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August 10, 2026

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JPSC-JSSC विवाद: छात्रों का विधानसभा घेराव आज, सरकार के आश्वासन के बावजूद CBI जांच और CGL रद्द कराने पर अड़े

रांचीः जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अनियमितता के खिलाफ जारी आंदोलन के 16वें दिन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता विफल रही. स्टेट गेस्ट हाउस में 5 घंटे की मैराथन वार्ता के बाद भी अंतिम सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद आंदोलनकारी छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव करने के अपने पूर्व के निर्णय को जारी रखा. वार्ता में शामिल प्रशासन के मंत्रियों ने कहा कि प्रशासन ने आंदोलनकारियों की 98 फीसदी मांगें मान ली हैं. कुछ मांगों लेकर जिच है. आंदोलनकारी छात्रों के विधानसभा घेराव कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राज्यभर से युवा राजधानी पहुंचने लगे हैं. आंदोलनकारी छात्रों ने दावा किया है कि सोमवार को एक लाख से अधिक युवा सड़कों पर उतरेंगे. JPSC के 3 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, तीनों से पूछताछ करेगी CID इन सबके बीच जेपीएससी के तीन सदस्यों डॉ अजीता भट्टाचार्या, डॉ अनिमा हांसदा और डॉ जमाल अहमद ने रविवार को अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है. सीआईडी ने अपनी जांच में तीनों सदस्यों को पूछताछ के लिए समन भेजा था. इससे पहले ही तीनों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इससे पूर्व आयोग के अध्यक्ष एल खियांग्ते ने सीआईडी छापेमारी के दिन ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. आज जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजिता भट्टाचार्या से पूछताछ सीआईडी सोमवार को जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजिता भट्टाचार्या से पूछताछ करेगी. जेपीएससी में गड़बड़ी के आरोप में इनको सम्मन किया गया है. सीआईडी मंगलवार को पूर्व सदस्य डॉ अनिमा हांसदा और बुधवार को डॉ जमाल अहमद से पूछताछ करेगी. इस मामले में पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते से कई दौर की बातचीत हो चुकी है. ये भी पढ़ें- JPSC Student Protest: छात्रों और प्रशासन की बैठक में जांच एजेंसी को लेकर गतिरोध, CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र पूरे मामले में सीबीआई जांच चाहते हैं विद्यार्थी मंत्री समूह से हुई वार्ता के बाद विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी कई मांगों पर प्रशासन ने सहमति जताई है. राज्य प्रशासन 14वीं जेपीएससी का पीटी और 2023 और 2025 के जेपीएससी का बैकलॉग रद्द करने की मांग पर सहमत है. इस परीक्षा में हुए पैसों के लेन-देने की ईडी से जांच कराने का प्रस्ताव प्रशासन ने दिया है. आने वाली परीक्षा में उम्र सीमा में छूट पर सहमति नहीं बन पाई है. सीजीएल परीक्षा रद्द करने पर भी प्रशासन सहमत नहीं है. विद्यार्थी पूरे मामले की सीबीआई जांच चाहते हैं. प्रशासन ने कहा इस मामले की सीआईडी जांच हो रही है, जिसे 90 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा. मामले की फास्टट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल कराई जाएगी. रिटायर जज की अध्यक्षता वाली कमेटी से जांच भी कराई जाएगी. दोपहर 12.30 बजे से शाम 5.45 बजे तक हुई वार्ता छात्र इस पर सहमत नहीं हुए, वे सीबीआई जांच चाहते हैं. छात्र टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. तीसरे दिन रविवार को प्रशासन के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय यादव और चमरा लिंडा के साथ आंदोलनरत तीनों मंच के प्रतिनिधियों की वार्ता हुई. वार्ता दोपहर के 12.30 बजे से शाम 5.45 बजे तक हुई. इस दौरान कई बार वार्ता बीच में ही रुकने की नौबत आई. वार्ता में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के पीयूष कुमार, रविंद्र, कार्तिक, आनंद, शिवांग, पंकज, राजेश, रविंद्र कुमार रवि और अंकित शामिल थे. जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के चंदन कुमार, दीनबंधु मंडल, इकबाल हुसैन, रवि शंकर, प्रेम कुमार और रामा अवतार महतो शामिल हुए. वहीं आइसा की ओर से विभा पुष्प दीप, त्रिलोकी नाथ, विजय कुमार, शशिकांत वर्मा और शहीद हुसैन शामिल हुए. सीजीएल रद्द करना संभव नहीं- मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू वार्ता के बाद पत्रकारों से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि प्रशासन का मानना है कि इस मामले में पैसे का लेन-देन हुआ है, इस कारण प्रशासन ईडी से जांच का अनुरोध करेगी. प्रशासन फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर मामले की तेजी से सुनवाई करेगी. आने वाली परीक्षाओं को दुरुस्त और पारदर्शी बनाने की के लिए आइआईटी, आईएसएम, आइआईएम रांची और एक्सआईएसएस के विशेषज्ञों के सहयोग से एसओपी तैयार किया जाएगा. सोनू ने कहा कि सीजीएल परीक्षा हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश में हुई है, इस कारण यह परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती है. प्रशासन रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच के लिए कमेटी बनाने को तैयार है. प्रशासन आंदोलनकारियों की 98% मांगों पर सहमत है. सीजीएल रद्द करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके कई अभ्यार्थी नौकरी भी कर रहे हैं. प्रशासन विद्यार्थियों की मांगों को लेकर संवेदनशील है. देवेंद्रनाथ महतो से मंत्री दीपिका ने किया अनशन तोड़ने का आग्रह मंत्री दीपिका ने देवेंद्र महतो से वीडियो कॉल पर बात की वार्ता के बीच ही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो से बात की और उनसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया. महतो वार्ता के लिए नहीं गये थे. महतो ने मंत्रियों को वार्ता का इंतजार करने का आग्रह किया. ये भी पढ़ें- JPSC Student Protest: छात्र आंदोलन पर बोले राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, CM की बातों पर करें भरोसा प्रशासन से मिले ये आश्वासन फिलहाल तीन परीक्षाएं- जेपीएससी बैकलॉग 2023, जेपीएससी बैकलॉग 2025 और 14वीं जेपीएससी पीटी रद्द की जाएंगी. टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की सीआईडी जांच कराई जाएगी। एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं से जुड़े आपराधिक मामलों की जांच सीआईडी और आर्थिक पहलुओं की जांच ईडी से कराई जाएगी. जेसीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार के लिए प्रशासन आईआईएम रांची, आईआईटी आईएसएम और एक्सआईएसएस जैसे संस्थानों की मदद लेगी. सीजीएल मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा. मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा. सभी आर्थिक एवं न्यायिक जांच की रिपोर्ट 90 दिनों के अंदर प्रशासन को सौंपने का प्रावधान किया जाएगा. लगातार तीसरे दिन छात्र प्रतिनिधियों के साथ मंत्री समूह ने की मैराथन वार्ता प्रशासन अधिकतर मांगों पर सहमत हो गई है, लेकिन छात्र सीबीआई जांच कराने और सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रशासन सीजीएल मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराना चाहती है,

