Hot News

August 15, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Independence Day 2026 Live : PM मोदी बोले- भारत का सेमीकंडक्टर सफर,आत्मनिर्भरता से विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम

आज हिंदुस्तान स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ पूरे उत्साह के साथ मना रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगा फहराने और देशभक्ति कार्यक्रमों का दौर जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया और सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. The post Independence Day 2026 Live : PM मोदी बोले- हिंदुस्तान का सेमीकंडक्टर सफर,आत्मनिर्भरता से विकसित हिंदुस्तान की ओर बढ़ते कदम appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Independence Day 2026 Live : PM मोदी बोले- भारत का सेमीकंडक्टर सफर,आत्मनिर्भरता से विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम

आज हिंदुस्तान स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ पूरे उत्साह के साथ मना रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगा फहराने और देशभक्ति कार्यक्रमों का दौर जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया और सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. The post Independence Day 2026 Live : PM मोदी बोले- हिंदुस्तान का सेमीकंडक्टर सफर,आत्मनिर्भरता से विकसित हिंदुस्तान की ओर बढ़ते कदम appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

लाल किले से पीएम मोदी का संदेश, 2047 तक विकसित भारत का सपना होगा साकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने विकसित हिंदुस्तान के लक्ष्य, वित्तीय स्थिति, रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता समेत कई मुद्दों पर बात की. पीएम मोदी ने कहा कि देश नए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है और 2047 तक विकसित हिंदुस्तान का सपना साकार करने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर काम करना होगा. 2047 तक विकसित हिंदुस्तान बनाने का लक्ष्य प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का बड़ा सपना देखा है. उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश जब विकसित बनने का संकल्प लेता है तो पूरी दुनिया उसकी ओर अलग नजर से देखती है. पीएम मोदी ने कहा कि मजबूत इरादों और देश के लोगों की क्षमता के दम पर हिंदुस्तान इस लक्ष्य तक पहुंच सकता है. पीएम मोदी बोले- अब छोटे सपने काफी नहीं प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में लोगों से बड़े लक्ष्य तय करने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसके सपनों, संकल्प और क्षमता पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा अब सिर्फ छोटे सपने देखने से काम नहीं चलेगा. बड़े सपने सोच को बड़ा बनाते हैं और आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलते हैं. लाल किले पर पहली बार समारोह का हिस्सा बना वंदे मातरम इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने को विशेष रूप से याद किया गया. लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया. प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताया और कहा कि आज देशभर में तिरंगे और वंदे मातरम को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है. इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह का फोकस 150 Years of Vande Mataram और Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047 पर रखा गया है.0 21 तोपों की सलामी के बीच फहराया तिरंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया. इस दौरान 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के जवानों ने 21 तोपों की सलामी दी. इसके लिए स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया गया. इस बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत ने संभाली. The post लाल किले से पीएम मोदी का संदेश, 2047 तक विकसित हिंदुस्तान का सपना होगा साकार appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

स्वतंत्रता सेनानी जिनका नाम इतिहास की किताबों में भी नहीं मिलता, पढ़ें इनकी अनसुनी कहानियां

