सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर हिंदुस्तान के चर्चित पुलिस एनकाउंटर में से एक है. मामला 2005 में सोहराबुद्दीन शेख की मौत, उनकी पत्नी कौसर बी की हत्या और 2006 में उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की मौत से जुड़ा है. इसे अभियोजन पक्ष ने फर्जी एनकाउंटर और कथित आपराधिक साजिश का मामला बताया था. हालांकि, मुकदमे में आरोप साबित नहीं हो सके और सभी 22 आरोपी बरी हो गए. मई 2026 में बंबई हाईकोर्ट ने भी इन्हें बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा.
क्या था सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर ?
23 नवंबर 2005 के आसपास सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीराम प्रजापति हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रहे थे.पीड़ितों का आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक लग्जरी बस से उतारकर हिरासत में लिया और गुजरात ले गए. बाद में पुलिस ने यह जानकारी दी कि सोहराबुद्दीन अहमदाबाद के पास एनकाउंटर में मारा गया. अभियोजन का आरोप था कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं यह फर्जी एनकाउंटर था. पीड़ित पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि इसके बाद कौसर बी की भी हत्या कर दी गई और उनके शव को जला दिया गया. बाद में तुलसीराम प्रजापति की मौत दिसंबर 2006 में गुजरात-राजस्थान सीमा के पास पुलिस एनकाउंटर में हुई. हालांकि अभियोजन ने इसे भी साजिश का हिस्सा बताया था. इसी वजह से मामले की सीबीआई जांच हुई थी.
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर की जांच CBI ने की
सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर पर अभियोजन के आरोपों के बाद इसकी जांच गुजरात सीआईडी कर रही थी. बाद में सुप्रीम कोर्टने जांच CBI को सौंपने और मुकदमे को गुजरात से मुंबई ट्रांसफर करने का निर्देश दिया. 2013 में सोहराबुद्दीन और तुलसीराम से जुड़े मामलों को भी एक साथ जोड़ दिया गया. CBI ने कुल 38 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. बाद में 22 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई, हालांकि 2018 में सभी आरोपी बरी हो गए. इसकी वजह यह थी कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित नहीं कर सका.
बंबई हाईकोर्ट ने क्या कहा?
7 मई 2026 को बंबई हाईकोर्ट ने विशेष CBI अदालत के 2018 के फैसले को बरकरार रखते हुए 22 आरोपियों की बरी कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्यतः परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और उसमें कई कड़ियां टूटी हुई थीं. अदालत ने यह भी कहा कि सोहराबुद्दीन और कौसर बी के कथित अपहरण और अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं थे. हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई नायबुद्दीन शेख ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
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