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8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर नहीं, रेलवे इंजीनियरों को अब वेतन और प्रमोशन में भी चाहिए बराबरी

8th Pay Commission: इस बार सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि रेलवे इंजीनियरों ने वेतन, प्रमोशन और करियर ग्रोथ से जुड़े कई पुराने मुद्दे भी आयोग के सामने रखे हैं. उनका कहना है कि 6वें वेतन आयोग के बाद उनकी स्थिति पहले जैसी नहीं रही और अब 8वें वेतन आयोग से उन्हें बड़ी उम्मीद है.

भुवनेश्वर में हुई बैठक के दौरान रेलवे इंजीनियरों के संगठनों ने आयोग को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा. हालांकि, अभी किसी भी मांग पर फैसला नहीं हुआ है. आयोग फिलहाल देशभर से कर्मचारियों और पेंशनर्स की राय जुटा रहा है.

कहां हुई बैठक और किसने रखीं मांगें?

8वें वेतन आयोग ने 6 और 7 जुलाई को ओडिशा के भुवनेश्वर में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के साथ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन किया. इस बैठक में ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियर्स फेडरेशन (AIREF) और ईस्ट कोस्ट रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन (ECoREA) ने आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन को अपना ज्ञापन सौंपा. AIREF के महासचिव बी.पी. दाश ने कहा कि रेलवे इंजीनियर रेलवे के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन 6वें वेतन आयोग के बाद उनकी वेतन व्यवस्था कमजोर हुई. उनका दावा है कि आज भी उन्हें गैर-तकनीकी और गैर-सुरक्षा कैडर के कई कर्मचारियों की तुलना में कम अनुकूल वेतन मिलता है.

रेलवे इंजीनियरों ने क्या-क्या मांग रखी?

रेलवे इंजीनियरों ने आयोग के सामने कई अहम मांगें रखीं, जिनमें सबसे बड़ी मांग वेतन समानता और करियर ग्रोथ की रही.

मांग क्या चाहते हैं इंजीनियर?
वेतन समानता 6वें वेतन आयोग से पहले जैसी पे स्ट्रक्चर दोबारा लागू की जाए.
ग्रुप B स्टेटस अन्य केंद्रीय प्रशासनी विभागों की तरह रेलवे इंजीनियरों को भी ग्रुप B का दर्जा मिले.
ग्रुप B पद बढ़ें रेलवे में ग्रुप B पदों की हिस्सेदारी 0.29% से बढ़ाकर 7.5% की जाए.
प्रमोशन लंबे समय से रुके प्रमोशन और करियर में आ रही रुकावट को दूर किया जाए.

बैठक के दौरान AIREF के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी जनरल सिवाकांत सिंह ने भी कहा कि रेलवे इंजीनियर लंबे समय से करियर स्टैगनेशन यानी प्रमोशन और ग्रोथ रुकने की समस्या झेल रहे हैं.

क्या सिर्फ रेलवे कर्मचारियों की मांगें सुनी जा रही हैं?

नहीं. 8वां वेतन आयोग देशभर में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स से सुझाव ले रहा है. इससे पहले दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख में भी बैठकें हो चुकी हैं. भुवनेश्वर के बाद आयोग ने 10 जुलाई को कोलकाता में अंतिम दौर की चर्चा करने की योजना बनाई है. इन बैठकों में सिर्फ रेलवे कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि दूसरे कर्मचारी संगठनों ने भी फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, भत्तों में संशोधन, पेंशन सुधार, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बदलाव और Modified Assured Career Progression (MACP) व्यवस्था में सुधार जैसी मांगें रखी हैं.

क्या अभी कोई फैसला हो गया है?

अभी नहीं. ये बैठकें सिर्फ सुझाव और मांगें जुटाने के लिए हो रही हैं. आयोग सभी कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और पेंशनर्स से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करेगा. इसलिए फिलहाल वेतन, पेंशन, भत्तों या प्रमोशन से जुड़ा कोई नया फैसला लागू नहीं हुआ है.

गौरतलब है कि 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. आयोग का काम केंद्र प्रशासन के कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करना है. साथ ही कर्मचारियों की मांगों और प्रशासन की वित्तीय स्थिति के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी अंतिम सिफारिशें देना भी इसकी जिम्मेदारी है.

ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 65% तक सैलरी बढ़ाने की मांग, ₹9000 ट्रांसपोर्ट अलाउंस का भी प्रस्ताव

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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