Pitru Paksha Dwitiya Shradh: आज 28 सितंबर 2026 को आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है. कर्मकांड के अनुसार, द्वितीया तिथि में उन पूर्वजों का श्राद्ध (पिंडदान, तर्पण) किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की द्वितीया तिथि में हुई. इस दिन माता-पिता, दादा-दादी, परदादा के श्राद्ध (तर्पण और पिंडदान) करने की परंपरा है. आइए, जानते हैं कि आज पितृ पक्ष के द्वितीया श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण मुहूर्त और विधि. पितृ पक्ष 2026: द्वितीया श्राद्ध मुहूर्त कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट तक. (महत्व: कुतुप मुहूर्त को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए सबसे उत्तम माना गया है.) रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से 01 बजकर 23 मिनट तक. (महत्व: अगर कुतुप मुहूर्त में श्राद्ध न कर पाएं, तो इस मुहूर्त में किया जा सकता है.) अपराह्न काल मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 47 मिनट तक. (महत्व: शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म को अपराह्न काल समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए.) नोट: स्थानीय समय के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है. किसके लिए किया जाता है द्वितीया श्राद्ध? गरुड़ पुराण के अनुसार पितृ पक्ष में द्वितीया तिथि का श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी महीने की द्वितीया तिथि में हुई. द्वितीया श्राद्ध मुख्य रूप से माता-पिता, दादा-दादी, परदादा, भाई-बहन के लिए किया जाता है. द्वितीया श्राद्ध और तर्पण की सही विधि सुबह नहाने वाले पानी में कुछ बूंद गंगाजल मिलाकर स्नान करें. साफ सफेद वस्त्र धारण करें. घर की दक्षिण दिशा को साफ करके वहां साफ आसन बिछाएं. पितरों को समर्पित दक्षिण दिशा की ओर मुंह करें. आसन पर बैठकर पहले आचमन (हाथ में जल लेकर तीन बार ग्रहण करना) कर शुद्ध हो जाएं. दाहिने हाथ की अनामिका (रिंग फिंगर) उंगली में कुश से बनी पवित्री (अंगूठीनुमा) पहनें. इसके बिना तर्पण का फल प्राप्त नहीं होता. हाथ में जल, काले तिल, अक्षत और सफेद फूल लें. दक्षिण की ओर मुंह करके संकल्प करें. संकल्प की चीजों (जल, तिल, अक्षत आदि) को जमीन पर रख दें. देव तर्पण और ऋषि तर्पण विधि पितरों से पहले देवताओं और ऋषियों को जल देने का विधान है. इसके लिए अपना मुंह पूर्व दिशा की ओर रखें. दोनों हथेलियों को मिलाकर (अंजलि) उसमें जल और जौ रखें. देवताओं और ऋषियों का ध्यान करते हुए उंगलियों के आगे वाले हिस्से से जल छोड़ दें. ऐसा तीन-तीन बार करें. पितृ तर्पण का मुख्य भाग अपना मुंह वापस दक्षिण दिशा की ओर करें. अगर जनेऊ पहने हैं, तो उसे बाएं कंधे से हटाकर दाहिने कंधे पर रखें. इसे अपसव्य स्थिति कहा जाता है. तांबे या पीतल के पात्र में जल, गंगाजल, काला तिल और सफेद चंदन मिलाएं. दाहिने हाथ में जल लेकर अंगूठे और तर्जनी वाले हिस्से से धीरे-धीरे नीचे किसी पात्र में गिराएं. जल गिराते वक्त “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” या “तस्मै स्वधा नमः” का जाप करते रहें. हर पितर को तीन-तीन बार अंजलि से जल दें. श्राद्ध और तर्पण सामग्री कुश, काले तिल, जौ, शुद्ध जल, गंगाजल, तांबे या पीतल का पात्र, सफेद चंदन, रोली, कुमकुम, सफेद फूल, गाय का कच्चा दूध, घी, शहद, शक्कर, धूप, दीप, रूई की बत्ती, आचमनी, छोटी कटोरी, सफेद या हल्के रंग के सूती वस्त्र और जनेऊ. श्राद्ध तर्पण के बाद करें पंचबलि कर्म श्राद्ध और तर्पण के बाद पंचबलि कर्म का विधान है. इस कर्म के तहत गाय, कुत्ते, कौए, चींटी और देवता के लिए भोजन का एक हिस्सा निकाला जाता है. इसके साथ ही ब्राह्मण भोजन का विधान भी है. इसलिए पंचबलि कर्म के बाद ब्राह्मण भोजन कराएं या किसी मंदिर में भोजन की सामग्री दान करें. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: घर में लगातार आ रही हैं परेशानियां? जानें पितृ दोष के संकेत और आसान उपाय The post Pitru Paksha Dwitiya Shradh: आज द्वितीया श्राद्ध पर इस मुहूर्त में करें तर्पण, जानें सही विधि और पंचबलि नियम appeared first on Naya Vichar.