Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का समय है. इस दौरान लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करते हैं. मान्यता है कि इन कर्मों से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते है. पितृ पक्ष के दौरान तर्पण और श्राद्ध शब्दों का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है. कई लोग इन दोनों को एक ही मानते हैं, जबकि धार्मिक परंपराओं में इनके स्वरूप और विधि में अंतर है. तर्पण में मुख्य रूप से जल अर्पित किया जाता है, जबकि श्राद्ध में संकल्प, पिंडदान, भोजन और दान आदि कर्म शामिल हो सकते हैं. आइए जानते हैं तर्पण और श्राद्ध में क्या अंतर है.
श्राद्ध क्या होता है?
‘तर्पण’ का अर्थ तृप्त करना या संतुष्ट करना होता है. तर्पण में पितरों को जल अर्पित किया जाता है. इसमें आमतौर पर जल के साथ काले तिल और कुश का इस्तेमाल किया जाता है. तर्पण करते समय पितरों का ध्यान करके उनकी तृप्ति और शांति की प्रार्थना की जाती है. सरल शब्दों में समझें तो तर्पण में मुख्य रूप से जल अर्पित करके पितरों को याद किया जाता है.
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