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August 10, 2026

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हर साल क्यों डूबता है बिहार? 50 वर्षों की बाढ़ की पूरी कहानी, सैकड़ों करोड़ खर्च के बाद भी नहीं थमा तबाही का सिलसिला

History Of Bihar Flood: बिहार में बाढ़ कोई नई आफत नहीं है. करीब 50 वर्षों से हर साल मानसून आते ही उत्तर बिहार के लाखों लोगों की चिंता बढ़ जाती है. नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तटबंधों पर दबाव बनता है और देखते ही देखते गांव, खेत, सड़कें और घर पानी में डूबने लगते हैं. कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ता है. आंकड़े बताते हैं कि बिहार देश का सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित राज्यों में से एक है. राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर में से करीब 68,800 वर्ग किलोमीटर यानी 73 फीसदी हिस्सा बाढ़ से प्रभावित माना जाता है. उत्तर बिहार की करीब 76 फीसदी आबादी बाढ़ के खतरे वाले इलाके में रहती है. लेकिन सवाल वही है- आखिर बिहार हर साल डूबता क्यों है? और बाढ़ से बचाव के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सिलसिला क्यों नहीं रुक रहा? 1980 के दशक से शुरू नहीं, उससे भी पुरानी है बाढ़ की कहानी बिहार की बाढ़ का इतिहास काफी पुराना है. खासकर उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान, बूढ़ी गंडक, अधवारा और महानंदा जैसी नदियां हर साल अपना असर दिखाती हैं. इन नदियों की एक खास बात यह है कि इनमें से कई का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में है. यानी बिहार में बारिश कम भी हो, लेकिन नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश हुई तो उसका असर बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है. इसी वजह से बिहार की बाढ़ को सिर्फ बिहार में होने वाली बारिश से समझना सही नहीं होगा. नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और कुछ हद तक मध्य प्रदेश में होने वाली बारिश और वहां की नदियों में बढ़ने वाला पानी भी बिहार की मुश्किल बढ़ाता है. 1987: ऐसी बाढ़ जिसे बिहार आज भी याद करता है बिहार में आई सबसे भयावह बाढ़ों में 1987 की बाढ़ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. इस दौरान राज्य के 30 जिले और 24,518 गांव प्रभावित हुए थे. करीब 1,399 लोगों की मौत हुई और 5,000 से ज्यादा जानवर मारे गए. फसलों को करीब 678 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह वह दौर था जब बिहार ने देखा कि बाढ़ सिर्फ पानी का बढ़ना नहीं है. इसके साथ बीमारी, विस्थापन, फसल बर्बादी और रोजगार का संकट भी आता है. इसके बाद भी बाढ़ का सिलसिला नहीं रुका. 2004: जब बाढ़ ने 1987 को भी पीछे छोड़ दिया 2004 में उत्तर बिहार की नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जुलाई के पहले सप्ताह में ही जबरदस्त बारिश शुरू हो गई. बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, भूतही बलान और अधवारा नदी समूह में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई. बागमती नदी में दुब्बाधार के पास जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर से करीब 1.18 मीटर ऊपर पहुंच गया. बूढ़ी गंडक और कमला बलान में भी रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया गया. कुल 53 तटबंध टूटे. करीब 9,346 गांव प्रभावित हुए और 2 करोड़ से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ा. 