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August 15, 2026

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स्वतंत्रता दिवस पर रिलायंस डिजिटल लाया डिस्को सेल; स्मार्टफोन्स, टीवी और लैपटॉप्स पर तगड़ी छूट, जानें ऑफर्स

अगर आप इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घर के लिए नया स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप या कोई होम अप्लायंस खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार मौका आ गया है. देश की प्रमुख रिटेल कंपनी रिलायंस डिजिटल ने अपनी स्पेशल D.I.S.C.O. (Digital India Sale Crazy Offers) सेल का ऐलान कर दिया है. 16 अगस्त तक चलने वाली इस खास सेल में ग्राहकों को एक्सचेंज बोनस से लेकर बैंक कार्ड्स और UPI पेमेंट पर तगड़ा डिस्काउंट दिया जा रहा है. इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की खरीदारी पर बचत को दोगुना करने के लिए कंपनी नो-कॉस्ट ईएमआई और एडिशनल वारंटी जैसी सुविधाएं भी दे रही है. एक्सचेंज और बैंक डिस्काउंट से होगी ₹45,000 तक की बचत रिलायंस डिजिटल की इस लिमिटेड टाइम सेल में ग्राहकों को पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स को बदलने पर ₹15,000 तक का अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस मिल रहा है. इसके साथ ही विभिन्न बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड, पेपर फाइनेंस और यूपाआई (UPI) के जरिए भुगतान करने पर ₹30,000 तक की सीधी छूट का फायदा उठाया जा सकता है. यानी अगर सही कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया जाए तो कुल मिलाकर ₹45,000 तक की बड़ी बचत संभव है. कई चुनिंदा कैटेगरी के प्रोडक्ट्स पर कंपनी एक साल की एक्सटेंडेड वारंटी भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दे रही है. किफायती स्मार्टफोन, ईयरबड्स और एक्सेसरीज पर धमाकेदार डील्स स्मार्टफोन सेगमेंट में एंट्री-लेवल से लेकर फ्लैगशिप डिवाइसेस तक पर बेहतरीन ऑफर्स मौजूद हैं. सेल में 4G स्मार्टफोन्स की शुरुआती कीमत ₹10,999 रखी गई है, जबकि 5G कनेक्टिविटी वाले स्मार्टफोन्स ₹13,999 की शुरुआती कीमत में खरीदे जा सकते हैं. प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर ₹10,000 तक का एक्सचेंज बोनस और 30 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का विकल्प दिया जा रहा है. अगर आप हेडफोन, ईयरबड्स या ब्लूटूथ स्पीकर्स जैसी एक्सेसरीज खरीदना चाहते हैं, तो UPI से पेमेंट करने पर 10 फीसदी की अतिरिक्त छूट पा सकते हैं. 65-इंच 4K टीवी और होम अप्लायंसेज पर आधी से ज्यादा छूट बड़े स्क्रीन वाले स्मार्ट टीवी के शौकीनों के लिए यह सेल बेहद खास रहने वाली है. रिलायंस डिजिटल पर 65 इंच का शानदार 4K UHD गूगल टीवी अब महज ₹39,990 की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध कराया गया है. इसके अलावा, होम अप्लायंसेज में साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर ₹39,990 और एडवांस्ड वॉशर-ड्रायर ₹55,990 से शुरू हो रहे हैं. एक अन्य प्रीमियम ऑफर के तहत ₹50,000 या उससे ज्यादा की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को ₹43,900 का डायसन बिग बॉल वैक्यूम क्लीनर सिर्फ ₹13,900 में लेने का अवसर मिल रहा है. लैपटॉप पर 3 साल की वारंटी और भारी एक्सचेंज बेनिफिट वर्किंग प्रोफेशन्ल्स और स्टूडेंट्स के लिए लैपटॉप्स की रेंज ₹39,999 से शुरू होती है. सेल के दौरान लैपटॉप खरीदने पर तीन साल तक की ब्रांड वारंटी के साथ-साथ पुरानी डिवाइस के बदले ₹5,000 तक का अतिरिक्त एक्सचेंज बेनिफिट दिया जा रहा है. इन सभी डील्स और ऑफर्स का लाभ देशभर के रिलायंस डिजिटल स्टोर्स, माय जियो स्टोर्स और आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन शॉपिंग करके उठाया जा सकता है. ये भी पढ़ें: Google Pixel 11 सीरीज खरीदने के लिए कौन सा देश सबसे सस्ता? हिंदुस्तान, अमेरिका, जापान और UK की कीमत देखें The post स्वतंत्रता दिवस पर रिलायंस डिजिटल लाया डिस्को सेल; स्मार्टफोन्स, टीवी और लैपटॉप्स पर तगड़ी छूट, जानें ऑफर्स appeared first on Naya Vichar.

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दुनिया जब दो ध्रुवों में बंट रही थी, भारत ने चुनी अपनी राह: Cold War ने कैसे बदली भारत की विदेश नीति?

