बाद की नेतृत्व क्या रही मढ़ौरा चीनी मिल चुनावी नेतृत्व में लगातार मुद्दा बनी रही. स्थानीय स्तर पर नेता और सामाजिक संगठन समय-समय पर इसे दोबारा शुरू कराने की मांग उठाते रहे हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मढ़ौरा में चुनावी सभा की थी. उस सभा में उन्होंने पुराने औद्योगिक ढांचे, चीनी कारखानों और रोजगार का मुद्दा उठाया था. उन्होंने बिहार में उद्योगों को फिर से खड़ा करने और युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी. इसके बाद भी मिल शुरू नहीं हो सकी. 2024 में प्रधानमंत्री के सारण दौरे के समय स्थानीय लोगों ने एक बार फिर 2015 में मढ़ौरा में कही गयी बातों को याद किया और मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद जतायी थी. 2015 में मढ़ौरा पहुंचे थे पीएम मोदी, क्या कहा था 25 अक्टूबर 2015 को मढ़ौरा में चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलाके के पुराने चीनी उद्योग और रोजगार का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि कभी यहां के चीनी कारखाने किसानों और युवाओं की

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दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा

संजीव कुमार मिश्रा (देवघर से) Sawan Doosra Somwar 2026: श्रावणी मेला की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण के लिए रविवार देर रात से ही कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गई थी. सोमवार सुबह तक मुख्य अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार बाबा मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुंच गई. वहीं, बाय अर्घा से जलार्पण करने वाले कांवरियों की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही. प्रशासनिक अनुमान के अनुसार बाय अर्घा की कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे. सुबह 3:05 बजे खोला गया बाबा मंदिर का पट परंपरा के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट अहले सुबह 3:05 बजे खोला गया. पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज के लोगों ने बाबा भोलेनाथ की कच्चा जल पूजा संपन्न की. करीब 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा में बाबा पर जल अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई. इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की तैयारी शुरू की गई. सरदार पंडा ने विधि-विधान से की विशेष पूजा कच्चा जल पूजा के बाद बाबा मंदिर के महंत सरदार पंडा श्री श्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान के साथ बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना की. पूजा के दौरान बाबा को दूध, दही, घी और मधु समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई. महंत ने सावन की दूसरी सोमवारी पर विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की. ये भी पढ़ें: सावन सोमवार और प्रदोष के महासंयोग पर ऐसे करें महादेव का अभिषेक सुबह 4:10 बजे शुरू हुआ आम श्रद्धालुओं का जलार्पण विशेष पूजा संपन्न होने के बाद सुबह 4:10 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम जलार्पण को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे. कांवरिया रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ लगातार निगरानी रखी गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. The post दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा appeared first on Naya Vichar.

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