885 लोगों की मौत हुई और 3,272 जानवर मारे गए. फसलों को करीब 522 करोड़ रुपये और सार्वजनिक संपत्ति को 1,030 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. दिलचस्प बात यह थी कि इस दौरान मुख्य गंगा नदी में स्थिति उतनी गंभीर नहीं थी. यानी उत्तर बिहार में बाढ़ की असली ताकत स्थानीय और नेपाल से आने वाली नदियों में दिखाई दे रही थी. 2007: बिहार की सबसे बड़ी बाढ़ों में एक 2005 और 2006 अपेक्षाकृत सामान्य रहे, लेकिन 2007 में उत्तर बिहार ने फिर भयानक बाढ़ देखी. लगभग सभी प्रमुख नदी बेसिनों में भारी बारिश हुई. बूढ़ी गंडक और बागमती बेसिन में जुलाई-अगस्त के दौरान लगातार बारिश से जलस्तर बढ़ता गया. तटबंधों में 28 जगह दरारें पड़ीं. इस बाढ़ में 22 जिले प्रभावित हुए. करीब 2.4 करोड़ लोग बाढ़ की चपेट में आए और 1,287 लोगों की मौत हुई. 2400 से ज्यादा जानवर भी मारे गए. खेती की करीब एक करोड़ हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई. इसे बिहार के इतिहास की सबसे खराब बाढ़ों में गिना गया. आखिर बिहार में बाढ़ आती कहां से है? सबसे बड़ा सवाल यही है. बिहार में बाढ़ सिर्फ बिहार की बारिश से नहीं आती. नेपाल सबसे बड़ा फैक्टर है. कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी नदियां नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से होकर बिहार में आती हैं. नेपाल में तेज बारिश हुई तो इन नदियों का पानी तेजी से बिहार की ओर आता है. कोसी का सबसे ज्यादा असर सुपौल और सहरसा में देखने को मिलता है. महानंदा और कनकई से अररिया और किशनगंज प्रभावित होते हैं. पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा पर भी कोसी और महानंदा का असर पड़ता है. पश्चिम चंपारण में गंडक, पूर्वी चंपारण में बूढ़ी गंडक, सीतामढ़ी में बागमती और मधुबनी में कमला बलान बड़ी भूमिका निभाती हैं. उत्तर प्रदेश से आने वाली नदियों का असर सारण, बक्सर, भोजपुर, गोपालगंज, सीवान और पश्चिमी चंपारण तक दिखाई देता है. वहीं झारखंड में भारी बारिश होने पर सोन और पुनपुन जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ता है, जिसका असर पटना, भोजपुर और आसपास के इलाकों में पड़ सकता है. यानी बिहार के लिए बाढ़ का पानी कई दिशाओं से आता है. फिर बाढ़ इतनी खतरनाक क्यों हो जाती है? इसका एक बड़ा कारण है गाद यानी सिल्ट. हिमालय से आने वाली नदियां अपने साथ मिट्टी, बालू और दूसरे पदार्थ लेकर आती हैं. बिहार में आते-आते नदी की रफ्तार और ढलान कम हो जाती है. ऐसे में यह गाद नदी के तल में जमा होने लगती है. धीरे-धीरे नदी का तल ऊपर उठता है और पानी रखने की उसकी क्षमता कम होती जाती है. फिर तेज बारिश या ऊपर से ज्यादा पानी आने पर नदी जल्दी उफनने लगती है. इसके साथ बिहार की भौगोलिक स्थिति भी बड़ी वजह है. उत्तर बिहार का बड़ा हिस्सा बेहद समतल है. पानी को निकलने में समय लगता है और एक बार फैलने के बाद वह बहुत बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लेता है. तटबंध: सुरक्षा कवच या नई परेशानी? बाढ़ से बचाने के लिए दशकों से तटबंध बनाए और ऊंचे किए जाते रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों के बीच इस मॉडल को