Unsung Heroes of India: हिंदुस्तान की आजादी की कहानी सिर्फ महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद जैसे प्रसिद्ध नामों तक सीमित नहीं है. देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी भी हुए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया, जेल गए और अपनी जान तक कुर्बान कर दी. इनमें से कई नाम आज भी आम लोगों के बीच ज्यादा चर्चित नहीं हैं. स्वतंत्रता दिवस के खास मौके (Independence Day Special) पर जानिए ऐसे ही 5 गुमनाम और कम चर्चित स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां (Freedom Fighter Stories), जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया. हिंदुस्तान के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी कौन थे? आजादी के आंदोलन में अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों के लोगों ने हिस्सा लिया. आदिवासी समुदायों से लेकर किसान, स्त्रीएं, मजदूर, छात्र और क्रांतिकारी तक अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हुए. कई स्थानीय नायकों का संघर्ष अपने क्षेत्र तक सीमित रहा, जिसकी वजह से उनके नाम राष्ट्रीय इतिहास की लोकप्रिय किताबों में ज्यादा जगह नहीं बना पाए. मातंगिनी हाजरा: 73 साल की उम्र में तिरंगा लेकर निकलीं पश्चिम बंगाल की मातंगिनी हाजरा हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन की प्रमुख स्त्री सेनानियों में शामिल थीं. 1942 में उन्होंने तिरंगा हाथ में लेकर जुलूस का नेतृत्व किया. ब्रिटिश पुलिस की गोली लगने के बाद भी वे आगे बढ़ती रहीं और शहीद हो गईं. उन्हें आज भी बंगाल में सम्मान के साथ याद किया जाता है. ये भी पढ़ें: स्कूल हो या कॉलेज, इस स्वतंत्रता दिवस, इन 30 स्लोगन से बनाएं पोस्टर पीर अली खान: किताबें बेचने से क्रांति तक का सफर बिहार के पीर अली खान 1857 के विद्रोह से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं. वे पटना में पुस्तक विक्रेता के रूप में काम करते थे और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहे. अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर फांसी दे दी. उनका नाम बिहार के 1857 के विद्रोह के इतिहास में खास महत्व रखता है. प्रीतिलता वाडेदार: चटगांव की साहसी क्रांतिकारी प्रीतिलता वाडेदार बंगाल की क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ी थीं. 1932 में उन्होंने चटगांव के पहाड़तली यूरोपियन क्लब पर क्रांतिकारी कार्रवाई का नेतृत्व किया. ब्रिटिश पुलिस से घिरने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने सायनाइड खा लिया और शहीद हो गईं. आदिवासी और क्षेत्रीय संघर्षों के नायक तीलू रौतेली: कम उम्र में उठाया हथियार उत्तराखंड की तीलू रौतेली को गढ़वाल की वीरांगना के रूप में याद किया जाता है. लोक परंपराओं और क्षेत्रीय इतिहास में उनके साहस और संघर्ष की कई कहानियां मिलती हैं. उन्होंने कम उम्र में ही अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हथियार उठाया और कई संघर्षों में हिस्सा लिया. वीर कुंवर सिंह: 80 साल की उम्र में अंग्रेजों से लोहा बिहार के जगदीशपुर के वीर कुंवर सिंह 1857 के विद्रोह के प्रमुख योद्धाओं में थे. करीब 80 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ मोर्चा संभाला. युद्ध के दौरान घायल हुए अपने हाथ को लेकर उनसे जुड़ी वीरता की कहानी आज भी लोकप्रिय है. उनका संघर्ष बिहार के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है. गुमनाम Freedom Fighter को जानना क्यों जरूरी? हिंदुस्तान की स्वतंत्रता की कहानी कई छोटे-बड़े आंदोलनों और असंख्य लोगों के बलिदान से बनी है. प्रसिद्ध नेताओं के साथ उन स्थानीय और क्षेत्रीय सेनानियों को याद करना भी जरूरी है, जिन्होंने अपने स्तर पर अंग्रेजी शासन को चुनौती दी. इन गुमनाम नायकों की कहानियां नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापकता और विविधता समझने में मदद करती हैं. ये भी पढ़ें: Independence Day 2026: स्कूली बच्चों के लिए स्वतंत्रता दिवस पर 10 लाइन, निबंध में कर सकते हैं शामिल The post स्वतंत्रता सेनानी जिनका नाम इतिहास की किताबों में भी नहीं मिलता, पढ़ें इनकी अनसुनी कहानियां appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