India during cold war : 15 अगस्त 1947 – दिल्ली में आधी रात का वक्त था. सदियों की गुलामी के बाद हिंदुस्तान स्वतंत्र होने जा रहा था. लेकिन उस रात दुनिया सिर्फ हिंदुस्तान की आजादी नहीं देख रही थी. अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी थी, जिसने अगले चार दशकों का इतिहास लिखना था. द्वितीय विश्व युद्ध को खत्म हुए अभी दो साल ही हुए थे. नाजी जर्मनी हार चुका था, लेकिन युद्ध के बाद के सहयोगी अब एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बन रहे थे. अमेरिका और सोवियत संघ दो महाशक्तियों के रूप में सामने आ चुके थे. यूरोप में तनाव बढ़ रहा था, परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हो चुकी थी और दुनिया धीरे-धीरे दो शक्ति-गुटों में बंट रही थी. इसी वह वक्त था जब हिंदुस्तान ने आजादी हासिल की. सवाल सिर्फ यह नहीं था कि हिंदुस्तान अपने देश को कैसे संभालेगा. सवाल यह भी था कि नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हिंदुस्तान किस तरफ खड़ा होगा? उस समय इसका जवाब आसान नहीं था. एक ओर अमेरिका था, जिसके पास विशाल आर्थिक और सैन्य ताकत थी. दूसरी ओर सोवियत संघ था, जो समाजवादी व्यवस्था के साथ दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था. हिंदुस्तान ने दोनों में से किसी एक को नहीं चुना. यही फैसला आगे चलकर हिंदुस्तानीय विदेश नीति की सबसे चर्चित पहचान बना. आजादी के बाद पहला बड़ा फैसला जवाहरलाल नेहरू के सामने विदेश नीति की चुनौती असाधारण थी. हिंदुस्तान अभी-अभी औपनिवेशिक शासन से निकला था. देश का विभाजन हो चुका था, लाखों लोग विस्थापित हुए थे और वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी. ऐसे में किसी सैन्य गुट में शामिल होकर महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा बनना हिंदुस्तान के लिए कितना फायदेमंद होता, यह बड़ा सवाल था. नेहरू का जवाब था – हिंदुस्तान को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए. 14-15 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा में अपने ऐतिहासिक भाषण में नेहरू ने कहा था: “At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom.” यह सिर्फ एक यादगार पंक्ति नहीं थी. उसी भाषण में नेहरू ने आजादी को हिंदुस्तान की सीमाओं से आगे मानवता की सेवा से जोड़ा था. स्वतंत्र हिंदुस्तान को वह ऐसी भूमिका में देख रहे थे, जहां उसकी आजादी का मतलब दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि दुनिया के साथ जिम्मेदारी से जुड़ना था. यही सोच कुछ ही वर्षों में हिंदुस्तान की विदेश नीति में साफ दिखाई देने लगी. दुनिया दो हिस्सों में बंट रही थी Cold War (शीत युद्ध) को सिर्फ अमेरिका बनाम सोवियत संघ कहना अधूरा होगा. असल में यह दो अलग नेतृत्वक और आर्थिक व्यवस्थाओं के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा थी. अमेरिका पश्चिमी देशों के साथ अपना प्रभाव बढ़ा रहा था. सोवियत संघ पूर्वी यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा था. NATO जैसे सैन्य गठबंधन बने. बाद में वारसा पैक्ट (Warsaw Pact) भी अस्तित्व में आया. एशिया और अफ्रीका के लिए यह परिस्थिति और कठिन थी. इन महाद्वीपों के कई देश औपनिवेशिक शासन से निकल रहे थे. उन्हें विकास के लिए आर्थिक मदद चाहिए थी और सुरक्षा के लिए सैन्य सहयोग भी. लेकिन इसके साथ एक खतरा भी था – कहीं नई आजादी किसी नए शक्ति-गुट की निर्भरता में न बदल जाए. हिंदुस्तान इसी समस्या का अपना समाधान तलाश रहा था. गुट निरपेक्ष का विचार हिंदुस्तान की गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) नीति का अर्थ यह नहीं था कि वह अमेरिका और सोवियत संघ से संबंध नहीं रखेगा. बल्कि उल्टा हिंदुस्तान दोनों से संबंध रखना चाहता था, लेकिन किसी सैन्य गुट में शामिल होकर अपनी स्वतंत्र निर्णय क्षमता नहीं खोना चाहता था. विदेश मंत्रालय के अनुसार, Non-Alignment की हिंदुस्तानीय सोच का मूल उद्देश्य स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने की क्षमता को बनाए रखना था. इस नीति की जड़ें हिंदुस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन में भी देखी जा सकती हैं. औपनिवेशिक शासन का अनुभव कर चुके हिंदुस्तान के लिए विदेश नीति की स्वतंत्रता सिर्फ रणनीतिक मुद्दा नहीं थी; यह नेतृत्वक स्वतंत्रता का विस्तार भी थी. यही कारण था कि हिंदुस्तान ने Cold War को केवल दो महाशक्तियों के बीच चुनाव के रूप में देखने से इनकार कर दिया. बांडुंग से बेलग्रेड तक  हिंदुस्तान अकेला नहीं था, एशिया और अफ्रीका के दूसरे देश जिन्हें 1947 के आसपास ही आजादी मिली थी, वे भी चाहते थे कि अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व में उनकी अपनी आवाज हो. अप्रैल 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में 29 एशियाई और अफ्रीकी देशों का सम्मेलन हुआ. यह सम्मेलन Cold War के दोनों ध्रुवों से अलग एक तीसरी नेतृत्वक आवाज के उभरने का महत्वपूर्ण पड़ाव बना. बांडुंग (Bandung) में उपनिवेशवाद के विरोध, नस्लीय भेदभाव, आर्थिक विकास और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया. इसके बाद सितंबर 1961 में युगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में पहला Non-Aligned सम्मेलन हुआ. हिंदुस्तान, युगोस्लाविया, इजिप्ट, इंडोनेशिया और घाना सहित 25 देशों ने इसमें हिस्सा लिया. यहीं गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के रूप में सामने आया. इसलिए 1947 और 1961 के बीच का अंतर समझना जरूरी है. हिंदुस्तान की गुटनिरपेक्ष नीति पहले से विकसित हो रही थी, जबकि NAM 1961 में औपचारिक रूप से स्थापित हुआ. लेकिन दुनिया इतनी सरल नहीं थी Non-Alignment के बावजूद हिंदुस्तान और सोवियत संघ के संबंध लगातार मजबूत होते गए. इसके पीछे कई कारण थे. हिंदुस्तान को औद्योगिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी और आर्थिक सहयोग चाहिए था. रक्षा क्षेत्र में भी उसे हथियार और तकनीक की जरूरत थी. दूसरी ओर पाकिस्तान का अमेरिका के साथ सुरक्षा संबंध मजबूत हो रहा था. फिर 1962 में चीन के साथ हिंदुस्तान का युद्ध हुआ. इन घटनाओं ने हिंदुस्तान की सुरक्षा चिंताओं को बदल दिया. सोवियत संघ हिंदुस्तान के लिए तेजी से महत्वपूर्ण साझेदार बनने लगा. लेकिन हिंदुस्तान को सोवियत कैंप का हिस्सा कहना फिर भी सही नहीं होगा. हिंदुस्तान ने अमेरिका से भी संबंध बनाए रखे. अमेरिकी सहायता हिंदुस्तान की खाद्य सुरक्षा और विकास के कई दौर में महत्वपूर्ण रही. वहीं सोवियत संघ के साथ भारी उद्योग, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ा. यानी हिंदुस्तान की नीति साफ थी- जहां से देश को फायदा मिले, वहां सहयोग करो, लेकिन विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों

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दुनिया जब दो ध्रुवों में बंट रही थी, भारत ने चुनी अपनी राह: Cold War ने कैसे बदली भारत की विदेश नीति?

India during cold war : 15 अगस्त 1947 – दिल्ली में आधी रात का वक्त था. सदियों की गुलामी के बाद हिंदुस्तान स्वतंत्र होने जा रहा था. लेकिन उस रात दुनिया सिर्फ हिंदुस्तान की आजादी नहीं देख रही थी. अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी थी, जिसने अगले चार दशकों का इतिहास लिखना था. द्वितीय विश्व युद्ध को खत्म हुए अभी दो साल ही हुए थे. नाजी जर्मनी हार चुका था, लेकिन युद्ध के बाद के सहयोगी अब एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बन रहे थे. अमेरिका और सोवियत संघ दो महाशक्तियों के रूप में सामने आ चुके थे. यूरोप में तनाव बढ़ रहा था, परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हो चुकी थी और दुनिया धीरे-धीरे दो शक्ति-गुटों में बंट रही थी. इसी वह वक्त था जब हिंदुस्तान ने आजादी हासिल की. सवाल सिर्फ यह नहीं था कि हिंदुस्तान अपने देश को कैसे संभालेगा. सवाल यह भी था कि नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हिंदुस्तान किस तरफ खड़ा होगा? उस समय इसका जवाब आसान नहीं था. एक ओर अमेरिका था, जिसके पास विशाल आर्थिक और सैन्य ताकत थी. दूसरी ओर सोवियत संघ था, जो समाजवादी व्यवस्था के साथ दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था. हिंदुस्तान ने दोनों में से किसी एक को नहीं चुना. यही फैसला आगे चलकर हिंदुस्तानीय विदेश नीति की सबसे चर्चित पहचान बना. आजादी के बाद पहला बड़ा फैसला जवाहरलाल नेहरू के सामने विदेश नीति की चुनौती असाधारण थी. हिंदुस्तान अभी-अभी औपनिवेशिक शासन से निकला था. देश का विभाजन हो चुका था, लाखों लोग विस्थापित हुए थे और वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी. ऐसे में किसी सैन्य गुट में शामिल होकर महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा बनना हिंदुस्तान के लिए कितना फायदेमंद होता, यह बड़ा सवाल था. नेहरू का जवाब था – हिंदुस्तान को अपनी विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए. 14-15 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा में अपने ऐतिहासिक भाषण में नेहरू ने कहा था: “At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom.” यह सिर्फ एक यादगार पंक्ति नहीं थी. उसी भाषण में नेहरू ने आजादी को हिंदुस्तान की सीमाओं से आगे मानवता की सेवा से जोड़ा था. स्वतंत्र हिंदुस्तान को वह ऐसी भूमिका में देख रहे थे, जहां उसकी आजादी का मतलब दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि दुनिया के साथ जिम्मेदारी से जुड़ना था. यही सोच कुछ ही वर्षों में हिंदुस्तान की विदेश नीति में साफ दिखाई देने लगी. दुनिया दो हिस्सों में बंट रही थी Cold War (शीत युद्ध) को सिर्फ अमेरिका बनाम सोवियत संघ कहना अधूरा होगा. असल में यह दो अलग नेतृत्वक और आर्थिक व्यवस्थाओं के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा थी. अमेरिका पश्चिमी देशों के साथ अपना प्रभाव बढ़ा रहा था. सोवियत संघ पूर्वी यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा था. NATO जैसे सैन्य गठबंधन बने. बाद में वारसा पैक्ट (Warsaw Pact) भी अस्तित्व में आया. एशिया और अफ्रीका के लिए यह परिस्थिति और कठिन थी. इन महाद्वीपों के कई देश औपनिवेशिक शासन से निकल रहे थे. उन्हें विकास के लिए आर्थिक मदद चाहिए थी और सुरक्षा के लिए सैन्य सहयोग भी. लेकिन इसके साथ एक खतरा भी था – कहीं नई