आईपीएल सिर्फ क्रिकेट का सबसे बड़ा मंच नहीं रह गया है, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए भी यह कमाई का बड़ा जरिया बनता जा रहा है. एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मौजूदा आईपीएल सीजन के दौरान 1,200 से ज्यादा वेबसाइट्स के जरिए अवैध सट्टेबाजी प्लैटफॉर्म्स का प्रचार किया गया. चौंकाने वाली बात यह है कि लोगों को फंसाने के लिए एआई आधारित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें क्रिकेटरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जैसे दिखने वाले नकली वीडियो तैयार किए गए.
डीपफेक वीडियो से बढ़ाया जा रहा भरोसा
डिजिटल इंटेलिजेंस कंपनी क्लाउडसेक की रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधियों ने एआई टूल्स की मदद से ऐसे वीडियो बनाए, जिनमें लोकप्रिय क्रिकेटर और कंटेंट क्रिएटर्स की आवाज और चेहरा हूबहू कॉपी किया गया. इन वीडियो को इंस्टाग्राम रील्स, टेलीग्राम और दूसरे सोशल प्लैटफॉर्म्स पर तेजी से फैलाया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सट्टेबाजी ऐप्स और वेबसाइट्स तक पहुंचें.
रिपोर्ट बताती है कि इन फर्जी वीडियो का मकसद लोगों के बीच भरोसा पैदा करना था, जिससे यूजर्स आसानी से पैसे निवेश कर दें. कई मामलों में लोगों को भारी रकम गंवानी पड़ी.
एक सिस्टम से चल रहीं थीं दर्जनों बेटिंग वेबसाइट्स
जांच के दौरान क्लाउडसेक को एक ऐसे एडमिन पैनल तक पहुंच मिली, जहां से 25 से ज्यादा सट्टेबाजी वेबसाइट्स को कंट्रोल किया जा रहा था. इससे साफ हुआ कि यह कोई छोटा नेटवर्क नहीं, बल्कि संगठित साइबर फ्रॉड सिस्टम है.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मई 2025 से मई 2026 के बीच एक ही प्लैटफॉर्म पर 9,300 से ज्यादा विड्रॉल रिक्वेस्ट जानबूझकर रिजेक्ट कर दी गईं. इससे यूजर्स को करीब 4.65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
प्रशासनी वेबसाइट्स तक को नहीं छोड़ा
साइबर अपराधियों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए प्रशासनी वेबसाइट्स को भी निशाना बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रशासनी पोर्टल्स को हैक करके उनमें अवैध सट्टेबाजी प्लैटफॉर्म्स के लिंक जोड़ दिए गए थे. इसका मकसद यूजर्स को यह भरोसा दिलाना था कि वेबसाइट सुरक्षित और असली है.
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हमले बेहद खतरनाक हैं क्योंकि आम लोग प्रशासनी वेबसाइट्स पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं.
मनी म्यूल अकाउंट्स से छिपाया जा रहा पैसा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सट्टेबाजी नेटवर्क में कई बैंक खातों का इस्तेमाल मनी म्यूल के तौर पर किया जा रहा था. यानी अलग-अलग खातों के जरिए पैसों को घुमाकर ट्रैक करना मुश्किल बनाया जा रहा था. इससे जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना और भी कठिन हो जाता है.
यूजर्स को क्यों सतर्क रहने की जरूरत
साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईपीएल जैसे बड़े इवेंट्स के दौरान ऑनलाइन फ्रॉड तेजी से बढ़ जाते हैं. अगर किसी वीडियो में कोई क्रिकेटर या सेलिब्रिटी किसी बेटिंग ऐप का प्रचार करता दिखे, तो उस पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए. डीपफेक तकनीक अब इतनी एडवांस हो चुकी है कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है.
यूजर्स को केवल आधिकारिक और भरोसेमंद प्लैटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए.
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