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बिहार के इस चीनी मिल की अजीब किस्मत, बंद होने पर हंगामा, अब शुरू करने पर विरोध

Marhaura Sugar Mill: सारण की मढ़ौरा चीनी मिल करीब तीन दशक से बंद है. कभी इस इलाके की वित्तीय स्थिति और रोजगार का बड़ा आधार रही यह मिल अब एक बार फिर चर्चा में है. फर्क इतना है कि पहले इसे बंद होने से बचाने और दोबारा शुरू कराने की मांग होती थी, अब इसे मढ़ौरा से बाहर ले जाकर नई जगह मिल स्थापित करने की चर्चा ने स्थानीय लोगों को नाराज कर दिया है. रविवार को मिल परिसर में हुई बैठक में लोगों ने साफ कहा कि मिल शुरू करनी है तो मढ़ौरा में ही की जाए. अभी का हंगामा क्या है मढ़ौरा की बंद चीनी मिल को लेकर एक बार फिर स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गयी है. रविवार को बंद मिल परिसर में युवाओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों की बैठक हुई. बैठक में तरैया के रामकोला फार्म हाउस में चीनी मिल स्थापित करने की कथित प्रशासनी पहल को लेकर आपत्ति जतायी गयी. आयोजित बैठक को संबोधित करते युवा समाजसेवी नीरज कुमार व अन्य | Naya Vichar Network कौन और क्यों कर रहे विरोध मढ़ौरा में हुई बैठक में स्थानीय युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और नेतृत्वक नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक का संचालन राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के नेता विष्णु गुप्ता ने किया. कांग्रेस नेता लालबाबू गिरी, नीरज कुमार सिंह, आदित्य कुमार, अतुल प्रताप सिंह, मनोज गुप्ता, युवराज भास्कर, उप मुखिया अजीत कुमार सिंह, बीडीसी मोहन साह समेत कई लोग मौजूद रहे. विरोध करने वालों की मुख्य दलील यह है कि मढ़ौरा में पहले से मौजूद औद्योगिक परिसर को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में नई चीनी मिल लगाना स्थानीय हित में नहीं होगा. उनका कहना है कि मिल दोबारा चलने पर आसपास के किसानों के लिए गन्ना एक बार फिर नकदी फसल बन सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मिल के भविष्य को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले मढ़ौरा के लोगों की राय और यहां उपलब्ध जमीन व पुराने ढांचे को ध्यान में रखा जाए. बैठक में यह भी चेतावनी दी गयी कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो स्थानीय लोग चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे. View on Instagram ऐसा पहली बार नहीं है जब मढ़ौरा मिल पर नेतृत्व गरमायी हो मढ़ौरा चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की मांग कई वर्षों से नेतृत्वक मुद्दा रही है. चुनावी दौर में मिल को लेकर वादे और आश्वासन भी सामने आते रहे हैं. नवंबर 2025 में बिहार प्रशासन ने बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और राज्य में चीनी उद्योग के विस्तार की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी. उस समय मढ़ौरा समेत बंद मिलों के पुनर्जीवन की उम्मीद फिर जगी थी. यही वजह है कि अब तरैया में नयी मिल की चर्चा ने स्थानीय स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब मढ़ौरा की पुरानी मिल को फिर से शुरू करने की उम्मीद बनी थी, तो नयी जगह पर मिल लगाने की जरूरत क्यों महसूस हुई. चीनी मिल का पूरा इतिहास जानिए मढ़ौरा की औद्योगिक कहानी केवल एक चीनी मिल की कहानी नहीं है. कभी यहां चीनी मिल के साथ मॉर्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और डिस्टिलरी जैसी औद्योगिक इकाइयां भी थीं. इन संस्थानों ने मढ़ौरा को सारण के प्रमुख औद्योगिक इलाकों में शामिल किया था. मढ़ौरा की चीनी मिल लंबे समय तक आसपास के किसानों और मजदूरों के लिए रोजगार और आय का प्रमुख माध्यम रही. मिल के आसपास गन्ने की खेती का बड़ा नेटवर्क था. इसलिए मिल की गतिविधियों का असर केवल फैक्ट्री परिसर तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के गांवों की वित्तीय स्थिति तक पहुंचता था. कब शुरू हुई थी मढ़ौरा चीनी मिल मढ़ौरा चीनी मिल की स्थापना 1904 में कानपुर शुगर वर्क्स द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसे बिहार की शुरुआती और महत्वपूर्ण चीनी मिलों में गिना जाता है. बाद के वर्षों में मिल का प्रबंधन ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन के हाथों में भी रहा. आजादी के बाद भी लंबे समय तक यह इकाई उत्पादन और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी रही. मिल का इतिहास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मढ़ौरा का औद्योगिक विकास एक ही कारखाने के इर्द-गिर्द नहीं हुआ था. यहां अलग-अलग उद्योगों के कारण रोजगार और व्यापार का पूरा तंत्र विकसित हुआ था. तीन दशक से बंद मढ़ौरा चीनी मिल अब खंडहर में तब्दील बंद होने के बाद क्या हुआ मिल के बंद होने का असर केवल फैक्ट्री की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा. इसके साथ जुड़े रोजगार, गन्ने की खेती और स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा. समय बीतने के साथ मिल परिसर की मशीनरी और इमारतों की स्थिति खराब होती गयी. कभी जहां औद्योगिक गतिविधियां होती थीं, वहां धीरे-धीरे वीरानी छा गयी. मढ़ौरा की औद्योगिक पहचान को झटका केवल चीनी मिल बंद होने से नहीं लगा. मॉर्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और डिस्टिलरी जैसी अन्य औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से भी इस क्षेत्र की पुरानी औद्योगिक व्यवस्था कमजोर होती गयी. मढ़ौरा की औद्योगिक विरासत के खत्म होने पर प्रकाशित रिपोर्टों में इन इकाइयों का एक साथ उल्लेख मिलता है. बंद होने के बाद की नेतृत्व क्या रही मढ़ौरा चीनी मिल चुनावी नेतृत्व में लगातार मुद्दा बनी रही. स्थानीय स्तर पर नेता और सामाजिक संगठन समय-समय पर इसे दोबारा शुरू कराने की मांग उठाते रहे हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मढ़ौरा में चुनावी सभा की थी. उस सभा में उन्होंने पुराने औद्योगिक ढांचे, चीनी कारखानों और रोजगार का मुद्दा उठाया था. उन्होंने बिहार में उद्योगों को फिर से खड़ा करने और युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी. इसके बाद भी मिल शुरू नहीं हो सकी. 2024 में प्रधानमंत्री के सारण दौरे के समय स्थानीय लोगों ने एक बार फिर 2015 में मढ़ौरा में कही गयी बातों को याद किया और मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद जतायी थी. 2015 में मढ़ौरा पहुंचे थे पीएम मोदी, क्या कहा था 25 अक्टूबर 2015 को मढ़ौरा में चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलाके के पुराने चीनी उद्योग और रोजगार का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि कभी यहां के चीनी कारखाने किसानों और युवाओं की

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दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा

संजीव कुमार मिश्रा (देवघर से) Sawan Doosra Somwar 2026: श्रावणी मेला की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण के लिए रविवार देर रात से ही कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गई थी. सोमवार सुबह तक मुख्य अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार बाबा मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुंच गई. वहीं, बाय अर्घा से जलार्पण करने वाले कांवरियों की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही. प्रशासनिक अनुमान के अनुसार बाय अर्घा की कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे. सुबह 3:05 बजे खोला गया बाबा मंदिर का पट परंपरा के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट अहले सुबह 3:05 बजे खोला गया. पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज के लोगों ने बाबा भोलेनाथ की कच्चा जल पूजा संपन्न की. करीब 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा में बाबा पर जल अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई. इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की तैयारी शुरू की गई. सरदार पंडा ने विधि-विधान से की विशेष पूजा कच्चा जल पूजा के बाद बाबा मंदिर के महंत सरदार पंडा श्री श्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान के साथ बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना की. पूजा के दौरान बाबा को दूध, दही, घी और मधु समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई. महंत ने सावन की दूसरी सोमवारी पर विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की. ये भी पढ़ें: सावन सोमवार और प्रदोष के महासंयोग पर ऐसे करें महादेव का अभिषेक सुबह 4:10 बजे शुरू हुआ आम श्रद्धालुओं का जलार्पण विशेष पूजा संपन्न होने के बाद सुबह 4:10 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम जलार्पण को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे. कांवरिया रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ लगातार निगरानी रखी गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. The post दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा appeared first on Naya Vichar.

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कल जारी होगी NEET PG Exam City Slip, ऐसे जानें किस शहर में होगी आपकी परीक्षा

NEET PG 2026 Exam City Slip: नीट पीजी में आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स का इंतजार खत्म होने वाला हैं. NBEMS की तरफ से जारी शेड्यूल के अनुसार कल यानी 11 अगस्त 2026 को Test City Intimation की जानकारी दी जाएगी. इसे Exam City Slip भी कहा जाता है. इससे कैंडिडेट्स को यह पता चल सकेगा कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित होगी. यह जानकारी मिलने के बाद कैंडिडेट अपनी यात्रा की तैयारी पहले से कर सकते हैं. हालांकि, City Intimation Slip को Admit Card नहीं समझना चाहिए. इसमें मुख्य रूप से परीक्षा शहर की जानकारी मिलेगी, जबकि परीक्षा केंद्र की पूरी जानकारी बाद में जारी होने वाले Admit Card में मिलेगी. कब होगी NEET PG 2026 की परीक्षा? NEET PG 2026 का आयोजन 30 अगस्त 2026 को किया जाएगा. परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में होगी. NBEMS के मुताबिक परीक्षा के लिए Test City और Test Centre का आवंटन पहले आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता देकर नहीं किया जाएगा. यानी जल्दी आवेदन करने से किसी खास शहर या सेंटर की गारंटी नहीं मिलती. City Slip आने के बाद क्या करें? 11 अगस्त को City Intimation जारी होने के बाद कैंडिडेट्स को सबसे पहले अपने Allotted city की जानकारी check करनी चाहिए. अगर परीक्षा शहर घर से दूर है तो कैंडिडेट समय रहते यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर सकते हैं. इसके बाद Admit Card का इंतजार करना होगा. शेड्यूल के अनुसार एडमिट कार्ड 27 अगस्त 2026 को जारी किया जाना है. इसके बाद 30 अगस्त 2026 को परीक्षा होगी. ये भी पढ़ें: NEET में अच्छी रैंक के बाद भी छूट सकती है MBBS सीट, चॉइस लॉक करने में न करें ये गलतियां The post कल जारी होगी NEET PG Exam City Slip, ऐसे जानें किस शहर में होगी आपकी परीक्षा appeared first on Naya Vichar.

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सावन के सोमवार पर ऐसे सजाएं पूजा की थाली, देखते रह जाएंगे सब

Puja Thali Decoration Idea: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का खास महत्व होता है.  पूजा की तैयारी में पूजा थाली सजाना भी काफी खास माना जाता है. अगर आप भी The post सावन के सोमवार पर ऐसे सजाएं पूजा की थाली, देखते रह जाएंगे सब appeared first on Naya Vichar.

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10 अगस्त की टॉप 20 खबरें: झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा, ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ से हमला