स्वतंत्रता सेनानी जिनका नाम इतिहास की किताबों में भी नहीं मिलता, पढ़ें इनकी अनसुनी कहानियां

Unsung Heroes of India: हिंदुस्तान की आजादी की कहानी सिर्फ महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद जैसे प्रसिद्ध नामों तक सीमित नहीं है. देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी भी हुए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया, जेल गए और अपनी जान तक कुर्बान कर दी. इनमें से कई नाम आज भी आम लोगों के बीच ज्यादा चर्चित नहीं हैं. स्वतंत्रता दिवस के खास मौके (Independence Day Special) पर जानिए ऐसे ही 5 गुमनाम और कम चर्चित स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां (Freedom Fighter Stories), जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में अहम योगदान दिया. हिंदुस्तान के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी कौन थे? आजादी के आंदोलन में अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों के लोगों ने हिस्सा लिया. आदिवासी समुदायों से लेकर किसान, स्त्रीएं, मजदूर, छात्र और क्रांतिकारी तक अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हुए. कई स्थानीय नायकों का संघर्ष अपने क्षेत्र तक सीमित रहा, जिसकी वजह से उनके नाम राष्ट्रीय इतिहास की लोकप्रिय किताबों में ज्यादा जगह नहीं बना पाए. मातंगिनी हाजरा: 73 साल की उम्र में तिरंगा लेकर निकलीं पश्चिम बंगाल की मातंगिनी हाजरा हिंदुस्तान छोड़ो आंदोलन की प्रमुख स्त्री सेनानियों में शामिल थीं. 1942 में उन्होंने तिरंगा हाथ में लेकर जुलूस का नेतृत्व किया. ब्रिटिश पुलिस की गोली लगने के बाद भी वे आगे बढ़ती रहीं और शहीद हो गईं. उन्हें आज भी बंगाल में सम्मान के साथ याद किया जाता है. ये भी पढ़ें: स्कूल हो या कॉलेज, इस स्वतंत्रता दिवस, इन 30 स्लोगन से बनाएं पोस्टर पीर अली खान: किताबें बेचने से क्रांति तक का सफर बिहार के पीर अली खान 1857 के विद्रोह से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं. वे पटना में पुस्तक विक्रेता के रूप में काम करते थे और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रहे. अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर फांसी दे दी. उनका नाम बिहार के 1857 के विद्रोह के इतिहास में खास महत्व रखता है. प्रीतिलता वाडेदार: चटगांव की साहसी क्रांतिकारी प्रीतिलता वाडेदार बंगाल की क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ी थीं. 1932 में उन्होंने चटगांव के पहाड़तली यूरोपियन क्लब पर क्रांतिकारी कार्रवाई का नेतृत्व किया. ब्रिटिश पुलिस से घिरने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने सायनाइड खा लिया और शहीद हो गईं. आदिवासी और क्षेत्रीय संघर्षों के नायक तीलू रौतेली: कम उम्र में उठाया हथियार उत्तराखंड की तीलू रौतेली को गढ़वाल की वीरांगना के रूप में याद किया जाता है. लोक परंपराओं और क्षेत्रीय इतिहास में उनके साहस और संघर्ष की कई कहानियां मिलती हैं. उन्होंने कम उम्र में ही अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए हथियार उठाया और कई संघर्षों में हिस्सा लिया. वीर कुंवर सिंह: 80 साल की उम्र में अंग्रेजों से लोहा बिहार के जगदीशपुर के वीर कुंवर सिंह 1857 के विद्रोह के प्रमुख योद्धाओं में थे. करीब 80 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ मोर्चा संभाला. युद्ध के दौरान घायल हुए अपने हाथ को लेकर उनसे जुड़ी वीरता की कहानी आज भी लोकप्रिय है. उनका संघर्ष बिहार के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है. गुमनाम Freedom Fighter को जानना क्यों जरूरी? हिंदुस्तान की स्वतंत्रता की कहानी कई छोटे-बड़े आंदोलनों और असंख्य लोगों के बलिदान से बनी है. प्रसिद्ध नेताओं के साथ उन स्थानीय और क्षेत्रीय सेनानियों को याद करना भी जरूरी है, जिन्होंने अपने स्तर पर अंग्रेजी शासन को चुनौती दी. इन गुमनाम नायकों की कहानियां नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापकता और विविधता समझने में मदद करती हैं. ये भी पढ़ें: Independence Day 2026: स्कूली बच्चों के लिए स्वतंत्रता दिवस पर 10 लाइन, निबंध में कर सकते हैं शामिल The post स्वतंत्रता सेनानी जिनका नाम इतिहास की किताबों में भी नहीं मिलता, पढ़ें इनकी अनसुनी कहानियां appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

