R Ashwin on Team India: पूर्व हिंदुस्तानीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने हिंदुस्तानीय टीम के लगातार व्यस्त शेड्यूल और खिलाड़ियों की चोट को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है. उनका मानना है कि अब समय आ गया है जब हिंदुस्तान को टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग-अलग टीमें तैयार करनी चाहिए. अश्विन ने साथ ही खिलाड़ियों की चोट के प्रबंधन को लेकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए हैं.
तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीम
अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए अश्विन ने कहा कि तीनों फॉर्मेट के लिए अलग टीम होने से खिलाड़ियों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है. हालांकि, जरूरत के मुताबिक एक-दो खिलाड़ी अलग-अलग फॉर्मेट की टीमों में शामिल हो सकते हैं.
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि टेस्ट, वनडे और टी20 के लिए अलग-अलग टीमें हों. इनमें एक-दो खिलाड़ियों का क्रॉस-पॉलिनेशन हो सकता है. खिलाड़ियों की चोट के प्रबंधन को लेकर कहीं न कहीं जवाबदेही तय होनी चाहिए.’
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वरुण चक्रवर्ती की चोट का दिया उदाहरण
अश्विन ने अपनी बात समझाने के लिए स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का उदाहरण दिया. चक्रवर्ती लंबे समय से चोट की समस्या से जूझ रहे हैं. इंग्लैंड दौरे के दौरान लगी चोट से वापसी के बाद उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के पहले टी20 मैच में मैदान पर वापसी की थी, लेकिन इसी मुकाबले में उन्हें एक बार फिर चोट लग गई.
इसके बाद चक्रवर्ती को अफगानिस्तान के खिलाफ बाकी मैचों से बाहर कर दिया गया. शुरुआत में उन्हें एशियन गेम्स के लिए हिंदुस्तानीय टीम के साथ जाने की उम्मीद थी, लेकिन बाद में ये योजनाएं भी बदल गईं. चोट के कारण वह एशियन गेम्स और वेस्टइंडीज के खिलाफ हिंदुस्तान की घरेलू सीरीज से भी बाहर हो गए.
अश्विन ने कहा कि चक्रवर्ती पिछले तीन-चार महीने से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में थे. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु प्रीमियर लीग (TNPL) के लिए चक्रवर्ती को रिलीज करने की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अश्विन ने कहा, ‘मुझे पता है कि वरुण चक्रवर्ती पिछले 3-4 महीने से NCA में थे. हम TNPL के लिए उनकी रिलीज की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन उन्हें रिलीज नहीं किया गया. उन्हें एक महीने में वापस आ जाना चाहिए था, लेकिन वह 2-3 महीने तक वहीं रहे.’
अश्विन ने खिलाड़ियों को भी दी जिम्मेदारी की सलाह
अश्विन ने यह भी कहा कि चोट से बचने के लिए सिर्फ सपोर्ट स्टाफ या मेडिकल टीम ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को भी अपनी ट्रेनिंग और एक्सरसाइज को लेकर सतर्क रहना चाहिए. उन्होंने अपने करियर का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब एक दशक पहले उन्हें ओलंपिक लिफ्टिंग के दौरान साइड स्ट्रेन की समस्या हुई थी. इसके बाद उन्होंने स्नैचिंग करना बंद कर दिया.
अश्विन ने कहा कि ओलंपिक लिफ्टिंग से खिलाड़ी की ताकत और पावर प्रोडक्शन बढ़ सकता है, लेकिन हर एक्सरसाइज हर खिलाड़ी के शरीर के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है. उन्होंने आगे कहा, ‘एक खिलाड़ी के तौर पर आपको भी देखना होगा कि आपकी ट्रेनिंग का तरीका सही है या नहीं. क्या मैं सही एक्सरसाइज कर रहा हूं? मुझे 2015 में ओलंपिक लिफ्टिंग के कारण साइड स्ट्रेन हुआ था. इसके बाद मैंने स्नैचिंग करना बंद कर दिया.’
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