आजादी किसी नए शक्ति-गुट की निर्भरता में न बदल जाए. हिंदुस्तान इसी समस्या का अपना समाधान तलाश रहा था. गुट निरपेक्ष का विचार हिंदुस्तान की गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) नीति का अर्थ यह नहीं था कि वह अमेरिका और सोवियत संघ से संबंध नहीं रखेगा. बल्कि उल्टा हिंदुस्तान दोनों से संबंध रखना चाहता था, लेकिन किसी सैन्य गुट में शामिल होकर अपनी स्वतंत्र निर्णय क्षमता नहीं खोना चाहता था. विदेश मंत्रालय के अनुसार, Non-Alignment की हिंदुस्तानीय सोच का मूल उद्देश्य स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने की क्षमता को बनाए रखना था. इस नीति की जड़ें हिंदुस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन में भी देखी जा सकती हैं. औपनिवेशिक शासन का अनुभव कर चुके हिंदुस्तान के लिए विदेश नीति की स्वतंत्रता सिर्फ रणनीतिक मुद्दा नहीं थी; यह नेतृत्वक स्वतंत्रता का विस्तार भी थी. यही कारण था कि हिंदुस्तान ने Cold War को केवल दो महाशक्तियों के बीच चुनाव के रूप में देखने से इनकार कर दिया. बांडुंग से बेलग्रेड तक  हिंदुस्तान अकेला नहीं था, एशिया और अफ्रीका के दूसरे देश जिन्हें 1947 के आसपास ही आजादी मिली थी, वे भी चाहते थे कि अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व में उनकी अपनी आवाज हो. अप्रैल 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में 29 एशियाई और अफ्रीकी देशों का सम्मेलन हुआ. यह सम्मेलन Cold War के दोनों ध्रुवों से अलग एक तीसरी नेतृत्वक आवाज के उभरने का महत्वपूर्ण पड़ाव बना. बांडुंग (Bandung) में उपनिवेशवाद के विरोध, नस्लीय भेदभाव, आर्थिक विकास और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया. इसके बाद सितंबर 1961 में युगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में पहला Non-Aligned सम्मेलन हुआ. हिंदुस्तान, युगोस्लाविया, इजिप्ट, इंडोनेशिया और घाना सहित 25 देशों ने इसमें हिस्सा लिया. यहीं गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के रूप में सामने आया. इसलिए 1947 और 1961 के बीच का अंतर समझना जरूरी है. हिंदुस्तान की गुटनिरपेक्ष नीति पहले से विकसित हो रही थी, जबकि NAM 1961 में औपचारिक रूप से स्थापित हुआ. लेकिन दुनिया इतनी सरल नहीं थी Non-Alignment के बावजूद हिंदुस्तान और सोवियत संघ के संबंध लगातार मजबूत होते गए. इसके पीछे कई कारण थे. हिंदुस्तान को औद्योगिक विकास के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी और आर्थिक सहयोग चाहिए था. रक्षा क्षेत्र में भी उसे हथियार और तकनीक की जरूरत थी. दूसरी ओर पाकिस्तान का अमेरिका के साथ सुरक्षा संबंध मजबूत हो रहा था. फिर 1962 में चीन के साथ हिंदुस्तान का युद्ध हुआ. इन घटनाओं ने हिंदुस्तान की सुरक्षा चिंताओं को बदल दिया. सोवियत संघ हिंदुस्तान के लिए तेजी से महत्वपूर्ण साझेदार बनने लगा. लेकिन हिंदुस्तान को सोवियत कैंप का हिस्सा कहना फिर भी सही नहीं होगा. हिंदुस्तान ने अमेरिका से भी संबंध बनाए रखे. अमेरिकी सहायता हिंदुस्तान की खाद्य सुरक्षा और विकास के कई दौर में महत्वपूर्ण रही. वहीं सोवियत संघ के साथ भारी उद्योग, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ा. यानी हिंदुस्तान की नीति साफ थी- जहां से देश को फायदा मिले, वहां सहयोग करो, लेकिन विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों

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7.7 तीव्रता के भूकंप से दहला इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट; घरों और इमारतों को नुकसान

इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत पैदा कर दी. भूकंप के झटकों से कई घरों और दूसरी इमारतों को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद देश के कई तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभी तक किसी के मारे जाने की समाचार नहीं है. सुबह-सुबह आया 7.7 तीव्रता का भूकंप अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 5:58 बजे आया. इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई और भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आने वाले एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में स्थित था. इसका असर फ्लोरेस द्वीप के बड़े हिस्से में महसूस किया गया. मुख्य भूकंप के बाद कई झटके और आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई. चार प्रांतों में सुनामी की चेतावनी भूकंप के बाद इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने कई तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की. इसमें पूर्वी नुसा तेंगारा, पश्चिमी नुसा तेंगारा, दक्षिण सुलावेसी और दक्षिण-पूर्वी सुलावेसी प्रांत शामिल हैं. प्रशासन ने प्रभावित तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से समुद्र तटों और नदी के किनारों से दूर रहने तथा सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की. कई इमारतों को नुकसान, लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप के झटकों के बाद कई जगहों से घरों और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की शुरुआती जानकारी सामने आई. हालांकि, अधिकारियों ने तत्काल यह नहीं बताया कि कुल कितनी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं. भूकंप के बाद स्थानीय लोगों में काफी डर देखा गया और संभावित सुनामी से बचने के लिए कई लोग तटीय इलाकों से दूर चले गए. इंडोनेशिया में भूकंप का खतरा क्यों ज्यादा? करीब 17,000 से अधिक द्वीपों वाले इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंप और ज्वालामुखी प्रभावित देशों में शामिल है. इसकी एक बड़ी वजह इस देश की भौगोलिक स्थिति है. इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है. यह ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में ज्वालामुखी और सक्रिय भूगर्भीय भ्रंश रेखाएं मौजूद हैं. इसी वजह से यहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. ये भी पढ़ें:- चीन में सोशल सिक्योरिटी भुगतान पर सख्ती, कंपनियों पर बढ़ा दबाव; टैक्स-पेरोल डेटा से हो रही जांच 1992 में फ्लोरेस में आई सुनामी ने मचाई थी भारी तबाही फ्लोरेस क्षेत्र के लिए शनिवार का भूकंप इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाला था क्योंकि इस इलाके में पहले भी विनाशकारी भूकंप और सुनामी आ चुकी है. दिसंबर 1992 में फ्लोरेस के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में करीब 7.0 तीव्रता का भूकंप आया था. इसके बाद उठी सुनामी ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी. ऐसे में शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी. उथले भूकंप सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप धरती की सतह से करीब 700 किलोमीटर नीचे तक आ सकते हैं. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप की गहराई को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा जाता है- उथले (शैलो), मध्यम गहराई वाले (इंटरमीडिएट) और गहरे (डीप) भूकंप. इनमें उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. इसकी वजह यह है कि इनसे निकलने वाली भूकंपीय तरंगों को धरती की सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है. इसलिए सतह पर झटके ज्यादा तेज महसूस हो सकते हैं. तेज झटकों के कारण इमारतों और अन्य ढांचों को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा, जान-माल के नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके मुकाबले गहरे भूकंपों की तरंगों को सतह तक पहुंचने में ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कई बार सतह पर झटकों का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है. ये भी पढ़ें:- PoJK में क्यों भड़का पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा? मुजफ्फराबाद से हाजिरा तक सड़कों पर उतरी जनता The post 7.7 तीव्रता के भूकंप से दहला इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट; घरों और इमारतों को नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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7.7 तीव्रता के भूकंप से दहला इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट; घरों और इमारतों को नुकसान

इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत पैदा कर दी. भूकंप के झटकों से कई घरों और दूसरी इमारतों को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद देश के कई तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया. शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभी तक किसी के मारे जाने की समाचार नहीं है. सुबह-सुबह आया 7.7 तीव्रता का भूकंप अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 5:58 बजे आया. इसकी तीव्रता 7.7 मापी गई और भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर की गहराई में था. भूकंप का केंद्र इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आने वाले एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में स्थित था. इसका असर फ्लोरेस द्वीप के बड़े हिस्से में महसूस किया गया. मुख्य भूकंप के बाद कई झटके और आफ्टरशॉक्स भी महसूस किए गए, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई. चार प्रांतों में सुनामी की चेतावनी भूकंप के बाद इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने कई तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की. इसमें पूर्वी नुसा तेंगारा, पश्चिमी नुसा तेंगारा, दक्षिण सुलावेसी और दक्षिण-पूर्वी सुलावेसी प्रांत शामिल हैं. प्रशासन ने प्रभावित तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से समुद्र तटों और नदी के किनारों से दूर रहने तथा सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की. कई इमारतों को नुकसान, लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप के झटकों के बाद कई जगहों से घरों और सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की शुरुआती जानकारी सामने आई. हालांकि, अधिकारियों ने तत्काल यह नहीं बताया कि कुल कितनी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं. भूकंप के बाद स्थानीय लोगों में काफी डर देखा गया और संभावित सुनामी से बचने के लिए कई लोग तटीय इलाकों से दूर चले गए. इंडोनेशिया में भूकंप का खतरा क्यों ज्यादा? करीब 17,000 से अधिक द्वीपों वाले इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक भूकंप और ज्वालामुखी प्रभावित देशों में शामिल है. इसकी एक बड़ी वजह इस देश की भौगोलिक स्थिति है. इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है. यह ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में ज्वालामुखी और सक्रिय भूगर्भीय भ्रंश रेखाएं मौजूद हैं. इसी वजह से यहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. ये भी पढ़ें:- चीन में सोशल सिक्योरिटी भुगतान पर सख्ती, कंपनियों पर बढ़ा दबाव; टैक्स-पेरोल डेटा से हो रही जांच 1992 में फ्लोरेस में आई सुनामी ने मचाई थी भारी तबाही फ्लोरेस क्षेत्र के लिए शनिवार का भूकंप इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाला था क्योंकि इस इलाके में पहले भी विनाशकारी भूकंप और सुनामी आ चुकी है. दिसंबर 1992 में फ्लोरेस के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में करीब 7.0 तीव्रता का भूकंप आया था. इसके बाद उठी सुनामी ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी. ऐसे में शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी. उथले भूकंप सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं वैज्ञानिकों के मुताबिक, भूकंप धरती की सतह से करीब 700 किलोमीटर नीचे तक आ सकते हैं. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप की गहराई को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा जाता है- उथले (शैलो), मध्यम गहराई वाले (इंटरमीडिएट) और गहरे (डीप) भूकंप. इनमें उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. इसकी वजह यह है कि इनसे निकलने वाली भूकंपीय तरंगों को धरती की सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है. इसलिए सतह पर झटके ज्यादा तेज महसूस हो सकते हैं. तेज झटकों के कारण इमारतों और अन्य ढांचों को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है. इसके अलावा, जान-माल के नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके मुकाबले गहरे भूकंपों की तरंगों को सतह तक पहुंचने में ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कई बार सतह पर झटकों का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है. ये भी पढ़ें:- PoJK में क्यों भड़का पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा? मुजफ्फराबाद से हाजिरा तक सड़कों पर उतरी जनता The post 7.7 तीव्रता के भूकंप से दहला इंडोनेशिया, सुनामी का अलर्ट; घरों और इमारतों को नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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15 अगस्त के लिए चाहिए दमदार Status? ये देशभक्ति शायरी दिल जीत लेंगी

Independence Day WhatsApp Status/Shayari: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस हर हिंदुस्तानीय के लिए गर्व और देशभक्ति का दिन है. इस दिन देशभर में तिरंगा फहराया जाता है और आजादी के वीर सेनानियों को याद किया जाता है. स्कूल, कॉलेज और प्रशासनी संस्थानों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. वहीं, लोग सोशल मीडिया और WhatsApp पर भी देशभक्ति से जुड़े स्टेटस, शायरी और संदेश शेयर करके इस खास दिन की शुभकामनाएं देते हैं. अगर आप भी 15 अगस्त पर अपने WhatsApp Status के जरिए देशभक्ति का जज्बा जाहिर करना चाहते हैं, तो यहां दिए गए ये संदेश आपके काम आ सकते हैं. Independence Day WhatsApp Status तिरंगा हमारी शान है, हिंदुस्तान हमारी पहचान है. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. देश के लिए जीना भी गर्व है और जरूरत पड़े तो देश के लिए मरना भी गर्व है. जय हिंद! दिल में देशभक्ति, हाथ में तिरंगा और जुबां पर हिंदुस्तान माता का नाम… यही है हिंदुस्तान की पहचान. ना पूछो जमाने से कि हमारी कहानी क्या है, हमारी पहचान सिर्फ हिंदुस्तानी है. 15 August Shayari लहू देकर जिन वीरों ने आजादी की राह बनाई, उन शहीदों की कुर्बानी आज भी याद है आई. तिरंगा यूं ही आसमान में लहराता रहे, हिंदुस्तान मां का गौरव सदा बढ़ता रहे. सरहद पर जो खड़े हैं, उन्हें सलाम हमारा, उनकी वजह से सुरक्षित है देश ये प्यारा. वीरों की कुर्बानी को दिल से नमन करें, आओ मिलकर आजादी का जश्न मनाएं. देशभक्ति से भरे छोटे Status “मेरा देश, मेरी शान, मेरा हिंदुस्तान महान.” “जहां तिरंगा लहराता है, वहां हर दिल हिंदुस्तानी कहलाता है.” “आजादी सिर्फ एक शब्द नहीं, लाखों वीरों के बलिदान की कहानी है.” इस स्वतंत्रता दिवस पर आप इन संदेशों को अपने WhatsApp Status पर लगाकर दोस्तों और परिवार के साथ शेयर कर सकते हैं. साथ ही, देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देना न भूलें. जय हिंद, जय हिंदुस्तान! यह भी पढ़ें: तिरंगे के रंगों से दें नाश्ते को नया ट्विस्ट, इस 15 अगस्त ट्राई करें ये 7 रेसिपीज The post 15 अगस्त के लिए चाहिए दमदार Status? ये देशभक्ति शायरी दिल जीत लेंगी appeared first on Naya Vichar.