श्रीलंका के खिलाफ 157 रन बनाते ही शुभमन गिल रचेंगे इतिहास, WTC में 3000 रन बनाने वाले बनेंगे पहले भारतीय

Shubman Gill Record: श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में हिंदुस्तानीय कप्तान शुभमन गिल की नजर सिर्फ टीम को जीत दिलाने पर नहीं होगी. गिल के पास इस सीरीज में बल्ले से इतिहास रचने का भी शानदार मौका है. वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं. 157 रन बनाते ही WTC में पूरा करेंगे 3000 रन गिल अगर श्रीलंका के खिलाफ दोनों टेस्ट मैचों में 157 रन बना लेते हैं, तो वह WTC इतिहास में 3,000 रन पूरे करने वाले पहले हिंदुस्तानीय बल्लेबाज बन जाएंगे. गिल ने अब तक WTC में 40 मैचों की 73 पारियों में 2,843 रन बनाए हैं. उन्हें 3,000 रन पूरे करने के लिए सिर्फ 157 रन की जरूरत है. हिंदुस्तानीय बल्लेबाजों में WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में गिल फिलहाल पहले स्थान पर हैं. उनके बाद ऋषभ पंत के 2,780 और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के 2,716 रन हैं. वो तीसरे स्थान पर मौजूद हैं. विराट कोहली 2,617 रन के साथ चौथे स्थान पर हैं. WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के जो रूट के नाम है. रूट ने अब तक 77 मैचों में 6,651 रन बनाए हैं. ये भी पढ़ें: IND vs SL Live Streaming: फ्री में कैसे देखें हिंदुस्तान-श्रीलंका का पहला टेस्ट मैच? WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले हिंदुस्तानीय खिलाड़ी मैच पारी रन शुभमन गिल 40 73 2,843 ऋषभ पंत 40 71 2,780 रोहित शर्मा 40 69 2,716 विराट कोहली 46 79 2,617 रवींद्र जडेजा 48 73 2,610 यशस्वी जायसवाल 28 53 2,511 केएल राहुल 33 62 2,148 कप्तान के तौर पर भी बना सकते हैं ये रिकॉर्ड शुभमन गिल के पास सिर्फ 3,000 WTC रन पूरे करने का ही मौका नहीं है. वह मौजूदा WTC चक्र में बतौर हिंदुस्तानीय कप्तान 1,000 रन पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन सकते हैं. गिल ने 2025-27 WTC चक्र में हिंदुस्तान की कप्तानी करते हुए आठ मैचों में अब तक 950 रन बनाए हैं. यानी वह इस खास उपलब्धि से सिर्फ 50 रन दूर हैं. ये भी पढ़ें: 15 अगस्त को 7:29 में धोनी ने लिया था संन्यास, 6 साल बाद भी कायम है ‘कैप्टन कूल’ का ये रिकॉर्ड WTC के एक चक्र में हिंदुस्तानीय कप्तानों के सबसे ज्यादा रन खिलाड़ी मैच रन सर्वोच्च स्कोर 100/50 चक्र शुभमन गिल 8 950 269 5/1 2025-27 विराट कोहली 15 934 254* 2/5 2019-21 रोहित शर्मा 17 864 131 3/4 2023-25 विराट कोहली 7 415 79 0/3 2021-23 रोहित शर्मा 7 390 120 1/0 2021-23 अब तक तीन हिंदुस्तानीय बल्लेबाज एक WTC चक्र में 1,000 से ज्यादा रन बना चुके हैं. इनमें अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल शामिल हैं. अगर गिल श्रीलंका सीरीज में 50 रन बना लेते हैं, तो वह इस सूची में शामिल होने वाले चौथे हिंदुस्तानीय बन जाएंगे. ये भी पढ़ें: कुलदीप यादव के समर्थन में उतरे मुरली कार्तिक, रोहित-द्रविड़ के दौर को लेकर कही ये बात WTC के एक चक्र में हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों के सबसे ज्यादा रन खिलाड़ी मैच रन सर्वोच्च स्कोर 100/50 चक्र यशस्वी जायसवाल 19 1,798 214* 4/10 2023-25 अजिंक्य रहाणे 18 1,159 115 3/6 2019-21 रोहित शर्मा 12 1,094 212 4/2 2019-21 शुभमन गिल 16 972 119* 3/3 2023-25 शुभमन गिल 8 950 269 5/1 2025-27 WTC के एक चक्र में कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी जो रूट के नाम है. उन्होंने 2019-21 WTC चक्र में इंग्लैंड की कप्तानी करते हुए 20 मैचों में 1,660 रन बनाए थे. अब तक सिर्फ चार कप्तान जो रूट, बाबर आजम, दिमुथ करुणारत्ने और बेन स्टोक्स एक WTC चक्र में कप्तान के तौर पर 1,000 से ज्यादा रन बना पाए हैं. श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में गिल के पास इस खास क्लब में शामिल होने का मौका है. ये भी पढ़ें: IND vs SL: पहले टेस्ट के लिए श्रीलंका टीम का ऐलान, ढाई साल बाद हुई डिकवेला की वापसी The post श्रीलंका के खिलाफ 157 रन बनाते ही शुभमन गिल रचेंगे इतिहास, WTC में 3000 रन बनाने वाले बनेंगे पहले हिंदुस्तानीय appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

