Bullet Train : इस परियोजना के लिए जर्मनी में तैयार की गई दो अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) मार्च 2026 में चीन से समुद्री रास्ते हिंदुस्तान लाई गई थीं. ये मशीनें एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पास हैं, जो 20.37 किलोमीटर लंबी सुरंग बना रही है. इसमें करीब 7 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे होगा, जबकि पूरी सुरंग जमीन से लगभग 65 मीटर की गहराई में बनाई जाएगी.
रेल मंत्री एक बटन दबाएंगे और टीबीएम के संचालन की शुरुआत करेंगे
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्री एक बटन दबाकर टीबीएम के संचालन की शुरुआत करेंगे. यह मशीन विक्रोली में जमीन के स्तर से 56.6 मीटर की गहराई में तैनात की गई है. अधिकारियों के मुताबिक पहली टीबीएम, विक्रोली से बीकेसी स्टेशन की ओर सुरंग खोदने का काम शुरू करेगी, जो लगभग 5.8 किलोमीटर की दूरी तय करेगी.
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सावली से विक्रोली तक 9.7 किलोमीटर लंबे हिस्से की होगी खुदाई
वहीं, दूसरी टीबीएम के कलपुर्जों को वर्तमान में सावली में जोड़ा जा रहा है और इसके एक सप्ताह के भीतर तैयार होने की उम्मीद है. यह मशीन सावली से विक्रोली तक 9.7 किलोमीटर लंबे हिस्से की खुदाई करेगी, जिसमें सात किलोमीटर लंबा समुद्र के नीचे का हिस्सा भी शामिल है. उन्होंने बताया कि कुल लंबाई में से, बीकेसी और सावली के बीच 15.4 किलोमीटर हिस्से की खुदाई टीबीएम का उपयोग करके की जाएगी. सावली से शिलफाटा तक का शेष 4.8 किलोमीटर का हिस्सा ‘ड्रिल-एंड-ब्लास्ट’ पद्धति का उपयोग करके पहले ही पूरा किया जा चुका है.
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बुलेट ट्रेन का हिंदुस्तान के लोग बहुत ही बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. हिंदुस्तान की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलेगी.
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