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15 अगस्त की टॉप 20 खबरें : राष्ट्रपति का देश के नाम संदेश, PoJK में भड़का पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा, राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस

1. राष्ट्रपति मुर्मू का देश के नाम संदेश: परीक्षा में सुधार, विभाजन से ऑपरेशन सिंदूर तक का किया जिक्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए विकसित हिंदुस्तान के लक्ष्य, स्वतंत्रता संग्राम, विभाजन की त्रासदी, समान अवसर, युवाओं की भूमिका और हिंदुस्तानीय सेनाओं के योगदान का जिक्र किया. उन्होंने 2047 तक विकसित हिंदुस्तान के सपने को साकार करने के लिए देशवासियों से मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 2. राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस जारी, अमित शाह पर टिप्पणी को लेकर लोकसभा सचिवालय ने मांगा जवाब लोकसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर की गई “असंसदीय और अपमानजनक” टिप्पणियों को लेकर नोटिस भेजा है. उन्हें 28 अगस्त तक अपना जवाब और पक्ष रखने को कहा गया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 3. ओडिशा में बारिश का कहर, 11 जिलों पर फ्लैश फ्लड का खतरा ओडिशा के कई उत्तरी जिलों में भारी बारिश से बाढ़ का संकट गहरा गया है. 11 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है, जिससे गांवों, खेतों और सड़कों पर पानी भर गया है. लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं. यहां पढ़ें पूरी समाचार 4. PoJK में क्यों भड़का पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा? मुजफ्फराबाद से हाजिरा तक सड़कों पर उतरी जनता पाक अधिकृत कश्मीर (PoJK) के मुजफ्फराबाद से हाजीरा तक जनता सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रही है. बुनियादी अधिकारों, बेहतर सुविधाओं और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज हो गया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 5. उमर अब्दुल्ला का पाकिस्तान पर हमला, बोले- ‘हमारा लहू पिया गया’, कश्मीर की नदियों पर पहला हक हमारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान पर नदियों और जल संसाधनों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है. उन्होंने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि कश्मीर की नदियों पर पहला अधिकार उनका है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 6. चमोली में सुरंग के अंदर जिंदगी की जंग! 12 लोग सुरक्षित निकले, 7 शव बरामद ; 3 अब भी लापता चमोली में हुए सुरंग हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन 3 लोग अभी भी लापता हैं. सुरंग में भरा पानी और कम ऑक्सीजन बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 7. जनगणना 2027: शिक्षा-रोजगार और कोविड टीका सहित आपसे पूछे जाएंगे 40 सवाल, देंखे पूरी लिस्ट गृह मंत्रालय ने जनगणना 2027 के लिए 40 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की है. इस सूची में व्यक्तिगत जानकारी से लेकर आर्थिक स्थिति तक कई पहलुओं को शामिल किया गया है. जानें कि आपको किन-किन सवालों के जवाब देने होंगे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 8. आत्मसमर्पित नक्सली स्त्रीओं ने रैंप पर बिखेरी कोसा की चमक, बदले बस्तर की दिखी नई तस्वीर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर रायपुर में आत्मसमर्पित नक्सली स्त्रीओं ने कोसा सिल्क परिधानों का प्रदर्शन किया. हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटकर उन्होंने आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई मिसाल पेश की. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 9. चमोली हादसे में झारखंड के एक मजदूर की मौत, पांच घायल और एक लापता चमोली की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे में झारखंड के 7 श्रमिक प्रभावित हुए हैं. एक श्रमिक की दुखद मौत हो गई है, जबकि पांच घायल हैं और एक अभी भी लापता है. राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 10. प्रशांत किशोर अब बिहार के इस नेता की खोलेंगे कुंडली, बोले- अनाप-शनाप बोलेंगे तो जवाब मिलेगा जन सुराज नेता प्रशांत किशोर ने आभार यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर जोरदार हमला बोला. पीके ने चेतावनी दी कि ज्यादा बोलने पर उनकी पूरी कुंडली जनता के सामने रखी जाएगी. उन्होंने शराबबंदी पर भी सवाल उठाए. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 11. 15 अगस्त से पहले UP में मिला पाक कनेक्शन : कानपुर देहात में 3 गाड़ियों से पहुंची टीम, भाई-बहन को उठाकर ले गई दिल्ली उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई ने सनसनी फैला दी है. एक भाई-बहन को संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में हिरासत में लेकर दिल्ली ले जाया गया है. एजेंसियों को उनके पाकिस्तान कनेक्शन का संदेह है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 12. 15 August Hindi Shayari: तिरंगे और वतन पर दिल में जोश भर देने वाली 25 देशभक्ति शायरियां, स्टेटस के लिए हैं बेस्ट स्वतंत्रता दिवस 2026 पर अगर आप WhatsApp Status, Instagram Caption या Facebook Post के लिए कुछ अलग और दमदार देशभक्ति शायरी खोज रहे हैं, तो यहां 25 नई शायरियां मिलेंगी. ये शायरियां आजादी, तिरंगे, वतन और देश के प्रति सम्मान की भावना को बयां करती हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 13. IND vs SL: कितने बजे शुरू होगा हिंदुस्तान बनाम श्रीलंका का टेस्ट मुकाबला? कहां देखें क्रिकेट फैंस लाइव प्रसारण? हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच बहुप्रतीक्षित टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में स्पोर्ट्सा जाएगा. जानिए यह मैच कितने बजे शुरू होगा और आप इसे टीवी व मोबाइल पर कहां लाइव देख सकेंगे. श्रीलंका क्रिकेट ने फैंस को बड़ा तोहफा देते हुए स्टेडियम में मुफ्त एंट्री का ऐलान किया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 14. चंद्रशेखरन के बाद किसकी होगी एंट्री? टाटा संस ने शुरू की नए चेयरमैन की तलाश टाटा संस में नए चेयरमैन की तलाश तेज हो गई है. जानिए चंद्रशेखरन के बाद कौन संभालेगा कमान और नए नेतृत्व के सामने कौन-सी चुनौतियां होगी. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 15. Awarapan 2 vs Batwara 1947 Advance Booking : स्वतंत्रता दिवस पर इमरान और सनी देओल में टक्कर, जानें कौन आगे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है. एडवांस बुकिंग और शुरुआती आंकड़ों में ‘आवारापन 2’ ने मजबूत बढ़त बनाई है, जबकि ‘बंटवारा 1947’ को बेहतर ‘वर्ड ऑफ माउथ’ से उम्मीदें हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 16. स्वतंत्रता दिवस 2026: 1947 के सुई और टेलीग्राम से 2026 के AI और चंद्रयान तक! 79 सालों में यूं