1. JPSC Student Protest: छात्रों से मैराथन बैठक बेनतीजा, प्रशासन ने आंदोलन वापस लेने की अपील की रांची से रिपोर्ट: JPSC छात्रों के आंदोलन को लेकर प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच तीन दिनों तक चली बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई. प्रशासन ने छात्रों से आंदोलन वापस लेने और विधानसभा घेराव रद्द करने की अपील की है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 2. JPSC Student Protest: प्रशासन-छात्र के बीच 5 घंटे की माथापच्ची में भी नहीं निकला समाधान, 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव तय रांची से JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों और राज्य प्रशासन के बीच दूसरी दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही. 98% मांगों पर सहमति के प्रशासनी दावे के बावजूद, छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी दे रहे हैं. प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 3. JPSC के 3 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, CID ने पहले ही भेजा था पूछताछ का नोटिस झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा CID द्वारा पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जाने के बाद आया है. जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन के बीच इस इस्तीफे ने नेतृत्वक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 4. ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये, लगे ‘चोर-चोर’ के नारे, बीजपुर में हंगामा कांचरापाड़ा में टीएमसी नेता के पति की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं पूर्व सीएम ममता बनर्जी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. गाड़ी पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये. चोर-चोर के नारे भी लगे. पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 5. हमले के बाद ममता बनर्जी का पहला बयान- मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गये, आज तो मैं मर ही जाती पश्चिम बंगाल के कांचरापाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया. उनकी कार पर जूते-चप्पल, ईंट-पत्थर और कीचड़ फेंके गये. इस हमले के बाद ममता बनर्जी ने गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने पुलिस पर हमला बोलते हुए कहा- आज तो मैं यहां मर ही जाती. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 6. पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे वी. कामेश्वर राव, जानिए कौन हैं और कैसा रहा उनका सफर पटना हाईकोर्ट को जल्द नया मुख्य न्यायाधीश मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव के नाम की सिफारिश की है. केंद्र की मंजूरी के बाद वह पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे. आखिर कौन हैं वी. कामेश्वर राव और कैसा रहा उनका न्यायिक सफर. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 7. बिहार के स्कूलों में AI, क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्पेशल कमिटी का गठन, पेपर लीक पर गुंडा एक्ट, सम्राट प्रशासन के 4 फैसले बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सम्राट प्रशासन ने चार फैसले किए हैं. अब AI की मदद से छात्रों की समझ और विश्लेषण क्षमता का आकलन होगा. छात्रों की शिकायतों के लिए अलग पोर्टल बनेगा और 30 दिन में समाधान नहीं होने पर CM स्तर पर सहयोग शिविर लगेगा. वहीं, पेपर लीक करने वालों पर गुंडा एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 8. जब मल्लिका शेरावत ने पहनाया तेज प्रताप को कोट, सूट-बूट में दिखा लालू के लाल का नया अवतार, बोले- कुछ बहुत बड़ा आने वाला है तेज प्रताप यादव एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं. इस बार बॉलीवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत के साथ उनका नया वीडियो सामने आया है. सूट-बूट में नजर आए तेज प्रताप ने वीडियो के साथ बड़े प्रोजेक्ट का इशारा किया है. हालांकि, प्रोजेक्ट क्या है, इसका राज अभी बरकरार है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 9. कौन संभालेगा राम मंदिर की कमान? 2 सितंबर को होगा ऐलान, 5300 में से 18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. 5,300 से अधिक आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है. 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 10. PHOTO : कहीं डूबी सड़कें, कहीं नाव बनी सहारा… असम में बाढ़ के बीच ऐसे चल रहा राहत अभियान असम में बाढ़ के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं. कई सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि SDRF की टीमें नावों के ज़रिए राहत सामग्री पहुंचाकर लोगों की जान बचा रही हैं. पूरी स्टोरी पढ़ें. 11. 10 से 15 अगस्त तक UP, बिहार और झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट, जानें अपने राज्य का हाल मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 13 अगस्त के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तटों पर एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना है. इसके प्रभाव से 13 अगस्त से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार में बारिश तेज होने की संभावना है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 12. संसद का मानसून सत्र: लोकसभा में पेश होंगे 4 महत्वपूर्ण विधेयक, राज्यसभा में वित्त मंत्री पेश करेंगी बैंकर्स बुक्स बिल लोकसभा में सोमवार को प्रशासन चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करेगी. जिनपर चर्चा करने और उन्हें पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 13. इंजीनियर, वकील और CA के हाथों में CJP की कमान: मिलिए अभिजीत दीपके की 12 सदस्यीय टीम से दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले सफल आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब देशव्यापी विस्तार की तैयारी में जुट गई है. युवाओं पर केंद्रित इस नेतृत्वक अभियान को आगे बढ़ाने के लिए 12 सदस्यीय नई केंद्रीय टीम की घोषणा की गई है. इस टीम में पत्रकार, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA), उद्यमी और होटल मैनेजमेंट ग्रैजुएट शामिल हैं. तो आइये आपको अभिजीत दीपके की टीम में शामिल सभी 12 सदस्यों से मिलवाते हैं. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 14. FCRA बिल पर विपक्ष को ऐतराज, आखिर क्यों विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून पर उठ रहे सवाल? FCRA बिल संसद में 12 अगस्त को पेश होने वाला है. विपक्ष ने बिल का विरोध करना शुरू कर दिया है. इसके कानून बनने से NGOs को मिलने

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क्या डोनाल्ड ट्रंप ने ले लिया यू-टर्न? ईरान पर अब नहीं बरसेंगे बम, बढ़ेगा इकोनॉमिक प्रेशर

डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटते नजर आ रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत अब भी अटकी हुई है. ऐसे में वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान पर इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ है. रविवार (9 अगस्त) को ‘Axios’ को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप का रुख पहले के मुकाबले काफी नरम नजर आया. पिछले कई हफ्तों से ईरान के खिलाफ बड़े हमले की चेतावनी देने वाले ट्रंप ने इस बार संयमित रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि अमेरिका फिलहाल कम आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है और ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर नजर रख रहा है. ट्रंप ने कहा, “हम इसे फिलहाल धीमे और सीमित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं. हम ईरान से केवल आधी-अधूरी बातचीत कर रहे हैं. हम बस ईरान पर नजर रख रहे हैं, जहां महंगाई बहुत ज्यादा है और उसके पास पैसे नहीं हैं.” ये भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट खुला तो परमाणु डील पर पीछे हट सकते हैं ट्रंप, अमेरिका तलाश रहा युद्ध से निकलने का रास्ता ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का रास्ता चुना अमेरिका ने डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास सैनिकों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने तेहरान पर इकोनॉमिक प्रेशर और बढ़ा दिया है. ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उनके खाड़ी सहयोगियों ने उन्हें ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान से बचने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का रास्ता चुना है. ये भी पढ़ें: ट्रंप के गाजा पीस प्लान को नेतन्याहू ने ठुकराया, बोले- मेरे रहते नहीं बनेगा फिलिस्तीनी राज्य इस बार अमेरिका ने नहीं दी ईरान को धमकी ट्रंप के बदले रुख का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी दिखा है. ईरान ने शनिवार (8 अगस्त) को इस अहम समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही की अनुमति के लिए कुछ नई शर्तें रखीं. इसके बावजूद अमेरिका की प्रतिक्रिया इस बार काफी संयमित रही और उसने तुरंत किसी सैन्य कार्रवाई की धमकी नहीं दी. The post क्या डोनाल्ड ट्रंप ने ले लिया यू-टर्न? ईरान पर अब नहीं बरसेंगे बम, बढ़ेगा इकोनॉमिक प्रेशर appeared first on Naya Vichar.

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बैंक का है काम? पहले देख लें ये लिस्ट, इस हफ्ते इतने दिन रहेंगे बंद

अगर बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो इस हफ्ते घर से निकलने से पहले बैंक हॉलिडे जरूर चेक कर लें. अगस्त के दूसरे हफ्ते में देशभर में बैंक कुछ खास मौकों पर बंद रहेंगे. हालांकि, हर छुट्टी सभी राज्यों में लागू नहीं होगी. ऐसे में आपके शहर या राज्य में बैंक खुला है या नहीं, यह जानना जरूरी है. इस हफ्ते 13 अगस्त और 15 अगस्त को बैंक की छुट्टी रहेगी. इसके अलावा रविवार और शनिवार की नियमित छुट्टियां भी रहेंगी. बैंक ब्रांच बंद होने के बावजूद ऑनलाइन बैंकिंग, UPI और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं चलती रहेंगी. 13 और 15 अगस्त को क्यों बंद रहेंगे बैंक? इस हफ्ते बैंक बंद रहने की प्रमुख तारीखें ये हैं. तारीख दिन कहां बैंक बंद रहेंगे छुट्टी की वजह 13 अगस्त गुरुवार मणिपुर पैट्रियट डे 15 अगस्त शनिवार पूरे हिंदुस्तान में स्वतंत्रता दिवस और पारसी नववर्ष 13 अगस्त: मणिपुर में पैट्रियट डे के मौके पर बैंक बंद रहेंगे. यह दिन 1891 के एंग्लो-मणिपुरी युद्ध में शहीद हुए सैनिकों और नेताओं की याद में मनाया जाता है. 15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे. इसी दिन पारसी समुदाय का शाहंशाही नववर्ष भी मनाया जाएगा. इस हफ्ते कितने दिन बैंक खुले रहेंगे? अगर रविवार और छुट्टियों को अलग रखें, तो इस हफ्ते बैंक सामान्य तौर पर 4 से 5 दिन काम करेंगे. हालांकि, 13 अगस्त की छुट्टी सिर्फ मणिपुर में लागू है. इसलिए दूसरे राज्यों में उस दिन बैंक खुले रह सकते हैं. वहीं 15 अगस्त की छुट्टी पूरे देश में लागू होगी. इसलिए अगर ब्रांच जाकर कोई जरूरी काम कराना है, तो छुट्टी से पहले अपना काम निपटाना बेहतर रहेगा. ये भी पढ़ें: नौकरी छोड़ रहे हैं और लीव भी है बाकी? छुट्टी लेने से पहले जान लें नोटिस पीरियड के ये नियम बैंक बंद होने पर कौन-सी सेवाएं मिलेंगी? ब्रांच बंद होने पर भी रोजमर्रा की कई बैंकिंग सुविधाएं जारी रहेंगी. UPI से पेमेंट और पैसे ट्रांसफर मोबाइल बैंकिंग इंटरनेट बैंकिंग ATM से कैश निकालना बैंकिंग ऐप के जरिए कई ऑनलाइन काम डिजिटल बैंकिंग सेवाएं 24 घंटे, 7 दिन उपलब्ध रहती हैं. इसलिए बैंक हॉलिडे के दिन भी जरूरी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए जा सकते हैं. अगस्त में आगे कब-कब बैंक बंद रहेंगे? इस महीने आगे भी कई बैंक हॉलिडे हैं. कुछ छुट्टियां पूरे देश में लागू होंगी, जबकि कुछ राज्यों के लिए हैं. वीकेंड की छुट्टियां: 16 अगस्त, रविवार 22 अगस्त, चौथा शनिवार 23 अगस्त, रविवार 30 अगस्त, रविवार अन्य छुट्टियां: 19 अगस्त: त्रिपुरा में महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर की जयंती. 25 अगस्त: केरल और आंध्र प्रदेश में मिलाद-उन-नबी, फर्स्ट ओणम और मिलाद-ए-शरीफ. 26 अगस्त: कई राज्यों में ईद-ए-मिलाद, बारावफात, मिलाद-उन-नबी और तिरुवोनम. 28 अगस्त: कई राज्यों में रक्षाबंधन की छुट्टी. ये भी पढ़ें: UPI पर MDR को लेकर क्या है नया नियम? जानें ग्राहक देंगे चार्ज या मर्चेंट The post बैंक का है काम? पहले देख लें ये लिस्ट, इस हफ्ते इतने दिन रहेंगे बंद appeared first on Naya Vichar.

