यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस के खिलाफ जारी जंग में रोबोट सैनिकों की मदद से 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए और 3000 सैनिक मारे गए. इसके साथ-साथ रोबोट सैनिकों ने करीब 3,300 टन सामानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भी पहुंचाया. अगर रूस का दावा सही है तो इसका संकेत ये है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब जमीनी रोबोट युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं.
यूक्रेन की थर्ड आर्मी कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवरहित जमीनी वाहनों यानी सुसाइड रोबोट का इस्तेमाल किया. इन रोबोट को ड्रोन की मदद से रूसी सेना के कब्जे वाले इलाकों के भीतर पहुंचाया गया और फिर उन्हें अलग-अलग सैन्य अभियानों में लगाया गया. कॉर्प्स का कहना है कि कई इलाकों में रोबोट ने सैनिकों की जगह खतरनाक काम किए.
क्या है ऑपरेशन विवाल्डी?
- यूक्रेन के मुताबिक, ‘ऑपरेशन विवाल्डी’ (Operation Vivaldi) डोनेट्स्क क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में चलाया गया सैन्य अभियान है. इसका मकसद रूसी घुसपैठ को रोकना और कुछ इलाकों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करना था.
- यूक्रेनी कमांडर आंद्री बिलेत्स्की ने इस अभियान में ड्रोन और जमीनी रोबोट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को आधुनिक युद्ध की नई दिशा बताया है.
कैसे काम करते हैं सुसाइड रोबोट?
- सुसाइड रोबोट असल में छोटे मानवरहित जमीनी वाहन (Robot Soldiers) होते हैं. इन्हें ऑपरेटर दूर बैठकर नियंत्रित कर सकता है. रोबोटों में विस्फोटक लगाए जाते हैं, जिन्हें लक्ष्य के पास पहुंचाकर विस्फोट किया जाता है।
- यूक्रेन में ऐसे रोबोटों को भारी ड्रोन की मदद से रूसी मोर्चे के पीछे पहुंचाने की रणनीति भी सामने आई है. रोबोट में लगे कैमरे आसपास का दृश्य दिखाते हैं. इससे सैनिकों को सीधे खतरनाक इलाके में भेजने की जरूरत कम हो सकती है.
जानकारी के लिए बता दें कि यह पूरी तरह ‘अपने आप लड़ने वाले रोबोट’ नहीं है, इन्हें चलाने, लक्ष्य चुनने और कार्रवाई का फैसला लेने में इंसान की भूमिका होती है.
- यूक्रेनी थर्ड आर्मी कॉर्प्स के अनुसार, रोबोट का इस्तेमाल केवल हमले के लिए नहीं हुआ. इन्हें गोला-बारूद और दूसरे जरूरी सामान की सप्लाई, घायल सैनिकों को निकालने और बारूदी सुरंग वाले इलाकों में रास्ता साफ करने जैसे कामों में भी लगाया गया.
- कॉर्प्स का दावा है कि कुछ इलाकों में जमीनी रोबोट ने करीब 30 किलोमीटर रास्ते साफ किए. यूक्रेन का कहना है कि इससे सैनिकों का जोखिम कम हुआ.
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रोबोट्स की सेना तैयार कर रही यूक्रेन!
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,रूस-यूक्रेन जंग में लाखों सैनिक मारे गए है. हालांकि, संख्याओं को लेकर कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं है. ऐसे में,यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में सैनिकों की जान बचाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है.
- पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने ल्वीव में हुए आईटी एरीना कार्यक्रम में ‘आर्मी ऑफ रोबोट्स’ शुरू करने का ऐलान किया है. इस योजना के तहत ऐसी मशीनें तैयार की जाएगी, जो युद्ध के दौरान उन कामों को कर सकें, जिनमें सैनिकों की जान को सबसे ज्यादा खतरा रहता है.
यह पहला मौका नहीं है जब जंग में यूक्रेन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा. यूक्रेन ने 2022 में आर्मी ऑफ ड्रोन अभियान शुरू किया था. जिसके बाद उसका ध्यान जमीन पर चलने वाले रोबोट पर है.
- इन रोबोट का इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जा सकता है. मसलन, घायल सैनिकों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाना, गोला-बारूद और जरूरी सामान पहुंचाना, दुश्मन के इलाके की निगरानी करना और बारूदी सुरंगों वाले खतरनाक इलाकों में काम करना..
- रोबोट को केवल हमला करने वाली मशीन के तौर पर तैयार नहीं किया जा रहा. यूक्रेन ऐसी तकनीक विकसित करना चाहता है, जो युद्ध के दौरान सैनिकों का जोखिम कम कर सके.
- मसलन, अगर किसी इलाके में गोलीबारी हो रही है और वहां सामान पहुंचाना मुश्किल है, तो रोबोट वहां भेजा जा सकता है. इसी तरह घायल सैनिक को निकालने के लिए भी मानव रहित वाहन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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हिंदुस्तान भी बना रहा है सुसाइड रोबोट
- जमीनी रोबोट की तकनीक पर सिर्फ यूक्रेन ही काम नहीं कर रहा है. उसके अलावा रूस, चीन, इजराइल और हिंदुस्तान भी इस तकनीक पर काम कर रहा है.
- हिंदुस्तान में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO भी मानवरहित जमीनी वाहनों (सुसाइड रोबोट) के लिए एआई आधारित नियंत्रण, स्वचालित नेविगेशन, सेंसर और स्वार्म तकनीक पर काम चल रहा है. डीआरडीओ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक सुसाइड रोबोट को निगरानी, विस्फोटक पहुंचाने और खतरनाक उपकरणों को दूर से नष्ट करने जैसे कामों के लिए डिजाइन किया जा रहा है.
- रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान ने ‘एक्सप्लोडर’ नाम का एक ऐसा रोबोट वाहन तैयार किया है, जो ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने में सक्षम है. इसके साथ-साथ, निगरानी करने और विस्फोटकों से जुड़े खतरनाक काम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
- रूस में रोबोट सैनिकों का इस्तेमाल हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए हो रहा है. चीन ऐसे रोबोट पर काम कर रहा है, जो जंग के दौरान हथियार ले जाने और आम सैनिकों के साथ मिलकर काम करने में सक्षम हो तो वहीं, इजराइल रोबोट से चलने वाले लड़ाकू वाहन डेवलप कर रहा है.
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