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Ind vs Sl: इंडियन प्लेयर्स के निशाने पर होंगे पांच रिकॉर्ड, गिल के पास WTC में सबसे ज्यादा शतक लगाने का मौका

Ind vs Sl Test Series: हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 15 अगस्त से होने जा रहा है. टेस्ट सीरीज में कप्तान शुभमन गिल समेत कई हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों के पास कई रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा. गिल जहां बल्ले से नया रिकॉर्ड बना सकते हैं, वहीं रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव भी खास उपलब्धियों के करीब हैं. सबसे ज्यादा शतक लगाने का मौका शुभमन गिल के पास वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के मौजूदा चक्र में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाला बल्लेबाज बनने का मौका है. गिल के नाम अब तक पांच शतक हैं. श्रीलंका के खिलाफ एक शतक लगाते ही वह जो रूट को पीछे छोड़कर इस मामले में शीर्ष पर पहुंच जाएंगे. इसके अलावा गिल सीरीज में दो शतक लगाने में सफल रहे तो बतौर हिंदुस्तानीय टेस्ट कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ देंगे. गिल ने कप्तान के रूप में अब तक छह शतक लगाए हैं, जबकि सचिन के नाम सात शतक हैं. 350 टेस्ट विकेट के करीब जडेजा रविंद्र जडेजा के पास भी बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका है. सीरीज में दो विकेट लेते ही उनके टेस्ट विकेटों की संख्या 350 हो जाएगी. वह ऐसा करने वाले पांचवें हिंदुस्तानीय गेंदबाज बनेंगे. उनसे पहले अनिल कुंबले, रविचंद्रन अश्विन, कपिल देव और हरभजन सिंह यह कारनामा कर चुके हैं. वहींं हिंदुस्तान-श्रीलंका टेस्ट मुकाबलों में जडेजा के नाम 33 विकेट हैं. चार विकेट लेते ही वह ईशांत शर्मा के 36 विकेट के आंकड़े को पीछे छोड़कर इस सूची में हिंदुस्तानीय गेंदबाजों के टॉप-5 में शामिल हो जाएंगे. Also Read: वैभव सूर्यवंंशी की उम्र को लेकर क्या बोल गए ब्रेट ली, जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान 250 एशियाई इंटरनेशनल विकेट के करीब कुलदीप कुलदीप यादव एशियाई परिस्थितियों में 250 इंटरनेशनल विकेट पूरे करने से सिर्फ एक विकेट दूर हैं. उन्होंने अब तक एशिया में 141 पारियों में 249 विकेट लिए हैं. श्रीलंका के खिलाफ एक विकेट लेते ही वह इस खास क्लब में शामिल हो जाएंगे. कप्तानी में बेदी से आगे निकल सकते हैं गिल गिल की कप्तानी में हिंदुस्तान अगर श्रीलंका को 2-0 से हराता है, तो वह टेस्ट कप्तान के रूप में छह जीत के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे और बिशन सिंह बेदी की छह जीत की बराबरी करेंगे. गिल ने अब तक नौ टेस्ट में कप्तानी करते हुए पांच जीत दर्ज की हैं. Also Read: वार्म-अप मैच के आखिरी ओवर में 3 छक्के जड़कर सिराज ने दिलाई हिंदुस्तान को जीत, श्रीलंका XI को 6 विकेट से हराया The post Ind vs Sl: इंडियन प्लेयर्स के निशाने पर होंगे पांच रिकॉर्ड, गिल के पास WTC में सबसे ज्यादा शतक लगाने का मौका appeared first on Naya Vichar.