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जब कारों में ADAS मिल ही रहा है तो V2V की जरूरत क्यों पड़ी? दोनों एक जैसे हैं या फिर अलग-अलग? जानें फर्क

आज की कारें पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो गई हैं. सड़क पर पैदल चलने वाला कोई व्यक्ति सामने आ जाए तो कार उसे पहचान सकती है, लेन से गाड़ी भटकने पर उसे वापस सेंटर में ला सकती है, जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक लगा सकती है और साइड से आ रही गाड़ियों के बारे में ड्राइवर को अलर्ट भी कर सकती है. लेकिन अब कारों के और भी ज्यादा स्मार्ट होने की तैयारी है. सोचिए, अगर सड़क पर चल रही कारें एक-दूसरे से बात कर सकें और आगे होने वाले खतरे की जानकारी आपस में शेयर कर सकें, तो सड़क हादसों को रोकने में कितनी मदद मिल सकती है. यही काम करने वाला है Vehicle-to-Vehicle यानी V2V कम्युनिकेशन. प्रशासन 1 अक्टूबर 2028 से नई गाड़ियों में V2V टेक्नोलॉजी देना जरूरी करने की तैयारी कर रही है. ऐसे में सवाल है कि आखिर V2V क्या है? क्या यह ADAS की तरह ही काम करती है या फिर यह उससे अलग टेक्नोलॉजी है? आइए जानते हैं. क्या ADAS की तरह ही काम करती है V2V? सीधा जवाब है नहीं. V2V और ADAS दोनों अलग-अलग टेक्नोलॉजी हैं. हालांकि, दोनों एक साथ काम करें तो गाड़ियों की सेफ्टी को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. आसान शब्दों में समझें तो ADAS गाड़ी की आंखें और कान हैं, जबकि V2V उसकी आवाज है. इसे ऐसे समझिए जैसे गाड़ी कोई इंसान हो. ADAS गाड़ी को आसपास की चीजों को देखने और समझने की पावर देता है. वहीं, V2V टेक्नोलॉजी गाड़ी को दूसरी गाड़ियों से बातचीत करने की सुविधा देती है. यानी एक सिस्टम गाड़ी को आसपास देखने में मदद करता है, तो दूसरा उसे दूसरी गाड़ियों से जानकारी शेयर करने की सुविधा देती है. ADAS कैसे काम करता है? ADAS यानी Advanced Driver Assistance Systems का पूरा स्पोर्ट्स कार में लगे सेंसर और कैमरों पर डिपेंड करता है. कार में लगे कैमरे, रडार, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कुछ मामलों में LiDAR लगातार आसपास की चीजों पर नजर रखते हैं. मान लीजिए, आपकी कार के आगे चल रही गाड़ी अचानक धीमी होने लगती है. ADAS इसे पहचानकर आपको तुरंत आगे टक्कर होने की चेतावनी दे सकता है. वहीं, अगर कार में Autonomous Emergency Braking का फीचर है, तो सिस्टम जरूरत पड़ने पर खुद ब्रेक भी लगा सकता है. हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. ADAS उतना ही देख और समझ सकता है, जितना उसके कैमरे और सेंसर डिटेक्ट कर पाते हैं. फोटो: AI जनरेटेड V2V कैसे ADAS से एक कदम आगे है? V2V से लैस कारें सिर्फ अपने आसपास की चीजों को कैमरा या रडार से देखने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि दूसरी V2V वाली गाड़ियों से भी वायरलेस तरीके से डिटेल्स शेयर कर सकती हैं. इसमें गाड़ी की स्पीड, लोकेशन, किस दिशा में जा रही है और कितनी तेजी से ब्रेक लगा रही है जैसी डिटेल्स शामिल हो सकती है. अब इसे एक व्यस्त हाईवे के उदाहरण से समझ लेते हैं. मान लीजिए आप एक बड़े SUV के पीछे चल रहे हैं और आपके आगे वह SUV एक ट्रक के पीछे है. अचानक आगे मोड़ के पास ट्रैफिक पूरी तरह रुक जाता है और ट्रक को जोर से ब्रेक लगाना पड़ता है. लेकिन आपकी कार के कैमरे और रडार के सामने SUV खड़ी है, इसलिए उन्हें ट्रक दिखाई ही नहीं देता. ऐसी सिचुएशन में नॉर्मल ADAS वाली कार को खतरे का अंदाजा तभी होगा, जब आपके आगे चल रही SUV ब्रेक लगाएगी या फिर ट्रक और रुका हुआ ट्रैफिक सेंसर की नजर में आएगा. लेकिन V2V यहां पूरा स्पोर्ट्स बदल देता है. ट्रक जैसे ही अचानक ब्रेक लगाएगा, वह अपनी यह डिटेल्स आसपास की दूसरी V2V गाड़ियों को भेज सकता है. यह चेतावनी ट्रैफिक में लगभग तुरंत आगे-पीछे पहुंच सकती है. यानी आपकी कार को ट्रक दिखाई देने से पहले ही पता चल सकता है कि आगे कोई बड़ा खतरा है और उसे सावधान होने की जरूरत है. यही V2V और नॉर्मल ADAS के बीच सबसे बड़ा अंतर है. ADAS खतरे को देखता और पहचानता है, जबकि V2V खतरे की जानकारी दूसरी गाड़ियों तक पहुंचाता है. ये भी पढ़ें: 25 साल में कितनी बदली Bajaj Pulsar, साल 2001 की 150cc से N160 4V तक जानें आइकॉनिक ब्रांड का इतिहास? The post जब कारों में ADAS मिल ही रहा है तो V2V की जरूरत क्यों पड़ी? दोनों एक जैसे हैं या फिर अलग-अलग? जानें फर्क appeared first on Naya Vichar.