श्रीलंका के खिलाफ 157 रन बनाते ही शुभमन गिल रचेंगे इतिहास, WTC में 3000 रन बनाने वाले बनेंगे पहले भारतीय

Shubman Gill Record: श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज में हिंदुस्तानीय कप्तान शुभमन गिल की नजर सिर्फ टीम को जीत दिलाने पर नहीं होगी. गिल के पास इस सीरीज में बल्ले से इतिहास रचने का भी शानदार मौका है. वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं. 157 रन बनाते ही WTC में पूरा करेंगे 3000 रन गिल अगर श्रीलंका के खिलाफ दोनों टेस्ट मैचों में 157 रन बना लेते हैं, तो वह WTC इतिहास में 3,000 रन पूरे करने वाले पहले हिंदुस्तानीय बल्लेबाज बन जाएंगे. गिल ने अब तक WTC में 40 मैचों की 73 पारियों में 2,843 रन बनाए हैं. उन्हें 3,000 रन पूरे करने के लिए सिर्फ 157 रन की जरूरत है. हिंदुस्तानीय बल्लेबाजों में WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में गिल फिलहाल पहले स्थान पर हैं. उनके बाद ऋषभ पंत के 2,780 और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के 2,716 रन हैं. वो तीसरे स्थान पर मौजूद हैं. विराट कोहली 2,617 रन के साथ चौथे स्थान पर हैं. WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के जो रूट के नाम है. रूट ने अब तक 77 मैचों में 6,651 रन बनाए हैं. ये भी पढ़ें: IND vs SL Live Streaming: फ्री में कैसे देखें हिंदुस्तान-श्रीलंका का पहला टेस्ट मैच? WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले हिंदुस्तानीय खिलाड़ी मैच पारी रन शुभमन गिल 40 73 2,843 ऋषभ पंत 40 71 2,780 रोहित शर्मा 40 69 2,716 विराट कोहली 46 79 2,617 रवींद्र जडेजा 48 73 2,610 यशस्वी जायसवाल 28 53 2,511 केएल राहुल 33 62 2,148 कप्तान के तौर पर भी बना सकते हैं ये रिकॉर्ड शुभमन गिल के पास सिर्फ 3,000 WTC रन पूरे करने का ही मौका नहीं है. वह मौजूदा WTC चक्र में बतौर हिंदुस्तानीय कप्तान 1,000 रन पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन सकते हैं. गिल ने 2025-27 WTC चक्र में हिंदुस्तान की कप्तानी करते हुए आठ मैचों में अब तक 950 रन बनाए हैं. यानी वह इस खास उपलब्धि से सिर्फ 50 रन दूर हैं. ये भी पढ़ें: 15 अगस्त को 7:29 में धोनी ने लिया था संन्यास, 6 साल बाद भी कायम है ‘कैप्टन कूल’ का ये रिकॉर्ड WTC के एक चक्र में हिंदुस्तानीय कप्तानों के सबसे ज्यादा रन खिलाड़ी मैच रन सर्वोच्च स्कोर 100/50 चक्र शुभमन गिल 8 950 269 5/1 2025-27 विराट कोहली 15 934 254* 2/5 2019-21 रोहित शर्मा 17 864 131 3/4 2023-25 विराट कोहली 7 415 79 0/3 2021-23 रोहित शर्मा 7 390 120 1/0 2021-23 अब तक तीन हिंदुस्तानीय बल्लेबाज एक WTC चक्र में 1,000 से ज्यादा रन बना चुके हैं. इनमें अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल शामिल हैं. अगर गिल श्रीलंका सीरीज में 50 रन बना लेते हैं, तो वह इस सूची में शामिल होने वाले चौथे हिंदुस्तानीय बन जाएंगे. ये भी पढ़ें: कुलदीप यादव के समर्थन में उतरे मुरली कार्तिक, रोहित-द्रविड़ के दौर को लेकर कही ये बात WTC के एक चक्र में हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों के सबसे ज्यादा रन खिलाड़ी मैच रन सर्वोच्च स्कोर 100/50 चक्र यशस्वी जायसवाल 19 1,798 214* 4/10 2023-25 अजिंक्य रहाणे 18 1,159 115 3/6 2019-21 रोहित शर्मा 12 1,094 212 4/2 2019-21 शुभमन गिल 16 972 119* 3/3 2023-25 शुभमन गिल 8 950 269 5/1 2025-27 WTC के एक चक्र में कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी जो रूट के नाम है. उन्होंने 2019-21 WTC चक्र में इंग्लैंड की कप्तानी करते हुए 20 मैचों में 1,660 रन बनाए थे. अब तक सिर्फ चार कप्तान जो रूट, बाबर आजम, दिमुथ करुणारत्ने और बेन स्टोक्स एक WTC चक्र में कप्तान के तौर पर 1,000 से ज्यादा रन बना पाए हैं. श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में गिल के पास इस खास क्लब में शामिल होने का मौका है. ये भी पढ़ें: IND vs SL: पहले टेस्ट के लिए श्रीलंका टीम का ऐलान, ढाई साल बाद हुई डिकवेला की वापसी The post श्रीलंका के खिलाफ 157 रन बनाते ही शुभमन गिल रचेंगे इतिहास, WTC में 3000 रन बनाने वाले बनेंगे पहले हिंदुस्तानीय appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