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हर साल क्यों डूबता है बिहार? 50 वर्षों की बाढ़ की पूरी कहानी, सैकड़ों करोड़ खर्च के बाद भी नहीं थमा तबाही का सिलसिला

History Of Bihar Flood: बिहार में बाढ़ कोई नई आफत नहीं है. करीब 50 वर्षों से हर साल मानसून आते ही उत्तर बिहार के लाखों लोगों की चिंता बढ़ जाती है. नदियों का जलस्तर बढ़ता है, तटबंधों पर दबाव बनता है और देखते ही देखते गांव, खेत, सड़कें और घर पानी में डूबने लगते हैं. कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ता है. आंकड़े बताते हैं कि बिहार देश का सबसे अधिक बाढ़-प्रभावित राज्यों में से एक है. राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर में से करीब 68,800 वर्ग किलोमीटर यानी 73 फीसदी हिस्सा बाढ़ से प्रभावित माना जाता है. उत्तर बिहार की करीब 76 फीसदी आबादी बाढ़ के खतरे वाले इलाके में रहती है. लेकिन सवाल वही है- आखिर बिहार हर साल डूबता क्यों है? और बाढ़ से बचाव के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह सिलसिला क्यों नहीं रुक रहा? 1980 के दशक से शुरू नहीं, उससे भी पुरानी है बाढ़ की कहानी बिहार की बाढ़ का इतिहास काफी पुराना है. खासकर उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान, बूढ़ी गंडक, अधवारा और महानंदा जैसी नदियां हर साल अपना असर दिखाती हैं. इन नदियों की एक खास बात यह है कि इनमें से कई का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में है. यानी बिहार में बारिश कम भी हो, लेकिन नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश हुई तो उसका असर बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है. इसी वजह से बिहार की बाढ़ को सिर्फ बिहार में होने वाली बारिश से समझना सही नहीं होगा. नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और कुछ हद तक मध्य प्रदेश में होने वाली बारिश और वहां की नदियों में बढ़ने वाला पानी भी बिहार की मुश्किल बढ़ाता है. 1987: ऐसी बाढ़ जिसे बिहार आज भी याद करता है बिहार में आई सबसे भयावह बाढ़ों में 1987 की बाढ़ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. इस दौरान राज्य के 30 जिले और 24,518 गांव प्रभावित हुए थे. करीब 1,399 लोगों की मौत हुई और 5,000 से ज्यादा जानवर मारे गए. फसलों को करीब 678 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह वह दौर था जब बिहार ने देखा कि बाढ़ सिर्फ पानी का बढ़ना नहीं है. इसके साथ बीमारी, विस्थापन, फसल बर्बादी और रोजगार का संकट भी आता है. इसके बाद भी बाढ़ का सिलसिला नहीं रुका. 2004: जब बाढ़ ने 1987 को भी पीछे छोड़ दिया 2004 में उत्तर बिहार की नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में जुलाई के पहले सप्ताह में ही जबरदस्त बारिश शुरू हो गई. बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला बलान, भूतही बलान और अधवारा नदी समूह में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई. बागमती नदी में दुब्बाधार के पास जलस्तर पुराने उच्चतम स्तर से करीब 1.18 मीटर ऊपर पहुंच गया. बूढ़ी गंडक और कमला बलान में भी रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया गया. कुल 53 तटबंध टूटे. करीब 9,346 गांव प्रभावित हुए और 2 करोड़ से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ा. 885 लोगों की मौत हुई और 3,272 जानवर मारे गए. फसलों को करीब 522 करोड़ रुपये और सार्वजनिक संपत्ति को 1,030 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. दिलचस्प बात यह थी कि इस दौरान मुख्य गंगा नदी में स्थिति उतनी गंभीर नहीं थी. यानी उत्तर बिहार में बाढ़ की असली ताकत स्थानीय और नेपाल से आने वाली नदियों में दिखाई दे रही थी. 2007: बिहार की सबसे बड़ी बाढ़ों में एक 2005 और 2006 अपेक्षाकृत सामान्य रहे, लेकिन 2007 में उत्तर बिहार ने फिर भयानक बाढ़ देखी. लगभग सभी प्रमुख नदी बेसिनों में भारी बारिश हुई. बूढ़ी गंडक और बागमती बेसिन में जुलाई-अगस्त के दौरान लगातार बारिश से जलस्तर बढ़ता गया. तटबंधों में 28 जगह दरारें पड़ीं. इस बाढ़ में 22 जिले प्रभावित हुए. करीब 2.4 करोड़ लोग बाढ़ की चपेट में आए और 1,287 लोगों की मौत हुई. 2400 से ज्यादा जानवर भी मारे गए. खेती की करीब एक करोड़ हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई. इसे बिहार के इतिहास की सबसे खराब बाढ़ों में गिना गया. आखिर बिहार में बाढ़ आती कहां से है? सबसे बड़ा सवाल यही है. बिहार में बाढ़ सिर्फ बिहार की बारिश से नहीं आती. नेपाल सबसे बड़ा फैक्टर है. कोसी, गंडक, बागमती और कमला बलान जैसी नदियां नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से होकर बिहार में आती हैं. नेपाल में तेज बारिश हुई तो इन नदियों का पानी तेजी से बिहार की ओर आता है. कोसी का सबसे ज्यादा असर सुपौल और सहरसा में देखने को मिलता है. महानंदा और कनकई से अररिया और किशनगंज प्रभावित होते हैं. पूर्णिया, कटिहार और मधेपुरा पर भी कोसी और महानंदा का असर पड़ता है. पश्चिम चंपारण में गंडक, पूर्वी चंपारण में बूढ़ी गंडक, सीतामढ़ी में बागमती और मधुबनी में कमला बलान बड़ी भूमिका निभाती हैं. उत्तर प्रदेश से आने वाली नदियों का असर सारण, बक्सर, भोजपुर, गोपालगंज, सीवान और पश्चिमी चंपारण तक दिखाई देता है. वहीं झारखंड में भारी बारिश होने पर सोन और पुनपुन जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ता है, जिसका असर पटना, भोजपुर और आसपास के इलाकों में पड़ सकता है. यानी बिहार के लिए बाढ़ का पानी कई दिशाओं से आता है. फिर बाढ़ इतनी खतरनाक क्यों हो जाती है? इसका एक बड़ा कारण है गाद यानी सिल्ट. हिमालय से आने वाली नदियां अपने साथ मिट्टी, बालू और दूसरे पदार्थ लेकर आती हैं. बिहार में आते-आते नदी की रफ्तार और ढलान कम हो जाती है. ऐसे में यह गाद नदी के तल में जमा होने लगती है. धीरे-धीरे नदी का तल ऊपर उठता है और पानी रखने की उसकी क्षमता कम होती जाती है. फिर तेज बारिश या ऊपर से ज्यादा पानी आने पर नदी जल्दी उफनने लगती है. इसके साथ बिहार की भौगोलिक स्थिति भी बड़ी वजह है. उत्तर बिहार का बड़ा हिस्सा बेहद समतल है. पानी को निकलने में समय लगता है और एक बार फैलने के बाद वह बहुत बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लेता है. तटबंध: सुरक्षा कवच या नई परेशानी? बाढ़ से बचाने के लिए दशकों से तटबंध बनाए और ऊंचे किए जाते रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों के बीच इस मॉडल को