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मौसम : बिहार में येलो अलर्ट, 15 अगस्त तक झारखंड के अलावा इन राज्यों में होगी भारी बारिश

Weather Forecast : मौसम विभाग ने प्रेस रिलीज जारी करके बताया कि 10 से 15 अगस्त के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के लगभग सभी हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है. वही, पूर्वी राजस्थान में 13 अगस्त तक, जबकि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में 10-11 अगस्त और फिर 13-14 अगस्त के दौरान अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13 और 14 अगस्त को कई इलाकों में तेज बारिश का अनुमान जताया गया है. विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 10 से 15 अगस्त के बीच मध्य हिंदुस्तान के राज्यों में मानसूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है. पूर्वी व पश्चिमी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 10 से 11 अगस्त के दौरान जबकि छत्तीसगढ़ में 10 अगस्त और 13-15 अगस्त के बीच अधिकांश क्षेत्रों में . दिल्ली का मौसम कैसा रहेगा? दिल्ली में 10 से 12 अगस्त के दौरान मुख्य रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश देखने को मिलेगी. 10 अगस्त को दोपहर या शाम के समय एक-दो दौर की बहुत हल्की बारिश (Very Light Rain) की संभावना है, जबकि तापमान 33-35°C (अधिकतम) और 24-26°C (न्यूनतम) रहेगा. 11 अगस्त को तड़के से दोपहर तथा फिर शाम या रात के समय हल्की से मध्यम बारिश (Very Light to Light Rain) के आसार हैं, जिससे अधिकतम तापमान गिरकर 32-34°C हो सकता है. इसके बाद 12 अगस्त को भी दोपहर से शाम के बीच बहुत हल्की बारिश के एक-दो दौर हो सकते हैं. बंगाल में बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण बंगाल के जिलों में आगामी दिनों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. सोमवार (10 अगस्त) को मौसम अधिक सक्रिय रहेगा, जिसके तहत उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया और बांकुड़ा जिलों के लिए तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इसके बाद मंगलवार  (11 अगस्त) को भी दक्षिण बंगाल के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है. The post मौसम : बिहार में येलो अलर्ट, 15 अगस्त तक झारखंड के अलावा इन राज्यों में होगी भारी बारिश appeared first on Naya Vichar.

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