झारखंड के 5 ‘आदिवासी सूरमा’ जिनसे कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत, एक ने तो कलेक्टर को ही तीर से मारकर कर दिया था ढेर

रांची: स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर केवल देश की आजादी का जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन अनगिनत वीरों को नमन करने का समय है जिन्होंने हिंदुस्तान की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दे दिया था. देश की आजादी की जब भी बात होती है, तो झारखंड की माटी और यहां के आदिवासी जननायकों का बड़ा योगदान है. अंग्रेजों के दमनकारी शासन, जल-जंगल-जमीन की लूट और शोषण के खिलाफ जब पूरा देश धीरे-धीरे गोलबंद हो रहा था, उससे पहले ही झारखंड के जंगलों में क्रांति की ज्वाला धधक उठी थी. 15 अगस्त के इस ऐतिहासिक अवसर पर आज हम झारखंड के उन 5 महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करेंगे, जिनके नाम से ही ब्रिटिश हुकूमत के अफसरों और सेना के पसीने छूट जाते थे. भगवान बिरसा मुंडा: जिन्होंने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव झारखंड के छोटानागपुर की धरती पर जन्मे ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा अंग्रेजों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गए थे. 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी मुंडारी ‘खुंटकट्टी’ व्यवस्था की समाप्ति और जमींदारों के शोषण के खिलाफ ‘उलगुलान’ का शंखनाद किया था. बिरसा मुंडा के कुशल नेतृत्व, छापामार युद्ध रणनीति और विशाल जनसमर्थन से अंग्रेज अफसर इतने खौफजदा थे कि उन्हें बिरसा मुंडा को पकड़ने के लिए अपनी पूरी सेना झोंकनी पड़ी थी. मात्र 25 वर्ष की में अंग्रेजों की हिरासत में उनकी शहादत हो गई, लेकिन उनका उलगुलान आज भी हर हिंदुस्तानीय को अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता है. बाबा तिलका मांझी: जिन्होंने ब्रिटिश कलेक्टर को तीर से मार गिराया था 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी लगभग आठ दशक पहले अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले बाबा तिलका मांझी हिंदुस्तान के पहले आदिवासी क्रांतिकारी थे. उन्होंने 1784 में संथाल परगना के जंगलों से ‘तिलका आंदोलन’ का नेतृत्व किया था. बाबा तिलका मांझी के अद्भुत अचूक निशानेबाजी और अदम्य साहस का खौफ अंग्रेजों में इस कदर था कि भागलपुर का क्रूर ब्रिटिश कलेक्टर क्लीवलैंड उनके नाम से ही थर्राता था. तिलका मांझी ने एक ताड़ के पेड़ पर छिपकर क्लीवलैंड को अपने जहरीले तीर से ढेर कर दिया था. इस घटना ने पूरे ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था और बाद में अंग्रेजों ने छल-बल से उन्हें गिरफ्तार कर बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी थी. ये भी पढ़ें: पारसनाथ पहाड़ पर निर्माण की वैधता जांचेगा प्रशासन, हाईकोर्ट ने डीसी को दिया स्थल निरीक्षण का निर्देश सिदो-कान्हू: जिनके एक आह्वान पर उठ खड़े हुए थे 30 हजार योद्धा 30 जून 1855 को शुरू हुआ ‘संथाल हूल’ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ हिंदुस्तान का सबसे संगठित और भीषण आदिवासी विद्रोह माना जाता है. भोगनाडीह की माटी में जन्मे दो सगे भाइयों, सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू ने संथाल परगना में अंग्रेजों, महाजनों और दलालों के गठजोड़ के खिलाफ बिगुल फूंका था. सिदो-कान्हू के एक आह्वान पर पारंपरिक हथियारों (धनुष-बाण और कुल्हाड़ी) से लैस 30,000 से अधिक संथाल आदिवासी एकजुट हो गए थे. उनके इस विशाल जनसैलाब और आक्रामक रणनीति से अंग्रेज अफसर इतने डर गए थे कि भागलपुर से लेकर बीरभूम तक ब्रिटिश शासन की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी. बाद में उन्हें मार्शल लॉ लगाना पड़ा था. जतरा टाना भगत: अहिंसा और ‘टाना आंदोलन’ के जननायक गुमला जिले के चिंगरी नवटोली में जन्मे जतरा टाना भगत ने अंग्रेजों के खिलाफ एक अनोखा और अभूतपूर्व आंदोलन चलाया था. 1914 में उन्होंने ‘टाना भगत आंदोलन’ की शुरुआत की, जो धार्मिक और सांस्कृतिक सुधार के साथ-साथ अंग्रेजों के खिलाफ एक सशक्त अहिंसक सत्याग्रह था. जतरा भगत के नेतृत्व में हजारों आदिवासियों ने अंग्रेजों को लगान (टैक्स) देने, जमींदारों की बेगारी करने और ब्रिटिश सामानों का उपयोग करने से साफ इनकार कर दिया था. बिना एक भी हथियार उठाए केवल आत्मबल और पूर्ण असहयोग के दम पर उन्होंने अंग्रेजों के राजस्व तंत्र की कमर तोड़ दी थी. उनके विचारों के प्रभाव से घबराकर अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी प्रताड़ना दी थी, जिसके बाद वे शहीद हो गए. वीर बुधु भगत: ‘कोल विद्रोह’ के अमर सेनानी रांची के चान्हो (सिल्ली/टीको) क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले वीर बुधु भगत 1831-32 के ऐतिहासिक ‘कोल विद्रोह’ के मुख्य सूत्रधार थे. उन्होंने छोटानागपुर के पठारी इलाकों में ब्रिटिश शासन और दमनकारी नीतियों के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट कर गुरिल्ला युद्ध लड़ा था. बुधु भगत की युद्ध कला, अदम्य साहस और जनता में उनकी जबरदस्त पैठ का अंग्रेजों में इतना खौफ था कि कैप्टन इमपे जैसे अधिकारियों ने उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए तत्कालीन समय में 1,000 रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया था. अंग्रेजों की पूरी सैन्य टुकड़ी ने जब उन्हें घेरा, तो वे अपने पुत्रों और सैकड़ों समर्थकों के साथ अंतिम सांस तक लड़ते हुए शहीद हो गए थे. ये भी पढ़ें: सारण में स्वतंत्रता दिवस समारोह का फुल ड्रेस रिहर्सल, 11 प्लाटून ने किया परेड का अभ्यास The post झारखंड के 5 ‘आदिवासी सूरमा’ जिनसे कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत, एक ने तो कलेक्टर को ही तीर से मारकर कर दिया था ढेर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

झारखंड के 5 ‘आदिवासी सूरमा’ जिनसे कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत, एक ने तो कलेक्टर को ही तीर से मारकर कर दिया था ढेर