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बिहार के इस चीनी मिल की अजीब किस्मत, बंद होने पर हंगामा, अब शुरू करने पर विरोध

Marhaura Sugar Mill: सारण की मढ़ौरा चीनी मिल करीब तीन दशक से बंद है. कभी इस इलाके की वित्तीय स्थिति और रोजगार का बड़ा आधार रही यह मिल अब एक बार फिर चर्चा में है. फर्क इतना है कि पहले इसे बंद होने से बचाने और दोबारा शुरू कराने की मांग होती थी, अब इसे मढ़ौरा से बाहर ले जाकर नई जगह मिल स्थापित करने की चर्चा ने स्थानीय लोगों को नाराज कर दिया है. रविवार को मिल परिसर में हुई बैठक में लोगों ने साफ कहा कि मिल शुरू करनी है तो मढ़ौरा में ही की जाए. अभी का हंगामा क्या है मढ़ौरा की बंद चीनी मिल को लेकर एक बार फिर स्थानीय स्तर पर हलचल तेज हो गयी है. रविवार को बंद मिल परिसर में युवाओं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक लोगों की बैठक हुई. बैठक में तरैया के रामकोला फार्म हाउस में चीनी मिल स्थापित करने की कथित प्रशासनी पहल को लेकर आपत्ति जतायी गयी. आयोजित बैठक को संबोधित करते युवा समाजसेवी नीरज कुमार व अन्य | Naya Vichar Network कौन और क्यों कर रहे विरोध मढ़ौरा में हुई बैठक में स्थानीय युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और नेतृत्वक नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक का संचालन राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के नेता विष्णु गुप्ता ने किया. कांग्रेस नेता लालबाबू गिरी, नीरज कुमार सिंह, आदित्य कुमार, अतुल प्रताप सिंह, मनोज गुप्ता, युवराज भास्कर, उप मुखिया अजीत कुमार सिंह, बीडीसी मोहन साह समेत कई लोग मौजूद रहे. विरोध करने वालों की मुख्य दलील यह है कि मढ़ौरा में पहले से मौजूद औद्योगिक परिसर को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में नई चीनी मिल लगाना स्थानीय हित में नहीं होगा. उनका कहना है कि मिल दोबारा चलने पर आसपास के किसानों के लिए गन्ना एक बार फिर नकदी फसल बन सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मिल के भविष्य को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले मढ़ौरा के लोगों की राय और यहां उपलब्ध जमीन व पुराने ढांचे को ध्यान में रखा जाए. बैठक में यह भी चेतावनी दी गयी कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो स्थानीय लोग चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे. View on Instagram ऐसा पहली बार नहीं है जब मढ़ौरा मिल पर नेतृत्व गरमायी हो मढ़ौरा चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की मांग कई वर्षों से नेतृत्वक मुद्दा रही है. चुनावी दौर में मिल को लेकर वादे और आश्वासन भी सामने आते रहे हैं. नवंबर 2025 में बिहार प्रशासन ने बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने और राज्य में चीनी उद्योग के विस्तार की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी. उस समय मढ़ौरा समेत बंद मिलों के पुनर्जीवन की उम्मीद फिर जगी थी. यही वजह है कि अब तरैया में नयी मिल की चर्चा ने स्थानीय स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब मढ़ौरा की पुरानी मिल को फिर से शुरू करने की उम्मीद बनी थी, तो नयी जगह पर मिल लगाने की जरूरत क्यों महसूस हुई. चीनी मिल का पूरा इतिहास जानिए मढ़ौरा की औद्योगिक कहानी केवल एक चीनी मिल की कहानी नहीं है. कभी यहां चीनी मिल के साथ मॉर्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और डिस्टिलरी जैसी औद्योगिक इकाइयां भी थीं. इन संस्थानों ने मढ़ौरा को सारण के प्रमुख औद्योगिक इलाकों में शामिल किया था. मढ़ौरा की चीनी मिल लंबे समय तक आसपास के किसानों और मजदूरों के लिए रोजगार और आय का प्रमुख माध्यम रही. मिल के आसपास गन्ने की खेती का बड़ा नेटवर्क था. इसलिए मिल की गतिविधियों का असर केवल फैक्ट्री परिसर तक सीमित नहीं था, बल्कि आसपास के गांवों की वित्तीय स्थिति तक पहुंचता था. कब शुरू हुई थी मढ़ौरा चीनी मिल मढ़ौरा चीनी मिल की स्थापना 1904 में कानपुर शुगर वर्क्स द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसे बिहार की शुरुआती और महत्वपूर्ण चीनी मिलों में गिना जाता है. बाद के वर्षों में मिल का प्रबंधन ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन के हाथों में भी रहा. आजादी के बाद भी लंबे समय तक यह इकाई उत्पादन और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी रही. मिल का इतिहास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मढ़ौरा का औद्योगिक विकास एक ही कारखाने के