US Iran Peace Deal: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता पूरा हो गया है. इसके साथ ही उन्होंने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाने की अनुमति देने का ऐलान किया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शांति समझौता पूरा होने की घोषणा के बाद अब ईरान ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है. ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि तेहरान प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता प्रक्रिया में तभी शामिल होगा, जब अमेरिका युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने संबंधी अपने वादों को पूरा कर देगा.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है. सभी को बधाई. मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के पूरी तरह खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल हटाने की अनुमति देता हूं. दुनिया के जहाज अब अपने इंजन शुरू करें. तेल का प्रवाह जारी रहने दें.’ इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है.
“The Deal with Islamic Republic of Iran is now complete. Congratulations to all!” President Donald J. Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/RdSwyEdEtO
— The White House (@WhiteHouse) June 14, 2026
शहबाज शरीफ ने भी समझौते की पुष्टि की
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि लंबी बातचीत और गहन वार्ताओं के बाद दोनों पक्ष सहमत हुए हैं. साथ ही, दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा की है.
शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘गहन बातचीत के बाद हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है. दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया है.’ उन्होंने बताया कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे.
शहबाज शरीफ ने कहा, ‘हम अमेरिका और ईरान दोनों का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने संघर्ष का समाधान कूटनीतिक तरीके से खोजने की प्रतिबद्धता दिखाई. हम इस मध्यस्थता प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए कतर के नेतृत्व के भी आभारी हैं. इसके अलावा सऊदी अरब और तुर्किये के नेतृत्व के योगदान की भी सराहना करते हैं.’
Following intensive talks, we are pleased to announce that the Peace Deal between the United States of America and Islamic Republic of Iran has been REACHED. Both sides have declared the immediate and permanent termination of military operations on all fronts, including in…
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) June 14, 2026
शुक्रवार को होगा समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर
ईरान के प्रशासनी समर्थन वाले चैनल प्रेस टीवी के अनुसार, काजेम गरीबाबादी ने बताया कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर शुक्रवार को किए जाएंगे. इसके बाद समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का पूरा मसौदा सार्वजनिक कर दिया जाएगा.
गरीबाबादी ने कहा, ‘जिस दुश्मन ने अपने नापाक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हमला किया था, वह अपने सभी लक्ष्यों में विफल रहा. इस युद्ध में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने बड़ी सफलताएं हासिल की हैं. यह समझौता ज्ञापन केवल कूटनीति का परिणाम नहीं है, बल्कि यह हमारी सैन्य उपलब्धियों और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के खून का भी ऋणी है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होंगे और दोनों प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख भविष्य की वार्ता व्यवस्था को लेकर चर्चा करेंगे. हस्ताक्षर के बाद समझौता ज्ञापन का पूरा पाठ सार्वजनिक किया जाएगा.’
अमेरिका को पहले पूरे करने होंगे अपने वादे
ईरानी उप विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि अगले चरण की बातचीत में प्रवेश करने से पहले तेहरान यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका ने अपने दायित्व पूरे किए हैं या नहीं. प्रेस टीवी के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हम पहले यह सत्यापित करेंगे कि अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और ईरान की संपत्तियां मुक्त करने से जुड़े अपने दायित्व पूरे किए हैं. 60 दिन की वार्ता प्रक्रिया में शामिल होना अमेरिका द्वारा इन प्रतिबद्धताओं को पूरा किए जाने पर निर्भर करेगा.’
‘समझौता भरोसे का संकेत नहीं’
गरीबाबादी ने समझौते की प्रकृति पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि मसौदा तैयार करते समय ईरान ने अपनी सभी प्रमुख शर्तों और रणनीतिक हितों को शामिल कराया है. अल जजीरा के हवाले से उन्होंने कहा, ‘इस समझौता ज्ञापन का मतलब यह नहीं है कि हम दुश्मन पर भरोसा कर रहे हैं. हम अमेरिका की सभी प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन पर लगातार नजर रखेंगे.’
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कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की रही अहम भूमिका
शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए कतर, सऊदी अरब और तुर्किये का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया. रविवार को कतर का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा था. उनके और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद ही इस शांति समझौते की रूपरेखा सामने आई है. शरीफ के मुताबिक, औपचारिक हस्ताक्षर से पहले कई प्रारंभिक बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें समझौते के क्रियान्वयन और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होगी. इन बैठकों का उद्देश्य समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक ढांचा तैयार करना और भविष्य की वार्ता प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप देना होगा.
समझौते से पहले लेबनान में बढ़ा था तनाव
इससे पहले रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि समझौता सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन लेबनान में बढ़े तनाव की वजह से इसमें थोड़ी देरी हुई. समाचार वेबसाइट एक्सियोस से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर पहले ही होने वाले थे, लेकिन बेरूत में इजरायली हमले और उसके बाद ईरान की संभावित प्रतिक्रिया की आशंकाओं ने प्रक्रिया को कुछ घंटों के लिए प्रभावित कर दिया.
ट्रंप ने कहा, ‘इस घटना की वजह से हस्ताक्षर में कुछ घंटों की देरी हुई.’ एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना भी की और कहा कि वह इस कार्रवाई के समय को लेकर नाराज थे क्योंकि इससे चल रही कूटनीतिक कोशिशों पर असर पड़ा.
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परमाणु कार्यक्रम पर भी बनेगा निगरानी तंत्र
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा. उनके मुताबिक, इससे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सकेगा और उसके परमाणु कार्यक्रम पर अधिक प्रभावी निगरानी स्थापित होगी. ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और ईरान के परमाणु सामग्री प्रबंधन तथा निपटान से जुड़े प्रावधान भी शामिल होंगे.
फरवरी से शुरू हुआ था संघर्ष
यह संभावित समझौता उस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. उस दौरान अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया था. अब यदि 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इसे पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जा सकता है.
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