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ओडिशा में बारिश का कहर, 11 जिलों पर फ्लैश फ्लड का खतरा

Flood havoc in Odisha :ओडिशा में लगातार बारिश के चलते कई उत्तरी जिलों में शुक्रवार (14 अगस्त ) को भारी बारिश के चलते बाढ़ का संकट और गहरा गया. नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से गांव, खेत और सड़कें पानी में डूब गईं. कई जगह यातायात बाधित हो गया, जबकि लोग घरों की छतों और तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हैं. बालासोर, मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ समेत कई जिले प्रभावित हैं. 11 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने ओडिशा के 11 जिलों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा जताया है। हिंदुस्तान मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तरी ओडिशा में 17 अगस्त तक और पश्चिमी हिस्सों में 15 अगस्त तक भारी बारिश की चेतावनी दी है. मयूरभंज में बुधाबलंगा नदी उफान पर मयूरभंज जिले में बुधाबलंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बेतनटी ब्लॉक के कई इलाके जलमग्न हो गए. करीब 16 ग्राम पंचायतों में खेत, सड़कें और गांव प्रभावित हुए हैं. नखरा पुल के पास पुराने और कमजोर पुल के ऊपर करीब तीन फीट पानी बह रहा है, जिससे बैसिंगा-मानत्री-उदला मार्ग पर यातायात पूरी तरह रुक गया. जाजपुर में चौथी बार बाढ़ जाजपुर जिले में बैतरणी नदी की इस सीजन की चौथी बाढ़ ने दशरथपुर ब्लॉक के कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है. लगातार बाढ़ से सैकड़ों परिवारों की परेशानी बढ़ गई है. कई परिवार करीब एक महीने से बार-बार जलभराव झेल रहे हैं और कुछ लोग अब भी घर लौट नहीं पाए हैं. एक महीने में चार बार तबाही पहली बाढ़ 6 जुलाई को कानी नदी के कांटापाड़ा में तटबंध टूटने के बाद आई थी. 28 जुलाई को दूसरी बाढ़ में डोवाबिल पटना और बैतरणी रिंग तटबंध के पास तटबंध टूटे. 8 अगस्त की तीसरी बाढ़ में मरम्मत किए गए हिस्से फिर टूट गए. अब चौथी बाढ़ ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। प्रभावित परिवार छतों या नदी किनारे तिरपाल के नीचे रह रहे हैं. क्योंझर और बालासोर में भी संकट क्योंझर के तेलकोई ब्लॉक में भारी बारिश से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ. कई पुलों और सड़कों पर पानी बहने लगा. तेलकोई-जगमोहनपुर मार्ग पर हनुमंतिया नहर का पानी करीब तीन फीट ऊपर आने से रास्ता बंद हो गया. वहीं बालासोर के पांच ब्लॉक भारी बारिश से प्रभावित हुए हैं. राउरकेला में भारी जलभराव राउरकेला शहर का लगभग पूरा इलाका जलभराव की चपेट में रहा. सिविल टाउनशिप, बसंती कॉलोनी, छेंड कॉलोनी, रेलवे कॉलोनी और पावर हाउस सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. बृहस्पतिवार सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक शहर में 105.4 मिमी बारिश दर्ज की गई. डिप्रेशन से और बढ़ सकती है मुश्किल भुवनेश्वर मौसम केंद्र के अनुसार, तटीय पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र डिप्रेशन में बदल गया है और उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है. इसके प्रभाव से उत्तरी ओडिशा में 17 अगस्त तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है. कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट शुक्रवार को सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़ और संबलपुर में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. बालासोर, देवगढ़, अंगुल, क्योंझर, मयूरभंज, सोनपुर, बौध, नुआपाड़ा और बलांगीर में भी भारी बारिश का अनुमान है. शनिवार को सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपाड़ा और बलांगीर में फिर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. ये भी पढ़ें: मूसलाधार बारिश के कारण बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय की सड़कें और गलियां जलमग्न, दुकानों में घुसा पानी The post ओडिशा में बारिश का कहर, 11 जिलों पर फ्लैश फ्लड का खतरा appeared first on Naya Vichar.

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