रांची: स्वतंत्रता दिवस का पावन अवसर केवल देश की आजादी का जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन अनगिनत वीरों को नमन करने का समय है जिन्होंने हिंदुस्तान की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दे दिया था. देश की आजादी की जब भी बात होती है, तो झारखंड की माटी और यहां के आदिवासी जननायकों का बड़ा योगदान है. अंग्रेजों के दमनकारी शासन, जल-जंगल-जमीन की लूट और शोषण के खिलाफ जब पूरा देश धीरे-धीरे गोलबंद हो रहा था, उससे पहले ही झारखंड के जंगलों में क्रांति की ज्वाला धधक उठी थी. 15 अगस्त के इस ऐतिहासिक अवसर पर आज हम झारखंड के उन 5 महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करेंगे, जिनके नाम से ही ब्रिटिश हुकूमत के अफसरों और सेना के पसीने छूट जाते थे. भगवान बिरसा मुंडा: जिन्होंने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव झारखंड के छोटानागपुर की धरती पर जन्मे ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा अंग्रेजों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गए थे. 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी मुंडारी ‘खुंटकट्टी’ व्यवस्था की समाप्ति और जमींदारों के शोषण के खिलाफ ‘उलगुलान’ का शंखनाद किया था. बिरसा मुंडा के कुशल नेतृत्व, छापामार युद्ध रणनीति और विशाल जनसमर्थन से अंग्रेज अफसर इतने खौफजदा थे कि उन्हें बिरसा मुंडा को पकड़ने के लिए अपनी पूरी सेना झोंकनी पड़ी थी. मात्र 25 वर्ष की में अंग्रेजों की हिरासत में उनकी शहादत हो गई, लेकिन उनका उलगुलान आज भी हर हिंदुस्तानीय को अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता है. बाबा तिलका मांझी: जिन्होंने ब्रिटिश कलेक्टर को तीर से मार गिराया था 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी लगभग आठ दशक पहले अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले बाबा तिलका मांझी हिंदुस्तान के पहले आदिवासी क्रांतिकारी थे. उन्होंने 1784 में संथाल परगना के जंगलों से ‘तिलका आंदोलन’ का नेतृत्व किया था. बाबा तिलका मांझी के अद्भुत अचूक निशानेबाजी और अदम्य साहस का खौफ अंग्रेजों में इस कदर था कि भागलपुर का क्रूर ब्रिटिश कलेक्टर क्लीवलैंड उनके नाम से ही थर्राता था. तिलका मांझी ने एक ताड़ के पेड़ पर छिपकर क्लीवलैंड को अपने जहरीले तीर से ढेर कर दिया था. इस घटना ने पूरे ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था और बाद में अंग्रेजों ने छल-बल से उन्हें गिरफ्तार कर बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी थी. ये भी पढ़ें: पारसनाथ पहाड़ पर निर्माण की वैधता जांचेगा प्रशासन, हाईकोर्ट ने डीसी को दिया स्थल निरीक्षण का निर्देश सिदो-कान्हू: जिनके एक आह्वान पर उठ खड़े हुए थे 30 हजार योद्धा 30 जून 1855 को शुरू हुआ ‘संथाल हूल’ ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ हिंदुस्तान का सबसे संगठित और भीषण आदिवासी विद्रोह माना जाता है. भोगनाडीह की माटी में जन्मे दो सगे भाइयों, सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू ने संथाल परगना में अंग्रेजों, महाजनों और दलालों के गठजोड़ के खिलाफ बिगुल फूंका था. सिदो-कान्हू के एक आह्वान पर पारंपरिक हथियारों (धनुष-बाण और कुल्हाड़ी) से लैस 30,000 से अधिक संथाल आदिवासी एकजुट हो गए थे. उनके इस विशाल जनसैलाब और आक्रामक रणनीति से अंग्रेज अफसर इतने डर गए थे कि भागलपुर से लेकर बीरभूम तक ब्रिटिश शासन की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी. बाद में उन्हें मार्शल लॉ लगाना पड़ा था. जतरा टाना भगत: अहिंसा और ‘टाना आंदोलन’ के जननायक गुमला जिले के चिंगरी नवटोली में जन्मे जतरा टाना भगत ने अंग्रेजों के खिलाफ एक अनोखा और अभूतपूर्व आंदोलन चलाया था. 1914 में उन्होंने ‘टाना भगत आंदोलन’ की शुरुआत की, जो धार्मिक और सांस्कृतिक सुधार के साथ-साथ अंग्रेजों के खिलाफ एक सशक्त अहिंसक सत्याग्रह था. जतरा भगत के नेतृत्व में हजारों आदिवासियों ने अंग्रेजों को लगान (टैक्स) देने, जमींदारों की बेगारी करने और ब्रिटिश सामानों का उपयोग करने से साफ इनकार कर दिया था. बिना एक भी हथियार उठाए केवल आत्मबल और पूर्ण असहयोग के दम पर उन्होंने अंग्रेजों के राजस्व तंत्र की कमर तोड़ दी थी. उनके विचारों के प्रभाव से घबराकर अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी प्रताड़ना दी थी, जिसके बाद वे शहीद हो गए. वीर बुधु भगत: ‘कोल विद्रोह’ के अमर सेनानी रांची के चान्हो (सिल्ली/टीको) क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले वीर बुधु भगत 1831-32 के ऐतिहासिक ‘कोल विद्रोह’ के मुख्य सूत्रधार थे. उन्होंने छोटानागपुर के पठारी इलाकों में ब्रिटिश शासन और दमनकारी नीतियों के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट कर गुरिल्ला युद्ध लड़ा था. बुधु भगत की युद्ध कला, अदम्य साहस और जनता में उनकी जबरदस्त पैठ का अंग्रेजों में इतना खौफ था कि कैप्टन इमपे जैसे अधिकारियों ने उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए तत्कालीन समय में 1,000 रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया था. अंग्रेजों की पूरी सैन्य टुकड़ी ने जब उन्हें घेरा, तो वे अपने पुत्रों और सैकड़ों समर्थकों के साथ अंतिम सांस तक लड़ते हुए शहीद हो गए थे. ये भी पढ़ें: सारण में स्वतंत्रता दिवस समारोह का फुल ड्रेस रिहर्सल, 11 प्लाटून ने किया परेड का अभ्यास The post झारखंड के 5 ‘आदिवासी सूरमा’ जिनसे कांपती थी ब्रिटिश हुकूमत, एक ने तो कलेक्टर को ही तीर से मारकर कर दिया था ढेर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

