Amit Shah on Illegal Coal Mining : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) को निर्देश दिया कि धनबाद क्षेत्र में अवैध कोयला खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए “जीरी कोल लीकेज योजना” लागू की जाए. अमित शाह ने ये निर्देश केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए. नयी दिल्ली में आयोजित बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री और कोयला मंत्री ने संयुक्त रूप से की. इसमें अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय कोयला सचिव तथा कोयला मंत्रालय, सीआइएसएफ, कोल इंडिया लिमिटेड और बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, गृह मंत्री ने धनबाद और आसपास के इलाकों में अवैध कोयला खनन तथा कोयला चोरी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जतायी.
कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने गृह मंत्री को बताया कि अक्तूबर 2025 के पहले सप्ताह में हुई समीक्षा के बाद से कई ठोस कदम उठाये गये हैं. यह भी बताया गया कि सीआइएसएफ और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों को “खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957” के तहत कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है. यह अधिकार उन्हें न्यायालय में मामला दर्ज कराने, उन स्थानों पर जाने जहां अवैध कोयले के होने की आशंका हो, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करने और अवैध रूप से निकाले गये खनिजों के साथ-साथ ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किये गये औजारों, उपकरणों और वाहनों को जब्त करने की अनुमति देता है.
अधिकारों के इस्तेमाल से सुनिश्चित हो कि उपभोक्ता वैध कोयले का ही इस्तेमाल करें
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीआइएसएफ और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारी एमएमडीआर एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल सख्ती से और आपसी तालमेल के साथ, स्वीकृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार करें. यह सुनिश्चित किया जाये कि उपभोक्ता केवल कानूनी रूप से खनन किये गये कोयले का ही इस्तेमाल करें. अवैध कोयले के परिवहन को रोकने के लिए जीएसटी अधिकारियों को भी इसमें शामिल करना जरूरी है. परिवहन किये जा रहे कोयले के लिए ई-वे बिलों की जांच की व्यवस्था होनी चाहिए.
संवेदनशील इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा-व्यवस्था लागू हो
केंद्रीय गृह मंत्री ने सीआइएसएफ को विचक रिस्पॉन्स टीमें गठित करने और संवेदनशील इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया. उन्होंने प्रौद्योगिकी के अधिक प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि अवैध खनन गतिविधियों में शामिल इलाकों और लोगों की पहचान करने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटरों में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों का इस्तेमाल किया जाये.
ये निर्णय लिये गये
- धनबाद में लागू होगी जीरो कोल लीकेज योजना
- संवेदनशील क्षेत्रों में बनेंगी क्विक रिस्पॉन्स टीमें
- सभी कोयला परिवहन के ई-वे बिलों की होगी जांच
- हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से होगी निगरानी
जीरो कोल लीकेज प्लान क्या है ?
जीरो कोल लीकेज प्लान का उद्देश्य खदान से निकलने वाले कोयले की पूरी निगरानी, अवैध खनन पर रोक और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है. इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, संयुक्त छापेमारी, अवैध मुहानों को बंद करने और कोयले के परिवहन पर नजर रखने जैसे कदमों पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
क्या है एमएमडीआर एक्ट ?
एमएमडीआर एक्ट यानी खान व खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, 1957 एक प्रमुख कानून है. इसके तहत देश में खनिजों के खनन, परिवहन, भंडारण और कारोबार को नियंत्रित किया जाता है. इस कानून के तहत बिना वैध अनुमति के कोयला निकालना, उसका परिवहन या भंडारण करना दंडनीय अपराध है. दोषी पाये जाने पर जुर्माना, खनिज और वाहन की जब्ती और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
एमएमडीआर एक्ट के तहत मिले अधिकार
- एक्ट के तहत सीआइएसएफ और कोल इंडिया के अधिकारियों को तलाशी और जब्ती का अधिकार है.
- संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी, अवैध कोयला, उपकरण और वाहन जब्त करने की शक्ति दी गयी है.
- अवैध खनन से जुड़े मामलों में न्यायालय में शिकायत दर्ज करने का भी अधिकार है.
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