इर्द-गिर्द नहीं हुआ था. यहां अलग-अलग उद्योगों के कारण रोजगार और व्यापार का पूरा तंत्र विकसित हुआ था. तीन दशक से बंद मढ़ौरा चीनी मिल अब खंडहर में तब्दील बंद होने के बाद क्या हुआ मिल के बंद होने का असर केवल फैक्ट्री की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा. इसके साथ जुड़े रोजगार, गन्ने की खेती और स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा. समय बीतने के साथ मिल परिसर की मशीनरी और इमारतों की स्थिति खराब होती गयी. कभी जहां औद्योगिक गतिविधियां होती थीं, वहां धीरे-धीरे वीरानी छा गयी. मढ़ौरा की औद्योगिक पहचान को झटका केवल चीनी मिल बंद होने से नहीं लगा. मॉर्टन फैक्ट्री, सारण इंजीनियरिंग और डिस्टिलरी जैसी अन्य औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से भी इस क्षेत्र की पुरानी औद्योगिक व्यवस्था कमजोर होती गयी. मढ़ौरा की औद्योगिक विरासत के खत्म होने पर प्रकाशित रिपोर्टों में इन इकाइयों का एक साथ उल्लेख मिलता है. बंद होने के बाद की नेतृत्व क्या रही मढ़ौरा चीनी मिल चुनावी नेतृत्व में लगातार मुद्दा बनी रही. स्थानीय स्तर पर नेता और सामाजिक संगठन समय-समय पर इसे दोबारा शुरू कराने की मांग उठाते रहे हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मढ़ौरा में चुनावी सभा की थी. उस सभा में उन्होंने पुराने औद्योगिक ढांचे, चीनी कारखानों और रोजगार का मुद्दा उठाया था. उन्होंने बिहार में उद्योगों को फिर से खड़ा करने और युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी. इसके बाद भी मिल शुरू नहीं हो सकी. 2024 में प्रधानमंत्री के सारण दौरे के समय स्थानीय लोगों ने एक बार फिर 2015 में मढ़ौरा में कही गयी बातों को याद किया और मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद जतायी थी. 2015 में मढ़ौरा पहुंचे थे पीएम मोदी, क्या कहा था 25 अक्टूबर 2015 को मढ़ौरा में चुनावी सभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलाके के पुराने चीनी उद्योग और रोजगार का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि कभी यहां के चीनी कारखाने किसानों और युवाओं की

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दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा

संजीव कुमार मिश्रा (देवघर से) Sawan Doosra Somwar 2026: श्रावणी मेला की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण के लिए रविवार देर रात से ही कांवरियों की कतार लगनी शुरू हो गई थी. सोमवार सुबह तक मुख्य अर्घा से जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की कतार बाबा मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूर कुमैठा स्टेडियम तक पहुंच गई. वहीं, बाय अर्घा से जलार्पण करने वाले कांवरियों की कतार सरदार पंडा लाइन, शिवगंगा लेन और वीआईपी गेट के सामने तक फैली रही. प्रशासनिक अनुमान के अनुसार बाय अर्घा की कतार में करीब 70 से 80 हजार श्रद्धालु शामिल रहे. सुबह 3:05 बजे खोला गया बाबा मंदिर का पट परंपरा के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट अहले सुबह 3:05 बजे खोला गया. पट खुलने के बाद सबसे पहले पुरोहित समाज के लोगों ने बाबा भोलेनाथ की कच्चा जल पूजा संपन्न की. करीब 15 मिनट तक चली इस विशेष पूजा में बाबा पर जल अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई. इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की तैयारी शुरू की गई. सरदार पंडा ने विधि-विधान से की विशेष पूजा कच्चा जल पूजा के बाद बाबा मंदिर के महंत सरदार पंडा श्री श्री गुलाब नंद ओझा ने विधि-विधान के साथ बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना की. पूजा के दौरान बाबा को दूध, दही, घी और मधु समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई. महंत ने सावन की दूसरी सोमवारी पर विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की. ये भी पढ़ें: सावन सोमवार और प्रदोष के महासंयोग पर ऐसे करें महादेव का अभिषेक सुबह 4:10 बजे शुरू हुआ आम श्रद्धालुओं का जलार्पण विशेष पूजा संपन्न होने के बाद सुबह 4:10 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम जलार्पण को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे. कांवरिया रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ लगातार निगरानी रखी गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. The post दूसरी सोमवारी पर देवघर में रिकॉर्ड भीड़, 20 किलोमीटर लंबी लाइन, श्रावणी मेले का अद्भुत नजारा appeared first on Naya Vichar.

