Jamshedpur: सीतारामडेरा थानांतर्गत न्यू लेआउट, डीएलसी कार्यालय रोड स्थित मकान नंबर 261 में भाई-बहन के शव को पुलिस ने एक ही फंदे से लटका हुआ बरामद किया है. शव तीन दिन पुराना होने के कारण पूरी तरह से सड़ गया था. पुलिस ने दोनों के शव को फंदे से उतार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेज दिया. मृतकों की पहचान डॉ सरस्वती प्रशासन (67 वर्ष ) और उनके भाई विवेकानंद प्रशासन उर्फ बलराम प्रशासन (61) के रूप में हुई है. दोनों ने एक ही पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. डॉ सरस्वती को-ऑपरेटिव कॉलेज में गेस्ट प्रोफेसर के रूप में पढ़ाती थीं. नवंबर 2024 में वह रिटायर हो गयी थीं. वह जूलॉजी की प्रोफेसर थीं. वहीं उनका भाई बलराम बिजली मिस्त्री का काम करता था. डॉ प्रोफेसर सरस्वती और बलराम दोनों अविवाहित थे.
घर से आ रही थी बदबू
घटना के संबंध में बताया जाता है कि डॉ सरस्वती प्रशासन के कुछ छात्र उनसे शुक्रवार की शाम से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनसे बात नहीं हो पा रही थी. इस दौरान कॉ-आपरेटिव कॉलेज के प्रोफेसर भी उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई. उसके बाद उन्होंने कुछ पुराने छात्र को प्रोफेसर सरस्वती के घर भेजा. जहां छात्रों ने देखा कि उनका घर भीतर से बंद है. घर से काफी बदबू आ रही थी. समाचार पत्र भी गेट पर पड़ा हुआ था. उसके बाद उन लोगों को कुछ अनहोनी का शक हुआ. फिर आसपास के लोगों और छात्रों ने मिल कर सीतारामडेरा थाना गये और घटना की जानकारी दी.
एक ही पंखे से झूल गए भाई-बहन
सूचना मिलने पर पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची. उसके बाद पुलिस ने दंडाधिकारी की मौजूदगी में कटर से मेन गेट समेत भीतर के कमरे का ताला काटा. कमरे का गेट खोलने के बाद पुलिस ने दोनों भाई-बहन का शव एक ही पंखे के फंदे से लटका मिला. पुलिस ने कमरे की छानबीन की. लेकिन पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला. इलाके में भाई-बहन की मौत की जानकारी मिलने के बाद सनसनी फैल गई. लोग दोनों के शव को देखने के लिए अपने-अपने घरों से निकले, लेकिन शव के बाहर निकालते ही बदबू से भाग गये.
कैंसर और अवसाद बना मौत का कारण
जानकारी के अनुसार, डॉ सरस्वती प्रशासन को एक माह पूर्व ब्रेस्ट कैंसर होने की जानकारी मिली थी. उसके बाद से वह काफी परेशान और तनाव में रहने लगी थी. वह भाई के साथ एमटीएमएच में अपनी जांच कराने के लिए गयी थीं. संभवत: उनकी रिपोर्ट आ चुकी थी. कैंसर होने की जानकारी होने के बाद वह बार-बार मरने की बात करती थी. एमटीएमएच में इलाज के दौरान भी दोनों भाई-बहन काफी नर्वस थे और बार-बार कह रहे थे कि उनका अब क्या होगा. बलराम को भी किड्नी की कोई बीमारी हो गई थी. दोनों भाई-बहन एक-दूसरे का सहारा थे. इस कारण दोनों इस बात को लेकर दोनों काफी डिप्रेशन में आ गये थे.
बीमारी और अकेलेपन ने ली जान
सीतारामडेरा के थाना प्रभारी निरंजन कुमार ने बताया कि बीमारी की पीड़ा और अकेलेपन से तंग आकर दोनों ने एक साथ आत्महत्या की है. शवों की स्थिति को देखने से दो- तीन दिन पुराना लग रहा है. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है. पोस्टमार्टम के बाद मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा.
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