स्वतंत्रता दिवस पर रिलायंस डिजिटल लाया डिस्को सेल; स्मार्टफोन्स, टीवी और लैपटॉप्स पर तगड़ी छूट, जानें ऑफर्स

अगर आप इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घर के लिए नया स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप या कोई होम अप्लायंस खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार मौका आ गया है. देश की प्रमुख रिटेल कंपनी रिलायंस डिजिटल ने अपनी स्पेशल D.I.S.C.O. (Digital India Sale Crazy Offers) सेल का ऐलान कर दिया है. 16 अगस्त तक चलने वाली इस खास सेल में ग्राहकों को एक्सचेंज बोनस से लेकर बैंक कार्ड्स और UPI पेमेंट पर तगड़ा डिस्काउंट दिया जा रहा है. इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की खरीदारी पर बचत को दोगुना करने के लिए कंपनी नो-कॉस्ट ईएमआई और एडिशनल वारंटी जैसी सुविधाएं भी दे रही है. एक्सचेंज और बैंक डिस्काउंट से होगी ₹45,000 तक की बचत रिलायंस डिजिटल की इस लिमिटेड टाइम सेल में ग्राहकों को पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स को बदलने पर ₹15,000 तक का अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस मिल रहा है. इसके साथ ही विभिन्न बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड, पेपर फाइनेंस और यूपाआई (UPI) के जरिए भुगतान करने पर ₹30,000 तक की सीधी छूट का फायदा उठाया जा सकता है. यानी अगर सही कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया जाए तो कुल मिलाकर ₹45,000 तक की बड़ी बचत संभव है. कई चुनिंदा कैटेगरी के प्रोडक्ट्स पर कंपनी एक साल की एक्सटेंडेड वारंटी भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दे रही है. किफायती स्मार्टफोन, ईयरबड्स और एक्सेसरीज पर धमाकेदार डील्स स्मार्टफोन सेगमेंट में एंट्री-लेवल से लेकर फ्लैगशिप डिवाइसेस तक पर बेहतरीन ऑफर्स मौजूद हैं. सेल में 4G स्मार्टफोन्स की शुरुआती कीमत ₹10,999 रखी गई है, जबकि 5G कनेक्टिविटी वाले स्मार्टफोन्स ₹13,999 की शुरुआती कीमत में खरीदे जा सकते हैं. प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर ₹10,000 तक का एक्सचेंज बोनस और 30 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का विकल्प दिया जा रहा है. अगर आप हेडफोन, ईयरबड्स या ब्लूटूथ स्पीकर्स जैसी एक्सेसरीज खरीदना चाहते हैं, तो UPI से पेमेंट करने पर 10 फीसदी की अतिरिक्त छूट पा सकते हैं. 65-इंच 4K टीवी और होम अप्लायंसेज पर आधी से ज्यादा छूट बड़े स्क्रीन वाले स्मार्ट टीवी के शौकीनों के लिए यह सेल बेहद खास रहने वाली है. रिलायंस डिजिटल पर 65 इंच का शानदार 4K UHD गूगल टीवी अब महज ₹39,990 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध कराया गया है. इसके अलावा, होम अप्लायंसेज में साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर ₹39,990 और एडवांस्ड वॉशर-ड्रायर ₹55,990 से शुरू हो रहे हैं. एक अन्य प्रीमियम ऑफर के तहत ₹50,000 या उससे ज्यादा की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को ₹43,900 का डायसन बिग बॉल वैक्यूम क्लीनर सिर्फ ₹13,900 में लेने का अवसर मिल रहा है. लैपटॉप पर 3 साल की वारंटी और भारी एक्सचेंज बेनिफिट वर्किंग प्रोफेशन्ल्स और स्टूडेंट्स के लिए लैपटॉप्स की रेंज ₹39,999 से शुरू होती है. सेल के दौरान लैपटॉप खरीदने पर तीन साल तक की ब्रांड वारंटी के साथ-साथ पुरानी डिवाइस के बदले ₹5,000 तक का अतिरिक्त एक्सचेंज बेनिफिट दिया जा रहा है. इन सभी डील्स और ऑफर्स का लाभ देशभर के रिलायंस डिजिटल स्टोर्स, माय जियो स्टोर्स और आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन शॉपिंग करके उठाया जा सकता है. ये भी पढ़ें: Google Pixel 11 सीरीज खरीदने के लिए कौन सा देश सबसे सस्ता? हिंदुस्तान, अमेरिका, जापान और UK की कीमत देखें The post स्वतंत्रता दिवस पर रिलायंस डिजिटल लाया डिस्को सेल; स्मार्टफोन्स, टीवी और लैपटॉप्स पर तगड़ी छूट, जानें ऑफर्स appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top