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कल जारी होगी NEET PG Exam City Slip, ऐसे जानें किस शहर में होगी आपकी परीक्षा

NEET PG 2026 Exam City Slip: नीट पीजी में आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स का इंतजार खत्म होने वाला हैं. NBEMS की तरफ से जारी शेड्यूल के अनुसार कल यानी 11 अगस्त 2026 को Test City Intimation की जानकारी दी जाएगी. इसे Exam City Slip भी कहा जाता है. इससे कैंडिडेट्स को यह पता चल सकेगा कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित होगी. यह जानकारी मिलने के बाद कैंडिडेट अपनी यात्रा की तैयारी पहले से कर सकते हैं. हालांकि, City Intimation Slip को Admit Card नहीं समझना चाहिए. इसमें मुख्य रूप से परीक्षा शहर की जानकारी मिलेगी, जबकि परीक्षा केंद्र की पूरी जानकारी बाद में जारी होने वाले Admit Card में मिलेगी. कब होगी NEET PG 2026 की परीक्षा? NEET PG 2026 का आयोजन 30 अगस्त 2026 को किया जाएगा. परीक्षा कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में होगी. NBEMS के मुताबिक परीक्षा के लिए Test City और Test Centre का आवंटन पहले आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स को प्राथमिकता देकर नहीं किया जाएगा. यानी जल्दी आवेदन करने से किसी खास शहर या सेंटर की गारंटी नहीं मिलती. City Slip आने के बाद क्या करें? 11 अगस्त को City Intimation जारी होने के बाद कैंडिडेट्स को सबसे पहले अपने Allotted city की जानकारी check करनी चाहिए. अगर परीक्षा शहर घर से दूर है तो कैंडिडेट समय रहते यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर सकते हैं. इसके बाद Admit Card का इंतजार करना होगा. शेड्यूल के अनुसार एडमिट कार्ड 27 अगस्त 2026 को जारी किया जाना है. इसके बाद 30 अगस्त 2026 को परीक्षा होगी. ये भी पढ़ें: NEET में अच्छी रैंक के बाद भी छूट सकती है MBBS सीट, चॉइस लॉक करने में न करें ये गलतियां The post कल जारी होगी NEET PG Exam City Slip, ऐसे जानें किस शहर में होगी आपकी परीक्षा appeared first on Naya Vichar.

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सावन के सोमवार पर ऐसे सजाएं पूजा की थाली, देखते रह जाएंगे सब

Puja Thali Decoration Idea: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का खास महत्व होता है.  पूजा की तैयारी में पूजा थाली सजाना भी काफी खास माना जाता है. अगर आप भी The post सावन के सोमवार पर ऐसे सजाएं पूजा की थाली, देखते रह जाएंगे सब appeared first on Naya Vichar.

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10 अगस्त की टॉप 20 खबरें: झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा, ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ से हमला

1. JPSC Student Protest: छात्रों से मैराथन बैठक बेनतीजा, प्रशासन ने आंदोलन वापस लेने की अपील की रांची से रिपोर्ट: JPSC छात्रों के आंदोलन को लेकर प्रशासन और प्रतिनिधिमंडल के बीच तीन दिनों तक चली बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई. प्रशासन ने छात्रों से आंदोलन वापस लेने और विधानसभा घेराव रद्द करने की अपील की है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 2. JPSC Student Protest: प्रशासन-छात्र के बीच 5 घंटे की माथापच्ची में भी नहीं निकला समाधान, 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव तय रांची से JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों और राज्य प्रशासन के बीच दूसरी दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही. 98% मांगों पर सहमति के प्रशासनी दावे के बावजूद, छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी दे रहे हैं. प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 3. JPSC के 3 सदस्यों ने दिया इस्तीफा, CID ने पहले ही भेजा था पूछताछ का नोटिस झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा CID द्वारा पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जाने के बाद आया है. जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन के बीच इस इस्तीफे ने नेतृत्वक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 4. ममता बनर्जी की कार पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये, लगे ‘चोर-चोर’ के नारे, बीजपुर में हंगामा कांचरापाड़ा में टीएमसी नेता के पति की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं पूर्व सीएम ममता बनर्जी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. गाड़ी पर चप्पल और कीचड़ फेंके गये. चोर-चोर के नारे भी लगे. पढ़ें पूरी रिपोर्ट. 5. हमले के बाद ममता बनर्जी का पहला बयान- मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गये, आज तो मैं मर ही जाती पश्चिम बंगाल के कांचरापाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया. उनकी कार पर जूते-चप्पल, ईंट-पत्थर और कीचड़ फेंके गये. इस हमले के बाद ममता बनर्जी ने गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने पुलिस पर हमला बोलते हुए कहा- आज तो मैं यहां मर ही जाती. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 6. पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे वी. कामेश्वर राव, जानिए कौन हैं और कैसा रहा उनका सफर पटना हाईकोर्ट को जल्द नया मुख्य न्यायाधीश मिल सकता है. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव के नाम की सिफारिश की है. केंद्र की मंजूरी के बाद वह पटना हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे. आखिर कौन हैं वी. कामेश्वर राव और कैसा रहा उनका न्यायिक सफर. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 7. बिहार के स्कूलों में AI, क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्पेशल कमिटी का गठन, पेपर लीक पर गुंडा एक्ट, सम्राट प्रशासन के 4 फैसले बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सम्राट प्रशासन ने चार फैसले किए हैं. अब AI की मदद से छात्रों की समझ और विश्लेषण क्षमता का आकलन होगा. छात्रों की शिकायतों के लिए अलग पोर्टल बनेगा और 30 दिन में समाधान नहीं होने पर CM स्तर पर सहयोग शिविर लगेगा. वहीं, पेपर लीक करने वालों पर गुंडा एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 8. जब मल्लिका शेरावत ने पहनाया तेज प्रताप को कोट, सूट-बूट में दिखा लालू के लाल का नया अवतार, बोले- कुछ बहुत बड़ा आने वाला है तेज प्रताप यादव एक बार फिर अपने अनोखे अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं. इस बार बॉलीवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत के साथ उनका नया वीडियो सामने आया है. सूट-बूट में नजर आए तेज प्रताप ने वीडियो के साथ बड़े प्रोजेक्ट का इशारा किया है. हालांकि, प्रोजेक्ट क्या है, इसका राज अभी बरकरार है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 9. कौन संभालेगा राम मंदिर की कमान? 2 सितंबर को होगा ऐलान, 5300 में से 18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. 5,300 से अधिक आवेदनों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है. 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में CEO के नाम पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 10. PHOTO : कहीं डूबी सड़कें, कहीं नाव बनी सहारा… असम में बाढ़ के बीच ऐसे चल रहा राहत अभियान असम में बाढ़ के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं. कई सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि SDRF की टीमें नावों के ज़रिए राहत सामग्री पहुंचाकर लोगों की जान बचा रही हैं. पूरी स्टोरी पढ़ें. 11. 10 से 15 अगस्त तक UP, बिहार और झारखंड में भारी बारिश का अलर्ट, जानें अपने राज्य का हाल मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 13 अगस्त के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तटों पर एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना है. इसके प्रभाव से 13 अगस्त से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार में बारिश तेज होने की संभावना है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 12. संसद का मानसून सत्र: लोकसभा में पेश होंगे 4 महत्वपूर्ण विधेयक, राज्यसभा में वित्त मंत्री पेश करेंगी बैंकर्स बुक्स बिल लोकसभा में सोमवार को प्रशासन चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करेगी. जिनपर चर्चा करने और उन्हें पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 13. इंजीनियर, वकील और CA के हाथों में CJP की कमान: मिलिए अभिजीत दीपके की 12 सदस्यीय टीम से दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले सफल आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब देशव्यापी विस्तार की तैयारी में जुट गई है. युवाओं पर केंद्रित इस नेतृत्वक अभियान को आगे बढ़ाने के लिए 12 सदस्यीय नई केंद्रीय टीम की घोषणा की गई है. इस टीम में पत्रकार, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA), उद्यमी और होटल मैनेजमेंट ग्रैजुएट शामिल हैं. तो आइये आपको अभिजीत दीपके की टीम में शामिल सभी 12 सदस्यों से मिलवाते हैं. पूरी समाचार यहां पढ़ें. 14. FCRA बिल पर विपक्ष को ऐतराज, आखिर क्यों विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून पर उठ रहे सवाल? FCRA बिल संसद में 12 अगस्त को पेश होने वाला है. विपक्ष ने बिल का विरोध करना शुरू कर दिया है. इसके कानून बनने से NGOs को मिलने

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क्या डोनाल्ड ट्रंप ने ले लिया यू-टर्न? ईरान पर अब नहीं बरसेंगे बम, बढ़ेगा इकोनॉमिक प्रेशर

डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटते नजर आ रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत अब भी अटकी हुई है. ऐसे में वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान पर इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ है. रविवार (9 अगस्त) को ‘Axios’ को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप का रुख पहले के मुकाबले काफी नरम नजर आया. पिछले कई हफ्तों से ईरान के खिलाफ बड़े हमले की चेतावनी देने वाले ट्रंप ने इस बार संयमित रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि अमेरिका फिलहाल कम आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है और ईरान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर नजर रख रहा है. ट्रंप ने कहा, “हम इसे फिलहाल धीमे और सीमित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं. हम ईरान से केवल आधी-अधूरी बातचीत कर रहे हैं. हम बस ईरान पर नजर रख रहे हैं, जहां महंगाई बहुत ज्यादा है और उसके पास पैसे नहीं हैं.” ये भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट खुला तो परमाणु डील पर पीछे हट सकते हैं ट्रंप, अमेरिका तलाश रहा युद्ध से निकलने का रास्ता ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का रास्ता चुना अमेरिका ने डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास सैनिकों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने तेहरान पर इकोनॉमिक प्रेशर और बढ़ा दिया है. ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उनके खाड़ी सहयोगियों ने उन्हें ईरान के खिलाफ एक और बड़े सैन्य अभियान से बचने की सलाह दी. इसके बाद उन्होंने फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का रास्ता चुना है. ये भी पढ़ें: ट्रंप के गाजा पीस प्लान को नेतन्याहू ने ठुकराया, बोले- मेरे रहते नहीं बनेगा फिलिस्तीनी राज्य इस बार अमेरिका ने नहीं दी ईरान को धमकी ट्रंप के बदले रुख का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी दिखा है. ईरान ने शनिवार (8 अगस्त) को इस अहम समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही की अनुमति के लिए कुछ नई शर्तें रखीं. इसके बावजूद अमेरिका की प्रतिक्रिया इस बार काफी संयमित रही और उसने तुरंत किसी सैन्य कार्रवाई की धमकी नहीं दी. The post क्या डोनाल्ड ट्रंप ने ले लिया यू-टर्न? ईरान पर अब नहीं बरसेंगे बम, बढ़ेगा इकोनॉमिक प्रेशर appeared first on Naya Vichar.

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बैंक का है काम? पहले देख लें ये लिस्ट, इस हफ्ते इतने दिन रहेंगे बंद

अगर बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो इस हफ्ते घर से निकलने से पहले बैंक हॉलिडे जरूर चेक कर लें. अगस्त के दूसरे हफ्ते में देशभर में बैंक कुछ खास मौकों पर बंद रहेंगे. हालांकि, हर छुट्टी सभी राज्यों में लागू नहीं होगी. ऐसे में आपके शहर या राज्य में बैंक खुला है या नहीं, यह जानना जरूरी है. इस हफ्ते 13 अगस्त और 15 अगस्त को बैंक की छुट्टी रहेगी. इसके अलावा रविवार और शनिवार की नियमित छुट्टियां भी रहेंगी. बैंक ब्रांच बंद होने के बावजूद ऑनलाइन बैंकिंग, UPI और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं चलती रहेंगी. 13 और 15 अगस्त को क्यों बंद रहेंगे बैंक? इस हफ्ते बैंक बंद रहने की प्रमुख तारीखें ये हैं. तारीख दिन कहां बैंक बंद रहेंगे छुट्टी की वजह 13 अगस्त गुरुवार मणिपुर पैट्रियट डे 15 अगस्त शनिवार पूरे हिंदुस्तान में स्वतंत्रता दिवस और पारसी नववर्ष 13 अगस्त: मणिपुर में पैट्रियट डे के मौके पर बैंक बंद रहेंगे. यह दिन 1891 के एंग्लो-मणिपुरी युद्ध में शहीद हुए सैनिकों और नेताओं की याद में मनाया जाता है. 15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे. इसी दिन पारसी समुदाय का शाहंशाही नववर्ष भी मनाया जाएगा. इस हफ्ते कितने दिन बैंक खुले रहेंगे? अगर रविवार और छुट्टियों को अलग रखें, तो इस हफ्ते बैंक सामान्य तौर पर 4 से 5 दिन काम करेंगे. हालांकि, 13 अगस्त की छुट्टी सिर्फ मणिपुर में लागू है. इसलिए दूसरे राज्यों में उस दिन बैंक खुले रह सकते हैं. वहीं 15 अगस्त की छुट्टी पूरे देश में लागू होगी. इसलिए अगर ब्रांच जाकर कोई जरूरी काम कराना है, तो छुट्टी से पहले अपना काम निपटाना बेहतर रहेगा. ये भी पढ़ें: नौकरी छोड़ रहे हैं और लीव भी है बाकी? छुट्टी लेने से पहले जान लें नोटिस पीरियड के ये नियम बैंक बंद होने पर कौन-सी सेवाएं मिलेंगी? ब्रांच बंद होने पर भी रोजमर्रा की कई बैंकिंग सुविधाएं जारी रहेंगी. UPI से पेमेंट और पैसे ट्रांसफर मोबाइल बैंकिंग इंटरनेट बैंकिंग ATM से कैश निकालना बैंकिंग ऐप के जरिए कई ऑनलाइन काम डिजिटल बैंकिंग सेवाएं 24 घंटे, 7 दिन उपलब्ध रहती हैं. इसलिए बैंक हॉलिडे के दिन भी जरूरी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए जा सकते हैं. अगस्त में आगे कब-कब बैंक बंद रहेंगे? इस महीने आगे भी कई बैंक हॉलिडे हैं. कुछ छुट्टियां पूरे देश में लागू होंगी, जबकि कुछ राज्यों के लिए हैं. वीकेंड की छुट्टियां: 16 अगस्त, रविवार 22 अगस्त, चौथा शनिवार 23 अगस्त, रविवार 30 अगस्त, रविवार अन्य छुट्टियां: 19 अगस्त: त्रिपुरा में महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर की जयंती. 25 अगस्त: केरल और आंध्र प्रदेश में मिलाद-उन-नबी, फर्स्ट ओणम और मिलाद-ए-शरीफ. 26 अगस्त: कई राज्यों में ईद-ए-मिलाद, बारावफात, मिलाद-उन-नबी और तिरुवोनम. 28 अगस्त: कई राज्यों में रक्षाबंधन की छुट्टी. ये भी पढ़ें: UPI पर MDR को लेकर क्या है नया नियम? जानें ग्राहक देंगे चार्ज या मर्चेंट The post बैंक का है काम? पहले देख लें ये लिस्ट, इस हफ्ते इतने दिन रहेंगे बंद appeared first on Naya Vichar.

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